कैरियर मंत्र

Posted on: 03-02-2019

आप विश्वसनीय बनेंगे तो लोग आपसे जुड़ना पसंद करेंगे ! कुछ अर्से पहले मेरा एक स्कूल के कार्यक्रम में जाना हुआ था . देश भक्ति पर कार्यक्रम था . उसमे एक वक्ता ने कहा कि यदि देश में कोई गद्दार नहीं होता तो हमें आज़ादी बहुत पहले मिल जाती , बल्कि मुझे लगता है कि शायद हम गुलाम ही नहीं होते . साथ में ही एक बच्चा बैठा था . उसने अपने पापा से पूछा कि पापा क्या आज़ादी के बाद सब गद्दार खत्म हो गए ? पिता ने कहा , नहीं, जैसे अच्छे लोग होते हैं वैसे ही गद्दार लोग हर काल -खंड में रहते हैं. बच्चे ने आगे पूछा ,फिर वे कहां हैं , कैसे दिखते हैं , उन्हें पहचानें कैसे, उनसे कैसे बचा जा सकता है ? पिता ने कहा , बेटे , अभी तुम छोटे हो , बड़े होगे तो तुम्हारा कई गद्दारों से पाला पड़ेगा , वे बेहद करीबी बनने की कोशिश करते हैं और बन भी जाते हैं , वे जब तुम्हें अपने लाभ के लिए धोखा देंगे तब ही तुम उन्हें पहचान पाओगे . उनसे बचने का सिर्फ एक तरीका है , किसी पर ज़्यादा विश्वास मत करो . मुझे पिता की बातें बेहद बुरी लगी . एक बार इच्छा हुई कि मैं बीच में बोल उठूं क्योंकि मेरा ये मानना था कि आप जब किसी पर विश्वास करेंगे तभी तो अगला आपके विश्वास को निभा कर दिखायेगा. मैंने किसी प्रकार अपने को उनके बीच बोलने से रोका. परन्तु कल एक घटना ने मुझे झकझोर दिया . हमारे साथ काम करने वाले दो पत्रकारों ने चंद सौ रुपयों की खातिर अपना ईमान खराब कर दिया . हमने उन्हें आगे बढ़ाने में बहुत मदद की . उनके क्षेत्र की, अन्य रिपोर्टरों द्वारा बनाई गई , रिपोर्ट के क्रेडिट में भी उन्हें स्थान दिया . उनके क्षेत्रों , पुलिस थानों तथा अन्य पत्रकारों के बीच उनके बेहतर अस्तित्व बनाने में हमारा एडिटोरियल स्टाफ लगातार मेहनत करते रहा . मुझे उनके उज्जवल भविष्य पर पूरा विश्वास था पर चंद सौ रुपयों के लाभ ने उन्हें अपने खुद के ट्रेड , अपने खुद की विश्वसनीयता से गद्दारी करने मजबूर कर दिया . मुझे अनेक लोग कहा करते थे कि सस्ते पत्रकारों ने पत्रकारिता की कीमत ख़त्म कर दी है . लोग उन्हें ब्लैक मेलर , वसूलीबाज़ समझने लगे हैं . तब मैं शान से कहता कि हम लोग पत्रकारिता में नया ट्रेंड स्थापित करेंगे . अपने इस विश्वास की धज्जियां उड़ते देख कर मैं निराश हो गया था. अपनी इस निराशा के समाधान के लिए मैं अपने एक परिचित परिपक्व बुजुर्ग के पास गया . उन्होंने मुझे समझाते हुए कहा, विश्वसनीय केवल ईमानदार व्यक्ति ही बन सकता है . ईमानदारी का मतलब मजबूरी में ईमानदार बने रहना नहीं बल्कि जब गड़बड़ करने के सॉलिड अवसर आएं तब भी नीयत डोलने नहीं देना होता है . आप-हम जैसे लोग छोड़िये , यहां तक कि बड़े से बड़ा स्मगलर , डॉन , भ्रष्ट व्यक्ति भी अपने साथी और मातहत लोग ईमानदार चाहता है . आप अपने को अच्छा इंसान बनाये रखिये , आपकी विश्वसनीयता बढ़ेगी और अपने आप आपसे अच्छे लोग जुड़ते जायेंगे . खराब लोग छोटे-बड़े धोखे कर आपसे अलग होते जाएंगे .जैसे अच्छे लोग होते हैं वैसे ही गद्दार लोग हर काल -खंड में रहते हैं . मधुर चितलांग्या, संपादक, पूरब टाइम्स, भिलाई