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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



नई दिल्ली. देश अभी कोरोना वायरस महामारी की भयानक दूसरी लहर से जूझ रहा है। इसका पीक कब आएगा और यह लहर कब खत्म होगी, ऐसे सवालों के बीच तीसरी लहर की आशंका भी गहरा गई है। केंद्र सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन ने बुधवार को चेताया कि तीसरी लहर आएगी, जरूर आएगी, उसे आने से कोई रोक नहीं सकता। हालांकि, साथ में उन्होंने यह भी कहा कि तीसरी लहर कब आएगी, इसके बारे में अभी पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तय है कि जरूर आएगी लिहाजा उसके लिए तैयार रहना जरूरी है। आइए समझते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर क्यों आएगी और इससे बचने के क्या उपाय है और दूसरी लहर कब खत्म होगी।

कब खत्म होगी कोरोना की दूसरी लहर?
कोरोना की मौजूदा लहर के मई मध्य में पीक पर पहुंचने की संभावना है। इस बीच कोरोना को लेकर भविष्यवाणी करने वाले केंद्र सरकार के मैथमेटिकल मॉडलिंग एक्सपर्ट प्रफेसर एम. विद्यासागर की माने तो अगले हफ्ते से कोरोना की दूसरी लहर ढलान पर होगी। इंडिया टुडे टीवी को दिए इंटरव्यू में प्रफेसर ने तो दूसरी लहर के पीक का संभावित डेट भी बताया है। प्रफेसर विद्यासागर ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर 7 मई को पीक पर हो सकती है और उसके बाद केस घटने शुरू हो सकते हैं।

तीसरी लहर दूसरी से खतरनाक होगी या कम?
कोरोना की तीसरी लहर मौजूदा लहर से खतरनाक होगी या नहीं, इस बारे में कुछ भी पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता। वैसे हमारे पास कोरोना की वैक्सीन है, अगर सही रणनीति के साथ तेजी से वैक्सीनेशन में हम कामयाब रहे तो तीसरी लहर शायद कम खतरनाक हो। वैसे 1918-20 में आए स्पैनिश फ्लू की तीसरी लहर दूसरी से कम खतरनाक लेकिन पहली लहर से बहुत ही ज्यादा खतरनाक थी। हालांकि, स्पैनिश फ्लू और कोरोना महामारी की इस तरह तुलना भी नहीं की जा सकती।

फरवरी में ही तीसरी लहर को लेकर इस एक्सपर्ट ने चेता दिया था
सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक अडवाइजर के. विजय राघवन ने तो बुधवार को तीसरी लहर के बारे में आगाह किया लेकिन CSIR के डायरेक्टर जनरल शेखर सी. मांडे ने फरवरी में ही आगाह कर दिया था कि कोरोना की तीसरी लहर को लेकर तैयार रहना चाहिए। काउंसिल ऑफ साइंटिफिक ऐंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के डीजी ने फरवरी के आखिर में राजीव गांधी सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी की तरफ से आयोजित एक डिजिटल कार्यक्रम में कोरोना की तीसरी लहर के खतरे को लेकर चेताते हुए कहा था कि अगर यह आई तो इसके नतीजे बेहद खतरनाक होंगे।

नई दिल्ली. आज 13 अप्रैल है। पिछले साल आज के दिन देशभर में कोरोना वायरस के 10 हजार से भी कम केस थे और दो लाख से भी कम नमूनों की जांच हो पाई थी। आज सालभर बाद माजरा पूरी तरह बदल चुका है। कोरोना वायरस की नई लहर ने देशभर में हड़कंप मचा रखा है। सालभर में भारत में कोरोना केस करीब 1,463 गुना बढ़ गया है। देश में पिछले 24 घंटे के दौरान कोरोना के 1,61,736 नए मामले सामने आए हैं जबकि 879 लोगों की मोत हुई है। हालांकि, अब कोरोना वैक्सीन के खिलाफ टीकाकरण अभियान चल रहा है।

बीते साल 13 अप्रैल का कुछ ऐसा था हाल
आंकड़ों पर गौर करें तो 13 अप्रैल 2020 को देशभर में कोरोना के 9,352 मरीज सामने आए थे जिनमें 980 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हो गए थे। हलांकि, वायरस ने 324 लोगों की जान ले ली थी। बीते वर्ष इसी दिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया था कि अब तक 1,86,906 सैंपल टेस्ट किए गए हैं जिनमें से 4.3% पॉजिटिव पाए गए।
करीब 11 करोड़ लोगों को लग चुका है टीका
पिछले साल आज के दिन वैक्सीन की कोई चर्चा तक नहीं थी, लेकिन सालभर बाद देश में कुल 10,85,33,085 लोगों को टीके लगाए जा चुके हैं। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) ने बताया कि देश में सोमवार तक कोरोना वायरस के लिए कुल 25,92,07,108 सैंपल टेस्ट किए गए, जिनमें से 14,00,122 सैंपल अकेले सोमवार को टेस्ट किए गए।

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट आज जाकिया जाफरी की याचिका पर सुनवाई करेगा। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को गुजरात दंगे मामले में एसआईटी की ओर से क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ जाकिया जाफरी ने यह याचिका दायर की है। जाकिया जाफरी की ओर से पेश सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कहा था कि मामले की सुनवाई अप्रैल के महीने में किसी भी दिन की जाए।


पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट की ओर से कहा गया था कि सुनवाई 13 अप्रैल को होगी और तब मामले की सुनवाई टाले जाने की गुहार पर विचार नहीं होगा। जकिया दंगों में मारे गए पूर्व सांसद एहसान जाफरी की पत्नी हैं।जाकिया जाफरी की ओर से सुनवाई टाले जाने की गुहार पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि मामले में सुनवाई कई बार टाली जा चुकी है, अगली तारीख आप लें, लेकिन सुनिश्चित करें कि सभी पक्ष मौजूद हों।

गोधरा में साबरमती एक्सप्रेस के एक डिब्बे में आग लगाए जाने में 59 लोगों के मारे जाने की घटना के ठीक एक दिन बाद 28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद की गुलबर्ग सोसाइटी में 68 लोग मारे गए थे। दंगों में मारे गए इन लोगों में पूर्व सांसद एहसान जाफरी भी शामिल थे।

घटना के करीब 10 साल बाद आठ फरवरी, 2012 को एसआईटी ने मोदी तथा 63 अन्य को क्लीन चिट देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी। क्लोजर रिपोर्ट में कहा गया था कि जांच एजेंसी को आरोपियों के खिलाफ अभियोग चलाने योग्य कोई सबूत नहीं मिला।जकिया ने एसआईटी के फैसले के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करने के गुजरात उच्च न्यायालय के पांच अक्टूबर, 2017 के आदेश को 2018 में उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी।


नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अंधविश्वास के चलन, काला जादू और अवैध व जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने की मांग की गई है। इस याचिक में केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग की गई है कि वह अवैध धर्मांतरण और काला जादू जैसे चलन पर रोक लगाए। सुप्रीम कोर्ट में बीजेपी नेता और एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय की ओर से अर्जी दाखिल कर केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय और लॉ मिनिस्ट्री के साथ-साथ देश भर के तमाम राज्यों को प्रतिवादी बनाया गया है।
एडवोकेट उपाध्याय ने एनबीटी को बताया कि सुप्रीम कोर्ट अगले हफ्ते इस अर्जी पर सुनवाई कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट दाखिल अर्जी में कहा गया है कि जबरन धर्म परिवर्तन और इसके लिए काला जादू के इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए। धर्म परिवर्तन के लिए साम, दाम, दंड, भेद का इस्तेमाल हो रहा है। देश भर में हर हफ्ते ये सब हो रहा है जिसे रोकने की जरूरत है। इस तरह के धर्मांतरण के शिकार लोग गरीब तबके से आते हैं। इनमें से ज्यादातर सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़े हैं और खासकर एससी व एसटी श्रेणी से ताल्लुक रखने वाले लोग हैं।
इस तरह से अंधविश्वास का चलन, काला जादू और अवैध धर्मांतरण का मामला संविधान के अनुच्छेद- 14, 21 और 25 का उल्लंघन करता है। ये समानता के अधिकार, जीवन के अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में दखल है। हमारा संविधान सेक्युलर है और वह संविधान का अभिन्न अंग है और उक्त धर्म परिवर्तन और काला जादू आदि का चलन सेक्युलर सिद्धांत के भी खिलाफ है। याचिका में कहा गया है कि अनुच्छेद-25 धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है। इसमें कहा गया है कि सभी नागरिक को समान अधिकार है कि वह अपने धर्म को माने और धार्मिक प्रैक्टिस करे। इसमें शर्त लगाई गई है कि पब्लिक ऑर्डर, नैतिकता और हेल्थ पर विपरीत असर नहीं होना चाहिए।
ऐसे में ये साफ है कि किसी भी तरह से धन बल का प्रयोग करके धर्मांतरण अथवा धर्म परिवर्तन नहीं किया जा सकता है। और इस तरह से देखा जाए तो अंधविश्वास और काला जादू जैसी हरकत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के दायरे में नहीं है। साथ ही याचिका में कहा गया है कि सरकार इंटरनैशनल लॉ से भी बंधा हुआ है जिसके तहत राज्य (सरकार) की ड्यूटी है कि वह प्रत्येक नागरिक को प्रोटेक्ट करे और उसके धार्मिक स्वतंत्रता को बनाए रखे। सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि सरला मुद्गल केस में दिए गए फैसले को लागू किया जाए और धर्म के नाम पर किसी को एब्यूस होने से बचाने के लिए कमिटी का गठन किया जाए।
याचिकाकर्ता ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट हेल्पलेस नहीं है और उसे अनुच्छेद-32 के तह असीम अधिकार मिले हए हैं। सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई गई है कि केंद्र और राज्यों को निर्देश दिया जाए कि वह अंधविश्वास, काला जादू और अवैध धर्म परिवर्तन को रोका जाए। धमकी, प्रलोभन और बहला फुसला कर यानी शाम दाम दंड भेद से धर्म परिवर्तन कराया जा रहा है उसे रोका जाए क्योंकि ये न सिर्फ मौलिक अधिकारों का हनन है बल्कि ये संविधान के सेक्युलर सिद्धांत के खिलाफ है।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में लाउडस्पीकर से अजान पर बवाल थमता नहीं दिख रहा है। एक दिन पहले इलाहाबाद यूनिवर्सिटी की कुलपति ने डीएम को पत्र लिखकर मस्जिद के लाउडस्पीकर से आने वाली अजान की आवाज पर आपत्ति की थी। उनकी शिकायत सुर्खियों में आने के बाद मस्जिद प्रशासन ने लाउडस्पीकर का मुंह दूसरी ओर कर दिया, इसके अलावा उसका साउंड भी कम कर दिया गया। हालांकि अब पुलिस भी मामले में हरकत में आ गई है।


आईजी प्रयागराज केपी सिंह ने गुरुवार को रेंज के चारों जिलों के डीएम और एसएसपी को एक पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र के जरिए प्रदूषण ऐक्ट और हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सख्ती से पालन कराने को भी कहा है। इसके तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पूरी तरह से लाउडस्पीकर बजाने या अन्य किसी पब्लिक अड्रेस सिस्टम के इस्तेमाल पर पाबंदी रहेगी।

उन्होंने मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में ये बात कही। देहरादून में एक कार्यक्रम में दिया गया मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत का बयान अब उनके लिए ही मुश्किल का सबब बनता गया। फटी जींस पर टिप्पणी से इंटरनेट मीडिया पर मुख्यमंत्री लगातार ट्रोल हो रहे हैं। 

मुख्यमंत्री के इस बयान को महिलाओं के पहनावों के प्रति संकीर्ण मानसिकता का द्योतक बताया जा रहा है। वहीं, उत्तराखंड में नेतृत्व परिवर्तन के बाद से मुद्दा तलाश रही कांग्रेस इसे हाथ से नहीं जाने देना चाहती। हालांकि अब उन्होंने मामले पर माफी मांग ली है।




कि वो यह सदमा बर्दाश्त नहीं कर सकी और अगले ही 17 मार्च की रात को दुपट्टे से फांसी लगा ली। चरखी दादरी के डीएसपी राम सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि रितिका राजस्थान में एक रेसलिंग टूर्नमेंट में हिस्सा लेने गई थी। उसे वहां हार झेलनी पड़ी थी। बिश्नोई ने कहा कि मौत के पीछे राजस्थान के उस टूर्नमेंट में मिली हार भी कारण हो सकता है। हालांकि इसकी जांच चल रही है।

कोलकाता। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की तारीखों के एलान के बाद आज पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम बंगाल और असम में चुनावी रैली को संबोधित करेंगे। वहीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी मिदनापुर में तीन चुनावी रैलियां करेंगी। सियासी घमासान के बीच आज नजर पीएम मोदी के भाषण पर होगी, क्योंकि ममता के तीखे तेवर के बीच आज वो बंगाल में चुनावी रैली कर रहे हैं। हर किसी की नजर इस बात पर होगी कि पीएम ममता के आरोपों पर क्या जवाब देते हैं। 

प्रधानमंत्री मोदी पुरुलिया में सुबह 11 बजे पहली रैली को संबोधित करेंगे।  ये रैली पहले 20 मार्च को होनी थी, लेकिन अब इसे दो दिन पहले आयोजित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी आज असम के करीमगंज में भी रैली करेंगे। उन्होंने ट्वीट में कहा, 18 मार्च को मैं असम में रहूंगा। करीमगंज में रैली के दौरान असम जैसे महान राज्य के लोगों के बीच उपस्थित रहने को लेकर उत्सुक हूं। पिछले पांच साल में असम की जनता ने विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन देखा है। विकास के एजेंडे को जारी रखने के लिए एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) को जनता का आशीर्वाद चाहिए।

वहीं भाजपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के लिए चार उम्मीदवारों के नामों की बुधवार को घोषणा कर दी, जिसमें अभिनेत्री पापिया अधिकारी को भी जगह मिली है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने पूर्व कांग्रेस नेता अनुपम घोष को हावड़ा की जगतबल्लवपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया है। घोष कुछ साल पहले भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा ने बताया कि अधिकारी हावड़ा जिले की उलुबेरिया दक्षिण सीट से चुनाव लड़ेंगी जबकि चंदन मंडल को दक्षिण 24 परगना जिले की बरुइपुर पूर्व और बिधान पारुई को इसी जिले की फलता सीट से प्रत्याशी बनाया गया है।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की जांच को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि अब हर राज्य को प्रतिदिन 70 फीसदी कोरोना जांच आरटी-पीसीआर के जरिए करनी होगी। अभी तक ज्यादातर राज्यों में एंटीजन जांच सबसे ज्यादा हो रही है। राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो हर दिन 49 से 50 फीसदी जांच एंटीजन किट्स के जरिए हो रही हैं। यह किट्स कीमत में सस्ती और कम समय में रिजल्ट बताने वाली होती हैं।

बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ हुई बैठक के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों को निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत प्रत्येक व्यक्ति जिसकी एंटीजन जांच होगी, उसकी आरटी-पीसीआर जांच भी करानी होगी। या फिर आरटी पीसीआर जांच से ही काम चलाया जा सकता है।
कम से कम 70 फीसदी प्रतिदिन जांच आरटी-पीसीआर के जरिए ही होगी। आरटी-पीसीआर तकनीक के जरिए करीब तीन से चार घंटे में यह पता चलता है कि व्यक्ति को कोरोना संक्रमण है अथवा नहीं।

स्वास्थ्य मंत्रालय ने आदेश दिया है कि एक संक्रमित मरीज के संपर्क में आने वाले कम से कम 30 लोगों की पहचान और उनकी जांच 72 घंटे के भीतर करनी होगी। इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अगर किसी व्यक्ति की जांच रिपोर्ट सोमवार को संक्रमित मिलती है तो बृहस्पतिवार तक उसके संपर्क में आए सभी लोगों की जांच कराना आवश्यक है। देश में मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में कोरोना का सबसे अधिक असर दिखाई दिया है। रतलाम जिले में हर दिन संक्रमित मिलने वाले रोगियों में 500 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जो अन्य किसी भी जिले की तुलना में सबसे गंभीर स्थिति है।

नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को आधार कार्ड से लिंक ना होने के कारण केंद्र द्वारा लगभग तीन करोड़ राशन कार्डों को रद्द करने को बहुत गंभीर करार दिया है। कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और सभी राज्यों से जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यन की पीठ ने कहा कि इस मामले को प्रतिकूल नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि यह बहुत गंभीर मामला है।


याचिकाकर्ता कोइली देवी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्विस ने कहा कि याचिका बड़े मुद्दे से संबंधित है। गोंसाल्विस ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि केंद्र ने लगभग तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं। इस पर पीठ ने कहा कि वह किसी और दिन इस मामले की सुनवाई करेगी क्योंकि यह आपका माना है कि केंद्र सरकार ने राशन कार्ड रद्द कर दिया है।


अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने कहा कि गोंसाल्विस द्वारा गलत बयान दिया गया है कि केंद्र ने राशन कार्ड रद्द कर दिया है। इस पर पीठ ने कहा कि हम आपसे (केंद्र) आधार मुद्दे के कारण जवाब देने के लिए कह रहे हैं। यह एक प्रतिकूल याचिका नहीं है। लेखी ने कहा कि मामले में पहले ही नोटिस जारी किया जा चुका है और केंद्र की प्रतिकरिया रिकॉर्ड पर है।


9 दिसंबर, 2019 को शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों से उन लोगों की भुखमरी से मौत के आरोपों पर प्रतिक्रिया मांगी थी जो वैध आधार कार्ड नहीं होने के कारण अपने राशन आपूर्ति से वंचित थे। केंद्र ने अपने जवाब में कहा था कि ये मौतें भुखमरी के कारण नहीं हुई थीं। वैध आधार कार्ड न होने के कारण किसी को भी भोजन से वंचित नहीं किया गया था।


झारखंड में सिमडेगा जिले की रहने वाली कोइली देवी की ओर से यह जनहित याचिका दायर की गई है। कोइली देवी की 11 वर्षीय बेटी संतोषी की 28 सितंबर, 2018 को भुखमरी से मृत्यु हो गई। संतोषी की बहन गुड़िया भी मामले में संयुक्त याचिकाकर्ता हैं। याचिका में कहा गया है कि स्थानीय अधिकारियों ने उसके परिवार का राशन कार्ड रद्द कर दिया था क्योंकि वे इसे आधार से जोड़ने में विफल रहे थे। इसमें कहा गया है कि परिवार को मार्च 2017 से राशन मिलना बंद हो गया था।

मुंबई। नीता अंबानी बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में विजिटिंग प्रोफेसर नहीं बनने जा रही हैं। रिलायंस इंड्रस्टीज लिमिटेड के प्रवक्‍ता ने इस खबर को झूठा बताया है। बता दें कि विश्वविद्यालय में नीता अंबानी को विजटिंग प्रोफेसर बनाए जाने के खिलाफ मंगलवार को छात्र वीसी आवास के बाहर धरने पर बैठ गए थे। विवाद को बढ़ता देख, अब रिलायंस इंड्रस्टीज की ओर से मामले में सफाई दी है।


रिलायंस इंड्रस्टीज के प्रवक्‍ता ने कहा, नीता अंबानी को बीएचयू में विजिटिंग प्रोफेसर बनाए जाने की खबर झूठी हैं। उन्‍हें बीएचयू की ओर से ऐसा कोई प्रस्‍ताव नहीं मिला है। दअरसल, बीते दिनों रिलायंस फाउंडेशन की अध्यक्ष और रिलायंस इंडस्ट्रीज की कार्यकारी निदेशक नीता अंबानी को बीएचयू में महिला अध्ययन का पाठ पढ़ाने का दायित्‍व देने की तैयारी शुरू की गई थी। ऐसी खबर भी समने आई कि नीता अंबानी को बीएचयू के महिला अध्ययन और विकास केंद्र में विजिटिंग प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव भी भेजा जा चुका है।


बीएचयू के सामाजिक विज्ञान संकाय की ओर से 12 मार्च को यह प्रस्ताव दिया गया। उन्हें बनारस सहित पूर्वांचल में महिलाओं का जीवनस्तर सुधारने के लिए बीएचयू में शिक्षण प्रशिक्षण से जुडऩे का आग्रह किया गया था। हालांकि, रिलायंस इंडस्‍ट्री की ओर से अब यह साफ कर दिया गया है कि नीता अंबानी को बीएचयू की तरफ से ऐसा कोई प्रस्‍ताव नहीं मिला है।


दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए मुख्यमंत्रियों के साथ रणनीति बना रहे हैं। इस मीटिंग में कई राज्यों के मुख्यमंत्री भाग ले रहे हैं। कोरोना के दोबारा संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आज मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना प्रभावित राज्यों में इस वायरस से निपटने की कार्ययोजना पर भी चर्चा करेंगे। 


खास बात ये है कि इस बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल नहीं शामिल हुए हैं। ममता बनर्जी ने इस बैठक में शामिल ना होने के लिए राजनीतिक रैली में व्यस्त रहना बताया है। गौरतलब है कि देश के कई राज्यों में कोरोना का संक्रमण फिर से पांव पसार रहा है।


महाराष्ट्र में कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना के दोबारा बढ़ते संक्रमण को देखते हुए केंद्र सरकार काफी गंभीर है। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी की मुख्यमंत्रियों के साथ होने जा रही यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। प्रधानमंत्री राज्यों के टीका करण की प्रगति और इसमें आने वाली दिक्कतों की भी आज की बैठक में समीक्षा करेंगे। इस बैठक में कई अहम फैसले भी लिए जा सकते हैं।

नई दिल्ली। देश में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों ने केंद्र सरकार की टेंशन बढ़ा दी है। आगे की रणनीति पर चर्चा के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्रियों की बैठक बुलाई है। पीएम मोदी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत करते हुए कहा कि हमें हर हाल में कोरोना महामारी को हराना होगा और इसके लिए मांस्क को लेकर गंभीरता अभी भी बहुत जरूरी है। इस बैठक में पीएम मोदी ने देश में कोरोना की स्थिति का जायजा लिया और दो महीने पहले शुरू हुए देश के टीकाकरण अभियान की प्रगति का आकलन किया।


मुख्यमंत्रियों संग बैठक में पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के खिलाफ देश की लड़ाई को एक साल से ज्यादा हो रहा है। भारत के लोगों ने कोरोना का जिस प्रकार सामना हो रहा है, उसे लोग उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं। आज देश में 96 प्रतिशत से ज्यादा मामले रिकवर हो चुके हैं। मृत्यु दर में भी भारत सबसे कम दर वाले देशों में है। कुछ राज्यों में केसों की संख्या बढ़ रही है। देश के 70 जिलों में ये वृद्धि 150 प्रतिशत से ज्यादा है। उन्होंने कहा कि हमें कोरोना की इस उभरती हुई दूसरी लहर को तुरंत रोकना होगा। इसके लिए हमें त्वरित और निर्णायक कदम उठाने होंगे।


पीएम ने कहा कि कोरोना की लड़ाई में हम आज जहां तक पहुंचे हैं, उससे आया आत्मविश्वास, लापरवाही में नहीं बदलना चाहिए। हमें जनता को पैनिक मोड में भी नहीं लाना है और परेशानी से मुक्ति भी दिलानी है। टेस्ट, ट्रैक और ट्रीट को लेकर भी हमें उतनी ही गंभीरता की जरूरत है जैसे कि हम पिछले एक साल से करते आ रहे हैं। हर संक्रमित व्यक्ति के कॉन्टैक्ट को कम से कम समय में ट्रैक करना और आरटी-पीसीआर टेस्ट रेट 70 प्रतिशत से ऊपर रखना बहुत अहम है।

नई दिल्ली। पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता दिलीप गांधी की दिल्ली के निजी अस्पताल में निधन हो गया है। दिलीप गांधी की कोरोना जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद से उनका इलाज चल रहा था। बता दें कि दिलीप गांधी पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार में मंत्री रह चुके थे। सूत्रों ने बताया कि हाल ही में वह कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए 

दिल्ली। देश में एक बार फिर से कोरोना वायरस तेजी से पांव पसारने लगा है। इसकी रोकथाम की रणनीति बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। प्रधानमंत्री ये बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लेंगे। इस बैठक में महाराष्ट्र, केरल, तमिलनाडु, गुजरात, पंजाब, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री शामिल हो सकते हैं। 


आज दोपहर साढ़े 12 बजे मुख्यमंत्रियों के साथ प्रधानमंत्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक करेंगे। गौरतलब है कि देश में कोरोना वायरस के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में कोरोना वायरस तेजी से अपने पांव पसार रहा है। प्रधानमंत्री इस बैठक में कोरोना से निपटने की रणनीति पर मुख्यमंत्रियों के साथ चर्चा करेंगे।


वह कोरोना टीकाकरण को लेकर भी मुख्यमंत्रियों से चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री राज्यों के टीकाकरण की प्रगति का जायजा लेंगे और इसमें आने वाली दिक्कतों की भी समीक्षा करेंगे। इस बैठक में कई अहम फैसले भी लिए जा सकते हैं। इस बैठक म़े स्वास्थ्य मंत्रालय के अलावा आईसीएमआर और अन्य एजेंसियों के शीर्ष अधिकारी भी बैठक में मौजूद रह सकते हैं।

नई दिल्ली। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने आज जोर देकर कहा कि भारतीय रेलवे का कभी भी निजीकरण नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कोई यह नहीं कहता कि सड़क पर सिर्फ सरकारी गाड़ियां ही चलेंगी क्योंकि प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह की गाड़ियां आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। रेलवे के कामकाज को सुचारु बनाने के लिए निजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाएगा।


रेलवे के लिए अनुदान मांग पर लोकसभा में हुई बहस का जवाब देते हुए गोयल ने कहा कि हम पर रेलवे के निजीकरण का आरोप लग रहा है। देश की प्रगति तभी होगी जब सरकारी और निजी सेक्टर मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे का कभी भी निजीकरण नहीं होगा। यह हर भारतीय की संपत्ति है और रहेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे सरकार के हाथों में ही रहेगी। रेल मंत्री ने कहा कि पिछले 2 साल में रेल दुर्घटना में किसी भी यात्री की जान नहीं गई है। यात्रियों की सुरक्षा के लिए रेलवे काफी ध्यान दे रही है।


गोयल ने कहा कि मोदी सरकार ने वित्त वर्ष 2021-22 में रेलवे में निवेश बढ़ाकर 2.15 लाख करोड़ रुपये कर दिया है जो 2019-20 में 1.5 लाख करोड़ रुपये था। रेल मंत्री ने कहा, हमारा जोर यात्रियों की सुरक्षा पर है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले दो साल में किसी भी यात्री की जान नहीं गई है। ट्रेन दुर्घटना के कारण आखिरी मौत मार्च 2019 में हुई थी।


महाराष्ट्र सरकार ने संक्रमण को देखते हुए फिर सख्ती बरतते हुए पुणे, नागपुर और औरंगाबाद ने नाइट कर्फ्यू लगाया गया है। गुजरात सरकार ने भी अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में नाइट कर्फ्यू की घोषणा की है। वहीं, पंजाब सरकार ने 12वीं और 10वीं कक्षाओं की बोर्ड परीक्षाएं टालने का फैसला किया है। जबकि मध्य प्रदेश में नाइट कर्फ्यू पर आज फैसला आ सकता है। देश में बढ़ते मामलों को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को मुख्‍यमंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री कह चुके हैं कि कोरोना से बचाव के उपायों के प्रति लापरवाही से ये मामले बढ़ रहे हैं।

गुजरात में करोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाया है 17 मार्च से 31 मार्च के बीच चार महानगरों- अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लागू करने का फैसला किया है। 16 मार्च रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक इन चार महानगरों में प्री-नाइट कर्फ्यू सिस्टम बना रहेगा। इससे पहले अहमदाबाद में कोरोना के मामलों के मद्देनजर, गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन ने भारत- इंग्लैंड टी 20 अंतर्राष्ट्रीय मैचों का आयोजन बिना दर्शकों के करने का फैसल किया है।

नई दिल्ली। कोरोना वायरस की महामारी फैले एक साल से ज्यादा हो गया। वैक्सीन बना ली गई और व्यापक अभियान चलाकर करोड़ों लोगों को दी भी जाने लगी। जब धीरे-धीरे आम जिंदगियां पटरी पर आने लगनी चाहिए थीं, एक बार फिर यह महामारी सिर उठाने लगी है। हालात कुछ यूं बिगड़ रहे हैं कि कई जगहों पर फिर से लॉकडाउन लगाने की नौबत आ गई है।

महाराष्ट्र के कई शहरों में लॉकडाउन और नाइट कर्फ्यू का सहारा लिया जा रहा है। पंजाब के आठ जिलों में भी नाइट कर्फ्यू लगा दिया गया है। राज्य और जिला प्रशासन कड़े नियम लागू कर रहे हैं और वैक्सिनेशन को तेज करने की जरूरत पता लगने लगी है। शायद यही कारण हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ एक बैठक बुलाई है जिसमें हालात पर चर्चा की जाएगी।
देश में पिछले कुछ हफ्तों में सबसे ज्यादा हालात महाराष्ट्र में बुगड़ रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में देश में सामने आए कुल मामलों में से 61% महाराष्ट्र के हैं। सोमवार को देश भर में 24,458 मामले सामने आए जो रविवार को मिले 26,386 मरीजों से कुछ कम रहा। हालांकि, आमतौर पर सोमवार को नए मामलों की संख्या में गिरावट देखी जाती है जो इस सोमवार नहीं हुआ। पिछले हफ्ते सोमवार को इस हफ्ते से 9000 कम केस सामने आए थे।

नई दिल्‍ली। आयुर्वेद से स्नातकोत्तर करने वाले डॉक्टरों को सर्जरी करने की इजाजत देने वाले आदेश के खिलाफ आईएमए की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मालूम हो कि भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद ने आयुर्वेद से मास्‍टर डिग्री लेने वाले डॉक्टरों को सर्जरी करने की इजाजत दी थी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने भारतीय चिकित्सा परिषद के इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

मुख्‍य न्यायाधीश एसए बोबडे न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामसुब्रमण्यन की पीठ ने आयुष मंत्रालय सीसीआईएम और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके आयुर्वेद के डॉक्टरों को सर्जरी करने की अनुमति देने वाले नियमों को खारिज या रद करने की गुजारिश की है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का कहना है कि राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को पाठ्यक्रम में एलोपैथी को शामिल करने का अधिकार नहीं है। भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद की अधिसूचना के तहत, भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (आयुर्वेद शिक्षा स्नात्कोत्तर) नियम 2016 में संशोधन किया गया है। इसमें 39 सामान्य सर्जरियों और आंख, कान, नाक, गले से जुड़ी 19 सर्जरियों को शामिल किया गया है।