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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है




प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आपको याद होगा मेरे लिए क्या क्या कहा गया है। कभी रावण कहा गया, कभी दानव, कभी दैत्य तो कभी गुंडा कहा गया। दीदी, इतना गुस्सा क्यों? प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भाजपा की स्थापना के मूल में ही बंगाली चिंतन है। भाजपा वो पार्टी है जिसकी स्थापना की प्रेरणा, बंगाल के महान सपूत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हैं। भाजपा वो पार्टी है जिसके विचारों में बंगाल की महक है। भाजपा वो पार्टी है जिसके संस्कारों में बंगाल की परंपरा है।

कोलकाता। भारतीय सिनेमा के मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती (बचपन का नाम गौरांग चक्रवर्ती) का जन्म जून 16, 1952 को कोलकाता में हुआ। कोलकाता के ही विख्यात स्कॉटिश चर्च कॉलेज से उन्होंने रसायन विज्ञान में बीएससी स्नातक की डिग्री हासिल की। उसके बाद वे भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे से जुड़े और वहीं से स्नातक भी किया। भारत के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त कर चुके  किवदंती फिल्म अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती सामाजिक कार्यकर्ता, उद्यमी और पूर्व राज्यसभा सदस्य हैं। मिथुन ने अपने अभिनय की शुरुआत कला फिल्म मृगया (1976) से की, जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए पहला राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार प्राप्त हुआ।  
1980 के दशक के अपने सुनहरे दौर में एक डांसिंग स्टार के रूप में उनके बहुत सारे प्रसंशक बने और खुद को उन्होंने भारत के सबसे लोकप्रिय प्रमुख अभिनेता के रूप में स्थापित किया, विशेष रूप से 1982 में बहुत बड़ी हिट फिल्म डिस्को डांसर में स्ट्रीट डांसर जिमी की भूमिका ने उन्हें लोकप्रिय बनाया।
कुल मिलाकर बॉलीवुड की 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय के अलावा उन्होंने बांग्ला, ओड़िया और भोजपुरी में भी बहुत सारी फिल्में की। मिथुन मोनार्क ग्रुप के मालिक भी हैं जो होस्पिटालिटी सेक्टर में कार्यरत है।
यह बहुत ही कम लोगों को ज्ञात है कि मिथुन फिल्म उद्योग में प्रवेश करने से पहले एक कट्टर नक्सली थे। लेकिन उनके परिवार को कठिनाई का सामना तब करना पड़ा जब उनके एकमात्र भाई की मौत दुर्घटनावश बिजली के करंट लगने से हो गयी। इसके बाद मिथुन अपने परिवार में लौट आये और नक्सली  आंदोलन से खुद को अलग कर लिया, हालांकि ऐसा करने के कारण नक्सलियों से उनके जीवन को खतरा उत्पन्न हो सकता था, क्योंकि नक्सलवाद को वन-वे रोड माना जाता रहा। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ और जीवन में उन्हें एक आइकोनिक दर्जा प्रदान करने में प्रमुख कारण बना। यह बात भी कम लोग ही जानते हैं कि उन्होंने मार्शल आर्ट में महारत हासिल की है।
मिथुन ने भारतीय अभिनेत्री योगिता बाली से शादी की और वे चार बच्चे, तीन बेटे और एक बेटी के पिता हैं। ज्येष्ठ पुत्र, मिमो चक्रवर्ती, जिन्होंने 2008 में बॉलीवुड फिल्म जिमी से अपने अभिनय जीवन की शुरुआत की। उनका दूसरा बेटा, रिमो चक्रवर्ती जिसने फिल्म फिर कभी में छोटे मिथुन की भूमिका में अभिनय किया। मिथुन के अन्य दो बच्चे नमाशी चक्रवर्ती और दिशानी चक्रवर्ती अभी पढाई कर रहे हैं।

नई दिल्ली। रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। डिजिटल इंडिया की तरफ एक बड़ा कदम बढ़ाते हुए भारतीय रेल जल्द ही ट्रेन के अंदर डेबिट और क्रेडिट कार्ड से लेन-देन की सुविधा शुरू करने वाला है। इस सुविधा के बाद बिना टिकट पकड़े गए यात्री कार्ड से जुर्माने का भुगतान कर पाएंगे और यात्रा जारी रखने के लिए आगे की टिकट भी ले सकेंगे। इससे यात्रियों और टीटीई को सहूलियत होगी। हालांकि, नकदी का लेन-देन पहले की तरह जारी रहेगा।

जानकारी के अनुसार, मार्च माह के अंत तक यह सुविधा पूर्वोत्तर रेलवे में ट्रायल के तौर पर शुरू हो जाएगी। दिल्ली में भी इसके शुरू करने की कार्ययोजना बन रही है। जल्द ही इसे यहां भी लागू किया जाएगा। इसके लिए रेलवे ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से करार किया है। जल्द ही रेलवे कर्मियों को पीओएस मशीनें उपलब्ध करवा दी जाएंगी। किराया या जुर्माने के रूप में वसूली के पैसे सीधे रेलवे के खाते में जाएंगे। यात्रियों को भी डिजिटल भुगतान से सहूलियत होगी।

कोरोना की वजह से देशव्यापी लॉकडाउन के कारण 24 मार्च 2020 से ही ट्रेनों का संचालन ठप था। हालांकि, बाद में सिलसिलेवार तरीके से देशभर में ट्रेनों की सेवा बहाल की जा रही है। ट्रेनों के परिचालन के दौरान यात्रियों को मास्क पहनना और सोशल डिस्टेसिंग मेंटेन करना जैसे कोविड-19 दिशानिर्देशों का पालन करना जरूरी है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कोरोना दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए परिचालन फिर से शुरू करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। 

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निर्देश दिया गया कि कोरोना वायरस के मद्देनजर सभी प्राइवेट अस्पताल वरिष्ठ नागरिकों को दाखिल करने को प्राथमिकता दें। वरिष्ठ नागरिकों के कोरोना से प्रभावित होने की अधिक आशंका को देखते हुए यह निर्देश दिया गया है। इससे पहले 4 अगस्त 2020 को सुप्रीम कोर्ट  ने सरकारी अस्पतालों को यह निर्देश दिया था। मामले की सुनवाई जस्टिस अशोक भूषण और आर एस रेड्डी ने अपने 4 अगस्त 2020 के आदेश में संशोधन किया। 

मामले पर सीनियर एडवोकेट अश्विनी कुमार ने याचिका दायर की। उन्होंने वृद्धावस्था पेंशन को लेकर कोर्ट में अपनी याचिका दी थी जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने आज यह निर्देश जारी किया। अश्विनी कुमार ने यह भी बताया कि ओडिशा और पंजाब को छोड़ किसी और राज्य ने पहले दिए गए निर्देश पर कोई कदम नहीं उठाया है।शीर्ष कोर्ट ने इसके लिए अन्य राज्यों को तीन सप्ताह का समय दिया और जवाब देने का निर्देश जारी किया है।

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि वृद्धावस्था पेंशन के पात्र सभी बुजुर्ग लोगों को समय पर पेंशन दी जानी चाहिए और कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को उन्हें आवश्यक दवायें, सैनिटाइजर, मास्क और अन्य आवश्यक वस्तुयें प्रदान करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बुजुर्ग लोगों के कोरोना वायरस संक्रमण से ग्रस्त होने की ज्यादा संभावना को देखते हुए  सरकारी अस्पतालों में इन्हें प्राथमिकता के आधार पर भर्ती करना चाहिए। 

अस्पताल के प्रशासन इनकी परेशानियों के निदान के लिये तत्काल कदम उठाएं। देश में 1 मार्च से  कोरोना वैक्सीनेशन के दूसरे चरण की शुरुआत हुई है। इस चरण में 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित 45 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को वैक्सीन लगाई जा रही है। वैक्सीनेशन के लिए लोग कोविन टू-पाइंट जीरो पोर्टल या आरोग्‍य सेतु जैसे एप पर रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं। 


मामला अंबेडकरनगर के टांडा कोतवाली के अजीमनगर थाना क्षेत्र का है। इसकी चर्चा पूरे जिले में हो रही है। मिली जानकारी के अनुसार लड़की का कन्‍फ्यूजन इतना बढ़ा कि बाकायदा पंचायत बैठी। फिर पर्ची डालकर फैसला किया गया। पांच दिन पहले लड़की इन चार लड़कों के साथ घर से भाग गई थी। लड़कों ने लड़की को दो दिन अपनी रिश्तेदारी में छिपाए रखा लेकिन उसके बाद पकड़े गए। 




नई दिल्ली। सरकार ने कोविड टीकाकरण अभियान में तेजी लाने के लिए समय सीमा को हटा दिया है और 24 घंटे टीकाकरण की अनुमति दे दी है। स्वास्थ्य मंत्री हर्ष वर्धन ने ट्वीट में कहा कि सरकार ने टीकाकरण अभियान की गति बढ़ाने के लिए टीका लगाने के समय पर लगी पाबंदी हटा दी है। उऩ्होंने कहा कि लोग अपनी सुविधानुसार 24 घंटे और सातों दिन कोविड का टीका लगवा सकते हैं। 

डॉक्टर हर्षवर्धन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ-साथ समय का मूल्य को महत्व देते हैं। इससे पहले सरकार ने मंगलवार को नियमों में ढील देते हुए सभी निजी अस्पतालों को टीकाकरण की अऩुमति दी थी। साथ ही, सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक लाभार्थियों को टीकाकरण करने की समयावधि को भी समाप्त कर दिया। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में कोविड का पहला टीका लगवाया था।

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई, एनआईए और ईडी जैसे केंद्रीय जांच एजेंसियों के दफ्तरों में अब तक सीसीटीवी कैमरे नहीं लगने पर नाराजगी जताई। शीर्ष अदालत ने फटकार वाले अंदाज में कहा कि सरकार इस मामले से पैर पीछे खींचने की कोशिश कर रही है। अदालत ने केंद्र सरकार को सभी केंद्रीय जांच एजेंसियों और राज्य सरकारों को अगले पांच महीने में देश के सभी पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का आदेश दिया है। 

केंद्र सरकार को तीन हफ्ते और राज्य सरकारों को एक महीने के भीतर हलफनामा दाखिल करने को भी कहा गया है। अगली सुनवाई होली के बाद होगी।जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि यह नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा मामला है। हमें ऐसा लग रहा है कि सरकार इस मामले से अपने पैर पीछे खींचने की कोशिश कर रही है।

जस्टिस नरीमन के साथ जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ऋषिकेश रॉय की मौजूदगी वाली पीठ ने सवाल किया कि आखिर सुनवाई टालने के लिए क्यों गुहार की गई थी। दरअसल, केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को पत्र लिखकर मंगलवार को होने वाली सुनवाई को टालने की मांग की थी। वीडिया कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये चल रही सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल ने जवाब दिया कि पत्र के जरिए इसलिए सुनवाई टालने की मांग की गई थी कि आदेश के प्रभावों पर गौर किया जा सके। 

नई दिल्ली। देश के लाखों कर्मचारियों को गुरुवार को बड़ी खुशखबरी मिल सकती है। दरअसल देश के 6.6 करोड़ नौकरीपेशा लोगों के लिए कल गुरुवार को होने वाली बैठक में एक फैसला लिया जा सकता है। मिली जानकारी के मुताबिक गुरुवार (4 मार्च 2021) को सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की अहम बैठक होने वाली है। इस बैठक में कर्मचारियों के पीएफ को लेकर कुछ महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने हैं। पीएफ कॉन्ट्रिब्यूशन के लिए फिलहाल बेसिक सैलरी की जो सीलिंग है, उसमें बढ़ोतरी की जा सकती है। फिलहाल सीलिंग 15000 रुपए है।
आसान भाषा में यदि इसे समझा जाए तो ऐसे देखा जा सकता है। मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 30000 रुपए है तो उस सैलरी पर उसका 12 फीसदी हिस्सा प्रोविडेंट फंड में जमा होता है। साथ ही इतना ही शेयर कंपनी भी अपने खाते से जमा करती है। लेकिन कंपनी के शेयर में दो हिस्से होते हैं। पहला होता है ईपीएफ और दूसरा होता है एपीएसआइ कंपनी के शेयर का 12 फीसदी हिस्सा भी 30000 रुपए की बेसिक सैलरी पर ही जमा होगा।

पेंशन फंड में बेसिक सैलरी की सीलिंग 15000 रुपए है। इस सीलिंग के कारण कर्मचारी के मूल वेतन (15000) का 8.33 फीसदी हिस्सा यानि 1250 रुपए ही जमा होता है। सूत्रों के अनुसार यदि गुरुवार को होने वाली बैठक में सीलिंग बढ़ाने पर फैसला किया जाता है तो फिर ये हिस्सा 25000 रुपए की सीमा पर तय होगा। इसका मतलब ये होगा कि 2083 रुपए पेंशन फंड में जमा होंगे।
ईपीएफओ के इस फैसले से लाखों नौकरीपेशा लोगों का फायदा मिल सकता है। दरअसल पहले की तुलना में ज्यादा लोग इसके दायरे में आ जाएंगे और दूसरा यह कि कंपनी का शेयर बढ़ेगा तो कर्मचारियों के पेंशन फंड में भी बढ़ोतरी होगी। इसके अलावा यह भी बता दें कि 4 मार्च को होने वाली मीटिंग में फिलहाल ईपीएफओ ब्याज दरों पर कोई भी फैसला नहीं लिया जाएगा। ईपीएफओ ने जहां भी निवेश किया है, उससे मिलने वाले रिटर्न की समीक्षा होने के बाद ही तय हो सकेगा कि चालू वित्तीय वर्ष के लिए कितना ब्याज दिया जाएगा।
सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टी के सदस्य पीएफ की सैलरी सीलिंग इसलिए बढ़ाना चाहते हैं क्योंकि देशभर में जो यूनिवर्सल मिनिमम वेज का फॉर्मूला लागू किया जा रहा है, उसमें कर्मचारी की सैलरी 18 हजार रुपए के करीब निर्धारित की जा सकती है। इसके अलावा मौजूदा सैलरी सीलिंग में भी बढ़ोतरी की मांग लंबे समय से की जा रही है, ताकि ज्यादा से ज्यादा कर्मचारियों को को ईपीएफओ में लाने में मदद मिलेगी। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा बढ़ेगी।

दिल्ली। राज्य में कोरोना के बढ़ते मामले को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने 31 मार्च तक के लिए लॉकडाउन बढ़ा दिया है। राज्य सरकार ने इस बारे में जिलाधिकारियों को नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है। इसमें जिला प्रशासन से कोरोना से संबंधित प्रोटोकॉल के उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है। इसके साथ ही पुलिस और नगरपालिका के अधिकारियों को कंटेंमेंट जोन में अधिक से अधिक नियमों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि किसी भी तरह के संक्रमण से बचा जा सके। तमिलनाडु में कोरोना के मामलों में अचानक बढ़ोत्तरी देखी गई है। जिसके बाद सरकार ने ये फैसला लिया है।

राज्य सरकार के लॉकडाउन से जुड़े दिशा निर्देश के मुताबिक सरकारी ओर निजी कार्यालय, दुकानें और औद्योगिक प्रतिष्ठान अलग अलग समय में खुलेंगे और कम संख्या में कर्मचारियों की उपस्थिति रहेगी। सरकार ने कहा है कि स्थानीय और जिला प्रशासन कोरोना से बचाव के लिए लोगों से मास्क पहनने और शारीरिक दूरी का ध्यान रखने की अपील करे। इस अधिसूचना में 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को और 10 वर्ष से छोटे बच्चे से सावधानी बरतने को कहा गया है। इसके साथ ही डीजीसीए द्वारा अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लगाई गई रोक राज्य में भी लागू होगी।

नई दिल्ली। 1 अप्रैल 2021 से आपकी ग्रेच्युटी, पीएफ और काम के घंटों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। कर्मचारियों को ग्रेच्युटी और भविष्य निधि (पीएफ) मद में बढ़ोतरी होगी। वहीं, हाथ में आने वाला पैसा (टेक होम सैलरी) घटेगा। यहां तक कि कंपिनयों की बैलेंस शीट भी प्रभावित होंगी। इसकी वजह है पिछले साल संसद में पास किए गए तीन मजदूरी संहिता विधेयक (कोड ऑन वेजेज बिल)। इन विधेयकों के इस साल 1 अप्रैल से लागू होने की संभावना है।
वेज (मजदूरी) की नई परिभाषा के तहत भत्ते कुल सैलेरी के अधिकतम 50 फीसदी होंगे। इसका मतलब है कि मूल वेतन (सरकारी नौकरियों में मूल वेतन और महंगाई भत्ता) अप्रैल से कुल वेतन का 50 फीसदी या अधिक होना चाहिए। गौरतलब है कि देश के 73 साल के इतिहास में पहली बार इस प्रकार से श्रम कानून में बदलाव किए जा रहे हैं। सरकार का दावा है कि नियोक्ता और श्रमिक दोनों के लिए फायदेमंद साबित होंगे।
नए ड्राफ्ट रूल के अनुसार, मूल वेतन कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए। इससे ज्यादातर कर्मचारियों की वेतन संरचना बदलेगी, क्योंकि वेतन का गैर-भत्ते वाला हिस्सा आमतौर पर कुल सैलेरी के 50 फीसदी से कम होता है। वहीं कुल वेतन में भत्तों का हिस्सा और भी अधिक हो जाता है। मूल वेतन बढ़ने से आपका पीएफ भी बढ़ेगा। पीएफ मूल वेतन पर आधारित होता है। मूल वेतन बढ़ने से पीएफ बढ़ेगा, जिसका मतलब है कि टेक-होम या हाथ में आने वाला वेतन में कटौती होगी।
ग्रेच्युटी और पीएफ में योगदान बढ़ने से रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली राशि में इजाफा होगा। इससे लोगों को रिटायरमेंट के बाद सुखद जीवन जीने में आसानी होगी। उच्च-भुगतान वाले अधिकारियों के वेतन संरचना में सबसे अधिक बदलाव आएगा और इसके चलते वो ही सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। पीएफ और ग्रेच्युटी बढ़ने से कंपनियों की लागत में भी वृद्धि होगी। क्योंकि उन्हें भी कर्मचारियों के लिए पीएफ में ज्यादा योगदान देना पड़ेगा। इन चीजों से कंपनियों की बैलेंस शीट भी प्रभावित होगी।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 5 अप्रैल तक के लिए धारा 144 लागू कर दी गई है। ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर नवीन आरोड़ा की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि इस दौरान किसी भी आयोजन के लिए इजाजत लेनी जरूरी होगी। इसके साथ ही कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए गाइडलाइन भी जारी की गई है। लखनऊ में धारा 144 का फैसला यूपी सरकार ने राजनीतिक दलों के धरने, प्रदर्शन के साथ कोरोना और आने वाले त्योहारा को देखते हुए लिया है।

नवीन आरोड़ा ने बताया है कि आगामी दिनों में त्योहारों के अलावा विभिन्न राजनीतिक, किसान संगठनों द्वारा कमिश्नरेट लखनऊ क्षेत्र में किसान आंदोलन/धरना प्रदर्शन करने की प्रबल संभावना के मद्देनजर शांति व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और इसे ध्यान में रखते हुए। कोविड-19 वैश्विक महामारी का प्रभाव जनजीवन को व्यापक रुप से प्रभावित कर रहा है।

उन्होंने कहा कि मार्च महीने में महाशिवरात्रि, होली, शबे बारात, गुड फ्राईडे तथा ईस्टर सैटरडे व 5 अप्रैल को ईस्टर मंडे/महाराज कश्यप जयंती के अवसर पर भी असामाजिक तत्वों द्वारा शांति व्यवस्था भंग की जा सकती है। जिससे कटुता बढ़ने व लोक प्रशांत विशुब्ध होने की प्रबल आशंका है। इसके देखते हुए धारा-144 दंड प्रक्रिया संहिता के तहतत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए नई निषेधाज्ञा जारी किया जाना आवश्यक है।

नवीन अरोरा ने बताया कि कंटेनमेंट जोन के बाहर समस्त सामाजिक/शैक्षिक/खेल/मनोरंजन/सांस्कृतिक/धार्मिक/राजनीतिक कार्यक्रमों एवं अन्य सामूहिक गतिविधियों की अनुमति निम्न प्रतिबन्धों के अधीन होगी। किसी भी बंद स्थान, हाल/कमरे की निर्धारित क्षमता का 50 प्रतिशत लेकिन एक समय में अधिकतम 200 व्यक्तियों तक तथा किसी खुले स्थान/मैदान पर ऐसे स्थानों के क्षेत्रफल के अनुसार फेस-मास्क का प्रयोग, सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन तथा थर्मल स्कैनिंग और हाथ धोने/सेनेटाइजर की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा।

ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर ने बताया कि कोई भी व्यक्ति पुलिस आयुक्त लखनऊ या संयुक्त पुलिस आयुक्त या पुलिस उपायुक्तों की पूर्व अनुमति प्राप्त किए बिना न तो 5 या इससे अधिक व्यक्तियों का किसी प्रकार का कोई जुलूस निकालेगा न ही सार्वजनिक स्थान पर 5 या इससे अधिक व्यक्तियों का समूह बनायेगा और न ही किसी समूह में सम्मिलित होगा। 

विवाह, उत्सव व शव यात्रा सम्बन्धी जुलूस तथा प्रदेश शासन के विभिन्न विभागों के प्रबान्धाधीन प्रेक्षाग्रहों के अंदर आयोजित सांस्कृतिक व एकेडमिक कार्यक्रम प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे। उन्होंने बताया कि कोई भी दुकानदार न तो ऐसे धातु के तार का विक्रय करेगा और न ही कोई व्यक्ति ऐसे तार में पतंग बांधकर उड़ाएगा जिससे ट्रांसफॉर्मर जल जाने अथवा तार सर्किट की संभावना हो।

नई दिल्ली। देश में पिछले कई दिनों से लगातार कोरोना वायरस के दैनिक मामले 16,000 के पार आ रहे थे। वहीं आज करीब एक सप्ताह बाद इसमें गिरावट दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 15,510 नए मामले दर्ज किए गए। इस अवधि में कोरोना वायरस से 106 लोगों की जान चली गई। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को जानकारी दी।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, बीते 24 घंटों में कोरोना वायरस से संक्रमण के 15,510 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इसी के साथ देश में संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 1,10,96,731 पहुंच गए हैं। वहीं पिछले 24 घंटों में कोरोना की वजह से 106 मरीजों की मौत हो गई, जिसके चलते देश में कोरोना से जान गंवाने वालों की कुल संख्या 1,68,627 हो गई हैं।

स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में 11,288 कोरोना मरीज स्वस्थ हो गए हैं। इसी के साथ देश में अब तक 1,07,86,457 मरीज कोरोना वायरस को मात देने में सफल रहे हैं। रोजाना आधार पर दर्ज होने वाले नए कोरोना केसों की तुलना में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या कम है। इससे कोरोना के सक्रिय के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। देश में कोरोना के सक्रिय मामले 1,68,627 हैं।

देश में दुनिया का सबसे बड़े कोविड टीकाकरण अभियान का सोमवार यानी आज से दूसरा चरण शुरू हो गया है। दूसरे चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एम्स पहुंचकर कोविड टीका लगवाया है। साथ ही देशवासियों से कोरोना को हराने के लिए कोविड वैक्सीन लगवाने की अपील की है। देश में अब तक 1,43,01,266 लोगों को कोविड वैक्सीन दी लगाई जा चुकी है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में कोरोना वायरस का टीका लगवाया है। उन्होंने कोवैक्सीन की पहली डोज ली। वे खुद सुबह-सुबह एम्स अस्पताल पहुंचे और कोरोना का टीका लगवाया। उन्होंने लोगों से कोरोना का टीका लगाने और भारत को कोविड-19 से मुक्त कराने के लिए साथ आने आने की अपील की है। टीका लगवाकर उन्होंने सभी चुनावी राज्यों को संदेश देने की कोशिश की है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को सुबह-सुबह एम्स अस्पताल पहुंचे अस्पताल जाने के लिए उन्होंने कोई तय रूट फॉलो नहीं किया जिससे लोगों को उनके काफिले के कारण किसी तरह की परेशानी न हो। उन्हें पुडुचेरी की नर्स पी निवेदा ने कोरोना का टीका लगवाया। इस दौरान प्रधानमंत्री के पीछे केरल की नर्स खड़ी थी। उन्होंने गले में असम का गमछा डाला हुआ था तो उनकी वेशभूषा पश्चिम बंगाल की थी।
वैक्सीन लगवाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट करके कहा, `मैंने एम्स में कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक ली, यह प्रशंसनीय है कि कैसे हमारे डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने कोरोना के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने के लिए त्वरित समय में काम किया है। मैं उन सभी से अपील करता हूं, जो वैक्सीन लेने के योग्य हैं, साथ आएं, हम मिलकर भारत को कोरोना मुक्त बनाएंगे।`
विपक्ष ने भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवैक्सीन को आपात मंजूरी दिए जाने पर सवाल खड़े किए थे। विपक्ष का कहना था कि कोवैक्सीन को फेज-3 के ट्रायल के बिना ही आपात मंजूरी प्रदान की गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को इसका टीका लगवाने को कहा था जिससे इसकी सुरक्षा को लेकर भ्रम दूर हों। इसके अलावा जब मांग उठी थी कि सांसदों-विधायकों को पहले टीका लगाया जाए तो प्रधानमंत्री मोदी ने दो टूक कहा था कि कोई कतार न तोड़े। वहीं आज बारी आने पर उन्होंने सबसे पहले टीका लगवाया, वो भी भारत बायोटेक का जिसकी विश्वसनीयता पर खड़े संकट को उन्होंने दूर करने का प्रयास किया है।
शिवसेना नेता और राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री द्वारा कोरोना टीका लगाने की तारीफ की है। उन्होंने ट्वीट कर कहा, `यह सुनकर अच्छा लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कोवैक्सीन लगवाई है। इससे वैक्सीन को लेकर फैले संदेह को दूर करने में मदद मिलेगी और जिन लोगों में इसे लेकर हिचकिचाहट है अब वो उनके दिमाग से निकल जाएगी। अधिक लोगों का टीकाकरण करने का महत्वपूर्ण चरण आज से शुरू हुआ है। मैं भारत के सुरक्षित रहने के लिए प्रार्थना करती हूं।   
भारत सरकार ने शनिवार को बीमारियों की सूची जारी कर दी है। इसमें हृदय प्रत्यारोपण, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, किडनी की बीमारी, किडनी फेल के मरीज, जिन मरीजों का डायलिसिस चल रहा है, लिवर सिरोसिस, श्वास संबंधी रोगी, लिम्फोमा कैंसर पीड़ित, प्लास्टिक एनिमिया, थैलेसीमिया, एचआईवी, मस्कुलर डिस्ट्राफी और एसिड अटैक के गंभीर मरीजों को शामिल किया गया है। इन बीमारियों से पीड़ित 45 से 60 साल मरीज मेडिकल सर्टिफिकेट सर्टिफिकेट दिखाकर वैक्सीन लगवा सकते हैं।
 

इंदौर। सोमवार सुबह एक गरीब बुजुर्ग महिला का वीडियो वायरल हुआ, जिसके पैर में हजारों कीड़े हो गए थे। सुबह घूमने आए कुछ लोगों ने यह वीडियो इंटरनेट मीडिया पर वायरल किया। वीडियो नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों तक भी पहुंचा, तो ताबड़तोड़ नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की टीमें मौके पर पहुंची और महिला को अस्पताल भिजवाया।

उक्त बुजुर्ग महिला बिजासन माता मंदिर रोड पर थी। उसने अपने पैर कंबल से ढंक रखे थे। स्थानीय लोगों ने वीडियो में कंबल उठाकर उसका पैर दिखाया, तो उसमें हजारों कीड़े उसका पैर खाते हुए दिख रहे थे। देखते ही देखते उक्त वीडियो शहर के कई ग्रुप पर वायरल हो गया और उस पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दी जाने लगीं। बताया जाता है कि उक्त महिला वहां एक टेबल पर पड़ी थी और संभवत: भीख मांगकर गुजारा करती थी। निगमायुक्त प्रतिभा पाल को यह वीडियो भेजा गया, तो उन्होंने नगर निगम की टीम को तुरंत मौके पर भेजा।

इधर, स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी वीडियो की जानकारी लगी, तो वे एंबुलेंस लेकर बिजासन माता मंदिर रोड पर पहुंचे। उन्होंने महिला को इलाज के लिए अरविंदो अस्पताल भिजवाया। अस्पताल भिजवाने से पहले अस्तपाल की टीम ने महिला के पैर की सफाई कर ड्रेसिंग की। महिला ने लोगों से कहा कि वह इलाज के लिए एमवाय अस्पताल गई थी, लेकिन उन्होंने ढंग से इलाज नहीं किया। 

मैं आत्महत्या कर लूंगी, लेकिन इलाज कराने एमवाय अस्पताल नहीं जाऊंगी। मुझे आप मुक्तिधाम छोड़ दो। शनिवार रात भी पुलिस की डॉयल 100 एक बुजुर्ग बीमार महिला को लेकर झाबुआ टावर स्थित रैनबसेरा में लेकर पहुंची थी। फिर निगमायुक्त के निर्देश पर रातभर उसे रैनबसेरा में रखकर रविवार सुबह इलाज के लिए अरविंदो अस्पताल भेजा गया।@GI@



जब आप टोल प्लाजा से गुजरेंगे तो टोल प्लाजा पर लगा फास्टैग रीडर आपके फास्टैग के बारकोड को रीड करेगा। इसके बाद टोल फीस आपके बैंक अकाउंट से कट जाएगी। इससे सबसे बड़ा फायदा यह होगा की अब टोल प्लाजा पर गाड़ियों की लंबी-लंबी लाइने नहीं लगेंगी। ये फास्टैग अभी दो पहिया वाहनों के लिए नहीं है। RFID को नेशनल पेमेंट्स कोऑपरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने बनाया है।
सबसे पहले फास्टैग से टोल वसूली को 2016 में लागू किया गया था।कई चरणों के बाद एक दिसंबर, 2019 से इसे सभी के लिए अनिवार्य कर दिया गया था। लेकिन तब से कई बार इसकी समयसीमा को बढ़ाया जा चुका है। आखरी बार केंद्र सरकार ने इसे एक जनवरी से अनिवार्य करने की घोषणा की थी। लेकिन एक बार फिर इसकी समयसीमा को बढ़ाकर 15 फरवरी कर दिया गया था।

देहरादून। 7 फरवरी की सुबह को विपुल कैरेनी (27) तपोवन के एनटीपीसी हाइड्रोपावर प्रॉजेक्‍ट में रोज की तरह काम कर रहे थे। अचानक उनकी मां का फोन आया. वह घबराई हुई थीं और उनसे फौरन बैराज के पास से हट जाने को कह रही थीं। लेकिन विपुल ने उनकी बातों पर ध्‍यान नहीं द‍िया. मां के फोन आते रहे। लेकिन मां की इन्‍हीं चेतावनियों की बदौलत न केवल विपुल की बल्कि उनके लगभग 24 दोस्‍तों की जान बच पाई।

आखिर मांगश्री देवी अपनी बात बेटे विपुल को समझाने में कामयाबी हुईं, उन्‍होंने बताया कि उफनाई हुई धौलीगंगा उन्‍हीं की तरफ तेजी से बढ़ी चली आ रही है। विपुल ने बताया, हमारा गांव ऊंचाई पर स्थित है। जिस समय बाढ़ आई उस समय मेरी मां बाहर काम कर रही थी। अगर उन्‍होंने हमें आगाह नहीं किया होता तो आज मैं और मेरे करीब दो दर्जन दोस्‍त जिंदा नहीं होते।
इसके बाद उन सभी लोगों ने दौड़कर टूटी हुई सीढ़‍ियों में शरण लेकर अपनी जान बचाई। विपुल की दो महीने पहले ही शादी हुई है, उन्होंने बताया कि वह सात साल की उम्र से ही बैराज में काम कर रहे हैं। उस दिन सुबह 9 बजे वह तपोवन स्थित अपने गांव ढाक से प्रॉजेक्‍ट साइट के लिए न‍िकले थे। विपुल ने बताया, और द‍िनों हमें रोज के 600 रुपये मिलते हैं लेकिन रविवार को दोगुने पैसे दिए जाते हैं। मैं रविवार को यही एक्‍स्‍ट्रा कमाई करने गया था। सुबह 10:35 पर उनकी मां का कॉल आया, वह और उनके कुछ साथी तो बच गए लेकिन पूरी प्रॉजेक्‍ट साइट बर्बाद हो गई।

अपनी मां के फोन कॉल के बारे में विपुल का कहना था, शुरू में मैंने उसके चिल्‍लाने की आवाज सुनी और उसे गंभीरता से नहीं ल‍िया। मैंने उससे कहा कि मजाक न करो मां, पहाड़ कहीं नहीं फटते हैं। लेकिन उन्‍होंने बार-बार कॉल करके मुझसे वहां से हट जाने को कहा। मेरी मां और पत्‍नी अनीता ने पानी को सामान्‍य स्‍तर से 15 मीटर ऊपर उठते और सामने आने वाली हर चीज को डुबोते देखा। हम सभी सीढ़‍ियों की तरफ भागे और बच गए।

संदीप लाल भी ढाक गांव के हैं। उनकी जान भी विपुल की मां के फोन कॉल की वजह से बची। वह बताते हैं, मैं अंदर था और एक खराब बिजली की लाइन सही कर रहा था। उसी समय विपुल ने मुझसे वहां से भागने को कहा और मैं भी तेजी से दौड़ पड़ा। आज मेरी जान विपुल की मां की वजह से बची है, इससे पता चलता है कि कभी भी अपने माता-पिता की चेतावनी की अनदेखी नहीं करनी चाहिए।