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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



पूरब टाइम्स। पूरी दुनिया में कई बार ऐसी घटनाएं हुई हैं जो किसी रहस्य से कम नहीं है. क्योंकि सैकड़ों साल बीत जाने के बाद भी इन रहस्यों से पर्दा नहीं उठ सका. आज हम आपको एक ऐसी ही रहस्यमयी घटना के बारे में बताने जा रहे हैं जो आज से लगभग 500 साल पहले घटी थी और उसका आज तक पता नहीं चल रहा. इस घटना में डांस करते करते कई लोगों की मौत हो गई थी. लेकिन ये बात हर कोई जानना चाहेगा कि आखिर कोई डांस करते करते कैसे मर सकता है. ये बात बिल्कुल सही है ये लोग डांग करते करते ही मरे. दरअसल बात साल 1518 की है.

अलसेस के स्ट्रासबर्ग जिसे अब हम फ्रांस के नाम से जानते हैं में एक ऐसी ही महामारी फैली जिसे आप जानकर हैरान रह जाएंगे. ये कोराना वायरस महामारी से अलग थी. आज से करीब 500 साल पहले आई डांस की महामारी ने फ्रांस में कई लोगों को अपना शिकार बनाया. बताया जाता है कि इस महामारी की वजह से करीब 400 लोगों की मौत हो गई थी. साल 1518 के जुलाई के महीने में एक युवती अचानक डांस करने लगी और वह डांस करते-करते अपना होश खो बैठी. इस युवती का नाम था फ्राउ ट्रॉफी. 

बताया जाता है कि फ्राउ ट्रॉफी नाचने में इतनी मस्त हो गई कि वह नाचते-नाचते घर के बाहर गली में आ गई. अब फ्राउ ट्रॉफी को डांस करते देख लोग हैरान हो गए जिसके बाद वहां उसके परिजन पहुंचे. फ्राउ ट्रॉफी को समझाने पहुंचे उसके परजिन भी डांस करने लगे. उसके बाद वहां लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई. बताया जाता है कि अचानक डांस-डांस करते लोग मरने लगे और 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई. इस घटना के बाद फ्रांस में हड़कंप मच गया और लोग डर के साए में रहन लगे.

अब इसके बाद कई इलाकों में लोग डांस करने लगे. लोगों के डांस करने का सिलसिला थम नहीं रहा था. इसके बाद पीड़ितों को अस्पताल में भर्ती कराया गया. इस रहस्यमयी घटना को वैज्ञानिकों ने डांसिंग प्लेग नाम दिया. हालांकि आज भी तमाम वैज्ञानिक इस घटना को कोई कल्पना मानते हैं और कहते हैं कि आखिर डांस करते-करते कोई कैसे मर सकता है.

पूरब टाइम्स। दुनिया के किसी भी देश में कोई भी अपराध करने पर सजा जरूर सुनाई जाती है. चाहे वह अपराध छोटा रहा हो या बड़ा. लेकिन कई देशों में कोर्ट ने अपराधी को ऐसी सजा सुनाई, जिसे सुनकर खुद अपराधी ही नहीं बल्कि लोग भी हैरान रह गए. आज हम आपको ऐसी ही कुछ अजीबो-गरीब सजाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे.

सबसे पहले बात करते हैं अमेरिका के मिसौरी में रहने वाले डेविड बेरी को मिली सजा के बारे में. दरअसल, डेविस बेरी ने एक बार सैकड़ों हिरणों का शिकार कर दिया. उसके बाद साल 2018 में डेविस को इस जुर्म का दोषी पाते हुए अदालत ने उसे सजा सुनाई. अदालत ने उसे सजा सुनाते वक्त कहा कि डेविस एक साल तक जेल में रहकर महीने में कम से कम एक बार डिज्नी का बाम्बी कार्टून देखेगा.

इसके अलावा अमेरिका में दो युवकों को कोर्ट ने अनोखी सजा सुनाई थी. दरअसल, साल 2003 में अमेरिका के शिकागो में रहने वाले दो लड़कों ने क्रिसमस की शाम चर्च से ईसा मसीह की मूर्ति चुराई थी. उसके बाद उन्होंने मूर्ति को नुकसान भी पहुंचाया था. इस जुर्म का दोषी पाते हुए कोर्ट ने उन्हें 45 दिन के लिए जेल की सजा सुनाई गई थी. इसके अलावा उन्हें अपने गृहनगर में एक गधे के साथ मार्च करने का भी आदेश दिया गया था.

अमेरिका के ही ओकलाहोमा में रहने वाले 17 साल के टाइलर एलरेड को भी कोर्ट ने अनोखी सजा दी. जो शायद ही कभी किसी को मिली हो. दरअसल, टाइलर एलरेड ने शराब पीकर गाड़ी चलाई जिससे गाड़ी दुर्घटना का शिकार हो गई. जिसमें टाइलर के एक दोस्त की मौत हो गई थी. यह घटना साल 2011 की है. चूंकि टाइलर उस समय हाई स्कूल में पढ़ते था, इसलिए अदालत ने उन्हें हाई स्कूल और ग्रेजुएशन खत्म करने के अलावा साल भर के लिए ड्रग, शराब और निकोटिन टेस्ट करवाने के साथ ही 10 साल तक चर्च जाने की सजा सुनाई थी.

नई दिल्ली।  चुकलखोर का मकबरा ये कब्र उत्तर प्रदेश के इटावा में हैं। मान्यता के अनुसार लोग आज भी इस कब्र में मन्नत पूरी होते ही जूते या चप्पल चलाते हैं।चुगली कभी न कभी तो हम सब ने की ही होगी लेकिन इसकी बड़ी सजा कभी नहीं मिली। यहां मरने के बाद भी लोग इस व्यक्ति को सजा दे रहे हैं। आज भी इस व्यक्ति को चुगली करने की सजा मिल रही है कि लोग इसके कब्र में चप्पल या जूते मारते हैं। ये मकबरा उत्तरप्रदेश के इटावा नामक जगह में बना हुआ है। बहुत दूर-दूर से लोग मन्नत मांगने आते हैं। और मन्नत पूरी होने पर चप्पल या जूते चलाते हैं।

इतिहास की माने तो ये मकबरा बहुत ही चुगलखोर व्यक्ति का था। जिसने करीबन 500वर्ष साल पहले इटावा के राजा से चुगली की थी की उनको अटेरी के राजा पसंद नहीं करते हैं। और उनके बारे में बुरा सोंचते हैं। इतना सुनते ही इटावा के राजा क्रोधित हो गए और उन्होंने अटेरी के राजा के ऊपर हमला बोल दिया। बाद में पता चला कि चुगली करने वाला व्यक्ति जिसका नाम भोलू सैय्यद था उसने सबकुछ झूठ बोला था। उसी के क्रोध के कारण आज भी लोग इस कब्र में जूते-चप्पल की बरसात करते हैं। और मन्नत के पूरे होते ही इस रिवाज को पूरा करते हैं ।

राजा को जब भोलू की सच्चाई और इसकी चुगलखोरी के बारे में पता चला तो, राजा ने हुक्म दिया कि इसे तब तक जूते से मारा जाए जब तक ये मर नहीं जाता है। तब से लेकर आजतक लोग कब्र में भी जूते मार के जाते हैं। स्थानीय लोग ये भी बताते हैं कि इस रास्ते में भूत-प्रेत का साये का डर रहता है। इसलिए भी लोग अपने और अपने परिवार को अनहोनी घटनाओं से बचाने के लिए जूते, चप्पल मारते हैं, फिर आगे बढ़ना सही समझते हैं।

पूरब टाइम्स। अजूबे से कम नहीं ‘बाथू की लड़ी’: मूल्य सांस्कृतिक विरासत संजोए देवभूमि हिमाचल प्रदेश हजारों छोटे-बड़े मंदिरों की धरती है। माता ज्वाला जी, चिंतपूर्णी, त्रिलोकीनाथ, भीमाकाली, नयना देवी आदि अनेक ऐसे मंदिर हैं जिनका वैभव चारों दिशाओं में फैला है। यहां आपको एक ऐसे अनूठे मंदिर के बारे में बता रहे हैं जो अपने आप में किसी अजूबे से कम नहीं। क्या आपने ऐसे मंदिर के बारे में कभी सुना है जो आठ महीने तक पानी के अंदर रहता है और सिर्फ चार महीने के लिए ही भक्तों को दर्शन देता हो। इस मंदिर को बाथू मंदिर के नाम से जाना जाता है और स्थानीय भाषा में ‘बाथू की लड़ी’ के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर की इमारत में लगे पत्थर को बाथू का पत्थर कहा जाता है। बाथू मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा अन्य आठ छोटे मंदिर भी हैं, जिन्हें दूर से देखने पर एक माला में पिरोया हुआ-सा प्रतीत होता है। इसलिए इस खूबसूरत मंदिर को बाथू की लड़ी (माला) कहा जाता है। इन मंदिरों में शेषनाग, विष्णु भगवान की मूर्तियां स्थापित हैं और बीच में एक मुख्य मंदिर है जो भगवान शिव को समर्पित है। 

हालांकि, इस बात का पक्का प्रमाण नहीं है कि मुख्य मंदिर एक शिव मंदिर है। कुछ लोग इसे भगवान विष्णु को समर्पित मानते हैं परंतु मंदिर की शैली और बनावट को देखते हुए इसे शिव मंदिर माना गया है। कुछ वर्ष पूर्व स्थानीय लोगों ने मिल कर मंदिर में पुन:  शिवलिंग की स्थापना भी की है। मंदिर में इस्तेमाल किए गए पत्थर, शिलाओं पर भगवान विष्णु, शेष नाग और देवियों इत्यादि की कलाकृतियां उकेरी हुई मिलती हैं।

ऐसा माना जाता है कि बाथू मंदिर की स्थापना छठी शताब्दी में गुलेरिया साम्राज्य के समय की गई थी। हालांकि, इस मंदिर के निर्माण के पीछे कई किवदंतियां प्रचलित हैं। कुछ लोग इसे पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान बनाया गया मानते हैं। कहा जाता है कि स्वयं पांडवों ने इसका निर्माण किया था। उन्होंने अपने अज्ञातवास के दौरान शिवलिंग की स्थापना की थी। उन्होंने इस मंदिर के साथ स्तंभी की अनुकृति जैसा भवन बनाकर स्वर्ग तक जाने के लिए पृथ्वी से सीढ़ियां भी बनाई थीं जिनका निर्माण उन्हें एक रात में करना था। एक रात में स्वर्ग तक सीढिय़ां बनाना कोई आसान कार्य नहीं था, इसके लिए उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण से मदद की गुहार लगाई, फलस्वरूप भगवान श्रीकृष्ण ने 6 महीने की एक रात कर दी लेकिन 6 महीने की रात में स्वर्ग की सीढिय़ां बनकर तैयार न हो सकीं, सिर्फ अढ़ाई सीढिय़ों से उनका कार्य अधूरा रह गया था और सुबह हो गई।

आज भी इस मंदिर में स्वर्ग की ओर जाने वाली सीढ़ियां नजर आती हैं वर्तमान समय में इस मंदिर में स्वर्ग की 40 सीढ़ियां मौजूद हैं जिन्हें लोग आस्था के साथ पूजते हैं। यहां से कुछ दूरी पर एक पत्थर मौजूद है, जिसे भीम द्वारा फैंका गया माना जाता है। कहा जाता है कि कंकड़ मारने से इस पत्थर से खून निकलता है। इस मंदिर के बारे में ऐसे सारे राज यहां दफन हैं।

पूरब टाइम्स। वाड्र्रफनगर. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग देवी-देवताओं का खुश करने वर्षोँ से चली आ रही कई परंपराओं का निर्वहन करते आ रहे हैं। ऐसी ही एक परंपरा है मेंढक और मेेंढकी की शादी की। इसमें किसान वर्ग के लोग इंद्रदेव को खुश करने मेंढक और मेंढकी की शादी कराते हैं। इसमें सैकड़ों की संख्या में महिला-पुरुष शामिल होते हैं। ऐसी मान्यता है कि मेंढक-मेंढकी की शादी कराने से इंद्रदेव प्रसन्न होंगे और जमकर बारिश होगी। बारिश के कारण हमारे खेतों में फसलें लहलहाने लगेंगीं।

इंद्रदेव को खुश करने मेढ़क व मेंढ़की की शादी बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत ग्राम कोल्हुआ व पेंडारी में भी कराई गई। यहां के बैगा व पटेल की अगुवाई में कोल्हुआ के सैकड़ों महिला-पुरुष किसान मेंढक का विवाह कराने मेंढकी के गांव पेंडारी पहुंचे। इस दौरान पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप और धुन पर वे नाचते-गाते  रहे। ग्राम पेंडारी के लोगों ने भी बारात का जमकर स्वागत किया। इसके बाद विधि-विधान से मेंढक व मेंढकी की शादी कराई गई।

पूरब टाइम्स। दुनिया अजीबोगरीब चीजों से भरी पड़ी है. कभी-कभी तो कुछ जंतुओं और क्रिएशन को देखकर हर कोई हैरान रह जाता है कि आखिर ये हैं क्या. ऐसा ही कुछ इन दिनों एक अलग सी आवाज वाले पक्षी को देख कर लोग कह रहे हैं. सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पक्षी छाया हुआ है जिसकी आवाज सुनकर लोग हैरान हैं. दरअसल, ये पक्षी बिल्कुल इंसान के बच्चों की तरह रोता है. इंटरनेट पर इस पक्षी का वीडियो देखने और सुनने के बाद हर कोई हैरत में हैं.

प्रकृति के कई रूप हैं, जिन पर कई बार हमें यकीन ही नहीं होता है. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ऐसा ही वीडियो सुर्खियां बटोर रहा है जिसे देखने-सुनने के बाद हर कोई दंग रह गया. ये  एक पक्षी का है जो बच्चों की तरह रोता है. इसे देखकर आप यकीन नहीं कर पाएंगे कि किसी पक्षी की अवाज भी ऐसी हो सकती है.  एक पक्षी काफी हद तक बच्चे के रोने जैसी अवाज निकाल रहा है.


 टीवी शो से मिला नंबर तो बना करोड़पति कुछ ऐसी ही एक घटना अमेरिका के साउथ कैरोलिना में हुई, जब एक शख्स ने टीवी शो से मिले नंबर को यूज कर लिया और उससे वह मालामाल हो गया. यूपीआई न्यूज के मुताबिक, साउथ कैरोलिना के एक व्यक्ति ने लॉटरी ड्रॉइंग से $200,000 (करीब एक करोड़ 46 लाख रुपए) का इनाम जीता, जो कि एक टीवी शो से कॉपी किए गए नंबरों के एक स्पेशल सेट है. शख्स ने टीवी शो को इसके लिए धन्यवाद दिया.

कुछ इस तरह से नंबर्स को चुना बताते चले कि अमेरिका में टीवी पर लॉटरी नंबर्स के लिए शो आते हैं, जहां से शख्स ने नंबर सेट बनाए. द साउथ कैरोलिना एजुकेशन लॉटरी  ने कहा कि विजेता, जिसने गुमनाम रहना चुना, उसने चेस्टरफील्ड में पिग्ली विगली स्टोर से पाल्मेटो कैश 5 टिकट खरीदा और 1-10-16-17-18 की संख्या को चुना. स्टोर को भी मिला कमीशन विनर ने यह नहीं बताया कि किस टीवी शो ने उसे भाग्यशाली अंक दिए, लेकिन उन्हें $200,000 का विजेता बनवा दिया. पिग्ली विगली स्टोर जिसने विनिंग टिकट बेचा था, उसे $2,000 का कमीशन दिया गया.

पूरब टाइम्स। भारत में राजा, महाराजा और नवाबों की जीवनशैली हमेशा चर्चा में बनी रहती है। अपने अजीबोगरीब शौक के लिए रजवाड़े और नवाब भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में मशहूर थे। इन लोगों के शौक और उसके लिए खर्च किए जाने वाले पैसों के बारे में जानकर ऐसा कोई भी नहीं होगा, जो दंग ना रह जाए। किसी राजा ने कुड़ा फेंकने के लिए शाही कार रोल्स रॉयस खरीद लिया, तो कोई डायमंड को ही पेपरवेट के रूप में इस्तेमाल करते थे। इन्हीं शौकीनों में से एक थे जूनागढ़ के नवाब, महाबत खान। महाबत खान को कुत्तों से खास लगाव था।
कुत्ते पालने के शौकीन जूनागढ़ के नवाब महाबत खान ने तकरीबन 800 कुत्ते पाल रखे थे। इतना ही नहीं इन सभी कुत्तों के लिए अलग-अलग कमरे, नौकर और टेलीफोन की व्यवस्था रखी गई थी। अगर किसी कुत्ते की जान चली जाती, तो उसको तमाम रस्मों-रिवाज के साथ कब्रिस्तान में दफनाया जाता और शव यात्रा के साथ शोक संगीत बजता। हालांकि, नवाब महाबत खान को इन सभी कुत्तों में सबसे ज्यादा लगाव एक फीमेल डॉग से था, जिसका नाम रोशना था। महाबत खान ने रोशना की शादी बहुत धूमधाम से बॉबी नामक कुत्ते से कराई। इस शादी में नवाब ने आज के वैल्यू के हिसाब से करीब 2 करोड़ से भी अधिक की धनराशि खर्च की थी।

नवाब महाबत खान के इस शौक का जिक्र विख्यात इतिहासकार डॉमिनिक लॉपियर और लैरी कॉलिन्स ने अपनी किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में भी किया है। रोशना को शादी के दौरान सोने के हार, ब्रेसलेट और महंगे कपड़े पहनाए गए थे। इतना ही नहीं मिलिट्री बैंड के साथ गार्ड ऑफ ऑनर से 250 कुत्तों ने रेलवे स्टेशन पर इनका स्वागत किया था। नवाब महाबत खान ने इस शादी में शामिल होने के लिए तमाम राजा-महाराजा समेत वायसराय को आमंत्रित किया था। लेकिन वायसराय ने आने से इंकार कर दिया। नवाब  द्वारा आयोजित की गई इस शादी में करीब डेढ़ लाख से ज्यादा मेहमान शामिल हुए थे। हालांकि, इस शादी में खर्च किए गए पैसों से जूनागढ़ की तत्कालीन 6,20,000 आबादी की कई जरूरतें पूरी की जा सकती थी।

पूरब टाइम्स। भारत में राजाओं के ऐसे कई किले हैं, जो अपने किसी खास वजहों से काफी मशहूर हैं। एक ऐसा ही किला हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में है, जो काफी रहस्यमय है। कहते हैं कि इस किले में किसी अज्ञात जगह पर अरबों का खजाना छुपा हुआ है, जिसे आज तक खोजा नहीं जा सका है। इस किले को सुजानपुर के किले के नाम से जाना जाता है। बता दें कि किले में छुपे खजाने की वजह से ही इसे हमीरपुर का खजांची किला भी कहा जाता है। इस किले को कटोच वंश के राजा अभय चंद ने 262 साल पहले यानी साल 1758 में बनवाया था। उसके बाद यहां राजा संसार चंद ने राज किया।

कहते हैं कि इस किले में आज भी राजा संसार चंद का खजाना मौजूद है, लेकिन इस खजाने के रहस्य से ना तो आज तक पर्दा उठ पाया है और ना ही कोई खजाने तक पहुंच पाया है। ऐसा माना जाता है कि किले के अंदर ही एक पांच किलोमीटर लंबी सुरंग है, लेकिन इस सुरंग के अंतिम छोर तक कोई भी नहीं पहुंच पाया है। रास्ता तंग और अंधेरा होने के कारण इस सुरंग में 100 मीटर से ज्यादा अंदर जाने की कोई हिम्मत भी नहीं कर पाता है।

सुजानपुर किले के आसपास रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि रात में किले से अजीब-अजीब आवाजें आती हैं। उनका मानना है कि खजाने की रक्षा किले में मौजूद रूहानी ताकतें करती हैं। हालांकि, इसका कोई पुख्ता सबूत किसी के पास नहीं है।कहा जाता है कि राजा संसार चंद इस किले का प्रयोग लूटे हुए खजाने को छुपाने के लिए करते थे। इसके लिए उन्होंने किले में एक गुप्त सुरंग का निर्माण करवाया था, जिसका रास्ता सीधे खजाने तक जाकर खुलता था।

यहां छिपे खजाने की खोज में मुगलों समेत कई राजा-महाराजा और ग्रामीण किले में कई बार खुदाई कर चुके हैं। यहां तक की कुछ लोग रहस्यमय सुरंग में भी जाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन सबको अब तक नाकामी ही हाथ लगी है।  कहते हैं कि खजाने का रहस्य राजा संसार चंद के मरने के साथ ही दफ्न हो गया। यहां तक कि उनके परिवार के किसी भी सदस्य को भी वो खजाना नहीं मिल पाया।

पूरब टाइम्स। दुनियाभर में ऐसी कई जगहें हैं जिन्हें देखकर लगता है कि यहां शायद गुरुत्वाकर्षण नियम यानी ग्रेविटी लॉ काम नहीं करता है. चुट्टानों, पर्वतों और ऊंचाइयों पर बसी इन जगहों का अद्भुत बैलेंस देखकर कोई भी आश्चर्य में पड़ सकता है. आइए आज आपको कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में बताते हैं जिन्हें देखकर शायद आपका सिर घूम जाए. कोन्स्टाटाइन (अल्जीरिया)- अल्जीरिया के इस शहर को सिटी ऑफ ब्रिज कहें तो गलत नहीं होगा. यहां दुनिया के सबसे ऊंचे और लोकप्रिय Sidi M Cid ब्रिज का नजारा भी देख सकते हैं. ये ब्रिज साल 1912 में बनकर तैयार हो गया था. इसके अलावा, कॉन्स्टेंटाइन का समृद्ध इतिहास आपको फिर से इस शहर में वापस आने के लिए प्रेरित करेगा.

फिरा, सैंटोरिनी (ग्रीस)- ग्रीस का यह छोटा सा गांव पुराने सफेद घरों से सराबोर है. यहां नीचे की तरफ लुढ़कते नीले गुंबद वाले चर्च आंखों को सुकून देते हैं. रात के अंधेर में बिजली से रोशन होता ये गांव स्वर्ग की किसी नगरी से कम नहीं लगता है. इस छोटे से गांव में आपको कई खूबसूरत होटेल, चट्टान खोदकर बनाए गए गुफानुमा घर समेत कई प्राकृतिक दृश्य देखने को मिल जाएंगे जो आपके मन को बड़ा सुकून देंगे. जेजिन (लेबनान)- लेबनान के जेजिन शहर को सिटी ऑफ फॉल्स कहा जाता है. यह शहर किस तरह 131 फीट ऊंचे पहाड़ पर अपना संतुलन कायम किए बैठा है, यह देखकर आप सचमुच हैरान रह जाएंगे. इस जगह को चीड़ से ढके पहाड़ों ने घेरा हुआ है. यहां ऐतिहासिक हवेली, बाजार और चर्च भी हैं जो लेबनान में पहाड़ों की सैर करने वालों का जरूरी पड़ाव बनते हैं

क्यूएन्का (स्पेन)- स्पेन में इन हैंगिंग हाउस का नजारा देखने के लिए भारी संख्या में पर्यटक आते हैं. यहां लोग बालकनी वाली घरों में ठहरना ज्यादा पसंद करते हैं जो चट्टानों पर बड़े अजीब ढंग से टिके हुए हैं. इस जगह को वर्ल्ड हेरिटेज साइट की सूची में भी दर्ज किया गया है. यहां के सेंट पॉल ब्रिज से पूरे गांव का सुंदर दृश्य दिखाई देता है. रोकामडोर (फ्रांस)- यह जगह मध्य युगीन ईसाई जगत के चार सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों में से एक थी. जबकि आज के दौर का रोकामडोर पहली नजर में ही आपको अपनी तरफ खींच लेगा. यहां के चर्च, घर और तमाम चीजों को देखकर लगता है कि वे कितने अजीब ढंग से 1500 फीट ऊंचाई पर एक चूना-पत्थर के चट्टान से चिपके हुए हैं.

पहाड़ की तलहटी में पत्थरों से बने प्रवेश द्वार से गुजरने के बाद ही यहां तीर्थयात्री और पर्यटक गांव की खूबसूरत गली में दाखिल हो पाते हैं. यह गांव एक नदी के ठीक बगल में खड़े विशाल पर्वत पर बसा हुआ है. टाइगर्स नेस्ट मॉनेस्ट्री (भूटान)- टाइगर्स नेस्ट मॉनेस्ट्री भूटान की पारो घाटी में स्थित है जो एक बड़े चट्टान पर टंगी हुई सी नजर आती है. इसका निर्माण 1692 में हुआ था. ऐसा कहा जाता है कि गुरु रिनपोचे यहां एक बाघिन पर सवार पहुंचे थे और इसी वजह से इसे टाइगर्स नेस्ट मठ का नाम दिया गया है.

पूरब टाइम्स। भारत में आपको ऐसे कई रहस्यमय मंदिर मिल जाएंगे, जो अपने विशेष कारणों से भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों के रहस्यों से अब तक विज्ञान भी पर्दा नहीं उठा पाया है। हर साल बड़ी मात्रा में श्रद्धालु इन मंदिरों में अपने भगवान की पूजा करने के लिए जाते हैं।  मान्यता है कि इस मंदिर में कई सारे रहस्य छिपे हुए हैं, जिन्हें आज तक कोई नहीं जान पाया है। ये मंदिर राजस्थान के बीकानेर शहर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस मंदिर में करीब 25 हजार से भी ज्यादा चूहे मौजूद हैं। आखिर इस मंदिर में इतने सारे चूहे क्यों है? ये आज तक एक पहेली का विषय बना हुआ है। मंदिर में चूहों की इतनी बड़ी तादाद क्यों है? इस रहस्य से विज्ञान भी अब तक पर्दा नहीं उठा पाया है। 

माता करणी के इस मंदिर में कई सारे चूहों को विभिन्न तरह के पकवानों का भोग लगावाया जाता है। बाद में चूहों द्वारा लगाए गए भोग के झूठे प्रसाद को भक्तजनों के बीच वितरित किया जाता है। मान्यता है कि माता के मंदिर में जो भी आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस मंदिर का निर्माण बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। कहा जाता है कि माता करणी मां दुर्गा की साक्षात अवतार हैं। अगर इतिहास पर गौर करें तो  1387 ईसवी में माता करणी का जन्म रिघुबाई के नाम से एक शाही परिवार में हुआ था। विवाह के बाद उनका सांसारिक मोह माया से लगाव टूट गया और वे एक तपस्वी का जीवन जीने लगीं।

उस दौरान आस पास के गांवों में उनकी धार्मिक और चमत्कारी शक्तियों की ख्याती काफी फैल रही थी। इस कारण दूर-दूर से कई लोग माता के दर्शन के लिए आने लगे। कई इतिहासकारों का ये तक कहना है कि माता करणी करीब 151 साल तक जिंदा रहीं। तब से लेकर आज तक माता के कई भक्त उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं। करणी माता के मंदिर में करीब 25 हजार से भी अधिक चूहे मौजूद हैं। कहा जाता है कि ये चूहे माता करणी के वंशज हैं। शाम को मंदिर में जब माता की संध्या आरती होती है, उस दौरान सभी चूहे अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं। भारी मात्रा में यहां पर चूहों के होने की वजह से इस मंदिर को मूषक मंदिर भी कहा जाता है। गौरतलब बात है कि 25 हजार से भी ज्यादा चूहे होने के बाद भी इस मंदिर में किसी भी प्रकार की दुर्गंध नहीं आती है। वहीं आज तक इस मंदिर में चूहों से कोई बीमारी भी नहीं फैली है।

पूरब टाइम्स। लोग फ्लाइट  में बहुत अच्‍छा खाना मिलने की उम्‍मीद तो आमतौर पर नहीं करते हैं लेकिन पेट भरने के लिए कम से कम एक सामान्‍य सैंडविच  की उम्‍मीद करना तो लाजिमी है. रयानएयर की फ्लाइट  में यात्रा कर रही एक महिला के साथ तो खाने को लेकर एक बहुत बुरा मजाक हुआ. इस फ्लाइट में महिला का पाला दुनिया के सबसे दुखी सैंडविच  से पड़ गया. इतना ही नहीं इसके लिए उसे तकरीबन 5 पाउंड (500 रुपये से ज्‍यादा) भी चुकाने पड़े. अब महिला ने इस सैंडविच की फोटो शेयर करके अपना दुख शेयर किया है.

दुनिया का सबसे दुखद बेकन सैंडविच मेट्रो यूके की रिपोर्ट के मुताबिक महिला ने इस बेकन सैंडविच  को दुनिया का सबसे दुखद बेकन सैंडविच करार दिया है. बेकन सैंडविच के नाम पर एमी वुड्स नाम की इस महिला को दो सूखी ब्रेड पर अलग-अलग आकार में कटे हुए बेकन के टुकड़े रख कर सर्व कर दिया गया. ना तो उसमें सलाद थी और ना ही बटर या चीज. यहां तक कि सैंडविच के साथ कैचअप तक नहीं दिया गया. इतना बुरा सैंडविच महिला को करीब 5 पाउंड में बेचा गया था.

फिर भी वापस नहीं किया सैंडविच रेसिंग ड्राइवर एमी वुड्स ने बताया कि उन्‍होंने इतने बुरे सैंडविच को भी वापस नहीं किया क्‍योंकि उस समय वह बहुत भूखी थीं. हालांकि उन्‍हें पैसे वापस करने के लिए जरूर कहा. इस सैंडविच को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने कई तरह की टिप्‍पणियां की हैं. एक यूजर ने कहा है कि कोविड महामारी के कारण एयरलाइन कंपनियां बहुत बुरे दौर से गुजर रही हैं. वहीं एक अन्‍य यूजर ने कहा कि शायद बटर के लिए महिला को अलग से पैसा चुकाने होंगे, जो उन्‍होंने नहीं दिए होंगे.



इटावा के शत्रुघ्न सिंह की 27 तारीख को शादी थी. वह अपने सिर पर सेहरा सजाकर बारात लेकर पहुंचे थे. लेकिन अब कानूनी कार्रवाई के लिए थाने के चक्कर लगा रहे हैं. उनकी मां इंद्रा देवी भी इस चक्कर में भटक रही हैं. शत्रुघ्न सिंह की मां अपने घर में बहू आने की हसरत पूरी न होने से मायूस हैं. विजयपुरा के रहने वाले शत्रुघ्न की शादी नगला निवासी एक लड़की से तय हुई थी.

रिपोर्ट के अनुसार, लड़की के परिवार के लोगों ने 10 दिन पहले उनके घर पर आकर शादी पक्की की थी. 19 अगस्त को 20 साल की लड़की की गोद भराई रस्म हुई. लड़की काफी सुंदर थी. लेकिन जब 27 अगस्त को शत्रघ्न शादी के लिए अपने रिश्तेदारों और गांव के लोगों के साथ बारात लेकर पहुंचा तो उसके सामने जो दुल्हन लाई गई, वह कोई और थी. उसकी उम्र करीब 50 साल थी.

इसके बाद दूल्हे ने शादी से इनकार कर दिया. दूल्हे का आरोप है कि लड़ीक के परिवार ने उनसे शादी का झांसा देकर 35 हजार रुपये भी ऐंठे हैं. इसके बाद जब उसने रकम लौटाने की मांग की तो उसके साथ मार-पीट की गई और जान से मारने की धमकी भी दी गई. तब पीड़ित दूल्हे ने सिविल लाइन थाने की शरण ली. हालांकि पुलिस जब तक आरोपियों के पास पहुंचती, आरोपी पहले ही फरार हो गए थे.

पूरब टाइम्स। हर किसी का सपना अच्छे और आलीशान घर में रहने का होता है. हर कोई चाहता है उसका अपना घर हो तथा उसमें खूब सारी जगह हो. हर कोई चाहता है कि उसका अपना घर ऐसी जगह हो जहां हरियाली हो तथा वहां सूरज की रोशनी आती रहे. जिससे कि वह अपने घर में सुकून से रह सके. हालांकि इस धरती पर एक ऐसा गांव है. जहां के लोग पिछले 700 सालों से घर में नहीं बल्कि घोसले में रहते हैं. यह घर एकदम चिड़ियों के घोंसलों की तरह दिखता है.

आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि ये लोग एक दो साल से नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों से ऐसे घरों में रह रहे हैं. ऐसा गांव ईरान में है. ईरान के कंदोवन गांव के लोग घोंसलानुमा घरों में रहते हैं. अपनी अजीबोगरीब परंपरा के लिए ये गांव और यहां रहने वाले लोग दुनियाभर में मशहूर हैं. इस गांव के लोग पक्षियों की तरह घोंसले बनाकर रहते हैं. आप भले ही इन घरों को आम घर समझते हैं, लेकिन इस घर की खासियत जानकर आप हैरान रह जाएंगे.

इस घर में सर्दियों में गर्मी और गर्मियों में ठंडी रहती है. ये घर देखने में भले ही अजीब लगें, लेकिन रहने में काफी आरामदायक है. यह गांव 700 साल पुराना है. यहां रहने वाले लोग न हीटर का इस्तेमाल करते हैं, न ही एसी का इस्तेमाल करते हैं. यहां गर्मी के मौसम में ठंडी रहती है, जबकि सर्दी में गर्मी रहती है. अब आप सोच रहे होंगे कि इन घरों का निर्माण कैसे और क्यों हुआ? यहां रह रहे लोगों के पूर्वजों ने मंगोलों के हमलों से बचने के लिए ये घर बनाए थे.



सुरक्षा की दृष्टि से बना ये किला लोगों को भ्रमित कर देता है. इस किले को ऐसे बनाया गया है कि यह चार-पांच किलोमीटर दूर से तो साख दिखता है, लेकिन नजदीक आते-आते यह दिखना बंद हो जाता है. जिस रास्ते से किला दूर से दिखता है, अगर उसी रास्ते से आप आएंगे तो रास्ता किले की बजाय कहीं और ही चला जाता है, जबकि किले के लिए दूसरा रास्ता है.

इस किले की गिनती देश के सबसे रहस्यमयी किलों में होती है. स्थानीय लोग बताते हैं कि काफी समय पहले यहां पास के ही गांव में एक बारात आई थी. बाराती किले में घूमने चले गए. घूमते-घूमते वो लोग बेसमेंट में चले गए, जिसके बाद वो रहस्यमयी तरीके से अचानक गायब हो गए. बारात में शामिल उन 50-60 लोगों का आज तक कोई पता नहीं चला. इसके बाद भी कुछ इस तरह की घटनाएं हुईं, जिसके बाद किले के नीचे जाने वाले सभी दरवाजों को बंद कर दिया गया.

गढ़कुंडार का किला किसी भूल-भुलैया की तरह है. इस किले में जाने वाले लोग अक्सर भटक जाते हैं. इस किले में दिन में भी अंधेरा रहता है इसलिए लोग दिन में भी जाने से कतराते हैं. ऐसा माना जाता है कि इस किले में एक खजाने का रहस्य छिपा हुआ है. जिसे तलाशने की चक्कर में कई लोगों की जान जा चुकी है. जानकार बताते हैं कि यहां के राजाओं के पास सोने-हीरे, जवाहरातों की कोई कमी नहीं थी. जो आज भी इस किले में दबा हुआ है लेकिन इसकी खोज आजतक कोई नहीं कर सका.

पूरब टाइम्स। हमारे देश में लाखों मंदिर है जिनमें श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर भगवान से मुराद मांगते हैं. ऐसा माना जाता है किंं इनमे से कुछ मंदिर ऐसे भी हैं जहां मांगी गई भक्तों की हर मुराद पूरी होती हैंं. आंज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कामना पूरी करने के लिएं नहीं बल्कि किसी अन्य वजह से प्रसिद्ध है. दरअसलं, ये मंदिर इसलिए प्रसिद्ध है क्योंकि यहां शाम के बाद रुकने वाला हर जीव पत्थर का बन जाता है. ये मंदिर राजस्थान में स्थित है जिसे किराडू मंदिर के नाम से जाना जाता है.

बता दें कि राजस्थान का यह मंदिर तमाम रहस्यों से भरा पड़ा है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जो भी शाम ढलने के बाद यहां गलती से भी रुक जाता है वो हमेशा के लिए पत्थर का बन जाता है. ये मंदिर राजस्थान के बाड़मेर जिले में स्थित है. मंदिर का नाम किराडू मंदिर है. वैसे तो इस मंदिर में काफी लोग आते हैं, लेकिन सारे लोग शाम ढलने से पहले ही यहां से चले जाते हैं. इसके पीछे की वजह बड़ी खौफनाक है. यहां माना जाता है कि जो भी व्यक्ति सूरज ढलने के बाद इस मंदिर में रुकता है वो हमेशा के लिए पत्थर का बन जाता है.


पूरब टाइम्स। बढ़ती महंगाई के चलते किसी भी फंक्शन को ऑर्गेनाइज करने में लोगों के पसीने छूट जाते हैं. और बात अगर शादी की हो तो इसमें होने वाले खर्च पूरा करने में लोगों की जेब खाली हो जाती है. इसमें भी सबसे बड़ा खर्च होता है मेहमानों की दावत का. खाना अच्छा न होने या अरेंजमेंट सही न होने पर लोग बुराई भी करते हैं, पर शादी या किसी फंक्शन में कितने ही लोग ऐसे भी होते हैं जो इनविटेशन मिलने के बावजूद फंक्शन अटेंड करने नहीं पहुंचते. ऐसे में सबसे ज्यादा बरबादी खाने की होती है. शादी की पार्टी अटेंड नहीं करने वाले ऐसे ही एक गेस्ट को दुल्हन ने 17 हजार रुपये का बिल भेज दिया.

किसी भी फंक्शन में हर कोई अपनी गेस्ट लिस्ट के हिसाब से ही खाने-पीने का बंदोबस्त करता है. किसी भी गेस्ट के लिए कोई कमी न हो, इसके लिए छोटी से छोटी बात का ध्यान रखा जाता है. पर जब व्यवस्था के अनुरूप गेस्ट न आएं, तो खाने से लेकर तमाम चीजें बरबादी हो जाती हैं, जिसका नुकसान दूल्हा-दुल्हन और उनके घरवालों को उठाना पड़ता है. पर यूनाइटेड किंगडम में एक दुल्हन ने शादी में मेहमानों के न आने पर वेस्ट हुई चीजों का हर्जाना खुद मेहमानों से ही वसूला. दरअसल, एक दुल्हन ने अपनी शादी के लिए तमाम बेहतरीन व्यवस्थाएं की थीं. दुल्हन ने प्रति दो गेस्ट पर 175 यूरो (करीब 17 हजार रुपये) का खर्च कर उनके लिए रिसेप्शन डिनर और सभी चीजों की व्यवस्था की थी.

ऐसे में जब इनविटेशन के बाद भी गेस्ट रिसेप्शन पार्टी में नहीं पहुंचे, तो दुल्हन ने बरबाद हुई चीजों का पैसा वसूलने के लिए उनके घर बिल भेज दिया. सोशल मीडिया साइट Reddit पर रिसेप्शन पार्टी अटेंड न करने वाले एक गेस्ट ने दुल्हन के भेजे गए इनवॉइस की कॉपी शेयर की है. इस इनवॉइस में लिखा है, no call, no show guest.इसके साथ ही लिखा गया है कि उन्होंने शादी के रिसेप्शन डिनर को अटेंड नहीं किया  और दो सीटें खाली रहीं. जिसकी वजह से लिए उन्हें ये बिल भेजा जा रहा है.

इसके साथ ही इनवॉइस के नोट्स सेक्शन में लिखा है, ये बिल आपको देना होगा क्योंकि आपने हमें पहले से नहीं बताया था कि आप पार्टी अटेंड नहीं करेंगे. इसलिए ये बिल आपको जल्द से जल्द जमा कराना होगा. इनवॉइस पर आगे लिखा है, आप ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं. कृपया हमसे संपर्क करें और हमें बताएं कि आप किस तरीके से भुगतान करेंगे. धन्यवाद!  इस बिल की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिस पर लोग तरह-तरह के कमेंट और रिएक्शन दे रहे हैं.

पूरब टाइम्स। दुनिया अजीबोगरीब चीजों से भरी पड़ी है. कभी-कभी तो कुछ जंतुओं और क्रिएशन को देखकर हर कोई हैरान रह जाता है कि आखिर ये हैं क्या. ऐसा ही कुछ इन दिनों एक अलग से दिखनेवाले कीड़े को देख कर लोग कह रहे हैं. सोशल मीडिया पर इन दिनों ऐसा ही एक कीड़ा छाया हुआ है जिसे देखकर लोग समझ ही नहीं पा रहे हैं कि ये किस प्रजाति का है. यह कीड़ा बिल्कुल एक हरी पत्ती की तरह दिखाई देता है. लोग उसके बारे में तरह तरह के कयास लगा रहे हैं, पर असल में वो क्या है ये किसी को नहीं पता.

इन्टरनेट पर इन दिनों एक बड़ी पत्ती वाले कीट को देखकर लोग हैरान हो रहे हैं. यह कीड़ा बिल्कुल एक हरी पत्ती की तरह दिखाई देता है, जिसे देखने के बाद आपको पहचान पाना मुश्किल होगा कि असल में कीड़ा है या पत्ती. इस कीड़े के बारे में अंदाजा लगाना मुश्किल  हैं. इसे देखकर ऐसा बिलकुल भी नहीं लगता कि ये कोई कीड़ा है. पहली नजर में आपको ऐसा ही लगेगा कि ये कोई हरी पत्ती है जो किनारों पर सूख गयी है.

अब आपको इस कीट के बारे में बताते हैं. इस कीड़े को  Phyllium Giganteum के नाम से जाना जाता है. इस प्रजाति में केवल मादाएं ही होती हैं . Phyllium Giganteum  बेहद ही चौड़ी और लंबी होती है. इसके शरीर का आकार बिल्कुल पत्ती जैसा होता है. कीट की त्वचा भी हरे रंग की होती है, साथ में किनारों पर भूरे रंग का स्पॉट बना होता है. कीट के आगे की ओर भी दो भूरे रंग के धब्बे बने होते है. इसे देखकर ऐसा लगता है मानो पत्ती उस जगह पर सूख गई है. इसकी लंबाई करीब 10 सेंटीमीटर होती है

पूरब टाइम्स। सिंगल माल्ट व्हिस्की को दुनिया की सबसे महंगी व्हिस्की में गिना जाता है। इसे बनाने में काफी मेहनत और समय लगता है। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते सिंगल माल्ट व्हिस्की को देश दुनिया में काफी पसंद किया जाता है। इसी कड़ी में आज हम इस व्हिस्की के बारे में जानेंगे। दुनिया भर में इसके कई वैरायटीज उपलब्ध हैं, जिन्हें लोग खूब पसंद करते हैं। इन वैरायटीज के प्राइस भी अलग अलग होते हैं। इस व्हिस्की की कीमत जानने के बाद आप हैरान हो जाएंगे। सिंगल माल्ट के एक बोतल का दाम इतना है कि उसमें आप लाखों का घर खरीद सकते हैं। इसे बनाने के लिए जौ का इस्तेमाल किया जाता है। सिंगल माल्ट को बनाने की प्रक्रिया में सबसे पहले जौ को जमीन के पानी में मिलाया जाता है। उसके बाद इसे 64 सेंटीग्रेट तापमान पर गर्म किया जाता है। 

सिंगल माल्ट व्हिस्की को बनाना कोई आसान काम नहीं है। इसे तैयार करने में काफी लंबा समय लगता है। सर्वप्रथम जौ को पानी में मिलाने के बाद इसको इतना गर्म किया जाता है जब तक ये चीनी में ना बदल जाए। मीठे लिक्विड में तैयार हुए इस वोर्ट को बाद में ठंडा किया जाता है। उसके बाद इसे वॉश बैक्स में डाला जाता है तत्पश्चात उसको डिस्टिलेशन के लिए कॉपर वॉश स्टिल्स में गर्म किया जाता है। उसके बाद दोबारा उसे स्पिरिट स्टिल्स में गर्म किया जाता है। सिंगल माल्ट व्हिस्की को बनाने में कई सालों की मेहनत लगती है। बात अगर इसकी कीमत की करें तो ये करीब 30,000 अमेरिकी डॉलर तक हो सकती है। कुछ समय पहले सिंगल माल्ट मैकलान 1926 की एक बॉटल 1.5 मिलियन डॉलर में बिकी थी।

ये व्हिस्की करीब 30 साल पुरानी होती हैं। इस कारण 30 से 40 फीसद अल्कोहल इस दौरान इवैपोरेट हो जाता है। व्हिस्की जितनी पुरानी होती है, उसकी कीमत भी उतनी ही ज्यादा होती है। ऐसा उसके एंजल्स शेयर के कारण होता है। एंजल्स शेयर लिक्विड का वो प्राकृतिक वाष्पीकरण होता है, जो समय के साथ साथ पर्यावरण में घुलता जाता है। इसी वजह से व्हिस्की जितनी पुरानी होती है, उतनी ही शानदार भी। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते सिंगल माल्ट व्हिस्की की कीमत काफी ज्यादा है। इस व्हिस्की का एंजल्स शेयर ही उसको काफी खास बनाता है। बात अगर स्कॉटलैंड की करें तो वहां का मौसम काफी ठंडा रहता है। इस कारण वहां पर वाष्पीकरण की रफ्तार काफी धीमी होती है। इसी वजह से स्कॉटलैंड में व्हिस्की को 60 सालों तक रखा जाता है, जिसके चलते उसका एंजल्स शेयर काफी कम हो जाता है। इस कारण सालों बाद प्रोडक्ट काफी बेहतरीन बन कर सामने आता है।