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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



कोलकाता।  पश्चिम बंगाल के हुगली ज़िले में फ्रेंच कॉलोनी रहा चंदननगर अक्सर जगद्धात्री पूजा और बिजली के कारीगरों की वजह से सुर्खियों में रहता है. लेकिन इस बार वो इलाके के एक युवक गौरव अधिकारी के फ़ेसबुक पर लिखे इस पोस्ट के कारण सुर्खियों में है। इसी महीने आस्था नामक एक युवती ने भी अपनी मां के लिए 50 साल के एक सुंदर व्यक्ति की तलाश में एक ट्वीट किया था. वो ट्वीट काफी वायरल हुआ था।

पांच साल पहले गौरव के पिता का निधन हो गया था. उसके बाद उनकी 45 वर्षीया मां घर में अकेले ही रहती हैं. लेकिन आखिर उन्होंने फ़ेसबुक पर ऐसी पोस्ट क्यों लिखी? गौरव बताते हैं, मेरे पिता कुल्टी में नौकरी करते थे. वर्ष 2014 में उनके निधन के बाद मां अकेले पड़ गई हैं. मैं अपने माता-पिता की इकलौती संतान हूं. मैं सुबह सात बजे ही नौकरी पर निकल जाता हूं और लौटने में रात हो जाती है. पूरे दिन मां अकेले ही रहती हैं. मुझे महसूस हुआ कि हर आदमी को साथी या मित्र की जरूरत है।
गौरव ने आखिर अपने फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा है. उन्होंने लिखा है, मेरी मां डोला अधिकारी हैं. मेरे पिता का निधन पांच साल पहले हो गया था. नौकरी की वजह से मैं अधिकतर घर से बाहर रहता हूं. इससे मां अकेली पड़ जाती हैं. मेरी मां को किताबें पढ़ना और गाने सुनना पसंद हैं. लेकिन मैं अपनी मां के लिए एक साथी चाहता हूं. मुझे लगता है कि पुस्तकें और गीत कभी किसी साथी की जगह नहीं ले सकते. एकाकी जीवन गुजारने की बजाय बेहतर तरीके से जीना ज़रूरी है. मैं आने वाले दिनों में और व्यस्त हो जाऊंगा। शादी होगी, घर-परिवार होगा. लेकिन मेरी मां? हमलोगों को रुपये-पैसे, जमीन या संपत्ति का कोई लालच नहीं हैं. लेकिन भावी वर को आत्मनिर्भर होना होगा। उसे मेरी मां को ठीक से रखना होगा. मां की खुशी में ही मेरी खुशी है. इसके लिए हो सकता है कि कई लोग मेरी खिल्ली उड़ाएं या किसी को लग सकता है कि मेरा दिमाग ख़राब हो गया है. ऐसे लोग मुझ पर हंस सकते हैं. लेकिन उससे मेरा फैसला नहीं बदलेगा. मैं अपनी मां को एक नया जीवन देना चाहता हूं। चाहता हूं कि उनको एक नया साथी और मित्र मिले।

भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। मरीजों का आंकड़ा 29 हजार को पार कर चुका है। हालांकि, अन्य देशों की तुलना में भारत में कोरोना के संक्रमण की फैलने की रफ्तार अब भी काफी कम है। इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से निर्देश जारी किए गए हैं कि जिन लोगों में कोरोना महामारी के हल्के लक्षण हैं या फिर जो कोरोना संदिग्ध हैं, उन्हें घर पर ही Quarantine किया जा सकेगा। विभाग की ओर से जारी किए गए दिशा निर्देशों में कहा गया है कि अगर कोरोना के संदिग्ध व्यक्ति और हल्के लक्षणों वाले मरीजों को घर में ही आइसोलेट करने की जगह है और उनकी 24 घंटे देखरेख करने के लिए लोग उपलब्ध हैं तो ऐसे मरीज अपने घर पर ही Quarantine में रह सकते हैं।

यह हैं नए दिशा-निर्देश

कोविड-19 को लेकर जारी नए दिशा निर्देशों के मुताबिक लक्षणों के आधार पर मरीजों की डायग्नोस्टिक प्रोसेस के लिए अलग-अलग जगहों पर भेजा जाना चाहिए।

बहुत हल्के या फिर हल्के लक्षणों वाले मरीजों को कोविड केयर सेंटर, मध्यम स्तर के मरीजों को कोविड हेल्थ सेंटर और गंभीर श्रेणी के रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए।

बहुत हल्के या फिर प्री सिम्टोमैटिक मामलों में मरीजों को अपने घर पर ही Self Quarantine और Isolation का विकल्प दिया गया है।

होम Quarantine के लिए ये करना होगा

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक मरीज को खुद आकर अपनी बीमारी की जानकारी देनी होगी। उसे यह बताना होगा कि वह अपनी मर्जी से ही घर पर ही आइसोलेट होना चाहता है। अब तक के नियमों के हिसाब से संदिग्ध रोगियों और हल्के लक्षणों वाले मरीजों को कोविड केयर सेंटर में ऱखे जाने का प्रावधान था।

मुंबई की मेयर किशोरी पेडनेकर नर्स की वर्दी पहनकर सोमवार सुबह कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए बीएमसी के नायर अस्पताल का दौरा करने पहुंची। कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में सबसे आगे डॉक्टर, नर्स और अन्य चिकित्साकर्मी सबसे आगे की पंक्ति में खड़ी हैं। पेडनेकर खुद भी एक नर्स रह चुकी हैं। वह अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ के साथ घुलमिल गईं और महामारी से निपटने के दौरान आने वाली कठिनाइयों के बारे में उनसे पूछताछ की।

बीएमसी के एक अधिकारी ने कहा कि पेडनेकर ने यह सुनिश्चित किया कि अस्पताल में उनकी यात्रा के दौरान सामाजिक दूरी का पालन किया जाए। उन्होंने कहा- "मैंने एक नर्स के रूप में काम किया है और मैं व्यावसायिक चुनौतियों के बारे में पूरी तरह से जानती हूं। मैंने अपनी नर्स की वर्दी इसलिए पहनी ताकि मैं नर्सिंग बिरादरी को संदेश दे सकूं कि मैं उनमें से एक हूं। मैंने नर्सिंग स्टाफ के साथ बातचीत की ताकि वे महामारी के खिलाफ लड़ाई में उन्हें प्रोत्साहित कर सकें। ये कठिन समय हैं। हमें एक दूसरे से इस महामारी से लड़ने के लिए खड़े होने की जरूरत है।

पेइचिंग। कोरोना वायरस का सोर्स क्या है? इस एक सवाल के कई जवाब हैं, लेकिन कोई भी जवाब पुष्ट नहीं है। ऐसे में चीन पर अंतरराष्ट्रीय जांच का दबाव बढ़ता जा रहा है। अब चीन इन मांगों से बुरी तरह से बिफर गया है और उसने सोमवार को कहा कि इस तरह की जांच का कोई कानूनी आधार नहीं है और अतीत में ऐसी महामारियों की जांच के कोई ठोस नतीजे नहीं आए हैं। कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया में करीब तीस लाख लोगों को संक्रमित किया है और इसने अब तक दो लाख से से अधिक लोगों की जान ली है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अलावा ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कोविड-19 के स्रोत को लेकर चीन से अधिक पारदर्शिता की मांग की है। ट्रंप ने वायरस के स्रोत की जांच की मांग को आगे बढ़ाते हुए कहा है कि इसका पता लगाया जाना चाहिए कि क्या यह वुहान इंस्टिट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से निकला था।

जांच नहीं चाहता चीन, ऐसे किया बचाव
यह पूछे जाने पर कि क्या चीन वायरस के स्रोत के बारे में स्वतंत्र जांच के लिए सहमत होगा, तो चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि पहले भी ऐसे वायरस की जांच से बहुत अधिक हासिल नहीं हुआ। उन्होंने कहा, वायरस की उत्पत्ति का स्रोत विज्ञान का विषय है और इसका अध्ययन वैज्ञानिकों और पेशेवरों द्वारा किया जाना चाहिए। इस तरह का अनुसंधान और निर्णायक उत्तर केवल महामारी विज्ञान के अध्ययन और वायरोलॉजी अध्ययनों से सबूत प्राप्त होने के बाद ही हासिल किया जा सकता है। यह एक बहुत ही जटिल मुद्दा है, अक्सर इसमें बहुत समय लगता है और अनिश्चितता होती है।

नई दिल्ली। चीन छोड़कर भारत में मैन्युफैक्चरिंग इकाई लगाने की इच्छुक लगभग 1000 कंपनियों के भारत सरकार के संपर्क में रहने की खबर आने के बाद केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। गडकरी ने कहा कि भारत को कोरोना वायरस महामारी के बीच चीन के लिए विश्व की घृणा को बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित करके अपने लिए आर्थिक अवसर के रूप में देखना चाहिए। गडकरी ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए प्रवासी भारतीय छात्रों से रूबरू होते हुए कहा, सारी दुनिया में अब, उनमें चीन के लिए घृणा है। क्या हमारे लिए इसे भारत के लिए एक अवसर में बदलना संभव है।

विदेशी निवेश को आकर्षित करेंगे
चीन से बाहर जाने वाले व्यवसायों के लिए जापान द्वारा आर्थिक पैकेज घोषण का जिक्र करते हुए गडकरी ने कहा, मेरा मानना है कि हमें इस पर सोचना चाहिए और हम इस पर ध्यान केंद्रित करेंगे। हम उन्हें और हर उस चीज को मंजूरी देंगे और विदेशी निवेश आकर्षित करेंगे।

वायरस की सूचना संवेदनशील विषय
जब उनसे पूछा गया कि यदि यह पाए जाने पर कि चीन ने कोरोना वायरस से जुड़ी सूचना को जानबूझकर छिपाया है तो क्या भारत कोई कार्रवाई करेगा, उन्होंने कहा कि यह एक संवेदनशील विषय है, जो विदेश मंत्रालय और प्रधानमंत्री से जुड़ा है और इसलिए इस पर उनका प्रतिक्रिया देना उचित नहीं होगा।

नई दिल्‍ली। देशव्‍यापी लॉकडाउन को एक महीना पूरा हो चुका है। दूसरा चरण 3 मई तक चलना है। मगर कई राज्‍यों ने दूसरे स्‍टेट्स में बसें भेज दी हैं। इन बसों में सवार होकर लोग अपने-अपने राज्‍य वापस लौटेंगे। कई हजार प्रवासी तो अपने-अपने राज्‍य पहुंच भी चुके हैं। उत्‍तर प्रदेश ने शनिवार से ही इसकी शुरुआत कर दी थी। मध्‍य प्रदेश ने महाराष्‍ट्र को पत्र लिखा है कि वहां के लोगों को वापस आने दें। महाराष्‍ट्र ने राजस्‍थान सरकार से अपने लोगों के लिए सेफ पैसेज मांगा है। छत्‍तीसढ़ ने भी कोटा में बसें भेजकर डेढ़ हजार छात्रों को बुलवा लिया है। जम्‍मू-कश्‍मीर ने भी अपने लोगों को अलग-अलग राज्‍यों से बुलाना शुरू कर दिया है।

क्‍या बढ़ेगा लॉकडाउन?
यह हाल तब है कि कई राज्‍य लॉकडाउन को 3 मई के बाद भी जारी रखना चाहते हैं। क्‍या प्रवासी मजदूरों को इसलिए बुलाया जा रहा है ताकि उन्‍हें अपने ही राज्‍य में रखा जाए। इसी दौरान, लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोला जाए। यह भी संभव है कि प्रवासी मजदूरों का संकट दूर करने के बाद, सावधानीपूर्वक आर्थिक गतिविधियां शुरू हों मगर लॉकडाउन की मियाद बढ़ा दी जाए। क्‍योंकि अगर प्रवासी मजदूरों के बाहर रहते लॉकडाउन बढ़ा तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। कई राज्‍यों से पिछले एक महीने में ऐसी तस्‍वीरें आ चुकी हैं।

दुनिया के सबसे प्रसिद्ध भौतिकविदों में से एक, स्टीफन हॉकिंग अपनी वसीयत में 16.3 मिलियन पाउंड छोड़ गए हैं। मोटर न्यूरॉन बीमारी के कारण उन्होंने इसमें हस्ताक्षर नहीं किए थे और अंगूठे का निशान लगाया था। हॉकिंग ने अपने तीन बच्चों और तीन पोते-पोतियों के लिए ट्रस्ट फंड में बड़ी संपत्ति छोड़ी है। द सन की एक रिपोर्ट के अनुसार, अपने वफादार निजी सहायक 71 वर्षीय जूडिथ क्रैसडेल को उन्होंने 10,000 पाउंड दिए हैं।

बताते चलें कि हॉकिंग की मृत्यु साल 2018 में कैम्ब्रिज में 76 वर्ष की आयु में हुई थी। यह भी अपने आप में बहुत खास बात है क्योंकि मोटर न्यूरॉन बीमारी की वजह से 21 साल की उम्र में डॉक्टरों ने चेतावनी दी थी कि वह तीन साल से ज्यादा नहीं जी पाएंगे। मगर, जीने की ललक और मजबूत इच्छाशक्ति की वजह से हॉकिंग न सिर्फ जीए, बल्कि अपने सयम के महान शोधकर्ताओं में से एक बने।

वैज्ञानिक ने अपने अकादमिक पुरस्कारों और पदकों को अपने बच्चों, रॉबर्ट, टिमोथी और लूसी के बीच बांटने की बात भी वसीयत में लिखी है, जिसमें 13 मानद उपाधियां, यूएस प्रेसिडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम और कंपेनियन ऑफ ऑनर शामिल है। हॉकिंग के 13-पन्नों की अपनी वसीयत साल 2007 में अंगूठे का निशान लगाकर बनाई थी क्योंकि मोटर न्यूरॉन बीमारी की वजह से वह हस्ताक्षर नहीं कर सकते थे।

वह पूरी तरह से व्हीलचेयर पर निर्भर थे और अपने भाषण या संवाद के लिए एक कंप्यूटर का इस्तेमाल करते थे। बताते चलें कि इस हफ्ते की शुरुआत में उनकी बेटी लूसी ने कहा कि रॉयल पैपवर्थ अस्पताल (Royal Papworth Hospital) में उनका वेंटिलेटर को दान कर दिया है, जहां COVID-19 के रोगियों की देखभाल चिकित्साकर्मी कर रहे हैं। उनके पिता को इस अस्पताल में शानदार, समर्पित और दयालु देखभाल मिली थी।

न्यूयॉर्क। वायरस से जुड़े शोधार्थियों का कहना है कि इस बात की संभावना कम है कि नोवेल कोरोना वायरस चीन या फिर किसी और जगह के लैब से लीक हुआ है। लैब एक्सिडेंट जैसी चीजों से परिचित कई वैज्ञानिकों का यह मूल्यांकन है। दरअसल, हाल के सप्ताह में ट्रंप प्रशासन की तरफ से दुर्घटना की यह थ्योरी आई है। महीने की शुरुआत में अमेरिकी विदेश विभाग का एक संदेश लीक हुआ था जो स्टोरी वॉशिंगटन पोस्ट ने प्रकाशित किया था।
इसमें अमेरिका की तरफ से वुहान के लैब को लेकर चिंता जताई गई थी, वह शहर जहां कोरोना वायरस का पहला केस सामने आया था। खुफिया एजेंसियां दुर्घटना की संभावनाओं का मूल्यांकन कर रही हैं और पिछले बुधवार को ट्रंप ने वादा भी किया था कि घटनाक्रमों की जांच की जाएगी।

कैसे लीक होता है वायरस ?
न्यूज वेबसाइट एनपीआर के मुताबिक, जंगली जानवरों से वायरस के सैंपल इकट्ठा करने वाले 10 वैज्ञानिकों से बात कर यह जानकारी आई है कि लैब में दुर्घटना किस प्रकार हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दुर्घटनावश वायरस तभी लीक हो सकता है जब कई तरह के संयोग बने हों और प्रायोगिक प्रोटोकॉल का पालन न किया गया हो। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में प्रफेसर जोन्ना माजेट और प्रिडिक्ट नाम के वैश्विक प्रॉजेक्ट के निदेशक डेविस ने कहा, सभी सबूत इस बात का संकेत देते हैं कि यह लैब दुर्घटना नहीं थी।

विशेषज्ञों का यह मानना है कि वायरस इंसानों और जानवरों के बीच ट्रांसमिट हुआ है, जैसा कि यह पहले की महामारियों-इबोला, मारबर्ग, सार्स और मर्स के मामले में हो चुका है। न्यूयॉर्क सिटी के इको हेल्थ अलायंस के प्रेजिडेंट पीटर डसजाक ने कहा, दरअसल, खतरा इसलिए पैदा हुआ है क्योंकि पूरी दुनिया में इंसान जानवरों के करीब रहते हैं। इसलिए हमें वहां फोकस करने की जरूरत है अगर हम अगली महामारी को रोकना चाहते हैं।

फिर कैसे फैला कोरोना?
तो आखिर कोविड19 महामारी फैलनी कैसे शुरू हुई? शोधार्थियों का मानना है कि कोविड19 यह सीधे चमगादड़ों से इंसान में फैला या फिर किसी अन्य जानवर से। पहले यह माना जा रहा था कि वुहान के सीफूड बाजार से कोरोना फैला है जिसमें जंगली जानवर बेचे जाते हैं। हालांकि,इसको लेकर कोई सबूत अभी नहीं मिल पाए हैं।

टुलाने यूनिवर्सिटी में माइक्रोबायोलॉजिस्ट रॉबर्ट गैरी ने कहा कि वायरस के जेनेटिक एनालिसिस से पता चलता है कि यह 2019 की सर्दियों में फैलना शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि वायरस इस तरह से इंसानों में फैला जिसे पहले वैज्ञानिकों ने नहीं देखा था। उन्होंने कहा, कम्प्यूटर इस्तेमाल करने वाले भी इतना अच्छा काम नहीं कर सकते जितना यह वायरस कर रहा है। यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है जो हुई है।

नई दिल्ली। देश में कोरोनावायरस से मौतों का सिलसिला बढ़ता जा रहा है। शनिवार को 57 नई मौतों के साथ कोरोना से जान गंवाने वालों का आंकड़ा 775 पहुंच गया। इसके अलावा देशभर में कोरोना के कुल मामले 24,506 हो गए हैं। इनमें 18,668 एक्टिव केस हैं, जबकि 5063 लोग ठीक हो चुके हैं या फिर देश से जा चुके हैं। इसी के साथ देश में फिलहाल रिकवरी रेट 20% से ऊपर पहुंच गया है। देश में कोरोनावायरस से बिगड़ती इस स्थिति पर शनिवार को स्वास्थ्य मंत्रालय में मंत्री समूह की बैठक चल रही है।



पिछले 28 दिनों में 15 जिलों कोई नया केस नहीं आया है। मौजूदा समय में बीते 14 दिन से देश के 80 जिलों में कोरोना का नया केस नहीं आया है। नीति आयोग के सदस्य और एंपावर्ड ग्रुप-1 के अध्यक्ष डॉ.वीके पॉल के मुताबिक, हमारा विश्लेषण बताता है कि लॉकडाउन के कारण कोरोना वायरस के मामले दोगुने होने की दर में कमी आई है और इसने कई जानें भी बचाई हैं। लॉकडाउन का फैसला सही समय पर लिया गया था और यही वजह है कि आज देश में 23 हजार केस हैं, जो कि 73000 हो सकते थे।

मध्यप्रदेश। कोरोना वायरस के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार और धर्मगुरु लगातार अपील कर रहे हैं कि घरों में रहें और नमाज पढ़ने के लिए मस्जिदों में इकट्ठा न हों। मगर उत्तर प्रदेश के बहराइच के बौंडी थाना क्षेत्र स्थित एक मस्जिद में नमाज के लिए भीड़ इकट्ठा हुई, जब पुलिस टीम ने इन्हें मना किया तो इन लोगों ने पुलिस पर ही हमला कर दिया। जिले के अन्य थाना क्षेत्र में भी नमाज से रोकने पर पुलिस टीम पर हमले की घटना सामने आई। दोनों मामलों में पुलिस ने कुल 32 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

बौंडी में सिपाही पर जानलेवा हमला और लॉकडाउन का उल्लंघन करने पर 23 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके इलावा खैरीघाट थाना क्षेत्र के तेलियनपुरवा में लॉकडाउन के दौरान शुक्रवार की दोपहर में मस्जिद में सामूहिक रूप से नमाज पढ़ कर आ रहे लोगों की पुलिस से झड़प हो गई। नमाजियों ने पुलिस पर डंडों से हमला करते हुए पथराव कर दिया। जिसके चलते दो दरोगा सहित छह पुलिसकर्मियों को चोटें आ गई। हमलावर मौके से फरार हो गए। घायलों का शिवपुर पीएचसी पर इलाज कराया गया है।


बौंडी के डिहवाकलां गांव में शुक्रवार को ग्रामीणों ने गांव की मस्जिद में नमाजियों की ओर से नमाज पढ़े जाने की सूचना दी। सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई। पुलिस टीम ने मस्जिद में इकट्ठा होकर नमाज पढ़ने से मना किया। इस बात को लेकर नमाजियों ने सिपाही पर हमला बोल दिया। हमले की जानकारी पाकर भारी संख्या में पुलिस फोर्स मौके पर पहुंच गई। 23 नमाजियों को गिरफ्तार कर लिया गया है।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए देश भर में पिछले एक महीने से लॉकडाउन चल रहा है। इस बीच, गृह मंत्रालय  ने शुक्रवार रात देश के लाखों दुकानदारों को खुशखबरी दे दी। मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर शनिवार सुबह से सभी राज्‍यों और केंद्रशासित प्रदेशों में रजिस्‍टर्ड दुकानों को शर्तों के साथ खोलने की अनुमति दी है। हालांकि शॉपिंग मॉल्‍स और शॉपिंग कॉम्‍प्‍लेक्‍स अभी नहीं खुलेंगे। यह छूट केवल उन्‍हीं दुकानों को है जो नगर निगमों और नगर पालिकाओं के क्षेत्राधिकार में नहीं आते हैं।

बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय का यह आदेश रमजान का महीना शुरू होने के मद्देनजर जारी किया गया है। सरकार ने अपने आदेश में कुछ शर्तें भी लागू की हैं। इसके मुताबिक, सभी दुकानें संबंधित राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के स्थापना अधिनियम के तहत रजिस्‍टर्ड होनी चाहिए। इन दुकानों में अधिकतम 50 पर्सेंट स्‍टाफ को ही काम करने की छूट है। साथ ही उन्‍हें सोशल डिस्‍टेंसिंग के नियमों का भी पालन करना होगा। दुकान में काम करने वालों को मास्‍क भी लगाना पड़ेगा। सिंगल और मल्‍टीब्रांड मॉल नहीं खुलेंगे आदेश में गृह सचिव अजय भल्‍ला ने स्‍पष्‍ट किया है कि नगर निगम और नगर पालिका की सीमा में आने वाले बाजार नहीं खुलेंगे। 

यहां की दुकानें लॉकडाउन की तय तिथि 3 मई तक बंद रहेंगी। इसके अलावा सिंगल और मल्‍टीब्रांड मॉल्‍स भी नहीं खोले जाएंगे। यह आदेश 15 अप्रैल को जारी दिशानिर्देशों (धारा 14) में संशोधन है जिसके तहत 20 अप्रैल से कुछ गतिविधियों की छूट दी गई थी। नहीं खुलेंगी हॉटस्‍पॉट जोन की दुकानें कोरोना हॉटस्‍पॉट और कंटेनमेंट जोन में स्थित दुकानों को भी खोलने की छूट नहीं मिली है। लॉकडाउन के दौरान सिर्फ जरूरी सामान वाले दुकानों को ही खोलने की इजाजत थी। इसमें राशन, सब्‍जी और फल की दुकानें शामिल हैं। अब सभी जरूरी और गैरजरूरी दुकानों को खोलने की अनुमति देने से उम्‍मीद है कि कारोबार एक बार फिर पटरी पर आएगा। एक महीने से जारी लॉकडाउन के चलते दुकानें बंद रहने से व्‍यापारियों को करोड़ों का नुकसान हो चुका है।


दरअसल, पूरी दुनिया जहां कोरोना वायरस की महामारी से जूझ रही है। वहीं हर रोज इस वायरस का नया तांडव सामने आ जाता है। कोरोना वायरस ने इटली और स्पेन के बाद सबसे ज्यादा तबाही अमेरिका में मचा रखी है। अमेरिका में लगातार हजारों की तादाद में नए मामले सामने आ रहे हैं। खास बात ये है कि यहां न केवल इंसान बल्कि कोरोना ने अब पालतू जानवरों को भी अपनी चपेट में लेना शुरु कर दिया है। इससे प्रशासन सकते में आ गया है।

दरअसल, अमेरिका के न्यूयॉर्क में दो पालतू बिल्लियां कोरोना वारयस से पॉजिटिव पाई गई हैं। इसके पहले न्यूयार्क के चिड़ियाघर में टाइगर कोरोना वायरस से पीड़ित पाया गया था। अमेरिका में पहला ऐसा केस है, जहां पालतू जानवरों में भी कोरोना वायरस का संक्रमण पाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों पालतू बिल्लियां एक ही परिवार से नहीं है। हालांकि इस बात के सामने आने से लोगों में परेशानी का माहौल है। अब पालतू जानवरों में इसके फैलने से प्रशासन के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई है।

            दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मरकज में हुए कार्यक्रम के बाद से देश में कोरोना वायरस के मामलों में उछाल आया था। इसके बाद से ही मौलाना साद भी गायब है। उसने शुरू से ही मरकज में कितने लोग छिपे हैं, वे मरकज से निकलने के बाद कहां-कहां गए हैं, इन सब बातों को छिपाया था। जमात के लोग भी छिपते-छिपाते हुए देश के कई राज्यों में फैल गए थे, जिसके बाद अचानक कोरोना संक्रमण के मामलों में उछाल आया था। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का शिकंजा कसता देख अब वह ऑडियो टेप जारी कर अपनी बात कह रहा है, लेकिन सामने नहीं आ रहा है। उसने पहले ऑडियो जारी कर कहा था कि वह क्वारंटाइन में है। फिर उसके वकील के हवाले से पता चला कि वह भी कोरोना संक्रमित है और अपना इलाज करवा रहा है। पहले देश विरोधी बातें कहने वाला मौलाना साद ने अब एक अन्य ऑडियो जारी कर तब्लीगी जमात के उन लोगों से रक्तदान करने की अपील की है, जो कोरोना के संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। प्रवर्तन निदेशालय, क्राइम ब्रांच, दिल्ली पुलिस सहित सुरक्षा एजेंसिया उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने हाल ही मरकज और मौलाना साद के पहचान के लोगों से मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में पूछताछ कर मरकज को चलाने के तरीके, आय के स्रोत के बारे में सवाल पूछे थे।

कोच्‍चि। कोविड-19 के लिए जहां दुनिया भर के देशों में रिसर्च और अध्‍ययन किए जा रहे हैं वहीं केरल में इसके लिए केवल एलोपैथ दवाओं (modern medicines) को ही इजाजत दी गई है। केरल हाई कोर्ट को अपने फैसले से अवगत कराते हुए राज्‍य सरकार ने शुक्रवार को बताया कि कोरोना वायरस के इलाज के लिए केवल एलोपैथ दवाओं को अनुमति दी जाएगी। बता दें कि भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला केरल में ही आया था।
जस्‍टिस राजा विजयराघवन और टीआर रवि के डिवीजन बेंच द्वारा आयुष नोटिफिकेशन को लागू करने की याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्‍य सरकार ने यह बयान दिया। याचिका में कोविड-19 के इलाज के लिए होम्‍योपैथी दवाओं को अनुमति देने की बात कही गई है। याचिकाकर्ता ने जवाब देने के लिए अतिरिक्‍त समय की मांग की और हाई कोर्ट ने ग्रीष्‍मावकाश के बाद सुनवाई के लिए इस मामले को सूचीबद्ध कर दिया।
संवैधानिक बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने इस महामारी के इलाज के लिए होम्‍योपैथी दवा को अनुमति देने की मांग वाली याचिका को पहले ही खारिज कर दिया है। आयुष  मंत्रालय ने भी केवल कोविड-19 के इलाज के लिए दवा नहीं दी बल्‍कि इम्‍यूनिटी को मजबूत बनाने के लिए दवा बताई है। याचिकाकर्ता ने बताया कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस में 20 अप्रैल के बाद आयुष व्‍यवस्‍था के अंतर्गत दवाओं की गतिविधि के लिए भी अनुमति दी गई है।

नई दिल्‍ली। देश में कोरोना वायरस से निपटने और लॉकडाउन की स्थिति को लेकर शुक्रवार को स्‍वास्‍थ्‍य और गृह मंत्रालय की संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस में हुई। इस मौके पर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि एक अप्रैल से अब तक कोरोना के संक्रमण के बढ़ने की दर में 40 फीसद कमी आई है। अन्‍य देशों के मुकाबले हमारे यहां कोरोना के 80 फीसद मरीज ठीक हो रहे हैं। दूसरे देशों के मुकाबले कोरोना संक्रमण रोकने में भारत की स्थिति बेहतर है।
उन्‍होंने कहा कि लॉकडाउन से पहले COVID19 के मामलों की दोगुना होने के रेट लगभग 3 दिन लग रहे थे, पिछले 7 दिनों के आंकड़ों के अनुसार मामलों को दोगुना होने की दर में  अब 6.2 दिनों की है। 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में तो दोगुना होने की दर देश की दोगुना होने की दर से भी कम है। जिन 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दोगुना होने की दर देश की दोगुना होने की दर से कम है, उसमें- केरल, उत्तराखंड, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़, लद्दाख, पुड्डुचेरी, दिल्ली, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना, तमि‍लनाडु, आंध्र प्रदेश, यूपी, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, असम और त्रिपुरा शामिल हैं। 

भोपाल।  मजहबी बातें तो पुरानी हो गई, इंसानियत की बुनियाद पर अमल करता हूं मैं। किसी शायर का लिखा यह कलाम शायद भोपाल शहर की तहजीब पर ही लिखा गया होगा, जहां मुसलमानों ने एक अर्थी को कंधा देकर इंसानियत की मिसाल पेश की। दरअसल, टीलाजमालपुरा स्थित हरिजन बस्ती में रहने वाले एक हिंदू परिवार में शमा नामदेव नाम की महिला की लंबी बीमारी के बाद मौत हो गई। परिवार में भी सिर्फ तीन ही लोग थे। दो बेटे और पति। कोरोना का डर भी ऐसा की कोई घर से निकलने को तैयार नहीं था। यह जानकारी क्षेत्र में रहने वाले कुछ मुस्लिम युवकों को लगी। बिना कुछ सोचे क्षेत्र के रहने वाले शाहिद खान ने इनके अंतिम संस्कार का जिम्मा उठाया और अर्थी कंधा देने के लिए 15 मुस्लिम आगे आए।
गरीब व गमगीन परिवार को देख पूजा सामग्री भी इन्ही युवकों ने खरीदी। फिर छोला विश्राम घाट के लिए एबुंलेंस से लोग रवाना हुए। राम नाम के साथ अर्थी उठाई गई। यहीं नहीं बल्कि इंसानियत का फर्ज अदा कर रहे युवकों ने हिंदू कर्मकांड से अंतिम संस्कार भी कराया। शाहिद ने बताया कि कोरोना संक्रमण के कारण लोगों अंतिम यात्रा में भी शामिल नहीं होना चाहते थे।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के मरीजों का बिना जाति-धर्म के आधार पर इलाज हो रहा है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिका के आयोग (यूएससीआइआरएफ) की आलोचना को खारिज कर दिया। भारत ने कहा कि उसकी आलोचना इस गुमराह  करने वाली रिपोर्ट पर आधारित है कि अहमदाबाद में कोविड-19 के मरीजों को धार्मिक पहचान के आधार पर अलग किया गया है। मीडिया में यह खबर आई थी कि गुजरात के अहमदाबाद में एक सरकारी अस्पताल में संक्रमित मरीजों को उनके धर्म के आधार पर अलग किया गया है। इसके बाद अमेरिकी आयोग ने भारत में कोरोना वायरस महामारी से निपटने के तरीके पर चिंता जताई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता पर यूएससीआइआरएफ की टिप्पणी क्या पहले ही काफी नहीं है जो वह अब भारत में कोविड-19 से निपटने के लिए पालन किए जाने वाले पेशेवर मेडिकल प्रोटोकॉल पर गुमराह करने वाली रिपोर्टों को फैला रहा है। उन्होंने कहा कि सिविल अस्पताल में धर्म के आधार पर मरीजों को अलग नहीं किया जा रहा है और इस बाबत गुजरात सरकार ने सफाई दी है।
गौरतलब है कि भारत में कोरोना वायरस पॉजिटिव मामलों की कुल संख्या 12,380 हो गई है। इसमें 10,477 सक्रिय मामले और वहीं, 1489 ऐसे केस हैं, जिनमें संक्रमित व्‍यक्ति पूरी तरह से ठीक होकर अस्‍पताल से डिस्चार्ज हो गए हैं। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के मुताबिक, अब तक कोरोना वायरस के संक्रमण से देशभर में 414 लोगों की मौत हो चुकी है। महाराष्‍ट्र, दिल्‍ली और तमिलनाडु ऐसे राज्‍य हैं, जहां तेजी से कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।

नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर में  एक पिज्जा डिलिवरी ब्वॉय कोरोना का कहर बनकर पूरे दिल्ली में घूम रहा था. इससे पिज्जा और अन्य खाद्य पदार्थ मंगवाने वाले करीब 72 घरों के लोगों को क्वारेंटाइन किया गया है. लेकिन इस पर न प्रशासन की नजर है और न पुलिस की. दिल्ली के जिन 72 घरों के लोगों को क्वारेंटाइन किया गया है उसमें ज्यादातर लोग हौज खास और मालवीय नगर के बताए जा रहे है.

वहीं इन सभी लोगों की पहचान अभी स्वास्थ्य विभाग ने गुप्त रखी है. वहीं इसमें से अभी किसी का भी कोरोना टेस्ट नहीं कराया गया है. हालांकि किसी भी संदिग्ध में कोरोना के लक्षण दिखने पर तत्काल टेस्ट और अस्पताल में भर्ती कराने के निर्देश दिए गए है. उक्त डिलिवरी ब्वॉय से पूछताछ में ये पता चला है कि वो मार्च के अंतिम सप्ताह तक ड्यूटी पर था और पिछले सप्ताह ही इसका कोरोना टेस्ट रिजल्ट पॉजिटिव आया है. अधिकारियों ने कहा कि वह पहले डायलिसिस के लिए एक अस्पताल गया था और माना जा रहा है कि इसी दौरान वह संक्रमित हुआ होगा। 

रायपुर। देश में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए  एक विशेष महिला ब्रिगेड काम कर रही है। छत्तीसगढ़ की ये महिला कमांडो, जो अपनी शराब और सामाजिक बुरायों के खिलाफ लंबी लड़ाई के लिए लोकप्रिय हुई। अब इन महिलाओं ने कोरोना के खिलाफ जंग छेड़ दी हैं। ये लोगों को वायरस के प्रसर को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता और सेनिटाइजेशन का महत्व के बारे में समझा रही हैं।  कमांडोज का कहना है कि उनकी लगभग हर गांव तक पहुंच है और लोग उनके संदेशों को ध्यान से सुनते हैं। महिला कमांडो का नेतृत्व करने वाली शमशाद बेगम ने कहा, हमने सोचा कि कोरोना वायरस को लेकर लोगों को जागरूक करने में हमारी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है और इसलिए हम महामारी से लड़ने के लिए जिला प्रशासन के साथ काम करने लगे। जानकारी के लिए बता दें कि फिलहाल, जिले के 400 गांवों में 12,500 महिला कमांडो सक्रिय हैं। उन्होंने कहा कि वायरस को लेकर जागरुकता फैलाने के अलावा वे जिला प्रशासन के माध्यम से गरीबों और जरूरतमंद लोगों को चावल और नकदी प्रदान करने में मदद कर रहे हैं।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद द्वारा किए गए शोध में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। ICMR ने दावा किया है कि एक अलग किस्म के कोरोना वायरस (चमगादड़ में पाया जाने वाला बैट कोरोना वायरस) का पता भारत में पाए जाने वाले चमगादड़ों की प्रजातियों में मिला है। इस वायरस को बीटीकोव भी कहते हैं। कोरोना वायरस वाली चमगादड़ की यह दो प्रजातियां केरल, हिमाचल प्रदेश, पुडुचेरी और तमिलनाडु में पाई जाती हैं।
चिकित्सा अनुसंधान के भारतीय शोध पत्र में प्रकाशित इस शोध में यह दावा किया गया है कि इस बात के कोई साक्ष्य या शोध मौजूद नहीं कि चमगादड़ में पाया जाने वाला यह वायरस इंसानों को संक्रमित कर सकता है। लेकिन चूंकि वायरस मिले तो इससे इंकार भी नहीं किया जा सकता कि ये चमगादड़ ये महामारी नहीं फैला रहे। दरअसल चमगादड़ में कई तरह के वायरस रहते हैं और समय-समय पर ये इंसानों के लिए घातक साबित हुए हैं। निपाह वायरस भी चमगादड़ में मिले थे तब भारत में इसका प्रकोप काफी फैला था।