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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



पूरब टाइम्स। रामभक्‍त हनुमान के चमत्‍कारों की कहानियां अनगिनत हैं। इनमें से कई चमत्‍कार तो आज भी मौजूद हैं और उनके पीछे के रहस्‍य आज भी अनसुलझे हैं। देश के कुछ हनुमान मंदिर तो बेहद खास और चमत्‍कारिक हैं। ऐसा ही एक मंदिर मध्‍य प्रदेश में है, जहां पवनपुत्र हनुमान की उल्‍टी मूर्ति स्‍थापित है। यहां हनुमान जी सिर के बल उल्‍टे खड़े हैं और उनकी इसी रुप में पूजा होती है। दूर-दूर से लोग इस मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उनकी कृपा पाने के लिए आते हैं।

मध्यप्रदेश के इंदौर से करीब 30 किलोमीटर दूर सांवेर गांव में उल्‍टे हनुमान का यह मंदिर स्थित है। मान्‍यता है कि इस मंदिर में 3 या 5 मंगलवार तक लगातार दर्शन करने से सारे दुख दूर हो जाते हैं। साथ ही हनुमान जी भक्‍त की मनोकामनाएं भी पूरी करते हैं। हनुमान जी की इस चमत्‍कारिक प्रतिमा पर चोला चढ़ाने से भी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

इस मंदिर में हनुमान जी की उल्टी प्रतिमा को लेकर मान्‍यता है कि राम और रावण के युद्ध के दौरान रावण अपना रुप बदलकर अहिरावण बनकर भगवान राम की सेना में शामिल हो गया था। रात में रावण सोते हुए राम-लक्ष्‍मण को मूर्छित करके पाताल लोक ले गया। इसकी सूचना मिलते ही पूरी वानर सेना बदहवास हो गई। तब भगवान राम और उनके भाई लक्ष्‍मण को पाताल लोक से वापस लाने के लिए हनुमान जी पाताल लोक में गए थे।

पूरब टाइम्स। दुनिया में ऐसे कई लोग होते हैं जिनमें अपने काम को लेकर गजब का जज्बा होता है। अपने इस जज्बे के लिए ये लोग मौत के मुंह में भी काम करने को तैयार होते हैं। ऐसे ही एक शख्स के बारे में आज आपको बताने जा रहे हैं। 36 साल के माउंट इजेन पिछले 10 सालों से जावा के सक्रिय ज्वालामुखी के मुख पर काम करते हैं। इजेन एक माइनर हैं। और कई सालों से यहां सल्फेट की खान में काम कर रहे हैं।



पूरब टाइम्स। टैक्‍सी या कार की छत  पर आमतौर पर यात्रियों का सामान रखा जाता है लेकिन थाईलैंड के 2 टैक्‍सी कोऑपरेटिव समितियों ने कार की छत का अनूठा उपयोग किया है. उन्‍होंने कार की छत पर टेरिस गार्डन जैसा गार्डन बनाकर सब्जियां उगा डाली हैं. इसके पीछे उन्‍होंने एक वजह भी बताई है. साथ ही उनकी ये अनूखी टैक्सियां  सबका ध्‍यान भी खींच रही हैं. कचरे के थैलों पर मिट्टी डालकर उगाए पौधे 
 इन दोनों टैक्‍सी संगठनों ने टैक्‍सी की छत पर बांस की मदद से बाउंडरी बनाई और फिर कचरा फेंकने में इस्‍तेमाल होने वाली प्‍लास्टिक बिछाकर उस पर मिट्टी फैलाई. खाद वगैरह डालकर उन्‍होंने इस पर टमाटर, खीरे और बीन्स आदि के पौधे लगाए हैं. इस सबके बाद कारों की भीड़ में भी इन संगठनों की कारें अलग नजर आती हैं. ये है अनूठे प्रयोग की वजह हफपोस्‍ट की रिपोर्ट के मुताबिक कार की छत पर खेती करने का यह प्रयोग इन दोनों संगठनों ने कोरोना वायरस के कारण पैदा हुए आर्थिक संकट की ओर सबका ध्‍यान खींचने के लिए किया है. कोरोना वायरस के कारण टैक्‍सी ड्राइवर्स को बहुत नुकसान हुआ है उन्‍हें पैसेंजर बुकिंग नहीं मिल रही हैं. 

पूरब टाइम्स। हमारी इस दुनिया में ऐसे कई स्थान हैं, जो अपने अनोखेपन के कारण काफी मशहूर हैं। इसी वजह से उनकी चर्चा देश दुनिया में हर तरफ होती है। इसी कड़ी में आज हम बात करने वाले हैं, दुनिया के सबसे अनोखे गांव के बारे में जहां ज्यादातर लोग एक ही किडनी के सहारे जिंदा हैं। इस गांव का नाम किडनी वैली है। कई लोग इसे किडनी वाले गांव के नाम से भी जानते हैं। हालांकि गांव का वास्तविक नाम होकसे है। ये नेपाल में स्थित है। अपनी इसी विचित्रता के कारण ये गांव देश दुनिया में काफी मशहूर है। 

यहां के लगभग सभी लोग अपना गुजारा मात्र एक किडनी के सहारे कर रहे हैं। इस कारण अक्सर उनको कई गंभीर स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी आती हैं। आप में से कई लोग ये सोच रहे होंगे कि आखिर गांव के सभी लोगों के पास एक ही किडनी क्यों है? आइए जानते हैं इसके बारे में - किडनी वैली नाम से मशहूर होकसे गांव में गरीबी काफी ज्यादा है। यही एक बड़ी वजह है, जिसके चलते यहां के लोग अपनी एक किडनी को बेचकर जीवन यापन करने पर मजबूर हैं।

अपना पेट पालने के लिए यहां के लोग अक्सर अपनी एक किडनी को मात्र 2000 रुपये में बेच देते हैं। कई लोगों का कहना है कि इस गांव में मानव अंगों की तस्करी काफी ज्यादा होती है। यहां पर अंगों की तस्करी करने वाले लोग अक्सर यहां के मासूम लोगों को झांसा देकर उनकी किडनी निकाल लेते हैं। कई लोगों का कहना है कि अंगों की तस्करी करने वाले लोग यहां के लोगों को लालच देते हुए कहते हैं कि किडनी निकालने के बाद उसकी जगह दूसरी किडनी उग आएगी। गांव के मासूम लोग उनकी बातों में फंस जाते हैं और चंद रुपयों के लालच में अपना बहमूल्य अंग उन तस्करों को दे देते हैं।

पूरब टाइम्स। दुनिया बहुत ही अद्भुत और अनोखी चीजों से भरी पड़ी है. हम आपको आज एक ऐसे पत्थर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे काटने पर खून निकलता है. इसके टूटने पर टुकड़े नहीं होते बल्कि खून निकलने लगता है. इसके टूटने पर वैसे ही निशान बनते हैं, जैसे किसी के शरीर पर चोट बनते हैं. इन पत्थरों से मीट जैसी वस्तु निकलती है, जिसे लोग मांस के रूप में बाजार  से खरीदकर लाते हैं तथा बनाकर खाते हैं. इस पत्थर का मांस निकालने के लिए लोगों को तेज चाकू की जरुरत पड़ती है. पत्थर के मांस से कई डिशेज और सलाद बनाई जाती हैं. लेकिन  स्थानीय लोग इस पत्थर को कच्चा खाना पसंद करते हैं. 

बता दें कि यह पत्थर एक समुद्री जीव है. जो सांस भी लेता है और खाना भी खाता है. इ सके पास लिंग बदलने की अद्भुत क्षमता है. जिसकी सहायता से यह बच्चे भी पैदा करता है. लेकिन ये जीव किसी पत्थर की तरह ही दिखाई देता है. चिली और पेरू के समुद्री तलों में ये पत्थर बड़ी संख्या में पाए जाते हैं. इन पत्थरों को अगर कोई पहली नजर में देखे तो उसे यह सामान्य पत्थर की तरह ही नजर आएगा.

इस पत्थर को पायुरा चिलियांसिस के नाम से जाना जाता है. जैसे ही इस पत्थर को तोड़ा जाता है तो इससे खून बहने लगता है. यह पत्थर चट्टानों से चिपका रहता है और धीरे-धीरे उसका ही हिस्सा बन जाता है. इस पत्थर को पीरियड रॉक के नाम से भी जाना जाता है. ऊपर से सख्त दिखने वाला ये पत्थर अंदर से बेहद नरम और मुलायम होता है. लोग इस पत्थर की तलाश के लिए समुद्र की गहराइयों को छानते है क्योंकि इस पत्थर से निकलने मांस को लोग बेहद पसंद कर रहे हैं. जिस कारण दिनों-दिन इसकी डिमांड बढ़ती जा रही है.

पूरब टाइम्स। अगर आपके बैंक अकाउंट में एक साथ साढ़ें पांच लाख रुपये आ जाएं तो आप क्या करेंगे. यकीनन आप खुशी के मारे लोटपोट हो जाएंगे. बिहार के एक युवक के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. जब उसके बैंक अकाउंट में एक बार में ही 5.5 लाख रुपये आ गए. बैंक में पैसे आने पर वह बहुत खुश हुआ और उसे लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसके खाते में ये रुपये भेजे हैं. मामला, बिहार के खगड़िया जिले का है. जहां एक ग्रामीण बैंक की गलती के कारण यहां के एक व्यक्ति के खाते में 5.5 लाख रुपये आ गए हैं. जिस शख्स के खाते में यह पैसा आया है उसने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 लाख रुपये के वादे की पहली किस्त के तौर पर उसे रुपये भेजे गए हैं.

जिहाजा अब वह इन रुपयों के वापस नहीं करेगा. यह बात कहकर उसने बैंक को पैसे देने से इनकार कर दिया है. उसने कई और बहाने भी बनाए. इस पूरे मामले में बताया जाता है कि खगड़िया में ग्रामीण बैंक ने गलती से जिले के मानसी थाना क्षेत्र के बख्तियारपुर गांव के रहने वाले रंजीत दास के खाते में गलती से 5.5 लाख रुपये भेज दिए. बैंक को जब इसके बारे में जानकारी हुई तो उसने चेक किया कि आखिर यह पैसे कहां गया. जांच में पता चला कि बख्तियारपुर गांव के किसी रंजीत दास के खाते में पैसे चले गए हैं. इसके बाद बैंक ने रकम लौटाने के लिए रंजीत को कई नोटिस भेजा, लेकिन उसने यह कहते हुए रकम वापस करने से इनकार कर दिया कि सारे पैसे खर्च हो चुके हैं.

रंजीत दास ने कहा, "जब मुझे इस साल मार्च में पैसा मिला तो मैं बहुत खुश था. मुझे लगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हर बैंक खाते में 15 लाख रुपये जमा करने का वादा किया था, जिसकी यह पहली किस्त हो सकती है. मैंने सारा पैसा खर्च कर दिया. अब मेरे बैंक खाते में पैसे नहीं हैं.” वहीं अब मामला पुलिस के पास पहुंच गया है. घटना के संबंध में मानसी के थाना प्रभारी दीपक कुमार ने कहा कि बैंक के मैनेजर की शिकायत पर रंजीत दास को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है.

पूरब टाइम्स। फ्रांस के उत्तरी भाग कॉम्पैनियन स्थित एक बुजुर्ग महिला की रसोई में एक 13वीं सदी की एक पेंटिंग लगी हुई थी. महिला ने इस पेंटिंग को अपने चूल्हे के ऊपर लगाया हुआ था. फ्रांस में इस पेंटिंग की नीलामी हुई. इस बुजुर्ग महिला की रसोई से मिली यह पेंटिंग € 24m यानि करीब 188 करोड़ रूपये में हुई. इससे पहले तक कोई भी मध्ययुगीन पेंटिंग नीलामी में इतनी मंहनी नहीं बिकी थी.

यह पेंटिंग साल 1960 से इस महिला के घर रसोई घर में टंगी हुई थी. इस घर की किसी भी व्यक्ति को इस पेंटिंग के बारे में कुछ नहीं पता था. महिला को लगता था कि यह रूस का कोई दुर्लभ चित्र है. लेकिस इसी साल के शुरूआत में जब महिला ने अपना घर बदला को उनका पुराना फर्नीचर का सामना खरीदने आए एक व्यक्ति की नजर इस पेंटिंग पर पड़ी, जिसके बाद इस महिला को पेंटिंग के बारे में पता चला.

 पेरिस के बाहर एक्टऑन नीलामी घर में इस पेंचिंग की नीलामी की गई. एक्टऑन नीलामी घर के डोमिनिक लेकोएंट ने इस बारे में कहा,1500 साल पूर्व किए गए काम के लिए यह बिक्री एक तरह का विश्व रिकॉर्ड है. यह एक अद्वितीय पेंटिंग है, जो शानदार और यादगार है. यह बिक्री हमारे सभी सपनों से परे है. पेंटिंग की अधिकांश राशि महिला को जल्द ही मिल जाएगी.

इस पेंटिंग का निर्माण चिमाबुए ने किया है. चिमाबुए को पुनर्जागरण काल के पिता के तौर पर याद किया जाता है. चिमाबुए ने ही इतालवी मास्टर गिओटो को शिक्षा दी थी. चिमाबुए को बीजान्टिन शैली के लिए जाना जाता है. उन्होंने मात्र 11 पेंटिंग बनाई थी जो लकड़ी पर बनाई गई थी. हालांकि किसी भी पेंटिंग पर चिमाबुए ने अपने हस्ताक्षर नहीं किए. बताया जा रहा है कि महिला को पेंटिंग मिली है वो चिमाबुए की ही है. यह पेंटिंग 26 सेंटीमीटर लंबी और 20 सेंटीमीटर चौड़ी है.

जिस बुजुर्ग महिला की रसोई से यह पेंटिंग मिली उसने बताया कि उसे इस बारे में बताया कि उसे नहीं पता कि यह कहां से आया था या परिवार के हाथों में कैसे आया था. पेरिस के ट्यूरिन में कला विशेषज्ञों ने अवरक्त प्रतिबिंबन का उपयोग करके इस बात की पुष्टि की कि यह टुकड़ा 1280 से बड़े डिप्टीच का हिस्सा था, जब चिमाबुए ने ईसा मसीह के आठ दृश्यों को चित्रित किया.

पूरब टाइम्स। यह दुनिया रहस्यमई चीजों से भरी हुई है जिन पर विश्वास करना कई बार कठिन लगता है। कई बार कुछ बातें पढ़ने-सुनने में अटपटी जरूर लग सकती हैं, लेकिन उनसे जुड़ा इतिहास और लोगों की मान्यताएं उन्हें एक मजबूत आधार प्रदान करती हैं। देश-दुनिया में मंदिरों की परंपरा सदियों से चली आ रही है। लोग अपनी मनोकामना पूर्ति और अपने आराध्य की पूजा हेतु मंदिर जाते हैं। परंतु आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दुनिया में वह कौन से विचित्र मंदिर हैं जिनसे जुड़ी कहानियां अचरज भरी हैं:

आपको जानकर हैरानी होगी कि दुनिया में एक ऐसा मंदिर है जिसमें गुप्तचर का चढ़ावा चढ़ाया जाता है। आपको बता दें कि थाईलैंड की बैंकॉक में स्यान नदी के किनारे चाओ माई तुप्तिम नामक एक देवी का अजब-गजब मंदिर है। थाईलैंड के लोग इस देवी को प्रजनन देवी कहते हैं। उनकी अजीब मान्यता है कि अगर भक्तजन लकड़ी, धातु अथवा रबड़ आदि से बना गुप्तचर माता को चढ़ाते हैं तो उन्हें संतान की प्राप्ति हो जाती है।

हिमाचल प्रदेश में स्थित ज्वाला देवी मंदिर रहस्यों से भरपूर माना जाता है। कहां जाता है जी जब भगवान भोलेनाथ माँ सती का जला हुआ शरीर आकाश मार्ग द्वारा ले जा रहे थे, तब माँ सती की जीभ यहाँ आकर गिर गई तथा उसी स्थान पर ज्वाला मां का मंदिर बना दिया गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि तब से लेकर आज तक मां की जीभ से निकलने वाली वह आज बुझी नहीं है।

आपने अलग-अलग मंदिरों में तरह-तरह के भगवानों की मूर्तियां तो अवश्य देखी होंगी परंतु आपको जानकर हैरानी होगी कि मनुष्यों के प्रति हमेशा से ही वफादार पशु कहलाने वाले कुत्तों का भी एक मंदिर है। कर्नाटक राज्य के रामनगर जिले के चन्नापटना गांव में स्थित एक मंदिर में कुत्तों की भी मूर्तियां हैं। 2010 में गांव के लोगों द्वारा इस मंदिर को बनवाने के पीछे का उद्देश्य कुत्तों के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना को बनाए रखना था। डॉग गॉड नामक इस मंदिर में कुत्तों की दो मूर्तियां रखी हुई हैं, जिनमें से एक मूर्ति सफेद और दूसरी भूरे रंग की है। आपको बता दें कि इन दोनों मूर्तियों को पोशाक, माला पहनाकर प्रतिदिन इनकी धूप, दीप आदि द्वारा विधिवत पूजा भी की जाती है।

यूनेस्को की विश्व धरोहर में सम्मिलित अंगकोर वाट मंदिर दक्षिण-पूर्वी एशिया की वास्तुकला का अनूठा और उत्कृष्ट उदाहरण है। भारत से लगभग 4800 किलोमीटर की दूरी पर कंबोडिया देश के अंकोर शहर में स्थित यह मंदिर विश्व का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर कहलाता है। कंबोडिया देश के लोगों के लिए भगवान विष्णु का यह मंदिर इतना मान्य है कि उनके राष्ट्रीय ध्वज पर भी इसका चिन्ह अंकित है। ऐसा कहा जाता है कि स्वयं प्रभु इंद्र ने महल के तौर पर अपने पुत्र के लिए किस मंदिर को बनवाया था। अंगकोर वाट मंदिर के चारों तरफ एक विशालकाय खाई है।

पूरब टाइम्स। हो वैन लैंग  जंगल में बेहद स्वस्थ जीवन बिताते थे, लेकिन इंसानों के बीच आने के सिर्फ 8 साल में ही लैंग को लीवर कैंसर हो गया और उसी से उनकी मौत हो गई. पिछले सोमवार (6 सितंबर) को लैंग ने दम तोड़ दिया। द सन की रिपोर्ट के अनुसार, साल 1972 में वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी बमबारी में हो वैन लैंग  की मां और अन्य दो भाइयों की की मौत हो गई थी. इसके बाद अपने छोटे से बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए लैंग के पिता जंगल में जाकर छिप गए और तब से ही बाप-बेटे जंगल में रहने लगे. उस समय लैंग की उम्र सिर्फ 2 साल थी. हो वैन लैंग  ने पिता के अलावा अपने जीवन में कभी किसी दूसरे इंसान को ही नहीं देखा था. लैंग को इंसानी सभ्यता, पहनावा, खान-पान के बारे में भी कोई जानकारी नहीं थी. वह जंगल में मिलने वाली चीजें खाकर और पेड़ों के पत्ते व छाल पहनकर रहते थे

हो वैन लैंग और उनके पिता जंगल में फल, सब्जियां, शहद और कई तरह की मांस खाते थे. उनके खाने में बंदर, चूहे, सांप, छिपकली, मेंढक, चमगादड़, पक्षियों और मछली सहित कई तरह के मांस शामिल थे इसके अलावा हो वैन लैंग ने कभी भी किसी महिला को नहीं देखा था और इसकी कोई जानकारी भी नहीं थी. इंसानों के बीच आने के बाद जब उनसे महिला के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि उनके पिता ने इसके बारे में कुछ नहीं बताया है

डू कास्टवे नाम की एक कंपनी, जो लोगों को जंगलों में रहने के ट्रिक्स सिखाती है. इंसानों के बीच आने के बाद उस कंपनी के एलवरो सेरेजो ने हो वैन लैंग से मुलाकात की थी. उन्होंने बताया कि उनकी मौत इंसानी दुनिया में आने के बाद हुए बदलाव के कारण हुई है. लैंग तैयार खाद्य पदार्थ खाने लगे थे और शराब भी पीने लगे थे. उन्होंने कहा कि मैं लैंग के जाने से बहुत दुखी हूं, लेकिन मेरे लिए उनका जाना भी एक मुक्ति है क्योंकि मुझे पता है कि वह पिछले कई महीनों से पीड़ित थे. 


साल 1932-33 में यूक्रेन में भयंकर अकाल पड़ा था. जिससे लाखों लोग भूख से तड़प-तड़क कर मर गए थे. ऐसा भी बताया जाता है कि अकाल के दौरान इतनी भूखमरी फैली गई थी कि इंसान ही इंसान का मांस खाने लगे थे. इस दौरान पुलिस ने करीब 2,500 लोगों को नरभक्षण के आरोप में गिरफ्तार किया था. यूक्रेन में ऐसी हे रहस्य हैं, जिनके बारे में शायद ही आप जानते होंगे.


विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पूरी दुनिया में शराब के खपत के मामले में यूक्रेन छठे स्थान पर है. अगर आंकड़ों में देखें तो यहां प्रति व्यक्ति हर साल लगभग 14 लीटर की दर से शराब की खपत होती है. जहां दुनिया के बाकी देशों में शादी के वक्त वेडिंग रिंग बाएं हाथ में पहनाई जाती है वहीं यूक्रेन में शादी की अंगूठी दाएं हाथ में पहनाने की परंपरा है. यूक्रेन के लोगों को संगीत से भी बहुत पसंद है. यही वजह है कि दुनिया का सबसे लंबा संगीत वाद्ययंत्र इसी देश में बनता है. यह लकड़ी से बनाए गए सींग के आकार का होता है, जिसे ट्रेंबिटा कहा जाता है.

पूरब टाइम्स। पृथ्वी पर ऐसी कई रहस्यमय जगह हैं, जिनके किस्से कहानियों को आप लोगों ने जरूर सुना होगा। वैज्ञानिक लाख जतन करने के बाद भी इनकी पहेलियों को अब तक सुलझा नहीं पाए हैं। अपने अनोखे और विचित्र पहलुओं को लेकर अक्सर ये स्थान सुर्खियों में रहते हैं। इसी कड़ी में आज हम बात करने वाले हैं अमेरिका के डेथ वैली की। कहा जाता है कि इस रहस्यमय स्थान पर भारी भरकम पत्थर सैकड़ों फीट तक अपने आप खिसककर चलते हैं। आखिर ये पत्थर अपने आप कैसे खिसकते हैं? इसे लेकर कई रिसर्च इस जगह पर हुई हैं, उसके बाद भी इसके रहस्य से पर्दा नहीं उठ सका है। इन्हीं कारणों से देश विदेश से कई पर्यटक इस रहस्यमय जगह को देखने के लिए आते हैं। ये स्थान कैलिफोर्निया के दक्षिण पूर्व में स्थित नेवादा राज्य के पास में स्थित है। ये रहस्यमय स्थान 225 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है। 

इन पत्थरों को खिसकने की वजह को लेकर वैज्ञानिकों की अलग अलग थ्योरीज हैं। साल 1972 में इस रहस्य से पर्दा उठाने के लिए वैज्ञानिकों का एक दल इस जगह पर आया। उन्होंने इन पत्थरों के ऊपर करीब 7 सालों तक अध्ययन किया। वैज्ञानिकों ने उस दौरान 317 किलोग्राम के एक पत्थर का विशेष रूप से अध्ययन किया। उनके इस रिसर्च के दौरान वह पत्थर जरा भी नहीं हिला।  

वहीं कुछ सालों के बाद जैसे ही वैज्ञानिक दोबारा उस पत्थर का पता लगाने के लिए वापस वहां पर पहुंचे, तो वो करीब 1 किलोमीटर दूर मिला। इसे देखने के बाद कई वैज्ञानिक हैरान थे। कई दूसरे वैज्ञानिकों के मुताबिक ये पत्थर तेज हवाओं के कारण खिसकते हैं। हालांकि इन पत्थरों के खिसकने की वजह को लेकर रिसर्चर्स एकमत नहीं हैं। 

कुछ लोगों का कहना है कि इन पत्थरों को पारलौकिक शक्तियां खिसकाती हैं। वहीं स्पेन की कम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स का कहना है कि ऐसा यहां की मिट्टी में मौजूद माइक्रोब्स के कारण होता है। ये माइक्रोब्स मिट्टी को चिकना बना देते हैं। इस कारण पत्थर मिट्टी पर खिसकते हैं। गौरतलब बात है कि इन पत्थरों के रहस्यमय ढंग से खिसकने को लेकर कोई ठोस निष्कर्ष अब तक नहीं निकला है। आखिर ये पत्थर अपनी जगह से क्यों खिसकते हैं? ये आज भी एक रहस्य का विषय बना हुआ है। 

पूरब टाइम्स। हर दिन देश दुनिया से हैरान करने वाली खबरें सामने आती हैं। अब इस बीच एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सभी को चौंका दिया है। यह खबर सोशल मीडिया पर तेजी वायरल हो रही है। इस खबर के बारे में जानकर आप भी दंग रह जाएंगे। दरअसल स्पेन की 19 साल की एक लड़की ने अपना डीएनए टेस्ट कराया। जब टेस्ट रिपोर्ट सामने आई, तो वह हैरत में पड़ गई। वह विश्वास नहीं कर पा रही थी कि यह रिपोर्ट उसी की है और आज तक धोखे में जी रही थी। बच्चों की अदला-बदली की इस खबर को पढ़कर हर कोई सोचने पर मजबूर हो जाएगा। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस लड़की ने नाम न जाहिर करते हुए अपने साथ घटी पूरी घटना के बारे में बताया है। लड़की की किसी बात को लेकर उसके माता-पिता से झगड़ा हो गया था। लड़ाई इतनी बढ़ गई कि लड़की ने अपना डीएनए टेस्ट कराने का फैसला ले लिया, लेकिन रिपोर्ट देखकर लड़की के होश उड़ गए। उसे पता चला कि वह जिनके साथ इतने सालों से रह रही है वह उसके पिता नहीं है। इसके बाद उसने अपनी मां के सैंपल की भी जांच कराई, तो पता चला मां भी उसकी नहीं हैं। 


रिकॉर्ड में पता चला कि एक ही दिन अस्पताल में दो लड़कियों का जन्म हुआ था। इस लड़की के जन्म के पांच घंटे पहले एक और लड़की पैदा हुई थी। दोनों बच्चियां कमजोर थीं जिसकी वजह से दोनों को इन्क्यूबेटर में रखा गया था। अस्पताल की लापरवाही की वजह से दोनों बच्चियों की अदला-बदला हो गई और वह दोनों दूसरे परिवार में चली गईं। 

विश्व के पांच बड़े रेल नेटवर्क की सूची में शामिल भारतीय रेलवे में प्रतिदिन लगभग लाखों की संख्या में लोग यात्रा करते हैं। जब कभी हम यात्रा करते हैं तो अपने गंतव्य स्थान तक पहुंचने से पहले बीच में कई स्टेशन भी पड़ते हैं। इनमें से कुछ स्टेशनों के नाम तो इतने अजीब होते हैं कि पढ़ते ही हंसी आ जाती है। आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही स्टेशनों के नाम जो अजीब होने के साथ ही आपके चेहरे पर एक मुस्कान ला सकते हैं और आप सोचेंगे कि क्या स्टेशनों के ऐसे भी नाम हो सकते हैं:







पूरब टाइम्स.अमेरिका में एक शख्स महज 7 डॉलर के चेक के लिए 3,000 डॉलर की टिप छोड़ता है क्योंकि कोरोना वायरस  की वजह से लिए रेस्तरां को बंद किया जा रहा है. कोरोना महामारी के कारण दुनियाभर के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. इस कोरोना महामारी के बीच कई चौंका देने वाले मामले सामने आए हैं. एक बार फिर बेहद हैरान कर देने वाला मामला अमेरिका से सामने आया है. वहां एक शख्स ने कोरोना के कारण रेस्टोरेंट बंद होने की खुशी में 3,000 डॉलर यानी करीब 2,22,540 रुपये की टिप दे दाली.

दरअसल, देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए एक रेस्टोरेंट के मालिक ने रेस्टोरेंट को बंद रखने का फैसला किया. इस फैसले से खुश होकर रेस्टोरेंट में बीयर पीने आए एक शख्स ने उन्हें 3,000 डॉलर यानी करीब 2,22,540 रुपये की टिप दी.नाइट टाउन नाम के रेस्टोरेंट में शख्स बीयर पीने आया था. जब शख्स ने सुना कि कोरोना वायरस के फैलते संक्रमण को देखते हुए रेस्टोरेंट को बंद कर दिया जाएगा तो वो रेस्टोरेंट के इस फैसले से बेहद खुश हुआ. उसने बीयर मंगवाई और बैठकर पीने लगा. जाते-जाते शख्स ने उस बीयर के लिए 3,000 डॉलर की टिप छोड़ी.

पूरब टाइम्स। इटली के सार्दिनिया प्रांत का पहाड़ी गांव पेरडैसडेफोगु। आबादी महज 1,740। खासियत- इनमें 8 लोगों की उम्र 100 या इससे अधिक है। यहां अधिकतर परिवारों के चार-पांच लोगों का देहांत 100 साल की उम्र पूरी करने के बाद हुआ है। इस साल 5 लोगों ने 100 की उम्र पार की। अगले 2 साल में 10 और लोग शतायु हो जाएंगे। यही कारण है कि सार्दिनिया में बर्थडे केक पर लगने वाली मोमबत्तियों की आपूर्ति लगातार बनाए रखनी पड़ती है।

इसी साल पांच बर्थडे में 500 कैंडल इस्तेमाल हो चुकी हैं। सार्दिनिया प्रांत दुनिया के उन पांच क्षेत्रों में शामिल है, जहां 100 से अधिक उम्र वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है। इस प्रांत में अभी 534 लोगों की उम्र 100 या इससे अधिक है। यानी 1 लाख आबादी में 37 लोग। इटली में उम्र का शतक लगाने वाले लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है। 2009 में देश में ऐसे लाेगों की संख्या 11,000 थी। 2019 में बढ़कर 14,456 हुई और 2021 में 17,935 हो गई।

पेरडैसडेफोगु इसलिए खास है, क्याेंकि वहां 100 पार के लोगों की संख्या राष्ट्रीय औसत से 13 गुना ज्यादा है। कैग्लियारी विश्वविद्यालय में जनसांख्यिकी की प्रो. लुइसा सालारिस कहती हैं, ‘निश्चित रूप से इसकी वजह ताजी हवा और अच्छा भोजन है। लेकिन मेरा मानना ​​​​है कि लंबी उम्र का एक कारण तनाव के प्रति उनका दृष्टिकोण भी है। ये लोग 100 साल पहले पैदा हुए थे।

उनका जीवन आसान नहीं था। उन्होंने भूख और युद्ध का सामना किया, लेकिन वे खुद को हर परिस्थिति के अनुकूल बनाने में कामयाब रहे। अगर कोई समस्या है, तो वे इसे जल्दी से हल करते हैं। पेरडैसडेफोगुु की अधिकतर आबादी बुजुर्ग है, इसका मतलब यह नहीं है कि यहां जीवन नहीं है। यहां सालभर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। किताबें भी इनकी उम्र बढ़ाने में कारगर साबित हुई हैं।

पूरब टाइम्स।  काम के दौरान शांति हम सभी को पसंद है। शांत वातावरण में मन एकाग्र रहता है, जिसके चलते किसी भी कार्य को करने में आसानी होती है। इसी कड़ी में आज हम आपको दुनिया के सबसे शांत कमरे के बारे में बताने वाले हैं। ये कमरा कहीं और नहीं बल्कि माइक्रोसॉफ्ट के ऑफिस में है। ये रूम इतना शांत है कि इसमें जाने के बाद आपको अपने खून की आवाजें सुनाई देने लगेंगी। ये जगह बाहरी शोरगुल से बिल्कुल शांत है।

इसी वजह से इस रूम को दुनिया की सबसे शांत जगहों में गिना जाता है। इसे काफी अच्छे से डिजाइन किया गया है, ताकि बाहर का हल्का सा भी शोर अंदर ना आए। यही नहीं इस कमरे के भीतर प्रवेश लेने के बाद आपको अपनी हार्ट बीट की आवाजें भी सुनाई देंगी। आप यहां पर अपनी हड्डियों की रगड़ने की आवाजें भी सुन सकते हैं। इन्हीं कारणों के चलते ये कमरा अक्सर सुर्खियों में बना रहता है। एक रिपोर्ट की मानें तो इस कमरे के भीतर चलने पर हड्डियों के रगड़ने की आवाजें सुनाई देती हैं। देर तक बैठे रहने पर दिल की धड़कन सुनाई देने लगती है। ये कमरा अमेरिका के वाशिंगटन में स्थित माइक्रोसॉफ्ट के हेडक्वार्टर में है। इस रूम के भीतर कई खास चीजों को शामिल किया गया है, जो बाहर के शोर को अंदर प्रवेश नहीं लेने देते।

इसके अलावा अंदर की आवाजों को खत्म करने के लिए कई खास उपकरण लगाए गए हैं। अगर आप इस कमरे के भीतर जरा सी भी आवाज करेंगे तो उसका बहुत तेज शोर आपको सुनाई देगा। इसी वजह से इसको एनेकोइक रूम भी कहा जाता है। इस रूम को हुंडराज गोपाल ने डिजाइन किया है। हुंडराज गोपाल के मुताबिक रूम में प्रवेश करने के बाद कान में कुछ अजीब सी आवाजें आने लगती हैं और बहरापन जैसा लगने लगता है। गोपाल कहते हैं - हमारे कान हमेशा किसी न किसी प्रकार की ध्वनि को सुनते रहते हैं। कान के पर्दों पर हमेशा हवा का दबाव बना रहता है। वहीं जब आप इस रूम में प्रवेश करते हैं, तो हवा का प्रेशर न के बराबर हो जाता है। यही एक बड़ा कारण है, जिसके चलते रूम में अंदर आने के बाद बहरापन जैसा महसूस होता है।" इस कमरे की डिजाइनिंग को काफी अनोखे अंदाज में किया गया है। इसे कंक्रीट और स्टील की छह परतों से बनाया गया है। इस रूम को बनाने में करीब डेढ़ साल से भी ज्यादा का वक्त लगा। इसी वजह से रूम का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे शांत कमरे के रूप में शामिल है।

पूरब टाइम्स। हमारे देश में तमाम नदियां बहती हैं. सारी नदियों की अपनी एक कहानी है. गंगा नदी को सबसे पवित्र नदी माना जाता है. देश में एक ऐसी नदी भी बहती है, जिसमें सदियों से पानी के साथ सोना बह रहा है. सैकड़ों साल बाद भी यह वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य बना हुआ है. आज तक इस नदी के रेत में सोने के कण मिलने की सही वजह का पता वैज्ञानिक नहीं लगा सके हैं.

झारखंड में बहने वाली यह नदी स्वर्णरेखा के नाम से जानी जाती है. इसे सोने की नदी कहा जाता है.  सैकड़ों सालों से इस नदी की रेत से सोना निकाला जा रहा है. भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि तमाम चट्टानों से होकर नदी गुजरती है. इसी दौरान घर्षण की वजह से सोने के कण इसमें घुल जाते हैं. नदी झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा ओडिशा के कुछ इलाकों में बहती है.

कुछ इलाकों में इस नदी को सुबर्ण रेखा के नाम से भी जाना जाता है. इस नदी का उद्गम रांची से करीब 16 किमी दूर से होता है. इस नदी की कुल लंबाई 474 किलोमीटर है. स्वर्ण रेखा और उसकी एक सहायक नदी भी है जिसका नाम है ‘करकरी’. इस नदी की रेत में भी सोने के कण पाए जाते हैं. कुछ लोगों का कहना है कि स्वर्ण रेखा में सोने का कण, करकरी नदी से ही बहकर पहुंचता है.  वैसे करकरी नदी की लंबाई केवल 37 किलोमीटर है. इन दोनों नदियों में सोने के कण आने का रहस्य आजतक सुलझ नहीं पाया. झारखंड में तमाड़ और सारंडा जैसी जगहों पर नदी के पानी में स्थानीय आदिवासी, रेत को छानकर सोने के कण इकट्ठा करने का काम करते हैं. इस काम में कई परिवारों की पीढ़ियां लगी हुई हैं. पुरुष, महिला और बच्चे.

नदी के रेत से सोना इकट्ठा करना घर के हर सदस्य की रूटीन का हिस्सा होता है. यहां के आदिवासी परिवारों के कई सदस्य, पानी में रेत छानकर दिनभर सोने के कण निकालने का काम करते हैं. आमतौर पर एक व्यक्ति, दिनभर काम करने के बाद सोने के एक या दो कण निकाल पाता है. नदी से सोना छानने के लिए बेहद धैर्य और मेहनत की जरूरत होती है. एक व्यक्ति एक महीने में 60-80 सोने के कण निकाल पाता है. किसी महीने में इसकी संख्या 30 से कम भी हो सकती है. ये कण चावल के दाने या उससे थोड़े बड़े होते हैं. रेत से सोने के कण छानने का काम सालभर होता है. लेकिन बाढ़ के दौरान दो महीने के लिए काम बंद करना पड़ता है. रेत सोना निकालने वालों को एक कण के बदले 80 से 100 रुपए मिलते हैं. एक आदमी सोने के कण बेचकर एक महीने में 5 से 8 हजार रुपए कमा लेता है. हालांकि बाजार में इस एक कण की कीमत करीब 300 रुपए या उससे ज्यादा होती है.

पूरब टाइम्स। वैज्ञानिकों ने जेलीफिश जैसा दिखने वाला ऐसा जीव (परजीवी) खोजा है जो सांस नहीं लेता। यह ऐसा पहला बहुकोशिकीय जीव है जिसमें माइट्रोकॉन्ड्रियल जीनोम नहीं है। यही वजह है कि जीव को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत नहीं है। लाल रुधिर कणिकाओं को छोड़कर इंसानों में मौजूद सभी कोशिशकाओं में काफी संख्या में माइट्रोकॉन्ड्रिया पाई जाती हैं जो सांस लेने की प्रक्रिया के लिए बेहद अहम हैं।


जीव पर रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने इसे फ्लोरेसेंट माइक्रोस्कोप से देखा। इस दौरान हरे रंग के न्यूक्लिस तो दिखे लेकिन माइटोकॉन्ड्र्रियल डीएनए नहीं दिखा। एक ऐसा ही मामला 2010 में सामने आया था। इटली की पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता रॉबर्टो डेनोवोरो इससे मिलता-जुलता जीव खोजा था। जब माइक्रोस्कोप से उसे देखा गया तो साफतौर पर माइटोकॉन्ड्रिया नहीं दिखाई दी लेकिन रिसर्च के दौरान पता चला कि वह गहरे समुद्र में सालों तक रह सकता है। उसकी ऊर्जा का सोर्स हाइड्रोजन सल्फाइड है। जबकि नए मिले जीव को हाइड्रोजन सल्फाइड की भी जरूरत नहीं है।

पूरब टाइम्स। पृथ्वी पर ऐसे कई जीव-जंतु हैं जो अपनी खास विषेशताओं के लिए फेमस हैं। पृथ्वी के अंदर और समुद्र के अंदर भी बहुत से ऐसे जीव रहते हैं जो खास कारणों से जाने जाते हैं। समुद्री जीवों में अभी तक आपने ऐसी मछलियों के बारे में तो सुना होगा जो रंग-बिरंगे होने के साथ ही और भी गुणों के लिए भी फेमस हैं। लेकिन समुद्र में मछलियों के अलावा एक ऐसा जीव भी पाया जाता है जो पलभर में रंग बदलने में माहिर है।


वैज्ञानिकों ने इस बात का भी पता लगाया है कि इसके पिछे क्या कारण हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि घोड़ा ऐसा खुद को बचाने के लिए करता है। खुद को बचाने के लिए माहौल के हिसाब से अपना रंग बदलना इस घोड़े की खासियत है। अधिकतर जीव दुश्मनों से खुद को बचाने के लिए ऐसा करते हैं। खतरा महसूस होने पर रंग बदलने की कला इनमें होती है। इस अद्भुत बात के साथ ही वैज्ञानिकों ने ये भी बताया कि ये प्रजाति विलुप्त होने की दिशा में है। इस प्रजाति के अब कुछ ही घोड़े बचे हैं। हांलाकि ये प्रजाति एक बार में हजारों की संख्या में बच्चे देते हैं लेकिन फिर भी इनकी तादात घटती जा रही है।

भारत का पड़ोसी देश चीन जो अपनी टेक्नोलॉजी के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। किसी भी चीज का डुप्लीकेट बनाने में चीन सबसे आगे रहता है, लेकिन आज हम चीन की किसी टेक्नोलॉजी के बारे में आपको नहीं बता रहे हैं, बल्कि हम चीन में बीमारी का इलाज करने के एक बेहद अजीबोगरीब तरीके के बारे में बता रहे हैं, जो सभी को हैरान कर रहा है। इस अजीबोगरीब तरीके में मरीज की बॉडी पर अल्कोहल छिड़कते हैं और आग लगा देते हैं।

इस अजीबोगरीब इलाज के तरीके को बांझपन, बदहजमी, कैंसर, तनाव और डिप्रेशन दूर करने के लिए अपनाया जाता है। लोगों का कहना है कि ये इलाज की तरकीब बहुत ज्यादा कारगर है, इसलिए पिछले 100 सालों से अपनाई जा रही है। आग लगाकर इलाज करने की इस अजीबोगरीब तरकीब को फायर थेरेपी कहते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस अजीबोगरीब इलाज के तरीके के वीडियो वायरल होते रहते हैं।

इस तरकीब में बीमार इंसान की कमर पर जड़ी बूटियों से बनाकर एक लेप लगाया जाता है। लेप लगाने के बाद उसे तौलिए से ढक कर उस पर पानी और अल्कोहल छिड़कते हैं। अल्कोहल छिड़कने के बाद उस पर आग लगा दी जाती है। कहते हैं कि जड़ी बूटियों का लेप और आग की गर्मी से बीमारी में राहत मिलती है।चीन में इलाज की इस तरकीब को सदियों से अपनाया जा रहा है। इसमें शरीर में ठंड और गर्मी के बीच एक तालमेल बिठाया जाता है, जिससे शरीर को ऊपर से गर्म किया जाता है ताकि अंदर की ठंडक खत्म की जा सके।