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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है









पूरब टाइम्स . अंतत: दुर्ग के सांसद विजय बघेल ने अपना अनशन समाप्त कर दिया . ऐसा लगता है कि पूरब टाइम्स के अनेक सुधि पाठकों की तरह भाजपा के हाई कमान व प्रदेश नेतृत्व को अनशन के कारण व उसके लिये इतने ज़्यादा संघर्ष-प्रचार करने  को ठीक से पचा पाना मुश्किल हो रहा था. जिस तरह से इस मामले का पटाक्षेप हुआ उससे अब सतह पर कई प्रश्न उठकर आ रहे हैं ? क्या यह अनशन केवल सांसद के जुझारुपन को फिर से जन-साधारण के सामने दिखाने की कोशिश थी ? क्या यह अनशन दुर्ग जिला भाजपा के अन्य गुटों पर अपना वर्चस्व साबित करने की पहल थी ? क्या इस अनशन से एक बार फिर से भाजपा में उनके मुख्य विपक्षी की भूमिका को दिखाने की शुरुआत थी ? जो भी हो पर यह तो साफ दिखाई दिया कि इस अनशन से जिला प्रशासन व छत्तीसगढ़ की कांग्रेसी सरकार के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी . इसके बावजूद विश्लेषकों का यह कहना है कि पिछले डेढ़ साल में भाजपा के किसी नेता द्वारा  भिड़कर एक प्रदेश सरकार विरोधी माहौल बनाने की सबसे बड़ी कोशिश दिखी ( मुद्दे या बिना मुद्दे के ) .  अब आम जनता अचानक अनशन समाप्त करने के कारण को शक की निगाह से देखने लगी है. यदि शीघ्र ही सांसद विजय बघेल ने किसी अन्य मुद्दे को लेकर प्रदेश सरकार को नहीं घेरा तो उनकी फेस वेल्यू बेहद कम हो जायेगी. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..



कानून हाथ में लेने वाले लोगों को भली-भांति यह विचार कर लेना चाहिए कि नेताजी के आंदोलन से किसको क्या हासिल हुआ है ? गौर तलब रहे कि पाटन क्षेत्र में तथाकथित आंदोलन करने वाले नेताजी  पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के बड़े नेताओं को धरना स्थल पर बुलवाने में सफल हो गए  जिससे कारण दुर्ग के सांसद का  प्रदेश स्तर का नेता होने का अहसास पाटन क्षेत्र के कार्यकर्ता को करवाने में सफलता मिल गई . नेताजी की राजनीतिक पूछ परख भी बढ़ गई लेकिन दुर्ग सांसद की इस बड़ी उपलब्धि के साथ - साथ यह भी विचारणीय पहलू है कि जिन कार्यकर्ताओं के विरूद्ध प्रकरण दर्ज हुआ है  उनका क्या होगा ?  क्या सांसद के आंदोलन के बाद कानूनी कार्यवाही का सामना करने वाले आरोपियों को आंदोलन किए जाने के एवज में कानूनी कार्यवाही का सामना करने से छुट्टी मिल जाएगी ? अपेक्षित है कि विजय बघेल भाजपा के हाई कमान को इसका स्पष्टीकरण दें और कार्यकर्ताओं को भी इससे अवगत कराएंगे.

मैनपाट/ छत्तीसढ़ के पर्यटन स्थल/ tourist places to visit in mainpat


पाटन क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता जिनके विरूद्ध प्रकरण दर्ज हुआ था उनके प्रकरण में की जा रही कार्यवाही में आंदोलन से कोई प्रभाव पड़ा क्या ?

पुलिस गिरफ्तारियों का विरोध करने के नाम पर सांसद विजय बघेल ने पाटन क्षेत्र में आंदोलन किया . जिसका समर्थन सभी स्थानीय कार्यकर्ताओं ने किया .  चूंकि पहली बार सांसद ने कार्यकर्ताओं की सुध ली थी इसलिए पार्टी कार्यकर्ताओं ने सांसद को सांकेतिक समर्थन दिया . उल्लेखनीय यह भी है कि भिलाई और चरोदा में आगामी महीनों के बाद निगम चुनाव है इसलिए पार्षद चुनाव के दावेदारों ने भी भ्रमित होकर धरना स्थल पर बड़ी संख्या में अपनी उपस्थिति भी दर्जा करवा दी और कुछ कार्यकर्ताओं ने भिलाई में भी अपनी भड़ास निकाली .  लेकिन जो कार्यकर्ता पाटन में कानून हाथ में लेने के लिए कानूनी कार्यवाही का सामना  इस कोराना काल के विपरीत परिस्थितियों में कर रहे है  उनके विरुद्ध न्यायालय के समक्ष पेश प्रकरण में तर्कसंगत सबूत जुटाने के लिए सांसद ने क्या किया है ? इस प्रश्न पर सांसद ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है .


क्या भाजपा के बड़े नेताओं के निवेदन और आदेश पर सांसद विजय बघेल का अनशन समाप्त हुआ है ?

सांसद विजय बघेल के तथाकथित अनशन को समाप्त करने के लिए जो खिचड़ी खिलाई गई.  वह किसने बनाई ? यह प्रश्न भले ही निरर्थक है लेकिन जिन कार्यकर्ताओं ने सांसद के तथाकथित अनशन को पूरे समय नारे लगाकर समर्थन किया  उनको तब बेहद आश्चर्य हुआ जब सांसद ने अचानक अनशन समाप्त करने पर सहमति जता दी .  वैसे जब अनशन समाप्त करने की घोषणा की गई  तब भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मंच पर उपस्थित थे इसलिए कांग्रेसियों पर आरोप लगाने की कहीं कोई गुंजाइश नहीं है . फिर भी जो आंदोलन आरोपी भाजपा कार्यकर्ताओं की नि:शर्त प्रकरण वापसी पर समाप्त किया जाना घोषित किया गया था  वह आंदोलन अब नाटकीय अंदाज में क्यों समाप्त हो गया है ?  गौर तलब रहे कि आंदोलन के विषय पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और कांग्रेस ने तो प्रतिक्रिया नहीं की  इसे विपक्षी रणनीति कहा जा सकता है लेकिन जिला भाजपा ने भी इस आंदोलन पर प्रतिक्रिया नहीं दी  इसका क्या अर्थ लगाया जाना चाहिए ? 
 

पूरब टाइम्स, भिलाई। भिलाई क्षेत्र अंतर्गत गंदगी फैलाने वाले और प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी का उपयोग करने वालों के खिलाफ निगम की टीम कार्यवाही कर रही है। प्रमुख बाजार क्षेत्र होटल, ठेले व नाश्ता सेंटर वालों द्वारा अनियंत्रित तरीके से गीला एवं सूखा कचरा को फेंकने वालों का भी निरीक्षण कर कार्यवाही कर रहे है। 

खुर्सीपार क्षेत्र में जोन 04 की टीम ने 09 व्यवसासियों से 1600 रूपए अर्थदंड वसूले और समझाइश दिए कि दोबारा ऐसा करते पाए जाने पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। शिवाजीनगर जोन 04 खुर्सीपार के अंतर्गत होटल, चाय नाश्ता ठेला व अन्य खाद्य पदार्थ विक्रय करने वाले जो कचरा अनियंत्रित रूप से फेंक रहे थे व डस्टबिन नहीं रखने वालों पर निगम के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कार्यवाही की। 

कचरा इधर-उधर फेंकने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश निगमायुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने दिए है। जोन 04 के जोन आयुक्त अमिताभ शर्मा की टीम स्वच्छ भारत मिशन के तहत गंदगी फैलाने वालों पर कार्यवाही करने चौक-चौराहा व मुख्य बाजार क्षेत्र का निरिक्षण किए। जोन स्वास्थ्य अधिकारी महेश पाण्डेय ने बताया कि जोन 04 अंतर्गत वार्ड कं. 28 छावनी एवं वार्ड 32 क्षेत्र में ठेले पर चाय, नाश्ता, फास्ट फूड इत्यादि का व्यवसाय करते हैं। 

खाद्य पदार्थों के गीले एवं सूखे कचरे एवं नाश्ता प्लेट, चाय डिस्पोजल एवं झिल्ली, पन्नी को आस पास ही अनियंत्रित तरीके फेंककर गंदगी फैलाया जा रहा था, इन सभी से जुर्माना वसूल किया गया। ठेले संचालकों को समझाईश दी गई कि प्रतिबंधित प्लास्टिक कैरी बैग का उपयोग नहीं करना है तथा गीला एवं सूखा कचरा को एकत्रित करके रखें और निगम के कचरा वाहन में डाले ताकि कचरे को व्यवस्थित तरीके से निष्पादन किया जा सके। 

निगम की टीम ने जोन 04 क्षेत्र के डिस्पोजल का कचरा फैलाने वाले श्रवण गुप्ता से 300 रूपए, वार्ड 28 के प्रेम शंकर से 200 रूपए, गंदगी फैलाने वाले पान ठेला संचालक हरिराम वर्मा से 100 रूपए, किराना दुकान वाले श्यामाचरण पाॅल से 100 रूपए, झिल्ली-पन्नी कचरा फैलाने वाले राज नारायण पाॅल से 100 रूपए सहित 05 व्यवसायियों से 800 रूपए अर्थदंड वसूलने की कार्यवाही की। 



शव के नाल लगी हुई है। इसके चलते बच्ची का शव नदी की झाड़ियों में फंस गया और तैरता हुआ किनारे आ गया। 10 माह में 7 नवजात कन्याओं के मिले हैं शव बच्ची की नाल होने से आशंका जताई जा रही है कि जन्म के तत्काल बाद ही उसे फेंका गया है। शव में कही भी टैग नहीं है। जिसके चलते उसकी पहचान नहीं हो पा रही है। पुलिस को आशंका है कि देर रात नदी में फेंका गया है। यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है। 

पूरब टाइम्स ,भिलाई।  महापौर एवं भिलाई नगर विधायक  देवेन्द्र यादव और निगम आयुक्त  ऋतुराज रघुवंशी की मंशानुरूप 77 एमएलडी फिल्टर प्लांट की व्यवस्था भी दुरुस्त हो गई है। 2000 केवीए उच्च क्षमता की ट्रांसफार्मर लगाए जाने से पैनल में लोड और बार-बार फॉल्ट की समस्या नहीं आएगी। बिना किसी रूकावट के प्लांट में बिजली की आपूर्ति होगी।

निगम प्रशासन ने 77 एमएलडी फिल्टर प्लांट में पुराने ट्रांसफार्मर के स्थान पर  2000 केवीए क्षमता की एक नग हाईटेंशन ट्रांसफार्मर लगावाया है। अब नए ट्रांसफार्मर से फिल्टर प्लांट में बिजली की आपूर्ति होगी। हर घर तक पर्याप्त मात्रा में शिवनाथ नदी का शुद्ध पानी उपलब्ध कराने की योजना पर पिछले कुछ साल से नगर पालिक निगम प्रशासन कार्य कर रही है। साथ ही 77 एमएलडी फिल्टर प्लांट के पुराने मशीन और ट्रांसफार्मर के स्थान पर उच्च क्षमता के मोटर पंप और ट्रांसफार्मर लगवाने का निर्णय लिया था। 

निविदा प्रक्रिया के तहत निगम प्रशासन ने फिल्टर प्लांट में 2000-2000 केवीए क्षमता की हाईटेंशन ट्रांसफार्मर लगाने के लिए बिलासपुर की एजेंसी को नियुक्क्त किया था। एजेंसी ने 77 एमएलडी फिल्टर प्लांट में एक नए ट्रांसफार्मर को इंस्टाल किया है दूसरा ट्रांसफार्मर भी पहुंच चुका है जिसे जल्द ही इंस्टाल किया जाएगा। स्टैंड बाय मोड पर कार्य करेगा एक ट्रांसफार्मर जल कार्य विभाग के प्रभारी उप अभियंता बसंत साहू ने बताया कि नया ट्रांसफार्मर की क्षमता पहले से 400 एवं 600 केवीए अधिक है और नई टेक्नालॉजी का ट्रांसफार्मर है।

पाटन के नेताओं की लड़ाई अब भिलाई तक पहुंच गई है ?




‘छोटे मुख्यमंत्री’ के चापलूसों की फौज न जाने कहां गायब हो गई है ?



इधर दुर्ग के सांसद के समर्थकों का उत्साह बढ़ाने दुर्ग के बड़े नेता अनुपस्थित क्यों है




पूरब टाइम्स . दुर्ग के सांसद ने अपने समर्थकों द्वारा पाटन में शराब दुकान में कथित मारपीट के आरोप पत्र के खिलाफ अनशन कर दिया . हांलाकि यह मुद्दा ज़्यादा व्यक्तिगत टाइप का लगता है परंतु इसे राजनैतिक रंग दे दिया गया . सूत्रों के मुताबिक इस मामले के इतने बढ़ जाने का कारण कुछ कांग्रेसी , मुख्यमंत्री के एक निज सचिव के द्वारा मामले को ठीक तरह से हैंडल नहीं करना , बता रहे हैं . इस निज सचिव के द्वारा जिले के अनेक शासकीय कार्यों में दखल के कारण , बाहरी लोगों को छोड़िये , कतिपय कांग्रेसियों द्वारा ‘ छोटा मुख्यमंत्री नाम से पुकारा जाता है. जहां दुर्ग के सांसद विजय बघेल  द्वारा , ऐसे मामले में अब तक का सबसे बड़ा विरोध दिखाने से  आम जनता हैरान है , वहीं दुर्ग जिले के अन्य वरिष्ठ नेता गण प्रेम प्रकाश पाण्डेय व सरोज पाण्डेय व जिला –मण्डल अध्यक्षों द्वारा किसी भी प्रकार से समर्थन ना करना , अपने घर में सांसद के प्रभाव पर प्रश्नचिन्ह लगा रहा है . फिर भी ऐसा लगता है कि आपसी अन्दरूनी लड़ाई से जूझ रही , मुद्दा विहीन भाजपा के अन्य नेताओं के हाथ, अपनी उपस्थिति दिखाने के लिये एक मंच मिल गया है. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...





प्रदेश के भूतपूर्व दिगज्जों ने भाषण दे दिया लेकिन जिले का 
प्रशासनिक अमला अपने निर्वाचित सांसद के तथाकथित अनशन को नजरंदाज क्यों कर रहा है



सांसद विजय बघेल अपना तथाकथित अनशन करके , पूरे दुर्ग को अपनी ओर 
आकर्षित करने का प्रयास कर रहे है लेकिन जिले का प्रशासनिक अमला अपने ही सांसद की अविधिक गतिविधि को नजरंदाज कर रहा है . इसका कूटनीतिक कारण क्या है ? यह मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया से स्पष्ट होगा लेकिन अभी सांसद विजय बघेल विषम वैधानिक परिस्थिति में फंसते नजर आ रहे हैं क्योंकि अनशन स्थल पर जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए कोई पहल नहीं की है . जिले के वरिष्ठ भाजपा नेताओं ने भी सांसद के तथाकथित अनशन से स्वयं को दूर रखा है . अब आगे होगा इसका इंतजार सभी को इंतजार है.




सांसद विजय बघेल और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी की टकराहट से पाटन क्षेत्र की ग्रामीण राजनीति गरमा गई है 




एक तरफ स्वर्गीय अजित जोगी के राजनीतिक वारिसों के साथ मरवाही सीटके उपचुनाव में प्रदेश के मुख्यमंत्री के राजनीतिक प्रभाव को साबित करने की परीक्षा चल रही है तो वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री के करीबी लोगों के कारण मुख्यमंत्री की छवि धूमिल हो रही है क्योंकि शराब लूट के आरोपियों के विरूद्ध चल रही न्यायालयीन मामले में मुख्यमंत्री के करीबी लोगों ने अपना प्रभाव दिखलाने के चक्कर में पाटन क्षेत्र के राजनीतिक मामलों को हवा दे दी है.  जिसके कारण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दो मोर्चे पर अपनी राजनीतिक भूमिका को बचाने की लड़ाई लड़ते नजर आ रहे हैं . मुख्यमंत्री अपने करीबियों के कारण अब इस प्रश्न का उत्तर जनता को देने के लिए मजबूर हो गए है कि लॉक डाउन के समय में दारू दुकान खुलवाना कितना लोकहित का है ?



सरोज पांडेय और प्रेम प्रकाश पांडेय तक  सांसद विजय बघेल के अनशन का समाचार नहीं पहुंचा है क्या ?



 सांसद विजय बघेल को अपने ही लोक सभा क्षेत्र के बड़े नेताओं का 
समर्थन मिलता नहीं दिख रहा है . जबकि सांसद के अनशन और विरोध प्रदर्शन पर बैठने के बाद प्रदेश स्तर के कई भूतपूर्व पदाधिकारी व अन्य सांसदों के द्वारा धारणा स्थल पर अपनी उपस्थिति दर्ज करवा दी गई है . उल्लेखनीय है कि भजापा का पाण्डेय गुट अपने ही भाजपा के सांसद के समर्थन में खड़ा  हुआ नजर नहीं आ रहा है, जिसके कारण 
भाजपा के अंदर की गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है और दुर्ग का भाजपा कार्यकर्ता यह निर्णय नहीं ले पा रहा है कि आखिर भाजपा का शीर्ष नेतृत्व किसके साथ है और पाटन मामले में सांसद की जो प्रत्यक्ष लड़ाई मुख्यमत्री के निज सचिव के साथ चल रही है , उसमे भाजपा के कार्यकर्ता को मौन रहना है या किस प्रकार का समर्थन करना है .

पूरब टाइम्स ,दुर्ग। निगमायुक्त इंद्रजीत बर्मन निर्देशा अनुसार आज स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता द्वारा पोटिया, बोरसी आदि क्षेत्र का निरीक्षण कर  सफाई कार्य का जायजा लिया गया। इस दौरान पोटिया, न्यू आदर्श नगर क्षेत्र में किराना दुकानों और पोटिया के शराब भट्टी में दबिश देकर उपयोग किए जा रहे डिस्पोजल गिलास को जप्त किया गया। साथ ही 500 से 1000 तक का जुर्माना लगाया गया। 

मास्क नहीं लगाने वालों को 100-100 रू. फाईन किया गया। स्वास्थ्य अधिकारी गुप्ता स्वच्छता निरीक्षक राजेंद्र सराठे दरोगा रामलाल भट्ट सफाई सुपरवाइजर के द्वारा उक्त कार्यवाही की गई । आम जनता से अपील है कि किसी भी किराना दुकान जनरल स्टोर आदि जगहों से में यदि डिस्पोजल गिलास पानी का पाउच प्लास्टिक का उपयोग करते दिखाई देता है तो इसकी सूचना तत्काल स्वास्थ्य अधिकारी को देवें।

उल्लेखनीय है कि शहर में स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 लागू है इसके अंतर्गत नगर पालिक निगम दुर्ग द्वारा समस्त वार्डों में व्यापक स्तर पर साफ-सफाई कराई जा रही है समस्त वार्डों के निवासियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने घरों, दुकानों का कचरा बाहर ना फेंके सड़क किनारे व नाली किनारे ना डालें । वे नगर निगम की कचरा रिक्शा गाड़ी को ही कचरा देवें। 

दुर्ग निगम स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा पोटिया इंदिरा कॉलोनी के पास स्थित शराब भट्टी में दबिश दी वहां पर अहाते में डिस्पोजल गिलास जप्त किया गया साथ ही उन्हें 1000 का भी जुर्माना किया गया। इसी प्रकार पोटिया वार्ड 54 के एक जनरल स्टोर में  डिस्पोजल पाया गया, पोटिया के कौशल किराना स्टोर में डिस्पोजल मिला इन्हें भी 500 से लेकर 800 का जुर्माना कर डिस्पोजल जप्त की गयी। 






पूरब टाइम्स . ऐसा लगता है कि भाजपा के दुर्ग के सांसद , किसी भी तरह से राज्य की कांग्रेस सरकार के विरोध में धरना प्रदर्शन कर , अखबारों में सुर्खियां पाने, अपने हाई कमान की नजऱों पर ऊपर आने व जनता के सामने अपने विरोधी आक्रामक तेवर दिखाने के लिये बेहद उत्सुक थे . इसीलिये वे किसी भी मामले की तलाश में थे. इस बीच उन्हें महसूस हुआ कि पाटन की शराब दुकान में हुए हमले व लूट के मामले में , वे सरकार को घेर लेंगे. पुलिस में रिपोर्ट के अनुसार इस मामले में उनका एक स्टाफ व कुछ भाजपा के लोग शामिल थे . बस, वे बैठ गये , शक्ति प्रदश्र्ण व विरोध दिखाने . हो सकता है इस मामले में ज़बरदस्ती , उक्त लोगों को फंसाया गया हो पर उनमें से कुछ लोग सचमुच में उस घटना में संलिप्त भी हो सकते हैं. ऐसे में यह मामला न्यायालयीन हो जाता है. इस पर राजनीति से आम जनता हैरान है कि सांसद  विजय बघेल के पास , भूपेश बघेल सरकार के विरुद्ध अनेक नीतिगत मामले , जनता के हितों की रक्षा ना कर सकने के मामले व अनेक स्कीम फेल होने के मामले , उठाने के लिये होते हुए एक अपराधिक मामले में इतना आक्रामक होने की क्या ज़रूरत थी ? यह मामला व्यक्तिगत लगता है और प्रादेशिक स्तर या राष्ट्रीय स्तर पर इसका कोई औचित्य नहीं है . दबे छुपे रूप् से अब कई लोग सांसद पर भी उंगलियां उठाने लगे हैं . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ... 




 विगत दिनों सांसद विजय बघेल के समर्थकों द्वारा एक मैसेज दिया गया वह यह कि, "छत्तीसगढ़ के दमनकारी कांग्रेस सरकार के खिलाफ सांसद विजय बघेल आज से पाटन में अनशन पर रहेंगे . राजनीतिक द्वेष के चलते झूठा आरोप लगाकर हमारे साथियों को जेल भेजने का कार्य निंदनीय है .  मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के तानाशाही रवैया के खिलाफ पाटन सहित छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आवाज बुलंद हो रही है . यह अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक हमारे साथी निशर्त रिहा नहीं हो जाते . हर जोर जुल्म के टक्कर से, संघर्ष हमारा नारा है " जैसे ही यह मैसेज वायरल हुआ तो पाटन क्षेत्र की दारू दुकान में घटित तथाकथित अपराधिक मामला चर्चा में आया और इस मामले ने स्थानीय राजनीति को गरमा दिया लेकिन सांसद विजय बघेल ने जनता के समक्ष अब तक यह जगजाहिर नहीं किया कि आखिर न्यायालयीन चुनौती का सामना करने की बजाय अनशन का रास्ता सांसद ने क्यों चुना है और क्या इसी रास्ते पर चलकर न्यायालयीन कार्यवाहियों प्राभावित करने का संदेश सांसद जनता को देना चाहते हैं ? 




दुर्ग जिले की कानून व्यवस्था बड़ी विचित्र अवस्था में पहुंच गई है . पाटन क्षेत्र, इस अव्यवस्था का सबसे बड़ा उदाहरण बन गया है . जिसका कारण बघेल परिवार का आंतरिक टकराव कहे जाने पर शायद किसी का दो मत नहीं होगा . सांसद विजय बघेल प्रशासनिक कार्यवाही के विरुद्ध  ,अपने रिश्तेदार मुख्यमंत्री के विरूद्ध,  धरना प्रदर्शन स्थल पर अपने प्रियजनों से नारे लगवा रहें है . गौर तलब रहे कि मुख्यमंत्री और सांसद बनने के बाद से अब तक आपस में ये दोनों नेता इस तरह से सड़क पर आकर कभी नहीं टकराए हैं लेकिन अभी एक ऐसे मामले में सांसद विजय बघेल अपना शक्ति प्रदर्शन करने का प्रयास कर रहे हैं , जो बिना किसी होहल्ला के न्यायालय में सुलझ  सकता है . लेकिन इसके विपरित अनशन कर बड़ी संख्या में भीड़ इक_ा करके सांसद न्यायालय की लड़ाई को सड़क किनारे बैठकर लडने का प्रयास कर रहे हैं  ? 




वैसे तो दुर्ग जिले की सभी छोटी बड़ी राजनीतिक गतिविधियों में मुख्यमंत्री के निज सचिव की उपस्थिति रहती है . जन साधारण के अनुसार,  तथाकथित छोटा मुख्यमंत्री निरक्षण करने के नाम पर दौड़ भाग करते हुए फ़ोटो खींचवाने में सबसे अग्रणी भूमिका में नजर आता है और अपना विशेष आतिथ्य सत्कार की अपेक्षित मौन भावना व्यक्त करता प्रतीत होता है . चूंकि यह आम धारणा बन गई है कि छोटा मुख्यमंत्री नाराज हो जाता है तो आयोजकों को अप्रत्यक्ष समस्याओं का सामना करना पड़ता है इसलिए कार्यक्रमों की प्रेस विज्ञप्ति में छोटे मुख्यमंत्री की निर्णायक भूमिका वाली फ़ोटो प्रेस और मीडिया को भेजी जाती है .  लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, संसद विजय बघेल के धरना स्थल के आसपास अभी तक छोटा मुख्यमंत्री नजर नहीं आया है और ना ही किसी भी प्रकार से आवश्यक दिशा निर्देश किसी अधिकारी को दिये हैं . अब आने वाला समय बताएगा कि संसद विजय बघेल के विरोध का सामना करने के लिए धरना प्रदर्शन स्थल पर कौन आयेगा ?



पूरब टाइम्स, भिलाई। एक 16 साल के लड़के का अपहरण कर लिया गया, घटना बीती रात राजनांदगांव के सोमनी थाना इलाके से उड़ता पंजाब नाम के ढाबे में हुई। ढाबा संचालक बलजीत सिंह सेठिया का बेटा ढाबे में मौजूद था। कुछ लोग एसयूवी में आए और उसे उठाकर साथ ले गए। घटना के बाद काफी देर तक ढाबे में अफरा-तफरी का माहौल था, घटना की जानकारी पुलिस को दी गई, 




पूरब टाइम्स, दुर्ग। नगर पालिक निगम दुर्ग बाजार विभाग एवं अतिक्रमण दस्ता द्वारा निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन के निर्देशानुसार गौरव पथ में गांधी पुतला के पास से जेल तिराहा तक फूटपाथ में बांस बल्ली गड़ा कर व्यवसाय करने वालों के अतिक्रमणों को हटाया गया। उन्हें हिदायत दी गई है कि वे गौरव पथ में किसी भी प्रकार से अतिक्रमण न करें। अन्यथा कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

निगम आयुक्त बर्मन ने अपील कर कहा कि लाॅकडाउन के बाद से गौरव पथ में बेतरतीबी से अधिक संख्या में लोग फूटपाथ अतिक्रमण कर दुकान न लगायें। अन्यथा कड़ी कार्यवाही के वे स्वयं जिम्मेदार होगें। उल्लेखनीय है कि कोेरोना वायरस संक्रमण के दौरान राज्य शासन एवं जिला प्रशासन द्वारा दुर्ग शहर को लाॅकडाउन किया गया था। आयुक्त  बर्मन ने कहा जिसके बाद सब्जी, फल व अन्य व्यवसाय करने वाले लोग गौरव पथ पर गांधी पुतला से जेल तिराहा तक अधिक संख्या में फूटपाथ पर दुकान लगाने लगे थे। 

अब लाॅकडाउन हटा दिया गया है परन्तु सोशल डिस्टेंस, सेनिटाईजर और मास्क का उपयोग कर सुरक्षा के साथ व्यवसाय किया जाना है। देखने में आ रहा है कि लाॅकडाउन के समय से जिन लोगों ने गौरव पथ पर दुकान लगा रहे थे वे अब भी अव्यवस्थित ढंग से पसरा ठेला खोमचा लगाकर शहर में गंदगी फैला रहे हैं। शहर में राज्य शासन के निर्देशानुसार स्वच्छता सर्वेक्षण अभियान लागू है। 

एैसी स्थिति में शहर में व्यवस्था बनाने की जवाबदारी निगम की है। जिसके तहत् अवैध रुप से फूटपाथ पर बांस, बल्ली गाड़ कर, ठेला खोमचा लगाकर अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कार्यवाही प्रारंभ की गई है। अतः अनुरोध है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार से सड़क किनारे, नालियों के ऊपर अतिक्रमण न करें। अन्यथा कड़ी कार्यवाही की जाएगी।@GI@

पूरब टाइम्स, भिलाई। भिलाई स्थित हाई टेक हॉस्पिटल की शिकायत लगातार प्रशासन को मिल रहा है इसी तारतम्य में आज एक घटना युवा मोर्चा दुर्ग के संज्ञान में आया जिसमें 15 दिन पूर्व दुर्ग सन्तरबाड़ी निवासी महेश जैन को कोरोना पॉजिटिव आने पर हाई टेक हॉस्पिटल में भर्ती किया गया भर्ती के दौरान परिजनों से 80 हजार रुपये जमा कराए गए और इलाज प्रारंभ किया गया और कुछ दिन पश्चात मरीज को आईसीयू वार्ड में स्थानांतरित किया गया दिनांक 3. 10.2020 को परिजनों को बताया गया।

मरीज की स्थिति गंभीर है इसे किसी अन्य हॉस्पिटल में ले जाएं फिर शाम 7:00 बजे परिजनों को बताया गया की मरीज की मृत्यु हो गई है और मृतक के लाश को मर्चुरी मे रख दिया गया दिनांक 4.10. 2020 को सुबह 7:30 बजे जब परिजन लाश लेने के लिए पहुंचे तो उन्हें एक लाख साठ हजार रुपए का बिल थमा दिया गया बिल की जांच करने पर पाया गया कि कुछ दवाई का बिल मृतक की मृत्यु होने के बाद 4.10.020 की सुबह 5 बजे का है और मेडिकल स्टाफ द्वारा मरीज के लिये दवाई लिया जाना बताया जबकि मरीज की मृत्यु 3.10.2020 को ही शाम 7 बजे हो गयी थी।

जब परिजन इस बात का विरोध किये तो हॉस्पिटल प्रबन्धन मरीज की लाश को देने से मना कर दिए कि जब तक बिल का भुगतान नही करोगे लाश देने की कोई कार्यवाही नही की जाएगी मृतक का परिवार अत्यंत गरीब है चाट गुपचुप का ठेला लगा कर अपना जीवन व्यापन करता है जब उक्त घटना की जानकारी परिजन युवा मोर्चा को दिए तो युवा मोर्चा महामंत्री नितेश साहू के साथ सैकड़ो युवा वहा पहुँच कर हंगामा करते हुए अतरिक्त कलेक्टर पंचभाई से बात किये तो उन्होंने मामले को सज्ञान में लेते हुए जांच  की बात कही.

मौके पर पुलिश बल भी पहुच गयी युवा मोर्चा कोई भुगतान नही किये जाने के बात पर अडिग रहें लगातार 5 घंटे तक अस्पताल के ख़िलाफ़ डटे रहे जिससे अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलती को स्वीकार करते हुए बिना भुगतान किए मरीज की लाश को परिजनों को देने की बात कही इस बात की जानकारी अतिरिक्त कलेक्टर द्वारा दूरभाष से युवा मोर्चा को दी तब युवाओं द्वारा प्रदर्शन बंद किया युवा मोर्चा नितेश साहू ने अस्पताल की लापरवाही के लिए प्रशासन को भी जिम्मेदार बताया कि जब लगातार इस अस्पताल की शिकायत मिल रही तो अभी तक प्रशासन इस अस्पताल पर मेहरबान क्यों है सिर्फ जांच की बात कह कर प्रशासन मामले को दबा देता है।

जबकि कोई ठोस कार्यवाही अब तक नही की गई है जिसके लिए अब उग्र आंदोलन की बात युवा मोर्चा ने कही इस दौरान उक्त पूरे प्रदर्शन में दुर्ग जिला युवा मोर्चा महामंत्री नितेश साहू  वरिष्ठ समाज सेवी राकेश लोचन तिवारी भिलाई युवा मोर्चा महामंत्री भोला साहू महामंत्री कन्हैया सोनी, मंगल राजपूत, राहुल पाटिल, निरंजन दुबे, शुभम सिंह, जीतू, अमित पाल, अमन ताम्रकार, मोहित जैन, रवि कोटवानी,सूरज कोटवानी, मयंक शर्मा, अनूप कुमार,घनश्याम, पप्पू देवांगन, वासु, मोंटी, लकी ,मोहित वाल्दे,रितिक,मोहित ताम्रकार पप्पू ताम्रकार,विक्की सोनी, गोलू ठाकुर एवं आदि उपस्थित थे |

पालकों से वसूली जाने वाली राशि के
मामले में उच्च न्यायालय के आदेश क्या है
?


क्या शिक्षण संचालनालय के द्वारा
गैर-सहायता प्राप्त विद्यालय की अवैधानिक गतिविधि को अनदेखा किया जा रहा है
?


क्या वाकई आई.ए.एस जितेंद्र शुक्ला की
मंशा व्यथित पालकों की परेशानी का निराकरण करने की है
?


दुर्ग भिलाई न्यूज़, पूरब टाइम्स. 

एक तरफ लॉक डाउन के कारण आम नागरिकों की अर्थ व्यवस्था पूरी तरह से
टूट गई है. दूसरी ओर कुछ शाला संचालकों ने पालकों पर दबाव डाल कर , उनके बच्चों की
पूरी फीस वसूलनी शुरू कर दी. कुछ पालकों ने प्रदेश के जन प्रतिनिधि राजनेताओं
द्वारा इस काल में फीस में कमी व फीस हेतु दबाव ना डालने की बात कहकर विरोध किया
गया तो शाला प्रबंधन ने हाई कोर्ट के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि नियत समय
सीमा पर फीस तो भरनी ही होगी वर्ना बच्चे को स्कूल से निकाल दिया  जायेगा. इसी परिपेक्ष में कुछ स्कूल संचालकों
ने फीस ना भरने वाले बच्चों को ऑन लाइन कोचिंग ग्रुप से बाहर भी निकाल दिया .
घबराकर पालकों ने प्रदेश शासन व प्रशासन को भी गुहार लगाई . जिसकी खाना पूर्ति
करते हुए संचालक , लोक शिक्षण छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक नोटिस समस्त जिला शिक्षा
अधिकारियों के लिये निकाला गया . अब यक्ष प्रश्न यह है कि क्या यह नोटिस पालकों के
हित में किसी काम का है ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..



 



लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक जितेंद्र शुक्ला के द्वारा कोविड 19 लॉक डॉउन की अवधि
में निजी शालाओं के द्वारा वसूली गई फीस कि जानकारी देने बाबत जो आदेश निकाला गया
है इस आदेश का विधिक विश्लेषण पालक हित का है क्या
?



 आई.ए.एस जितेंद्र शुक्ला द्वारा निजी शाला संचालकों के द्वारा
छत्तीसगढ़ राज्य की शिक्षण व्यवस्था को विधिक दायरे लाने के लिए एक आदेश निकाला
गया है जो जन सामान्य के दृष्टिकोण से लुभावना है लेकिन विधिक दृष्टिकोण से इस
आदेश का महत्व तब स्पष्ट होगा जब इस आदेश के आधार पर कोई पक्षकार माननीय न्यायायल
के समक्ष परिवाद प्रस्तुत करेगा .  अगर
विधि विशेषज्ञों के दृष्टिकोण से विचार किए जाय तो इस आदेश में उल्लेखित शब्द निजी
शाला वाद प्रक्रिया को पेचीदा बना देगा . क्योंकि इस शब्द की विधि निर्देशित
परिभाषा भी परिवादी को स्पष्ट करने की विधि अपेक्षा रहेगी और यदि ऐसी परिस्थिति
बनी की परिवाद कार्यवाही में किसी भी पक्षकार ने इस तथाकथित शब्द "निजी
शाला" के विधिक मायने को चुनौती दी तो निश्चित तौर पर विषम विधिक स्थिति
उत्पन्न होगी . जिसके कारण परिवाद प्रकरण में न्यायालय और पक्षकारों को अपना पक्ष
स्पष्ट करने के लिए अतिरिक्त समय देना पड़ेगा . इसलिए परिस्थिति वश एक प्रश्न
जागरूक पालकों के लिए परेशान करने वाला साबित हो रहा है कि ऐसी विषम परिस्थिति
उत्पन्न करने की मंशा से क्या आई.ए.एस जितेंद्र शुक्ला ने इस शब्द का प्रयोग अपने
आदेश में किया है क्या
? अभी यह यक्ष विधिक प्रश्न अनुत्तरित है और वर्तमान विषम विधिक
स्थिति यह है कि इस विषय का खुलासा तब होगा जब यह मामला न्यायालय के समक्ष होगा
तथा
  वस्तुस्थिति से जन साधारण को अवगत होने का अवसर
भी तभी मिलेगा ,जब इस विषय पर न्यायालय का कोई निर्णय आएगा
  .



आई.ए.एस जितेंद्र शुक्ला के आदेश में उल्लेखित शब्द "निजी
शाला" का वैधानिक औचित्य क्या है
?



निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम २००९ में कहां
अभिलखित की गई है "निजी शाला" की परिभाषा , जब यह जानने के लिए एक
व्यथित परिवादी के दृष्टिकोण से इस अधिनियम को पढ़ा गया तो "निजी शाला"
जैसे शब्द का उल्लेख कहीं नहीं मिला .गौर तलब रहे कि इस अधिनियम में शाला के
4 प्रकार
अभिनिर्देशित किए गए है जो इस प्रकार है निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार
अधिनियम २००९ की धारा २ (ढ) में अभिलिखित है कि
, प्रारंभिक शिक्षा देने वाला कोई
मान्यता प्राप्त विद्यालय अभिप्रेत है
Section 2 (n) “School” means any recognised school imparting
elementary education and includes
और इसके अंतर्गत
चार प्रकार की शालाओं का उल्लेख है (
i) समुचित सरकार या किसी स्थानीय
प्राधिकारी द्वारा स्थापित
, उसके स्वामित्वाधीन या नियंत्राधीन कोई विद्यालय A school established, owned or controlled by
the appropriate Government or local authority (ii)
समुचित सरकार या स्थानीय प्राधिकारी से अपने सम्पूर्ण व्यव या उसके
भाग की पूर्ति करने के लिए सहायता या अनुदान प्राप्त करने वाला कोई सहायता प्राप्त
विद्यालय
An aided school receiving aid
or grants to meet whole or part of its expenses from the appropriate Government
or local body. (iii)
विनिर्दिष्ट प्रवर्ग का कोई विद्यालय a school belonging to specified body अर्थात २ (त) केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, सैनिक विद्यालय(iv) समुचित सरकार या
स्थानीय प्राधिकारी से अपने सम्पूर्ण व्यय या उसके भाग की पूर्ति करने के लिए किसी
भी प्रकार की सहायता या अनुदान न प्राप्त करने वाला कोई गैर-सहायता प्राप्त
विद्यालय
An unaided school not
receiving any kind of aid or grants to meet its expenses from the appropriate
Government or local authority
इन चार प्रकार के
विद्यालयों कि जानकारी कानून कि किताब में विधि निर्देशित है लेकिन तथाकथित "
निजी शाला " का उल्लेख नहीं है जिसकी खोजबीन परिवार प्रस्तुत करने के पूर्व
परिवादी कर रहे है
 .









पूरब टाइस, भिलाई। पूर्ण लाॅकडाउन होने मुनादी कराने के बाद भी गुरूवार को मोहारी मरोदा में 25 बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने वाली महिला शिक्षक समेत किराना दुकान संचालक के खिलाफ रिसाली निगम के अधिकारियों ने कार्यवाही की। लाॅकडाउन की समीक्षा करने अपर कलेक्टर व निगम आयुक्त प्रकाश कुमार सर्वे सुबह से ही भ्रमण पर थे। बार-बार चेतावनी के बाद भी लाॅकडाउन के नियमों को तोड़ने वालों से निगम के अधिकारियों ने कुल 4800 रूपए जुर्माना वसूल किया। 


पूरब टाइस, दुर्ग। 24 तारीख से 30 तारीख तक पूर्ण लॉक डाउन किया गया है जिसके तहत आज दुर्ग शहर के ग्रीन चौक में सघन चेकिंग अभियान चलाया गया बेवजह बाहर निकलने वालों को समझाइश दी. चालानी कार्यवाही भी की गई. जिसकी कमान मोहन नगर टी आई ने खुद सम्भाली हुई थी इसके अलावा शहर के व्यस्ततम चौराहे में कहीं भी इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था नजर नहीं आई। 

पुलिस विभाग में लगभग डेढ़ सौ से ऊपर पुलिसकर्मी हो चुके हैं कोरोना संक्रमित चौक चौराहे में पर्याप्त पुलिस बल नहीं होने के कारण के जनता नियमों का पालन नहीं कर रही है अब देखने वाली बात होगी क्या बिना पुलिस बल के आम जनता इस महामारी से अपना बचाव करती है या फिर आम जनता को पुलिसिया डंडा खाकर ही नियमों का पालन करना पड़ेगा।@GI@