क्या प्राचार्य प्रशांत वशिष्ठ पर दजऱ् हो सकता है अपराधिक प्रकरण ?

Posted on: 24-02-2019

लगभग 7-8 साल पहले डीपीएस भिलाई की मान्यता रद्द होने की स्थिति बन गई थी क्योंकि वे बीएसपी की स्टील एजुकशन सोसाइटी के साथ तयशुदा नियमों व शर्तों के परिपालन को तैयार नहीं थे और भिलाई स्टील प्लांट की इस सोसाइटी ने डीपीएस से नाता तोडऩे का मन बना लिया था. ऐसी स्थिति में डीपीएस का लाइसेंस रद्द हो जाता क्योंकि वह स्टील एजुकेशन सोसाइटी की ज़मीन व उनसे एग्रीमेंट के आधार पर चल रही थी . उस समय जागरुक पालकों के दबाव व डीपीएस सोसाइटी दिल्ली के द्वारा समझौता करने पर , वह विकट स्थिति टल गई परंतु अब फिर से डीपीएस भिलाई के द्वारा गड़बड़ होती प्रतीत होती है. उस समय इस पूरे प्रकरण के जि़म्मेदार उस समय के तत्कालीन प्राचार्य एम.पी. यादव को माना जा रहा था , जबकि इस बार इस पूरी गड़बड़ी की सुई वर्तमान के प्राचार्य प्रशांत वशिष्ठ के ऊपर आकर ठहरती है. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ... ४ जनवरी पूरब टाइम्स , दुर्ग भिलाई। भिलाई की सबसे सुविख्यात स्कूल डीपीएस , इन दिनों अपने ऊपर अनियमिततों की चादर लपेटे हुए है . सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में तत्कालीन सरकार के एक रसूखदार राजनेता के आश्रय में सब घालमेल , कागज़ों में यथासमय ठीक करा दिया जाता था . परंतु अब कागज़ों के खेल की वही पुरानी आदत , डीपीएस स्कूल के प्राचार्य व मैनेजमेंट के लिये गले की हड्डी बन सकता है . इस समय डीपीएस भिलाई में लगभग 5200 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं परंतु उनके कैरियर से खिलवाड़ करने की आदत , इस बार उनके मैनेजमेंट को भारी पड़ सकती है । बाक्स-१ क्या है पूरा प्रकरण , डीपीस की मान्यता के नवीनीकरण नहीं होने का पिछली बार डीपीएस भिलाई को पत्र क्र. 254 दिनांक 23/10/2015 को 5/10/2015 से 4/10/2018 तक के लिये मान्यता दी गई थी. नियमानुसार इस अवधि के समाप्ति के छह माह पूर्व नवीनीकरण के लिये आवेदन लगाना था परंतु आवेदन समय समाप्ति के बाद 15/10/2018 को आवेदन दिया गया. पिछली बार मान्यता स्टील एजुकेशन सोसाइटी को दी गयी थी . इस बार के आवेदन में ऐसा नहीं है और अनेक त्रुटियां भी हैं . ऐसे में जिला शिक्षा अधिकारी ने दिनांक 26.12.2018 को जानकारी दी है कि कमी /आपत्तियों के कारण, डीपीएस , भिलाई को मान्यता नहीं प्रदान की गई है .हर बार की तरह पालकों के दबाव से आगे चलकर विधि अनुसार मान्यता भी मिल जाये परंतु जानकारों के अनुसार इस बार अनियमितताओं के लिये प्राचार्य व मैनेजमेंट के दोषी व्यक्तियों पर अपराधिक प्रकरण दजऱ् होना चाहिये .