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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



पूरब टाइम्स। इस दुनिया में हर इंसान चाहता है कि वह ज्यादा समय तक जिंदा रहे, लेकिन भागदौड़ भरी जिंदगी, चिंता और दूसरी वजहों से उसका यह सपना अधूरा रह जाता है। लेकिन इस दुनिया में एक ऐसा गांव है जहां पर रहने वालों की उम्र ज्यादा होती है। जी हां यह बिल्कुल सच है। आईए जानते हैं उस जगह के बारे में और इसके पीछे क्या है रहस्य...

हम जिस गांव की बात कर रहे हैं वह इंग्लैंड में है। यहां पर स्थित डेटलिंग और थर्नहैम केंट में मौजूद दोनों ही गांवों में लोग अप्रत्याशित रूप से अधिक उम्र तक जीवित रहते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों गांवों की महिलाओं की औसत उम्र 95 वर्ष है। यहां पर पुरुष के मुकाबले महिलाएं अधिक जीती हैं। अगर पूरे ब्रिटेन की बात की जाए, तो यहां पर लोगों की औसत आयु 83 वर्ष है। इंग्लैंड के इन दोनों गांवों में महिलाएं की उम्र 12 साल ज्यादा होती है जबकि यहां पर पुरुष कम से कम 86 साल तक जीते हैं। 

आपको जानकर यकीन नहीं हो रहा होगा, लेकिन इंग्लैंड में इस गांव के लोग सबसे अधिक समय तक जिंदा रहते हैं। इस गांव में पब्स और वर्कप्लेस पर स्मोकिंग करने पर बैन है। इस गांव के लोग इतने जागरुक हैं कि देशभर में यह प्रतिबंध लगाने के सात पहले ही यहां पर पब्स और वर्कप्लेस पर स्मोकिंग करना बैन हो गया था।  एक रिपोर्ट के मुताबिक, डेटलिंग गांव नॉर्थ डाउन्स के टीलों के पास स्थित है जहां पर करीब 800 लोगों की आबादी है। इस गांव के कई लोगों का नाम ब्रिटेन के सबसे बुजुर्ग लोगों की लिस्ट में शामिल किया गया है। इस गांव की महिलाओं की औसत आयु 95 साल है, तो वहीं ब्रिटेन में लोगों की औसत उम्र सिर्फ 83 साल है। 

बताया जाता है कि इस गांव के लोग अपने स्वास्थ को लेकर काफी जागरुक हैं। अपने स्वास्थ्य का बेहतर तरीके से ध्यान रखते हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस गांव में ही 8 डॉक्टर हैं। इसकी वजह से लोगों को आसानी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल जाती हैं। गांव में प्राकृतिक जलाशय है जिससे यहां के लोगों को पानी मिलता है। इसके चलते यहां पर साफ पानी की भी कोई समस्या नहीं है। 

पूरब टाइम्स। पृथ्वी पर करोड़ों जीव हैं और हर एक जीव की आयु अलग-अलग होती है। हाल ही में आई एक स्टडी में खुलासा हुआ था कि इंसान के अधिकतम जीवित रहने की संभावना 150 साल है। वहीं व्हेल, शार्क और कछुआ जैसे कुछ जीवों की उम्र लंबी होती है। कछुआ और बोहेड व्हेल करीब 200 साल तक जीवित रह सकते हैं और रफआई रॉकफिश जो कि मछलियों की एक प्रजाति है, कम से कम 205 साल तक जिंदा रहती है, लेकिन क्या आपकोे ये पता है कि पृथ्वी पर कुछ ऐसे भी जीव होते हैं जिनकी उम्र काफी कम होती है। जी हां, कुछ जीव इस धरती पर महीने भर और कुछ तो महज 24 घंटे के ही मेहमान होते हैं। तो चलिए आज जानते हैं उन जीवों का नाम और उनके बारे में जो इस धरती पर सबसे कम दिन तक जिंदा रहते हैं ...



पूरब टाइम्स। आपने कई ऐसे एयरपोर्ट देखे होंगे, जो काफी खूबसूरत हैं। उनकी खूबसूरती अक्सर आपको अपनी ओर खींच ले आती है। लेकिन आज हम आपको दुनिया के कुछ एयरपोर्ट के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बेहद ही खतरनाक हैं। इन हवाईअड्डों पर विमान लैंड कराते या टेक-ऑफ कराते समय पायलट भी सौ बार सोचते हैं। कोई नया पायलट तो इन जगहों पर विमान उड़ाने की सोच भी नहीं सकता जबकि प्रशिक्षित पायलटों के लिए भी यह आसान नहीं होता। यही वजह है कि इन हवाईअड्डों को दुनिया के सबसे खतरनाक हवाईअड्डों में गिना जाता है।  

नेपाल का तेनजिंग-हिलेरी एयरपोर्ट उन्हीं खतरनाक हवाईअड्डों में से एक है। यह एयरपोर्ट हिमालय की चोटियों के बीच बसे लुकला शहर में है, जिसके रनवे की लंबाई महज 460 मीटर है। यहां सिर्फ छोटे विमान और हेलीकॉफ्टर की ही उतरने की इजाजत है। इस एयरपोर्ट के रनवे के उत्तर में पहाड़ की चोटियां हैं तो दक्षिण में 600 मीटर गहरी खाई। यही कारण है कि इस एयरपोर्ट को दुनिया के सबसे खतरनाक एयरपोर्ट में से एक माना जाता है।  

मालदीव के माले इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उड़ान भरना या विमान की लैंडिंग कराना पायलटों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। यह एयरपोर्ट समुद्री तट से केवल दो मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। खास बात ये है कि यह दुनिया का इकलौता ऐसा एयरपोर्ट है जो अलकतरा से बना हुआ है। यह एयरपोर्ट समुद्र के बीच में बना हुआ है। यहां पायलटों की एक छोटी सी चूक हवाई जहाज को सीधे हिंद महासागर में गिरा सकती है। 

कैरेबियाई द्वीप साबा के जूयानको ई इरासकिन एयरपोर्ट पर विमान लैंड कराना कमजोर दिल वाले पायलटों के बस का नहीं है। यह दुनिया का सबसे छोटा रनवे है, जिसकी लंबाई करीब 396 मीटर है। यह रनवे एक पर्वतीय चट्टान पर बना है जो तीन ओर से समुद्र में घिरा है और एक तरफ पर्वतीय चोटी है। यहां पायलट की छोटी सी भी चूक विमान को समुद्र में डूबा सकती है। अमेरिका का कोलोरेडो स्थित टेलूराइड रीजनल एटरपोर्ट 2,767 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां एक ही रनवे है, जो रॉकी पर्वत के एक हिस्से पर बना हुआ है। इसके सामने 300 मीटर की गहराई पर सान मिगुल नदी बहती है। यहां विमान उतारना रोंगटे खड़े कर देने वाला अनुभव होता है।  

हांगकांग का काई टाक एयरपोर्ट भी बेहद खतरनाक एयरपोर्ट में से एक था। यहां साल 1925 से 1998 तक विमान उतरते और उड़ते रहे हैं, लेकिन अब इस एयरपोर्ट को बंद कर दिया गया है। यह एयरपोर्ट इसलिए खतरनाक था, क्योंकि इसके दोनों तरफ ऊंची-ऊंची इमारतें थीं, जबकि आमतौर पर एयरपोर्ट के आसपास ऊंची इमारतें बनाने की मनाही होती है। इसके अलावा इस एयरपोर्ट का रनवे भी काफी छोटा था। 

पूरब टाइम्स। बहुत सारे लोगों को बिरयानी बहुत पसंद है. अगर आपको भी बिरयानी पसंद है कि तो ये खबर आपके लिए है. आज हम आपको एक ऐसी बिरयानी के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी कीमत 20 हजार रुपये है. सबसे खास बात यह है कि इस बिरयानी को 23 कैरेट गोल्ड से गार्निश किया जाता है. हम आपको जिस बिरयानी के बारे में बताने जा रहे हैं वो दुनिया की सबसे महंगी बिरयानी है. इसे  खाने के लिए आपको सबसे पहले अभी पॉकिट चेक करनी पड़ेगी. लेकिन शौकीन और अमीर लोग इसे अपना शाही खाना समझते हैं. हम बात कर रहे हैं दुबई के एक नामी रेस्त्रां में मिलने वाली गोल्ड की रॉयल बिरयानी  की.

इस बिरयानी को कुछ दिनों पहले ही लॉन्च किया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, डीआईएफसी में स्थित बॉम्बे ब्रोट रेस्त्रां ने दुनिया की सबसे महंगी बिरयानी को अपने मेन्यू में शामिल किया है. एक प्लेट बिरयानी की कीमत 20,000 रुपये रखी गई है. क्योंकि इस बिरयानी को 23 कैरेट गोल्ड से गार्निश किया जाता है और इसका नाम रॉयल गोल्ड बिरयानी रखा गया है.

इस बिरयानी की खास बात ये हैं कि रेस्त्रां ग्राहकों को बिरयानी में कश्मीरी मटन कबाब, पुरानी दिल्ली मटन चॉप्स, राजपूत चिकन के कबाब, मुगलई कोफ्ते और मलाई चिकन को परोसता है. इसके साथ ही इस बिरयानी के साथ रायता, करी और सॉस  भी दी जाती है. रेस्त्रां ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई इस बिरयानी का ऑर्डर प्लेस करता है तो उसे 45 मिनट के अंदर सर्व भी कर दिया जाता है.

इसके अलावा आपके ये इसलिए भी किफायती है क्योंकि इस एक प्लेट बिरयानी को आप अकेले नहीं खा सकते. सोने से सजी 20,000 रुपये की यह बिरयानी  आपको अकेले नहीं खानी बल्कि रेस्त्रां आपको 6 लोगों में यह बिरयानी शेयर करने का मौका भी दे रहा है. केसर के धागों से सजी यह रॉयल बिरयानी  देखने में ही इतनी गजब लग रही है तो इसके स्वाद का अंदाजा तो आप फोटो देखकर ही लगा सकते हैं.

पूरब टाइम्स। भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान पर आतंकी संगठन तालिबान ने कब्जा कर लिया है. अब वहां तालिबान की हुकूमत कायम है. करीब 20 साल बाद जैसे ही अमेरिका ने अपनी सेना को अफगानिस्तान से वापस बुलाया तालिबान सक्रिय हुआ और उसने पूरे देश पर कब्जा कर लिया. बता दें कि साल 2001 में अमेरिका ने अल-कायदा और तालिबान को अफगानिस्तान से बेदखल करने के लिए हमला बोला था. इसके बाद इन 20 सालों में अमेरिकी सैनिकों ने कई खतरनाक आतंकियों को मार गिराया, लेकिन साल 2002 में अमेरिका की सेना का सामना एक महादानव से हुआ.

इस महादानव ने अमेरिका के कई सैनिकों को मार गिराया. यह अफगानिस्तान के एक सुनसान इलाके में एक रहस्यमयी गुफा में छिपकर रहता था. जहां किसी भी अमेरिकी सैनिक की जाने की हिम्मत नहीं होती थी. आज हम आपको इसी गुफा के बारे में बताने जा रहे हैं जिसके रहस्य के बारे में अमेरिका भी दुनिया छुपाता रहा है. दरअसल, साल 2002 में अमेरिका की सेना आंतकी संगठन अलकायदा और तालिबान को समाप्त करने के लिए एक सीक्रेट ऑपरेशन चलाने की तैयारी की थी, अमेरिकी सेना का मकसद था वह छिपकर रह रहे आतंकियों को खोजकर मार दे.

ये आतंकवादी अफगानिस्तान के पहाड़ी इलाकों में मौजूद गुफाओं छिपे हुए थे. आतंकियों के सफाए के लिए अमेरिका की सेना ने सैनिकों के कई ग्रुप बनाए और उनको अलग-अलग क्षेत्रों में भेज दिया. अमेरिकी सैनिक उन इलाकों में पहुंचे जहां पर दूर-दूर तक कोई इंसान नहीं रहता था. हालांकि अमेरिकी सैनिकों के पास खुफिया जानकारी थी कि इन्हीं इलाकों में स्थित गुफाओं में अलकायदा और तालिबान के आतंकी छिपे हुए हैं. इसीलिए उन्होंने यहीं पर आतंकियों की तलाश शुरु कर दी.

यहां स्थित एक गुफा में अमेरिका की सेना पहुंची जहां पर बिल्कुल अंधेरा था. लेकिन इस गुफा में पहुंचते ही अमेरिकी कमांडो लापता हो गए. अमेरिकी सैनिकों ने लापता कमांडो की बहुत तलाश की, लेकिन उनका कोई पता नहीं चला. इस अभियान में शामिल अमेरिकी कमांडो ने गुफा में इंसानों के कंकाल देखे और आर्मी के कम्युनिकेशन सेट भी बरामद किए. उसके बाद अमेरिकी सेना आगे बढ़ी और गुफा के अंदर कुछ ऐसा दिखा जिसके बाद उनके होश उड़ गए.
उन्होंने वहां एक महादानव जैसे दिख रहे एक 15 फीट लंबे शख्स को देखा. इसके बाद अमेरिकी सैनिकों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी कर उसे मौत के घाट उतार दिया. इसके बाद अमेरिका के सैनिकों ने बम धमाका कर उस गुफा को बंद कर दिया और इस राज को हमेशा-हमेशा के लिए दफना दिया. इस घटना के बारे में सोशल मीडिया पर कई तरह की कहानियां बताई गईं. हालांकि अमेरिका ने साल 2002 की इस घटना पर कोई बयान नहीं दिया. और ना ही इस घटना को कोई सबुत है. ना ही अमेरिकी सैनिकों ने इस बारे में कभी किसी को कोई जानकारी दी.

पूरब टाइम्स। ताजमहल अपनी उत्कृष्टता और स्थापत्य सुंदरता के लिए जाना जाता है। यह दुनिया के सात अजूबों में से एक है। ताजमहल प्यार को दर्शाता है। कहा जाता है कि इसका निर्माण शाहजहाँ ने अपनी सबसे प्यारी पत्नी मुमताज़ के लिए करवाया था। ताजमहल की कई कहानियां हैं, जो कई व्यक्तियों के मेहनती काम और भक्ति को दर्शाती हैं जो इसे बनाते समय लगे थे।

ताजमहल का सबसे चौंकाने वाला रहस्य यह है कि इसका निर्माण शाहजहाँ द्वारा आगरा पर शासन करने से ठीक पहले किया गया था। जैसा कि पुस्तक "ताजमहल की वास्तविक कहानी" से संकेत मिलता है, किला शुरू में आगरा के पूर्व राजपूत लोगों द्वारा काम किया गया था। उसके बाद, राजपूतों के खिलाफ लड़ाई जीतने के बाद शाहजहाँ ने अभयारण्य को जीत लिया। यह ताजमहल का एक अत्यंत कठिन रहस्य है जो किसी भी प्रशासन निकायों द्वारा अभी तक प्रमाण नहीं है।



ताजमहल में पानी की एक छोटी सी धारा है जो अचानक बहती है। धारा की भलाई किसी के द्वारा ध्यान देने योग्य नहीं है। जैसा कि विशेषज्ञों द्वारा शोध किया गया है, यह धारा ठीक उसी स्रोत से है जहां शिव लिंग पर पानी डाला जाता है जब यह मुस्लिम मकबरे से पहले हिंदुओं का मंदिर था। यह ताजमहल के सबसे रोमांचक गूढ़ रहस्यों में से एक है। ऐसे कई विशेषाधिकार प्राप्त अंतर्दृष्टि हैं जो कब्र के व्यक्तित्व पर एक मुद्दा लाते हैं।

पूरब टाइम्स। रूस से साल 2017 में एक ऐसा मामला सामने आया था, जहां एक पति-पत्नी को पुलिस ने खौफनाक हत्या के मामले में गिरफ्तार किया था. कपल को जब गिरफ्तार किया गया था, तब उन पर एक वेट्रेस और एक अन्य व्यक्ति को मारने तथा उनके मांस को खाने का आरोप लगा था. बाद में दोनों पति-पत्नि ने जब अपने राज खोले तो जिसने भी सुना हैरान रह गया था. पुलिस ने मामले में खुलासा किया था कि कपल ने 30 से अधिक लोगों को ऐसे ही मारा था और उनके मांस से अचार बनाकर उसे लोकल रेस्टोरेंट में बेच दिया था. इस मामले के सामने आने बाद रूस के कई शहरों में सनसनी फैल गई थी. बता दें कि रूस के क्रासनोदर शहर में पुलिस को एक मोबाइल फोन मिला था.

फोन चेक करने पर पुलिस ने देखा कि उसमें एक फोटो थी. इस फोटो में एक आदमी मानव शरीर के साथ सेल्फी ले रहा था. इसके बाद पुलिस ने व्यक्ति की तलाश शुरू की. इसके बाद पुलिस इस कपल तक पहुंचने में सफल हुई. जब इस कपल के घर की तलाशी पुलिस ने ली थी तो उसके होश उड़ गए थे. इस कपल के घर से पुलिस ने आठ लोगों के शरीर के अंग बरामद किए थे. पुलिस को इनके घर में एक तहखाना मिला था, जिसमें पुलिस ने 19 लोगों की खाल बरामद की थी. इनके घर से एक अचार का जार भी बरामद हुआ था. खुलासा हुआ था कि वो इंसानी मांस का बना हुआ अचार था. पुलिस को उबले हुए मांस के साथ कई डिब्बे उनकी रसोई में मिले थे. पुलिस को उनके घर से कई मोबाइल फोन भी बरामद हुए थे.

पुलिस को मोबाइल फोन से एक वीडियो भी मिला था. इस वीडियो में कपल ने बताया था कि इंसान का मांस कैसे पकाया जाता है. तब कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि इस कपल ने अपना आखिरी शिकार एक वेट्रेस को बनाया था. इस वेट्रेस से उन्होंने एक डेटिंग ऐप के जरिए बुलाया था. दावा किया गया था कि वेट्रेस की उम्र 35 साल थी और उसका नाम एलेना वशुर्शेवा था.

पूरब टाइम्स। जब भी महाभारत का जिक्र होता है, उसमें दुर्योधन के मामा शकुनी का नाम जरूर आता है. कहा जाता है कि दुर्योधन के मन में पांडवों के प्रति नफरत का बीज शकुनी मामा ने ही बोया था. शकुनी मामा ने जुए का ऐसा खेल खेला था कि कौरव और पांडव महाभारत के महायुद्ध के लिए तैयार हो गए. इसके बाद कुरु वंश का नाश हो गया. एक धार्मिक कथा के मुताबिक, शकुनी नहीं चाहता था कि उसकी बहन गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र से हो. हालांकि भीष्म पितामह के दबाव में गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र से करना पड़ा था. इसके बाद से शकुनी बदले की भावना से हस्तिनापुर आकर रहने लगा था और षड्यंत्र रचने लगा था.



अपने परिवार के साथ हुए अत्याचार को शकुनी भूल ना जाएं, इसलिए उनके परिवार ने उनके पैर तोड़ दिए जिससे शकुनी लंगडा के चलते थे. शकुनी के पिता जब बंदी गृह में मरने लगे तब उन्होंने शकुनी की चौसर में रुचि को देखते हुए शकुनी से कहा कि मेरे मरने के बाद मेरी उंगलियों से पासे बना लेना. इनमें मेरा आक्रोश भरा होगा जिससे चौसर के खेल में तुम्हें कोई हरा नहीं पाएगा. इसी के चलते शकुनी हर बार चौसर के खेल में जीत जाते थे. वो पांडवों को इस खेल में हराने में सफल हुए.

पूरब टाइम्स। पृथ्वी के अलावा दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं और उसके जानने को लेकर इंसान हमेशा उत्साहित रहा है. दुनियाभर के वैज्ञानिक भी इस बात की खोज करने में लगे हैं कि क्या पृथ्वी के अलावा भी किसी दूसरे ग्रह पर कोई रहता है? आसमान में उड़ती उड़नती की कहानियों ने इसे और बढ़ा दिया. दूसरी दुनिया से आने वाले परग्रही एवं उनकी उड़नतश्तरियों के दिखने की घटनाओं ने पूरी दुनिया में ऐसा रोमांच पैदा किया मानो उनके जैसा कोई ना हो. ऐसा माना जाता है कि कई दशकों से वैज्ञानिक इन घटनाओं के पीछे की सच्चाई को आम जनता से छुपाते चले आए लेकिन कुछ घटनाएं बेमिसाल हैं जो बड़ी संख्या में उपस्थित आम लोगों के सामने घटित हुई हैं और वह उनके गवाह बने.

आज हम आपको एक ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहे हैं जो 13 अक्टूबर 1917 की है. दरअसल, यूरोपीय देश पुर्तगाल के कोवा डा इरिया नामक स्थान पर तीन बच्चों ने पेड़ पर झूलते हुए एक प्रकाश-पुंज को देखा. बताया जाता है कि उस प्रकाश-पुंज के भीतर एक सुन्दर देवी, दिव्य वस्त्रों में खड़ी मुस्कुरा रही थीं. जिसे देखकर बच्चे डर गए और वह वहां से भाग खड़े हुए. तभी उस देवी ने कहा ठहरो! डरो मत, मै ऊपर स्वर्गलोक से आई हूं. अगर तुम लोग इसी समय आया करोगे तो इस दिव्य प्रकाश के साथ मेरे भी दर्शन कर सकोगे बच्चे कौतूहल से एकटक उसी की तरफ़ देख रहे थे. उन्हें वो कोई फ़रिश्ता लग रही थी. शाम होते-होते, लड़कों ने ये बात सब जगह फैला दी.

दूसरे दिन उस गांव और आस-पास के दूसरे गांव से भी कुल लोग मिलकर वहां पहुंचे. इस तरह से वहां सत्तर हज़ार लोग उस जगह इकठ्ठा हो गए जहां उन लड़कों ने देवी के दर्शन की बात बताई थी. इतने अधिक लोगों के इकठ्ठा हो जाने से किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि सही जगह कौन सी है और कईयों को तो ये बात अफ़वाह भी लग रही थी. समय बीतता गया, लेकिन उन देवी के दर्शन किसी को नहीं हुए. अचानक उन्हें आकाश में, बादलों के बीच, एक चांदी की तरह चमकता हुआ एक दिव्य प्रकाश का गोला दिखाई दिया. वहां उपस्थित दर्शकों में कई पढ़े-लिखे नौजवान और कुछ अनपढ़, आस्तिक, नास्तिक, विद्वान भी शामिल थे.

वे सभी लोग उस समय, आकाश में प्रकट होने वाले उस दिव्य प्रकाश के गोले को देखकर आश्चर्यचकित थे और सोच रहे थे कि ‘यह क्या बला है’ बादलों से प्रकट होने के बाद वह चमकदार उड़नतश्तरी स्थिर न रह सकी और आकाश में ही घेरे बनाकर विभिन्न प्रकार की गतियां करने लगी. यह प्रकाश कभी धीरे-धीरे हवा में तैरता हुआ आगे बढ़ता और कभी पलक झपकते ही तेज़ी से एक ओर निकल जाता. हवा में इस प्रकार से कलाबाजियां खाने से, उस उड़नतश्तरी से, इन्द्रधनुषी आकृतियाँ बनने लगीं.

बताया जाता है कि बहुत समय तक उस उड़नतश्तरी के ऊपर इन्द्रधनुष उभरा रहा. उस इन्द्रधनुष का घेरा काफी बड़ा था. उस समय हल्की-हल्की बारिश हो रही थी. दर्शकों का एक विशाल हूजूम एक अभूतपूर्व घटना का साक्षी बना हुआ था. उनका मनोरंजन करती हुई उस उड़नतश्तरी ने अचानक पूरे दर्शकों के समूह का एक चक्कर लगया और गर्म-तरंगो की एक लहर छोड़ी. जिसके परिणामस्वरूप वहां उपस्थित दर्शकों के कपड़ों से भाप उठने लगी और उनके कपड़े मिनटों में सूख गए. इस घटना की जानकारी फैलने पर पूरे पुर्तगाल में तहलका मच गया.

वहां के एक प्रसिद्ध, दैनिक समाचार पत्र मार्से क्यूलों ने इस घटना का आंखों देखा विवरण छापा और इसे चमकदार सूर्य का नृत्य नाम दिया. पढ़े-लिखे, मॉडर्न और वैज्ञानिक जैसी सोच वाले लोगों को इस घटना के घटित होने में संदेह था. उनके हिसाब से ये एक प्रकार का Mass Hypnotism था. एक बड़ी संख्या में लोगों ने वही देखा और महसूस किया जो उन्हें दिखाया गया.

पूरी पृथ्वी पर जहां कहीं भी उड़नतश्तरियों के देखने की घटना हुई है वहां उसके गवाह, दो, चार लोग ही बने. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा, दूसरी दुनिया के परग्रहियों की उड़नतश्तरी देखने की यह घटना अपने आप में अनोखी है. जो इसका प्रमाण देने के लिए काफ़ी हैं कि हमसे भी उन्नत सभ्यतायें और संस्कृतियां, इस ब्रह्माण्ड के अन्य ग्रहों पर हैं और हमारी धरती पर वह बेरोकटोक आ जा सकती हैं.






पूरब टाइम्स। दुनिया के ऐसे कई रहस्य है जिनसे आज तक पर्दा नहीं उठा है। उनमे से एक है अमेरिका के एरिया 51 का रहस्य। माना जाता है कि यहां एलियंस को कैद कर रखा है और अमेरिका के वैज्ञानिक उन पर शोध कर रहे हैं। उस एरिए में कड़क सुरक्षा के इंतजाम देखे गए है साथ ही वहां जाने की किसी को इजाजत नहीं है। इस बात के बारे में अमेरिका के लोगों को पता नहीं था

पहली बार साल 2013 में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने लोगों को इस बारे में बताया कि एरिया 51 जैसी जगह है, लेकिन उन्होंने  एलियंस के होने की पुष्टी नहीं की। जिसके बाद ये खबर तेजी से देश दुनिया में फैलने लगी। लोग यही मानने लगे कि अमेरिका के एरिया-51 मे एलियंस हैं। इसकी सीमा पर कई जगह चेतावनी दी गई है कि यहां जाना खतरे से खाली नहीं है। 24 घंटे इस क्षेत्र की रखवाली करते हुए इस जगह पर जवान तैनात होते हैं। 3.7 किमी में फैले इस क्षेत्र  के ऊपर से कोई विमान को जाने की इजाजत नहीं है। अमेरिकी सरकार का कहना है कि यह क्षेत्र सेना के अभ्यास के लिए है। यहां पर युद्ध की तैयारी, ट्रेनिंग आदि की जाती है तथा इस क्षेत्र को रुस पर नजर रखने के लिए बनाया गया है। यहां पर यू-2 नामक विमान भी था। सीआईए ने हरी लाइटों वाले किसी रहस्यमयी विमान के बारे में कहा था। उसने कहा था कि यह चर्चित विमान पचास के दशक में दुनिया के किसी भी विमान से ज्यादा विकसित और अलग प्रतीत होता है। 

पूरब टाइम्स। न्यूयॉर्क में एक महिला मछली पकड़ने गई थी, तभी उसके जाल में एक ऐसी चीज फंस गई , जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. दरअसल, डेबी गेडेस नाम की एक महिला अपने पति के साथ लेक चम्पलेन में छुट्टियां मनाने गई है. इस दौरान वह मछलिया पकड़ने लगी. इसी दौरान उसके जाल में दो मुंह वाली एक मछली फंस गई. मछली को देखकर महिला हैरान रह गई. उसके बाद जिसने भी इस मछली को देखा इस रहस्यमयी मछली को देखकर हैरान रह गया.

उसके बाद डेबी ने इस मछिली के साथ कुछ फोटो लिए और बाद में इसे लेक में छोड़ दिया. डेबी ने मछली की कुछ तस्वीरें अपने फेसबुक पर शेयर की है. उसके बाद ये तस्वीर वायरल होने लगी. डेबी गेडेस का कहना है कि, जब हमने मछली को बोट की तरफ खींचा तो हमें यकीन नहीं हुआ कि हमने दो मुंह वाली मछली पकड़ी है. दो मुंह होने के बाद भी ये यह मछली स्वस्थ है, यह बहुत ही अद्भुत है.

मछली की तस्वीर को डेबी के ऑफिस के कलिग ने भी फेसबुक पर अपलोड की है. उन्होंने कहा कि वो डेबी की अनोखी मछली की खोज के लिए बहुत ज्यादा उत्साहित हैं. दो मुंह वाली इस मछली की फोटो देखकर हर कोई हैरान है. लोगों को दो मुंहों वाली मछली देखकर विश्वास ही नहीं हो रहा है कि ऐसा हो रहा है कि ऐसा हो सकता है. लोग इस तस्वीर को देखकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं.

पूरब टाइम्स। जब भी हम अपने घरों से बाहर जाते हैं तो ताला लगाना नहीं भूलते क्योंकि अगर हम ऐसा करना भूल गए तो संभवतः कोई चोर घर के सामन पर हाथ साफ कर दे. लेकिन आज हम आपको एक ऐसे स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जहां के लोग घरों में ताले नहीं लगाते. जहां क्राइम तो ऐसा है जैसे कोई अपराध करना जानता ही न हो. लोग हंसी खुशी एक दूसरे के साथ रहते हैं. दरअसल, हम बात कर रहे हैं उत्तरी अमेरिका के कोलंबिया में समंदर के बीचों बीच बसी एक बस्ती की. जो सांता क्रूज डेल इस्लोट नाम के एक द्वीप की. जो सिर्फ 2.4 एकड़ में फैला है और इसपर 1200 लोग रहते हैं. ये द्वीप कोलंबिया के तट के पास सैन बर्नार्डो द्वीपसमूह के केंद्र में स्थित है.

इसके आकार को देखते हुए, यहां की जनसंख्या का घनत्व अमेरिकी शहर मैनहटन से चार गुना ज्यादा है. यहां रहने की शैली आधुनिकता से बहुत दूर है. इस द्वीप पर रोजाना केवल 5 घंटे बिजली आती है. साथ ही यहां पानी का ऐसा कोई स्रोत नहीं है जिसका इस्तेमाल पीने-खाने और नहाने के लिए किया जा सके. यहं रहने वाले लोगों के लिए पीने का पानी केवल कोलंबियाई नौसेना द्वारा आता है. लेकिन यह हर रोज नहीं बल्कि महीने में सिर्फ एक बार. 

ऐसा माना जाता है कि इस द्वीप पर ये लोग 150 साल से रह रहे हैं. तमाम चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद यहां के निवासी इस द्वीप को छोड़ने को तैयार नहीं हैं. ऐसा माना जाता है कि मछुआरों के एक छोटे से समूह ने इस द्वीप की खोज की थी. एक बार वह समंदर में मछलियां पकड़ने आए थे. इसी दौरान वह नए स्थानों की भी खोज करते थे. एक दिन उन्हें समंदर के बीच में ही अंधेरा हो गया. तो उन्होंने इसी द्वीप पर रात गुजराने का फैसला लिया. उन्हें ये द्वीप इतना पसंद आया कि वे वहां से कभी वापस नहीं लौटे. आज, सांता क्रूज़ डेल इस्लोट निवासियों के लिए मछली पकड़ना मुख्य व्यवसाय है.


पूरब टाइम्स। दुनिया में ऐसी कई जगहें हैं जहां सूर्योदय और सूर्यास्त काफी आकर्षक होता है। कई जगहों पर लोग केवल सूर्योदय देखने जाते है तो कई जगहों पर केवल सूर्यास्त। लेकिन क्या आप ऐसी जगह पर जाने की कल्पना कर सकते हैं जहां सुबह होते सूर्योदय तो हो पर शाम में सूर्यास्त ना हो। दुनिया में ऐसी ही कुछ जगहें है जिनके बारे में अधिकांश लोग नहीं जानते। इन जगहों पर महीनों तक दिन व महीनों तक रात भी रहती है। 





पूरब टाइम्स। अंधविश्वास से जुड़ी कई घटनाएं हमने सुनी हैं और कई बार जो होता है उस पर विश्वास करना मुश्किल होता है। वैसे तो आज के समय में लोग अंधविश्वास को नहीं मानते। लेकिन अफवाहों का बाजार तो आज भी गर्म होता है और ऐसा ही कुछ देखने को मिला बिहार के सीतामढ़ी में। यहां पार्ले-जी बिस्किट से जुड़ी एक अफवाह ने जो किया उसके बारे में जानकार बेशक आपको हंसी आए, लेकिन विश्वास करना भी मुश्किल होगा। 


बिहार के सीतामढ़ी में जतिया पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन माताएं अपने पुत्र की दीर्घ आयु के लिए और उनके सुखमयी जीवन के लिए व्रत रखती हैं। इसी का फायदा उठाकर यहां एक अफवाह फैलाई गई, जिसमें कहा गया कि, पुत्र की दीर्घ आयु के लिए, उसके सुखमयी जीवन के लिए तथा उसे कोई भी अनहोनी से बचाए रखने के लिए पार्ले-जी बिस्कुट जरुरी है। देखते ही देखते यह अफवाह आग की तरह फैल गई और पूरे गांव में पार्ले-जी बिस्किट को खरीदने दुकानों पर भीड़ उमड़ गई। हालत यह हुई कि दुकानों से पार्ले-जी का स्टॉक ही खत्म हो गया। 

आपको यह जानकर और भी ताज्जुब होगा कि इसे पूरे मामले में किसी ने भी इस अफवाह का सच जानने की कोशिश नहीं की। नतीजा यह कि दिन तो निकला देर रात तक भी लोग पार्ले-जी बिस्किट के लिए दुकानों पर इंतजार करते नजर आए। हालांकि यह अफवाह किसने और कब फैलाई, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन इससे पार्ले जी बिस्किट की बिक्री में काफी तेजी आ गई। इस अफवाह का असर सीतामढ़ी जिले के बैरगनिया, ढेंग, नानपुर, डुमरा, बाजपट्टी, मेजरगंज समेत कई प्रखंडों में दिखा। 

पूरब टाइम्स। कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने के लिए विशेषज्ञ मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की सलाह देते हैं. स्वास्थ्य विशेषज्ञ हिदायत देते हैं कि अगर आप घर से निकलने जा रहे हैं तो उससे पहले आपको मास्क पहन लेना चाहिए. हालांकि मास्क पहनने के नुकसान भी सामने आए हैं. चीन के वुहान  शहर में एक शख्स मास्क पहन कर रनिंग कर रहा था, जिससे उसके फेफड़े के फटने की खबर आ चुकी है.

न्यूयॉर्क पोस्ट ने खबर में बताया था कि 26 साल का एक युवक अपने मुंह पर मास्क लगाकर तीन मील तक दौड़ चुका था. इसके बाद उसके फेफड़ों पर अचानक दबाव बढ़ा और फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया. युवक दौड़ते-दौड़ते अचानक से पार्क में गिर गया और बेहोश हो गया था. इसके बाद युवक को लोगों ने आनन-फानन में वुहान सेन्ट्रल हॉस्पिटल पहुंचाया .

युवक के फेफड़ों की डॉक्टरों ने तीन सर्जरी की. डॉक्टरों ने बताया था कि मास्क पहनकर दौड़ने की वजह से युवक के बाएं फेफड़े में छेद हो गया था. इसके बाद उसके फेफड़े से हवा निकलने लगी थी. यह प्रेशर इतना ज्यादा था कि युवक का दिल बाएं से दाएं खिसकने लगा था. डॉक्टरों ने बताया था कि इस कारण उसके फेफड़ों को ज्यादा नुकसान हुआ था.

 डॉक्टर्स कहते हैं कि फेफड़े पंक्चर हो जाने की स्थिति न्यूमोथ्रोक्स है. इंसान के फेफड़े इसमें पंक्चर हो जाते हैं. फेफड़े और चेस्ट वॉल के बीच इसके बाद एयर भर जाती है. ऐसी स्थिति में इंसान के फेफड़े काम करना बंद कर देते हैं, जिससे व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होने लगती है. इस स्थिति में इंसान की मौत हो जाती है.  डॉक्टर्स का कहना है कि रनिंग करने के दौरान मास्क पहनने से फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है. इससे फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलती. मास्क पहनकर रनिंग करने से फेफड़ों को सांस लेने के लिए अपनी क्षमता से अधिक काम करना पड़ता है.

पूरब टाइम्स। पेट्स रखना बहुत से लोगों को पसंद होता है। पेट्स रखने वाले लोग चाहते हैं कि हर पल उनका पेट्स साथ रहे। लेकिन क्या आपने किसी पेट्स् को पार्टी करते हुआ देखा है। इन दिनों एक अजीबो गरीब वीडियो सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है। इस वीडियो में पालतू कुत्ते पार्टी करते हुए नजर आ रहे हैं। बता दें कि एक टिकटॉक यूजर ने अपने अकाउंट पर पेट डॉग का वीडियो शेयर किया है जिसमें डॉग ग्लास में पानी पीते हुआ दिखा रहा है। टिकटॉक यूजर  यह वीडियो शेयर किया है। जिसमें उनका डॉग अजीबो गरीब काम करते हुए दिख रहा है। इस डॉग का नाम हैंक है जो अपनी मालकिन के साथ पार्टियों में सज संवरकर जाता है और पार्टी में ड्रिंक करता है।
बहुत ही खूबसूरत डॉग  है। जहां भी उसकी मालकिन पार्टीज के लिए जाती हैं वह साथ-साथ जाता है। सिर्फ इतना ही नहीं इस डॉग का आउटफिट भी काफी डिफरेंट हैं। डैपर टाई और चश्मा के साथ हैंक पार्टी में जलवा बिखेरता है। हैंक कॉकटेल  पार्टी में अपने लिए ग्लास में ड्रिंक खुद लेते है। हैंक का ये अंदाज देख लोग अपनी हंसी को रोक नहीं पा रहे है। वह एक के बाद एक ड्रिंक पीते हुए दिख रहा है। आपको बता दें कि हैंक यानी डॉग का यह अंदाज लोगों को बहुत मजेदार लग रहा है। यह वजह है कि इस वीडियो को तीन लाख लोग देख चुके हैं। गोल्डन रिट्रीविर डॉग सोशल मीडिया पर धमाल मचा दिया है। यह वीडियो देखने के बाद एक यूजर ने लिखा है कि सिग्नेचर ड्रिंक के चलते इसका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए।

पूरब टाइम्स। दुनिया के कई देशों में प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। एक ऐसा देश है जहां दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर और सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी वहां पर कोई हिन्दू नहीं है। इस देश के झंडे का चिन्ह भी हिंदुओं का एक मंदिर है। हिन्दू धर्म दुनिया का एकमात्र ऐसा धर्म है, जो सबसे प्राचीन है। माना जाता है कि हिंदू धर्म 12 हजार साल से भी पुराना है। हिन्दू धर्म में मूर्ति पूजा और ध्यान का विशेष महत्व है। इस बात के कई सबूत हैं कि दुनिया के कई देशों में पहले सनातन धर्म ही था।

अंकोरवाट मंदिर दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर है। इसके अलावा यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक भी है। यह कम्बोडिया देश के अंकोर में स्थित है। अंकोर सिमरिप शहर में मीकांग नदी के किनारे स्थित है। यह सैकड़ों वर्ग मील में फैला है। यह भगवान विष्णु का मंदिर है। यहां पर पहले के शासकों ने बड़े-बड़े भगवान शिव के मंदिरो का निर्माण करवाया था। इसका पुराना नाम यशोधपुर था। राजा सूर्यवर्मन द्वितीय के शासन काल 1112 से 1153 ईस्वी में इस मंदिर का निर्माण हुआ था। इस मंदिर के चित्र को कम्बोडिया के राष्ट्रीय ध्वज में छापा गया है। दुनिया के सबसे प्रसिद्ध पर्यटक स्थलों में यह शामिल है और यूनेस्को की विश्व धरोहर में भी शामिल है। 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि कंबोडिया में दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है, लेकिन 100 प्रतिशत हिंदू धर्म को मानने वाले हिंदू कहां चले गए? कम्बोडिया में दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर तो है, लेकिन वहां कोई हिंदू क्यों नहीं है? इतिहास के मुताबिक, यहां लोगों ने दूसरे धर्मों को अपना लिया है। वर्तमान में इस देश में गिनती के हिन्दू बचे हैं, लेकिन दुनिया का सबसे बड़ा हिन्दू मंदिर इसी देश में है।
दक्षिण पूर्व एशिया का एक प्रमुख देश है कंबोडिया और यहां की जन्संख्या करीब 1.7 करोड़ है। ईस्ट एशिया में पहले भी 5 हजार से लेकर 1 हजार वर्ष तक के पुराने मंदिरों की खोज की गई है। इन रिसर्च में भारत की प्राचीन वैभवशाली संस्कृति की झलक दिखाई देती रही है। वैज्ञानिकों ने यह स्वीकार किया है हजारों साल में समुद्र का जलस्तर करीब 500 मीटर तक बढ़ा है। इससे यह साबित हुआ कि राम-सेतु, द्वार का नगरी जैसे स्थान आज भी मौजूद हैं और इनसे जुड़े पात्र भी सच हैं।
बताया जाता है कि सालों पहले कंबोडिया में हिन्दू धर्म था। पहले इसका संस्कृत नाम कंबुज या कंबोज था। कंबोज की प्राचीन कथाओं के मुताबिक, उपनिवेश की नींव आर्यदेश के राजा कंबु स्वयांभुव ने रखी थी। भगवान शिव की प्रेरणा से राजा कंबु स्वयांभुव कंबोज देश आए। उन्होंने यहां की नाग जाति के राजा की मदद से इस जंगली मरुस्थल पर राज्य बसाया। नागराज की अद्भुत जादूगरी से मरुस्थल हरे भरे, सुंदर प्रदेश में बदल गया। 

पूरब टाइम्स।  आप सभी कई शादियों में गए होंगे और कई जगहों के रीति-रिवाज तो थोड़े अलग अतरंगी से होते हैं, जिन्हें देखकर या सुनकर हमें थोड़ा अजीब लग सकता है। लेकिन आज हम आपको ऐसी शादी के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसमें रीति-रिवाज या रस्में नहीं बल्कि पूरी शादी ही अतरंगी है। क्या आप कभी सोच सकते हैं कि किसी व्यक्ति ने अपनी दुल्हन के रूप में अपने कुकर को ही चुन लिया हो। यह सुनकर आश्चर्य होने के साथ आपको हंसी जरूर आई होगी। आपकी प्रतिक्रिया हो सकती है कि, ऐसा भी कभी होता है भला कि कुकर से ही शादी कर ली! लेकिन हम आपको बता दें कि यही सत्य है।

दरअसल मामला यह है कि, एक इंडोनेशियाई व्यक्ति की अपने चावल कुकर से शादी करने की तस्वीरें ट्विटर पर जमकर वायरल हो रही हैं। इन तस्वीरों में यह आदमी सफेद शादी की पोशाक पहने है और उसकी दुल्हन यानी राइस कुकर ने सिर्फ एक सफेद रंग का शादी का घूंघट पहना है। इस व्यक्ति ने दुल्हन जैसा दिखाने के लिए अपने चावल के कुकर को एक ओढा दिया है।

वायरल हुई तस्वीरों में यह इंडोनेशियन दूल्हा और उसकी दुल्हन कुकर एक साथ पोज देते नजर आ रहे हैं। इन तस्वीरों में से एक में, वह आदमी शादी के कागजात पर दस्तखत करते हुए नजर आ रहा है और एक अन्य तस्वीर में अपनी दुल्हन यानी कुकर को चूमते हुए। तस्वीर साझा करते हुए कैप्शन में इस आदमी ने लिखा कि, व्हाइट, शांत, खाना पकाने में अच्छा, बहुत स्वप्निल।

इस आदमी की वायरल हुई तस्वीरों पर लोगों की बहुत प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं। सोशल मीडिया यूजर्स हैरान होने के साथ इन फोटोस को देखकर अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे हैं। और कमेंट के जरिए कई सवाल भी पूछे जा रहे हैं। साथ ही आपको बता दें कि यह अजब गजब शादी करने वाला व्यक्ति कहरोल अनम है, जिसने राइस कुकर के साथ अपनी शादी की घोषणा करने के लिए अपने फेसबुक पेज पर तस्वीरें साझा की थीं। इन तस्वीरों को 44,300 से अधिक लाइक और 13,5000 से अधिक बार रीट्वीट किया जा चुका है।

एक यूजर ने फिरकी लेते हुए लिखा कि, मैं अपने एयर फ्रायर के साथ ऐसा करने की सोच रहा था। एक दूसरे यूज़र में हैरानी में पूछा कि, क्या इस शख्स ने अपने राइस कुकर से शादी की? इसके अलावा एक अन्य यूज़र ने प्रतिक्रिया दी कि, यह शख्स बेहद ही जीनियस है। एक बात और है जिसे जानकर भी आपको बड़ा आश्चर्य होगा कि, अनम नामक इस इंडोनेशियन आदमी ने शादी के 4 दिन बाद ही यह जानकारी साझा की कि, उसने अपनी पत्नी यानि राइस कुकर को तलाक दे दिया है। और कारण दिया कि, उसकी पत्नी केवल चावल पकाने में अच्छी है लेकिन कोई अन्य व्यंजन बनाना नहीं जानती।

पूरब टाइम्स। खेत से फल-सब्ज़ियां तोड़ने की नौकरी  भी रिस्की हो सकती है. कम से कम ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड  के एक खेत में काम करने वाले मजदूर के साथ जो हुआ, वो तो यही बताता है. मजदूर खेत में केले तोड़कर इकट्ठा कर रहा था, इसी बीच हुए एक हादसे में वो ज़ख्मी हो गया. हालांकि मजदूर ने इसके बाद अपने मालिक पर मुकदमा दायर किया और इसे जीता भी.

घटना कुकटाउन  के पास मौजूद एक खेत में हुई. यहीं जैमी लॉन्गबॉटम  नाम का मजदूर पेड़ों से केले तोड़ने की नौकरी करता था. जून, 2016 में एल एंड आर कोलिंस फॉर्म में काम करते वक्त वो केले के एक बड़े गुच्छे के साथ गिरा और बुरी तरह जख्मी हो गया. द केर्न्स पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक जैमी पर एक बड़ा पेड़ और केले का बड़ा गुच्छा भी गिर गया था, जिससे उसे चोट लगी थी.

केले का पेड़ और केले गिरने के बाद जैमी  दोबारा काम पर नहीं आ सका. इसके बाद उसने अपने मालिक पर मुकदमा दायर करते हुए कहा कि ये हादसा कंपनी की लापरवाही की वजह से हुआ. मजदूरों को इस बात की ट्रेनिंग नहीं दी गई थी कि उन्हें केले के भारी और बड़े गुच्छों को किस तरह हैंडल करना है. पेड़ अप्रत्याशित तौर पर ऊंचे थे और केले भी ऊंचाई पर लगे थे. जैमी ने अपने दाहिने कंधे पर केले के गुच्छे को रखा और भार ज्यादा होने की वजह से वो दाहिनी तरफ ही ज़मीन पर गिर गए. जब उन्हें कुकटाउन में अस्पताल लाया गया, उसके बाद वे काम पर लौटने लायक नहीं रहे.

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जैमी 70 किलोग्राम केले के साथ गिरे थे. इस दुर्घटना के बाद वे किसी तरह का शारीरिक श्रम करने लायक नहीं बचे. जज ने ये भी कहा कि जैमी के कटर से पेड़ में गहरा कट इसलिए लगा क्योंकि जैमी को इसकी ठीक से ट्रेनिंग नहीं दी गई. ऐसे में उनके जख्मी होने का खतरा बढ़ा. इसलिए कोर्ट की ओर से जैमी को $502,740 यानि 4 करोड़ का मुआवज़ा देने का आदेश उनकी कंपनी को दिया गया है.