दान , तिल गुड़ व्यंजन और पतंगबाजी का त्यौहार है मकर संक्रांति

Posted on: 13-01-2019

पूरब टाइम्स न्यूज,भिलाई। मकर संक्रांति हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है जो जनवरी के महीने में 14  तारीख को मनाया जाता है। पूरे भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में मकर संक्रांति के पर्व को अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। आंध्रप्रदेश, केरल और कर्नाटक में इसे संक्रांति कहा जाता है और तमिलनाडु में इसे पोंगलपर्व के रूप में मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में इस समय नई फसल का स्वागत किया जाता है और लोहड़ी पर्व मनाया जाता है, वहीं असम में बिहू के रूप में इस पर्व को उल्लास के साथ मनाया जाता है। पौष मास में जब सूर्य मकर राशि पर आता है जब इस पर्व को मनाया जाता है। इस दिन पतंग उड़ाने का भी बहुत महत्व होता है . कई जगहों पर पतंगबाज़ी के आयोजन किये जाते हैं . वैज्ञानिक मानते है कि जब हम पतंगबाजी करते है छत पर या खुले आकाश के नीचे तो हम पर  किरणे सीधी पड़ती है क्योकि इस दिन   सूर्य एक गोलाद्र्ध से  दूसरे गोलाद्र्ध की यात्रा  करने के कारण सूर्य की किरणों में सकारात्मक औषधीय  गुण होते है जिससे हमारी सेहत पर अच्छा असर पड़ता है .  इससे हमारे रोगो का निवारण होता है . वैसे तो इस दिन कई चीजें खाई जाती हैं, जैसे मूंगफ ली, दही चुड़ा, गुड़, तिल के लड्डू और खिचड़ी। लेकिन तिल और गुड़ का खास महत्व होता है . इस दिन सुबह जल्दी उठकर तिल का उबटन कर स्नान किया जाता है। इस समय सुहागन महिलाएं सुहाग की सामग्री का आदान प्रदान भी करती हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे उनके पति की आयु लंबी होती है। महाराष्ट्र में लोग एक दूसरे को तिल गुड़ देकर मीठा मीठा बोलने की दुआ देते हैं।
जानिये , इस बार की मकर संक्रांति क्यों है बहुत खास 
मकर संक्रांति  लगभग हर साल 14 जनवरी को आती है. लेकिन इस बार 2019 में यह 15 जनवरी  को पड़ रही है. इसी कारण प्रयागराज में हो रहा कुंभ भी इस साल 15 जनवरी से शुरू हो रहे हैं. साथ ही पहला स्नान भी 14 नहीं बल्कि 15 जनवरी को होगा। मकर संक्रांति के दिन सूर्य धनु राशि को छोड़ मकर राशि में प्रवेश करता है. इसी वजह से इस संक्रांति को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है. इस साल राशि में ये परिवर्तन 14 जनवरी को देर रात को हो रहा है, इसीलिए इस बार 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी।
मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त:- पुण्य काल मुहूर्त - 07:14 से 12:36 तक (कुल समय - 5 घंटे 21 मिनट)
महापुण्य काल मुहूर्त - 07:14 से 09:01 तक (कुल समय - 1 घंटे 47 मिनट)
सौ गुना बढ़कर मिलता है दान का प्रतिफ ल 
इस दिन सूर्य का दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश होता है . शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायन को देवताओं की रात्रि यानि नकारात्मकता का प्रतीक और उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है । इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। मकर संक्रांति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यंत शुभकारक माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गई है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किंतु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छह-छह माह के अंतराल पर होती है।