राष्ट्रीय प्रौ‌द्योगिकी संसथान रायपुर क्या लोकतांत्रिक अधिकारों पर अतिक्रमण कर रहा है ?

Posted on: 01-03-2019

पूरब टाइम्स। क्या भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए एन.आई.टी रायपुर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा ४ की जानकारी विधि निर्देशानुसार प्रकाशित नहीं करता है ? क्या एन.आई.टी. रायपुर के प्राधिकारी प्रदेश शासन और प्रशासन को यह संदेश देना चाहता है की उनके कार्य व्यवहार में पारदर्शिता वाला कानून उन्हें मान्य नहीं है ? क्या पारदर्शिता के आभाव में एन.आई.टी. रायपुर के वित्तीय व्यवहार और शैक्षणिक मूल्यांकन कार्यवाही विधि अपेक्षित मान्यता के मापदंड को पूरा करने में सक्षम है ?पिछले सालों में छत्तीसगढ़ में सूचना के अधिकार नियम के तहत लोगों को दी जाने वाली जानकारियों को कैसे ना दें यह अधिकारियों की मंशा रहती थी. इस बात पर उच्चाधिकारियों की भी शह रहती थी जिससे प्रथम अपील में भी सूचना मांगने वाले की ठीक से सुनवाई नहीं होती थी . राज्य सोचन आयुक्त के पास द्वीतीय अपील करने पर नंबर एक-एक साल बाद आता थ जोकि किसी सामान्य आदमी के बस की बात नहीं थी . अब सरकार बदली है और हालात भी बदले हैं . अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या अब भी एन.आई.टी सी.एस.वी.टी.यू व हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग जैसे शैक्षणिक संस्थानों में सूचना के अधिकार के नियमों का पालन हो पाता है या नहीं ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट पूरब टाइम्स, दुर्ग भिलाई पिछली भाजपा की सरकार के अंतिम सालों में बड़े सरकारी संस्थानों के द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम का पूरी तरह से माखौल उड़ा दिया गया था नियमानुसार , पब्लिक डोमेन में स्वस्फूर्त होकर डालने वाली जानकारियों को भी संस्थान मांगने पर भी छिपाते रहते थे पारदर्शिता के अभाव में भ्रष्टाचार व घपले चरम पर पहुंचने लगे थे. आलम यह था कि ठेठ आरटीआई एक्टिविस्टों को मुख्य सूचना आयुक्त भी जानकारी नहीं दिलवा पाते थे. यहां तक कि एक एक्तिविस्ट को सूचना देने से इनकार कर दिया था जोको पूरे देश में पहला मामला बना अंततः वह एक्टिविस्ट हाई कोर्ट की मदद से पुनः जानकारी पाने लगा अनेक शिक्षण संस्थाओं में से इस बार, प्रथम भाग में , हम एनआईटी के बारे में छाप रहे हैं आगे चलकर अन्य संस्थानों के द्वारा किये जा रहे अविधिक आचरण को भी सुधिजन व शासन-प्रशासन के सामने लायेंगे एन.आई.टी. रायपुर के घोटाले और गड़बड़ियाँ क्या फाइलो में दफ़न है ? शैक्षणिक संसथान की कार्यपद्धति में पारदर्शिता लाने की लड़ाई प्रदेश के कई लोग लड़ रहे है . इस मामले में आम जनता के अधिकार को सुरक्षित व संरक्षित करने के लिए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा ४ में विशेष प्रावधान किये गए हैजिसका पालन कई शासकीय विभाग और शासन द्वारा वित्त पोषित शैक्षणिक संसथान नहीं करते है इस मामले को लेकर कई लोग माननीय उच्च न्यायालय छत्तीसगढ़ के समक्ष अपील प्रस्तुत कर चुके है ,जिस पर न्यायालय ने अपीलकर्ता के पक्ष को सुनकर पारदर्शिता पर अतिक्रमण करने वाले आरोपी संस्थानों के विरुद्ध कार्यवाही करने के निर्देश दिया है अब एन.आई.टी. रायपुर का मामला सामने आया है और इस संस्था का अपीलीय अधिकारी अपने अड़ियल रवैय्ये का प्रदर्शन कर अनेक जायज़ अपील ख़ारिज कर चुका है . ऐसी स्थिति में यह प्रश्न सभी के मन में उठ रहा है कि क्यों इस तरह की प्रतिक्रिया अपीलीय अधिकारी कर रहा है जबकि केंद्र और राज्य शासन ने पारदर्शिता को संरक्षित करने के स्पष्ट कानून बनाये है और न्यायलय ने उनको संरक्षित करने वाले फैसले भी दिए है ।एन.आई.टी. रायपुर के प्रथम अपीली अधिकारी क्यों तानाशाही कार्यवाही करते है ? जब से सूचना का अधिकार अधिनियम लागू हुआ है और इस अधिनियम को कार्यान्वित करने वाले नियम प्रदेश शासन ने लागू किये है ,तब से एन.आई.टी. रायपुर का कार्य व्यवहार तानाशाही होने का आरोप लगाया जा रहा है . इस तरह का आरोप लगाये जाने का जो आधार बताया जा रहा है वह यह है कि एन.आई.टी. रायपुर के प्राधिकारियों के कार्याचरण व इस संसथान के कार्यपद्धति में पारदर्शिता नहीं है इस आरोप को एन.आई.टी. रायपुर की वैबसाइट बहुत हद तक प्रमाणित भी करती है क्यों की एन.आई.टी. रायपुर के वेबसाइट पर सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा ४ की विधि निर्देशित जानकारी का अभाव है एक आरोपकर्ता के अनुसार उसने धारा ४ की जानकारी को लेने के लिए उसने लिखित आवेदन भी किया लेकिन अपीलीय अधिकारी ने उसकी अपील को तानाशाई शब्दशैली में ख़ारिज कर दिया और यह स्पष्ट नहीं किया की किन नियमो और कानून का आधार लेकर आरोपकर्ता के अपील को अस्वीकृत किया गया है ।क्या कहता है सूचना का अधिकार अधिनियम ? सूचना अधिकारी सम्यक रूप से सूचीपत्रित और अनुक्रमणिकाबद्ध करके अपने सभी अभिलेखों को किसी ऐसी रीति और रूप में रखेगा, जो इस अधिनियम के अधीन सूचना के अधिकार को सूकर बनाता है और सुनिश्चित करेगा कि ऐसे सभी अभिलेख जो कंप्यूटरीकृत किए जाने के लिए समुचित है, युक्तियुक्त समय के भीतर है और संसाधनों की उपलभ्यता के अधीन रहते हुए है, कंप्युटरीकृत और विभिन्न प्रणालियों पर संपूर्ण देश में नेटवर्क के माध्यम से संबद्ध है जिससे कि ऐसे अभिलेख तक पहुंच को सूकर बनाया जा सके प्रत्येक लोक अधिकारी का निरंतर यह प्रयास होगा कि यह स्वप्रेरणा से संसूचना के विभिन्न साधनों के माध्यम से, जिसके अंतर्गत इंटरनेट भी है, नियमित अंतरालों पर जनता को उतनी सूचना उपलब्ध कराने के लिए उपधारा (1) के खंड (ख) की अपेक्षाओं के अनुसार उपाय करे, जिससे कि जनता को सूचना प्राप्त करने के लिए इस अधिनियम का कम से कम अवलम्ब हो प्रत्येक सूचना को विस्तृत रूप से और ऐसे प्ररूप और रीति में प्रसारित किया जाएगा, जो जनता के लिए सहज रूप से पहुंच योग्य हो सके।