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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



दुर्ग। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के अंतर्गत हर आंगनबाड़ी में कुपोषित बच्चों का चिन्हांकन कर इनके पोषण पर विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इसमें यह विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि बच्चे पौष्टिक आहार समय पर लें। साथ ही इसके लिए अभिभावकों की भी विशेष रूप से काउंसिलिंग की जा रही है। परियोजना अधिकारी जेके साव ने बताया कि इसके लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा गृह भेंट के माध्यम से विशेष प्रयास किया जा रहा है। साव ने इसका उदाहरण देते हुए बताया कि मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान अन्तर्गत परिक्षेत्र सिकोला के ग्राम तुलसी के आंगनबाड़ी केन्द्र तुलसी 03 में दर्ज निशा नामक बच्ची दर्ज है।

निशा की माता का नाम कुंती और पिता का नाम संतोष है। जिसकी जन्मतिथि 26 सितंबर 2015 है। यह बच्ची मध्यम कुपोषित की अवस्था में योजना अन्तर्गत पंजीकृत की गई। सितंबर माह में निशा का वजन 12.09 और उंचाई 99 से.मी. था। यह बच्ची नियमित रूप से आंगनबाड़ी आती है, केन्द्र में दिए जाने वाले पोषण आहार का नाश्ता, गर्म भोजन का सेवन लगातार कर रही है, साथ में अतिरिक्त रूप से दिए जाने वाले मूंगफली, सोया चिक्की, फल का भी लाभ ले रही है। समय-समय पर कार्यकर्ता द्वारा गृह भ्रमण देकर पालकों को समझाईश दी जा रही है। 

साव ने बताया कि पालक बैठक चर्चा में निशा के पालकों से चर्चा की गई, बाहर के आहार को बंद कर घर का बना पौष्टिक खाना खिलाने संबंधी सलाह दी जाती रही। कुपोषित बच्ची को नियमित फल, सब्जी और दूध, रेडी टू फूड से बने व्यंजन खिलाने संबंधी प्रदर्शन पालकों को बताया गया। जिससे पालकों में व्यवहार परिवर्तन होने लगा। बच्ची ने घर पर शाम का खाना भी शुरू किया फलस्वरूप बच्ची की सेहत में सुधार आया। कार्यकर्ता एवं मेरे द्वारा पौष्टिक लडडू का सेवन भी बच्ची ने नियमित रूप से किया फलत: वजन जनवरी माह में 13.450 कि.ग्रा. हो गया और निशा वर्तमान में सामान्य श्रेणी में आ गई है

दुर्ग। छत्तीसगढ उच्च न्यायालय बिलासपुर के दिशा निर्देश के अनुसार एवम् जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग जी.के.मिश्रा के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामजीवन देवॉगन, शुभ्रा पचैरी, अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट, दुर्ग, गरिमा शर्मा, चतुर्थ अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग के द्वारा न्यायालयीन प्रकरण की सुनवाईं वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से की गई । वीडियो कान्फ्रेसिंग के माध्यम से की गई।

जमानत प्रकरण की सुनवाई में पैरवी किये जाने वाले अधिवक्ता अपने आफिस से मोबाईल के माध्यम से जुडे हुए थे, शासन की ओर से शासकीय अधिवक्ता भी अपने मोबाईल के माध्यम से जुडे हुए थे, दोनों पक्षों के तर्क सुना गया और सोशल डिसटेसिंग का पालन करते हुए जमानत आवेदन की सुनवाई पूर्ण कर निराकरण किया गया। वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की जा रही सुनवाई में आपरेटिंग असिस्टेंट प्रमोद अचिंन्त उपस्थित रहे।

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र अंतर्गत अकाश गंगा सब्जी मंडी में सुबह 3:30 बजे से निगम के अधिकारी/कर्मचारी सुरक्षा गार्ड और पुलिस प्रशासन व्यवस्था बनाने के लिए मौजूद थे। वाहनों के लिए अलग से पार्किंग की व्यवस्था की गई है, आकाशगंगा सब्जी मंडी में चारों ओर से आवाजाही रहती है जिसको देखते हुए प्रवेश क्षेत्र में निगम के सुरक्षा गार्ड एवं व्यापारी मौजूद थे, थोक मंडी में सब्जी लेने आने वाले वाहनों को प्रवेश नहीं दिया गया बल्कि वाहनों को पार्किंग स्थल पर लगाने टीम मुस्तैद रही। 

आकाशगंगा सब्जी मंडी में व्यवस्था बनाने के लिए आवाजाही बाधित करने वालों के शेड एवं सामग्रियों को तोडफोड़ दस्ता की टीम द्वारा हटाया गया जुर्माना भी लिया गया था। 2 लोगों से आवाजाही बाधित करने एवं सड़क पर ही सब्जी का फुटकर व्यवसाय करने और सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं करने पर मोहन साहू और सुरेश सिंह प्रत्येक से 5000 रुपए जुर्माना वसूला किया गया। उपायुक्त अशोक द्विवेदी एवं जोन आयुक्त अमिताभ शर्मा तोडफोड़ दस्ता की टीम सुबह से आकाशगंगा सब्जी बाजार में सोशल डिस्टेंस मेंटेन कराने और अन्य व्यवस्था के तहत निगरानी रखने मंडी में मौजूद रहे। मास्क नहीं लगाने वाले व्यक्तियों को पुलिस प्रशासन एवं निगम की टीम ने उठक बैठक करा कर वापस घर भेजा और मास्क पहनकर ही घर से बाहर निकलने की हिदायत दी। 

व्यवस्था बनाने पुलिस प्रशासन एवं ट्रैफिक पुलिस मौजूद रहे वाहनों की पार्किंग के लिए व्यापारियों को समझाइश देते रहे। स्पीकर के माध्यम से सोशल डिस्टेंस मेंटेन करने और संदेश देने का कार्य निगम एवं पुलिस प्रशासन द्वारा किया जाता रहा। सब्जी के फुटकर व्यवसायी आकाशगंगा सब्जी मार्केट में विक्रय नहीं करेंगे इनके लिए पृथक से अन्य स्थल व्यवस्था की गई है ऐसे फुटकर विक्रेता निर्धारित किए गए स्थान पर ही सब्जी बेच सकते हैं। आकाशगंगा सब्जी मंडी संघ द्वारा बेहतर व्यवस्था बनाने के लिए सुबह 4:00 से 7:00 बजे तक ही होलसेल मार्केट लगाने का निर्णय किया गया है जिससे निर्धारित समय पश्चात कोई भी सब्जी व्यापारी आकाशगंगा सब्जी मंडी में विक्रय नहीं कर पाएगा।

पूरब  टाइम्स दुर्ग। शहर में तीन थानों के अलावा पद्मनाभपुर चौकी निगम क्षेत्र में स्थापित है। जिनमें इस क्षेत्र की बढ़ती हुई आबादी को देखते हुए पद्मनाभपुर चौकी की स्थापना अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा के कार्यकाल में की गई थी। अब 30 वर्षों में पद्मनाभपुर के आगे भी भौगोलिक क्षेत्र के विस्तार, आवासीय कालोनी निर्माण व जनसंख्या वृद्धि को देखते हुए जनता की वर्षों पुरानी मांग पर विधायक अरुण वोरा के द्वारा लगातार प्रयास किए जाने से चौकी अब थाने में अपग्रडे होने जा रही है। 
लॉकडाउन के तहत मास्क व सेनेटाइजर उपलब्ध करवाते हुए चौकी प्रभारी वाईआर देवांगन व पुलिस स्टाफ  द्वारा निभाई जा रही कोरोना योद्धा की भूमिका की सराहना करते हुए विधायक वोरा ने कहा कि डेढ़ लाख आबादी वाले क्षेत्र में वार्ड 39 से लेकर वार्ड 54 तक के कुल 15 वार्ड के साथ ही ग्राम धनोरा व हनोदा क्षेत्र में लगातार मॉनिटरिंग करते हुए बाहर से आने वालों की जानकारी एकत्र करने व लोगों से लॉक डाउन का पालन करवाने में चौकी का अहम योगदान है। क्षेत्र में जनसंख्या के बढ़ते दबाव के कारण चौकी को थाने में अपग्रेड करने की मांग स्वीकृत होने के बाद अब 50 लाख की लागत से सर्व सुविधायुक्त थाने का निर्माण हो सकेगा जिससे क्षेत्र में अपराध नियंत्रण में कमी आने के साथ लोग सुरक्षित महसूस करेंगे। चौकी में मास्क वितरण के दौरान पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेश शर्मा, प्रकाश गीते, राजकुमार साहू, अंशुल पांडेय मौजूद थे। 

पूरब टाइम्स रायपुर। देशभर में फंसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों के घर वापसी के लिए विशेष ट्रेन की मांग पर  भाजपा सांसदों के चुप्पी पर कांग्रेस ने सवाल खड़े किए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहां की भाजपा के राज्यसभा सदस्य  और नौ सांसद सिर्फ बातों के धनी हैं  लेकिन धरातल पर कार्य करने में हमेशा इनका रवैया छत्तीसगढ़ विरोधी रहा है।  वर्तमान में  छत्तीसगढ़ के मजदूरों को घर वापस लाने  विशेष ट्रेन की मांग पर भाजपा सांसदों की चुप्पी इनके गरीब दिहाड़ी मजदूर रोज कमाने खाने वाले के विरोध की मानसिकता को प्रदर्शित कर रहा है।मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने देशभर में फंसे छत्तीसगढ़ के मजदूरों तीर्थयात्रियों छात्रों की सकुशल घर वापसी के लिए प्रधानमंत्री से स्पेशल ट्रेन चलाने की मांग की। मुख्यमंत्री के मांग के समर्थन में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्यों एवं सांसद ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर तत्काल विशेष ट्रेन चलाने की मांग की।  कोविड 19 के कारण उपजे विकट परिस्थियों में भी भाजपा सांसदों का रवैया हमेशा की तरह छत्तीसगढ़ विरोधी ही है।पूर्व में चाहे किसानों के धान खरीदी का मामला हो चाहे छत्तीसगढ़ को मिलने वाली केंद्र सरकार की योजनाओं के पैसे पर रोक का मसला हो वर्तमान में कोरोना महामारी संकट के दौरान छत्तीसगढ़ के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा केंद्र सरकार से 30 हजार करोड़ की राहत पैकेज की मांग हो भाजपा सांसद छत्तीसगढ़ के हित की बातों केंद्र के सरकार के पास रखने में असमर्थ दिखते रहे हैं।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि भाजपा सांसदों को वास्तविक में छत्तीसगढ़ के तीर्थयात्री मजदूर छात्रों की चिंता है तो वे तत्काल केंद्र सरकार से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मांग पर विशेष ट्रेन चलाने आग्रह करें।छत्तीसगढ़ के बाहर लॉक डाउन से फंसे तीर्थयात्रियों मजदूरों छात्रों को भाजपा शासित राज्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा शासित राज्यों में उनका देखभाल रहने खाने का इंतजाम ठीक से नहीं हो पा रहा है मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के बाहर फंसे मजदूरों तीर्थ यात्रियों छात्रों के रहने खाने का प्रबंध किया है।

पूरब टाइम्स दुर्ग। लाकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों के कई नागरिक दुर्ग-भिलाई में फंसे हैं। उनके साथ बड़ी दिक्कत यह है कि उनके डाक्टरों द्वारा लिखी कुछ दवाएं यहां नहीं मिलती। अब लाकडाउन में मेडिकल स्टोर दर मेडिकल स्टोर भटकना संभव नहीं। उन लोगों के लिए यह और भी मुश्किल है जो बीमार हैं और अपनी दवा के लिए भटकना पड़ रहा है। दुर्ग-भिलाई में ऐसे लोगों के लिए हर्षित ताम्रकार द्वारा शुरू किया गया स्टार्टअप मेडीशटर एप बहुत उपयोगी साबित हुआ है। लाकडाउन के पहले इनके यूजर दुर्ग-भिलाई में 200 थे। अब इनके यूजर की संख्या साढ़े छह सौ हो गई है। हर्षित ने रिसाली का केस बताया। यहां कोलकाता से नीलांजना आई हुई थीं। उन्हें कोलकाता में डाक्टर ने हाई रिच प्रोटीन पाउडर लिखा था। यहां यह नहीं मिला। उन्होंने मेडीशटर एप से संपर्क किया। मेडीशटर एप ने इसे पुणे से मंगवाया और दो दिन में इसकी डिलीवरी हो गई। आज का भिलाई का वाकया कुछ यूँ हैं कि मेडीशटर में आज सुबह-सुबह एक यूजर ने दवा की पर्ची डाली। जब डिलीवरी बाय दवा लेकर गया तो यूजर ने बताया कि पति-पत्नी दोनों दिव्यांग हैं और उन्हें दवा लेने जाने में बड़ी परेशानी होती है। किसी ने मेडीशटर एप के बारे में बताया तो इसे इंस्टाल कर लिया। इसमें अपने मेडिकल स्टोर पर क्लिक किया और दवा की मात्रा लिख दी। दो घंटे के भीतर दवा हमको मिल गई। हर्षित ने बताया कि मेडिकल दवाओं की डिलीवरी के क्षेत्र में देश भर में बडेा स्टार्टअप शुरू हुए हैं लेकिन लोकल स्टार्टअप होने की कई खूबियां हैं जैसाकि हमारा यहां 30 मेडिकल स्टोर्स से टाइअप है। पेशेंट मेडिकल स्टोर क्लिक कर और दवा की जानकारी डालकर आर्डर कर सकते हैं। यदि मेडिकल स्टोर में दवा नहीं होती है तो हम उसे अरेंज करते हैं अथवा पेशेंट किसी दूसरे मेडिकल स्टोर में जाकर दवा के आप्शन के लिए क्लिक करता है। यदि दवा भिलाई-दुर्ग में  उपलब्ध नहीं  हो तो हम रायपुर से अरेंज करते हैं या महानगरों में डिलीवरी से दवा मंगाते हैं। हर्षित ने बताया कि इस माडल में मेडिकल स्टोर्स को भी लाभ है। यदि उनके स्टोर में कुछ दवा नहीं होती है तो भी हम थोड़ी देर में उन तक दवा अरेंज कर देते हैं। इससे दवा विक्रेता को यह लाभ होता है कि ग्राहक का भरोसा उसके लिए मजबूत हो जाता है। हर्षित ने बताया कि अलग-अलग सेगमेंट हैं जिसमें हम डिस्काउंट भी उपलब्ध कराते हैं उदाहरण के लिए तालपुरी के एक नागरिक ने दो-तीन दिन पहले बीपी मानिटर लिया। इसमें उन्हें काफी डिस्काउंट मिला। भिलाई के अरुण  ग्रोवर ने बताया कि वे इस एप के यूजर हैं। काफी कम समय में दवा उन्हें मिल जाती है। हर्षित ने बताया कि हमारे एप से सबसे ज्यादा उन युवाओं को लाभ पहुंचा है जिन्हें रोजगार के लिए महानगरों में रहना पड़ता है। उनके अभिभावक यहीं पर हैं। वे एप के माध्यम से हमें आर्डर दे देते हैं और हम सप्लाई कर देते हैं।

दुर्ग।  राशन कार्डधारियों के लिए राहत भरी खबर है। जिले के 2 लाख 98 हजार बीपीएल राशन कार्डधारियों को मई में चावल के साथ-साथ चना भी मिलेगा। प्रदेश से दुर्ग जिले के उपभोक्ताओं के लिए 2708 क्विंटल चना भेजा गया है। इसका वितरण एक मई से लोगों को होने वाला है। सरकार ने कोरोना संक्रमण की वजह से लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए चना वितरण करने की घोषणा की है। 
प्रत्येक राशन कार्ड में एक किलो चना हितग्राहियों को दिए जाएंगे। तीन महीने तक ही चना वितरण होगा। आगे सरकार इस योजना को चालू रखेगी या नहीं यह निर्णय बाद में लिया जाएगा। पहली बार दुर्ग जिले के लोगों को भी चना वितरण होगा। यह योजना वनांचल क्षेत्रों में ही सरकार चला रही है। विभागीय सूत्रों के हिसाब से चने का भंडारण आधा हो पाया है।

भिलाई। पार्षदों को अपनी निधि से राशन प्रदाय करने खोजने पर भी हितग्राही नहीं मिल रहे हैं। कोरोना वायरस का संक्रमण रोकने घोषित लॉकडाउन में ज्यादा से ज्यादा लोगों को मदद करने पार्षदों का इरादा नियमों में उलझ गया है। वोट बैंक या अन्य किसी कारण से किसी को भी उपकृत करने पार्षदों की मंशा पूरी नहीं हो सकेगी। कोरोना महामारी के चलते घोषित लॉकडाउन ने अनेक लोगों के कामकाज पर प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसी स्थिति में लोगों को राशन का किट प्रदान करने पार्षदों को अपनी निधि का उपयोग करने की छूट सरकार ने प्रदान कर दी है। 

लेकिन इसके लिए जो नियम लागू किए गए हैं वह ऐसा है कि पार्षदों को हितग्राही खोजने पर बड़ी मुश्किल से एकांत-दो मिल रहे हैं। नगरीय प्रशासन विकास विभाग की ओर से निगम व पालिका के पार्षदों को प्रतिवर्ष विकास के लिए एक निश्चित राशि प्रदन की जाती है। कोरोना संक्रमण रोकने लॉकडाउन घोषित होते ही पार्षदों को अपनी निधि से वार्ड में जरुरतमंद परिवारों को राशन का किट प्रदान करने की छूट दे दी गई है। इस आधार पर नगर निगमों के पाषदों और एल्डरमेनों ने अपनी निधि से राशन खरीदी का प्रस्ताव दे दिया है। लेकिन इसके लिए जो नियम लागू किए गए हैं. उससे पार्षदों का पसीना छूट रहा है। 

नियमों के तहत शासकीय सेवा, शासकीय उपक्रम संस्थान की सेवा , किसी भी तरह के पेंशन भोगी, एपीएल और बीपीएल राशन कार्डधारी परिवार को पार्षद निधि से राशन का किट प्रदान नहीं किया जा सकता। ऐसे परिवारों को भी पात्रता नहीं मिलेगी, जिन्हें कोरोना के चलते लॉकडाउन के दौरान किसी संस्था, एनजीओ या अन्य किसी के द्वारा राशन का किट उपलब्ध कराया जा चुका है। अन्य प्रदेश के मजदूर, विद्यार्थी जो यहां ऐसे हो और कोई व्यवस्था नहीं हो वे स्वमेव पात्र होंगे। यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि भिलाई-दुर्ग के प्राय: सभी निकायों में ज्यादातर लोगों के पास बीपीएल श्रेणी का राशन कार्ड है। प्रदेश में कांग्रेस की सरकार ने अपने चुनावी वायदे के अनुरुप एपीएल राशन कार्ड से भी गैर बीपीएल परिवारों को सस्ते खाद्यान्न देना प्रारंभ कर दिया है।

 इस तरह से हर वार्ड में बिना राशन कार्ड वालों की संख्या गिनती की रह गई है। इसमें से भी कई परिवार ऐसे होंगे जो शासकीय सेवा या पेंशनभोगी होने की वजह से पार्षद निधि से मिलने वाले राशन किट की पात्रता से स्वमेव वंचित हो जाएंगे। कोरोना वायरस को लेकर लॉडाउन घोषित होने के बाद अनेक संस्था और एनजीओ के तरफ से जरुरतमंद परिवारों को राशन किट उपलब्ध कराा जा चुका है। ऐसे में पार्षदों में अपनी निधि से राशन किट प्रदाय करे को लेकर उलझन की स्थिति बन गई है। नहीं मिल रहे हैं पात्रताधारी: लावेश भिलाई-चरोदा नगर निगम के पार्षद लावेश कुमार ने बताया कि पार्षद निधि से उन्होंने 50 हजार रुपए का प्रस्ताव राशन किट के लिए दिया है। लेकिन उनके वार्ड में काफी मशक्कत के बाद महज पांच परिवार ही नियमों के तहत पात्रताधारी है। उन्होंने नियमों को शिथिल करते हुए पार्षदों के विवेक पर जरुरतमंदों को राशन किट बांटने की अनुमति प्रदान करने की मांग शासन प्रशासन से की है।


भिलाई। कोरोना संकट एवं लॉकडाउन में जहां एक ओर शासन प्रशासन कंपनियों व संस्थानों से उनके स्टाफ को पूरी सैलरी देने की अपील कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर कई शिक्षण संस्थान अपने स्टाफ की सैलरी काटने में लगे हुए हैं। ऐसा ही एक ममला नेहरू नगर स्थित कृष्णा पब्लिक स्कूल से सामने आया है। स्कूल प्रबंधन ने अपने स्टाफ की आधी सैलरी काट दी। इसके लिए बकायदा नोटिफिकेशन भी जारी किया है। कृष्णा पब्लिक स्कूल के प्रबंधक आनंद त्रिपाठी की ओर से सभी शिक्षकों को नोटिफिकेशन जारी किया गया है। 

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि कोरोना संक्रमण के कारण स्कूल आर्थिक संकट से गुजर रहा है। इसके बाद भी स्कूल के समस्त स्टाफ को आने वाले महीनों में 100 फीसदी वेतन का भुगतान किया जाएगा। स्कूल प्रबंधन शिक्षकों सहित समस्त स्टाफ को फिलहाल 50 फीसदी वेतन भुगतान कर रहा है। वेतन की शेष राशि को आने वाले महीनों में समायोजित किया जाएगा। हमने सभी स्कूलों से जवाब मांगा हैं। इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी प्रवास सिंह बघेल का कहना है कि लॉकडाउन की अवधि में किसी भी स्कूल को अपने स्टाफ की सैलरी नहीं काटनी है। हमारे पास अब तक डेढ़ दर्जन से अधिक स्कूलों की शिकायतें मिली है जहां या तो सैलरी काट दी गई है या फिर सैलरी ही नहीं दी गई है। 

सैलरी को लेकर हमने कृष्णा पब्लिक स्कूल सहित जिले के सभी निजी स्कूलों से जवाब मांगा है। 30 अप्रैल  के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी को देंगे जवाब -सैलरी में कटौती को लेकर जब स्कूल के डायरेक्टर आलोक त्रिपाठी से सवाल किया गया तो पहले उन्होंने कटौति की बात स्वीकारी लेकिन बाद में यह कहकर मुकर गए कि वे अपना जवाब डीईओ को देंगे। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन से जवाब मांगा है और हम जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित में जवाब देंगे।

पूरब  टाइम्स दुर्ग। अन्य राज्यों में अध्ययनरत दुर्ग जिले के विद्यार्थी जो लाकडाउन में फंसे हैं और दुर्ग जिले में आना चाहते हैं। ऐसे छात्र-छात्रा अपनी जानकारी जिला प्रशासन को दे सकते हैं। इसके लिए निर्धारित प्रारूप में जानकारी डिप्टी कलेक्टर  रविराज ठाकुर के मोबाइल नंबर 73895-77569 पर व्हाटसएप के माध्यम से प्रेषित की जा सकती है। प्रारूप में उन्हें जिले का नाम, छात्रध् छात्रा का पूरा नाम, मोबाइल नंबर, जिस शहर में वर्तमान में छात्र-छात्रा रह रहे हैं उसका नाम, उनका वर्तमान पता, जहां पढ़ाई कर रहे हैं उस संस्था की विस्तृत जानकारी, पिता अथवा अभिभावक  का नाम, अभिभावक का संपर्क नंबर, अभिभावक के पूरे पते की जानकारी देनी होगी। इसके साथ ही छात्र-छात्रा को अपना परिचय पत्र भी संलग्न करना होगा।

पूरब टाइम्स भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 19 शास्त्री नगर के विभिन्न जल स्रोतों से 97 सैंपल लिए जा चुके हैं! लिए गए सैंपल का 77 एमएलडी जल शोधन संयंत्र में परीक्षण किया जा रहा है पानी सैंपल के टर्बीडीटी, पीएच, टीडीएस, टोटल हार्डनेस, क्लोराइड, फ्लोराइड, कैल्शियम, मैग्नीशियम, आयरन एवं बैक्टीरिया परीक्षण किया जा रहा है! जोन के अधिकारी एवं जल विभाग के अधिकारी/कर्मचारियों ने शास्त्री नगर के सलीम खान, पंप हाउस नंबर दो, शुभम के घर के पास पावर पंप का पानी, भगवती के घर के पास पावर पंप का पानी, पावर पंप टंकी एक एवं दो, लतीफ खान के घर का पानी, उमेश पटेल के घर का पानी, धर्मेंद्र मेहता के घर का पानी, हरीनाथ निषाद के घर का पानी, गोपीचंद, विनोद कुमार, विशाल, शिवजी सिंह, पप्पू रात्रे, मंजू रात्रे एवं सुग्रीव सहित अन्य घरों एवं अलग-अलग जल स्रोतों से 97 सैंपल एकत्रित किए हैं जिसका परीक्षण लैब में किया जा रहा है! जोन आयुक्त जोन क्रमांक दो सुनील अग्रहरि, कार्यपालन अभियंता बीके देवांगन एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम शास्त्री नगर क्षेत्र में पहुंचकर पानी का सैंपल एकत्रित कराएं! पानी को स्वच्छ एवं शुद्ध करने के लिए क्लोरीन टेबलेट का वितरण शास्त्री नगर क्षेत्र के घरों में किया जा चुका है और इसके उपयोग के तरीके भी बताए जा रहे हैं! जल जनित बीमारी पीलिया से बचाव के लिए निगम भिलाई द्वारा अपील की जा रही है कि शुद्ध एवं स्वच्छ पानी का ही उपयोग पीने के लिए करें पानी को उबालकर एवं छानकर उपयोग में लाएं!

पूरब टाइम्स, भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र में विभिन्न प्रदेशों एवं क्षेत्रों से लॉक डाउन के दौरान फंसे हुए लोग निगम के राहत शिविरो मे ठहरे हुए हैं, इनको व्यस्त एवं तनावमुक्त रखने के लिए नए-नए तरीके निगम भिलाई द्वारा अपनाए जा रहे हैं। मंगल भवन के राहत शिविर में कैरम, लूडो, टीवी, एफएम रेडियो जैसी सुविधाएं मुहैया कराई गई है ताकि कैंपस के भीतर रहते हुए समय व्यतीत किया जा सके। इसी प्रकार से सांस्कृतिक भवन वैशाली नगर में भी लूडो की व्यवस्था की गई है साथ ही निगम के अजय शुक्ला द्वारा इन राहत शिविरों में जाकर योग के तरीके बताए जा रहे हैं, जिसमें सोशल डिस्टेंस का पालन किया जा रहा है। राहत शिविर में ठहरे हुए लोगों के मांग एवं आवश्यकता के हिसाब से भी भोजन इत्यादि व्यवस्था की जा रही है वैशाली नगर संस्कृतिक भवन के मजदूरों द्वारा पूड़ी, जीरा राइस, हलवा की मांग की गई थी जिस पर उन्हें इसके लिए राशन सामग्री प्रदाय की गई इसके साथ ही इसी स्थल पर सब्जी के लिए कच्चा केला प्रदान किया गया और मंगल भवन एवं अकाश गंगा के राहत शिविर में पका हुआ केला दिया गया। राहत शिविरों का निगम के अधिकारी/कर्मचारी सतत निरीक्षण कर रहे हो और ठहरे हुए लोगों के लिए बेहतर व्यवस्था कर रहे हैं ताकि इनको कोई समस्या न हो। राहत शिविर में स्वास्थ्य परीक्षण भी चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा है। मास्क एवं सैनिटाइजर भी प्रदान किया गया है। दैनिक जीवन की जरूरी सुविधाएं राहत शिविरों में उपलब्ध कराई जा रही है। अजय शुक्ला ने बताया कि राहत शिविरों एवं आश्रय स्थलों में योग एवं व्यायाम के तरीके बताकर तनावमुक्त रखने प्रयासरत है, ऐसे समस्त स्थलों में योग सिखाकर व्यस्त रखने का कार्य किया जा रहा है ताकि मानसिक एवं शारीरिक ताजगी भी यहां ठहरे हुए लोगों में लाई जा सके।

दुर्ग। कोरोना वायरस के डर से लोगों ने स्वयं व अपने परिवार को घर के अंदर लॉकडाउन कर लिया है। लॉकडाउन होने के कारण सर्वे के लिए निकलने वाले स्वास्थ्य टीम व मितानिनों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सर्वे के लिए जब टीम घर के दरवाजे में पहुंचती है तो लोग सबसे पहले कई सवाल जवाब करते हैं। इसके बाद ही कुछ जानकारियां देते हैं। लोगों के अड़ियल रवैये के कारण मितानिनों को काफी दिक्कतें हो रही हैं। लॉकडाउन के कारण दरवाजा भी नहीं खोला जा रहा है। वहीं कुछ दिन पहले सोशल मीडिया में शासन द्वारा कोरोना वायरस के लिए मकानों में जाकर सर्वे नहीं करने की खबर चली थी। इसके चलते ज्यादातर परिवार जिले के सर्वे टीम को फर्जी समझकर लौटा रहे हैं या फिर सही जानकारी नहीं दे रहे हैं।


सर्वे के लिए पहुंच रही टीम को खासकर एक विशेष वर्ग से काफी परेशानी हो रही है। विशेष वर्ग के लोग आई कार्ड के लिए तो कभी आई कार्ड में अफसरों के हस्ताक्षर को लेकर परेशान करते हैं। कुछ दिनों पहले मितानिनों के साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम सर्वे के लिए फरीद नगर गई थी। फरीद नगर में टीम घर-घर जाकर सर्वे कर रही थी। इसी बीच एक विशेष वर्ग के लोग टीम को फर्जी कहने लगे। यहीं नहीं जानकारी देने से भी साफ मना कर दिया। जब विशेष वर्ग के लोगों को स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आई-कार्ड दिखा गया तब वे जानकारी दिए। लेकिन कई लोग इसे फर्जी बताते हुए सही जानकारी देने से पीछे हट गए। कुछ लोग तो ऐसे हैं कि सही जानकारी देने की बजाय गोलमोल जवाब देकर इस विषम परिस्थिति में भी उनकी मदद नहीं कर रहे हैं।

मितानिन जान जोखिम में डाल सर्वे कार्य को अंजाम दे रही हैं। सर्वे ड्यूटी कर रही एक मितानिन ने बताया कि कुछ दिनों पहले विशेष वर्ग के लोगों ने सर्वे के लिए गई टीम को घेर लिया था। टीम को घेरकर सवाल-जवाब कर रहे थे। इसकी जानकारी टीम के सदस्यों ने तत्काल पुलिस को दी। पुलिस के आने के बाद विशेष वर्ग के लोग शांत हुए और मौके से निकल पड़े। मितानिनों ने बताया कि विभाग को मितानिनों की कोई चिंता नहीं है।

भिलाई। बढ़ती गर्मी की वजह से सांप रिहायशी क्षेत्र में सांपों के मिलने का सिलसिला बढ़ गया है। हर दिन एक दर्जन से ज्यादा सांप घरों में निकल रहे हैं। गर्मी के कारण सांप अब ठंडी जगह रहना पसंद कर रहे हैं। इसलिए घरों की नालियों और बाथरूम में जगह बना रहे हैं। मामला, भिलाई का है, जहां बाथरूम में पहुंचा सामने सांप देख ठिठक गया। उल्टे पांव वह बाहर निकल आया। 

भिलाई। इस लॉकडाउन में लोगों से नियम पालन कराने के अलावा लगातार हो रही चोरी की घटनाएं भी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। महीने भर के भीतर बदमाशों ने दर्जन भर से अधिक स्थानों पर चोरियां की। इसमें मकानों के साथ ही किराना दुकान और शराब दुकान भी शामिल हैं। लगातार गश्त के बाद भी चोरी की घटनाओं पर लगाम नहीं लग पाना एक चिंता का विषय है।

लॉकडाउन में बदमाशों ने शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार चोरियां की हैं। हालांकि कुछ मामलों में पुलिस ने बदमाशों को गिरफ्तार भी किया है। जवाहर नगर और उतई के दारू भट्ठी में चोरी करने वाले आरोपित भी गिरफ्तार हो गए हैं। कुछ किराना दुकान, पानठेलों और खेतों में पंप व फेंसिंग तार चोरी करने वाले भी धरे गए हैं। लॉकडाउन की अवधि में किसी बाहरी गिरोह के सक्रिय होने की आशंका तो काफी कम है, लेकिन लोकल चोर लगातार पुलिस को चुनौती दे रहे हैं। जिनका अभी तक खुलासा नहीं हो सका है।


बदमाशों ने केएलसी लाइन खुर्सीपार निवासी प्रार्थी ए शंकर के घर में घुसकर मोबाइल चोरी की है। प्रार्थी अपने दोनों मोबाइल को चार्ज में लगाकर सोया हुआ था। उसके पिता ए राममूर्ति भोर में उठकर ड्यूटी पर चले गए और जाते समय बाहर से कुंडी लगा दी। प्रार्थी सुबह छह बजे उठा और देखा तो दरवाजा खुला था और चार्ज में लगे दोनों मोबाइल गायब थे। अपने पिता से मोबाइल के बारे में पूछने के बाद प्रार्थी ने थाने में शिकायत की। इसके अलावा सेक्टर-6 में घर के बाहर खड़े एक ऑटो की बैटरी और स्टेप्नी चोरी की घटना हुई है। प्रार्थी मनोज नायक ने अपनी ऑटो सीजी-07 टी 2994 को घर के बाहर ही रखा था। लॉकडाउन के चलते वो गाड़ी लेकर नहीं निकल रहा है। 15 अप्रैल की सुबह उसने देखा तो उसके ऑटो का बॉक्स खुला हुआ था और बैटरी व स्टेप्नी नहीं थी।

दुर्ग। मुख्यमंत्री के गृह जिले दुर्ग में संचालित तीन महाविद्यालय में चार नवीन पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा। यह नवीन पाठ्यक्रम आगामी सत्र से आरंभ होगा। इसमें दो पाठ्यक्रम जिले के दुर्ग शहरी क्षेत्र के महाविद्यालय में शुुरू किया जाएगा तो एक पाठ्यक्रम धमधा और मुख्यमंत्री के एरिया पाटन में एक पाठ्यक्रम आरंभ किया जाएगा।



शासकीय डॉ. वामन वासुदेब पाटण्कर कन्या महाविद्यालय गर्ल्स कॉलेज में बीएससी कंप्यूटर साइंस और बीकॉम इन कंप्यूटर एप्लीकेशन आरंभ किया जाएगा। दोनों ही पाठ्यक्रम में 40-40 सीट होंगे। वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के विधानसभा क्षेत्र पाटन के शासकीय स्व. चंदूलाल चंद्राकर महाविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य में बीए शुरू किया जाएगा। साथ ही शासकीय महाविद्यालय धमधा भूगोल में बीए के लिए 40 सीट की स्वीकृति मिली है।


उच्च शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के 25 महाविद्यालयों में 44 पाठ्यक्रमों के लिए स्वीकृति मिली है, उसमें सबसे ज्यादा दुर्ग संभाग के कॉलेज शामिल है। इसमें दुर्ग संभाग के परिक्षेत्र में संबद्धता देने वाले हेमचंद यादव विश्वविद्यालय दुर्ग यूनिवर्सिटी के नौ महाविद्यालय में नवीन पाठ्यक्रम की मंजूरी मिली है। इन नौ महाविद्यालयों में 14 नवीन पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। इससे शिक्षा के क्षेत्र में दुर्ग जिले का दबदबा और बढ़ेगा।


दुर्ग संभाग अंतर्गत दुर्ग जिले के तीन महाविद्यालय में चार पाठ्यक्रम के अलावा संभाग के बालोद, बेमेतरा और राजनांदगांव जिले में नवीन कॉलेज खुलेंगे। इसमें बालोद जिले के गुरुर महाविद्यालय में अर्थशास्त्र और हिन्दी साहित्य में बीए के लिए 40-40 सीटे की स्वीकृति मिली है। शासकीय नवीन महाविद्यालय अरमरीकला में कंप्यूटर साइंस में बीएससी और अर्थशास्त्र में बीए के लिए 40-40 सीट मंजूर किए गए है। साथ ही जिले के ही शासकीय नवीन महाविद्यालय बेलौदी में हिन्दी साहित्य में बीए के लिए 40 सीट की मंजूरी मिली है। शासकीय महावद्यिालय डौंडी में हिन्दी साहित्य और समाज शास्त्र विषय में बीए के लिए 40-40 सीट की स्वीकृति मिली है। साथ ही गंडई महाविद्यालय में अंग्रेजी साहित्य और इतिहास में बीए के 40-40 सीट की मंजूरी मिली है।

पूरब टाइम्स, दुर्ग। दुर्ग जिले ग्रीन जोन में आने के बाद पहली बार प्रशासन ने कारोबार के लिए बड़ी राहत दी है। अब तक यहां सिर्फ  किराना और सब्जी दुकानें ही चल रही थीं। लेकिन आज से अधिकतर जरूरी सेवाओं की दुकानें भी खुल गईं। इनमें सभी तरह के पंखों की दुकानें, स्टेशनरी और बुक स्टोर,बिजली, सेनेटरी, स्पेयर पाट्र्स, बीमा और सोसाइटी दफ्तर शामिल हैं। 
       हालांकि सबका खुलने का समय सीमित रहेगा।  शाम 4 बजे से पूरा बाजार बंद होगा और सख्त लॉकडाउन का पालन करने के लिए पुलिस सड़कों पर उतर जाएगी। मोबाइल रिचार्ज समेत कई और सेवाएं भी आज से शुरू : भूपेश सरकार ने रोजमर्रा से जुड़ी कुछ सेवाओं और कारोबार को गुरुवार से सीमित समय के लिए शुरू करने का फैसला किया है। राजधानी की तरह राज्यभर में स्टेशनरी और बुक स्टोर्स तथा पंखें की दुकानें तो खुलेंगी ही, आटे और दाल मिलों के साथ-साथ ब्रेड फैक्ट्रियों को भी खोलने की छूट दी गई है। राजधानी के अलावा पूरे राज्य में प्रीपेड मोबाइल रिचार्ज फेसिलिटी को भी निर्धारित समय तक छूट दी गई है।
सामान्य प्रशासन सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार लॉकडाउन में चिन्हित जिले या हॉटस्पाट के भीतर के कंटेनमेंट जोन को छोड़कर शेष सभी इलाकों 20 अप्रैल से जिन सेवाओं और कारोबार में छूट दी गई थी, वह पूर्ववत जारी रहेंगी। वाणिज्यिक एवं निजी संस्थानों में अब पूर्व में दी गई छूट के साथ-साथ किताब दुकानें और बिजली के पंखों की दुकानों को भी गुरुवार से खोला जा रहा है। वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख हेतु उनके घरों में सेवाएं दे रहे केयर गिवर को आने-जाने की अनुमति दी गई है। आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई बरकरार रखने के लिए खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां जैसे ब्रेड बनाने वाली फैक्ट्रियां, दुग्ध प्लांट, आटा मिल और दाल मिलों को भी खोला जा रहा है।

पूरब टाइम्स . इस वक़्त छ.ग. प्रदेश में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये युद्ध स्तर पर प्रयास किये जा रहे हैं. लोगों की सुरक्षा के लिये सरकार ने अपना खज़ाना खोल दिया है और साथ ही आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू कर दिया है . जिले का प्रशासन, नगरीय निकाय के समस्त संसाधन , एक टीम की तरह कार्य कर रहे हैं परंतु अनेक जगह अपनी ढपली अपनी राग जैसा माहौल है . चाहे निगम के अधिकारी हों या जन प्रतिनिधि , वे वार्डों में सैनिटाइजऱ व मास्क बांटते फिर रहे हैं परंतु क्या उन जगहों पर इसकी क्या वास्तव में आवश्यकता है ? सरकारी राशन दुकानों से मुफ्त में कच्चा राशन, उज्जवला योजना के अंतर्गत मुफ्त में गैस के अलावा अनेक स्थानों पर पका हुआ खाना बांटना अभी ज़रूरी है , इसका आंकलन भी नहीं किया जा रहा है . यदि भविष्य में महामारी फैली तब के लिये क्या बैक-अप प्लान है ? स्वयंसेवियों से मदद बंद करा , अपने कामगारों की ताक़त को खत्म करने के फैसले का , प्रशासनिक आधार क्या है ? इस तरह के अनेक प्रश्नों पर तैयारी हुई है या नहीं , जनता जानना चाहती है ताकि भविष्य की निश्चिंतता बनी रहे . पूरब टाइम्स की एक खबर .....
जैसे - जैस कोरोनावायरस का संक्रमण प्रकोप पूरी दुनिया को अपने चंगुल में लेता जा रहा है वैसे - वैसे रोजाना  हमारी चिंता बढ़ती जा रही है . विकसित देशों के आंकड़े भयभीत करने वाले है . गौरतलब रहे कि महामारी प्रकोप कालावधि  कितनी होगी ? यह अनुमान लगाना , आज मनुष्य के बस में नहीं है.  उल्लेखनीय है कि विश्व स्वस्थ्य संगठन जैसी प्रभावी शक्ति भी सभी मोर्चों पर प्रश्नचिन्ह का सामना कर रही है . ऐसी स्थिति में सीमित संसाधनों वाले हमरे देश को अपनी कार्यनीति वास्तविकता और व्यवहारिकता के दायरे में रहकर बनाने की आवश्यकता है , क्योंकि आपदा का प्रभावी प्रबंधन करने में अगर हमने थोड़ी सी भी चूक की तो बहुत बड़ी संख्या में हमे अपने नागरिकों की जान गंवाकर कीमत चुकानी पड़ेगी . इसलिए आवश्यक है कि आपदाओं के प्रभावी प्रबंधन के लिए अतिउत्साह और उतावलेपन की कार्यशैली पर विराम लगाकर , हमे दुरागामी सोच के साथ रणनीति बनानी पड़ेगी और इसका कार्यान्वयन सुनिश्चित कराना पड़ेगा . 
आज हमारा कार्मिक तंत्र आपात काल से निपटने की लड़ाई प्रथम मोर्चे पर संभाले हुए है . हमारी कार्मिक शक्ति पहले से ही अपर्याप्त है . वर्तमान में चिंताजनक स्थिति यह है कि अगर हमने अपनी कार्यनीति का नियोजन समय रहते व्यवहारिक दृष्टिकोण से नहीं किया तो हमारे कर्मवीर जो इस महामारी से प्रथम मोर्चे को संभाले हुए है , वे थक जाएंगे और उनकी कार्यक्षमता दिनोदिन कम होती जाएगी . सबसे भयंकर स्थिति तब हमारे सामने आ जाएगी,  जब हमारे स्वास्थ्य एवं सफाई कर्मियों को अतिरिक्त बोझ के कारण आराम करने का अवसर नहीं मिलेगा और उनके स्वास्थ्य पर इसका विपरीत प्रभाव पडऩे के कारण उनकी अनुपस्थिति हमे नई चुनौतियों का सामना करने को मजबूर कर देंगी . हमारा आपदा प्रबंधन तंत्र इस विषय में क्या कर रहा है और उसकी आगामी रणनीति क्या है ? वर्तमान में यह सर्वोपरी विचारणीय पहलू है . गौरतलब रहे कि यह विषय तो अभी शासकीय नोट शीट तक सीमित है लेकिन जल्द ही आम जानता इस प्रश्न को लेकर स्थानीय प्रशासन को कटघरे में खड़ा करने लगेगी तब क्या होगा ?
आज की परिस्थिति यह है कि चारो ओर अफरा - तफरी है और प्रत्येक नगरीय निकायों के कर्मचारी और समाजसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ता अपने विवेक और समझ के अनुसार अपना योगदान इस महामारी से निपटने के लिए दे रहे है . कटुसत्य यह है कि वास्तविकता के धरातल पर इस तरह से दिये जाने वाला योगदान निष्फल होता नजर आ रहा है क्योंकि जब हमे इस शक्ति बल की वाकई जरूरत होगी,  तब निश्चित तौर पर हमारी यह ताकत अधूरी कार्यक्षमता की स्थिति का सामना करते नजर आएगी . जिसका कारण यह है कि प्रशिक्षण प्राप्त कर्मचारी और समाजसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों का आपसी तालमेल नहीं बैठा है . इन दोनों शक्तियों ने इस लड़ाई के लिए तात्कालिक कार्य योजना बनाई है जो अल्पसमय में ही अपना अस्तित्व खो देगी . अत: नितांत आवश्यकता महसूस की जा रही है कि आपसी तालमेल के साथ महामारी को नियंत्रित करने की व्यवहारिक कार्यवाही किया जाए जिससे पैसा और शक्ति दोनों का तर्कसंगत नियोजन संभव हो सकेगा