Poorabtimes

जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है




सपनों पर तो ऋषि- मुनियों के समय से शोध होते चलते आ रहे हैं। अपने शोध के जरिये ऋषि- मुनियों ने बताया है कि खास तौर पर जिन्हें सूर्योदय से कुछ घंटे पहले सपना दिखा हो उनके लिए वह एक संकेत होता है कि जीवन में कुछ अच्छा या कुछ बुरा होने वाला है। आपको पता होगा की रामायण और महाभारत में भी सपनों के रहस्यों पर चर्चा हुई है और साथ ही बताया गया है कि सपनों के अशुभ परिणामों से कैसे बचा जाये।





दिन का रखें खास ख्याल: बुधवार की रात सपना देखने पर अगले दिन भगवान गणपति की पूजा दूर्वा और नारियल से करें। इसके आलावा गुरुवार को देखे गए बुरे सपने का प्रभाव टालने के लिए दूसरे दिन पीले कपड़े के साथ हल्दी और चने की दाल का दान करें। शुक्रवार को बुरा सपना दिखे तो मिश्री, चावल, मीठे बताशे, सफेद मिठाई का दान कर सकते हैं। शनिवार को सपना देखने पर अगले दिन शनिदेव से संबंधित चीजों का दान करना चाहिए। वहीं रविवार की रात में बुरा सपना दिखाई पड़े तो सुबह उठकर गुड़, लाल कपड़े में से किसी भी चीज का दान कर सकते हैं या फिर किसी भी मंदिर में जाकर भगवान को लाल फूल और नारियल अर्पित करें।

पूरब टाइम्स। दुनिया में बहुत सारी ऐसी रहस्यमयी जगह हैं, जहां जाते ही इंसान की जान चली जाती है. कुछ जगहों के तो सिर्फ नाम सुनकर ही लोग कांपने लगते हैं. इंग्लैंड में एक ऐसा ही बगीचा  है, जहां जाकर इंसान कभी जिंदा वापस नहीं लौटता. यहां जाकर सांस लेते ही इंसान की जान चली जाती है. इस बगीचे का नाम सुनकर भी लोग घबरा जाते हैं. सबसे अहम बात यह है कि बगीचे में कभी भी लोगों को अकेले जाने की सलाह नहीं दी जाती. यहां जाने के लिए लोग हमेशा गार्ड लेकर जाते हैं. लेकिन अगर कोई गलती से भी अकेले बगीचे में चला गया तो जिंदा लौटकर वापस नहीं आ पाता.

यूनाइटेड किंगडम के नॉथंबरलैंड में स्थित इस बगीचे का नाम अलन्विक पॉइजन गार्डन  है. इसे जहर गार्डन के नाम से भी जाना जाता है. द अलन्विक पॉइजन गार्डन को दुनिया का सबसे खतरनाक गार्डन  माना जाता है. आश्चर्य की बात यह है कि यह गार्डन इंग्लैंड के सबसे सुंदर आकर्षणों में एक है. यहां के मैनीक्योर किए गए टॉपियर, रंग-बिरंगे पौधे, खुशबूदार गुलाब तथा कैस्केडिंग फव्वारे लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करते हैं.

इस गार्डन में घुसते ही काले लोहे का एक दरवाजा लगा हुआ है. इस दरवाजे पर साफ शब्दों में लिखा हुआ है- फूलों को रूककर सूंघना तथा तोड़ना मना है. प्रवेश द्वार पर साफ चेतावनी भी लिखी हुई है और खतरे का निशान बनाया गया है. यह जहरीला बगीचा 14 एकड़ में फैला हुआ है. यहां करीब 700 जहरीले पौधे हैं. बताया जाता है कि शाही दुश्मनों को हराने के लिए इन जहरीले फूलों का इस्तेमाल किया जाता था. फिलहाल, बगीचे में आकर अब तक 100 से अधिक लोगों की रहस्यमयी तरीके से मौत हो चुकी है. जरा सी चूक होने पर यहां आपकी जान जा सकती है.

 पूरब टाइम्स। इंसान अक्सर सपनों में कई अजीबोगरीब चीजें देखता है। फिर चाहे इनका हमारे वास्तविक जीवन से कुछ लेना देना हो या नहीं। स्वप्न शास्त्र की माने तो सपने हमें आने वाले भविष्य के बारे में कुछ न कुछ संकेत देते हैं। बस जरूरत होती है इनके अर्थ को समझने की। यहां हम बात करेंगे भूत-प्रेत और आत्माओं से जुड़े सपनों के बारे में जो सपने लगभग हर किसी को आ जाते हैं। किसी को सपने में वो लोग दिखाई देते हैं जो अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं तो किसी को विचित्र आकृतियां दिखाई देती हैं। जानिए ऐसे सपनों का क्या होता है मतलब?

सपने में बुरी आत्मा देखना अशुभ माना जाता है। स्वप्न शास्त्र के अनुसार आत्मा का दिखाई देना भविष्य में आने वाली किसी मुसीबत का पूर्व संकेत है। वहीं किसी जानकार, रिश्तेदार, दोस्त आदि की आत्मा या भूत देखना यात्रा में मिलने वाले कष्ट का संकेत है। सपने में खुद को आत्मा या भूत से बातें करते हुए देखना भी अशुभ होता है ये सपना धन हानि का संकेत देता है। हालांकि अगर आप सपने में किसी मृत जोड़े या फिर एक स्त्री और पुरुष की आत्मा को देखते हैं तो ये सपना धन प्राप्ति का संकेत देता है।

यदि आप सपने में किसी आत्मा को अपने पास खड़ा देखते हैं तो यह एक शुभ सपना है। इसका मतलब है कि आपको कोई अच्छी खुश खबरी मिलने वाली है। अगर सपने में कोई भूत या आत्मा आपसे कुछ मांगती है तो यह बुरा संकेत है। ऐसे सपने का मतलब है कि आपको हानि होने वाली या कोई बुरी खबर मिल सकती है। शुक्रवार के दिन इन उपायों को करने से पैसों की दिक्कत दूर होने की है मान्यता, जानिए

अगर आप सपने में खुद को या फिर किसी और को मरा हुआ देख रहे हैं तो यह भी शुभ सपना है। इसका मतलब है कि आपकी उम्र लंबी होने वाली है। साथ ही आपके जीवन में किसी नई चीज की शुरुआत हो सकती है। सपने में अपने आप को या किसी को आत्महत्या करते हुए देखना बेहद ही अशुभ माना गया है। ये सपना आपके किसी काम में अड़चन आने का संकेत देता है। सपने में अगर आपने भूत-प्रेत देखे हैं तो यह भी काफी अशुभ होता है। इसका मतलब है कि आपको भविष्य में कुछ नुकसान होने वाला है। इन लक्षणों से पता चलता है कि आपको बुरी नजर लगी है या नहीं? जानिए उपाय

सपने में किसी का कटा हुआ सिर देखते हैं तो जीवन में परेशानियां बढ़ती हैं। सपने में अगर आप किसी की हत्या करते हुए देखते हैं तो इसका मतलब आपको धोखा मिलने वाला है। वहीं अगर आपने किसी व्यक्ति को सपने में जलते हुए देखा है तो ये शुभ संकेत है। इस सपने का मतलब है कि आपको धन की प्राप्ति हो सकती है। अगर किसी रोगी ने सपने में अर्थी देखी है तो इसका मतलब वह जल्द ठीक होने वाला है।



ला सेलिनास गांव की कई लड़कियां 12 साल की उम्र में आते-आते लड़के में तब्दील होने लगती हैं. गांव की लड़कियों के लड़का बनने की बीमारी की वजह से यहां के लोग बेहद परेशान रहते हैं. इस कारण गांव के कई लोगों का मानना है कि यहां किसी अदृश्य शक्ति का साया है. इसके अलावा कुछ बुजुर्ग लोग गांव को श्रापित मानते हैं. इस तरह के बच्‍चों को ग्वेदोचे  कहा जाता है.


समुद्र किनारे बसे इस गांव की आबादी 6 हजार के करीब है. अपने अनोखे आश्चर्य की वजह से यह गांव दुनियाभर के शोधकर्ताओं के लिए रिसर्च का विषय बना हुआ है. वहीं दूसरी तरफ डॉक्टर्स कहते हैं कि ये बीमारी आनुवंशिक विकार है. स्‍थानीय भाषा में इस बीमारी से ग्रसित बच्‍चों को सूडोहर्माफ्रडाइट कहा जाता है. जिन भी लड़कियों को यह बीमारी होती है, एक उम्र में आने के बाद उनके शरीर में पुरूषों जैसे अंग बनने लगते हैं. उनकी आवाज भारी होने लगती और शरीर में वो बदलाव आने शुरू हो जाते हैं, जो धीरे-धीरे उन्हें लड़की से लड़का बना देते हैं. गांव का 90 में से एक बच्चा इस रहस्यमयी बीमारी से जूझ रहा है.

पूरब टाइम्स। भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण लोग सेहत से जुड़ी कोई ना कोई गलती कर बैठते हैं। इसके कारण दिमाग पर बुरा असर पड़ता है। इसकी वजह से याददाश्त कमजोर होना, ब्रेन टिश्यूज डैमेज होना या अल्जाइमर जैसी परेशानियां झेलनी पड़ सकती है। इन आदतों की वजह से दिमाग के साथ सेहत को भी नुकसान होने का खतरा रहता है। चलिए आज हम आपको कुछ ऐसी ही आदतों के बारे में बताते हैं, जिसे समय रहते छोड़ देने में ही भलाई है।



घंटों एक जगह बैठे रहने से दिमाग सुस्त होने लगा है। इसके साथ ही भागदौड़ भरी जिंदगी के कारण तनाव होने के खतरा रहता है। इसके अलावा दिमाग के सही से विकास नहीं हो पाता है। ऐसे में जरूरी है कि आप रोजाना खुली हवा में 30 मिनट के लिए योगा या एक्सरसाइज करें। इससे आपका मन और दिमाग शांत होगा। दिमाग की कोशिकाएं स्वस्थ रहने से बेहद दिमागी विकास होने में मदद मिलेगी।


एक्सपर्ट अनुसार, रात को सोते समय हमारी बॉडी अंदर से रिपेयर होती है। दिमाग को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है। इससे तनाव, डिप्रेशन कम हो सकता है। मगर इसके विपरीत नींद पूरी ना होने से व्यक्ति को दिनभर सुस्ती, थकान व कमजोरी छाई रहती है। ऐसे में उसे काम करने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके लिए दिमाग व दिल संबंधी बीमारियों की चपेट में आने का खतरा रहता है। ऐसे में हेल्दी रहने के लिए जरूरी है कि आप रात को 8-9 घंटे की नींद जरूर लें।

पूरब टाइम्स।  कमोबेश हर आदमी कभी न कभी सपने देखता ही है. उनमें से कुछ अच्‍छे होते हैं कुछ बुरे होते हैं. स्वप्‍न शास्त्र के अनुसार ये सपने शुभ-अशुभ फल भी देते हैं. सपनों को लेकर अक्‍सर मन में जिज्ञासा होती है कि क्‍या देखा हुआ हर सपना सच होगा. इसे लेकर भी स्‍वप्‍न शास्‍त्र में कई बातें बताई गईं हैं. जिसमें बताया गया है कि किस समय में देखे गए सपने सच होते हैं. 



पूरब टाइम्स। दोस्ती का रिश्ता दुनियाभर में सबसे ऊपर माना गया है। कहा जाता है कि एक सच्चा दोस्त जीवन के हर मोड़ पर दोस्ती निभाता है। वहीं लोग अपने दोस्ती को मजबूत बनाने के लिए एक-दूसरे को गिफ्ट देना पसंद करते हैं। मगर ज्योतिषशास्त्र अनुसार, फ्रेंड्स को कुछ चीजें गिफ्ट करने से बचना चाहिए। नहीं तो दोस्ती में दरार पड़ सकती है। चलिए जानते हैं किन गिफ्ट्स को नहीं देना चाहिए...











पूरब टाइम्स। सोते समय सपने देखना हमारे जीवन के काफी करीब से जुड़ा हुआ है. यूं तो सपनों पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं होता, इसी वजह से हमें अच्छे और बुरे सपने दोनों आते हैं. हालांकि, सपनों में दिखाई देने वाले दृश्य बहुत ज्यादा तो नहीं लेकिन थोड़े बहुत हमारी जिंदगी से अवश्य जुड़े होते हैं. अब सपनों को लेकर जो कुछ साधारण बातें हैं, उनके बारे में बताने की कोई खास जरूरत नहीं है क्योंकि आप भी सपने देखते हैं और आप अगर सपने देखते हैं तो आप ये भी जानते होंगे कि आप रात में सोते हुए जितने सपने देखते हैं, उनमें से ज्यादातर सपने नींद खुलते ही भूल जाते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि हम कुल देखे जाने वाले सपनों में से करीब 90 फीसदी सपनों को याद नहीं रख पाते और उन्हें भूल जाते हैं. लेकिन ऐसा होता क्यों है कि हम ज्यादातर सपने भूल जाते हैं? आज हम आपको इसी सवाल का जवाब देंगे.

सपनों को लेकर वैज्ञानिकों ने तमाम रिसर्च और स्टडी की है. वैज्ञानिकों की मानें तो सोने के दौरान हम कई बार रैपिड आई मूवमेंट (REM) से गुजरते हैं और इसी दौरान हमें सपने दिखाई देते हैं. यह मूवमेंट सोने के 10 मिनट बाद ही शुरू हो जाता है. दरअसल, सोते वक्त REM के दौरान हमारा दिमाग पूरी तरह से शांत नहीं होता और एक्टिव मोड में रहता है. इस समय दिमाग में कुछ न कुछ चीजें चल रही होती हैं और यही वजह है कि हमें सपने दिखाई देते हैं. रात में सोने के बाद हर डेढ़ घंटे के अंतराल में हम REM में होते हैं. REM की ये अवधि करीब 20 से 25 मिनट तक रहती है और इसी दौरान हम तरह-तरह के सपने देखते हैं.

अमेरिका के हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में नींद को लेकर स्टडी करने वाले रॉबर्ट स्टिकगोल्ड ने बीबीसी के साथ बातचीत करते हुए बताया कि कई लोग सपने में देखे गए दृश्यों को भूल जाते हैं जबकि कई लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें अपने सपने याद रहते हैं. स्टिकगोल्ड के मुताबिक इन दोनों परिस्थितियों के पीछे अलग-अलग वजह होती हैं. रॉबर्ट स्टिकगोल्ड की मानें तो जो लोग एक निश्चित समय पर सोते हैं और अलार्म बजने के बाद उठकर तुरंत ऑफिस जाने की तैयारियों में लग जाते हैं, ऐसे लोगों को सपने याद रखने की संभावना बहुत कम होती है. वहीं दूसरी ओर, जिन लोगों के पास ज्यादा काम नहीं होता और नींद खुलने के बाद भी आंखें बंद किए रहते हैं, उन्हें सपने भूलने की संभावना बहुत कम होती है. आपको बता दें कि कई रिपोर्ट में ये भी कहा जाता है कि जो लोग सपने भूल जाते हैं, वे मानसिक रूप से स्वस्थ होते हैं जबकि जिन लोगों को कई सपने याद रहते हैं वे मानसिक रूप से थोड़े अस्थिर हो सकते हैं.



यह गांव चीन के फुजियान  प्रांत में स्थित निंगडे शहर में है. इस गांवा का नाम टांका  है, जहां हजारों लोग कई पीढ़ियों से अपना जीवन पानी में गुजारते आ रहे हैं. इस गांव में साढ़े आठ हजार से अधिक लोगों की आबादी रहती है. गांव वालों ने समुद्र के बीचों-बीच ही हर तरह की सुख-सुविधाएं जमा ली हैं. यह दुनिया की इकलौती ऐसी रहने की जगह है, जो समुद्र के पानी पर स्थित है.



इस गांव में रहने वाले लोग 700 ईस्वी में यहां के शासकों के उत्पीड़न से नाराज होकर समुद्र में आकर बस गए थे. इसके बाद से ही वह यहीं रह रहे हैं. चीन में 700 ईस्वी में तांग राजवंश का शासन था. टांका समूह के लोग इस राजवंश के शासकों के उत्पीड़न से परेशान थे. लगातार उत्पीड़न बढ़ने पर इन लोगों ने समुद्र में रहने का फैसला किया और यहां आकर बसने लगे. समुद्र में रहने की वजह से इन्हें जिप्सीज ऑन द सी कहा जाता है. 

पूरब टाइम्स। आपने आज तक सुना होगा कि जब किसी दूसरे देश में जाते हैं तो उसके लिए वीजा जरूरी होता है. बिना वीजा के आप किसी अन्य देश में गलती से भी नहीं जा सकते, लेकिन अगर आपसे अपने ही देश में किसी जगह पर जाने के लिए वीजा मांगा जाए तो आप हैरान ही होंगे. इस पर अगर आपसे किसी अन्य देश का वीजा  मांगा जाए तो आपकी हैरानी दोगुनी बढ़ जाएगी.



अटारी देश का इकलौता अंतरराष्ट्रीय एयरकंडीशनर रेलवे स्टेशन  है. यह पाकिस्तान के बॉर्डर पर स्थित है. यह स्टेशन 24 घंटे खुफिया एजेंसियों और सुरक्षा एजेंसियों से घिरा रहता है. अगर इस स्टेशन पर आने वाले शख्स के पास पाकिस्तान का वीजा नहीं है, तो उसके खिलाफ 14 फॉरेन एक्ट के तहत मामला दर्ज हो सकता है. इस एक्ट के तहत मामला दर्ज होने के बाद जमानत मिलना बहुत ही मुश्किल है. 

बता दें कि यह वही रेलवे स्टेशन है, जहां से देश की सबसे वीआईपी ट्रेन समझौता एक्सप्रेस पाकिस्तान के लिए रवाना होती है. सबसे खास बात यह है कि अटारी रेलवे स्टेशन देश का पहला ऐसा रेलवे स्टेशन है जहां ट्रेन चलाने के लिए यात्रियों से इजाजत ली जाती है. यहां रेलवे टिकट खरीदने पर यात्रियों को पासपोर्ट नंबर देना पड़ता है. अगर इस रेलवे स्टेशन पर ट्रेन लेट हो जाती है तो भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के रजिस्टर में इसकी एंट्री होती है.  

पूरब टाइम्स । केरल में भारी बारिश के बाद बाढ़ और भूस्खलन की दुखद घटनाओं के बीच एक अच्छी खबर आई है। यहां पेशे से स्वास्थ्यकर्मी एक जोड़ा सोमवार को जलमग्न सड़कों से जूझते हुए एल्युमीनियम के एक बड़े बर्तन में बैठ शादीघर तक पहुंचने और शादी के बंधन में बंधने में सफल रहे। थलावडी में एक मंदिर के निकट जलमग्न शादीघर में दोनों की शादी हुई।

शादी में बेहद गिनती के रिश्तेदार आए थे। टीवी चैनलों पर जोड़ा – आकाश और ऐश्वर्या – के खाना पकाने के बड़े बर्तन में बैठकर शादी के लिए जाने का दृश्य छाया रहा। जिले में बढ़ रहे जलस्तर की रिपोर्टिंग करने वहा संवाददाता आए हुए थे। बाढ़ के बीच इस अनोखी शादी की जानकारी मिलने पर वे वहां पहुंचे तो नवविवाहित जोड़े ने संवाददाताओं को बताया कि कोविड-19 महामारी की वजह से उन्होंने कम ही रिश्तेदारों को आमंत्रित किया था।


E-69 सड़क को दुनिया का सबसे आखिरी सड़क माना जाता है. यह दुनिया का सबसे अंतिम छोर भी माना जाता है. बता दें कि पृथ्वी का सबसे सुदूर बिंदु उत्तरी ध्रुव  है. यहीं पर पृथ्वी की धुरी  घूमती है. यहां नॉर्वे  देश पड़ता है. यहां से आगे जाने वाली सड़क को ही दुनिया की सबसे आखिरी सड़क कहा जाता है. इस सड़क के आगे अन्य कोई सड़क नहीं है. इसके आगे बर्फ ही बर्फ और समुद्र ही समुद्र दिखाई देता है.

ई-69 की लंबाई 14 किलोमीटर के करीब है. आपको बता दें कि इस हाइवे पर अकेले पैदल जाना या अकेले गाड़ी चलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. इस सड़क पर जाने के लिए आपको कई लोगों को साथ लाना पड़ेगा. इसके बाद ही इस सड़क पर आपको जाने की अनुमति मिलेगी. दरअसल, कई किलोमीटर तक चारों तरफ बर्फ की मोटी चादर बिछी होने की वजह से यहां खो जाने का खतरा बना रहता है. इसलिए किसी भी इंसान को इस सड़क पर अकेले नहीं जाने दिया जाता.
यह सड़क उत्तरी ध्रुव के पास है. इस वजह से सर्दियों के मौसम में यहां रात ही रात होती है. वहीं गर्मियों के मौसम में यहां सूरज कभी डूबता नहीं है. कभी-कभी तो यहां छह महीने तक लगातार सूरज दिखाई नहीं देता है और रात ही रात होती है. यहां पर सर्दियों में तापमान माइनस 43 डिग्री तक पहुंच जाता है. जबकि गर्मियों में यहां का तापमान जीरो डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है. इतना ठंडा होने और दिन-रात में इतना अंतर होने के बाद भी लोग यहां रहते हैं.

यहां पर पहले सिर्फ मछली का कारोबार होता था. हालांकि साल 1930 के बाद इस जगह का विकास होने लगा और साल 1934 में यहां सैलानियों का स्वागत किया जाने लगा. इससे यहां के लोगों को कमाई का एक अलग जरिया मिल गया. यहां अब तमाम तरह के रेस्टोरेंट और होटल बन गए हैं. वर्तमान समय में दुनियाभर से लोग यहां घूमने आते हैं. यहां आकर लोगों को एक अलग दुनिया का अहसास होता है. इस जगह पर आकर डूबता सूरज और पोलर लाइट्स देखना बहुत रोमांचक होता है. 

पूरब टाइम्स। हर कोई आलीशान जिंदगी  जीना चाहता है. सब चाहते हैं कि वह फुल एसी के घर में आरामदायक गद्दों  में सोए. हालांकि कुल लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें पहाड़ों  और अलग-अलग स्थानों पर घूमना  पसंद होता है. ऐसे लोगों के दिमाग में इन नई-नई जगहों की खूबसूरत स्मृतियां घर कर जाती हैं. आज हम आपको ऐसी ही एक घुमन्तु महिला  के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें नई-नई जगहों पर घूमना बहुत पसंद था. अजब बात यह है कि एक बार वह घूमने के लिए ऐसी जगह गईं, जो उन्हें इतनी पसंद आई कि हमेशा के लिए वहां बस गईं. आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि यह कोई आलीशान जगह नहीं, बल्कि एक रेगिस्तान  था.

जर्मनी  की रहने वाली उरसुला मूश  एक इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कंपनी  की मालकिन थीं. कई सालों पहले वह दुबई का रेगिस्तान  घूमने गई थीं. एक आलीशान जिंदगी जीने वाली उरसुला को वो जगह इतनी ज्यादा पसंद आ गई कि अपना सारा घर-बार और आलीशान जीवन छोड़कर वह ऊंटों के साथ रेगिस्तान में जाकर बस गईं. उरसुला मूश ने बताया कि उन्हें दुबई  के लोगों से और दुबई की संस्कृति  से प्यार हो गया है. यहां तक कि अब वह ऊंटों के बिना अपनी जिंदगी नहीं गुजार सकती हैं. इस वजह से उन्होंने ऊंटों  के साथ रहने का निर्णय कर लिया. साल 1998 में उन्होंने जर्मनी स्थित अपना आलीशान घर छोड़कर 3900 मील दूर दुबई आ गईं. 

उरसुला मूश को ऊंटों से इतना प्यार हो गया था कि उन्होंने 40 ऊंट भी खरीद लिए. पिछले 23 साल से अब वह अपने इन 40 ऊंटों के साथ दुबई में रहती हैं. ऊंटों के साथ इतने प्यार की वजह से आज लोग उन्हें दुबई की कैमेल क्वीन नाम से बुलाते हैं. उरसुला आज दुबई की फेमस ऊंट मालकिन हैं. उरसुला ने रेगिस्तान में Kamel Uschi Dubai नामक फॉर्म की शुरुआत की. ये फार्म ऊंटों समेत कई तरह के जानवरों को पालती है. इसके अलावा ये फॉर्म दुबई का रेगिस्तान घूमने आने वाले पर्यटकों को होटल मुहैया कराती है. आप जानकर हैरान रह जाएंगे की जर्मनी में आलीशान जिंदगी जीने वाली उरसुला आज जहां रहती हैं वहां ना तो लाइट है और ना ही कोई मॉर्डन सुख-सुविधाएं. यहां तक कि जिस जगह वह रहती हैं वहां तुरंत पानी की भी व्यवस्था नहीं हो सकती है.

सबसे अहम बात यह है कि उरसुला दुबई शहर में भी नहीं रहतीं, बल्कि रेगिस्तान के इलाके में रहती हैं. अब वहां के स्थानीय लोग उनके बारे में कहने लगे हैं कि वह रेगिस्तान के मूल निवासी बेदुइन लोगों से भी ज्यादा अरबी हैं. उरसुला से बात करने पर वह कहती हैं कि जब 23 साल पहले वह पहली बार दुबई आई थीं तभी उन्हें लग गया था कि यही वह जगह है, जहां वो हमेशा से रहना चाहती थीं. 

पूरब टाइम्स। पूरी दुनिया तमाम तरह के रहस्यों से भरी पड़ी है. कुछ रहस्य तो ऐसे भी हैं, जिनको आज तक वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए हैं. आज हम आपको एक ऐसे ही रहस्य के बारे में बताने जा रहे हैं. आपको जानकर हैरानी ही होगी कि दुनिया में एक ऐसा गांव है जहां किसी बच्चे के पैदा होने के 7 साल बाद उसकी लंबाई बढ़ती ही नहीं है. यानि कि इस गांव में लोग बौने ही रह जाते हैं.

गांव में अधिकतर आबादी छोटे कद यानी बौने लोगों की है. आपको सुनकर शायद आश्चर्य हो कि गांव में रहने वाली कुल आबादी में पचास फीसदी लोग बौने ही हैं. इन लोगों की लम्बाई 2 फीट से लेकर मात्र तीन फीट तक ही होती है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गांव में जब बच्चा पैदा होता है तो वह नॉर्मल ही होता है. शुरुआत के 5 से 7 साल की उम्र तक तो बच्चों की लंबाई सामान्य रूप से बढ़ती है, लेकिन इसके बाद उनकी लंबाई पर ब्रेक लग जाता है. कुछ केस में बच्चों की लंबाई 10 साल की उम्र तक भी बढ़ती है.

इस गांव के आसपास रहने वाले लोगों की मानें तो गांव पर किसी बुरी शक्ति का साया है. जबकि दूसरी ओर मान्यता है कि यह गांव कई दशकों से शापित है. लोगों के बौने होने के पीछे के रहस्य के बारे में पिछले 60 सालों में किसी को कुछ पता नहीं चल पाया है. पिछले कुछ दशकों में वैज्ञानिकों ने इसके पीछे के रहस्य का पता लगाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह इसमें कामयाब नहीं हो सके हैं. 

गांव के बड़े-बुजुर्ग बताते हैं कि गांव में कई दशक पहले एक खतरनाक बीमारी फैल गई थी. इसी बीमारी की वजह से आज भी गांव के बच्चों की लंबाई बढ़ती नहीं है. पिछले 60 सालों में वैज्ञानिकों ने गांव के प्राकृतिक संसाधनों पर भी कई तरह के शोध कर यह जानने की कोशिश की कि शायद यहां के पानी में कोई ऐसा कैमिकल तो नहीं मिला है, जिसे खाने के बाद बच्चों की लंबाई बढ़ना रुक जाती है. हालांकि वैज्ञानिकों को इसे लेकर कोई सकारात्मक परिणाम नहीं मिल सका है.
कुछ वैज्ञानिक यह बात जरूर कहते हैं कि इस गांव की मिट्टी में पारा की मात्रा अधिक है. जिसमें पैदा होने वाले अनाज को खाकर लोगों की लंबाई नहीं बढ़ती है. इसके अलावा कुछ वैज्ञानिक कई साल पहले जापान द्वारा चीन में छोड़ी गई जहरीली गैस को भी बौनेपन का कारण मानते हैं. हालांकि वैज्ञानिक किसी भी कारण को लेकर पुख्ता बातें नहीं कहते हैं. खैर कारण जो भी हो लेकिन इस गांव का रहस्य कई दशकों से आज भी बरकरार है.

पूरब टाइम्स। पुरुष प्रधान समाज में महिलाओं को सिर्फ घर संभालने के लिए ही उपयुक्त माना जाता है. कई रूढ़ीवादी लोगों का तो ये भी मानना होता है कि महिलाएं नौकरी नहीं कर सकतीं, रोजमर्रा के अन्य काम नहीं कर सकतीं, सिर्फ घर चला सकती हैं. ऐसे लोगों के मुंह पर ताले लगाता है एस्टोनियादेश का अनोखा गांव जहां 90 फीसदी से ज्यादा आबादी महिलाओं की है. इस आइलैंड की खासियत ये है कि आइलैंड में अधिकतर महिलाएं  रहती हैं जो पूरे द्वीप की जिम्मेदारी संभाले हुए हैं.

एस्टोनिया का किहनु आइलैंड , महिलाओं के आइलैंड के नाम से फेमस है. आइलैंड का नाम यूनेस्को के इंटैंजिबिल कल्चरल हेरिटेज ऑफ यूमैनिटी  की लिस्ट में शामिल है. इस आइलैंड पर करीब 300 लोग रहते हैं, जिनमें से अधिकतर महिलाएं हैं. आप सोच रहे होंगे कि सिर्फ महिलाएं ही क्यों रहती हैं. पुरुष कहां हैं और क्या ये महिलाएं अविवाहित हैं अगर नहीं तो इनका परिवार कहां है? चलिए आपके इन सारे सवालों का जवाब देते हैं.

इन महिलाओं के पति और परिवार के पुरुष एस्टोनिया में नौकरी करने के मकसद से रहते हैं. इसलिए आइलैंड पर अधिकतर महिलाएं ही रह जाती हैं. मगर इन महिलाओं ने इस पूरे द्वीप को इस तरह चलाया है कि सब इनकी तारीफ करते हैं. ये अपनी मान्यताओं और रिवाजों को बनाए रखती हैं. त्योहारों को धूम-धाम से मनाती हैं, नाचती हैं, गाती हैं और मर्दों के पैसों के अलावा शिल्पकारी कर के पैसे कमाती हैं. महिलाएं ही इस द्वीप पर शादियां करवाती हैं वहीं लोगों के अंतिम संस्कार करने का जिम्मा भी इनका ही होता है.

मातृसत्ता से बने इस आइलैंड के रिवाजों की खासियत के कारण है यहां के लोग अपनी मान्यताओं से बिखरे नहीं हैं. रिपोर्ट्स की मानें तो आइलैंड पर क्रिमिनल और देश निकाला की सजा भुगत रहे लोग ही रहा करते थे. लगभग 50 सालों तक आइलैंड को सोवियत संघ ने अपने कब्जे में रखा. उस वक्त से ही यहां महिलाओं का वर्चस्व था. हालांकि अब बदलते समय के साथ युवा लड़के-लड़कियां आइलैंड से बाहर जाकर पढ़ाई या नौकरी करना चाहते हैं जिसके कारण अब धीरे-धीरे यहां की खास परंपरा खत्म होती जा रही है.

पूरब टाइम्स। दुनिया में कई ऐसी चीजें मौजूद हैं जो आपको काफी हैरान कर देंगी, आज हम कुछ ऐसी ही एक झील की बात करेंगे जो अपने अंदर कई राज समेटे है। प्रकृति कभी-कभी मनोरम दृश्य दिखाती है, इसी में शामिल है झील बैकल पर जेन पत्थरों का यह अजूबा मामला। बैकल झील साइबेरिया में स्थित है। यहां पत्थर जमी हुई झीलों के ऊपर मंडराते हुए नजर आते हैं। यह बर्फ की पतली सी नोक पर खुद को खड़ा करके रखते हैं, दूर से इन्हें देखकर लगता है कि जैसे यह हवा में झूल रहे हो।

बैकल झील पर एक दुर्लभ घटना देखने को मिलती है वह है वहां मौजूद जेन पत्थर, सर्दियों में बैकल झील लगातार ठंडी और सूखी रहती है इस वजह से झील की सतह जम जाती है। यह एक आम घटना हो सकती है पर इसे खास बनाते हैं वहां हवा में झूलते दिखाई देने वाले जेन पत्थर। हाल ही में साइबेरिया के एक नेचर फोटोग्राफरों द्वारा जेन पत्थरों की एक तस्वीर ली गई थी जिसे "रूस के सर्वश्रेष्ठ" फोटो प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त हुआ है, इस तस्वीर को खींचने वाले फोटोग्राफर का कहना है कि "यह प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है।" यह एक शांति की भावना को दिखाता है।

जेन पत्थरों की सुंदरता के बावजूद, उनके बनने की प्रक्रिया काफी मायावी बनी हुई है। कई सारी वेबसाइटों और ब्लॉगों ने इसके बारे में बताने कि कोशिश की है, लेकिन वे ज्यादातर अनुमान ही लगा पाएं  हैं। इन पत्थरों के हवा में झूलने की वजह के तौर पर बताया गया है कि सूरज की रोशनी बादलों के कारन लेक पर नहीं गिरती है जिसके बाद वहां पर हवा और गर्मी में कमी आ जाती है। यह आद्रता को खत्म करने में अहम भूमिका निभाती है जिस वजह से पत्थर के नीचे की बर्फ पिघलती नहीं है और पत्थर उस पर टिका रहता है।

पूरब टाइम्स। चेक गणराज्य देश में होउसका कैसल एक ऐसी जगह है, जिसके बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं और वो लोगों को हैरान कर देने वाली हैं. होउसका कैसल में एक ऐसा गड्ढा है जिसे नर्क का द्वार कहा जाता है. इस गड्ढे की गहराई कितनी है, इसके बारे में किसी को कोई भी जानकारी नहीं है. होउसका कैसल के निर्माण के समय के बारे में भी कोई सही जानकारी उपलब्ध नहीं है. हालांकि माना जाता है कि इस नर्क के द्वार का निर्माण 1253 ईस्वी से 1278 ईस्वी के बीच हुआ है. होउसका कैसल को आखिर क्यों बनाया गया इसके पीछे की एक कहानी प्रचलित है. होउसका कैसल को बनाकर यहां के निवासियों ने उस गड्ढा को ढकने की कोशिश की थी.


इस गड्ढे से जुड़ी एक कहानी और प्रचलित है. कहा जाता है कि एक बार 13वीं सदी में एक कैदी को उसकी सजा माफ करने का वादा किया गया. कैदी के सामने शर्त रखी गई कि उसे इस गड्ढ़े में उतरकर देखना होगा कि इसकी गहराई कितनी है. वह व्यक्ति इसके लिए राजी हो गया. बताया जाता है कि जब रस्सी से बांधकर उस व्यक्ति को इस गड्ढ़े में उतारा गया तो थोडी देर बाद उसकी चीखें लोगों को सुनाई देनी लगी और जब उसे बाहर निकाला गया तो वो बूढ़ा हो चुका था. यानि उसकी उम्र सामान्य से कई साल आगे बढ़ गई थी.

पूरब टाइम्स।कई लोग होते हैं जिन्हें पुरानी चीजें रखने का शौक होता है, इसके लिए वह लोग पैसों को पानी की तरह बहाने के लिए तैयार रहते हैं. एक ऐसी ही नायाब चाय की केतली इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है. जिसे नीलामी के दौरान खरीदने के लिए £2million के बोली लगी. अगर इस रकम को भारतीय कीमत में देखी जाए तो इसकी कीमत 20 करोड़ 30 लाख रुपये से भी ज्यादा लगी है.


अंग्रेजी वेबसाइट The Sun में छपी रिपोर्ट के मुताबिक 18वीं सदी की ये केतली 6 इंच चौड़ी है और ब्रॉन्ज से बनी हुई है. यूं तो 18वीं सदी की ये केतली जब नीलामी के लिए आई थी तो इसकी कीमत वैसे तो £800,000 यानि 8 करोड़ रखी गई थी, लेकिन ऑक्शन में ये धीरे-धीरे खिंचकर 17 करोड़ 24 लाख 93 हजार से भी ऊपर पहुंच गई. सेंट्रल लंदन के मेफेयर में केतली की बाोली लग रही थी. इसकी पूरी कीमत 20 करोड़ 30 लाख रुपये से भी अधिक में सेटल हो गई.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस केतली को Far East कलेक्टर की ओर से खरीदा गया है. ये चीन के इतिहास की खोई हुई विरासत थी, जिसे चीनी कलेक्टर्स ने फिर पा लिया है. नीलामी के दौरान इस केतली के बारे में बताया गया कि ये बहुत दुर्लभ और एतिहासिक पीस है, जिसे खुद राजा के लिए बनाया गया था और इस केतली पर उस वक्त का शाही निशान भी था, इसके ऊपर पहाड़ों और झीलों की तस्वीरें बनी हुई हैं और इसके साथ कुछ फूल और तितलियों की कलाकृति से सजी हुई केतली में सुंदर शाइनिंग है.

पूरब टाइम्स। आजतक आपने आसमान से पानी के अलावा ओले और तेजाब की बारिश के बारे में तो सुना होगा लेकिन क्या आपने कभी आसमान से मछलियों के बारिश के बारे में सुना है. आज हम आपको एक ऐसे देश के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पिछले 100 सालों से आसमान से मछलियों की बारिश हो रही है. आश्चर्य की बात यह है कि इसका पता आजतक कोई नहीं लगा पाया है.


यहां कभी-कभी साल में एक बार तो कभी दो बार भी मछलियों की बारिश होती है. ये अद्भुत घटना बसंत ऋतु के अंत में या गर्मियों की शुरुआत में होती है. होंडूरास अटलांटिक महासागर से केवल 200 किलोमीटर दूर है. वैज्ञानिक का कहना है कि अटलांटिक महासागर की वजह से ही यहां मछलियों की बारिश होती है. लेकिन यहां के निवासी मछलियों की बारिश को भगवान का करिश्मा बताते हैं.

होंडूरास के लोग मछलियों की इस बारिश के पीछे ये तर्क देते हैं कि 19वीं शताब्दी में यहां के लोगों की आर्थिक हालत बेहद खराब थी, जिसकी वजह से लोग भूखे मर रहे थे. ये सब वहां रह रहे एक स्पेनिश पादरी से देखा नहीं गया. इसलिए उन्होंने तीन दिन और तीन रात तक लगातार प्रार्थना की. उसके बाद भगवान से कहा कि वो यहां के गरीब लोगों के लिए चमत्कार दिखाएं और उनके खाने का इंतजाम करें.

कहा जाता है कि पादरी की प्रार्थना की वजह से होंडूरास में अंधेरा छा गया. उसके बाद आसमान से मछलियों की बारिश होने लगी. तब से यह चमत्कार यहां हर साल देखने को मिलने लगा. बताया जाता है कि यहां मछलियों की बारिश होने से पहले मूसलधार बारिश होती है. इस दौरान इतनी तेज बिजली कड़कती है कि कोई भी घर से बाहर जाने की हिम्मत नहीं करता है.

पूरब टाइम्स . इस धरती पर बहुत से ऐसे जनजाति समुदाय हैं जिन्होंने स्वयं को आज इतने बदलाव के बावजूद भी समाज की मुख्यधारा से बिल्कुल अलग कर रखा है। उन लोगों के रीति-रिवाज एवं परंपराएं जानकर बड़ा आश्चर्य सा होता है। हालांकि इन जनजातीय समुदायों की कुछ ऐसी परंपराएं और प्रथा भी हैं जो हमें आकर्षित कर सकती हैं और कुछ ऐसी प्रथायें हैं जिनके बारे में सुनकर ही हमारी रूह तक कांप जाए।

अगर किसी के परिवारीजन या किसी खास की मृत्यु हो जाती है तो बेहद दुख होता है। मृत्यु पश्चात भी अलग-अलग रस्में अदा की जाती हैं। लेकिन क्या आप कभी सोच भी सकते हैं ऐसी प्रथा के बारे में जिसमें घर में किसी भी सदस्य के देहांत होने पर महिला की उंगली ही काट दी जाए। सुनकर चौंक गए हैं ना! लेकिन यही सत्य है। आइए जानते हैं इस भयानक प्रथा को निभाने वाली जनजाति और इसके पीछे के कारण के बारे में...

आपको जानकर बड़ी हैरानी होगी कि दानी प्रजाति के लोग इस अमानवीय और भयानक परंपरा का निर्वहन करते हैं। यह प्रजाति इंडोनेशिया के पापुआ न्यू गिनिया द्वीप में रहने वाली है। इस प्रजाति में यह प्रथा है कि अगर घर के मुखिया की मृत्यु हो जाए, तो परिवार में रह रही सभी महिलाओं की उंगली कुल्हाड़ी से काट देते हैं। जितनी यह प्रथा विचित्र है उसके पीछे का कारण भी उतना ही अतार्किक है।

दानी प्रजाति के लोगों का मानना है कि उंगली काटने वाली इस प्रथा को करने से मरने वाले की आत्मा को शांति मिलती है। यह उनका मरने वाले के प्रति श्रद्धांजलि देने का तरीका है। महिलाओं की उंगली काटने से पहले उंगली में धागा बांध दिया जाता है और फिर उनकी उंगली को कुल्हाड़ी से काट दिया जाता है। इसके अलावा महिलाओं का मानना है कि, अपनी उंगलियां कटवाकर वे उस कष्ट में भागीदार बन सकती हैं जो मरने वाले परिजन ने मृत्यु के समय उठाया था। अगर कोई व्यक्ति बिना जानकारी के वहां जाए तो कटी उंगलियां देखकर उसे लग सकता है कि, किसी गंभीर बीमारी के कारणवश सभी के हाथ ऐसे हो गए होंगे। लेकिन जब इस भयावह प्रथा के बारे में पता चलता है, रोंगटे खड़े हो जाते हैं।