केवल विपक्षी एकता दिखा, मोदीजी को अगले चुनाव में वापसी से रोकना असंभव है

Posted on: 21-01-2019

कोलकाता में विपक्ष ने एक ही बात पर एकता बनाई रखी थी . वह बात थी मोदीजी का विरोध करना . इसके अलावा ऐसा कोई बड़ा व कॉमन मुद्दा , उन लोगों के पास नहीं था जिससे वे लोग मोदी सरकार पर हल्ला बोलकर , उसकी बक्खियां उधेड़ देते . हमारे एक साथी ने कहा तो दूसरा साथी बोला , और दूसरी मुद्दे की ज़रूरत भी नहीं थी . हमें तो कोलकाता में हुई ममता बनर्जी की विशाल जनसभा 1977 की याद ताजा करा रही थी. उस समय रामलीला मैदान में इंदिरा गांधी के विरुद्ध इतनी ही जबर्दस्त जनसभा हुई थी. विरोधी दलों के नेता दहाड़ रहे थे और इंदिरा का सिंहासन डोल रहा था . अब तीसरा साथी बोला , विपक्ष , मोदीजी का कुछ भी नहीं बिगाड़ पायेगी सिवाय इस बात के कहने के कि हम सब मिलकर उन्हें हरा देंगे. यदि आज भी सर्वे कराया जाये तो जनता की नजऱ में अकेले मोदीजी की छवि उन सब पर भारी पड़ती है . जबकि इमरजेंसी के बाद , इंदिरा गांधी को , आम जनता , तानाशाह जैसा मानने लगी थी . मोदीजी के बारे में , इस तरह की बात को अभी संयुक्त विपक्ष जनता के दिमाग में घुसा नहीं पाया है . अब मैं भी बोल पड़ा , पिछले चुनाव में नरेंद्र मोदी, भाजपा व विपक्ष ने कैसे मनमोहन सरकार के खिलाफ माहौल बनाया था? उसे दो टूक अंदाज में भ्रष्ट करार दिया था . मनमोहन सिंह की इमेज बनाई गई कि वे मौनी बाबा है. उनकी सरकार नीतिगत लकवे की मारी है. सभी विरोधी पार्टियों, मीडिया, सिविल सोसायटी का जनता के बीच चौतरफा हल्ला बना था कि मनमोहन सरकार भ्रष्ट है. वह फैसले न ले सकने वाले लकवे की मारी है. तभी नरेन्द्र मोदी , आन्धी की तरह बढ़कर , सत्ता पर सवार हो पाये . केवल राफेल मुद्दे को छोड़ दें तो अब के विपक्ष की कोई भी पार्टी , मोदी सरकार पर ना तो ज़बर्दस्त हमला कर पायी है और ना ही साक्ष्य के साथ कोई तथ्य उजागर कर पायी है . इसलिये भ्रष्टाचार को मुख्य मुद्दा बना पाना असंभव सा लगता है . ऐसे में अब लगातार मोदी सरकार द्वारा आखिरी तीन महीनों में सबकुछ लुटा देने, सबको खुश करने की रणनीति करने पर , उन्हें राजनैतिक फायदा मिलने की ज़्यादा संभावना दिखती है . अब पत्रकार माधो बोले , इस वक़्त मोदी-शाह और योगी आदित्यनाथ ने कुंभ के मेले तक से उम्मीद पाली हुई है कि उसके तामझामों से हिंदुओं का दिल जीत लेगें. मोदी-शाह-योगी कुंभ के माहौल को दो महीने बाद यूपी में चुनावी माहौल में परिवर्तित होने की आस लिए हुए हैं. सच ही है , यदि उन्होंने यूपी साध लिया तो , सत्ता वापसे से उन्हें कोई नहीं रोक सकता है ।