वो ख्वाबों के दिन

Posted on: 03-02-2019

बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम (पिछले रविवार से आगे का धारावाहिक, प्यार और आशिकी के ऊपर, भाग- 18) मैंने उस लिफाफ़े को एक बार फिर दिल से लगाया और बड़ी सावधानी से उसे खोला. मेरे जज़्बात हिलोरें ले रहे थे। मुझे पहले भी ऐसे पत्र लिखवाने और पढऩे का अनुभव था जो मैं दोस्तों के लिए करता था। पर अपने लिए एक अद्भुत अहसास के साथ मैंने, एक गहरी सांस लेकर सुनहरे रंग से लिखा पत्र हाथ में लिया और धड़कते दिल से अपने प्यार का पहला प्रेम पत्र मैंने पढऩा शुरू किया .... मेरी जान बल्कि मैं कहूंगी मेरी जान से भी ज़्यादा प्यारे नम्मो, असीम प्यार। मुझे आज तुमपर इतना प्यार आ रहा है कि यदि तुम सामने होते तो मैं ना जाने क्या कर बैठती । जानते हो यह मेरे द्वारा तुम्हें लिखा पहली खत नहीं है । इससे पहले भी कई बार मैंने तुम्हें कई खत लिखे और फाड़ दिए । इससे पहले लिखे वे प्यार भरे मेरे सारे ख़त मुहब्बत की कब्र में आज भी दफऩ हैं जिसके सारे लफ्ज़ मेरे दिल की उस समय की हालत को बयान करते थे। वे ख़त मैंने तुम्हें तबसे लिखने शुरू किये जब मैं पहली बार तुम्हारी अदाओं पर मर मिटी थी । अब जाकर तुमने अपनी मुहब्बत का इज़हार किया है पर मैं कितने पहले से तुमसे मुहब्बत करती रही हूं । तुम इस बात से खुद से भी इंकार करते रहे कि तुम मुझसे इश्क करते हो लेकिन मैं बख़ूबी जानती हूं कि पहली बार तुमने मुझे कब प्यार की नजऱ से मुझे देखा? यह सब अचानक हुआ था एक दिन जब तुम मेरे अंदर की कोई बात देखकर हैरान हो उठे थे। तुझे चाहते हैं बेइंतेहा पर कहना नहीं आता मोहब्बत का हमें इज़हार करना नहीं आता जि़न्दगी में तुम आ गए हमारी जि़न्दगी बन कर अब तेरी जुदाई में हमें जि़ंदा रहना नहीं आता मैंने उस दिन भी तुम्हें एक पत्र लिखा था । उसमे मैंने कहा था, तुम भी मुझसे प्यार करते हो। मैं उस दिन से पहले यह बात नहीं लिख सकती थी, जबकि मैं उससे पहले बारह ख़तों में तुम्हारे लिए अपनी मुहब्बत को लिख बयां कर चुकी थी। हर खत लिखती और सोचती तुम्हें दूं, वह दिन गुजऱता, नया खत तुम्हें लिखा जाता और दिल जलाकर पुराना खत फाड़ देती। (एक युवा दिल की अनोखी दास्तान- अगले रविवार क्रमश:) मधुर चितलांग्या, संपादक , पूरब टाइम्स, भिलाई