अयोध्‍या मामले में तीन जजों की बेंच के फैसले को पलटा

Posted on: 10-01-2019

भारत के प्रधान न्‍यायाधीश रंजन गोगोई का राम जन्‍मभूमि-बाबरी मामले में संवैधानिक पीठ बनाने का फैसला काफी चौंकाने वाला है. साथ ही यह फैसला अपनी तरह का पहला है. सुप्रीम कोर्ट में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ जब मुख्‍य न्‍यायाधीश के प्रशासनिक आदेश पर एक संवैधानिक पीठ का गठन हुआ है और इसके लिए न तो किसी छोटी बैंच ने सलाह दी और न ही ऐसे सवाल सामने आए जिससे कि इस तरह की बेंच की जरूरत महसूस हो.

जस्टिस गोगोई का आदेश इसलिए भी अनूठा है, क्‍योंकि इससे इसी मामले में तीन जजों की बैंच के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें संवैधानिक पीठ की मांग को खारिज किया गया था. सुप्रीम कोर्ट रजिस्‍ट्री ने मंगलवार शाम को एक नोटिस जारी किया. इसमें कहा गया कि राम जन्‍मभूमि मामले की सुनवाई 10 जनवरी से पांच जजों की संवैधानिक पीठ करेगी. इस पीठ में मुख्‍य न्‍यायाधीश गोगोई, जस्टिस एस बोबडे, एनवी रमना, उदय यू ललित और डीवाई चंद्रचूड़ शामिल होंगे.

पिछले साल सितंबर में तीन जजों की बैंच ने अपने आदेश में कहा था कि राम जन्‍मभूमि-बाबरी मामले को संवैधानिक पीठ को भेजे जाने की कोई जरूरत नहीं है. 2-1 के फैसले में कहा गया था कि इस मामले को पूरी तरह से जमीन विवाद की तरह सुना जाएगा.