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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



नई दिल्ली। नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2019 में सिर्फ गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को ही भारतीय नागरिकता देने के प्रावधान पर बीजेपी नेताओं ने सफाई दी है। बिहार के बक्सर से पार्टी के सांसद अश्विनी चौबे ने तो बिल का विरोध कर रही कांग्रेस को जिन्ना का अनुयायी तक बता दिया। वहीं, बिहार के ही बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने कहा कि यह बिल किसी से भेदभाव नहीं करता है, बल्कि यह पड़ोसी देशों में प्रताड़ित हो रहे अल्पसंख्यक समुदाय के लिए भारत को स्वर्णस्थली (शरणस्थली) बनाने का प्रयास है। वहीं, केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भी बिल के जरिए धार्मिक अजेंडा साधने के आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की आबादी में तेज गिरावट का हवाला दिया।
हम जिन्ना को मानने वाले नहीं, मूल गांधीवादी: चौबे
बीजेपी सांसद अश्विनी चौबे ने नागरिकता विधेयक के कांग्रेस के विरोध पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के लिए कहा, आपने तो जिन्ना को माना था। आप तो वही काम कर रहे थे। हम जिन्ना को तो मानने वाले नहीं है, हम मूल गांधीवादी लोग हैं। विदेशी घुसपैठियों के लिए यहां कोई जगह नहीं है। हिंदुओं के लिए भारत को छोड़कर दुनिया में कहीं जगह नहीं है। वो (मुसलमान) कहीं भी जा सकते हैं।

लोकसभा में आज उन्नाव और तेलंगाना दुष्कर्म का मुद्दा गरमाया रहा। केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन के सीता वाले बयान को लेकर विपक्ष पर हमला बोला है। उन्होंने कहा- विपक्ष इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग दे रहा है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन ने संसद में कहा कि एक तरफ भगवान राम का मंदिर बनाया जा रहा है और दूसरी तरफ सीता मैया को आग लगाई जा रही है।

समाजवादी पार्टी नेता आज़म ख़ान ने प्याज़ की बढ़ी कीमतों पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के चर्चित बयान पर तंज़ कसते हुए कहा है कि प्याज़ ही क्यों लहसुन मीट भी खाना बंद कर देना चाहिए.

आज़म ख़ान ने कहा प्याज खाना बंद कर दें इसे खाने की क्या मजबूरी है? हमारे जैन भाई नहीं खाते हैं. प्याज खाना बंद करो, लहसुन खाना बंद करो मांस खाना बंद करो सब कुछ बच जाएगा.

ग़ौरतलब है कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को संसद में प्याज़ के बारे में विस्तृत जवाब देते हुए एक टिप्पणी की थी जिसकी काफ़ी चर्चा हुई थी.

उन्होंने एक सांसद की टिप्पणी के बाद कहा था  मैं इतना लहसुन प्याज़ नहीं खाती हूं. आप फ़िक्र मत कीजिए. मैं ऐसे परिवार से आती हूं जहां ज़्यादा प्याज़ लहसुन का मतलब नहीं है.

निर्मला सीतारमण की टिप्पणी को लेकर गुरूवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मोदी सरकार पर हमला किया.

पणजी/मुंबई

शिवसेना के नेता संजय राउत ने शुक्रवार सुबह महाराष्ट्र की तरह गोवा में भी विपक्षी गठबंधन कर बीजेपी सरकार को झटका देने का इशारा किया पर कुछ घंटे बाद ही यह दावा दरकने लगा। गोवा में विपक्षी दलों के गठबंधन का विचार पेश करने के कुछ घंटे बाद ही राज्य कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को गिराने के लिए किसी भी गठबंधन में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया। आपको बता दें कि महाराष्ट्र में शिवसेना ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर ही सरकार बनाई है। गोवा कांग्रेस के अध्यक्ष गिरीश चोडनकर ने कहा कि उनकी पार्टी सरकार गिराने के लिए सत्तारूढ़ पार्टी के विधायकों की खरीद-फरोख्त के प्रयास के बजाय विपक्ष में बैठने को तरजीह देगी।

लखनऊ। अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के राम मंदिर के हक में दिए अंतिम फैसले के बाद मंदिर निर्माण की तैयारियां शुरू हो गई हैं। राज्य की योगी सरकार ने त्रेता युग जैसी अयोध्या बसाने की तैयारी की है। सरकार की मंशा श्रद्धालुओं के मामले में वेटिकन और मक्का को पीछे छोड़ने की है। इसका ब्लू प्रिंट बनाने की जिम्मेदारी लंदन स्थित कंसल्टेंसी फर्म प्राइस वाटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) को दी गई है।

पीडब्ल्यूसी ने सरयू किनारे अयोध्या को फिर से त्रेता युग के रंग में ढालने के साथ ही आधुनिक सुविधाओं से लैस करने का भी प्लान बनाया है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार ने संघ परिवार से विचार-विमर्श के बाद पीडब्ल्यूसी के इस प्लान को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस परियोजना पर आने वाले खर्च का आकलन तभी हो पाएगा, जब कंसल्टेंसी फर्म के ब्लू प्रिंट को डिवेलपर्स और राज्य सरकार द्वारा अंतिम मंजूरी मिल जाती है।
बता दें कि 26 नवंबर को वाराणसी में संस्कृति, पर्यटन और अन्य विभागों के अधिकारियों ने पीडब्ल्यूसी के ब्लू प्रिंट का प्रेजेंटेशन संघ के बड़े नेताओं के सामने दिया। बंद दरवाजों के साथ यह मीटिंग करीब 3 घंटे चली। मीटिंग बुलाई तो गई थी काशी के विकास पर चर्चा के लिए, मगर मुख्य अजेंडा अयोध्या ही था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस मीटिंग में मौजूद थे और सभी अयोध्या को टॉप धार्मिक स्थल बनाने को लेकर एकमत थे।

रांची। झारखंड विधानसभा चुनाव में पहले चरण का मतदान आज जारी है। पहले चरण के चुनाव से ठीक पहले गुरुवार को भारतीय वायुसेना के एक हेलिकॉप्‍टर ने गलती से झारखंड ले जाए जा रहे चुनावकर्मियों और चुनाव सामग्री को पड़ोसी छत्‍तीसगढ़ में उतार दिया। बताया जा रहा है कि 8 सदस्‍यीय चुनाव दल लातेहार के एक हेलीपैड से महौदंद के चाटकपुर के लिए रवाना हुआ था। वायुसेना के पायलटों ने गलती से उन्‍हें छत्‍तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के प्रतापपुर भैंसमुंडा में उतार दिया।

नक्‍सल प्रभावित लातेहार के जिला प्रशासन ने मनिका विधानसभा सीट पर चुनाव कराने के लिए नौ पोलिंग पार्टी के 18 सदस्‍यों को रवाना किया था। चुनाव दल में नौ पोलिंग स्‍टेशन के नौ पीठासीन अधिकारी और नौ प्रथम चुनाव अधिकारी शामिल थे। मनिका विधानसभा क्षेत्र में कुल 321 चुनाव क्षेत्र हैं। गलत जगह पर उतारे जाने का अहसास होने पर चुनाव कर्मचारियों ने लातेहार के डेप्‍युटी कमिश्‍नर और जिला चुनाव अधिकारी जीशान कमर को सूचित किया।

चुनाव अधिकारी जीशान ने इसकी सूचना छत्‍तीसगढ़ के अपने समकक्ष को दी। इसके बाद छत्‍तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों की एक टीम मौके पर पहुंची और 18 सदस्‍यीय चुनाव दल को सुरक्षा मुहैया कराया। इसके बाद वायुसेना के हेलिकॉप्‍टर को दोबारा भेजा गया और छत्‍तीसगढ़ में फंसे चुनाव अधिकारियों को उनके मूल स्‍थान पर पहुंचाया गया। बताया जा रहा है कि पायलट को स्‍थान की गलत जानकारी मिल गई थी, इस वजह से ऐसा हुआ।

मुंबई। महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने शपथ लेने के महज तीन दिन बाद ही पद से इस्तीफा दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने आज ही बुधवार को फ्लोर टेस्ट का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने उसका इंतजार किए बगैर ही इस्तीफा दे दिया है। देवेंद्र फडणवीस ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मैं यहां से सीधे गवर्नर हाउस जा रहा हूं और अपनी इस्तीफा उन्हें सौंप दूंगा। उनसे पहले डेप्युटी सीएम अजित पवार ने भी इस्तीफा दे दिया था। माना जा रहा है कि देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को यह लग रहा था कि वे फ्लोर टेस्ट में बहुमत साबित नहीं कर पाएंगे और इसके चलते दोनों ने पद से इस्तफा दे दिया।

इस्तीफे का ऐलान करने से पहले देवेंद्र फडणवीस ने सूबे में अस्थिरता का शिवसेना पर ठीकरा फोड़ा। उन्होंने कहा कि हमने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और बहुमत हासिल किया था, लेकिन हमें जनता ने 105 सीटें देकर ज्यादा समर्थन दिया। लेकिन, शिवसेना ने यह देखते हुए कि उसके बगैर सरकार नहीं बन सकती है तो वह सीएम की मांग पर अड़ गई, जबकि ऐसी कोई तय नहीं हुई थी। शिवसेना ने सरकार गठन के लिए हमसे बात करने की बजाय एनसीपी से बात की। यही नहीं शिवसेना पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि जिनके बारे में हमने सुना था कि वे मातोश्री से बाहर नहीं निकले, वे निकल-निकलकर तमाम लोगों से मिल रहे थे।

नई दिल्ली। महाराष्ट्र में एनसीपी नेता अजित पवार के समर्थन से मुख्यमंत्री बने देवेंद्र फडणवीस की कुर्सी रहेगी या फिर बचेगी, इसका फैसला बुधवार शाम पांच बजे तक हो जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने फडणवीस सरकार को बुधवार को बहुमत परीक्षण का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्रोटेम स्पीकर नियुक्त कर उसकी देख-रेख में शक्ति परीक्षण की प्रक्रिया पूरी करवाई जाएगी। कोर्ट ने साफ किया कि गुप्त मतदान नहीं हो और फ्लोर टेस्ट का लाइव टेलिकास्ट किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट ने की कई अहम टिप्पणी
जस्टिस एन वी रमना, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा होनी चाहिए। पीठ ने कहा कि कोर्ट और विधायिका पर लंबे समय से बहस चल रही है। कोर्ट ने कहा कि अभी अंतरिम बात करनी है। कोर्ट ने कहा कि अभीतक विधायकों की शपथ नहीं हुई है। लोगों को अच्छे शासन की जरूरत है।

नई दिल्ली। अयोध्या मसले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने पुनर्विचार याचिका न दाखिल करने का फैसला लिया है। वक्फ बोर्ड के इस फैसले से शांतिपूर्ण माहौल में राम मंदिर निर्माण का रास्ता साफ होता दिख रहा है। सुन्नी वक्फ बोर्ड के सदस्य अब्दुल रज्जाक खान ने कहा कि हमारी मीटिंग में बहुमत से रिव्यू पिटिशन दाखिल न करने का प्रस्ताव पारित हुआ है। हालांकि इस बैठक में शीर्ष अदालत की ओर से मस्जिद निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन दिए जाने के आदेश को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई। गौरतलब है कि बोर्ड ने पहले भी अपनी ओर से जारी कई बयानों में कहा था कि वह इस मसले पर रिव्यू पिटिशन के पक्ष में नहीं है।

इससे पहले देश की 100 दिग्गज मुस्लिम हस्तियों ने भी रिव्यू पिटिशन फाइल करने का विरोध किया था। रिव्यू पिटिशन दाखिल करने का विरोध करने वाली हस्तियों में नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी जैसे फिल्मी सितारे भी शामिल थे। हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने पिछले दिनों लखनऊ में अपनी मीटिंग में रिव्यू पिटिशन दाखिल करने की बात कही थी।
बता दें कि 9 नवंबर को 70 साल से अयोध्या मसले पर चल रहे केस ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विवादित भूमि राम मंदिर के लिए दिए जाने का फैसला दिया था। इसके अलावा मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में ही 5 एकड़ जमीन कहीं और दिए जाने का आदेश दिया था। तब सुन्नी वक्फ बोर्ड ने इस फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटिशन पर फैसला लेने के लिए 26 नवंबर की तारीख तय की थी।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र में फ्लोर टेस्ट पर मंगलवार को सुबह साढ़े 10 बजे फैसला सुनाएगा। बता दें कि कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना ने देवेंद्र फडणवीस को सीएम और अजित पवार को डेप्युटी सीएम बनाने के खिलाफ शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की थी। तीनों दलों ने कोर्ट में अपनी दलीलों में विधानसभा में तुरंत बहुमत परीक्षण की मांग की थी। अब कोर्ट ने आज मामले की सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। गौरतलब है कि शनिवार रात को तीनों दलों ने कोर्ट में याचिका दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने रविवार को भी इस मामले की सुनवाई की थी।

फ्लोर टेस्ट पर ये दलीलें रखी गईं
कोर्ट ने साफ किया कि वह कल सुबह साढ़े 10 बजे इस मामले में अपना आदेश जारी करेगा। पक्ष और विपक्ष ने इस मामले में अपने तर्क रखे। बीजेपी और सीएम फडणवीस की तरफ से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी जहां इस मामले में विस्तृत सुनवाई की वकालत कर रहे थे और दलीलें दी कि स्पीकर बहुमत परीक्षण करवा सकते हैं। वहीं, कांग्रेस, एनसीपी और शिवसेना के वकील जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की मांग कर रहे थे।

राज्यपाल की तरफ से ये तर्क दिए गए
राज्यपाल की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि कैसे राज्यपाल ने देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार को शपथ दिलाई। उन्होंने राज्यपाल को सौंपी। समर्थन की चिट्ठी पहले मराठी वाली में कोर्ट में पेश की थी। इसके बाद कोर्ट ने कहा कि इसका अंग्रेजी अनुवाद कहां है? फिर तुषार मेहता ने अंग्रेजी वाली चिट्ठी सौंपी और उसे कोर्ट में पढ़ना शुरू किया। उन्होंने दलील दी कि राज्यपाल ने 9 नवंबर तक इंतजार किया। पहले बीजेपी ने मना कर दिया। 10 तारीख को शिवसेना से पूछा तो उन्होंने भी मना कर दिया। फिर 11 नवंबर को एनसीपी ने भी मना कर दिया और राज्यपाल में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। मेहता ने राज्यपाल को सौंपी गई चिट्ठी के आधार पर कहा कि इसी के कारण उन्होंने शपथ दिलाया गया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में 22 नवंबर को लिखी गई एनसीपी नेता अजित पवार की उस चिट्ठी को भी सौंपा गया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि एनसीपी के सभी 54 विधायकों ने उन्हें नेता चुना है और सरकार बनाने के लिए अधिकृत किया है। उन्होंने कहा कि 12 नवंबर के बाद राज्यपाल के पास क्यों नहीं गए याचिकाकर्ता। उन्होंने कहा कि आपके आदेश का दूरगामी असर होगा। विस्तृत सुनवाई के बाद ही आदेश जारी करें। जो चिट्ठी राज्यपाल को दी गई वो कानूनी रूप से सही है। मेहता ने कहा कि राज्यपाल ने अपनी समझ के अनुसार समय तय किया है। अगर आप फ्लोर टेस्ट का समय तय करेंगे तो लगेगा आप राज्यपाल के ऊपर अपीलीय अधिकार इस्तेमाल कर रहे। विपक्ष को टूट का डर है इसलिए वे जल्दबाजी में हैं।

मुंबई। महाराष्ट्र में सरकार बनाने की रस्साकशी के बीच बीजेपी ने बाजी पलटते हुए एनसीपी के अजित पवार की मदद से सरकार बना ली है। सरकार गठन के लिए शिवसेना के नेतृत्व में एनसीपी और कांग्रेस के बीच सरकार गठन के लिए बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी थी लेकिन शनिवार सुबह बड़ा उलटफेर करते हुए देवेंद्र फडणवीस ने सीएम और एनसीपी विधायक दल के नेता अजित पवार ने डेप्युटी सीएम पद की शपथ ली। अब भले ही एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार यह कह रहे हों कि यह अजित पवार का फैसला था और उन्हें संज्ञान में लिए बिना अजित ने बीजेपी के साथ सरकार बनाई लेकिन महाराष्ट्र में एनसीपी की सहयोगी कांग्रेस इस पूरे उलटफेर के लिए एनसीपी को ही जिम्मेदार मान रही है।

अहमद पटेल ने एनसीपी पर साधा निशाना
शिवसेना और एनसीपी की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस के थोड़ी ही देर बार कांग्रेस ने मीडिया से बात की। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनैतिक सलाहकार और राज्यसभा सांसद अहमद पटेल ने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए कहा, जैसे ही शरद पवार दिल्ली में आए। उनके घर दो बैठकें हुईं। सबकुछ तय हो गया था। कुछ चीजें शिवसेना के साथ तय होना था बस। एक दो मुद्दों पर ज्यादा चर्चा की जरूरत थी इसलिए हम 12 बजे मिलने वाले थे। इससे पहले आज सुबह जो कांड हुआ उसकी आलोचना करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। एनसीपी से कुछ लोग बाहर निकले, उन्होंने एक लिस्ट दे दी। जिससे यह घटना घटी।
साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नहीं हुई कांग्रेस
एनसीपी-शिवसेना की साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहले कांग्रेस के नेता भी शामिल होने वाले थे लेकिन महाराष्ट्र कांग्रेस के अध्यक्ष बालासाहेब थोराट और अशोक चव्हाण साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले ही बाहर निकल गए। कांग्रेस अब ताजा हालात पर अलग से बैठक करेगी। सूत्रों के मुताबिक राज्य में सियासी उलटफेर के लिए कांग्रेस एनसीपी चीफ शरद पवार को जिम्मेदार मान रही है। कांग्रेस की तरफ से कहा भी गया कि बिना शरद पवार के एनसीपी में टूट संभव नहीं है।

नई दिल्ली। 70 साल तक चली कानूनी लड़ाई, 40 दिन तक लगातार मैराथन सुनवाई के बाद आज अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आ गया है। राजनीतिक रूप से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने सर्वसम्मति यानी 5-0 से ऐतिहासिक फैसला सुनाया। निर्मोही अखाड़े के दावे को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान और सुन्नी वक्फ बोर्ड को ही पक्षकार माना। टॉप कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा विवादित जमीन को तीन पक्षों में बांटने के फैसले को अतार्किक करार दिया। आखिर में सुप्रीम कोर्ट ने रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने साथ में यह भी आदेश दिया कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को अयोध्या में ही कहीं और 5 एकड़ जमीन दी जाए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाए। इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व देने को कहा है।

विवादित जमीन रामलला की, सुन्नी पक्ष को कहीं और जमीन
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने फैसले में कहा कि टाइटल सिर्फ आस्था से साबित नहीं होता है। 1856-57 तक विवादित स्थल पर नमाज पढ़ने के सबूत नहीं हैं। उधर हिंदू इससे पहले अंदरूनी हिस्से में भी पूजा करते थे। हिंदू बाहर सदियों से पूजा करते रहे हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड को कहीं और 5 एकड़ की जमीन दी जाए। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बनाकर स्कीम बताए। इस ट्रस्ट में निर्मोही अखाड़े को भी प्रतिनिधित्व मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने आखिर में 2.77 एकड़ जमीन का मालिकाना हक रामलला विराजमान को दे दिया। कोर्ट ने आगे कहा कि हर मजहब के लोगों को संविधान में बराबर का सम्मान दिया गया है।

मुंबई। बीजेपी के साथ खींचतान के चरम पर पहुंचने के बाद भी शिवसेना ने सीएम पद पर अड़े रहने की बात कही है। पार्टी के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि शिवसेना अब भी सीएम पद की मांग पर कायम है। गवर्नर से मिलने के बाद बीजेपी नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस के जवाब में राउत ने कहा कि बीजेपी यदि सरकार नहीं बना रही है तो साफ है कि उसके पास बहुमत नहीं है। वे राष्ट्रपति शासन लगाने की मंशा रखते हैं। यदि वे सरकार नहीं बना पा रहे हैं तो फिर बताएं कि हमारे पास बहुमत नहीं है। यदि वे राज्यपाल से मिलकर आए हैं तो उन्हें 145 विधायकों की सूची उन्हें सौंपनी चाहिए थी। राउत ने कहा पार्टी विधायकों से कहा कि हमारी मांग अब भी बदली नहीं है। यही नहीं बीजेपी को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे साथ ब्लैकमेलिंग नहीं चलेगी। राउत ने कहा कि जब बीजेपी गवर्नर के पास गई तो फिर सरकार गठन का दावा क्यों नहीं पेश किया। ठाकरे फैमिली के वफादार माने जाने वाले राउत ने कहा कि हम अब भी सीएम की मांग पर कायम हैं। सरकार में शिवसेना का मुख्यमंत्री होना चाहिए।

मुंबई. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव (Maharashtra Assembly Election) के परिणाम आने के बाद पिछले 11 दिन से सरकार बनाने को लेकर जारी खींचतान के बीच मंगलवार को एनसीपी (NCP) ने बड़ा बयान दिया है. अभी तक विपक्ष में बैठने की बात करने वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने सरकार बनाने की इच्छा जताते हुए शिवसेना के सामने सरकार गठन के लिए कुछ शर्त रखी हैं. एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा कि यदि शिवसेना (Shiv Sena) हमारे साथ गठबंधन में सरकार बनाती है तो पांच साल के लिए मुख्यमंत्री (Chief Minister) उनका होगा. हमें सीएम का पद नहीं चाहिए. उन्होंने कहा कि इस स्थिति में दो डिप्टी सीएम के पद होंगे उनमें भी एक शिवसेना का ही होगा, लेकिन ये बातें तभी संभव होंगी जब शिवसेना बीजेपी (BJP) के साथ अपना गठबंधन तोड़ ले. 

मुंबई. भारतीयों को अब सोना ज्यादा लुभा नहीं पा रहा है. जुलाई-सितंबर तिमाही के दौरान भारत में सोने की डिमांड 32 फीसदी गिरकर 123.9 टन पर आ गई है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ओर से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि आर्थिक नरमी और स्थानीय स्तर पर ऊंची कीमतों की वजह से भारत की सोने की मांग पिछले साल के मुकाबले इस साल सितंबर तिमाही में 32 फीसदी गिरकर 123.9 टन पर आ गई है. वहीं, सोने का आयात भी 2019 की तीसरी तिमाही में 66 प्रतिशत गिरकर 80.5 टन रह गया. चीन के बाद भारत सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है. आपको बता दें कि दुनियाभर में सोने की डिमांड तीसरी तिमाही में बढ़कर 1,107.9 टन पर पहुंच गई है. एक साल पहले की इसी अवधि में मांग 1,079 टन थी.

क्यों गिरी डिमांड- डब्ल्यूजीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, जूलर्स पहले से आयात किए स्टॉक और पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) से अपनी मांग को पूरा कर रहे हैं. इससे आयात में गिरावट आई है. इसके अलावास्थानीय बाजार में, सितंबर में सोने का भाव 39,011 रुपये प्रति दस ग्राम पर था , जो अब 38,800 रुपये प्रति दस ग्राम के आसपास है. ऐसे में महंगा होने से डिमांड पर असर पड़ा है.

आपको बता दें कि 2019 की तीसरी तिमाही में सोने की डिमांड 32.3 फीसदी गिरकर 123.9 टन रह गई. इसमें आभूषणों की कुल मांग का 101.6 टन और 22.3 टन सिक्का/बिस्कुट मांग शामिल है. 2018 की तीसरी तिमाही में सोने की मांग 183.2 टन थी.

नई दिल्ली। बैंक में जरूरी काम निपटाने की सोच रहे हैं तो इस खबर को पूरा पढ़ लीजिए। ऐसा इसलिए क्योंकि नवंबर में 12 दिन बैंक बंद रहेंगे। यहां आपको किसी भी प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े इसके लिए आरबीआई ने इसे लेकर अभी से सूचना जारी कर दिया है।

आरबीआई की वेबसाइट से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नवंबर में बैंक एक नहीं, दो नहीं, बल्कि 13 दिन बंद रहेंगे। वहीं, अलग-अलग राज्यों में छुट्टियों होने की वजह से इस माह पूरे 12 दिन बैंक में काम नहीं होंगे। इसलिए अगर खाताधारक कुछ जरूरी काम निपटाने की सोच रहे हैं तो इन तारीखों को जनना बेहद जरूरी है।

इस महीने इस महीने छठ पूजा, गुरु नानक जयंती, कन्नड राज्योत्सव, वांग्ला फेस्टिवल, आदि के चलते बैंक बंद रहेंगे। चलिए आपको बताते हैं नवंबर में किस दिन बैंक बंद रहेंगे।

इन तारीखों में बंद रहेंगे बैंक
2 नवंबर – छठ पूजा
3 नवंबर – रविवार
9 नवंबर – महीने का दूसरा शनिवार
10 नवंबर – रविवार
12 नवंबर – गुरु नानक जयंती
17 नवंबर – रविवार
23 नवंबर – चौथा शनिवार
24 नवंबर – रविवार

मुंबई। सट्टा बाजार अमूमन चुनाव तक सक्रिय रहता है लेकिन महाराष्ट्र में चुनाव के रिजल्ट के एक सप्ताह बाद भी सटोरियों की अभी दिलचस्पी खत्म नहीं हुई है। एक विश्वस्त सूत्र ने एनबीटी को बताया कि मुंबई के सट्टा बाजार में इस बात के भाव लगने शुरू हो गए हैं कि महाराष्ट्र में एक साल में फिर विधानसभा चुनाव होंगे। इस सूत्र के अनुसार, शुक्रवार को महाराष्ट्र में स्थाई सरकार का भाव सिर्फ 20 रुपये था।
इस सूत्र का कहना है कि महाराष्ट्र में इन दिनों जिस तरह का माहौल है, सटोरियों को लगता है कि यदि कोई भी सरकार बन भी गई तो भी वह चंद महीनों से ज्यादा टिकेगी नहीं। इसलिए संभावना है कि साल 2020 में राज्य में फिर चुनाव होगा। दूसरी ओर, राज्य में राजनीतिक घटनाक्रम पर नौकरशाहों की भी दिलचस्पी बढ़ गई है। उन्होंने अपना खुफिया नेटवर्क फैला दिया है।

मुंबई पुलिस कमिश्नर संजय बर्वे को अगस्त में तीन महीने का सेवा विस्तार मिला था, जो इस 30 नवंबर को खत्म हो रहा है। तब ऐसा माना गया था और अब भी माना जा रहा है कि यदि बीजेपी का मुख्यमंत्री रहा और गृह मंत्रालय भी बीजेपी के पास रहा, तो बर्वे को अभी तीन माह का विस्तार और मिल सकता है। दूसरे राजनीतिक समीकरण में उन्हें दूसरा एक्सटेंशन मिल पाएगा या नहीं, यह वक्त ही बताएगा।

दिग्गज सोशल मीडिया एप व्हाट्सएप (Whatsapp) ने इजरायल की जासूसी कंपनी एनएसओ ग्रुप (NSO) पर गंभीर आरोप लगाया है। इंस्टेंट मैसेजिंग एप ने कहा है कि यह कंपनी भारतीय पत्रकारों और समाजिक कार्यकर्ताओं की जासूसी कर रही थी। व्हाट्सएप ने हैकिंग की पुष्टि करते हुए इजरायली जासूसी कंपनी पर मुकदमा भी ठोका है।

व्हाट्सएप के अधिकारी ने दिया बयान 

व्हाट्सएप के एक अधिकारी ने कहा है कि एनएसओ कंपनी भारतीय पत्रकारों और मानवधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी Peagasus सिस्टम के जरिये कर रही थी। साथ ही, व्हाट्सएप ने एक दर्जन से ज्यादा वकील, प्रोफेसर, दलित कार्यकर्ता और पत्रकारों को इस बारे में सतर्क किया है। वहीं, यूजर्स के डिवाइसेज को मई में सर्विलांस पर लिया गया था।

एनएसओ पर लगाया गंभीर आरोप

मुंबई। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव के नतीजे आए एक हफ्ते हो चुके हैं लेकिन सत्ता के लिए रस्साकशी अब तक जारी है। बीजेपी और शिवसेना के बीच अभी 50-50 फॉर्म्युले पर मामला अटका हुआ है। इस बीच शिवसेना विधायक दल की बैठक में एकनाथ शिंदे को नेता चुना गया है। इसके लिए आदित्य ठाकरे ने प्रस्ताव रखा था, जिस पर शिवसेना के सभी 56 विधायकों ने अपनी सहमति दी। वहीं सुनील प्रभु को सदन में पार्टी का चीफ विप बनाया गया है। अब सभी विधायक राज्यपाल से मुलाकात करेंगे। सूत्रों के मुताबिक बैठक में बीजेपी के उपमुख्यमंत्री पद वाले ऑफर पर चर्चा नहीं हुई।

इससे पहले कयास लगाए जा रहे थे कि इस बैठक में आदित्य ठाकरे को विधायक दल का नेता चुना जाएगा। हालांकि आदित्य ठाकरे ने खुद एकनाथ शिंदे के नाम का प्रस्ताव रखा। इसी के साथ ही सत्ता को लेकर चल रहा सस्पेंस और गहरा गया है। दूसरी ओर शिवसेना के सभी विधायक राज्यपाल से मुलाकात करने जा रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता संजय राउत का कहना है कि शाम को 6.15 बजे पार्टी के विधायक राज्यपाल से मिलेंगे। बताया गया है कि यह मुलाकात राज्य मेें सूखे की समस्या को लेकर की जा रही है। हालांकि कयास लगाए जा रहे हैं कि इस दौरान सरकार बनाने की संभावनाओं पर भी बात हो सकती है।

लखनऊ। यूपी के शहरों में वायु प्रदूषण सबसे अधिक देखने को मिल रहा है। बुधवार को यूपी के कई शहरों में दिनभर धुंध की चादर छाई रही। इस दौरान लोग घर से निकलने के लिए बचते रहे। कई लोग मास्क लगातर घूमते नजर आए। बुधवार को गाजियाबाद सबसे अधिक प्रदूषित रहा और इसके बाद टॉप 10 लिस्ट में यूपी के 7 अन्य शहर शामिल हैं जहां एयर क्वॉलिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 400 से भी ऊपर यानी बेहद खराब रहा।

सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा जारी डेटा के अनुसार, बुधवार को गाजियाबाद का एक्यूआई 478 था जो पूरे देश में सबसे अधिक रहा। इसके बाद 461 एक्यूआई के साथ बागपत चौथे नंबर पर, नोएडा (450) पांचवे नंबर पर, ग्रेटर नोएडा (438) छठे नंबर पर और हापुड़ (435) सातवें नंबर पर रहा।

मेरठ (430) और बुलंदशहर (430) आठवे नंबर पर और मुजफ्फरनगर (428) नवे नंबर पर रहा। वहीं देश की राजधानी दिल्ली 419 एक्यूआई के साथ 10वें नंबर पर रही। इसके अलावा हरियाणा के दो शहर पानीपत (475) और बल्लभगढ़ (467) एयर क्वॉलिटी इंडेक्स लिस्ट में दूसरे और तीसरे नंबर पर रहे।

हरियाणा, यूपी और दिल्ली में एयर पल्यूशन अक्टूबर के दूसरे हफ्ते से बढऩा शुरू हुआ लेकिन दिवाली के बाद यह बढ़कर काफी अधिक हो गया है। यूपी और हरियाणा के शहर शुरुआत से ही टॉप 10 शहरों में हैं। मंगलवार को यूपी के चार शहर पहली बार टॉप 10 की श्रेणी में आए जिनका एक्यूआई लेवल 400 पार हो गया है। इससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो रही हैं, खासकर दिल और फेफड़े के रोगियों के लिए प्रदूषित हवा में सांस लेना नुकसानदेह है।

पर्यावरणविद वेंकटेश दत्ता ने बताया, आने वाले दिनों में एयर क्वॉलिटी और खराब ही होगी क्योंकि सर्दियों में तापमान गिरेगा और पर्यावरण में नमी बढ़ेगी। ग्रीन कॉरिडोर की कमी और बरोक-टोक निर्माण कार्य एयर क्वॉलिटी खराब होने की मुख्य वजह है।