हम तो हैं जैसे , वैसे ही रहेंगे

Posted on: 29-01-2019

कुछ अर्से पहले पढ़ा था कि रेल मंत्री पियूष गोयल ने बयान दिया था कि रेलवे में भी मोदी इफेक्ट दिखने लगा है यानी साफ़-सफाई रहना और समय पर चलना. मेरा मन दहल गया अप्रत्याशित रूप से ऐसे बदलाव की बातें सुनकर .पिछले हफ्ते मेरी काफी ट्रेवलिंग करना हुआ . दुर्ग स्टेशन के अंदर जाते ही टिकिट काउंटर वाले कवर्ड बरामदे में इस तरह से लोग सोये हुए थी कि बड़ी मुश्किल से सामान के साथ अंदर घुसते बना .अंदर पहुंचा तो कुछ आवारा कुत्तों से सामना हुआ . जान में जान आयी , चलो बदलाव आया है परन्तु स्टेशन ने अपना नेचुरल ढर्रा नहीं बदला है. फिर महीनों से उखड़े हुए टाइल्स के पहले जीआरपी पुलिस थाने के सामने गोबर करती गाय मिली . मज़ा आ गया गोमूत्र से शुद्धिकरण का दृश्य देखकर . बाद में पता लगा कि ट्रेन 2 नं प्लेटफ़ॉर्म में आयेगी. प्लेटफॉर्म 2 पर ट्रेन का इंतज़ार कर रहा था . पटरियों पर अठखेलियां करते बिल्ली के आकार के चूहे दिखाई दिए. मन प्रसन्न हो गया कि विदेशी अब आकर देखें , जब भारत में प्लेटफॉर्म के बेचारे चूहे इतने हेल्थी हैं तो आम जनता कितनी अधिक होगी ? रेल की लगातार चलती और समय बदलती घोषणा में पहले बताया गया था कि ट्रेन आधा घंटा लेट है पर धीरे धीरे इंतज़ार करते दो घंटे से भी अधिक हो गया. यह मेरे जैसे कितने ही लोगों को बिना काम टल्ले खाने के अतीत के दिनों की याद दिला गया. ट्रेन रुकी , टीसी नीचे उतरा , उसके चारों तरफ लोग भिनभिनाते दिखे. रिज़र्वेशन के लिए कोई पहचान-रूतबा, कोई पैसे दिखाते तो कोई मिन्नतें करते दिखा. मेरी सीट पर एसी कोच का अटेंडेंट नए कागज़ के पैकेट में , गंदे धुले परन्तु प्रेस किये हुए चद्दर इत्यादि दे गया . टॉयलेट गया तो वहां नॉनवेज शायरी और चित्रकारी , टेलेफोन नंबर के साथ ऐसे जगहों पर दिखी, जहां से सीधे नजऱ आएं . मैं लेटा ही था कि सीट के नीचे कुछ कॉकरोच और छोटे आकार के चूहे इत्मिनान से घूमते दिखे. फिर वेंडरों का चाय, ठंडा ,ऑमलेट,खाना इत्यादि के लिए चिल्ला - चिल्ला कर आना-जाना अहसास दिलाता रहा कि अकेले सफर करने वाले अकेलापन महसूस नहीं कर सकते. बाज़ू कूपे पर बैठी सरदार फैमिली की ज़ोर-ज़ोर से गपशप , फिर रात एक बजे आये नागपुर स्टेशन पर नए आने वाले यात्रियों की ऊंची आवाज़ में चिल्लाहट के अलावा नींद में खर्राटे लगाते कुछ लोगों की ध्वनि के बीच कब नींद आ गयी पता ही नहीं लगा ? सुबह थोड़ा फ्रेश होने के इरादे से भोपाल के फस्र्ट क्लास रिटायरिंग रूम में पहुंचा . देखकर लगा कि लोग गलत कहते हैं कि चीन की जनसंख्या भारत से ज़्यादा है. वहां का चौकीदार कह रहा था कि यदि टिकिट नहीं है तो इस एसी रूम में बैठने का बीस रुपया लगेगा. टिकिट दिखाकर जल्दी से मुंह धोने अंदर जा रहा था तो वहां के अटेंडेंट ने रोका. वह बोला, पेशाब के दो रूपये, शौच के पांच और नहाने के दस रूपये लगेंगे. मैंने गंभीरता से पूछा , यदि कोई शौच के पैसे दे और अंदर अलग से चुपचाप पेशाब भी कर ले. वह बोला, मैं तो चाहता हूँ कि मुंह धोने और कुल्ला करने के पैसे भी ले लूं क्योंकि लोग बुद्धू बनाकर अंदर चले जाते हैं और निपट कर आ जाते हैं. मैंने इरादा बदला और स्टेशन से बाहर निकलने लगा कि एक ऑटो वाला मेरे सामान को पकड़कर , मुझे अच्छे होटल में ले जाने की जि़द करने लगा . मैं उससे किसी तरह जान बचाकर प्रीपेड ऑटो सर्विस काउंटर की तरफ भागा. सच कहूं तो रेल मंत्री पियूष गोयल के चपलूसी भरे के मंत्र के फेल होने के दु:ख की जगह मैंने यात्रा का भरपूर आनंद उठाया.