RTE : दो साल से सरकार ने फीस नहीं दी, 50 गरीब बच्चों ने छोड़ा स्कूल

Posted on: 16-01-2019

रायपुर। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में पढ़ाई कर रहे गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों की सरकार फीस नहीं भर पा रही है। आलम यह है कि राज्य में पिछले दो साल से आरटीई के तहत फीस निजी स्कूलों तक नहीं पहुंची। ऐसे में इन बच्चों को निजी स्कूल भी बोझ मानने लगे हैं। रायपुर में ही बात करें तो इस साल करीब 50 से अधिक बच्चों ने स्कूल ही छोड़ दिया है।इन बच्चों ने स्कूल क्यों छोड़ा जिला शिक्षा अधिकारी इसके लिए जांच भी करवा रहे हैं। पिछले सालों में कई पालकों ने अपने बच्चों को नाम कटवा लिया है। मुफ्त की पढ़ाई के बाद भी आरटीई से पीछे हटने की वजह को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।प्रदेश में 60 करोड़ रुपये अभी तक निजी स्कूलों की फीस नहीं पटाई गई है। निजी स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि सरकार निजी स्कूलों को कोई रियायत नहीं देती, ऊपर से समय पर फीस नहीं मिलने से स्कूल चलाना मुश्किल हो जाता है।रायपुर में आरटीई के तहत अभी नौ करोड़ रुपये बाकी है। इनमें ज्यादातर पिछले साल की फीस बाकी नहीं है। आरटीई के तहत इस साल राज्य के प्राइवेट स्कूलों में करीब 37 हजार बच्चे पहुंचे हैं। इनकी पढ़ाई का पूरा खर्च सरकार को उठाना है। हालांकि आरक्षित सीटों मे से 54 फीसदी सीटें खाली रह गईं।फीस तय समय पर नहीं मिलने से कुछ स्कूल तो आरटीई से बचने की भी कोशिश में लगे रहते हैं। पिछले साल 2018 में रायपुर में कुल 8015 सीटें आरक्षित थीं। इनके मुकाबले 12616 आवेदन मिले थे। बिलासपुर में 3211, राजनांदगांव में 1582, रायगढ़ में 3054, जांजगीर-चांपा में 1539, दुर्ग में 2705 छात्रों को नर्सरी, केजी-1 और पहली में प्रवेश मिला था।