जि़न्दगी हर स्टेज पर व्यक्ति की सोच बदल देती है इसलिये मनचाही सफलता के लिये खुद पर भी नजऱ रखें

Posted on: 19-01-2019

आज मैं आप लोगों को एक कहानी के माध्यम से अपनी बात कहना चाहता हूं. एक व्यक्ति एक अपार्टमेंट की आठवीं मंजि़ल के फ्लैट पर रहता था . एक बार वह जब बिल्डिंग में पहुंचा तो उसने देखा कि लिफ्ट खराब हो गई है . उसने तय किया कि वह सीढिय़ों के सहारे ऊपर चढ़ेगा . दो मंजि़ल तक वह अपने सामान के साथ हंसते, खिलखिलाते , बिना कुछ सोचे समझे चढ़ गया . उसके बाद उसे समझ आया कि उसे बचत 6 मंजि़लें चढऩी हैं . तो उसने अपना सामान वहीं रख दिया कि अगले दिन वह सामान लेकर चले जायेगा . अब वह उत्साह के साथ अपनी रफ्तार बढ़ाते हुए अपनी मंजि़ल की तरफ चल पड़ा . चौथे माल तक पहुंच कर , उसने पाया कि वह अपनी बेतरतीबी के कारण थकने लगा है तो अब वह सावधानी के साथ , धीरे धीरे ऊपर चढऩे लगा ताकि उसकी थकावट कम से कम रह जाये . छटवी मंजि़ल तक वह काफी थक गया था , उसके पैर जवाब देने लगे थे पर वह धीरे धीरे रेलिंग का सहारा लेकर अपने अनुभव के साथ आगे चढऩे लगा क्योंकि अब लक्ष्य काफी करीब आने वाला था. जब वह आठवे माले पर पहुंचा तो उसने देखा कि दूसरे सभी फ्लैट खुले हैं परंतु वह जिस फ्लैट में जाना चाहता था उसकी चाबी वह अपने सामान के साथ भूल आया है . साथियों , इस कहानी की ही तरह इंसान का जीवन भी होता है। 20 साल की उम्र तक हर व्यक्ति बेपरवाह , हंसते खिलखिलाते , बिना कुछ सोचे अपने बचपन से जवानी में कदम रखता है . फिर उसके बाद वह अपने सपनों व लक्ष्य के लिये इतना उत्साहित होता है कि वह लगभग भागते हुए आगे बढ़ता है . चालीस साल की उम्र में एक ठहराव आ जाता है जिससे वह अपनी रफ्तार कम कर , निश्चित सोच के साथ आगे बढ़ता है . साठ साल की उम्र में अनुभव के साथ एक ठहराव आ जाता है , उसे जीवन के बारे में पूरी समझ आ जाती है . आगे चलकर एक ऐसी स्थिति आ जाती है कि वह जान जाता है कि उसने अपने जीवन के असली सपने या लक्ष्य को 20 साल की उम्र में ही बाज़ू रख दिया था . तब उसे महसूस होता है कि बहुत कम समय बचा है, ऐसे में शिकायत करने के बजाए शांति से कुछ किया जाए ताकि उसे सुकून मिल सके लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है। साथियों मैं यह कहना चाहता हूं कि व्यक्ति को जि़ंदगी के हर स्टेज में थोड़ा रुककर , अपने बारे गम्भीरता से सोचना व विश्लेषण करना चाहिये क्योंकि तब भी वह अपने वास्तविक सोच को जि़ंदा रखकर उस दिशा में आगे बढ़ सकता है . वर्ना अधिकतर बुज़ुर्ग अपने जीवन में बहुत सारी की जा सकने वाली चीज़ें ना करने का मलाल करते हैं . आप-हम , अपने आपको समय दें , अपने भीतर झांके और जीवन के अंतिम चरण में मलाल रखने से बच पायें , यही मेरी सदभावना और यही शुभकामना ...