कन्हैया कुमार देश द्रोही है या निर्दोष , अब यह हमारे द्वारा तय करने की ज़रूरत नहीं है ?

Posted on: 18-01-2019

जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के कन्हैया कुमार और उनके साथियों पर सरकार ने देशद्रोह का मुकदमा दायर कर दिया है और ऐसा ही एक मुकदमा असम के एक विद्वान हीरेन गोहैन, अखिल गोगोई और पत्रकार मंजीत मंहत पर पुलिस ने दायर किया है। इन दोनों मुकदमों में आरोप लगभग एक-जैसे हैं। एक में कश्मीर की आजादी और भारत के टुकड़े-टुकड़े करने के नारे लगाए गए थे और दूसरे में नागरिकता विधेयक का विरोध करते हुए असम के अलगाव और संप्रभुता की मांग की गई थी। ये दोनों मांगें ही नहीं, इनका विचार तक भत्र्सना के योग्य है। ऐसे विचार भारत की एकता और अखंडता के विरुद्ध हैं। इन विचारों का जितना जबर्दस्त खंडन किया जा सके, जरुर किया जाना चाहिए . हमारे एक साथी ने कहा तो दूसरा साथी बोला , तीन साल बाद कन्हैया कुमार को देशद्रोही करार देने वाली चार्जशीट अदालत में दायर हुई तो भला क्यों ? क्यों दिल्ली पुलिस को तीन साल लगे ? आम चुनाव से ऐन पहले क्यों आरोपपत्र बना? क्या यह एक राजनैतिक लाभ लेने की साजिश नहीं थी ? अब मैं बोला , शायद यह टाइमिंग , कन्हैया कुमार को सपोर्ट करने वाली पार्टियों के लिये नुकसानदायक व भाजपा के लिये फायदेमंद हो सकता है परंतु चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब कन्हैया को निर्दोष बताने वालों व उसे दोषी ठहराने वालों की ज़ुबानी कयास पर लगाम लगेगा . अब अदालत ही फैसला करेगी कि सचमुच कन्हैया एंड कम्पनी ने गलती की या नहीं ? यदि बिना पूरे ट्रायल के विपक्ष , कन्हैया को निर्दोष बताता है तो उसे, सचमुच , आम जनता के गुस्से का सामना करना पड़ सकता है और देश द्रोहियों के विरोध वाली जन-भावना का लाभ , भाजपा को मिल सकता है . अब पत्रकार माधो बोले , अफजल गुरु को शहीद का दजऱ्ा देने वाली बात महबूबा मुफ्ती ने भी कही थी परंतु भाजपा ने , उसे देशद्रोही मानने की जगह , उससे हाथ मिला लिया था . वास्तव में किसी के विचार, जब तक पक्के तौर पर राष्ट्र की अखंडता व सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाली , क्रियाशीलता की स्थिति में नहीं आती तब तक उस विचार को राष्ट्र विरोधी कहा जा सकता है परंतु उसे देश द्रोह की श्रेणी में रखना शायद उचित नहीं होगा . अनेक लोग कभी किसी भाषण में कुछ राष्ट्र विरोधी बातें कह देते हैं, वे लोग क्रोध में आकर या जोश में आकर अपना संतुलन खो बैठते हैं , वे अपनी छवि खराब कर लेते हैं। पर ज़्यादातर ऐसे लोग उनका गुस्सा ठंडा होने पर फिर हमारे साथ लौट आते हैं। क्या आपको पंजाब के मास्टर तारासिंह, मिजोरम के ललदेंगा और तमिलनाडु के अन्नादुरई के किस्से याद नहीं हैं ? मधुर चितलांग्या, संपादक, पूरब टाइम्स, भिलाई