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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



दुर्ग। पुलिस अधीक्षक प्रशांत ठाकुर के मार्गदर्शन में एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर  रोहित झा के निर्देशन में दुर्ग क्षेत्र के अंतर्गत चोरी अवैध सट्टा जुआ अवैध शराब के घटनाओं को देखते हुए जुआरियों और अवैध कारोबारियों के विरुद्ध आरोपियों की पतासाजी के लिए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में गठित टीम द्वारा गया।


दुर्ग। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आज दुर्ग जिले के जामगांव में स्थित आंगनबाड़ी भवन में बच्चों के बीच पहुंचे। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर बच्चे काफी उत्साहित हुए। इस उत्साहपूर्ण महौल में मुख्यमंत्री ने बच्चों से कुछ सवाल भी पूछे और पढ़ने के लिए पुस्तक और अन्य पठन सामग्री प्रदान किये। इस दौरान मुख्यमंत्री बघेल ने आंगनबाड़ी भवन में बने बोर्ड पर बच्चे सबसे अच्छे लिखकर बच्चों का उत्साहवर्धन कर उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जामगांव में महिला स्वसहायता समूह के द्वारा बने उत्पादों का निरीक्षण कर उसकी जानकारी भी ली।

बच्चे सबसे अच्छे, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने हाथों से ब्लैक बोर्ड पर यही बात लिखी। वो दुर्ग जिले के आर जामगांव में आंगनबाड़ी के बच्चों से मिलने पहुंचे थे। पाटन विधानसभा में 101 आंगनबाड़ी केंद्रों के रेनोवेशन के बाद उनका लोकार्पण किया। यह काम वेदांता समूह के सहयोग से हुआ। इस केंद्र में ऑडियो विजुअल की सुविधा से बच्चों को कुछ नया सिखाया जाएगा। आंगनबाड़ी की दीवारों पशु पक्षियों के चित्र थे, सीएम ने एक- एक कर सभी बच्चों से पूछा ये क्या है, छोटे-छोटे बच्चों ने इसका जवाब दिया।
इन सेंटर्स में टीवी सेट की व्यवस्था की गई है। हाइजिनिक किचन बनाया गया है। वाटर फ़िल्टर की सुविधा है। दीवारों पर कविताएं लिखी हैं, कार्टून कैरेक्टर्स बने हैं, जिससे बच्चों को यहां समय बिताना अच्छा लगेगा। जिला कार्यक्रम अधिकारी विपिन जैन ने बताया कि यहां की कार्यकर्ता मोहिनी म्हस्के और सहायिका देवेंद्री श्रीवास ने सुपोषण को लेकर बहुत अच्छा काम किया है तथा अपने केंद्र को कुपोषण से मुक्त किया है। इस पर मुख्यमंत्री ने दोनों का सम्मान किया।@GI@

भिलाई। दीपावली का पर्व नजदीक आते ही शहर के सभी प्रमुख बाजारों में उमडऩे वाली भीड़ की सुरक्षा को लेकर कोई इंतजाम नहीं किया गया है। बाजारों के आसपास पुलिस जवानों की तैनाती अब तक सुनिश्चित नहीं होने से ठगी, चोरी व लूट जैसी वारदात की संभावना बढऩे लगी है। त्योहारी भीड़ में पेशेवर गिरोह के अपराधियों के अपने शिकार की तलाश में सक्रिय हो जाने की खबर है। त्योहारी खरीददारी के लिए अपने साथ मोटी रकम लेकर बाजारों में पहुंचने वालों के साथ अनहोनी की आशंका बनी हुई है। 

अब तक पुलिस प्रशासन की त्योहारी भीड़ को सुरक्षा देने के प्रति कवायद को अंजाम नहीं दिए जाने से ऐसी आशंका उभरने लगी है। हर साल दशहरे के बाद ज्यादातर लोग दीपावली की खरीददारी के लिए निकलते हैं। लिहाजा बाजार में भीड़ उमडऩे पर ठगी, चोरी और लूट को अंजाम देने वाले पेशेवर अपराधिक गिरोह की सक्रियता स्वभाविक रूप से बढ़ जाती है। त्योहारी भीड़ की सुरक्षा और आर्थिक अपराध को रोकने बाजारों के आसपास पुलिस के वर्दीधारी के साथ ही सादी वर्दी में भी जवानों की तैनाती सुनिश्चित की जाती रही है। लेकिन इस बार ऐसा कोई इंतजाम अब तक नहीं किए जाने से त्योहारी भीड़ के साथ अनहोनी की आशंका बढ़ गई है।

दरअसल, हाल ही में जिले के ग्रामीण इलाके में मोटर साइकिल की डिकी से रुपए उड़ाने का मामला पेश आ चुका है। बीते सोमवार को लिटिया सेमरिया चौकी क्षेत्र में जिला सहकारी ग्रामीण बैंक से एक लाख 80 हजार रुपए निकालकर होटल में नास्ता करने बैठे गोविंद वर्मा वारदात का शिकार हो गए। किसी ने मोटर साइकिल की डिकी में रखे एक लाख 80 हजार रुपए को पार कर दिया। इसी तरह का एक मामला गुरुवार को जिले के धमधा थाना इलाके में पेश आया है। बोरी में देशमुख ट्रेडर्स का संचालन करने वाले श्रवण कुमार देशमुख ने धमधा के बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से दो लाख 40 हजार रुपए निकालकर बैग में भरने के बाद अपनी कार की डिकी में रखा था। 

डिकी में लॉक नहीं था और वे कार को खड़ी कर होटल में चाय पीने के बाद चक्का पंचर होने पर उसे बनाने गए। इसी दौरान किसी ने रुपयों से भरा बैग उड़ा लिया। इसी कड़ी में शुक्रवार को नंदिनी थाना क्षेत्र में अहिवारा रोड पर बानबरद निवासी प्रकाश खुटेल की खड़ी मोटर साइकिल की डिकी से किसी ने 60 हजार रुपए पार कर दिया। यह राशि प्रकाश खुटेल ने एसबीआई की नंदिनी नगर शाखा से निकाला था। तीनों वारदात में पेशेवर गिरोह के शामिल होने की सभावना जताई जा रही है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि ग्रामीण क्षेत्र के बाद अब पेशेवर अपराधिक गिरोह शहर की त्योहारी भीड़ को अपना शिकार बना डाले।

यहां पर यह बताना भी लाजिमी होगा कि इन दिनों जिला मुख्यालय दुर्ग के इंदिरा मार्केट, सदर बाजार और सराफा लाइन में खरीददारी के लिए लोगों की अच्छी खासी भीड़ उमडऩे लगी है। इसी तरह भिलाई शहर के पावर हाउस स्थित जवाहर मार्केट, सर्कुलर मार्केट, नंदिनी रोड, लिंक रोड, सुपेला के आकाशगंगा, उत्तर व दक्षिण गंगोत्री, लक्ष्मी मार्केट सहित टाउनशिप की सिविक सेंटर तथा अन्य सेक्टर के मार्केट ग्राहकों से गुलजार होने लगा है। त्योहारी खरीददारी के चलते लोग मोटी रकम लेकर बाजार पहुंच रहे हैं। ऐसे में भीड़ का फायदा उठाकर पेशेवर अपराधी आर्थिक अपराध को कभी भी अंजाम दे सकते हैं।

भिलाई। नगर पालिक निगम भिलाई क्षेत्र अंतर्गत हुडको सेक्टर एवं एचआईजी काॅलोनी के सड़कों का डामरीकरण किया जाएगा इसके लिए आज सुबह महापौर एवं विधायक भिलाई नगर देवेन्द्र यादव ने भूमिपूजन किया। कार्यक्रम स्थानीय पार्षद दिनेश यादव, एल्डरमेन और स्थानीय नागरिकों की उपस्थिति में कार्यक्रम विधिवत आयोजित हुआ। हुडको के दो अलग अलग स्थानों पर डामरीकरण लगभग 16 सौ मीटर सड़क का डामरीकरण की मांग वार्ड के नागरिकों द्वारा महापौर से की गई थी, जिसका भूमिपूजन पूरा होने के बाद वार्ड के नागरिकों ने क्षेत्र में विकास कार्य से खुशी जाहिर करते हुए महापौर व निगम प्रशासन का आभार व्यक्त किया। 

भूमिपूजन होने के बाद महापौर ने इंजीनियरों को शीघ्र ही सड़क डामरीकरण कार्य को पूरा करने के निर्देश दिए तथा उपस्थित नागरिकों से वार्ड के विकास संबंधी चर्चा किए। जोन 01 भिलाई निगम क्षेत्र के हुडकों सेक्टर एचआईजी क्षेत्र के दो अलग अलग सड़कों के डामरीकरण किया जाएगा। 37 लाख की लागत से 1200 सौ मीटर और 400 सौ मीटर सड़कों के डामरीकरण कार्य के लिए आज महापौर देवेन्द्र यादव ने भूमिपूजन किया। 

हुडकों सेक्टर के एचआईजी क्षेत्र में सड़को के नवीनीकरण होने क्षेत्र के नागरिकों को आने जाने में सहूलियत होगी। भूमिपूजन कार्यक्रम पश्चात महापौर यादव ने हुडकों क्षेत्र के नागरिकों से विकास संबंधी विभिन्न विषयों पर चर्चा किए और अन्य विकास कार्यों पर योजनाबद्ध तरीकों से काम करने की बात कही। भूमिपूजन एल्डरमेन नरसिंह नाथ, लोकेश साहू, सीजू एंथोनी, निगम के जोन 01 के आयुक्त सुनील अग्रहरि, ईई संजय शर्मा, एई सुनील दुबे एवं क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिक एवं निगम के इंजीनियर उपस्थित थे।



पूरब टाइम्स  भिलाई . जैसे-जैसे भिलाई निगम के चुनाव पास आ रहे हैं  वैसे-वैसे अनेक राजनेता  कोई भी मुद्दा लेकर मेंढक की तरह टर्राने लगे हैं. सबसे बुरे हालात तो  निगम के विपक्षी दलों व निर्दलीय  पार्षदों की है . पिछले लगभग 5 साल के कार्यकाल में  निगम में हो रही अनेक अनियमितताओं को जि़ंदा मक्खी की तरह निगलते रहे और मुंह से एक भी सवाल नहीं निकाला परंतु अब हड़बड़ी में निगम प्रशासन  महापौर और  एमआईसी के सदस्यों को घेर रहे हैं. इस बार के मामले में सफाई ठेके के बारे में हल्ला बोलने वाले पार्षद  अभी यह कहने की स्थिति में नहीं हैं कि यदि सफाई विभाग के कार्यों में भ्रष्टाचार व अनियमितताएं लगातार रही हैं तो उन्होंने पहले इसी मुस्तैदी से स्फाई विभाग के एमआईसी को कठघरे में क्यों नहीं लिया ? केवल इतना ही नहीं जब एक समाजसेवी ने इस मामले में लिखित में उन पार्षदों को नोटिस भी दिया था तब उसी वक़्त उसे संज्ञान लेकर  उक्त एमआईसी व स्वास्थ्य विभाग के विरुद्ध कार्यवाही की शुरुआत क्यों नहीं की ? क्या ऐसे मामले मिलिभगत से सलटा लिये जाते हैं और केवल चुनाव के समय अखबार में सुर्खियां पाने के लिये मुद्दे बनाये जाते हैं . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...



विशिष्ठ नारायण मिश्रा जैसे पार्षदों के कारण भिलाई की छवि धूमिल हो गई है . गौर तलब रहे कि शिक्षाधानी कहे जाने वाली भिलाई शिक्षा जगत में विशेष महत्व रखता है . भिलाई नगर को बुद्धिजीवियों का शहर माना जाता है लेकिन विडंबना यह है कि भिलाई की शिक्षावादी छवि को निचले स्तर की गुंडागर्दी करने वाले वशिष्ठ नारायण मिश्रा जैसे पार्षद के निगम कार्य व्यवहार के कारण धूमिल होना पड़ता है . उल्लेखनीय है की वगत वर्षों में भिलाई निगम सभागार में मारपीट करने वाले गिनेचुने पार्षदों में से वशिष्ठ नारायण मिश्रा भी एक आरोपी है . जिसका विरोध शहर कांग्रेस और भिलाई निगम के कांग्रेसी पार्षद भी नहीं कर पाते हैं .  उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष से निगम हित का मामला कभी भी वशिष्ठ नारायण ने नहीं उठाया है   इसके विरूद्ध निगम सभागार में गुंडागर्दी करके निगम हित के कई मामलों को वशिष्ठ नारायण जैसे पार्षदों ने फाइलों में दबाए रखने के लिए अधिकारियों की मदद तक की .  अब चुनाव फिर से आ गए है इसलिए क्या निगम कार्यवाहियों में किए गए अभद्र व्यवहार को छिपाने के लिए वशिष्ठ नारायण मिश्रा सफाई मामले को उठाने का प्रयास कर रहा है ? और इस ठेके का विरोध करने वाले पार्षदों  के कार्याचरण  को गलत दिशा दिए जाने की कुटिल कोशिश भी जारी है


भिलाई का सफाई ठेका मामला निगम कार्यवाही का हिस्सा है . इसमें ठेका कार्यवाही करने की जिम्मेदारी निगम आयुक्त की है और इस ठेके कार्यवाही में ठेका अनुबंध अनुसार सभी निगम हित संरक्षित करने की पदेन जिम्मेदारी स्वास्थ्य अधिकारी की है . चूंकि यह मामला सीधे निगम कार्यवाही से जुड़ा है और आयुक्त तथा उसके अधीनस्थ कर्मचारी सफाई ठेके मामलों को कार्यान्वित करने वाले प्राधिकारी है इसलिए निगम अधिनियम के विधिक दृष्टिकोण से इनके विरूद्ध चलाए जाने वाले मामले विधि निर्देशानुसार निगम अपील समिति के समक्ष चुनौती देने वाले मामले है . लेकिन वशिष्ठ नारायण जैसे पार्षद  निगम क्षेत्र में अपनी पूछ परख बढ़ाने के लिए निगम ठेका कार्यवाहियों को संदेह के दायरे लाने की कार्यवाही करते नजर आते है जबकि प्रावधानानुसर होना यह चाहिए कि सफाई ठेके से असंतुष्ट पक्षकार इस मामले को लेकर सीधे निगम अपील समिति के समक्ष चुनौती दे कर कार्यवाही करें . ऐसे मामलों में  वशिष्ठ नारायण कैसी कार्यवाही करता है  यह सभी जानते है ? 


भिलाई के सफाई ठेके मामले में जब समाज सेवक अमोल मालुसरे से पूरब टाइम्स प्रतिनिधि ने प्रतिक्रिया मांगी तो इस मामले को न्यायालय में सुलझने वाला मामला बताकर प्रतिक्रिया दी कि भिलाई निगम का सफाई ठेका विवादों के घेरे में विगत कई वर्षों से है . जिसके लिए मैं नोटिसकर्ता बनकर बाकायदा लिखित नोटिस देकर सभी पार्षदों को पूर्व में चुनौती दे चुका हूं लेकिन वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने मेरे नोटिस पर प्रतिक्रिया नहीं की . इसके बाद किवार कंपनी का मामला सामने आया . इस पर भी वशिष्ठ नारायण मिश्रा ने कोई ऐसी कार्यवाही नहीं की   जिससे यह लगे कि विशिष्ट नारायण जैसा विवेकहीन नेता जो निगम सभागार में मारपीट करके भय का वातावरण बनाने की पहचान रखता है  वह सफाई मामले में अपनी निर्वाचित जिम्मेदारी निभा रहा है . अब जब इस बार भी निगम ठेका हुआ है और वशिष्ठ नारायण मिश्रा फिर से माहौल बना कर अखबारों में स्थान बनाना चाहता है . यह व्यवहार कितना जायज है ? यह न्यायालयीन कार्यवाही के निर्णय के आधार पर तय होगा इसलिए अगर वाकई वशिष्ठ सफाई ठेके मामले में कुछ जनहित का काम करना चाहता है तो इस मामले को परिवाद के रूप में न्यायालय के समक्ष लाएं . तृतीय पक्षकार के रूप में मै अमोल मालुसरे उसका स्वागत करता हूं 



गौरतलब है कि सफाई कर्मियों द्वारा रविवार के दिन कार्य कराए जाने, ओवर टाइम का भुगतान नहीं होना, भाजपा शासन के समय वार्ड 1 से 10 एवं 51 से 60 तक रिक्शा चालक के रूप में कार्यरत कामगारों को सितंबर 2017 में प्लेसमेंट से एमसीसी में डाल दिया गया उन्हें पुनः प्लेसमेंट में बहाली करने, भविष्य निधि फंड, चिकित्सा फंड की निगम कार्यालय से जानकारी देने, सफाई कामगारों का पक्ष सुने बिना वेतन काटने, सफाई सुपरवाइजर को लोकेशन फोटो के माध्यम से 7 बार फोटो मंगाए जाने एवं दीवाली के अवसर पर प्रोत्साहन राशि देने जैसी मांगें आयुक्त इंद्रजीत बर्मन से पूर्व में की गई थी किन्तु सुनवाई नहीं हो सकी थी। जिसके बाद कर्मियों ने कामबंदी व घेराव का निर्णय लिया।

शहर में सफाई व्यवस्था ठप्प होने की जानकारी विधायक अरुण वोरा को मिलने पर उन्होंने महापौर एवं आयुक्त को सफाई कर्मियों की सभी जायज मांगों को तत्काल मान कर सफाई व्यवस्था बहाल करने का आग्रह करते हुए कहा कि वर्तमान में कोविड-19 महामारी के बीच दीपावली का त्यौहार सामने है जिसमें सफाई कामगारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। कहीं भी कोरोना वारियर्स के रूप में सेवा देने वाले कर्मचारियों का अहित नहीं होना चाहिए। दिल्ली प्रवास में होने के बावजूद विधायक वोरा लगातार घटनाक्रम पर नजर रखते हुए कलेक्टर, महापौर एवं आयुक्त से फोन पर संपर्क बनाए हुए थे।

वोरा की पहल के बाद पुलिस बल द्वारा गेट पर ही रोक दिए गए हड़तालियों को अंदर बुलवाकर महापौर धीरज बाकलीवाल, सभापति राजेश यादव, आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा कामगारों के प्रतिनिधिमंडल से सकारात्मक चर्चा की गई जिसमें ज्यादातर मांगों को मानते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति ना उत्पन्न हो इसके लिए स्वास्थ्य प्रभारी के नेतृत्व में एक समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। साथ ही दीवाली पर 15 प्रतिशत बोनस देने का भी आश्वासन दिया गया।@GI@

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्राधिकारी जनहित के लिए क्या कर रहे हैं ?

क्या प्रदेश की आर्थिक स्थिति सुदृढ़  करने के लिए  सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों का कोई योगदान है ?

सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों के लिएअनिवार्यतः अनुपाल नियम का पालन किया जाता है ?

पूरब टाइम्स, भिलाई. पिछले दिनों पूरब टाइम्स ने प्रमुखता से एक खबर छापी थी जिसमें सीएसपीडीसीएल की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगाने वाला समाचार था. उस खबर को भिलाई के अनेक च्चाधिकारियों को  संज्ञान करवा, उनसे इस बाबत अपना वर्शन व प्रतिक्रिया हेतु समय देने का अनुरोध  किया था . केवल नगर संभाग (प) के एक  अधिकारी ने प्रतिक्रिया दिखाई. उनके द्वारा बिना चर्चा किये गये समय निर्धारित करने की सूचना आखरी दिन पत्र द्वारा भेज दी गई परंतु जब उस पत्र में दर्शाए गये  फोन नंबर पर बात करनी चाही तो किसी ने फोन नहीं उठाया . केवल इतना ही नहीं, उस  पत्र में दर्शाये गये ई-मेल पते पर चिट्ठी लिखी तो वह मेल भी यह बताते हुए वापस  हुई कि पता गलत है. ऐसे में पुनः अखबार के माध्यम से उनकी एक और कोताही पर पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट .....

छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के प्राधिकारी क्या मुख्यमंत्री की छवि धूमिल करना चाहते हैं ?

सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों ने विभागीय कार्यवाहियों को पारदर्शी बनाए रखने के लिए कुछ भी ऐसा नहीं किया है जो यह  प्रमाणित करें कि इस विभाग की कार्यवाहियां नियमानुसार कार्यान्वित होती है. जबकि  सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 में स्पष्ट दिशा निर्देश व प्रावधान  है कि समस्त विभागीय कार्यवाही तक सर्वसाधारण की सार्वजनिक पहुंच स्थापित की जाए. चूंकि  सीएसपीसीडीएल के विभागीय कार्य  व्यवहार पब्लिक डोमेन पर नहीं है इसलिए कई शंकाओं को जन्म देते है और अनियमितताओं  को गैर काननी संरक्षण भी देते दिखाई पड़ रहे है . सूत्रों के अनुसार जल्द ही कई अनियमितता सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों के आपसी टकराहट के कारण सुर्खियों में  अपना स्थान बना लेंगे और न्यायालय में पहुंच जाएंगे .

सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने लिए क्या कर रहे हैं ?

सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों ने फील्ड कार्य कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए क्या इंतजामात किए हैं. इसका खुलासा भी प्रशासनिक स्तर से नहीं किया जाता ह. जिसके कारण प्रतीत होता है कर्मचारियों की सुरक्षा इंतजाम करने के प्रति सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों ने उदासीन कार्यनीति से कार्य करने का मन बनाए रखा है. उल्लेखनीय है कि विगत वर्षों में फील्ड कर्मचारी जो दुर्घटनाओं के शिकार हुए है, उनके साथ घटित दुर्घटनाओं के लिए कौन जिम्मेदार है ? इसका भी खुलासा सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों ने नहीं किया है, इसलिए यह  प्रमाणित होता है कि इस मामले में बहुत गड़बड़ियां अभी भी फाइलों में दबी है.

मध्यप्रदेश में कार्य करने को मजबूर छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों के लिए सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों ने क्या किया है?

मध्यप्रदेश से विभाजित होकर छत्तीसगढ़ राज्य से अलग होने के बीस वर्ष बाद भी छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को आज भी मध्यप्रदेश में नौकरी करने को मजबूर होना पड़ रहा है. जबकि ऐसे कर्मचारी  छत्तीसगढ़ गठन के बाद से ही छत्तीसगढ़ वापसी के लिए कानूनी लड़ाई लड रहे है. उल्लेखनीय  है कि स्वयं को छत्तीसगढ़ी मुख्यमंत्री बताने वाले भूपेश बघेल के द्वारा छत्तीसगढ़ के निवासी कर्मचारियों केआवेदन पर कार्यवाही करने के आदेश दिया जाने की जानकारी भी आवेदक दे रहे हैं लेकिन इस संबंध में सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों कोई ठोस  कार्यवाही नहीं कर रहें है. सूत्रों के अनुसार भाजपा के कार्यकाल के कार्य  प्रणाली आज भी सीएसपीसीडीएल के प्राधिकारियों पर हावी है. जिसके प्रमाण स्वरूप आज भी सीएसपीसीडीएल के अनेक लोगों को छत्तीसगढ़ से बाहर नौकरी करने को मजबूर होना पड़  रहा हैं.


दुर्ग। जिला पंचायत द्वारा स्व सहायता समूह की महिलाओं के कौशल संवर्धन के लिए विशेष प्रयास किए जाते रहे हैं। इसी कड़ी में एनआरएलएम (बिहान) के तहत महिलाओं को बाँस से दैनिक उपयोग की विभिन्न चीजें निर्मित करने का प्रशिक्षण दिया गया। जिला पंचायत सीईओ सच्चिदानंद आलोक ने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को अलग-अलग तरह के उत्पाद निर्माण की ट्रेनिंग दी जाती है, ताकि कौशल संवर्धन के साथ-साथ आजीविका के साधन भी निर्मित हों। साथ ही इको फेंडली एवं सस्टेनेबल लाइवलीहूड में बाँस के बहुआयामी उपयोग को देखते हुए इस प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। 

बाँस आसानी से उपलब्ध होता है। इसलिए इनसे बहुत से उपयोगी सामग्रियों का निर्माण सीख कर महिलाओं ने एक नया हुनर भी सीखा। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रशिक्षक गनी जमान ने दिया प्रशिक्षण, बताया बाँस से सैकड़ों उत्पाद हो सकते हैं निर्मित- महिलाओं को प्रशिक्षण देने के लिए वल्र्ड बैम्बू ऑर्गेनाइजेशन तथा द बैम्बू फोरम ऑफ इंडिया की सदस्य भी है। करीब 25 सालों से गनी जमान बाँस के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। विशेष रूप से इन महिलाओं को प्रशिक्षित करने आए जमान ने बताया कि इससे पहले उन्होंने आर्किटेक्चर की विद्यार्थियों को आधुनिक एवं वैज्ञानिक तरीके बाँस का इस्तेमाल भवन निर्माण में करने की ट्रेनिंग दी है।

बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सीईटी भुवनेश्वर, गुवाहाटी कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर एसबीए विजयवाड़ा, गीतम यूनिवर्सिटी डिपार्टमेंट ऑफ आर्किटेक्चर विशाखापट्टनम, श्री यूनिवर्सिटी कटक, वेल्लोर इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी, मेस्ट्रो स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया है। लेकिन इन महिलाओं के साथ काम करने का अलग ही अनुभव रहा उन्होंने बताया कि महिलाएं अपने घर पर ही रह कर बाँस से दैनिक उपयोग की सैकड़ों चीजें बना सकती हैं और विक्रय कर आमदनी अर्जित कर सकती हैं। महिलाओं को ट्रेनिंग देकर एक आत्म संतुष्टि हुई क्योंकि इससे आर्थिक स्वावलंबन के साथ-साथ उनके आत्मविश्वास में भी बढ़ोतरी होगी। 


सामाजिक कार्यकर्ता रोहन मून  ने कहा कि 20 वर्षों का सफर तय करते हुए छत्तीसगढ़ ने विकास के पथ को चुना। यही वजह है कि कम समय में भी छत्तीसगढ़ महतारी ना सिर्फ धान की हरियाली से लहलहा रही है, साथ ही औद्योगिक क्षेत्र में भी छत्तीसगढ़ की अलग पहचान बन चुकी है। वहीं अर्पण सेवा समिति की सदस्य मोनिका ठाकुर ने कहा कि छत्तीसगढ़ कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली जरूरतमंदों के लिए वरदान एवं पूरे देश में मिसाल बनी हुई है।

पूरब टाइम्स,दुर्ग। दुर्ग पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन थानों की संयुक्त कार्रवाई में हजारों रुपए की कफ सीरप व टेबलेट बरामद की गई है। इस आशय की जानकारी देते हुए एडिशनल एसपी रोहित झा ने बताया कि दुर्ग पुलिस के द्वारा जियो खुलकर नशा मुक्ति अभियान के अंतर्गत पुलिस अधीक्षक दुर्ग के निर्देशन में व सीएसपी दुर्ग विवेक शुक्ला व प्रशिक्षु उप पुलिस अधीक्षक चित्रा वर्मा के द्वारा अवैध मादक पदार्थों के व्यापारियों पर लगाम लगाने के लिए लगातार अभियान चलाकर कार्यवाही की गई।

मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर चौकी पद्मनाभपुर क्षेत्र अंतर्गत केलाबाड़ी दुर्ग में आरोपी एजाज अहमद 29 साल को नशीली दवाई विक्रय करते हुए गिरफ्तार किया गया आरोपी के पास से 136 सीसी 3X कोरेक्स कफ सिरप इसकी कीमत 20400 है एवं नगदी 2050 जप्त किया गया इसी प्रकार थाना दुर्ग क्षेत्र अंतर्गत सूचना मिली कि आरोपी मनीष वर्मा द्वारा अपने घर के सामने नशीली दवाइयां बेच रहा है। जिसको तत्काल घेराबंदी कर पकड़ा गया आरोपी के कब्जे से 46 नग रेक्समास सिरप कीमत 5220 जप्त किया गया।

इसी कड़ी में थाना नेवई के अंतर्गत रेड की कार्रवाई कर अनिल सिंह उम्र 40 वर्ष को कृतिका मेडिकल में प्रतिबंधित मादक औषधि विक्रय करते पकड़ा गया आरोपी के कब्जे से प्रतिबंधित नशीली दवाई कोडीन युक्त सीरप पकड़ी गई। सहित विभिन्न कार की नशीली दवाइयों को पकड़ा गया है। आरोपियों के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई कर पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है उपरोक्त संपूर्ण कार्यवाही में मुख्य रूप से नेवई थाना प्रभारी भावेश साव, उप निरीक्षक नरेश सर्वा, चौकी प्रभारी पदमनाभपुर, उप निरीक्षक पवन देवांगन निरीक्षक भुनेश्वर यादव प्रधान आरक्षक लेखपाल साहू आरक्षक शरद सिंह, देवेंद्र कमलेश यादव, ललित साहू जावेद खान, प्रदीप ठाकुर, धीरेंद्र यादव , आशीष साहू राहुल दुबे एवं ड्रग इंस्पेक्टर आस्था वर्मा व पितांबर साहू की महत्वपूर्ण भूमिका रही।@GI@)

पूरब टाइम्स, दुर्ग। निगम आयुक्त इंद्रजीत बर्मन द्वारा आज निगम डाटा सेंटर में सुबह और दोपहर दो पालियों में निगम अधिकारियों की बैठक लेकर सांसद निधि, विधायक निधि, अधोसरंचना मद, संधारण मद, महापौर निधि से होने वाले कार्यो की समीक्षा की। उन्होनें लोक कर्म विभाग, जलकार्य विभाग, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित कर कहा निदान 1100 में मिलने वाले शिकायतों का समय पर निराकरण नहीं करने के कारण नगर निगम दुर्ग का ग्रेड अन्य निगमों से नीचे आ रहा है। उन्होनें सभी अधिकारियों को निर्देशित कर कहा राज्य शासन की योजना पौनी पसारी योजना, गौठान, ठगड़ाबांध सौदर्यीकरण, शंकर नाला निर्माण आदि महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारी लेकर आगामी बैठक में उपस्थित होंवे।

समीक्षा बैठक में आयुक्त बर्मन ने सांसद निधि, विधायक निधि, अधोसरंचना मद, महापौर निधि निगम मद से होने वाले कार्यो की निविदा और उसके कार्य आदेश की जानकारी ली। उन्होनें कार्य आदेश के बाद 6 माह से एल साल तक रोक रखे कार्यो एवं अब तक कार्य प्रारंभ नहीं करने वाले ठेकेदार मंजरी शर्मा, राज इंटरप्राइजेस, गीता बिल्डर, मेसर्स संज्ञा कंन्ट्रक्शन सहित करीब 9 ठेकेदारों के निविदाओं को निरस्त कर पुनः निविदा आमंत्रित करने अधिकारियों को निर्देश दिये।

उन्होनें कहा जिन कार्यो में 15 से 20 प्रतिशत ही कार्य बचा है उसे 15 दिनों के अंदर पूरा अवगत करायें। इसके अलावा जिन कार्यो की निविदा होकर कार्य आदेश नहीं हुआ है उसे अधिकारी जल्द से जल्द कार्य आदेश जारी कर कार्य प्रारंभ करावें। उन्होनें कहा जिन ठेकेदारों द्वारा कार्य आदेश प्राप्त करने के बाद विकास कार्य प्रारंभ नहीं किया है और समय समाप्ति पर है से ठेकेदारों के निविदा निरस्त कर पुनः निविदा आमंत्रित किया जावे । काम नहीं करने वाले ठेकेदारों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी। उन्होनें अमृत मिशन सहित सांसद, विधायक, महापौर, संधारण मद, निगम मद के रुके कार्यो को जल्द से जल्द प्रारंभ कर अवगत करायें।

समीक्षा बैठक के दौरान उन्होनें कहा निगम विभागों के अधिकारियों द्वारा मुख्यमंत्री से प्राप्त शिकायतों, निदान 1100 में होने वाले शिकायतों सहित अन्य शिकायतों का निराकरण समय पर नहीं किया जाता है। सबसे अधिक नल घर विभाग की शिकायत है जिसका निराकरण नहीं किया गया। इसी प्रकार शिकायतों का निराकरण नहीं करने वाले विभाग लोक कर्म विभाग, राजस्व विभाग, स्वास्थ्य विभाग कर्मशाला विभाग शामिल है। निदान 1100 के शिकायतों का निराकरण नहीं करने के कारण नगर निगम दुर्ग का ग्रेड अन्य निगमों से नीचे स्तर पर है । उन्होनें कहा आगामी बैठक में अधिकारी पौनी पसारी योजना, ठगड़ा बांध सौदर्यीकरण कार्य, गोठान योजना, शंकर नाला निर्माण कार्य की प्रगति, आदि योजनाओं की संपूर्ण जानकारी लेकर उपस्थित होवे।

बैठक में कार्यपालन अभियंता सुशील कुमार बाबर, राजेश पाण्डेय, सहा. अभियंता जितेन्द्र समैया, जगदीश केशवानी, उपअभिंयंता व भवन अधिकारी प्रकाशचंद थवानी, सहा. भवन अधिकारी गिरीश दीवान, उपअभियंता राजकिशोर पालिया, ए.आर. राहंगडाले, कु. आसमा डहरिया, भारती ठाकुर,  अर्पणा मिश्रा, भीमराव, विनोद मांझी, के अलावा राजेन्द्र ढबाले एवं मनोहर साहू, भूपेन्द्र गोईर व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।@GI@)

पूरब टाइम्स,दुर्ग। संतरा बाड़ी गुरुद्वारा स्टेशन रोड  पर स्थित भारत फर्निशिंग दुकान के सामने दुर्ग निगम के सफाई कर्मी ने नाली की सफाई की पर वहा से कचरा उठाना भूल गए। निगम की ओर से साफ-सफाई के नाम पर बस खानापूर्ति की जा रही है। समुचित तरीके से कचरा का उठाव नहीं किया जाता है शहर में जहां-तहां कचरा फेंका रहता है। आलम यह है कि नाली की सफाई के नाम पर कचरा निकाला जाता है। नाली का कचरा निकालकर सड़क पर ही छोड़ दिया जा रहा है। 

गुरवार को संतरा बाड़ी गुरुद्वारा स्टेशन रोड पर स्थित भारत फर्निशिंग दूकान के सामने नाली से कचरा निकाल कर दुकान के सामने ही रख दिया। नाली का कचरा दुकान के बाहर रखने से फैल रहे बदबू से स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ी हुई है। सुबह से लेकर शाम तक ग्राहक आना जाना करते है. इसे उठाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई। गंदगी से उत्पन्न बदबू से दुकान के अंदर प्रवेश करने व आने जाने वाले लोगों को नाक पर रुमाल रखकर गुजरना मजबूरी हो गई।

वहीं स्थानीय लोग इसे नगर निगम की लापरवाही बता रहे थे। स्थानीय लोगों का कहना है कि नाली की सफाई के दौरान ही उसे ऐसे किसी कचरा उठाने वाले वाहन पर रखा जाना चाहिए था। जिससे कि कचरा निकालने के साथ तुरंत उसे दूसरे जगह फेंका जा सके। ऐसी व्यवस्था नहीं करने से कचरा निकालकर दो-तीन दिनों तक सड़क पर छोड़ दिया जाता है। इस दौरान नाली से बाहर निकाला गया कचरा फिर नाले में चला जाता बाकी के कुछ कचरा का  उठाव किया जाता है।


पूरब टाइम्स, रिसाली. कोरोना काल में बिहार विधानसभा के चुनाव व मध्यप्रदेश के उपचुनाव होने के बाद, अब यह संभावना खत्म हो गई है कि कोरोना का नाम लेकर रिसाली नगर निगम के चुनाव को अपने समय से आगे स्थगित किया जाये. इस बात से अब रिसाली में राजनैतिक चर्चाओं का ज़ोर चल गया है. एक तरफ कांग्रेस की राज्य सरकार द्वारा अपने ही निर्वाचित पार्षदों के चुनाव को शून्य बतला , उन्हें समय से पहले पूर्व पार्षद बनाने से , रिसाली की आम जनता सवाल उठाने लगी है . वहीं रिसाली निगम के नव-मनोनीत एल्डरमैन यानि आज वहां के “ बेताज बादशाह “, अब निर्वाचित पार्षदों की भूमिका में राजनीति करते दिख रहे हैं. इस बात से जहां उन कांग्रेसी , ’ पूर्व पार्षदों ‘ उनके समर्थकों के माथे पर बल ला दिया है कि क्या यह एक सोची समझी रणनीति के तहत उनके वजूद को समाप्त करने की साज़िश थी ? यदि डैमेज कंट्रोल नहीं किया तो अच्छे खासे बहुमत वाले इस निगम में कांग्रेस में भीतराघात की संभावना से नहीं इंकार किया जा सकता है. उधर भाजपा की हालत पहले से दयनीय थी, नेतृत्वहीनता साफ दिखाई देती है. जिले में भाजपा के बड़े चेहरे , विजय बघेल या पाण्डेय द्वय में से किसी के द्वारा, यदि कोई उझारू या आक्रामक कैंपेन नहीं चलाया गया तो इस निगम में भाजपा द्वारा वाक-ओवर देने की स्थिति बन सकती है. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट...

रिसाली क्षेत्र विकास से कोसों दूर है अब कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशी जनता का सामना कैसे करेंगे ?
रिसाली क्षेत्र का विकास असंतोष जनक है इसलिए रिसाली के पार्षद जनता और प्रेस का सामना करने की स्थिति में नहीं है प्रेस के प्रश्नों का जवाब देने और अपना पक्ष रखने में असहज महसूस कर रहे हैं उल्लेखनीय है की जो पार्षद भिलाई निगम की समयावधि में रिसाली क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते रहे है वे आज अपने घरों में दुबके हुए है क्योंकि अब कांग्रेस के पार्षदों से जनता द्वारा प्रश्न करने का समय आ गया है और पार्षदों के सामने उत्तर देने की परिस्थिति बन गई है आगामी निगम चुनावों में कांग्रेस के पार्षदों को जनता के प्रश्नों का जवाब देना पड़ेगा और जनता के सामने यह भी स्पष्ट करना पड़ेगा कि अविभाजित भिलाई निगम के कार्यकाल में रिसाली क्षेत्र उपेक्षित क्यों था ?
     रिसाली निगम में भाजपा पार्षदों को जनादेश मिलेगा क्या ?
जन सामान्य की अपेक्षाओं को निगम प्रशासन तक पहुंचने में विफल होने वाली रिसाली  भाजपा के पार्षद निगम चुनावों में जनता का सामना कैसे करेंगे ? यह आने वाला समय बताएगा लेकिन अभी तो यह मामला जोर पकड़ रहा है कि रिसाली में भाजपा के कार्यकर्ता,  कांग्रेस के पार्षदों की उपलब्धियों पर कैसी प्रतिक्रिया करेंगे क्योंकि अब तक रिसाली क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के किसी भी पार्षद और जोन अध्यक्ष के कार्यों की समीक्षा करने की हिम्मत नहीं जुटाई है .  रिसाली भाजपा के कार्यकर्ताओं ने यह भी स्पष्ट नहीं किया है कि रिसाली भाजपा , कब रिसाली के पार्षदों के कार्यों की समीक्षा करेगी  इसलिए वर्तमान स्थिति इसी बात का संकेत दे रही है कि रिसाली भाजपा अपने कार्यकर्ता को इस बार निगम पार्षद के रूप में जनादेश दिलवाने में विफल हो जाएगी ? क्या भाजपा की , इस निगम में बहुमत लाने व अपना महापौर बनाने की इच्छा शक्ति ही नहीं रही जो पूर्व की शहर सरकार में कांग्रेस के राज की कमियों को उजागर नहीं कर रही है?  

भाजपा के दो सांसद सरोज पांडेय और विजय बघेल क्या इस बार भाजपा के पार्षद प्रत्याशीयों को जितवा पाएंगे ?
प्रदेश में भाजपा की दयनीय राजनीतिक स्थिति विधान सभा में तो है ही , इसके बाद निगमों के चुनाव में भी भाजपा अपने हिस्से के पार्षद नहीं जुटा पाई और सत्ता से बाहर बैठकर अपनी बारी का इंतजार कर रही है . उल्लेखनीय है कि दुर्ग निगम में भाजपा के बीस वर्षो का कार्यकाल अब समाप्त होकर कांग्रेस के हाथ में है और सरोज पांडेय की राजनीतिक स्थिति का अहसास करवाने के लिए यह दयनीय स्थिति काफी है . ऐसे ही कुम्हारी चुनाव में भी जनता ने भाजपा को बाहर का रास्ता दिखाकर यह साबित कर दिया है कि अब विजय बघेल की राजनीतिक भूमिका भी जनता के बीच उल्लेखनीय नहीं है.  इसलिए स्वाभाविक तौर पर यह प्रश्न सभी के विचारणीय बन गया है कि भाजपा के दो सांसद मिलकर रिसाली में कितने पार्षद प्रत्याशियों को चुनाव जितवा पाएंगे ? क्या वे रिसाली में भाजपा का महापौर बनवा पायेंगे ?

“बेताज बादशाह” और रिसाली के निर्वाचित पार्षदों का अमना सामना अब नए मोड़ पर है ?
रिसाली के एल्डर मैन शपथ ग्रहण समारोह में छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री ने नवनियुक्त एल्डर मैन को “बेताज बादशाह बताया” और उन्हें जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की नसीहत भी दी थी . जिसके बाद स्थानीय लोग मजाकिया अंदाज में एल्डर मैन को “बेताज बादशाह” के नाम से  पुकारे रहे है लेकिन गृहमंत्री द्वारा शपथ ग्रहण समारोह में एल्डर मैन लोगों को चेताए जाने के बाद भी एल्डर मैन अपनी राजनीतिक भूमिका “बेताज बादशाह”  वाली बनाने का प्रयास कर रहे है इसलिए रिसाली के निर्वाचित पार्षद और एल्डर मैन के बीच का टकराव बढ़ता जा रहा है और इसका दुष्परिणाम जल्द ही रिसाली क्षेत्र का राजनीतिक माहौल बिगाड़ने का कारण साबित होगा .



पूरब टाइम्स , भिलाई. मोदी लहर से , दुर्ग संसदीय क्षेत्र से  जीत का परचम फैलाने वाले भाजपा के सांसद विजय बघेल , यूं तो पूर्व के जुझारू व जागरुक भाजपाई कार्यकर्ता माने जाते थे  परंतु सांसद बनने के बाद उनके कार्याचरण से उनकी ही पार्टी के कार्यकर्ता हताशा महसूस कर रहे हैं . हो सकता है कि सांसद अब पार्षदों की पार्टीगत राजनीति में नहीं पड़ना चाहते हों .  भिलाई निगम में भाजपा पार्षद वार्डों में निगम आयुक्त की मनमानी पर भी अपने मातहत जन प्रतिनिधियों को सहारा व संरक्षण देने कभी सामने नहीं आये . चरोदा नगर निगम में तो खुद उनकी पार्टी भाजपा की मेयर से , वहां के कमिश्नर , जितना बता सकें उससे भी ज़्यादा अनुचित व्यवहार करते हैं जिसमें मेयर को प्रदत्त की जाने वाली सुख सुविधाओं को छीनने के अतिरिक्त उनके मूलभूत अधिकार का हनन भी करते हैं . सब कुछ जानने के बाद भी सांसद द्वारा शासन- प्रशासन स्तर पर आयुक्त के विरुद्ध क्रायवाही की अनुशंसा तो दूर , समझाइश देने की भी ज़हमत नहीं उठाई . अब रायपुर में जाकर अपनी खिचड़ी- अनशन से स्व-अभिभूत होकर , भूपेश सरकार को भगाने के दिवा स्वप्न देख रहे हैं . स्थानीय स्तर पर उनके चुनाव में रात-दिन कार्य करने वाले कार्यकर्ता , अब सोचने पर मजबूर हो गये हैं कि सांसद महोदय अब बड़े राजनेता बन गये हैं जिस तरह से उनकी ही पार्टी की दुर्ग की एक मैडम हो गईं थीं , अब “ उन्हीं सुश्री की तरह” स्थानीय व छोटी समस्या से उनको कोई लेना देना नहीं है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट .....

भिलाई और रिसाली निगम के परिसीमन मामले में सांसद विजय बघेल की लुकाछिपी वाली भूमिका पर जनता की नजर नहीं है क्या ?

भिलाई का परिसीमन मामला इन दिनों न्यायालय के समक्ष कार्यवाही प्रक्रिया में है और इस परिवाद पर होने वाली सुनवाई पर सभी की नजर है . इसके साथ - साथ भिलाई निगम के मतदाता यह आकलन कर रहे है कि सांसद विजय बघेल भिलाई के परिसीमन मामले में कैसे लुकाछिपी वाला राजनीतिक खेल कर रहे है ? उल्लेखनीय है कि परिसीमन मामला सीधे भाजपा के पार्षदों के निर्वाचन क्षेत्र को प्रभावित करेगा ,  ऐसा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष आरोप पूर्व में लगाए जा चुके है , जिसको सांसद अनसुना कर रहे है . परिणाम स्वरूप परिसीमन मामले में भाजपा समर्थित लोग न्यायालय तक पहुंचे क्योंकि उनकी सुनवाई जिला प्रशासन स्तर पर नहीं हुई और भाजपा कार्यकर्ताओं के द्वारा की गई दावा आपत्तियों को ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया गया . सांसद विजय बघेल इस परिस्थिति से भली भांति अवगत है लेकिन इस मामले में कोई प्रतिक्रिया नहीं कर रहे हैं . 

सांसद निवास वाले वार्ड की ‘ शाही अंदाज ‘ वाली सुख सुविधाओं से दुर्ग लोकसभा वंचित क्यों है ?

सांसद विजय बघेल क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं की स्थति क्या है ? यह जानने के लिए सांसद अपने आलीशान वाहन से बाहर निकल कर नहीं आते है . सांसद की वातानुकूलित गाड़ी और सर्व सुविधायुक्त कार्यस्थल से दुर्ग की जनता की समस्याओं का भी दर्शन सांसद विजय बघेल को नहीं होता है .  जब जनता अपनी व्यथा और परेशानी लेकर सांसद निवास पहुंचती है , तब सांसद निवास के निगम वार्ड में विकसित की गई शाही अंदाज की सुख सुविधाओं को देखकर यह जान जाती है कि सांसद विजय बघेल को दुर्ग लोकसभा की जन समस्याओं का आभास क्यों नहीं होता है और क्यों सांसद भिलाई निगम के मामलों में पाटन जैसा गैरकानूनी अड़ंगा डालने का विचार नहीं कर पाते है . उल्लेखनीय है कि सांसद निवास कार्यालय द्वारा आवेदकों से परिक्रमा करवाए जाने की अपेक्षाओं की चर्चा भी इन दिनों जोर पकड़ रही है . 

कानूनी प्रक्रिया पर पूरा विश्वास रखने वाले भिलाई के भाजपा कार्यकर्ता क्या पहले से जानते थे कि सांसद विजय बघेल को खिचड़ी बेहद पसंद है ?

जब भिलाई के नए 70 वार्डो का परिसीमन मामला जिला प्रशासन के पास कार्यवाही प्रक्रिया में था , तब भाजपा के कार्यकर्ता , कांग्रेस की राज्य सरकार के दबाव में कार्यरत, जिला प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखने में असहज महसूस कर रहे थे . ऐसे समय में भाजपा कार्यकर्ताओं को सांसद की अनुपस्थिति बेहद खल रही थी . बावजूद इसके भिलाई के संघर्षरत भाजपा कार्यकर्ताओं ने कानून हाथ में नहीं लिया और पाटन क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के समान सांसद विजय बघेल के बहकावे में आकर भिलाई वालों ने कानून हाथ में लेने की गलती नहीं की .  इसके विपरित भिलाई के भाजपा कार्यकर्ताओं ने अपनी बौद्धिक क्षमता और लोकतांत्रिक व्यवहार शैली का परिचय देकर पूरे लोकतांत्रिक तरीके से भिलाई के नए परिसीमन मामले को न्यायालय के समक्ष सप्रमाण प्रस्तुत कर दिया .  सांसद विजय बघेल आज भी तमाशाबीन की भूमिका में नजर आ रहे हैं इसलिए भिलाई के कार्यकर्ता पाटन की खिचड़ी का अनुभव लेने के बाद यह समझ गए हैं कि भिलाई के जागरूक कार्यकर्ता कानूनी कार्यवाही में फंसने से बच गए,  नहीं तो परिसीमन मामले में अंदर भी होते और सांसद इस मामले में राजनीति करके पाटन जैसी स्वादिष्ट खिचड़ी खाकर अपनी राजनीति भी चमकाते और अपनी भविष्य की राजनीतिक भूमिका भी बनाते .



पूरब टाइम्स  भिलाई . पिछले दिनों छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड कोहका जोन भिलाई ने कतिपय लोगों के यहां छापा मारकर  उन लोगों पर आवासीय उपभोग के लिये कनेक्शन लेकर व्यवसायिक उपयोग करने का केस बनाया और उन पर भारी पेनाल्टी भी लगाई . विसंगति वाली बात यह है कि सीएसपीडीसीएल ( सीएसईबी का एक उपक्रम) के अधिकारियों ने अनेक अवैध विद्युत कनेक्शन व अनेक बड़े उपक्रमों को छोड़ कर  दोना पत्तल बनाने वाली एकल महिला को निशाना बनाया  जिससे अन्य महिला स्व सहायता समूहों की कार्यस्थलों पर हड़कम्प मचा हुआ है  . इसे विसंगति ही कहेंगे कि जिन भवनों में  नगर निगम व टाउन प्लानिंग विभाग ने आवासीय प्रयोजन के लिये उपयोग करने की अनुमति दी थी  वहां सीएसपीडीसीएल व्यवसायिक कनेक्शन देकर  अविधिक व्यवसायिक कृत्यों को बढ़ावा दे रहा है. नेहरू नगर , सुपेला व अन्य इतने कितने ही क्षेत्रों में खुद शुतुर्मुर्ग बना यह विभाग अचानक कैसे सक्रिय हुआ ? वह भी महिला के दोना पत्तल बनाने के स्थल पर . यह स्व सहायता महिला समूहों के लिये च्तावनी है या व्यक्तिगत खुन्नस निकाली गई है. एक तरफ प्रदेश सरकार महिलाओं के उत्थान के लिये तमाम प्रयास कर रही है वहं दूसरी तरफ सीएसपीडीसीएल द्वारा इस तरह की कार्यवाहियां , सरकार की नीयत पर भी शंका उत्पन्न कर रही है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट .....



आवासीय भवनों में व्यवसायिक गतिविधि करने वाले भवन स्वामी इन दिनों छ.ग.पावर.डी.कंपनी.लि. कोहका जोन भिलाई के कार्यालय की भूमिका से भयभीत होकर स्थानीय प्रशासन और नेताओं तक इस मामले को पहुंचा रहे है . विशेषकर जो लोग कोहका भिलाई के कार्यालय से प्रताडि़त हो रहे हैं  उनके अनुसार विद्युत कंपनी का यह कार्यालय ऐसे मामलों में प्रकरण स्थापित करवा रहा है जिसके लिए बहुत बड़ी संख्या में लोग दोषी है . लेकिन कुछ ही लोगों को निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि आवासीय भवन का व्यवसायिक प्रयोजन करने वालों की इस क्षेत्र में बहुत बड़ी संख्या है . बावजूद इसके जिनके विरूद्ध कार्यवाही हो रही है  उनकी अनुपातिक संख्या बहुत कम है . और उनका चयन किस आधार पर हो रहा है ? यह अनुत्तरित प्रश्न है .


विगत दिनों छ.ग.पावर.डी.कंपनी.ली. कोहका जोन भिलाई कार्यालय ने एक ऐसी महिला को अप्रत्यक्ष लक्ष्य बनाकर कार्यवाही की जो अपने रिश्तेदार के परिवार के साथ एक ही आवास परिसर में रहकर दोना- पत्तल का व्यवसाय करके अपने परिवार का गुजर बसर करती है . बताया जा रहा है कि इस महिला का परिवार पूरी तरीके से इस महिला के कमाई पर गुजर बसर करता है . बावजूद इसके इस महिला को आश्रय देने वाले परिवार पर अस्थाई अर्थदंड लगाया गया और प्रकरण कायम किया गया.  इसके बाद , सभी महिला उद्यमी और स्व सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं जो आर्थिक गतिविधि अपने निवास से करती है  उनको अर्थदंड का सामना करने का भय सताने लगा है  . अब यह मामला तूल पकड़ाया दिख रहा है क्योंकि इससे महिला समूह और उद्यमी महिलाएं सीधे प्रभावित होने वाली हैं .


छ.ग.पावर.डी.कंपनी.लि. कोहका जोन भिलाई कार्यालय के अन्तर्गत ऐसी बहुत सी दुकान और कार्यालय है जो आवासीय प्रयोजन की भूमि पर संचालित की जा रही है और जिनको नगर पालिक निगम ने आवासीय प्रयोजन की भवन अनुज्ञा दी है . लेकिन ऐसे आवासीय भवनों में छ.ग.पावर.डी.कंपनी.लि. कोहका जोन भिलाई के अधिकारियों ने व्यवसायिक प्रयोजन का विद्युत कनेक्शन दिया गया है . उल्लेखनीय है कि छ.ग.पावर.डी.कंपनी.लि. कोहका जोन भिलाई के अधिकारियों को यह पुख्ता तौर पर जानकारी है कि उसके कार्य क्षेत्र में व्यवसायिक प्रयोजन के भूखंड कौन से है क्योंकि विद्युत वितरण व्यवस्था में टाउन प्लानिंग विभाग का अनुदेश सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है . इसलिए जब यह विधिक पहलू न्यायलयीन कार्यवाही में कोई व्यथित पक्षकार उठाएगा तो अर्थदंड अधिरोपित करने वाले अधिकारी का पक्ष क्या होगा इसे सभी जानना चाहते हैं ?



सुचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 4 के विधि निर्देश का पालन छ.ग.पावर.डी. कंपनी.लि. कोहका जोन भिलाई का कार्यालय कितना करता है इ? सकी जानकारी लेने के लिए इस कार्यालय में आवेदन किया गया है . उल्लेखनीय है कि जब इस आवेदन पर विद्युत विभाग जानकारी देगा तो यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि आवासीय भवनों में व्यवसायिक गतिविधि के विद्युत कनेक्शन देने के क्या प्रावधान है और विधिक कार्यवाही में न्यायालय के समक्ष पक्षकार अपना पक्ष इसी के आधार पर प्रस्तुत कर पाएंगे लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि कोहका जोन कार्यालय द्वारा सूचना अधिकार अधिनियम की धारा 4 की जानकारी तक सर्वसाधारण की पहुंच स्थापित करने के लिए क्या कर रहा है  यह अस्पष्ट है ? 


पूरब टाइम्स, भिलाई। बीएसआर अपोलो हॉस्पिटल एमके खंडूजा, बीएसआर अपोलो हॉस्पिटल जूनवानी वर्तमान में हाईटेक बीएसआर सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को वर्ष 2019-20 तक की बकाया राशि रुपये 1194484.00 के लिए दिनांक 2 जुलाई 2020 एवं 13 अगस्त 2020 को छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 173 एवं 174 के अंतर्गत समय सीमा में बकाया राशि जमा करने नोटिस दिया गया था। लेकिन बीएसआर अस्पताल द्वारा राशि जमा नहीं की गई। जिस पर आयुक्त  ऋतुराज रघुवंशी ने कुर्की का वारन्ट जारी कर दिया है। वारंट की सूचना तमिल कराने जोन आयुक्त जोन क्रमांक 1 सुनील अग्रहरी की टीम अस्पताल पहुंची और प्रबंधन को वारंट से अवगत कराया। 
तय समय पर बकाया राशि नहीं देने पर कुर्की कार्रवाई की चेतावनी भी दी। टीम में संजय तिवारी एवं राजेश गुप्ता सहित स्पैरो की टीम मौजूद रही उल्लेखनीय है कि नगर पालिक निगम, 1956 की धारा 173 के अंतर्गत दिए गए नोटिस के अनुसार वर्ष 2019-20 की संपत्ति कर की राशि 891199, शिक्षाकर कर की राशि 89120, समेकितकर की राशि 600, अधिभार की राशि 176565, शास्ति अधिरोपित 1000 तथा ठोस अपशिष्ट उपयोगकर्ता शुल्क 36000 कुल योग 1194484 की राशि को जमा करने के लिए बीएसआर अपोलो हॉस्पिटल एमके खंडूजा अपोलो हॉस्पिटल जूनवानी भिलाई को नोटिस दिया गया था। 
इसके लिए जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि को अधिनियम की धारा 175 के तहत् आदेश दिया गया है कि जब तक कि बीएसआर अपोलो हॉस्पिटल एमके खंडूजा बीएसआर अपोलो हॉस्पिटल जूनवानी भिलाई, समाधान योग्य यह सिद्ध न कर दे कि मांगी गई राशि नगर पालिक निगम, भिलाई को चुका दी गई है तथा जब तक कि मांगी गई राशि चुका न दें वसूली के समस्त खर्च सहित बीएसआर अपोलो हॉस्पिटल एमके खंडूजा बीएसआर अपोलो हॉस्पिटल जुनवानी भिलाई के चल सम्पत्ति के अभिहरण या उसकी अचल सम्पत्ति की कुर्की तथा विक्रय द्वारा वसूल धारा 178 के अंतर्गत कार्यवाही की जाये।

अधिनियम की धारा 177 के उपबंधों के अधीन रहते हुए वारन्ट में निर्देश अभिहरण करने की दृष्टि से सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच किसी भी समय भवन के बाहरी या भीतरी दरवाजे या खिड़की को तोड़कर खोलने के लिए जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि को प्राधिकृत किया गया है साथ ही जोन आयुक्त अग्रहरि 2 नवंबर 2020 को उसके पूर्व वारन्ट जारी किये गयेे दिनांक से कुर्क की गई सम्पत्ति की तालिका को भी संलग्न कराएंगे।@GI@

महिलाओं के द्वारा निर्मित माल का मार्केट लीकेज हो रहा है क्या ?

पूरब टाइम्स , रिसाली . नया बना,  नगर निगम रिसाली का क्षेत्र अब नये लोगों की राजनीति का प्रत्यक्ष दर्शी बन रहा है . पुराने , अच्छा व बुरा काम करने वाले पार्षदों के अलावा अब राज्य सरकार द्वारा मनोनीत एल्डरमैन भी अपना वजूद दिखाने की कोशिश में लगे हैं. सूत्रों के अनुसार उनमें से कुछ , मुख्यमंत्री के निजी स्टाफ के एक सदस्य ( जिसके क्रियाकलापों के कारण उसे लोग छोटा मुख्यमंत्री कहने लगे हैं ) से करीबी हैं . वे लोग , राजनीतिक रंग देकर ,  रिसाली के महिला समूह के क्रियाकलापों में बाधा पहुंचा रहे हैं . यह सब उक्त ‘छोटा मुख्यमंत्री’ के निर्देश पर किया जा रहा है या उसके नाम का उपयोग किया जा रहा है पर इससे मुख्यमंत्री की योजना को भी आंच आ रही है. यदि  देर – सवेर यह मामला , गृह मंत्री के संज्ञान में भी आयेगी परंतु जैसे जैसे दीवाली पास आ रही है रिसाली की महिला समूह में असुरक्षा का भाव बढ़ते जा रहा है . महिला समूह की पपरेशानी के आधार पर पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ....

रिसाली की महिलाओं के द्वारा किया जा रहा दिया निर्माण व्यवसाय , कैसी - कैसी परेशानियों का सामना कर रहा है ?
छत्तीसगढ़ राज्य सरकार ने महिलाओं को आर्थिक गतिविधि से जोड़ने के लिए बहुत से उल्लेखनीय कार्य किए है. इसलिए छत्तीसगढ़ की महिलाओं के द्वारा बनाया गया ‘दिया’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है. अतः  इस व्यवसाय की तरफ पक्ष, विपक्ष और विरोधी गुट इन सभी का ध्यान जाता है. इसी गतिविधि क्रम में रिसाली की महिलाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की छोटी सी पहल की है और अपने उत्पाद को बाजार की मांग के अनुरूप बनाने का प्रयास कर रही हैं लेकिन रिसाली क्षेत्र में स्थानीय राजनीति इस कदर हावी है कि रिसाली की महिलाओं के द्वारा की जा रही पहल अपने लक्ष्य से कोसो दूर नजर आ रही है. इस विषय पर जानकारी लिए जाने पर स्पष्ट हुआ कि रिसाली के एल्डर मैन महिलाओं के व्यवसायिक गतिविधि को राजनीतिक रंग दे रहे है और आत्म स्तुति की अपेक्षा से रोजाना महिलाओं के लिए प्राधिकृत कार्यस्थल पर अपनी अनावश्यक उपस्थिति देकर प्रभावित कर रहे हैं.  

अरे! "छोटा मुख्यमंत्री" ‘ दिया’ व्यवसाय की गतिविधियों में उपन्न होने वाली समस्याओं का आकलन करने तृतीय पक्षकार समीक्षा की व्यवस्था क्यों नहीं कर रहा है ?
रिसाली निगम क्षेत्र में व्यवसायिक गतिविधि से जुड़ी महिलाओं की समस्या , बड़े राजनीतिक हस्तक्षेप के कारण दिनोदिन बढ़ रही है. बताया जा रहा है कि ‘छोटा मुख्यमंत्री’ रिसाली क्षेत्र में अपना प्रभाव बनाकर, इस क्षेत्र की महिला उद्यमी, जो सामूहिक व्यवसायिक गतिविधि से जुड़ी है उनके व्यवसाय को सीधे तौर पर प्रभावित करने की मंशा से कार्य कर रहा है. इसलिए एल्डर मैन के माध्यम से महिला उद्यमियों की व्यवसायिक गतिविधि को राजनीतिक रंग देने का प्रयास कर रहा है. इस आरोप का तर्क संगत आधार का आकलन, भिलाई व रिसाली की महिलाओं के व्यवसाय को मिलने वाले ऑर्डर स्पष्ट कर देते हैं .  इस बड़ी समस्या की वर्तमान स्थिति का अंदाजा इसी बात से किया का सकता है कि रिसाली की महिलाओं की व्यवसायिक गतिविधियों के लिए आवश्यक उपकरण और कच्चा माल की उपलब्धता अपेक्षा अनुसार समय पर नहीं हो पाया है, जिसके कारण रिसाली के महिला समूह ‘दिया’  निर्माण कार्य में भिलाई से पिछड़े हुए नजर आ रहे है. 

रिसाली निगम के एल्डर मैन महिलाओं के दिया व्यवसाय गतिविधि को राजनीतिक रंग देकर बलिवेदी पर क्यों चढ़ा रहे है ?
रिसाली के अधिकांश एल्डर मैन जमीन व्यवसाय से जुड़े है और जमीन दलालों के बेहद करीबी समझे जाते हैं . इनकी भाजपा के लोगो से नजदीकियां भी जग जाहिर है इसलिए इनको गृहमंत्री ने शपथ ग्रहण कार्यक्रम में स्पष्ट कर दिया था कि उनका काम करने का तरीका अलग है और यह भी बता दिया था कि राजनीतिक अवसर एक बार मिलता है. इसके बाद जनता के बीच बनी छवि के आधार पर किसी भी राजनीतिज्ञ को पुनः अवसर मिलता है . चूंकि रिसाली निगम क्षेत्र गृहमंत्री के विधानसभा का सबसे अहम क्षेत्र है और विधानसभा चुनाव को सीधे तौर पर प्रभावित करता है इसलिए इस क्षेत्र पर विरोधी पार्टी और विरोधी खेमे की विशेष नजर है और स्वाभाविक तौर पर गृहमंत्री की भी है . इसलिए महिलाओं के दिया व्यवसाय और स्व सहायता समूहों की व्यवसायिक गतिविधियों में एल्डर मैन का अनाधिकृत हस्तक्षेप अब राजनीतिक रंग ले रहा है और जल्द ही यह मामल आंकड़ों और सबूतों के साथ सुर्खियों में अपना स्थान बनाने की दिशा में चल पड़ा है.

पूरब टाइम्स अखबार,  स्वसहायता समूहों के कार्यों में आने वाली अड़चनों को सीधे प्रश्नांकित करने का मंच बनकर, अपनी पहचान बना चुका है इसलिए रिसाली की महिलाओं ने पूरब टाइम्स अखबार के माध्यम से अपनी समस्या उठाई है. लेकिन प्रकाशित समस्याओं को समूल खत्म करने के लिए आवश्यक है  कि उद्यमी महिलाएं ऐसी समस्याओं की जानकारी साझा करती रहे और समूहों कि व्यवसायिक गतिविधियों को सशक्त बनाने का सामूहिक प्रयास जारी रखे. पूरब टाइम्स संपादक मंडल आपके साथ है 


क्या नगरीय निकायों के कामकाज को प्रभावित करने के लिए कोई साजिश चल रही है?
नगरीय निकायों का कामकाज पब्लिक डोमेन पर नहीं होंगे तो जनता को जानकारी कैसे मिलेगी?


पूरब टाइम्स, भिलाई. दुर्ग के सांसद विजय बघेल एक तरफ पाटन की शराब दुकान पर हुई मारपीट इत्यादि की घटना पर अनशन पर बैठ गये थे वहीं दूसरी तरफ उनके संसदीय क्षेत्र में आने वाली तीनों नगर निगम में , सूचना के अधिकार अधिनियम की धारा 4 के तहत किये जाने वाली प्रकटीकरण व पारदर्शिता नहीं है. सूत्रों के मुताबिक इन निगमों में भी पाटन क्षेत्र की उस घटना की तरह , मुख्यमंत्री के निज स्टाफ का सदस्य , जोकि छोटा मुख्यमंत्री कहलाने लगा है , की दखल अंदाज़ी होने लगी है. विशेषतः चरोदा भिलाई-3 का आयुक्त तो बहुत दबंगाई से , वहां के निर्वाचित जन-प्रतिनिधियों , महापौर, नेता प्रतिपक्ष व पार्षदों की सुनना ही बंद कर चुका है . इतना ही नहीं उन लोगों द्वारा लिखित में दी गई शिकायतों को भी रद्दी की टोकरी में डाल रहा है. जनता सब देख रही है और मीडिया तक रिपोर्ट पहुंचा रही है. अब देखने वाली बात यह होगी कि सांसद व तथाकथित छोटा मुख्यमंत्री की टसल आम जनता को कितना भुगतवाती है ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...




नगरीय निकायों का कामकाज पब्लिक डोमेन से गायब होने का असल कारण छोटे मुख्यमंत्री की अतिसक्रियता का विपरीत परिणाम तो नहीं है?
 भिलाई, दुर्ग और चरोदा नगर निगमों के हालात एक जैसे नजर आ रहे है क्योंकि तीनों ही नगर निगमों में पार्षद परेशान है और महापौर के कार्य व्यवहार शंकास्पद प्रतीत होते है . उल्लेखनीय है कि निगम के महापौर इसलिए प्रश्नाकित हो रहे है क्योंकि निर्वाचित महापौर निगम कामकाज को पब्लिक डोमेन पर लाने की कार्यवाही को सुनिश्चित करवाने में विफल हो रहे हैं .  जबकि प्रावधान यह है कि निगम के कामकाज और कार्यवाहियों को विधान सभा की तर्ज पर कार्यान्वित किया जाना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है . इसका कारण क्या है यह सर्वविदित है कि नगर पालिक निगम के आयुक्त ,  निगम की कार्यवाहियों को पब्लिक डोमेन पर लाकर सर्व साधारण की पहुंच में लाने के लिए क्या कर रहे हैं और अनियमितताओं को कैसे संरक्षण दे रहे हैं? इन यक्ष प्रश्न को तर्क संगत आधार तभी स्पष्ट होगा , जब जनता यह जान पाएगी कि नगर निगमों में शासन द्वारा प्राधिकृत आयुक्तों की अनियमितताओं को कौन संरक्षण दे रहा है ? कहीं इस संरक्षण का प्रदायकर्ता तथा कथित छोटा मुख्यमंत्री जैसा घटक तो नहीं है?



भिलाई चरोदा नगर निगम की महापौर अकेले संघर्ष कर रही है, बावजूद इसके आयुक्त निगम के कामकाज को पब्लिक डोमेन में लाने कार्यवाही को क्यों विफल कर रहा है?


चरोदा निगम की लोकप्रिय महापौर श्रीमती चंद्रकांता मांडले निगम के कामकाज को विधि निर्देशित प्रक्रिया में पूरा करवाने के लिए भरसक प्रयास कर रहीं हैं . सूत्र बताते हैं कि महापौर ने स्वयं पर किसी भी प्रकार के दबाव को हावी नहीं होने दिया है इसलिए महापौर के कार्य व्यवहार से निगम अमला उत्साहित है और ऐसे अधिकारी परेशान है जो निगम कार्यवाहियों को अनियमितताओं के हवाले करने के लिए दोषी है . बताया जा रहा है कि महापौर पत्र व्यवहार और कागजी कार्यवाही करके निगम अनियमितताओं को कागजों पर विधि सम्मत तरीके से प्रस्तुत करने के लिए पहल कर चुकीं है . इसके बावजूद यदि आयुक्त किस के संरक्षण (छोटा मुख्यमंत्री?) के कारण दबंगाई से विधिसम्मत कार्यवाही को ठेंगा दिखा रहे हैं.अब आने वाला समय बताएगा कि चरोदा निगम के हितों की रक्षा करने वाली महापौर अपनी सक्षमता और कार्यक्षमता का कैसा परिचय मतदाताओं से करवाएगी?



दुर्ग के महापौर ने क्या अपने निगम का कामकाज पब्लिक डोमेन पर नहीं लाने का दृढ़ निश्चय कर रखा हैं ?


अभी निगम की अंदरूनी राजनीतिक गतिविधि विस्फोटक स्थिति में नजर आ रही है क्योंकि निगम के महापौर धीरज बाकलीवाल के कार्य व्यवहार से कांग्रेस के पार्षद असंतुष्ट नजर आ रहे है . वर्तमान स्थिति यह है कि कांग्रेस पार्षद जनता के इस प्रश्न का जबाव देने में असहज महसूस कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या कारण है कि दुर्ग का नगर निगम अपने कामकाज को पब्लिक डोमेन पर लाने से विफल हो रहा है . उल्लेखनीय है कि  निगम का कामकाज पब्लिक डोमेन पर नहीं होने के कारण कई ऐसे ज्वलंत मुद्दे फाइलों में दफन है , जिनके कारण  महापौर को अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने को मजबूर कर सकते हैं इसलिए विरोधी गुट और विपक्षी नेता निगम कार्यवाहियों तक सर्व साधारण की पहुंच स्थापित करने के लिए सक्रिय हो रहे हैं .

भिलाई के युवा महापौर ने निगम सभागार में होने वाली दादागिरी को उखाड़ फेंका है लेकिन निगम काकामकाज पब्लिक डोमेन से दूर क्यों है?
भिलाई के युवा नेता की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि महापौर देवेन्द्र यादव ने ऐसे विपरीत समय में जनता के विश्वास की परीक्षा को पूरे अंक लेकर उत्तीर्ण किया,  जब पूर्व मंत्री के समर्थक निगम कार्यवाहियों को खुलेआम गुंडा गर्दी करके प्रभावित करते उल्लेखनीय है कि युवा महापौर की हिम्मत और काबलियत से प्रभावित होकर स्थानीय लोगों का कांग्रेस पर पुनः विश्वास कायम हुआ और जनता ने दुर्ग कि सभी विधानसभा सीटें में से सिर्फ एक ऐसी सीट को छोड़ कर,  जहां कांग्रेस का पूर्व मंत्री चुनाव लड़ रहा था ,  दुर्ग की सभी विधानसभा सीटों को कांग्रेस की झोली में डाल दिया लेकिन अब छोटा मुख्यमंत्री जैसा घटक की सक्रियता की चर्चा जनता के बीच गरमा रही है . यहां भी निगम आयुक्त का रुझान पब्लिक से पार्दशिता की जगह , वैसे घटकों को संतुष्ट करने की हो गई है . क्या युवा महापौर इस चर्चा पर विराम लगा पाएंगे?
















 

पूरब टाइम्स, दुर्ग। तस्वीर में दिखाई देने वाला यह आरोपी कोई और नहीं बल्कि अपने दोस्त का कातिल है। महज शराब पीने के लिए अपने दोस्त की बेरहमी से हत्या कर दी। जी हां बुधवार की सुबह श्री शिवम शॉपिंग मॉल के पास हुए हत्याकांड में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। हत्या का कारण दोनों दोस्त के बीच शराब पीने-पिलाने को लेकर हुए विवाद को बताया जा रहा है।
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मृतक दिलीप कुमार साहू और आरोपी महेंद्र कंडरका दोस्त थे। पिछले हफ्ते ही मृतक के साथ राजिम से दुर्ग आया था और 20 तारीख की रात को दोनों ने मिलकर खूब शराब पी। शराब पीने के बाद दोनों दोस्तों में शराब पीने और पिलाने को लेकर काफी झगड़ा भी हुआ जिस पर आक्रोशित होकर आरोपी महेंद्र कंडरका ने अपने दोस्त के सिर पर पत्थर से वार कर दिया। इस वार से दिलीप की मौके पर ही मौत हो गई। 



पकड़े गए आरोपियों में रोशन लाल देवांगन उम्र 24 साल सरस्वती नगर शिव पारा वार्ड 34 थाना कोतवाली दुर्ग एवं राकेश देवांगन 38 वर्ष निवासी शंकर नगर दुर्गा चौक वार्ड 11 थाना मोहन नगर शामिल थे। आरोपियों के पास से एक इंडिका कार क्रमांक सीजी 07 एम ए  5418 ,4 नग मोबाइल हैंडसेट ,एक पैनासोनिक कंपनी का टीवी, सेट टॉप बॉक्स, रिमोट एडॉप्टर, तार नगदी रु.18000 कुल जुमला 9 लाख रुपए का सामान जप्त किया गया।