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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



आयुक्त ने अधिकारियों से कहा आर्मी सेना भर्ती रैली रविशंकर स्टेडियम में कल से प्रारंभ हो गई है। जिसमें लिए पूरे जिले भर से व बाहर से हजारों की संख्या में अभ्यार्थी दुर्ग आये हुये हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हमारा स्वच्छ हो उपयोग किये जाने वाली जगह साफ-सुथरा हो। आर्मी सेना भर्ती रैली के अभ्यार्थियों को मानस भवन में रुकवाया गया है। 

उन्होनें मानस भवन के अंदर जाकर टायलेट, पानी, बिजली आदि की सुविधा का अवलोकन कर नियमिति रुप से यहाॅ साफ-सफाई को दुरुस्त रखने स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिये। उन्होनें कहा किसी भी प्रकार से शिकायत न मिले इसका ध्यान रखा जाए। उन्होनें मानस भवन के बाहर और स्टेडियम परिसर की भी अच्छे से सफाई कर एकत्र कचरों को उठाने निर्देश दिये।

दुर्ग। कोरोना संक्रमण के खतरे ने छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में भी दस्तक दे दी है। कल तक विधानसभा की कार्यवाही में मौजूद रहे दुर्ग से कांग्रेस विधायक अरुण वोरा कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। इसकी वजह से उनके संपर्क में आने वाले विधायकों-अफसरों पर भी संक्रमण का खतरा मंडराने लगा है। दुर्ग विधायक और छत्तीसगढ़ स्टेट वेयर हाउस कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष अरुण वोरा मंगलवार तक विधानसभा बजट सत्र की कार्यवाही में शामिल थे।


भिलाई। भिलाई स्टील प्लांट के RMP-2 (रिफेक्ट्री मटेरियल प्लांट-2) में बुधवार सुबह आग लग गई। आग इतनी भयानक थी कि उसकी लपटें 60 फीट ऊपर तक दिखाई दे रही थी। सूचना मिलने पर पहुंची फायर ब्रिगेड की 5 गाड़ियों ने करीब 500 लीटर फोम का इस्तेमाल कर डेढ़ घंटे में आग पर काबू पाया। हालांकि इस दौरान कोई जन हानि नहीं हुई है। कर्मचारियों ने वहां से भागकर अपनी जान बचाई।

जानकारी के मुताबिक, BSP में हादसा RMP-2 के किल्लन में बुधवार सुबह करीब 7.30 बजे आग लगने के कारण हुआ है। वहां कच्चे लाइम स्टोन को पक्के में कन्वर्ट किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि इसी दौरान ईधन के केबल में शार्ट सर्किट हुआ और जमीन से करीब 40 फीट ऊपर आग लग गई। इसके साथ ही प्लांट में काले धुएं का गुबार भर गया और वहां अफरा-तफरी मच गई। फायरकर्मियों ने किसी तरह ऊपर जाकर आग पर काबू पाया।
इसकी चपेट में आने से पानी के पांच मोटर पंप और बड़ी संख्या में रखे ऑयल ड्रम, केबल जलकर खाक हो गए। इससे लाखों रुपए का नुकसान की आशंका है। फिलहाल लाइम स्टोन को क्लीन करने का प्रोसेस पूरी तरह से रुक गया है। वहीं BSP की ओर से एक जांच कमेटी भी बनाई गई है। जो आग शार्ट सर्किट होने के कारणों का पता लगाएगी। फिलहाल किल्लनन के ठंडे होने के बाद ईधन केबल को फिर से बदलने और जांच का काम शुरू होगा।

पूरब टाइम्स, दुर्ग। निगम आयुक्त हरेश मंडावी ने आज अपरान्ह 1.30 बजे कार्यालय पहुॅचकर कार्यपालन अभियंता सुशील कुमार बाबर से प्रभार लिये। इस दौरान कार्यपालन अभियंता बाबर के अलावा कार्यपालन अभियंता मोहनपुरी गोस्वामी, सहा.अभियंता राजेश पाण्डेय, जितेन्द्र समैया, प्रभारी लेखा अधिकारी राजकमल बोरकर, स्थापना लिपिक राजेन्द्र साहू, एवं अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।  

निगम आयुक्त हरेश मंडावी ने आज दुर्ग निगम का प्रभार लेने के बाद महापौर धीरज बाकलीवाल, सभापति राजेश यादव से सौजन्य मुलाकात किये। इस दौरान एमआईसी प्रभारीगण, पार्षदगण उपस्थित थे। उन्होनें सभी से परिचय प्राप्त किये। इसके बाद उन्होनें प्रायमरी तौर पर निगम अधिकारियों के साथ मुख्य कार्यालय में स्थित विभागों का निरीक्षण किया। 

विभाग अधिकारियों और वहाॅ कार्य करने वाले कर्मचारियों की जानकारी ली। विभागों में किस प्रकार से कार्य सम्पादित किये जा रहे हैं उसकी भी जानकारी लिये। इस मौके पर उन्होनें स्थापना शाखा में कर्मचारियों का वेतन आहरण, उनके ग्रज्युटी, पेंशन प्रकरण की स्थिति की जानकारी ली। साथ ही बाजार विभाग से शहर में निगम की दुकानों और उससे होने वाले आय की जानकारी ली। 

पूरब टाइम्स दुर्ग। छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी किया है। सामान्य प्रशासन विभाग के उपसचिव ने आदेश जारी करते हुए राज्य सरकार ने डिप्टी कलेक्टर समेत 10 अफसरों का तबादला किया है।  जारी सूची के अनुसार इंद्रजीत बर्मन दुर्ग कमिश्नर, चंद्रकांत कौशिक, आशीष कुमार टिकरिहा, हरीश मंडावी, आशुतोष चतुर्वेदी, प्रभाकार पांडेय, अजय कुमार त्रिपाठी, विपुल कुमार गुप्ता, मनीष मिश्रा और प्रवीण कुमार वर्मा का नाम शामिल है।  जारी आदेश अनुसार राज्य शासन एतदद्वारा राज्य प्रशासनिक सेवा के निम्नालिखित अधिकारियों को प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करते हुए, उन्हें अस्थाई रूप से, आगामी आदेश तक नीचे दर्शित तालिका में उनके नाम के सामने कॉलम (4) में दर्शाये गये स्थान पर पदस्थ करता है।  राज्य शासन एतद्द्वारा धनीराम रात्रे (पी.-2015), डिप्टी कलेक्टर, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा से डिप्टी कलेक्टर, जिला -रायगढ़ के पद पर प्रशासनिक आधार पर स्थानांतरित करते हुए. अस्थाई रूप से, आगामी आदेश तक पदस्थ करता है । उक्त स्थानांतरण हेतु समन्वय में माननीय मुख्यमंत्री जी का अनुमोदन प्राप्त किया गया है।

दुर्ग। जिले के कुछ क्षेत्रों में अभी से भू-जल स्तर नीचे जाने लगा है। धमधा व दु्‌र्ग के ब्लाक के कुछ गांवों में भू-जल स्तर में गिरावट को लेकर शिकायत सामने आने लगी है। जल स्तर गिरने से गर्मी की फसल गेंहू, धान और चना बोने वाले किसान इस बात से चिंतित है कि जरूरत पड़ने पर वे पानी की व्यवस्था कहां से करेंगे।

दुर्ग जिले के सिली, परसुली, अरसनारा, बोड़ेगांव, कोड़िया, दनिया, डोमा, पथरिया, पोटिया, दनिया, बीरेभाट, बासीन सहित आसपास के कुछ गांवों में भू-जल स्तर करीब पांच से सात फीट नीचे चला गया है। भू-जल स्तर एकाएक नीचे चले जाने से किसान परेशान है।

वैसे भी यह क्षेत्र ड्राइ जोन में आता है। लेकिन गर्मी शुरू होने के कुछ दिनों बाद ही भूजल स्तर में गिरावट देखने को मिलती रहती है। लेकिन जिले में अभी तो गर्मी की शुरुआत नहीं हुई है और जल-स्तर तेजी से नीचे चला जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार अरसनारा और सगनी घाट के निकट बने एनीकट से पिछले दिनों पानी छोड़ा गया था। किसानों को यह आशंका है कि एनीकट में पानी का लेबल कम होने की वजह से भू-जल स्तर तो नीचे नहीं जा रहा है।

ग्राम परसुली के किसान रमेश पटेल का कहना है कि क्षेत्र ड्राइ जोन जरूर है लेकिन वाटर लेबल इतना जल्दी नीचे नहीं जाता। वहीं बोड़ेगांव निवासी रविप्रकाश ताम्रकार ने बताया कि भू-जल स्तर नीचे से गर्मी में लगाए गए धान फसल की सिंचाई को लेकर किसान परेशान है आखिर इसके लिए पानी कहां से आएगा।

वैसे भी धमधा ब्लाक में भू-जल स्तर की स्थिति कभी अच्छी नहीं रही है। यहां गर्मी के दिनों में वाटर लेबल डेढ़ से दो सौ फीट तक नीचे चला जाता है।

भिलाई। दुर्ग के नंदिनी थाना क्षेत्र के ग्राम मुरमुंदा ढौर में एक भीषण अग्नि हादसा हुआ है। एक झोपड़ी में आग लगने के कारण वहां 21 बकरियां जलकर मर गईं। इसके अलावा एक महिला भी करीब 60 फीसद तक झुलस गई है। आधी रात को डायल 112 की सूचना पर नगर सेना की फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और महिला व तीन बकरियों को किसी तरह बचाया। महिला गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती है। आग लगने का कारण अब तक पता नहीं चल सका है।@GI@

जानकारी के मुताबिक रविवार की रात 12 बजे के बाद आग लगी। आग की चपेट में आई महिला की कोई संतान न होने के कारण उसके पति ने दूसरी शादी कर ली है और बगल की झोपड़ी में अपनी दूसरी पत्नी के साथ रहता है। वहीं, महिला एक झोपड़ी में अलग रहती है। आग की चपेट में आई महिला की उम्र करीब 45 से 50 साल बताई जा रही है। उसने अपनी झोपड़ी में ही बकरियां पाल रखी थी। रात में वो अपनी झोपड़ी में सोई हुई थी और झोपड़ी के ही एक हिस्से में 24 बकरियां बंधी हुई थी।



महापौर धीरज बाकलीवाल एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में सभापति राजेश यादव प्रदीप चौबे पूर्व विधायक प्रतिमा चंद्राकर पूर्व विधायक गया पटेल अध्यक्ष कांग्रेश जिला कमेटी आर एन वर्मा पूर्व महापौर दुर्ग निगम लक्ष्मण चंद्राकर पूर्व साडा अध्यक्ष, राजेंद्र साहू महामंत्री जिला कांग्रेस तथा पर्यावरण प्रभारी सत्यवती वर्मा की उपस्थिति में संपन्न होगा। 
दुर्ग निगम के इस भव्य फ्लावर शो कार्यक्रम में इस बार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप आम जनता को शासन की कल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराते हुए मॉडल तैयार किया गया है इसमें मुख्यमंत्री शहरी सनम स्वास्थ योजना पौनी पसारी योजना गोधनिया योजना एवं  अनेक प्रजाति के फूलों की प्रदर्शनी फलों की प्रदर्शनी की प्रतियोगिता भी आयोजित की गई है। 
नगर पालिक निगम दुर्ग के द्वारा पारिवारिक वातावरण के अनुसार मनोरंजक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं इसके साथी प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए स्टॉल बनाए गए हैं जहां प्रतिभागी अपना पंजीयन कराकर भाग ले सकेंगे। शहर की आम जनता से अपील है कि वे नगर निगम दुर्ग के इस भव्य आयोजन का अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर लाभ उठाएं।




पूरब टाइम्स,दुर्ग। एक साल से ऊपर हो गया है  दुर्ग नगर निगम में कांग्रेस ने शहर सरकार बना ली है. एक ओर विधायक अरुण वोरा इसे अपने संघर्ष की जीत बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर सच्चाई यह भी है कि निगम के कार्यों में . लगातार 20 साल भाजपा का वर्चस्व होने के बाद अंतिम समय में भ्रष्टाचार व मनमानी कार्यप्रणाली से त्रस्त जनता ने कांग्रेस को शहर सरकार बनाने का मौका दिया. लोगों की आशा थी कि कांग्रेस के नये महापौर आने के बाद , पुरानी शहर सरकार के काले कारनामों का चिट्ठा खोला जायेगा. परंतु महापौर धीरज बाकलीवाल ने अब पुरानी शिकायतों के लिये अपने कान में तेल डाल लिया है. एक से बड़े एक घपले, जैसे जलगृह कॉम्प्लेक्स से एक पूरी मंजिल का गायब होना व करोड़ों रुपये का अतिरिक्त, गंज मंडी कॉम्प्लेस के स्पेसिफिकेशन में बदलाव कर घोटाला करना हो या आईएचएसडीपी आवास योजना के पूरे प्रोजेक्ट स्कीम में गड़बड़ी कर उसे अपेक्षित रूप से समाप्त नहीं करना इत्यादि मामले भाजपा के कार्यकाल में उठे और कांग्रेस सरकार बनते ही उनकी जांच व दोषियों को सज़ा मिलने की आस लोगों में जाग उठी थी पर कई परिणाम आता नहीं दिख रहा है. आम लोगों में यह धारणा बनने लगी है कि विधायक अरुण वोरा की आक्रामकता व दुर्ग निगम के लिये प्रेम, उन्हें राज्य सरकार द्वारा वेयर हाउसिंग मंडल का अध्यक्ष बनाते ही उड़न छू हो गयी है. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ....

उरला स्थित आईएचएसडीपी आवास की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा कौन लेगा, इस प्रश्न का उत्तर जनता महापौर और स्थानीय पार्षद से लेना चाहती है. उल्लेखनीय है कि इस कॉलोनी में अमृत मिशन योजना के तहत सभी क्वाटरों में पानी पहुंचाया गया है लेकिन विडंबना यह है कि छत के ऊपर लगी कई पानी की टंकियों में अभी तक पानी की एक बूंद भी नही पहुंच पाई है. कालोनी के समस्त आवासों की अनियमित भौतिक स्थिति चीख-चीख कर स्थानीय प्रशासन से यह प्रश्न पूछ रही है कि इस आवासीय योजना के दुर्दशा कि जांच कौन सा शासकीय तंत्र कब करेगा और इस महत्वकांक्षी योजना का आवश्यक संधारण कार्य कब होगा ?@GI@
सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जिम्मेदार वार्ड 58 के पार्षद बृजलाल पटेल कब जनता के सामने यह स्पष्ट करेंगे कि वार्ड 58 की इस वार्ड की सफाई व्यवस्था कब जन अपेक्षाओं के अनुरूप होंगी और आधारभूत व्यवस्थाओ से वंचित वार्ड 58 को कब जन अपेक्षित व्यवस्थाओं का उपभोग करने का अवसर मिलेगा ? उल्लेखनीय है कि वर्तमान में यह वार्ड क्षेत्र के साथ-साथ  आईएचएसडीपी आवास व अन्य कॉलोनी में नाली सफाई, सड़क सफाई के लिए  जहां निगम विभाग जागरूकता अभियान चला कर एक दिखावा करता नजर तो आता है. लेकिन वास्तविकता के धरातल पर स्थिति वैसी नहीं है जैसी नियमानुसार होनी चाहिए. स्थानीय पार्षद अपने पदेन कर्तव्यों को पूरा करने में जिम्मेदारी पूर्ण कार्य नहीं कर रहा है इसलिए अनियमितताओं को अवसर मिल रहा है और स्थानीय जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. आईएचएसडीपी आवास कॉलोनी के बहुत से आवास में संधारण कार्य करना आवश्यक है लेकिन स्थानीय पार्षद अपनी इस जिम्मेदारी को पूरा करता नजर नहीं आ रहा है@GI@
जिला मुख्यालय का नगर निगम प्रशासन, महापौर व उनके संरक्षक दुर्ग विधायक, इन दिनों अनेक अनियमितताओं का तमाशा मूकदर्शक बनकर  देखते नजर आ रहे हैं. आईएचएसडीपी आवास योजना भी इन दिनों अनियमितताओं के हवाले नजर आ रही है. निगम क्षेत्र में स्थित ग्रामीण परिवेश को तो आधारभूत सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है जबकि शासन की योजनाओं का विस्तार इन क्षेत्रों तक करके इन अपेक्षित क्षेत्रों को भी मुख्य धारा के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है लेकिन गुटबाजी में बंटी स्थानीय कांग्रेस अभी तक सचेत नहीं दिखती है. बरसो बाद कांग्रेस के हाथ में जनता द्वारा सौंपी गई सत्ता के एवज में कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी पूरी करने से पिछड़ती नजर आ रही है इसलिए अब देखने वाली बात यह है कि कब कांग्रेस की हाई कमान भी ऐसे मामले का संज्ञान लेगी और अनियमितताओं पर विराम लगाएगी ?@GI@

पूरब टाइम्स,दुर्ग। अच्छी नौकरी के झांसे में कोरबा से दुर्ग आए युवक को अमानवीय व्यवहार सहन करने को मजबूर होने पड़ा जिसकी शिकायत आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने दर्ज करवाई मामला यह है की कोरबा निवासी एक युवक ने दुर्ग जिले के मोहन नगर थाना क्षेत्र में स्थित शंकर नगर में एक युवक प्रदीप कुमार आयाम कंपनी में काम की जानकारी मिलने पर काम करने आया था.उसे काम पर रखते समय बताया गया था कि डिटर्जेंट पाउडर बेचने का कार्य करना बताया जा रहा है कि विगत दो माह पूर्व वह दुर्ग आया था और उसको काम पर रखने वाले लोगों द्वारा विपरीत अमानवीय तरीके से काम लिए जाने से त्रस्त और हतास हो चुका है।@GI@
व्यथित युवक के मुताबिक कंपनी ने काम पर रखने के बाद उसे वे सुविधाएं नहीं दी गई. जिसको देने का आश्वासन काम पर रखने के समय नियोक्ता ने दी थी उल्लेखनीय है की पीड़ित युवक द्वारा बार-बार अपने नियोक्ता से शिकायत करने के बाद भी उसके नियोक्ता ने उसकी समस्या का समाधान नहीं किया और उसकी जानकारी मे यह नहीं आया की उसकी सुविधाओं का इंतजाम किसको करना है. पैसे और खाने-पीने का सामान नहीं होने साथ साथ मालिक द्वारा दो माह का वेतन भी नही दिया गया. इसलिए वह पिछले एक हफ्ते से दुर्ग में भूखा-प्यासा घूमता रहा। @GI@
युवक ने बताया कि एक दोस्त के द्वारा बताया गया था कि दुर्ग जिले में DMT ट्रेनिग कंपनी में सेल्स मेंन कि आवश्यकता है। पिछले दो माह पहले दुर्ग आया था। सेल्स मेन  के रूप में रोजाना आठ घंटे काम करने की बात कही गई थी लेकिन इसके विपरित रोजाना 12 से 14 घंटे काम करने को वह मजबूर था पीड़ित युवक दीपक का कहना है कि गली मोहल्ले में पैदल डिटर्जेंट पाउडर बेचने का कार्य करने के लिए भेजते थे।@GI@

पूरब टाइम्स, दुर्ग। राजेन्द्र पार्क में 14 फरवरी को होने वाले फ्लावर शो में इस बार राज्य शासन की योजनाओं का व्यापक रुप से प्रचार की दृष्टि एवं आम जनता को प्रोत्साहित करने सरकारी योजनाओं का माॅडल प्रस्तुत किया जावेगा। इस संबंध में आज महापौर धीरज बाकलीवाल ने एमआईसी प्रभारी सत्यवती वर्मा के साथ निगम अधिकारियों की बैठक राजेन्द्र पार्क में लिये। उन्होनें पार्क का रंगरोगन के साथ उचित व्यवस्था के निर्देश दिये। 

इस दौरान आयुक्त इंद्रजीत बर्मन, एआईसी प्रभारी अब्दुल गनी, दीपक साहू, ऋषभ जैन, के अलावा कार्यपालन अभियंता मोहनपुरी गोस्वामी, सहा.अभियंता जितेन्द्र समैया, जगदीश केशरवानी, उपअभियंता राजकिशोर पालिया, गिरीश दीवान, आर.के. जैन, अर्पणा सेलारे मिश्रा, मुक्तेश कान्हा, अनिल सिंह, अनुप वर्मा, सुशील भारद्वाज सहित अन्य लोग उपस्थित थे।




पूरब टाइम्स , रायपुर . एक समय था जब छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल , पूरे प्रदेश में अच्छी लोकेशन व कम दाम में मकान देने का पर्याय बना था. लोग उनकी स्कीमों में मकान लेने के लिये लाइन लगाये रहते थे और यहां तक सिफारिशें भी लगाने से नहीं चूकते थे . अब वही मंडल इतना बदनाम हो गया है कि सैकड़ों की तादाद में बने बनाये मकान खंडहर बनने लगे हैं. सूत्रों के अनुसार गलत खर्च, मैंनेजमेंट के गलत निर्णय , सिविल कार्यों की खराब क्वालिटी व भ्रष्टाचार इतना हावी होने लगा कि अब मंडल का भट्टा बैठ गया है. लोगों का कहना है कि राजनैतिक रसूखदारों का दबाव व अधिकारियों की मनमानी इस हद तक़ बढ़ गई कि एकाउंट व खर्च के सामान्य सरकारी नियम यानि खर्च करने के पहले उसका विष्लेषण व तकनीकि- वाणिज्यिक स्वीकृति लिये बिना , करोड़ों रुपये के अनेक खर्च कर दिये गये.  जिन्हें बाद में बोर्ड की मीटिंग में पास कराने का खेल चला है. चूंकि उन मीटिंगों में राज्य के विभिन्न विभागों के उच्चाधिकारी भी उपस्थित रहते थे व उनके सामने किये गये बेहतरीन प्रस्तुतिकरण से वे भी हील-हवाला नहीं कर पाते थे और वे भी अनजाने में इस अविधिक गतिविधि को संरक्षण देने के दोषी बना दिये गये है. यूं तो हर आम व खास आदमी प्रदेश की सरकार पर आश्रित इस मंडल के सुचारू कार्य करने के लिये सद्भावना रखता है परंतु अब मंडल के अधिकारी ही अपने रवैये से अपनी फेस- वैल्यू खोने लगे हैं. पिछले दिनों ऐसे ही एक प्रकरण में दो अधिकारियों की लड़ाई में केवल एक अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही व एक को संरक्षण देने का मामला हुआ था . अब साधारण शब्दों में , मंडल मुख्यालय में पिछले 4 वर्षों की आवक जावक पंजी की प्रति,  सूचना के अधिकार के तहत मांगे जाने पर , जन सूचना अधिकारी भी बड़े शान से जवाब देते हैं कि मांगी गई जानकारी अस्पष्ट है . पूरब टाइम्स की एक और खुलासा रिपोर्ट ...

छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के जन सूचना अधिकारी ने गंभीर आर्थिक अनियमितता को कारित किए जाने का संकेत देने वाली जानकारी सूचना के अधिकार के तहत दी है . वह यह है कि मुख्य लेखा अधिकारी मुख्यालय द्वारा अवगत करवाया गया है कि छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल वर्ष 2018 - 19 और वर्ष 2019 - 20 के लेखाओं का आडिट नहीं हुआ है . गौर तलब रहे कि जन सूचना अधिकारी ने विधिवत कार्यवाही करते हुए यह स्पष्ट जानकारी लिखित मे दी है जिसके बाद सर्व साधारण की जानकारी मे भी यह आ गया है कि विगत दो वित्तीय वर्षो की आडिट रिपोर्ट तैयार किए जाने की कार्यवाहीं को सुनिश्चित करवाने मे छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अधिकारी विफल रहे है . यहां यह भी स्पष्ट करना तर्क संगत लगता है कि अगर लेखा संपरीक्षा नहीं होगा तो कैसे यह स्पष्ट होगा कि आर्थिक अनियमितताओं और आपत्तियों का निराकरण करने की मंशा जिम्मेदार प्राधिकारियों की है .

प्रेस ने छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल के प्रदेश कार्यलय मे सूचना के अधिकार के तहत आवेदन प्रस्तुत कर जानकारी मांगी की विगत 4 वर्षो के आवक जवाक पंजी के सभी पृष्ठों की जानकारी दें लेकिन छग गृह निर्माण मंडल के जन सूचना अधिकारी ने प्रेस के द्वारा आवक जावक् पंजी के सभी पृष्ठों की जानकारी देने से इंकार करने का यह बहाना बनाया कि मांगी गई जानकारी अस्पष्ट है .  गौर तलब रहे कि सूचना अधिकारी की यह प्रतिक्रिया बड़े घोटालों को किए जाने की शंका को पर्याप्त आधार प्रदान कर रहा है और शासन प्रशासन तथा आम जनता को स्पष्ट रूप से यह संकेत दे रहा है कि छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल में कुछ भी सामान्य नहीं चल रहा है . कहीं न कहीं गड़बड़ियों को दबाने और उजागर करने वाले घटक आपस में टकरा रहे है और इस टकराहट के असल कारणों को छत्तीसगढ गृह निर्माण मंडल की आवक जावाक पंजी ही उजागर कर सकती है . 










कलेक्टर ने कहा कि शहर में बस स्टैंड सहित महत्वपूर्ण जगहों पर फ्लैक्स लगाएं जाएं ताकि युवाओं को रूकने के संबंध में एवं भर्ती रैली के संबंध में जरूरी मार्गदर्शन मिल सके। यह फ्लैक्स हर जिला मुख्यालय के बस स्टैंड सहित प्रमुख स्थलों में लगाए जाएंगे ताकि दुर्ग आने वाले युवाओं को अधिक भटकना न पड़े। इसके अलावा बसों आदि में भी स्टीकर लगाए जाएंगे।




पूरब टाइम्स, दुर्ग। नेहरू नगर चौक से अंजोरा तक की मुख्य सड़क के कार्यों में अब गति आ चुकी है। प्रथम चरण में वाय शेप ब्रिज से लेकर नेहरू नगर चौक तक के यातायात को डायवर्ट करने एवं अन्य विकास कार्यों की समीक्षा करने विधायक अरुण वोरा ने ठेका एजेंसी सह लोनिवि अधिकारियों के साथ विश्राम गृह में बैठक की व विकास कार्यों में आने वाली समस्याओं को एक एक कार दूर किया। 

जगह जगह खुदाई होने से शहर में पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही थी जिसके निराकरण के लिए वोरा ने महापौर धीरज बाकलीवाल की मौजूदगी में जल घर के अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश देते हुए 64 करोड़ की मुख्य सड़क सौंदर्यीकरण में पूरा सहयोग देने के साथ ही पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित रखने को कहा। लोनिवि अधिकारियों को पुराने डिवाइडर को तोड़ कर पूरी तरह से नवनिर्मित करने और जहां भी आवश्यक है वहां पेड़ों की कटाई कर नए वृक्ष लगाने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि अथक प्रयासों से शहर के मुख्यमार्ग का कायाकल्प करने एक बड़ी राशि लाई गई है विकास कार्य में किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बटालियन के पास एवं मालवीय नगर चौक में चल रहे कार्यों के निरीक्षण में पहुंचे वोरा को अधिकारियों ने निर्माण कार्य की जानकारी देते हुए बताया कि सभी चौक चौराहों का चौड़ीकरण करने के साथ ही पेवर ब्लॉक लगा कर ड्रेन टू ड्रेन धूल मुक्त सड़क का निर्माण किया जाएगा एवं नालियों को अंडरग्राउंड रखा जाएगा।




पूरब टाइम्स , भिलाई . जनवरी के पहले सप्ताह से स्व. कार्तिक राम ठाकुर का शव मरचुरी में ही रखा है  और उनके परिवारजन भिलाई स्टील प्लांट में अनुकंपा नियुक्ति के लिये संघर्ष कर रहे हैं. धीरे धीरे समय बीतते चला जा रहा है और अनेक सामाजिक संगठन इस मुहिम में जुड‌ते जा रहे हैं. इसमें से प्रमुख सर्व आदिवासी समाज ने अब आक्रामक प्रदर्शन शुरू कर दिया है . जिलाध्यक्ष चंद्रभान सिंह ठाकुर व उनकी टीम अब पूरी तरह से उस पीड़ित परिवार के साथ खड़े हुए हैं. मुर्गा चौक में कल इन संगठनों द्वारा बीएसपी प्रबंधन का पुतला भी जलाया गया . इस मामले में प्रबंधन का स्टैंड सही है या नहीं यह सवाल नहीं रह गया है परंतु अब भिलाईवासी यह सवाल उठाने लगे हैं कि प्रबंधन इस मामले में पहल कर इसका निपटारा क्यों नहीं कर रहा है ? पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...

भिलाई इस्पात संयंत्र के कर्मचारी की मृत्यु के पश्चात उसके परिजनों ने मृत देह का अंतिम संस्कार नहीं किया और बीएसपी प्रबंधन के समक्ष अपनी मांगे रख दी तथा मांगे पूरी होने की शर्त पर मृत देह का अंतिम संस्कार करने की मंशा जाहिर कर दी.  इसके बाद से बीएसपी प्रबंधन और मृतक कर्मचारी के परिवार के बीच बातचीत का दौर चल रहा है लेकिन कोई निष्कर्ष नहीं निकल पा रहा है . जिसके कारण मृत देह का अन्तिम संस्कार भी नहीं किया जा रहा है . इस दुखदाई घटना के बाद बीएसपी प्रबंधन की निर्णय क्षमता की दयनीय हालत का परिचय सभी को पुनः एक बार हो गया है . उल्लेखनीय है कि यह पहली घटना नहीं है . पूर्व में भी संयंत्र कर्मियों के परिजनो ने ऐसे ही परिस्थिति में बीएसपी प्रबंधन के समक्ष खड़ी की थी . बावजूद इसके बीएसपी प्रबंध ऐसे मामलों का विधिक पक्ष सभी के सामने में लाने को विफल हो रहा है और अपनी अपनी विफल निर्णय क्षमता को प्रमाणित कर रहा है.

श्रम कानून के दृष्टिकोण से औद्योगिक इकाइयों में कार्यकर्ता कर्मचारियों और अधिकारियों के हितों के संरक्षण के लिए बहुत से कानूनी आधार है .  जिनके आधार पर बीएसपी कर्मी के मृत्यु के उपरांत उसके परिजन अपनी तथाकथित मांगे प्रस्तुत कर रहे है और उसके मृत देह के अंतिम संस्कार को करने के लिए प्रबंधन द्वारा की जा रही अपील को ठुकरा रहे है . वहीं दूसरी ओर जिला प्रशासन भी मृत देह का अंतिम संस्कार किए जाने के लिए परिवार जनों को मना रहा हैं लेकिन मृतक कर्मचारी के परिवार की आर्थिक स्थिति का वास्ता देकर परिवारजन अपनी मांगे प्रबंधन के समक्ष रखकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे है . अब ऐसी स्थिति मं  यह प्रश्न खड़ा हो गया है कि क्या वाकई मृत देह का अंतिम संस्कार नहीं करने वाले परिजनों की मांगे गैर वैधानिक है और अगर ऐसा है तो बीएसपी प्रबंध परिवार वालों की मांगों को गैर कानूनी साबित करने के लिए आगे क्यों नहीं आ रहा है ?

भिलाई इस्पात संयंत्र का प्रबंधन अपने एक कर्मचारी की मृत्यु के उपरांत उसके परिवारजनों की मांगों को पूरा नहीं करने की हतधर्मिता वाली कार्यवाही विगत कई दिनों से कर रहा है.  इस दुखद घटना के बाद कई दिनों से भिलाई इस्पात संयंत्र कर्मी की लाश अस्पताल परिसर में ही रखी हुई है . परिवारजनों की सहमति के बिना किसी शासकीय प्राधिकारी ने मृत देह का अंतिम संस्कार करने की विधिक बाध्यता का हवाला देकर इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया और इस दुखद मामले में पुलिस हस्तक्षेप की भी गुंजाइश नजर नहीं आ रही है . यह मामला केंद्रीय इस्पात मंत्री के भी संज्ञान मे लाया जा चुका है लेकिन विडंबना यह है कि मृत देह की स्थिति दिनों दिन खराब होती जा रही है और केंद्रीय इस्पात मंत्रालय इस दुखद मामले में मुख दर्शक की भूमिका में नजर आ रहा है.






भिलाई। भिलाई नगर निगम के वार्डों के परिसीमन के खिलाफ हाईकोर्ट में लगाई गई याचिका को बिलासपुर हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। सभी पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने परिसीमन को सही ठहराया है। इसके साथ ही सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद अब भिलाई निगम के चुनाव का रास्ता भी साफ हो गया है।

वहीं, फैसले से असंतुष्ट याचिकाकर्ता ने इसे हाईकोर्ट की डबल बेंच में जाने की बात कही है। बता दें कि जिला प्रशासन से छत्तीसगढ़ नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 वार्डों का विस्तार नियम 1994 के तहत किए परिसीमन को निगम के कुछ निवर्तमान पार्षद रिंकू राजेश प्रसाद, पीयूष मिश्रा, वशिष्ठ नारायण मिश्रा, शाहीन अख्तर, जय प्रकाश यादव और पूर्व पार्षद संजय दानी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

सभी जनप्रतिनिधियों ने व्यक्ति विशेष को राजनीतिक फायदा पहुंचाने के लिए नियम विरुद्ध और अवैधानिक तरीके से परिसीमन करने का आरोप लगाया था। इसे कोर्ट में चुनौती देते हुए उन्होंने नए सिरे से परिसीमन कराए जाने की मांग की थी। लंबी बहस के बाद 27 जनवरी को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को कोर्ट का फैसला आया है। जिसमें हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन द्वारा किए परिसीमन को सही ठहराया है।

इसके बाद अब भिलाई निगम के चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। यदि कोई आपत्ति नहीं लगी तो जल्द ही वार्ड आरक्षण के बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। यह भी संभावना जताई जा रही है कि रिसाली व भिलाई चरोदा और जामुल के साथ ही भिलाई निगम का भी चुनाव करा लिया जाएगा। यहां उल्लेखनीय है कि भिलाई निगम के 13 वार्डों को अलग कर रिसाली निगम बनाए जाने के बाद भिलाई निगम का फिर से परिसीमन किया गया था।

आम्रपाली कालोनी प्रकरण की कार्यवाहीं मे क्या अनियमितता को छिपाने का अवसर प्रदान किया जा रहा है ? क्या नगर निगम के पास भी उपलब्ध हैं शुरू से अभी तक के दस्तावेज ?




पूरब टाइम्स, भिलाई. भिलाई के गौरव पथ पर स्थित आम्रपाली वनांचल सोसाइटी के घरों का विवाद अब फिर से चर्चा का विषय बन गया है. नगर निगम भिलाई के द्वारा इतने सालों तक इस मामले में लचर व्य्वहार अब उनके गले की हड्डी बन रहा है. अखबारों में लगातार सुर्खियों में आने के बाद आनन फानन नगर निगम ने अपने पास बंधक रखाये हुए 49 मकानों के सामने अपने स्वामित्व का बोर्ड लगा दिया है परंतु निगम के ही पुराने दस्तावेजों के अनुसार कुल 98 मकान निगम के पास बंधक थे . अब यह कोई बताने के लिये तैयार नहीं है कि बिना पूर्ण डेवेलपमेंट व आगे की अनुमति व टैक्स फीस पटाये किस आधार पर 49 मकानों को बंधन मुक्त दिखाया गया है ? पूर्व के आयुक्त ने अपने पत्र में 98 मकानों को बंधक बताया है तो किस फाइल के आधार पर वर्तमान आयुक्त केवल 49 मकानों को बंधक बता रहे हैं ? क्या पुरानी फाइल गायब हो गई और उसकी जगह नई फाइल बना कर आयुक्त को गुमराह किया गया है ? क्या सीएसआईडीसी के द्वारा उस कॉलोनी को दी गई ज़मीन की लीज़ निरस्त करने की बात को नगर निगम भिलाई नज़र अन्दाज़ कर रहा है ? क्या बंधक रखे गये मकान व ज़मीन को अधिपत्य में लेने के लिये, नगर पालिका निगम ने विधिक रूप से समस्त कानूनों का पालन किया है ? क्या नगर निगम कॉलोनी के डेवेलपमेंट को पूर्ण कर, उसमें खर्च की गई राशि को बंधक रखी प्रोपर्टी बेचकर रिकवरी करना चाहती है या उस बंधक प्रोपर्टी को अपनी मानने का बदगुमान पालने लगी है ? क्या नगर निगम के आयुक्त अपने को अब सिविल संबंधित केसेस में फैसला देने वाली ऑथोरिटी मानने लगे हैं ? प्रश्नों की झड़ी लग जायेगी , जिनके उत्तर भिलाई निवासी जानना चाहते हैं. पूरब टाइम्स की रिपोर्ट ......


अभी आम्रपाली कालोनी का मामला पूरे भिलाई में चर्चा का केंद्र बना हुआ है क्योंकि इस मामले से व्यथित लोग रोजाना नए - नए खुलासे कर रहे हैं . ऐसा ही एक विषय पर,  नाम न बताने की शर्त पर , एक भवन स्वामी परिवार ने प्रेस प्रतिनिधि से अपनी व्यथा साझा की . गौर तलब रहे कि इस रहवासी का प्रश्न भिलाई निगम के लिए है . वह यह है कि भिलाई निगम कोई भी कार्यवाही करने से पहले इस बात को खुलासा करें कि आम्रपाली कालोनी में कितने मकान निर्मित किए गए है और इनके निर्माण का समय कब और किस निगम अभिलेख में विधिवत अभिलिखित किया गया है ? उल्लेखनीय है कि यह प्रश्न भिलाई निगम के अधिकारियों के लिए वैसे तो बड़ा नहीं है लेकिन सूत्रों के अनुसार भिलाई निगम प्रशासन के लिए इस प्रश्न का उत्तर देना बड़ा सरदर्दी वाला सबित होगा क्योंकि इसी के आधार पर यह तय हो पाएगा कि जो लोग अपने भवन कब्जे की दिनांक आगामी निगम कार्यवाहियों मे घोषित करेंगे , उस दिनांक पर कब्जे वाले भवन कि स्थिति निगम अभिलेख में क्या थी ?


आम्रपाली कालोनी के मकानों का मालिकाना हक़ बेहद विवादित है . इस बात पर किसी भी पक्ष का दो मत शायद नहीं होगा क्योंकि तथाकथित तौर पर आम्रपाली कालोनी में स्थित सभी भवन मालिकों के पास इस बात के पुख्ता प्रमाण नहीं है कि भवन स्वामित्व का दावा करने के लिए अपने मालिकाना हक़ के हस्तांतरण कार्यवाही को किस शासकीय विभाग में कब और कैसे प्रमाणित तौर पर पंजीकृत करवाया है . इसी कारण से इस कालोनी के भवन स्वामियों के आपसी लड़ाई का मामला,  कई विधिक कार्यवाहियों व विवादों में घिर गया है . कालोनी के भवन मालिकों की अपने आप को असली बताने वाली तथाकथि दो सोसायटी , आपस में आरोप प्रत्यारोप कर रही है.  ऐसी स्थिति में सभी मालिकों को अपने मालिकाना हक़ को पुनः प्रमाणित करवाने की विधिक परिस्थिति बन गई है . इस कारण से अब यह प्रश्न बेहद महत्वपूर्ण हो गया है कि आम्रपाली कालोनी के वैध और अवैध कब्जाधारी भवन स्वामियों की पहचान करने के लिए क्या कर रहा है जिला प्रशासन ? यह भी साफ नहीं है कि ज़मीन का नाप एकदम पुख्ता ढंग से किया गया है ? 

आम्रपाली कालोनी मे निवास करने वाले लोग अपने मालिकाना हक़ को साबित करने के लिए दस्तावेजी प्रमाण इकट्ठा करने को मजबूर हो गए है और भवन का तथाकथित आधिपत्य और स्वामित्व हासिल करने के वर्षो बाद इस प्रश्न का सामना करने को मजबूर हो गए है कि उनके मालिकाना हक़ को साबित करने वाले दस्तावेज जो कि तथाकथित तौर पर उनके पास है , उसकी वैधता को आम्रपाली कालोनी के निवासी कैसे प्रमाणित करेंगे ? वैसे यह मामला अभी सार्वजनिक समस्या बन गया है क्योंकि आम्रपाली कालोनी के निवासियों और मकान मालिकों की संख्या बहुत बड़ी है . अब जब मालिकाना हक़ को लेकर विवाद उत्पन्न हो गया है तो इस विवाद का समाधान हासिल करने के लिए स्वाभाविक है कि सभी भवन स्वामित्व की दावेदारी करने वाले लोगों को पुनः एक बार अपने मालिकाना हक़ को प्रमाणित करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा. 

पूरब टाइम्स, दुर्ग। जिले की गरिमामयी परम्परा का निर्वहन करते हुए इस साल भी गणतंत्र दिवस क्रिकेट मैच का आयोजन जिले के नागरिकों और प्रशासन के बीच किया गया। 12 ओवर के इस रोमांचक मैच में नागरिक एकादश ने कलेक्टर एकादश को हराकर मैच जीता। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए कलेक्टर एकादश ने 12 ओवर में 6 विकेट पर 97 रन बनाया। 

निर्धारित लक्ष्य को नागरिक एकादश ने 5 विकेट खोकर 18 ओवर में पुराकर जीत अर्जित किया। इस मैच की गौरवशाली परम्परा का निर्वहन आजादी के जश्न से लेकर अब तक निरन्तर किया जा रहा है। कलेक्टर एकादश के कप्तान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी एस. आलोक ने कहा कि प्रशासन को इस तरह के आयोजन में भाग लेने का मौका बहुत कम मिलता है। इस प्रकार के आयोजन होने से नागरिकों और प्रशासन के बीच आपसी सद्भाव और सामन्जस्य का अवसर बनता है। 

यह सुखद अनुभव है कि सभी इस ऐतिहासिक परम्परा का निर्वहन कर रहे है। नागरिक एकादश के कप्तान ने कहा कि हमे सामाजिक दायित्वों का निर्वहन करते रहना चाहिए। जिससे हमारा इतिहास और परम्परा हमेशा जीवित रहे। इस दिशा में यह मैच हमेशा यादगार बना रहेगा। मैच में भागीदार बने सभी अधिकारियों और नागरिकों को पुरस्कार प्रदाय किया गया।

पूरब टाइम्स, दुर्ग। शहर में आयोजित चर्म रोग निदान शिविर 5 फरवरी से 13 फरवरी तक प्रत्येक वार्डों में किया जा रहा है जिसमें कुष्ठ रोग की पहचान एवं इलाज के लिए आज बघेरा एवं पुलगांव में कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम का उद्घाटन विधायक अरुण वोरा द्वारा किया गया। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्मरण करते हुए लोगों को संबोधित कर कुष्ठ उन्मूलन के प्रति गांधी जी के योगदान को याद करते हुए कहा कि पहले अज्ञानता वश कुष्ठ को छुआ छूत की बीमारी मानी जाती थी जिससे लोगों ने इसे छिपाना शुरू कर दिया था। 

किंतु महात्मा गांधी ने कुष्ठ रोगियों की सेवा कर जन जन में जागरूकता लाई एवं इस बीमारी को देश मे विकराल रूप लेने से रोका। शहर को भी कुष्ठ मुक्त करने श्री वोरा ने उपस्थित लोगों से आस पास किसी भी तरह के कुष्ठ रोग के लक्षण वाले व्यक्तियों को इलाज के लिए प्रेरित करने एवं उनके साथ सामाजिक भेदभाव नहीं होने देने का प्रयास करने की प्रतिज्ञा भी दिलाई।

इस कार्यक्रम में जिला कुष्ठ अधिकारी डॉ अनिल शुक्ला ने बीमारी के लक्षण बताते हुए कहा कि कुष्ठ रोग माइक्रोबैक्टीरियम लेप्रे नामक जीवाणु से होता है जिसका निदान त्वरित उपचार द्वारा संभव है। लक्षण दिखने पर तत्काल निकटतम शासकीय अस्पतालों में जाकर एम डी टी दवा प्राप्त करें। बघेरा स्कूल में कार्यक्रम के दौरान वार्ड वासियों की मांग पर शासकीय प्राथमिक शाला के जर्जर हो चुके कमरों के पुनर्निर्माण के लिए डीएमएफ फंड से 5 नए कमरे स्वीकृत करने एवं पुलगांव स्कूल के भवन का संधारण करने को भी कहा।