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नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाले केंद्रीय मंत्रिमंडल में पहला और बड़ा फेरबदल होने जा रहा है। फेरबदल में कई मंत्रियों को प्रोन्नति भी मिलने के आसार हैं तो कुछ की छुट्टी भी हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, मोदी कैबिनेट के इस फेरबदल में कुछ पांच किस्म के बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फेरबदल को लेकर सत्ता के गलियारों में जो अनुमान लगाए जा रहे हैं, उनमें अच्छा प्रदर्शन करने और क्षेत्रीय समीकरणों के चलते कई राज्यमंत्रियों को प्रोन्नति, खराब प्रदर्शन करने वाले कई मंत्रियों की छुट्टी, नए चेहरों को जगह, सहयोगी दलों की फिर से एंट्री तथा कई मंत्रियों के विभागों का बोझ कम किया जाना शामिल हैं।

सूत्रों के अनुसार, संभावना व्यक्त की जा रही है कि कई मंत्रियों को प्रोन्नत किया जा सकता है। इनमें ऊर्जा मंत्री आरके सिंह, उर्वरक राज्यमंत्री मनसुख मंडाविया, कार्मिक राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह, पर्यावरण राज्यमंत्री बाबुल सुप्रियो के नामों की चर्चा में है। क्षेत्रीय एवं जातीय समीकरणों के आधार पर कुछ और राज्यमंत्रियों को भी प्रोन्नत किया जा सकता है। 

सूत्रों के अनुसार, खराब कार्य करने वाले कई मंत्रियों को हटाया जा सकता है। पिछली समीक्षा बैठकों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं कह चुके हैं कि कड़े फैसले लेने होंगे। जिसका स्ष्ट संदेश यह है कि खराब कार्य करने वाले मंत्रियों को आगे जारी नहीं रखा जा सकता। कई कैबिनेट मंत्रियों के दो या इससे ज्यादा मंत्रालय हैं। ऐसे मंत्रियों के विभाग कम किए जा सकते हैं। नौ मंत्री ऐसे हैं जो एक से अधिक विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। 

सूत्रों के अनुसार, फेरबदल में चौथा अहम बदलाव नए चेहरों के रूप में होगा। पार्टी से कई नये चेहरों को राज्यों के चुनावों या अन्य कारणों के चलते कैबिनेट में जगह दी जाएगी। पांचवा जो अहम बदलाव होगा, वह सहयोगी दलों की कैबिनेट में फिर से एंट्री होने जा रही है। इसमें जदयू, अपना दल, लोजपा तथा कुछ अन्य छोटे दलों को एंट्री मिल सकती है।



गूगल ने इन ऐप्स को प्ले स्टोर से डिलीट कर दिया है. अगर आपके फोन में ये ऐप्स अभी भी है तो आप भी तुरंत इसको डिलीट कर दें. रिसर्चर डॉक्टर वेब ने इसको रिपोर्ट किया है. डॉक्टर वेब के अनुसार इन एंड्रॉयड ऐप्स में 5 तरह के मैलवेयर टाइप्स मिक्स हैं.ये  ऐप्स उसी जावा स्क्रिप्ट और फाइल फॉर्मेट का यूज करते हैं जो लोगों के फेसबुक क्रेडेंशियल को चुराने में काम आता है. इसको करने के लिए काफी आसान तरीका अपनाया गया था.

ये ऐप्स फेसबुक साइन इन हो जाने के बाद वो इन-ऐप्स ऐड ना दिखाने और ऐप के कई और फीचर्स एक्सेस करने का ऑफर करते हैं. यहां पर कई लोग अपने फेसबुक से लॉगिन कर देते हैं. इसके लिए लॉगिन प्रांप्ट भी उनको दिया जाता है. इसके बाद malicious प्रोसेस शुरू होता है. एक बार फेसबुक अकाउंट लॉगिन हो जाने के बाद ऐप्स को स्पेशल सेटिंग्स मिल जाते हैं. इसकी मदद से वो डेटा को चुराने के साथ कमांड और कंट्रोल सर्वर से JavaScript लोड करने लगते हैं.

रांची। कोरोना संक्रमण की संभावित तीसरी लहर को लेकर झारखंड सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की निगरानी में इसके खिलाफ जंग की तैयारी चल रही है। उनके निर्देश पर सरकारी अस्पतालों में बच्चों के अनुकूल वार्ड और पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट (पीआइसीयू) स्थापित किए जा रहे हैं। दरअसल, चिकित्सकों, विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों को आशंका है कि तीसरी लहर बच्चों को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है।

इसे देखते हुए राज्य के सभी जिलों में बच्चों के इलाज के लिए इंटेंसिव केयर यूनिट युद्धस्तर पर तैयार की जा रही है। राज्य के सभी सदर अस्पतालों तथा कुछ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पीआइसीयू विकसित किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी बच्चों को बेहतर इलाज मुफ्त में मिल सके। सभी जिलों में चाइल्ड वार्ड के अतिरिक्त डेडिकेटेड चाइल्ड वार्ड विकसित हो रहे हैं। ये सभी वार्ड व पीआइसीयू वेंटिलेटर, बाल चिकित्सा वेंटिलेटर, बबल सीपीएपी, रेडिएंट वार्मर, ऑक्सीजन आपूर्ति सुविधा और अन्य आवश्यक उपकरणों से लैस किए जा रहे हैं।


सरकारी अस्पतालों में चाइल्ड फ्रैंडली पीडियाट्रिक वार्ड बनाए जा रहे हैं। वार्डों में कार्टून की पेंटिंग की जा रही है। उपयोग किए जाने वाले पर्दे, चादरें और कवर रंगीन और आकर्षक रूप से तैयार किए गए हैं। इनके अलावा वार्ड में टेलीविजन सेट भी लगाए जा रहे हैं, ताकि बच्चों को घर से बाहर होने का अहसास न हो। अस्पतालों के आंगन और वार्डों के गलियारे को बच्चों की चहलकदमी लायक बनाया जा रहा है। कई स्टोरी बुक और अन्य शिक्षण सामग्री के साथ बुकशेल्फ भी स्थापित किए जा रहे हैं। कोडरमा, रांची, धनबाद, जमशेदपुर, गुमला, लातेहार, गिरिडीह आदि में पीआइसीयू का काम पूरा हो चुका है जबकि अन्य जिलों में कार्य प्रगति पर है।







राज्य सरकार लोगों और बच्चों के लिए हरसंभव स्वास्थ्य सुविधा तैयार करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। संभावित तीसरी लहर के खिलाफ जंग लड़ने के लिए सरकार खुद को पहले से तैयार कर रही है। हमने दूसरी लहर के खिलाफ बहादुरी से लड़ाई लड़ी। दूसरी लहर हमारे लिए एक सबक थी, जिसने हमें अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं में खामियों को खोजने में मदद की। इस बार हम खुद को पहले से तैयार कर रहे हैं।-हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखंड

चंडीगढ़। पंजाब में कांग्रेस में पहले मचे हुए कोहराम का अभी हाईकमान हल ही नहीं निकाल पाई है कि हाल ही में हुई कैबिनेट में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दो विधायकों के बेटों को डायरेक्ट अफसर बनाकर फिर नया विवाद खड़ा कर दिया है. विपक्षी दल तो इसका विरोध कर ही रहे हैं, लेकिन कैप्टन के बहुत ही करीबी पंजाब कांग्रेस के प्रधान सुनील जाखड़  सहित मंत्रियों और विधायकों ने भी इन नियुक्तियों का पूरजोर विरोध किया है.

उन्होंने कहा कि इस फैसले को वापिस नहीं लिया गया तो कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा. हालांकि इस बार कैप्टन के धुरविरोधी रहे सांसद प्रताप सिंह बाजवा के भतीजे और विधायक फतेहजंग बाजवा के बेटे अर्जुन बाजवा को पंजाब पुलिस में इंस्पेक्टर लगाया गया है इसलिए उनके करीब तीन दिन पहले से ही सूर बदले हुए हैं और वह कैप्टन के पक्ष में आकर खड़े हो गए हैं. लुधियाना से विधायक राकेश पांडेय के बेटे भीष्म पांडेय को नायब तहसीलदार बनाया गया है.


कैबिनेट मंत्री तृप्त राजिंदर सिंह बाजवा विधायकों के बेटों नौकरी देना बिलकुल गलत है. उन्होंने कहा कि कैबिनेट मीटिंग में एजेंडा लाने से पहले भी उन्होंने इस तरह विधायकों के बेटों को नौकरी देने का विरोध किया था. उन्होंने कहा कि वह इस मसले पर सहयोगी मंत्रियों से बैठक करेंगे और सीएम से भी बात करेंगे. बाजवा ने कहा कि इस फैसले पर दोबारा विचार किए जाने की जरूरत है.

फतेहगढ़ साहिब के विधायक कुलजीत नागरा दो विधायकों के बेटों को नौकरी देने के फैसले से मैं सहमत नहीं. उन्होंने पूरी कैबिनेट, सीएम कैप्टन अमरिंदर और पार्टी से मांग की है कि पंजाब के युवाओं के भविष्य को देखते हुए उनकी योग्यता के आधार पर नियुक्त किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस फैसले को वापिस लिया जाना चाहिए. गिद्दड़बाहा के विधायक राजा वड़िंग दो विधायकों के बटों को नियक्तियां देने का फैसला गलत है.


शिरोमणि अकाली दल: राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर से कैप्टन सरकार को बर्खास्त करने की मांग की है. बिक्रमजीत सिंह मजीठिया और डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री अपनी कुर्सी बचाने के लिए करोड़पति कांग्रेस विधायकों के बेटों को नौकरी दी. आम आदमी पार्टी: प्रदेशाध्यक्ष भगवंत मान ने कहा कि नियम बदलकर चहेतों को फायदा पहुचाया जा रहा है. यह सब कैप्टन ने असंतुष्टों को खुश करने के लिए किया है. हमारी सरकार बनी तो इन दोनों नियुक्तियों को रद्द किया जाएगा.

नई दिल्ली। देशभर में कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से जान गंवाने वाले लोगों के परिवार को चार लाख रुपए अनुग्रह राशि दिए जाने का अनुरोध करने वाली याचिका पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल किया है। सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर केंद्र सरकार ने कहा कि वह कोरोना वायरस की वजह से जान गंवाने वाले लोगों के परिवार को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा नहीं दे सकती है। केंद्र ने कहा है कि कोविड-19 के पीड़ितों को 4 लाख रुपये का मुआवजा नहीं दिया जा सकता है.


क्योंकि आपदा प्रबंधन कानून में केवल भूकंप, बाढ़ आदि प्राकृतिक आपदाओं पर ही मुआवजे का प्रावधान है। सरकार ने आगे कहा कि अगर एक बीमारी से होने वाली मौत पर मुआवजे की राशि दी जाए और दूसरी पर नहीं तो यह पूरी तरह से गलत होगा।सरकार ने कहा कि अगर कोरोना से जान गंवाने वाले सभी लोगों को 4 लाख की अनुग्रह राशि दी जाती है तो फिर एसडीआरएफ का पूरा पैसा सिर्फ एक चीज पर खर्च हो जाएगा और इससे महामारी के खिलाफ लड़ाई में उपयोग होने वाली राशि प्रभावित होगी। 

अगर एसडीआरएफ फंड को कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देने में खर्च किया जाता है तो इससे राज्यों की कोरोना के खिलाफ लड़ाई प्रभावित होगी और अन्य चिकित्सा आपूर्ति और आपदाओं की देखभाल के लिए पर्याप्त धन नहीं बचेंगे। इसलिए कोरोना से मरे व्यक्तियों को अनुग्रह राशि के भुगतान के लिए याचिकाकर्ता की प्रार्थना राज्य सरकारों की वित्तीय सामर्थ्य से परे है।


स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों की मानें तो देश में कोरोना वायरस की वजह से महामारी की शुरुआत से लेकर अब तक करीब चार लाख लोगों की जानें जा चुकी हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में केंद्र और राज्यों को आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत संक्रमण के कारण जान गंवाने वाले लोगों के परिवार को चार लाख रुपये अनुग्रह राशि देने का अनुरोध किया गया है। सुप्रीम कोर्ट मामले में सोमवार को सुनवाई करेगा।

नई दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कोरोना महामारी के दौरान सबसे ज्यादा गरीबी भारत में बढ़ने संबंधी एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और कहा कि देश के पुनर्निर्माण की शुरुआत तब होगी जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी गलतियां स्वीकार करेंगे और विशेषज्ञों की मदद लेंगे।

उन्होंने एक रिपोर्ट साझा करते हुए ट्वीट किया, यह भारत सरकार के महामारी कुप्रबंधन का परिणाम है। परंतु अब हमें भविष्य की ओर देखना है। कांग्रेस नेता ने कहा, हमारे देश के पुनर्निर्माण की शुरुआत तब होगी जब प्रधानमंत्री अपनी गलतियां स्वीकार करेंगे और विशेषज्ञों की मदद लेंगे। नकारने की मुद्रा में बने रहने से किसी भी चीज का हल नहीं निकलेगा।

विशाखापट्टनम। 16 साल के लड़के ने फंदा लगा किया सुसाइड षणमुख ने ऑनलाइन एक कुत्ता देखा, जिसकी कीमत 30 हजार रुपये थी. षणमुख को कुत्ता बहुत पसंद आया और उसने अपने माता-पिता से उसे दिलाने की जिद की. हालांकि उसके परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए. इस बात से नाराज षणमुख ने फांसी लगाकर जान दे दी. बच्‍चों में कई बार किसी चीज को पाने की हसरत इस कदर हावी हो जाती है कि वो चीज न मिलने पर गुस्‍से में कई बार खतरनाक कदम तक उठा लेते हैं. 


 षणमुख ने ऑनलाइन एक कुत्ता देखा, जिसकी कीमत 30 हजार रुपये थी. षणमुख को कुत्ता बहुत पसंद आया और उसने अपने माता-पिता से उसे दिलाने की जिद की. हालांकि उसके परिजन इसके लिए तैयार नहीं हुए. बता दें कि षणमुख की मां ने कुत्ता लाने से साफ इनकार कर दिया था. षणमुख की मां ने कहा था कि अगर वह कुछ वक्त ठहर जाएगा तो वह उसे कुत्ता दिला देंगी. हालांकि घरवालों के ऐसा कहने पर षणमुख वामसी नाराज हो गया. 

इसके बाद जब षणमुख की मां सोमवार को जरूरी घरेलू सामान खरीदने बाजार गई तो षणमुख वामसी ने फांसी से लटककर जान दे दी. मां ने जब बेटे को फंदे से झूलता देखा तो वह बेहोश हो गईं. घटना की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने षणमुख वामसी को तत्काल अस्पताल पहुंचाया, जहां जांच के दौरान डॉक्‍टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. एमआर पेट्टा थाने की पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज किया है और आगे जांच की जा रही है.

कोलकाता। हाल में संपन्न बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान भड़काऊ भाषण देने के मामले में कोलकाता पुलिस आज दिग्गज बॉलीवुड अभिनेता और भाजपा नेता मिथुन चक्रवर्ती से पूछताछ कर रही है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस मिथुन से वर्चुअल माध्यम से पूछताछ कर रही है। विधानसभा चुनाव के दौरान मिथुन पर भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगाते हुए महानगर के मानिकतल्ला थाने में उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। बता दें कि आज मिथुन चक्रवर्ती का जन्‍मदिन भी है।

चुनाव परिणाम घोषित होने के एक माह बाद मिथुन ने उक्त प्राथमिकी के खिलाफ कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसमें एफआइआर खारिज करने का अनुरोध किया गया था। हालांकि हाई कोर्ट ने मिथुन को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए जांच अधिकारी के समक्ष पूछताछ में शामिल होने का पिछले हफ्ते निर्देश दिया था। अदालत ने साथ ही जांच अधिकारी को भी निर्देश दिया था कि वह मिथुन को वीडियो कांफ्रेंस के जरिए उपस्थित होने के लिए तर्कसंगत समय दें। मिथुन पर आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर भाषण में अपनी फिल्मों के चर्चित संवाद बोलकर चुनाव के बाद हुई हिंसा को भड़काया।

हालांकि चक्रवर्ती ने दावा किया है कि फिल्मों के ऐसे संवाद केवल हास्य-विनोद के लिए बोले गए थे और वह निर्दोष हैं तथा ऐसे किसी अपराध में शामिल नहीं हैं जिसके आरोप शिकायतकर्ता ने लगाए हैं। चक्रवर्ती ने कोलकाता पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी को खारिज करने के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। मानिकतल्ला पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में दावा किया गया है कि सात मार्च को भाजपा में शामिल होने के बाद आयोजित रैली में चक्रवर्ती ने  मारबो एखाने लाश पोड़बे शोशाने (तुम्हे मारूंगा तो लाश श्मशान में गिरेगी) और  एक छोबोले चाबी’ (सांप के एक दंश से तुम तस्वीर में कैद हो जाओगे) संवाद बोले, जिसकी वजह से राज्य में चुनाव के बाद हिंसा हुई। 

नई दिल्ली. भारत में कोरोना वैक्सीन लगने के बाद पहली मौत की पुष्टि हो चुकी है. वैक्सीन की वजह से 68 साल के एक बुजुर्ग की मौत हो चुकी है. ये बात केंद्र सरकार की ओर से गठित पैनल की रिपोर्ट में सामने आई है. इंडिया टुडे के पास ये रिपोर्ट है.  वैक्सीन लगने के बाद कोई गंभीर बीमारी होने या मौत होने को वैज्ञानिक भाषा में एडवर्स इवेंट फॉलोइंग इम्यूनाइजेशन (AEFI) कहा जाता है. AEFI के लिए केंद्र सरकार ने एक कमेटी गठित की है. इस कमेटी ने वैक्सीन लगने के बाद हुई 31 मौतों का असेसमेंट करने के बाद कन्फर्म किया कि 68 साल के एक  बुजुर्ग की मौत वैक्सीन लगने के बाद एनाफिलैक्सीस (Anaphylaxis) से हुई. ये एक तरह का एलर्जिक रिएक्शन होता है. बुजुर्ग को 8 मार्च 2021 को वैक्सीन की पहली डोज लगी थी और कुछ दिन बाद ही उनकी मौत हो गई थी. 

इंग्‍लैंड. दुनिया भर में जानलेवा कोरोना वायरस संक्रमण से लोग जूझ रहे हैं. इसी बीच खबर आई है कि यूके के नॉर्थ वेल्स में Monkeypox के 2 मामले सामने आए हैं. इस बात की जानकारी नॉर्थ वेल्‍स के पब्लिक हेल्‍थ ऑफिसर्स ने दी है. उन्‍होंने बताया कि एक ही परिवार के 2 सदस्‍यों में यह बीमारी सामने आई है. इसके कारण दोनों पेशेंट को शरीर में दाने आने, खुजली होने, बुखार और दर्द की समस्‍या हो गई है.



विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, Monkeypox वायरस के कारण एक ऐसी बीमारी होती है, जिसके लक्षण स्‍मॉल पॉक्‍स जैसे होते हैं, लेकिन उससे कम गंभीर होते हैं. Monkeypox बीमारी के सामान्‍य लक्षण बुखार आना, शरीर में दाने होना हैं. मोटे तौर पर यह बीमारी जंगली जानवरों जैसे चूहों और बंदरों द्वारा इंसानों में फैलती है. इसके अलावा यह एक व्‍यक्ति से दूसरे में भी फैलती है. इस बीमारी से ग्रसित 100 में से 10 मरीजों की मौत होने की आशंका होती है.






राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के लिए, केंद्र सरकार के ईएसआई अधिनियम के तहत उपयुक्त सरकार होने के चलते, श्रम और रोजगार मंत्रालय ने दिल्ली के एनसीटी में नगर निगमों/परिषद में काम करने वाले कैजुअल और कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारियों के ईएसआई अधिनियम के तहत कवरेज के लिए पहले ही सात जून, 2021 को प्रस्तावित अधिसूचना जारी कर दी है।

एक बार संबंधित राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की ईएसआई कवरेज के लिए अधिसूचना जारी होने के बाद, नगर निकायों में काम करने वाले कैजुअल और कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी ईएसआई अधिनियम के तहत उपलब्ध लाभ ले सकेंगे। इनमें बीमारी लाभ (Medical benefit), मातृत्व लाभ (Maternity Benefit), विकलांगता लाभ, आश्रित का लाभ और अंतिम संस्कार का खर्च आदि शामिल हैं।


श्रम मंत्री संताष गंगवार ने कहा कि नगर निकायों के साथ काम करने वाले आउटसोर्सिंग और ठेका कर्मचारियों को ईएसआई की सामाजिक सुरक्षा योजना के दायरे में लाना महत्वपूर्ण है। यह कमजोर वर्ग को सामाजिक सुरक्षा कवर प्रदान करने में एक लंबा रास्ता तय करेगा। उन्होंने कहा कि यह इस कार्यबल और उनके परिवारों के सामाजिक उत्थान में योगदान देगा।

टेक डेस्क। गूगल ने एक नया फीचर लॉन्च किया है, जिसे पेस्ड वॉकिंग (Paced Walking) के नाम से जाना जाता है। Google का नया पेस्ड वॉकिंग फीचर आपको बेस्ट वॉकिंग गोल्स हासिल करने में मदद करेगा। साथ ही ऑडियो बीट की मदद से यूजर को आपके हर स्टेप की जानकार मिलेगी। Google का Paced Walking फीचर Google Fit पर उपलब्ध रहेगा। Google का पेस्ड वॉकिंग फीचर ग्लोबली ज्यादातर एंड्राइड फोन्स के लिए उपलब्ध हैं।

Google पेस्ड वॉकिंग फीचर की मदद से वॉकिंग के दौरान आपको सटीक वॉकिंग स्पीड हासिल करने में मदद मिलेगी। यह एक ऐप बेस्ड फीचर है, जिसकी मदद से आपको बिल्कुल नेचुरल वॉकिंग स्पीड मिलती है। इससे यूजर को साइकिल राइडिंग समेत तमाम तरह हेल्थ बेनिफिट्स मिलते हैं। Google Fit के मेडिकल लीड कपिल प्रकाश के मुतबाकि अगर आप तेज वॉकिंग करते हैं, तो आपका नेचुरल पेस समय के साथ तेज होता जाएगा। 


बता दें कि अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट तक फिजिकल एक्टिविटी करने की सिफारिश करता है। यूजर ऐप के जरिए बीट की स्पीड को बदल सकेंगे और आपनी वॉकिंग की स्पीड को कम और ज्यादा कर पाएंगे। साथ ही वॉकिंग के दौरान म्यूजिक और पॉडकास्ट प्ले कर सकते हैं। 


लेकिन अगर पर वर्चुअल नेटवर्क पर PUBG खेलते हैं, तो आपको यह गेम खेलना महंगा पड़ सकता है। दरअसल पिछले दिनों कुछ ऐसे वर्चुअल नेटवर्क की पहचान की गई हैं, जो इस्तेमाल के लिहाज से काफी खतरनाक हैं। यह खतरनाक ऐप्स आपके बैंक एकाउंट को खाली कर सकते हैं। ऐसे में यूजर्स को वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क पर PUBG जैसे गेम नहीं खेलने चाहिए।


रिसर्च के मुताबिक अगर आपने स्मार्टफोन में Cake VPN, Pacific VPN, eVPN जैसे ऐप्स को इंस्टॉल किया है, तो यह आपके लिए खतरनाक हो साबित हो सकता है। रिपोर्ट की मानें, तो यह सभी मैलिसियस एंड्राइड ऐप्स हैं, जो स्मार्टफोन में AlienBot Banker और MRAT को इंस्टॉल कर देते हैं। AlienBot एक मैलवेयर है, जो फाइनेंशियल ऐप्स के टू फैक्टर ऑथेंटिकेशन कोड में सेंध लगाकर बैंकिंग डिटेल चोरी कर सकता है। 







नई दिल्‍ली। देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर की रफ्तार अब धीमी पड़ती जा रही है। एक तरफ जहां संक्रमण के मामले तेजी से कम हो रहे हैं, वहीं दैनिक मौतों का आंकड़ा भी तीन हजार से कम आ रहा है। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर ने पीक के दौरान देश में तबाही मचा दी थी। दूसरी लहर के दौरान लाखों लोगों की जान गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों की माने तो इस साल एक मार्च यानी कोरोना वायरस की दूसरी लहर शुरू होने के बाद प्रति दिन औसतन करीब 2000 लोगों की मौत हुई है।

केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में आज चौथे दिन कोरोना वायरस के एक लाख से कम नए मामले आए है। पिछले 24 घंटे में कोरोना के 91,702 नए मामले आने के बाद कुल पॉजिटिव मामलों की संख्या 2,92,74,823 हो गई है। इसके साथ ही इतने ही समय में 3,403 लोगों की जान गई है, जिसके बाद कुल मौतों की संख्या 3,63,079 हो गई है। 1,34,580 मरीजों के डिस्चार्ज होने के बाद कुल डिस्चार्ज की संख्या 2,77,90,073 हुई। देश में अभी भी कोरोना के सक्रिय मामलों की कुल संख्या 11,21,671 है।

देश में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस की 32,74,672 वैक्सीन लगाई गईं, जिसके बाद कुल वैक्सीनेशन का आंकड़ा 24,60,85,649 हो गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, देश में दैनिक पॉजिटिविटी रेट 4.49% और रिकवरी रेट 94.93% है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बताया कि भारत में कल कोरोना वायरस के लिए 20,44,131 सैंपल टेस्ट किए गए, कल तक कुल 37,42,42,384 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं।


महाराष्ट्र के नासिक से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां एक शख्स से दावा किया है कि कोरोना वैक्सीन लेने के बाद से ही उसके शरीर पर लोहे और स्टील का सामान चिपकना शुरू हो गया है. इस परिवार का दावा है कि बुजुर्ग ने जैसे ही कोरोना वैक्सीन की दूसरी डोज ली है उनके शरीर में चुंबकीय शक्ति पैदा हो गई है और लोहे का सामना उससे चिपक रहा है. परिवार के मुताबिक चम्मच, स्टील और लोहे के बर्तन और सिक्के भी बुजुर्ग के शरीर पर चिपक जाते हैं.


जानकारी के मुताबिक बुधवार को प्रशासन और डॉक्टर्स की एक टीम भी नासिक के शिवाजी चौक इलाके में रहने वाले 71 वर्षीय अरविंद जगन्नाथ सोनार के घर जांच के लिए पहुंची थी. हालांकि टीम भी जांच के बाद हैरत में पड़ गई. अरविंद सोनार की जांच करने पहुंचे डॉ अशोक थोरात के मुताबिक इस मामले में जांच जारी है, हमने कुछ सैम्पल्स ले लिए हैं और सरकार को रिपोर्ट सौंप दी जाएगी. उन्होंने कहा कि वैक्सीन का इससे क्या संबंध है इसकी जांच होने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है.

परिवार ने बताया कि अरविंद जगन्नाथ सोनार ने 2 जून को कोवीशील्ड की दोनों डोज पूरी की थी. इसी के बाद से लगातार उनके शरीर से लोहे का सामना चिपकने लगा है. पहले परिवार को लगा था कि पसीने की वजह से ऐसा हुआ है लेकिन बाद में उन्होंने देखा तो ऐसा शरीर से निकल रही किसी शक्ति के चलते ही हो रहा था. अरविंद के बेटे ने बताया कि पहले दिन उनके कंधे से कुछ सिक्के चिपक गए थे लेकिन हमने ध्यान नहीं दिया. हमें लगा पसीने से ऐसा हुआ है लेकिन फिर उन्हें नहलाकर चेक किया तो लोहे के कई अन्य सामान भी चिपक रहे थे. उन्होंने बताया कि यूट्यूब पर एक अन्य व्यक्ति ने भी वैक्सीन लेने के बाद इस तरह की शक्ति पैदा हो जाने से संबंधित वीडियो शेयर किया हुआ है.@GI@



इसके अलावा इन कक्षाओं के परिणाम अब 22 जून, 2021 को ऑनलाइन मोड में शिक्षा विभाग की वेबसाइट के माध्यम से घोषित किए जाएंगे। छात्र व्हाट्सएप के माध्यम से भी अपना परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। बता दें कि दिल्ली सरकार ने अप्रैल के पहले सप्ताह में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के चलते 12 अप्रैल, 2021 से आयोजित कक्षा 9 और 11 की परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था।













नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुशील चंद्रा ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि चुनाव सुधारों को लेकर आयोग द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर मंत्रालय जल्द से जल्द कदम उठाएं। मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने के लिए दो साल की जेल के प्रावधान, मतदाता पहचान पत्र को आधार से लिंक करने समेत कई चुनाव सुधारों से संबंधित प्रस्तावों पर तेज गति से कदम उठाने की अपील कानून मंत्रालय से की है।

सुशील चंद्रा ने कहा, उम्मीद है मंत्रालय इन प्रस्तावों पर जल्द से जल्द विचार करेगा। इन प्रस्तावों में चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी देने पर छह महीने जेल की सजा को बढ़ाकर दो साल करने के प्रावधान से संबंधित है। ऐसा उम्मीदवार चुनाव लड़ने के लिए 6 साल तक प्रतिबंधित हो जाएगा। मौजूदा समय में 6 महीने की जेल का प्रावधान है, जिसके चलते किसी को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने लिखा है कि पेड न्यूज को जनप्रतिनिधि कानून के तहत अपराध की श्रेणी में लाया जाए और इसके लिए और इसके नियमों को न मानने वालों के खिलाफ सख्ती के प्रावधान किए जाएं।

इसके अलावा, चुनाव प्रचार खत्म होने और मतदान के दिन साइलेंट पीरियड के दौरान अखबारों में राजनीतिक विज्ञापनों पर भी रोक लगाई जाए। इसके पीछे मकसद है कि मतदाता प्रभावित न हों और खुले मन से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। इसके लिए जन प्रतिनिधित्व कानून में संशोधन की जरूरत होगी। साथ ही मतदान से 48 घंटे पहले प्रचार के संदर्भ में कानूनों में बदलाव से संबंधित सिफारिश भी मंत्रालय से की गई है।