बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम (पिछले रविवार से आगे का धारावाहिक, प्यार और आशिकी के ऊपर, भाग- 17)

Posted on: 20-01-2019

बिस्तर पर पडऩे के बाद मुझे रह-रहकर तुम्हारा खय़ाल आ रहा था। हम और तुम एक दूसरे से बिलकुल अलग थे। तुम मॉडर्न बिंदास और बातूनी पर मैं पढ़ाकू और अंतर्मुखी। तुम खुलकर हंसती और मैं बस मुस्कुराते रहने वाला। हां, यह बात कॉमन थी कि हम दोनों एक दूसरे को बहुत अधिक चाहते हैं। बहुत रात हो गयी पर मुझे नींद नहीं आ रही थी।मैं खुद से कह उठा ... तुम्हारी याद का दरिया और तन्हा दिल की कश्ती दूर फ लक तक बस यादें, न कोई जमीन न बस्ती दूसरे दिन देर से नींद खुली। घबराकर मैं तुरंत तैयार होकर तीर की तरह कॉलेज की तरफ निकला. मां पीछे से नाश्ते के लिए आवाज़देती रह गयी पर मुझे सुध-बुध कहां थी। बस , तुमसे मिलने का एक लम्हा भी चूकना नहीं चाहता था। कॉलेज लेट पहुंचा तो पता चला कि तुम्हें तेज़ बुखार है परन्तु तुमने अपनी बेस्ट फ्रेंड के साथ एक बंद लिफाफा मुझे भिजवाया। जैसे ही वह खत मुझे मिला मैं रोमांचित हो उठा। उसे तुरंत छिपा लिया, भयभीत था कि कोई देख ना ले। मैं धीरे से एक पीरियड ख़त्म होने के बाद क्लास से खिसक कर बगीचे में चला गया और धड़कते दिल से उस लिफ़ाफ़े को बाहर निकाल कर अपने दिल से लगा लिया। पहले प्यार का पहला खत जो था। फिर गाल और आंखों से लगाते हुए उसे होठों से लगाया। उसकी खुशबू इतनी अद्भुत थी कि मैं महसूस कर रहा था कि उसमे तुम्हारी पूरी महक इसमें समा गयी है। मैं यह सोच कर दीवाना हो रहा था कि तुमने इसे भेजने के पहले अपने दिल से ज़रूर लगाया होगा। हाथ से लिखा नहीं था उनके दिल से आया है जो बातें कहनी सुननी थी वो जज़्बात लाया है जुदाई में भी मिलन का मीठा अहसास लाया है प्यार का पहला खत पढऩे में वक़्त तो लगता है मैंने उस लिफाफे को एक बार फिर दिल से लगाया और बड़ी सावधानी से उसे खोला. मेरे जज़्बात हिलोरें ले रहे थे। मुझे पहले भी ऐसे पत्र लिखवाने और पढऩे का अनुभव था जो मैं दोस्तों के लिए करता था। पर अपने लिए एक अद्भुत अहसास के साथ मैंने, एक गहरी सांस लेकर सुनहरे रंग से लिखा पत्र पढऩा शुरू किया। (एक युवा दिल की अनोखी दास्तान- अगले रविवार क्रमश:)