राष्टट्रगान से सिंध हटा, नॉर्थ-ईस्ट शामिल कराना चाहते हैं कांग्रेस सांसद रिपुन, लाएंगे प्राइवेट मेंबर बिल

Posted on: 16-01-2019

नई दिल्ली। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद रिपुन बोरा की मांग है राष्ट्रगान से सिंध शब्द हटाकर उसकी जगह पर नॉर्थ-ईस्ट को जोड़ा जाए। उन्होंने इसके लिए प्राइवेट मेंबर बिल तैयार किया है। पिछले हफ्ते समाप्त हुए संसद के शीतकालीन सत्र में बिल को लिस्ट भी किया गया था लेकिन राज्यसभा की कार्यवाही शोर की वजह से स्थगित होने से यह पेश नहीं हो पाया। सांसद रिपुन बोरा का कहना है कि अब वह अगले सत्र में इसे पेश करने की कोशिश करेंगे। बता दें कि विभाजन के बाद सिंध क्षेत्र पाकिस्तान के हिस्से चला गया है।

उधर, रिपुन ने कहा कि मेरा प्राइवेट मेंबर बिल राष्ट्रगान जनगण मन में बदलाव को लेकर है। यह अभी इस तरह है- जनगण मन अधिनायक जय है भारत भाग्य विधाता, पंजाब सिंध, गुजरात मराठा । लेकिन मैं चाहता हूं कि यह पंजाब नॉर्थ ईस्ट गुजरात मराठा हो। उन्होंने कहा कि रविंद्रनाथ टैगोर के कंपोज किए हुए गीत को पहली बार 27 दिसंबर 1911 में गाया गया। तब यह एंथम उस वक्त के भारत के कंपोजिशन को दिखाता है। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 24 जनवरी 1950 में कॉन्स्टिट्यूशन असेंबली में स्टेटमेंट दिया कि जनगण मन भारत का राष्ट्रगान है। अगर कभी जरूरत महसूस की गई तो इसके शब्दों में सरकार बदलाव कर सकती है। कांग्रेस सांसद ने कहा कि आजादी के बाद सिंध पाकिस्तान में चला गया। साथ ही राष्ट्रगान में भारत के एक अहम हिस्से नॉर्थ ईस्ट का कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने कहा कि असम, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम और मिजोरम से मिलकर बना नॉर्थ ईस्ट सामरिक नजरिए से भी अहम है और बर्मा, भूटान, चीन और बांग्लादेश का बॉर्डर लगा होने से संवेदनशील भई है। उन्होंने कहा कि ज्यादातर मामले में नॉर्थ ईस्ट के लोग देश के दूसरे हिस्सों से खुद को अलग-थलग महसूस करते हैं क्योंकि यहां के कई पहाड़ी इलाकों में अभी भी आसानी से नहीं पहुंचा जा सकता। कांग्रेस सांसद ने कहा कि आजादी के आंदोलन में नॉर्थ-ईस्ट के लोगों का भी अहम योगदान रहा इसलिए राष्ट्रगान में बदलाव कर उसमें नॉर्थ-ईस्ट को जगह दी जानी चाहिए ताकि राष्ट्रगान मौजूदा भारत का सही कंपोजिशन दिखाए।