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रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि आरोपी डॉक्टर एमडी था और उसने अपनी पढ़ाई नवी मुंबई मेडिकल कॉलेज से की है. 30 अप्रैल को उसने अस्पताल में ड्यूटी ज्वाइन की थी और उसी दिन पीड़ित भी अस्पताल में भर्ती हुआ था. पुलिस ने अस्पताल एचआर हेड द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ आईपीसी की धारा 377, 269, 279 के तहत केस दर्ज किया है।

शिकायत के अनुसार, आरोपी 1 मई को सुबह 9 बजे के करीब आईसीयू के पैशेंट रूम में दाखिल हुआ. इसके बाद आरोपी ने मरीज के साथ शारीरिक होने की कोशिश की, जिसका मरीज ने विरोध किया. मरीज चिल्लाने लगा, जिसके बाद रूम के बाहर मौजद अस्पताल स्टाफ अंदर चले गए. इसके बाद पीड़ित ने आपबीती अस्पताल प्रशासन को सुनाई और फिर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की गई।



मेरठ। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से बड़ी खबर सामने आई है। रविवार को 238 सैंपल की जांच के दौरान 25 मरीजों की कोरोना टेस्ट रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। वहीं, इनमें से एक मरीज की देर रात मौत होने के बाद जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों की मौत का आंकड़ा सात पर पहुंच गया है।

मेरठ के जिला सर्विलांस अधिकारी डॉक्टर विश्वास चौधरी ने बताया कि शनिवार को जिले से कुल 238 सैंपल जांच के लिए भेजे गए थे। इनमें से 25 व्यक्तियों की रिपोर्ट आज पॉजिटिव आई है। इनमें किदवई नगर निवासी 58 वर्षीय अधेड़ को सांस की बीमारी के चलते शनिवार की रात मेडिकल में भर्ती कराया गया था। जिसकी देर रात मौत हो गई। इसी के साथ जिले में कोरोना संक्रमित मरीजों का आंकड़ा 141 पर पहुंच गया है।

उधर, इतनी बड़ी संख्या में एक साथ कोरोना संक्रमित मरीजों के मिलने के बाद प्रशासनिक और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की नींद उड़ गई है। क्योंकि एक साथ इतने व्यक्तियों की चेन को तलाशना जहां मुश्किल होगा। वहीं, इतने लोगों के संक्रमित मिलने के बाद इनके संपर्क में आए व्यक्तियों की तलाश करना भी अधिकारियों के सामने एक टेढ़ी खीर साबित हो सकता है।

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में लॉकडाउन के दौरान कई चीजों को लेकर आज से छूट दी गई हैं. दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज तक को दिए इंटरव्यू में कहा था कि, लॉकडाउन लगाने से ऐसा संभव नहीं है कि कोरोना पूरी तरह से खत्म हो जाएगा, लेकिन हमें अर्थव्यवस्था के बारे में भी सोचना होगा। से में दिल्ली सरकार ने सरकारी और प्राइवेट ऑफिस को खोलने की इजाजत दी है, लेकिन इस दौरान स्कूल और कॉलेजों को लेकर किसी भी प्रकार की काई छूट नहीं दी गई है।

अरविंद केजरीवाल ने बताया, दिल्ली सरकार 4 मई से कुछ रियायतें देने जा रही हैं. इनमें सभी सरकारी दफ्तर खुलेंगे. जो जरूरी सेवाओं से संबंधित हैं. हालांकि इस दौरान अगले दो हफ्तों तक स्कूल- कॉलेज बंद रहेंगे। केजरीवाल ने कहा, दिल्ली में जितनी भी शैक्षणिक शिक्षा से संबंधित संस्थानें उन्हें भी खोलने की इजाजत नहीं दी गई है. ऐसे में कोचिंग इंस्टीट्यूट, ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट बंद रहेंगे. फिलहाल अभी छात्रों को ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई करवाई जा रही है।

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर हंदवाड़ा में आतंकियों के खिलाफ अभियान में कर्नल और मेजर समेत भारतीय सेना के पांच जवान शहीद हो गए हैं। कश्मीर घाटी के हंदवाड़ा में चल रही इस मुठभेड़ में दो आतंकी मार गिराए गए हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक जवान ने भी आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हो गया। अधिकारियों ने रविवार को बताया कि हंदवाड़ा के चांजमुल्ला इलाके में हुई मुठभेड़ में दो आतंकवादी भी मारे गए हैं। यह इलाका उत्तर कश्मीर के कुपवाड़ा जिले का हिस्सा है। उन्होंने बताया कि सेना ने बंधक बनाए गए नागरिकों को बचाने के लिए अभियान चलाया। शहीद हुए सैन्य अफसर सुरक्षाकर्मियों की टीम का नेतृत्व कर रहे थे।

भारतीय सेना के सूत्रों के मुताबिक हंदवाड़ा में आतंकियों के छिपे होने की सूचना के बाद ऑपरेशन चलाया गया। इस दौरान छिपे हुए आतंकियों ने फायरिंग की, जिसमें 21 राष्ट्रीय रायफल्स के कर्नल, मेजर और दो जवान शहीद हो गए। जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर भी मुठभेड़ में शहीद हुए हैं। इसी बीच कश्मीर के आईजी विजय कुमार ने बताया कि हंदवाड़ा मुठभेड़ में पाकिस्तान के रहने वाले हैदर, जो लश्कर ए तयबा के  कमांडर थे, को मार किराया गया है।





 जबकि संक्रमितों की संख्या 37,776 हो गई है. वहीं, पिछले 24 घंटों में कोरोना के सबसे ज्यादा 2,411 नए मामले सामने आए हैं और 71 लोगों की मौत हुई है. हालांकि, थोड़ी राहत वाली बात यह है कि इस बीमारी से अब तक 10,018 मरीज ठीक को चुके हैं. रिकवरी रेट 26.64 प्रतिशत हो गया. बता दें कि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देशभर में लॉकडाउन लगाया गया लॉकडाउन के मौजूदा चरण को बढ़ाकर 17 मई कर दिया गया है।

पटना। बिहार में खास कर उत्तर बिहार में एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम अर्थात् चमकी-बुखार की बीमारी गर्मियों में मासूमों की मौत का कहर बनकर आती है। सरकारी आंकड़ों की बात करें तो बीते साल मुफ्फरपुर के श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल  में इससे 167 बच्‍चों की मौत हुई थी। इनमें अकेले मुजफ्फरपुर के 111 बच्‍चे शामिल थे। गैर सरकारी आंकड़ों पर विश्‍वास करें तो इस बीमारी के कारण डेढ़ दशक में हजार मासूमों को जान गई है।

इस साल बिहार में चमकी बुखार का पहला शिकार मुजफ्फरपुर के सकरा के बाड़ा बुजुर्ग गांव के मुन्ना राम का साढ़े तीन साल का बेटा आदित्य कुमार था। एसकेएमसीएच के बाल रोग विभागाध्‍यक्ष डॉ. गोपाल शंकर सहनी ने बताया कि यह मुजफ्फरपुर में इस बीमारी का पहला मामला था। एसकेएमसीएच के अधीक्षक डॉ. सुनील कुमार शाही के अनुसार वैसे तो चमकी बुखार के मामले इक्के-दुक्के हमेशा आते ही रहते हैं, लेकिन पिछले साल जून-जुलाई के बाद यह पहली मौत थी।
बड़ा सवाल यह है कि चमकी बुखार और इसके कारण क्‍या हैं.  बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरूण शाह कहते हैं कि एईएस या चमकी बुखार को बीमारी का छाता (Umbrella of Diseases) कह सकते हैं। इसके लक्षण जैसे कई बीमारियां होती हैं। इसका कारण अभी तक पता नहीं। इस बीमारी पर शोध करने वाले एसकेएमसीएच के बाल रोग विभागाध्‍यक्ष डॉ. गोपाल शंकर साहनी कहते हैं कि इसके मुख्य कारण गर्मी, नमी व कुपोषण सामने आए हैं। जब गर्मी 36 से 40 डिग्री व नमी 70 से 80 फीसद के बीच हो तो इसका कहर शुरू होता है। बीमारी का लक्षण तेज बुखार व चमकी आना है, इसलए इसे चमकी बुखार कहते हैं। इसमें बच्चा देखते-देखते बेहोश हो जाता है। उत्तर बिहार में 15 अप्रैल से 30 जून तक इसका प्रकोप ज्यादा रहता है।

नई दिल्‍ली। लॉक डाउन में अजब-गजब तरीके से शादियां संपन्न हो रहीं हैं। कोई चार-पांच लोगों की बरात लेकर आ रहा है तो कहीं बरात का स्वागत सैनिटाइजर डालकर किया जा रहा है और बरातियों को माला से पहले मास्क पहनाया जा रहा है। फिजिकल डिस्टेंसिंग में फेरे पड़ रहे हैं तो जयमाल को सैनिटाइज कराया जा रहा है। मध्‍यप्रदेश के धार में मास्क पहने वर-वधू ने लकड़ियों के सहारे एक-दूजे को माला दूर से पहनाई।

मुरादाबाद में चार लोग पहुंचे बरात में और दुल्हन बाइक से ससुराल पहुंची। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में लॉकडाउन के बीच एक ऐसी शादी हुई, जिसमें वर-वधु पक्ष को फेरे कराने के लिए कोई पंडित नहीं मिला तो गश्त पर निकलीं महिला एसआइ ने शादी के मंत्र पढ़े और दीया जलवाकर परिणय के सात फेरे लगवाए। एक दूल्हा महोबा के पुनिया गांव में देखने को मिला। पुलिस ने परमीशन नहीं दी तो साइिकल चलाकर आ गया और मंदिर में शादी रचाने के बाद दुल्हन को साइकिल से ही विदा कराकर वापस ले गया। जम्‍मू में माता-पिता, एक पंडित व फोटोग्राफर समेत कुल पांच लोगों की बरात देखने को मिली।

वहीं, एक जगह तो शादी के लिए दूल्हे के गांव पहुंच गई दुल्हन। अक्षय तृतीया के अवसर पर गोंडा में चार घंटे में ही शादी हो गई और दुल्हन ससुराल पहुंच गई। पटना के बंदर बगीचा स्थित एक अपार्टमेंट में अनोखी शादी हुई। दूल्‍हे के घर में शादी और दुल्‍हन का परिवार ऑनलाइन। शादी में न बैंड-बाजा, न तामझाम, न रिश्तेदारों का हुजूम और न ही भोज का आयोजन। पुजारी के साथ केवल वर पक्ष के पांच-छह लोग शामिल हुए। वहीं एक जगह रस्मों-रिवाज पूरा कर बॉर्डर पर दूल्हा-दुल्हन एक साथ पवित्र बंधन में बंध गए। इस अनोखे शादी में भावुक पल तब आया जब लड़की को पुलिसकर्मी ने कन्यादान देकर विदाई की। 

कोराना संक्रमण और लॉकडाउन के चलते कुक्षी के समीप टोंकी में 28 अप्रैल को हुई इस शादी की चर्चा पूरे इलाके में रही। ग्राम टोंकी के शिक्षक जगदीश मंडलोई की पुत्री भारती का शुभलग्न अमझेरा निवासी डॉ. करणसिंह निगम के पुत्र तथा अमझेरा में ही पदस्थ पशु चिकित्सक डॉ. राजेश निगम के साथ 26 अप्रैल को तय था, लेकिन लॉकडाउन के कारण शादी धूमधाम से नहीं की जा सकी।

वर एवं वधू पक्ष के मुखियाओं ने गांव से दूर हनुमान मंदिर में शादी करने का निर्णय लिया। मंदिर को पहले सैनिटाइज किया गया। साधारण तरीके से वर-वधू ने एक मीटर दूरी पर खड़े होकर एक-दूसरे को लकड़ी की सहायता से माला पहनाई। लकड़ी से माला पहनाने की युक्ति लड़की के पिता ने सुझाई। शादी के बाद उपस्थितों ने साबुन से अच्छी तरह हाथ धोकर खाना खाया तथा नवदंपती को आशीर्वाद दिया।  

दिल्ली। देश में लाकडाउन के चलते सबकुछ थम सा गया है। इस बीच एक बड़ा कदम उठाते हुए AICTE ने ऐलान कर दिया है कि एक जुलाई से नया शैक्षणिक सत्र शुरू होगा। कोरोना वायरस के कहर के चलते देशभर में लागू किए गए लॉकडाउन के बीच ऑल इंडिया काउंसिल ऑफ टे​क्निकल एजुकेशन यानि एआईसीटीई ने अपना एकेडमिक कैलेंडर जारी कर दिया है। सत्र प्रभावित न हो और छात्रों को पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए एआईसीटीई ने ये ऐलान किया है। अब एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थानों में एक जुलाई से नया सत्र और कक्षाएं शुरू होंगी।

इसके साथ ही एआईसीटीई ने कहा है कि नए छात्रों के लिए नया एकेडमिक सत्र एक अगस्त से शुरू किया जाएगा। इस एकेडमिक कैलेंडर को एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त सभी को लागू करना अनिवार्य होगा। एआईसीटीई ने जारी किए गए दिशा-निर्देशों में कहा है कि ओपन और डिस्टेंस माध्यम के जरिये उम्मीदवार 15 अगस्त से कालेजों में प्रवेश ले सकेंगे। माना जा रहा है कि सत्र को पटरी पर लाने की कवायद के तहत एआईसीटीई ने ये ऐलान किया है।

नई दिल्ली। लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को निकालने के लिए केंद्र सरकार ने ट्रेन से ले जाने की इजाजत दे दी है। गृह मंत्रालय की सह सचिव पुण्या सलिला श्रीवास्तव ने बताया कि MHA ने आज फंसे हुए छात्रों, प्रवासी श्रमिकों, पर्यटकों, तीर्थयात्रियों आदि को रेल के माध्यम से आवाजाही की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि राज्य और रेलवे बोर्ड मिलकर इससे संबंधित व्यवस्था करेंगे। इससे पहले उन्होंने बताया कि एमएचए ने सभी राज्यों को दोबारा से कहा है कि ट्रकों और माल वाहक वाहनों के यातायात के लिए कोई अलग पास की आवश्यकता नहीं है, जिसमें खाली ट्रक आदि शामिल हैं।

गंतव्य तक पहुंचने के बाद यात्रियों को राज्य की सरकार रिसीव करेगी और स्क्रीनिंग की जाएगी। अगर जरूरत होगी तो क्वारंटीन की व्यवस्था की जाएगीः रेल मंत्रालय भेजने वाले राज्य को भी यात्रियों की स्क्रीनिंग करनी होगी और लक्षण न पाए जाने पर ही ट्रेन में सफर करने की अनुमति होगी। राज्य की सरकार सैनिटाइज बस में यात्रियों को रेलवे स्टेशन तक लेकर आएगी और सोशल डिस्टैंसिंग का ध्यान रखा जाएगाः रेल मंत्रालय आज लिंगमपल्ली से हटिया, अलुवा से भुवनेश्वर, नासिक से लखनऊ, नासिक से भोपाल, जयपुर से पटना औ कोटा से हटिया के लिए स्पेशल ट्रेन चलेगी
पिछले 24 घंटों में भारत में कोरोना वायरस के 1993 नए केस रिपोर्ट हुए हैं. इससे हमारी कुल कंफर्म पॉजिटिव केसों की संख्या बढ़कर अब 35043 हो चुकी है. इनमें 25007 एक्टिव केसों का अभी विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है. पिछले 24 घंटों में देखें 554 लोग ठीक हो चुके हैं. जिससे कि हमारे यहां ठीक हुए मरीजों की कुल संख्या बढ़कर 8888 हो चुकी है. इस तरह हम देखते हैं तो पाते हैं कि हमारा रिकवरी रेट निरंतर बढ़ते हुए अब 25.37 प्रतिशत हो चुका है।

गृह मंत्रालय की प्रवक्ता पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि रेलवे ने 13 लाख वैगन से अधिक आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित की है. ट्रक और सामान ढोने की आवाजाही में बढोतरी हो रही है. आर्थिक गतिविधियों के लिए यह जरूरी है कि राज्य की सीमाओं पर ट्रकों को रोका नहीं जाए. अभी भी कई राज्यों में ऐसी समस्या आ रही है. गृह मंत्रालय ने फिर से स्पष्ट किया है ट्रक और मालवाहक वाहनों को किसी पास की जरूरत नहीं है. चाहे वो भरे हों या खाली हों। कोरोना पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली जीओएम की छठी बैठक कल सुबह होगी. इस दौरान तीन मई को खत्म हो रहे लॉकडाउन पर चर्चा होगी. चरणबद्ध तरीके से लॉकडाउन को हटाने पर चर्चा की जाएगी. जीओएम के जरिए अपनी सिफारिशें पीएमओ को दी जाएगी, जिस पर पीएम फैसला करेंगे. बैठक में कई मंत्रालयों के मंत्री मौजूद रहेंगे।

नई दिल्ली। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस (COVID-19) लॉकडाउन के दौरान महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराध में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि हुई है। कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए 25 मार्च से 14 अप्रैल तक राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की गई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 3 मई तक कर दिया गया। जानलेवा वायरस से देश में 1,147 लोगों की अबतक जान जा चुकी है।



हालांकि, साइबर विशेषज्ञों ने कहा कि यह संख्या सिर्फ हिमखंड के सिरे के बराबर ही है। आकांक्षा फाउंडेशन की संस्थापक आकांक्षा श्रीवास्तव ने कहा कि हमें 25 मार्च से 25 अप्रैल तक साइबर अपराध की कुल 412 वास्तविक शिकायतें मिली हैं। इनमें से 396 शिकायतें काफी गंभीर हैं। इसमें दुर्व्यवहार, अश्लील प्रदर्शन, अश्लील वीडियो, धमकी, फिरौती की मांग से लेकर ब्लैकमेल तरना तक बहुत कुछ शामिल है।



दिल्ली। सरकार ने जरूरी चीजों की आपूर्ति के लिए ट्रकों की आवाजाही को मुक्त रखा है। इसके बाद भी ट्रकों को बेवजह रोके जाने पर गृह मंत्रालय ने सख्त रूख अपनाया है। अब मंत्रालय ने कड़ा आदेश जारी किया है। गृह मंत्रालय के सचिव अजय भल्ला ने जारी कियेे गए आदेेेश में साफ कहा है कि सरकार ट्रकोंं की आवा जाही को लेकर 3 और 12 अप्रैल को इस संबंध में स्पष्ट आदेश दे चुकी है। इसके बाद भी ट्रकों के आवागमन को रोकने पर अब कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गृह सचिव ने कहाकि आदेश के बावजूद विभिन्न राज्यों में ट्रकों को रोके जाने की शिकायतें आ रही हैं। इस पर अब कठोर एक्शन लिया जाएगा।


गृह सचिव ने साफ कहा है कि कोई भी ट्रक बिना पास के कहीं भी आ-जा सकता हैं, बशर्ते ट्रक ड्राइवरों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस हों। केंद्र सरकार ने देशभर में ट्रकों की आवाजाही की अनुमति है और उन्हें किसी भी राज्य से गुजरने से कोई नहीं रोक सकता है। इसके साथ ही, अब हर एक ट्रक में एक की जगह दो ड्राइवर रखने की अनुमति भी दे दी गई है। अगर राज्यों से ऐसी शिकायत मिली तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाएगी।

नई दिल्ली।  कोरोना वायरस ने दुनिया की कई अर्थव्‍यवस्‍थाओं को तगड़े झटके दिए हैं। कुछ के इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर को चोट पहुंची है तो कहीं प्रॉडक्‍शन रुकने की वजह से कंपनियां मूव आउट कर रही हैं। सप्‍लाई चेन भी ध्‍वस्‍त हुई है। ऑप्टिक्‍स और बिजनेस, दोनों लिहाज से चीन को तगड़ा झटका लगा है। इसी दौरान, भारत उसे हैरान करने को तैयार है। यह एक मौका है कि उन कंपनियों को अपने देश बुलाया जाए जो कोरोना जैसी महामारी फैलने के बाद चीन में नहीं रहना चाहती। उन्‍हें अपना प्रॉडक्‍शन बेस बदलना है और भारत के लिए इससे अच्‍छी बात क्‍या हो सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारा भी कर दिया है कि वे इस दिशा में इनवेस्‍टमेंट्स करने को तैयार हैं।
मोदी अपने मंत्रियों से बात कर चुके हैं। कैबिनेट का प्रस्‍ताव भी लगभग तैयार है। पीएम कह भी चुके हैं कि भारत को सेल्‍फ-डिपेंडेंट बनाने की जरूरत है। पीएम मोदी के दिमाग में जो प्‍लान है, वो पिछले कई महीनों से इस्‍तेमाल हो रहा है। ये है प्‍लग एंड प्‍ले मॉडल। इसके जरिए इनवेस्‍टर्स अच्‍छी जगहों को आइडेंटिफाई करते हैं और फिर तेजी से अपना प्‍लांट वहां लगा देते हैं। अभी जो सिस्‍टम है वो करीब दर्जनभर राज्‍यों में इनवेस्‍टर्स को अपना सेटअप लगाने का मौका देता है। क्लियरेंस के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्‍य सरकारें भी सिंगल-विंडो प्‍लैटफॉर्म तैयार करने में जुटी हैं। इसमें इलेक्‍ट्रॉनिक और मॉनिटरिंग सिस्‍टम भी होगा।

नई दिल्‍ली। कोरोना वायरस से निपटने और लॉकडाउन की स्थिति को लेकर गुरुवार को स्‍वास्‍थ्‍य और गृह मंत्रालय की संयुक्‍त प्रेस कांफ्रेंस हुई। इस मौके पर स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय के संयुक्‍त सचिव लव अग्रवाल ने कहा कि देश में पिछले 24 घंटे में 630 लोग ठीक हो गए हैं। अभी टोटल रिकवरी रेट 25.18 प्रतिशत है, जो 14 दिन पहले 13.06 फीसद थी। इसमें लगातार बढ़ोतरी हो रही है। यह पॉजिटिव साइन है। डेथ रेट 3.2 फीसद है। 78 प्रतिशत मौतों में ऐसे केस रहे हैं जिन्हें और भी कई बीमारियां थीं। देश का डबलिंग रेट बढ़कर 11 दिन हो गया है। डेथ रेट 3.2 फीसद है।

उन्‍होंने कहा कि देश में दोगुना होने की दर (डब्लिंग रेट) लॉकडाउन से पहले 3.41 था जो अब बढ़कर 11 दिन हो गया है। कुछ राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जैसे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, जम्मू कश्मीर, उड़ीसा, राजस्थान, तमिलनाडु, पंजाब में डब्लिंग रेट 11 से 20 दिन पाया गया है। लद्दाख, कर्नाटक, हरियाणा, उत्तराखंड और केरल में 20-40 दिन का डब्लिंग रेट है। असम, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में 40 दिनों से ऊपर का भी डब्लिंग रेट है। 

उन्‍होंने कहा कि पिछले 24 घंटों में 1780 नए केस रिपोर्ट किए गए। कुल कोरोना पॉजिटिव मामले 33050 जिसमें से एक्टिव कोरोना केस 23651 हैं। अभी तक कुल 8324 ठीक हुए हैं।   उन्‍होंने कहा कि जहां तक टेस्टिंग प्रोटोकॉल की बात है हम केवल RT-PCR टेस्ट ही कर रहे हैं। गृह मंत्रालय की प्रवक्ता और संयुक्‍त सचिव पुण्‍य सलिला श्रीवास्‍तव ने बताया कि दूसरे राज्यों में जाने वाले लोगों की स्क्रीनिंग होगी, बस में सोशल डिस्टैंसिंग का ध्यान रखा जाएगा। बस की सैनिटाइजेशन होगी। 

पहुंचने पर हेल्थ चेकअप होगा। कोई लक्षण न मिलने पर 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन किया जाएगा। समय-समय पर स्वास्थ्य का परीक्षण होगा।  उन्‍होंने कहा कि हैदराबाद का दौरा करने वाली केंद्रीय टीम ने पाया है कि राज्य के पास पर्याप्त संख्या में टेस्‍ट किट, पीपीई आदि हैं। राज्य मरीजों को परीक्षण से लेकर डिस्चार्ज तक ट्रैक करने के लिए एंड-टू-एंड आईटी डैशबोर्ड का उपयोग कर रहा है।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को गंभीर रूप से बीमार कोरोना वायरस के रोगियों के लिए उपचार दिशानिर्देश को बदलने के लिए कोई निर्देश देने से इनकार कर दिया है। इसके तहत रोगियों को मलेरिया-रोधी दवा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन और एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन  का कॉम्बिनेशन दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में विशेषज्ञ नहीं है।

जस्टिस एन वी रमना, संजय किशन कौल और बी आर गवई की पीठ ने एक गैर सरकारी संगठन पीपल फॉर बेटर ट्रीटमेंट द्वारा दायर याचिका को भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) का प्रतिनिधित्व माना। सुनवाई के दौरान ओहियो स्थित भारतीय मूल के डॉक्टर और पीबीटी अध्यक्ष कुणाल साहा ने कहा कि उन्होंने कोरोना वायरस के लिए उपचार को नहीं बल्कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन के कॉम्बिनेशन के दुष्प्रभाव को चुनौती दी है क्योंकि लोग इसके कारण मर रहे हैं।


साहा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होकर कहा कि एक अमेरिकी हृदय संस्थान ने इशके दुष्प्रभावों को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है, जिस पर विचार किया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि अभी तक कोविद -19 के इलाज के लिए कोई दवा नहीं है और डॉक्टर अलग-अलग तरीके आजमा रहे हैं। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले में विशेषज्ञ नहीं है और इलाज के तरीकों का निर्धारण करना डॉक्टरों का काम है और हम यह तय नहीं कर सकते हैं कि किस तरह का इलाज दिया जाए। पीठ ने साहा को आईसीएमआर के प्रतिनिधित्व के रूप में अपनी याचिका लेने को कहा, जो इसके सुझावों की जांच कर सकती है।

साहा ने कहा कि वह यह नहीं कह रहे हैं कि उपचार के लिए कोई विशेष करीका सही है या नहीं, लेकिन वह सिर्फ सावधानी बरतने के लिए कह रहे हैं क्योंकि लोग इसके दुष्प्रभावों से मर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक सूचित सहमति होनी चाहिए क्योंकि मरीज को यह जानने का अधिकार है कि उपचार के दौरान जोखिम शामिल है। शाह ने कहा कि डॉक्टरों को रोगियों को जोखिम के बारे में बताना चाहिए और उसकी सहमति लेनी चाहिए।

जनहित याचिका में कहा गया है कि हाइड्रोक्सी क्लोरोक्विन और एंटीबायोटिक एजिथ्रोमाइसिन के उपयोग की सिफारिश स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सबसे गंभीर वोविड-19 रोगियों के लिए की गई थी। कई डॉक्टरों ने मंत्रालय के दिशानिर्देशों का पालन करते हुए भारत में अपने सबसे गंभीर रूप से बीमार सीओवीआईडी ​​-19 आईसीयू रोगियों के इलाज के लिए संयोजन का उपयोग करना शुरू कर दिया है।



चीन ने बेहद सख्त नियम बनाते हुए अब इससे निपटने का प्लान बनाया है। चीन के नए नियमों के मुताबिक देश में बिना रूल फॉले किये छींकने और खांसने पर लोगों को सजा भुगतनी होगी। चीन अपने देश में ये कानून 1 जून 2020 से लागू करने जा रहा है। खास बात ये है कि ऐसा करना अपराध होगा और इस अपराध में सजा के तौर पर अलग अलग तरह के जुर्माने लगाए गए हैं। इतना ही नहीं आप जेल भी जा सकते हैं।

चीन के बनाए गए नए कानून में लोगों को साफ-सफाई का ध्यान रखने के लिए और रूल्स को फॉलो करने के लिए कहा गया है। इन कानूनों के तहत अगर कोई व्यक्ति यदि किसी संक्रामक बीमारी से पीड़ित हैं तो उसे तुरंत ही इसकी जानकारी नजदीकी अस्पताल को देनी होगी। जहां पर जरूरी जांच व क्वारंटीन अवधि को पूरा कराने और सभी इलाज को सख्ती से करने के बाद ही मरीज क़ो छुट्टी दी जाएगी और सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।

नई दिल्ली। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता इरफान खान का 54 साल की उम्र में बुधवार को निधन हो गया है. इरफान पेट की समस्या से जूझ रहे इरफान की कल अचानक तबियत बिगड़ गई थी. जिसके बाद उन्हें कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. जहां इलाज के दौरान आज सुबह करीब 11 बजे उनकी मौत हो गई है. उनका 2018 में कैंसर की बीमारी का इलाज हुआ था. इरफान के निधन के बाद बॉलीवुड में शोक की लहर है। 

इससे पहले 25 अप्रैल को इरफान की मां सईदा बेगम (95 वर्ष) की जयपुर में मौत हो गई थी. कोरोना लॉकडाउन के कारण अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो पाए थे। इरफान हाल ही में कैंसर को मात देने के बंद लंबे समय बाद अंग्रेजी मीडियम के जरिए अपने चाहने वालों तक पहुंचे थे, लेकिन लॉकडाउन की वजह से सिनेमाघरों में प्रदर्शन प्रभावित होने के बाद फिल्म का हाल ही में ऑनलाइन प्रीमियर किया गया था। 

डॉयरेक्टर शुजीत सरकार ने ट्वीट करते हुए कहा कि मेरे प्रिय मित्र इरफ़ान। आप लड़े और लड़े और लड़े। मुझे आप पर हमेशा गर्व रहेगा हम फिर से मिलेंगे.. शांति और ओम शांति। इरफान खान को सलामी। अभिनेता अमिताभ बच्चन ने शोक जताते हुए ट्वीट कर कहा कि इरफ़ान खान के निधन की खबर मिल रही है. यह एक सबसे परेशान करने वाली और दुखद खबर है. हाथ जोड़ों, एक अविश्वसनीय प्रतिभा. एक महान सहयोगी. सिनेमा की दुनिया के लिए एक शानदार योगदानकर्ता. हमें बहुत जल्द छोड़ दिया। 

बता दें कि इरफान का जन्म 7 जनवरी 1967 राजस्थान में हुआ था. 54 वर्षीय इरफान ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से अभिनय सीखने के बाद 80 के दशक में मुंबई पहुंचे और चाणक्य, बनेगी अपनी बात, भारत एक खोज और चंद्रकांता जैसे सीरियलों के जरिए फिल्मों में एंट्री की थी। उनकी पहली फिल्म मीरा नायर की 1988 में रिलीज सलाम बाम्बे थी। इरफान ने मकबूल, लाइफ इन अ मेट्रो। द लंच बॉक्स, पीकू, तलवार, और हिंदी मीडियम, जैसी शानदार फिल्मों में काम किया है. उन्हें हासिल (निगेटिव रोल) लाइफ इन अ मेट्रो (बेस्ट एक्टर) पान सिंह तोमर (बेस्ट एक्टर क्रिटिक) और हिंदी मीडियम (बेस्ट एक्टर) के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. पान सिंह तोमर के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड दिया गया था. कला के क्षेत्र में उन्हें देश का चौथा सबसे बड़ा सम्मान पद्मश्री भी मिल चुका है। 


रांची। रांची स्थित राजेन्द्र आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डा. डीके सिंह ने कहा है कि आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को कोरोना वायरस  का कोई खतरा नहीं है। उन्होंने ये भी बताया कि लालू यादव का इलाज करने वाले किसी डॉक्टर या फिर उनकी टीम के स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड-19 का संक्रमण नहीं है। रिम्स निदेशक ने स्पष्ट किया कि आरजेडी के अध्यक्ष रिम्स के निजी वार्ड में भर्ती हैं। वह अपने वार्ड से बाहर नहीं निकल रहे हैं, ऐसे में उनके संक्रमित होने की आशंका नहीं है।
चारा घोटाले में सजा काट रहे लालू प्रसाद यादव रांची के रिम्स में प्राइवेट वार्ड में भर्ती हैं। रिम्स के निदेशक डा. डीके सिंह ने मंगलवार को लालू यादव के स्वास्थ्य को लेकर मीडिया में चल रही खबरों पर सफाई दी। दरअसल, कुछ खबरों में इस बात की आशंका जताई गई थी कि रिम्स के मेडिसिन विभाग में भर्ती एक बुजुर्ग मरीज के सोमवार को कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद लालू का इलाज कर रहे मेडिसिन विभाग के डॉक्टर उमेश प्रसाद की टीम के भी उससे प्रभावित होने की आशंका है।
रिम्स निदेशक ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव रिम्स के निजी वार्ड में भर्ती हैं। वह अपने निजी कक्ष से बाहर नहीं निकलते हैं, लिहाजा उनके संक्रमित होने की कोई आशंका नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लालू का इलाज कर रहे डा. उमेश प्रसाद की यूनिट का कोई भी सदस्य कोरोना संक्रमित नहीं है।

यह पूछे जाने पर कि क्या लालू यादव का भी कोरोना संक्रमण के लिए जांच कराया जाएगा, डॉ. सिंह ने कहा कि उसकी कोई जरूरत ही नहीं है। उन्होंने ये भी साफ किया कि अगर लालू यादव की यूनिट के डा. उमेश प्रसाद जरूरी समझेंगे तो उनकी जांच कराई जा सकती है। लालू यादव चारा घोटाले के चार विभिन्न मामलों में सजा पाने के बाद न्यायिक हिरासत में रिम्स में इलाजरत हैं।
इस बीच लालू यादव के बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने पटना में अपने पिता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जाहिर की है। तेजस्वी ने अपने पिता को जल्द पैरोल पर रिहा करने करने के लिए अपील की है। तेजस्वी ने कहा कि मैं चिंतित हूं क्योंकि 72 साल की उम्र होने और किडनी, हृदय रोग और मधुमेह जैसी बीमारियों से जूझने के कारण मेरे पिता को महामारी के दौरान और सुरक्षात्मक उपाय करने की जरूरत है। उन्होंने ये भी कहा कि जिनके परिवार हैं वही महसूस कर सकते हैं कि मैं क्या कर रहा हूं।

भालुकपोंग। कोरोना संकट के बीच पूरे देश में लॉकडाउन जारी है। इस दौरान लोगों से बार-बार लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की अपील की जा रही है ताकि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। बावजूद इसके नियमों के उल्लंघन के मामले आए-दिन सामने आते रहते हैं। इतने कठिन दौर में भी जहां एक ओर कुछ लोग गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं वहीं दूसरी ओर बेजुबान मिसाल पेश करते हुए इंसान को सबक सिखा रहे हैं। 

सड़क पर दूर-दूर बैठे बंदरों की ऐसी ही एक तस्वीर को केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने शेयर किया है। तस्वीर में कुछ बंदर लाइन से एक-दूसरे से दूरी बनाकर बैठे हुए हैं मानो वह इंसान को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने का संदेश दे रहे हों। वहीं एक शख्स इन बंदरों को तरबूज और केले खिला रहा है। तस्वीर को शेयर करते हुए किरण रिजिजू ने लिखा, असम-अरुणाचंल सीमा से लगे हुए भालुकपोंग के पास परफेक्ट सोशल डिस्टेंसिंग। अगर ध्यान से देखें, तो हम जानवरों से कई ऐसे जरूरी सबक सीख सकते हैं, जिन्हें हम अपनी रोजमर्रा की भागदौड़ में भूल जाते हैं। 

पठानकोट। सात साल के बच्चे की सांसें कभी भी थम सकती थीं। बच्चे को सांस लेने में दिक्कत आ रही थी। परिजन उसे लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल का चक्कर काट रहे थे। लेकिन डॉक्टर ही नहीं मिल रहे थे। यह सिलसिला छह अस्पतालों तक चला। जिंदगी की उम्मीद लिए परिजनों ने सातवें अस्पताल का रुख किया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मामला पंजाब के पठानकोट का है। हैरानी की बात ये है कि जिन छह अस्पतालों के परिजनों ने चक्कर लगाए उनमें से दो सिविल हॉस्पिटल थे। इसे हेल्थ सिस्टम की नाकामी नहीं तो क्या कहेंगे कि छह-छह अस्पताल एक बच्चे को जिंदगी नहीं दे सके। 

लंदन में सेटल हो चुके डॉक्टर धीरज सिंह मूल रूप से पठानकोट जिले के हैं। डॉक्टर धीरज ने बताया कि बच्चा उनके पिता के यहां काम करने वाले उपिंदर जोशी का है, जो मूल रूप से बिहार के हैं। जोशी 1995 से पठानकोट में रह रहे हैं। मंगलवार सुबह जब जोशी के बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हुई तो जोशी ने डॉक्टर धीरज को मदद के लिए फोन लगाया। कृष्णा नाम के इस बच्चे को जो समस्या थी उसके लिए लंदन बेस्ड डॉक्टर को इक्विपमेंट की जरूरत थी। लेकिन स्टेथोस्कोप समेत जरूरी उपकरण नहीं होने की वजह से वह परीक्षण नहीं कर सके। इसके बाद परिजन एक नजदीकी अस्पताल पहुंचे लेकिन वहां भी डॉक्टर ने चेकअप से इनकार कर दिया। 

इसके बाद वे बच्चे को लेकर एक प्राइवेट अस्पताल पहुंचे लेकिन यहां भी वही हाल रहा। एक डॉक्टर के रूप में मैंने अस्पताल स्टाफ से इमरजेंसी के बारे में बात करते हुए एक सीनियर डॉक्टर की जरूरत पर जोर दिया। लेकिन वे तैयार नहीं थे। इसके बाद मेरे भाई ने 108 ऐम्बुलेंस पर फोन किया और हम बच्चे को लेकर सुजानपुर सिविल अस्पताल पहुंचे। लेकिन वहां हालात इससे भी बदतर थे। मजबूरन हम लोगों ने ऐम्बुलेंस के ड्राइवर से पठानकोट सिविल अस्पताल छोड़ने की गुजारिश की। डॉक्टर धीरज ने बताया कि यहां भी उन्होंने पूछा कि क्या ईएनटी (आंख-नाक और गला) स्पेशलिस्ट या सर्जन बच्चे को देख सकते हैं लेकिन एक जूनियर डॉक्टर ने ही बच्चे का चेकअप किया। नर्सिंग स्टाफ ने कहा कि सीनियर डॉक्टर कोरोना के लिए बने आइसोलेशन वॉर्ड में हैं। इसके बावजूद कोई डॉक्टर बच्चे को देखने नहीं पहुंचा।

डॉक्टर धीरज ने बताया, एक बार फिर हम एक जाने-माने मल्टी स्पेशियलिटी हॉस्पिटल पहुंचे लेकिन जैसे ही स्टाफ ने ऐम्बुलेंस का हूटर बजते देखा, उन्होंने कहा कि इमरजेंसी केस देखने के लिए हमारे पास डॉक्टर नहीं हैं। एक अन्य अस्पताल पर बच्चे को एक फार्मासिस्ट ने देखा। डॉक्टर धीरज उन लम्हों का जिक्र करते हुए बताते हैं, मैं किसी तरह बच्चे को संभालने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे स्पेशलिस्ट की जरूरत थी। इसके बाद हम एक और मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल के लिए निकले लेकिन रास्ते में ही बच्चे ने दम तोड़ दिया।