बोलने से झलकता हैं हमारा व्यक्तित्व

Posted on: 16-01-2019

मेरे एक मित्र अपने बेटी के लिए लड़का देखने गये। जाने से पहले उन्हें लड़के के घर-बार उसकी पढ़ाई,उसकी फोटो,उनका व्यापार इत्यादि सब एवन लगा। लौटकर उन्होन बताया कि लड़का इंजीनियर था दिखने में सुंदर था। परंतु जैसे ही हमने उससे बातचीत की उसमें कोई दम नही लगा और हमने बात आगे नही बढ़ायी। कहने का मतलब यह है कि हमारे बातचीत से हमारा व्यक्तिव दिखने लगता हैं। एक अंधा गांव के प्याऊ में लोगों को पानी पिला रहा था। एक व्यक्ति आया। बोला अबे अंधे,पानी पिला,मै जल्दी में हंू। अंधे ने कहा,लीजिए सैनिक महाशय,फिर एक आदमी ने उनसे कहा अंधे महाराज जल्दी से पानी दो। अंधा बोला,लीजिए मंत्री महोदय,पानी पीजिए। फिर एक आदमी आया बोला,सूरदास जी मुझे शीघ्र पानी पिलानेे की कृपा करेंगे। अंधा बोला,छाया में बैठिये राजन,शीतल जल आपकी सेवा में प्रस्तुत है। एक मुसाफिर ने पूछा,बाबा,आपने उनको कैसे पहचाना? अंधा बोला उनकी बोलचाल से मुझे उनका व्यक्तित्व पता लग गया था। कितनी जबर्दस्त बात है। अपनी बोलचाल भाषा-शैली सुधार कर हम अपने व्यक्तित्व पर चार-चांद लगा सकते हैं। एक काम्फे्रस हाल में यदि आप कुछ अजनबियों को बातचीत करते सुने तो आपको अंदाजा लग जाता हैं कि कौन लड़ाकू है,कौन बुद्धिमान या कौन नासमझ है। अच्छी भाषा का उपयोग कर शैली व अंदाज बेहद खूबसूरत बना सकते हैं। आप ऐसा जरूर करेंगे,इस सद्भावना के साथ यह अंक समर्पित।