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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



पूरब टाइम्स दुर्ग। छत्तीसगढ़ प्रदेश एनएसयूआई के द्वारा चला जा रहा मोदी टीका दो अभियान के तहत एनएसयूआई के जिला कार्यकारणी अध्यक्ष सोनू साहू के नेतृत्व में से 18+ वैक्सीनेशन पर देश के युवाओं से धोखाधड़ी के विरोध में मोदी टीका दो अभियान स्पीक अप छत्तीसगढ़ फ़ॉर वैक्सीन मुहिम के तीसरे चरण में शुक्रवार  छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद सरोज पांडे  से मिलने उनके निवास स्थान पहुंचे और मांग पत्र सौंपा। सोनू साहू ने बताया कि 1 मई से भारत वर्ष में 18+ टीकाकरण करने की घोषण केंद्र सरकार ने की था किंतु अव्यवस्थित स्तिथि के कारण हमारे राज्य को प्राप्त नाम मात्र मे वैक्सीन उपलब्ध  हो पाया है प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 50 लाख टीका की मांग की गई थी पर केंद्र सरकार द्वारा मात्र 1 लाख 30 हजार टिके की भेजे गए है ऐसी परिस्थिति में सुधार किया जाए और छत्तीसगढ़ प्रदेश के साथ दोहरा व्यवहार बंद करते हुए राज्य को पर्याप्त टीके मुहैय्या करवाएं। केंद्र में भाजपा की सरकार है और सुश्री पांडेय पार्टी की  पूर्व महासचिव एवं छत्तीसगढ़ से राज्यसभा सांसद भी हैं यदि इस संकट के दौर में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप टिप्पणिययां करने के बजाए अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपकी सुनते हो तो उनसे कहे कि हमारे राज्य को पर्याप्त मात्रा में टीका  मुहैया करवाएं जाए ।
● सन् 1978 से शुरू हुए टीकाकरण कार्यक्रम के बाद से आज तक किसी केंद्र सरकार ने किसी टिके का जनता या किसी राज्य सरकार से एक रुपय नहीं लिया, जन्म से 16 साल तक की उम्र में 11 मुफ़्त टिके लगते आए हैं। यह पहली केंद्र सरकार है जिसने आपदा में भी अफ़सर खोज़ लिया आप भारतीय जनता पार्टी के सम्मनीय वरिष्ठ नेत्री है आप प्रधानमंत्री जी को अपनी ओर से एक पत्र लिख करके मांग करे की राज्य को पर्याप्त मात्रा में टिके मुहैया करवाएं जाए ।

दुर्ग। कोरोना वायरस के नियंत्रण और रोकथाम के लिए गुरूवार को विधायक अरुण वोरा, महापौर धीरज बाकलीवाल ने कन्हैयापुरी, मुक्त नगर, आदेर्श नगर होतु हुये महाराजा चैक से बोरसी तक सेनेटाईजिंग मार्च अभियान चलाये। उन्होनें प्रदेशव्यापी रियायत की घोषण के बाद गली मोहल्लों एवं कालोनियों में स्थित एकल किराना दुकानें, फल सब्जी व्यवसायीय एवं प्रतिष्ठानों के खुलने से आम जनता की चहल कदमी बढ़ गयी है। वार्डो के दुकानों व सार्वजनिक स्थानों पर विधायक अरुण वोरा, महापौर धीरज बाकलीवाल के द्वारा युद्ध स्तर पर सैनेटाईजेश किया जा रहा है। इस दौरान एमआईसी प्रभारी दीपक साहू, पार्षद भास्कर कुण्डले, स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता, बिरेन्द्र ठाकुर, मेनसिंग मंडावी तथा अन्य कर्मचारी दो सेनेटाईजर टैंकर, तीन छोटी सेनेटाईजर मशीन और 25 हैण्ड सीकर मशीन के साथ शहर में सेनेटाईजिंग की शुरुआत आज से की गई।
दुकानदारों से अपील दुकान खोलने से पूर्व सेनेटाईजिंग अवश्य करायें-
विधायक वोरा एवं महापौर बाकलीवाल ने सेनेटाईजिंग के दौरान कहा कि शासन के द्वारा 17 मई तक लॉकडाउन की घोषणा कर दिया गया है जिसमें कुछ व्यवसाय और दुकानों को नियत समय तक दुकान खोलने की छूट दी है। अत: एैसे दुकानदारों से अनुरोध है कि लॉकडाउन का नियमों का पालन करते हुये दुकानें खोलने के पूर्व दुकानों के बाहर, आस-पास भाग को सेनेटाईजिंग अवश्य करायें। इसके लिए वे स्वास्थ्य अधिकारी दुर्गेश गुप्ता मो0 नंबर 9340874859 तथा कर्मशाला अधीक्षक बिरेन्द्र ठाकुर मो0 नंबर 9111006834 से संपर्क कर अपने दुकान क्षेत्र को सेनेटाईजिंग करावें।
आम नागरिकों से अपील-
विधायक, एवं महापौर ने आम नागरिकों से भी अपील करते हुये कहा कि राज्य के मुखिया माननीय भूपेश बघेल मुख्यमंत्री छ0ग0 राज्य द्वारा प्रदेश के जनता की तकलीफ और कोरोना संक्रमण की रफ्तार को देखते हुये प्रदेश में 17 मई तक लॉकडाउन की घोषणा की है। परन्तु छोटो दुकानदार, व्यवसाय में छूट भी दी है। नियत समय पर ही व्यवसाय की छूट दी है। अत: आम नागरिकों से अपील है कि वे दुकानों में भीड़ नहीं लगायें, होम डिलवरी के माध्यम से सामान प्राप्त करें। मास्क लगायें और सोशल डिस्टेंस का पालन अवश्य करें।






पूरब टाइम्स , रायपुर / भिलाई . सबके लिये तालियां बज गईं पर हमारे बच्चों का क्या ? उन सूपर हीरोज़ के बारे में किसी ने सोचा है जो साल भर से घर के अंदर बंद हैं . उनकी तो पूरी ज़िंदगी जैसे उलट पलट हो गई है . रोज़ नये नियम जो उन्होंने कभी सुने नहीं थे , ऐसी ज़िंदगी जो उन्होंने कभी सोची नहीं थी , हर उनकी फेवरेट चीज़ उनसे छीन ली गई है. फैंड्स से मिलना, घर के बाहर जाकर खेलना , स्कूल जाना, आइसक्रीम खाना, स्वीमिंग, साइकिलिंग ,  बर्थडे पार्टी करना व उसमें जाना, सप्ताह मे मिली छुटी का अपने ढंग से मज़ा लेना , सब कुछ उनसे छीन गया है या कहो कि उनका बचपन ही उनसे छीन लिया गया है . ऊपर से घर में रहकर केवल निगेटिव बातें, कोरोना का खौफ और इसके अलावा घर की कमज़ोर होती आर्थिक स्थिति की बातें . उनके भोले मन में एक अदृष्य खौफ बैठने लगता है .फिर ऑनलाइन पढ़ाई का प्रेशर,  नेटवर्क इश्यूज़ , समझ में आये या ना आए , अटेंड करो . फिर भी वे किसी से शिकायत नहीं करते , हमारी तरह ओवर-रिएक्ट नहीं करते , सोशल मीडिया में हमारी तरह फ्रस्ट्रेशन नहीं निकालते . उन बच्चों , उन सूपर हीरोज़ को सैल्यूट करते हुए आज का अंक समर्पित ....

वर्तमान स्थिति में कोरोनावायरस प्रकोप ने विश्व की सभी सरकारों और शासन व्यवस्थाओं को घुटने टिकवा दिए है.  इस बीच अफवाहों का बाजार भी गर्मा रहा है , आम जनता आर्थिक तंगी और स्वास्थ्य चिंताओं से ग्रसित है , लोगों का सामाजिक तालमेल कभी भी बिगड़ने के ख़तरे की सीमा पर पहुंच गया है वगैरह – वगैरह .  इस प्रकार की कई विश्वव्यापी चिंताओं ने हमे जकड़ रखा है लेकिन इस बीच हम उन बच्चों की मनोदशा पर बात करना और कोई सकारात्मक विचार करना भूल गए है जो अपने है घरों में इस विपरित परिस्थितियों में फसें हुए हैं .  बच्चो को घरों से बाहर निकलने की आजादी स्वास्थ्य दृष्टिकोण से बाधित है . स्कूल जाकर सामाजिक गतिविधि को समझने का अवसर बच्चों से छीन गया है और इस गंभीर समस्याओं को हम जाने अनजाने नजरंदाज कर रहे है ऐसा क्यों हो रहा है ?


अपने ही घरों में बंद रहकर आर्थिक तंगी का सामना करने को मजबूर अभिभावक अपने व्यवसाय और रोजगार को प्रत्येक तालाबंदी दिवस के साथ गर्त मे जाता देख रहे है . एक तरफ उद्योगपति और व्यवसाई अपने व्यवसाय में होने वाले घाटे का आकलन करके बेहद घबराएं हुए हैं तो वहीं दूसरी ओर नौकरीपेशा लोग अपने नियोक्ता की बिगड़ती आर्थिक हालत और हाथ से जाती नौकरी के कारण अवसाद का शिकार हो रहे हैं . जिसका विपरित असर उनके बच्चों पर भी पड़ रहा है क्योंकि उनकी बाल अवस्था यह समझने में नाकाम है कि उनके अभिभावक किस मानसिक तनाव पूर्ण दशा में है और परेशानियों से जूझते हुवे अपना आपा खोकर अपने ही घरो में असामाजिक और अमानवीय तरीके से पेश आने वाले हैं . प्रत्येक परिवार का आपसी मानसिक तालमेल गड़बड़ाया हुआ है और बच्चों को अजीब से हालातों को जूझने पर मजबूर कर रहा है .

अभी स्कूल संचालक स्कूल फीस वसूलना के एक मात्र साधन ऑनलाईन शिक्षा के नाम पर बच्चों को मानसिक तनाव के हवाले कर रहे है.  गौर तलब रहे कि बच्चों को मोबाइल लेने पर डांटने वाले माता पिता लॉक डाउन के बाद निजी शाला संचालकों के दबाव के कारण बच्चों को मोबाइल देकर ऑनलाईन शिक्षा लेने को मजबूर कर रहे है . जबकि सभी जानते है कि ऐसी विपरित परिस्थितियों में बच्चो के बाल अवस्था का अपरिपक्व मस्तिष्क यह समझ पाने में सक्षम नहीं है कि उनके माता पिता अचानक क्यों बदल गए है या कि मामला कुछ और है . अब हालात ये है कि जो बच्चे मोबाइल को हाथ लगाने पर परिवारजनों से मार और डांट खाते थे उन्हीं बच्चों को उनके परिवार वाले दबाव बनाकर ऑनलाईन शिक्षा लेने को मजबूर कर रहे हैं .  वहीं दूसरी ओर डिजिटल स्क्रीन से झांकते शिक्षक बच्चों को उन्हीं के घर में यह अहसास करवा रहे है कि घरों में बंद बच्चो के एकाधिकार पर अब शिक्षक भी हिस्सेदार है जो बच्चों को उनके साथी छात्रों से बातचीत करने का अवसर भी नहीं देता है इसलिए हमारी अस्त व्यस्त  व्यवस्था बच्चों को त्रासदी पूर्ण मानसिक तनाव दे रहे हैं .

दुर्ग। कोरोना संक्रमण को थामने के उपायों को लेकर आज एक महत्वपूर्ण बैठक मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के कार्यालय में हुई। बैठक में कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने कोरोना नियंत्रण के लिए सैंपलिंग को अहम बताते हुए इस पर विशेष फोकस करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक में कलेक्टर ने कहा कि गली मोहल्लों की किराना दुकानों के दुकानदारों तथा यहां काम करने वाले लोगों की सैंपलिंग आवश्यक है। इसके लिए प्रभावी रूप से कार्य करें, इसके साथ ही मेडिकल स्टोर्स, स्ट्रीट वेंडर्स एवं इसी तरह के चिन्हांकित वर्ग की प्रभावी रूप से टेस्टिंग कराना सुनिश्चित करें। इसके साथ ही कंटेनमेंट जोन में भी व्यापक रूप से टेस्टिंग का कार्य हो। कलेक्टर ने इसके साथ ही ट्रेसिंग टीम के कार्यो की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि ट्रेसिंग टीम पॉजिटिव मरीजों के चिन्हांकन का कार्य न्यूनतम समय मे करने की कोशिश करे। उन्होंने होम आइसोलेशन की भी प्रभावी मॉनिटरिंग करते रहने के निर्देश दिए। उन्होंने होम आइसोलेशन में रह रहे सभी मरीजों की प्रभावी मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों के घरों में स्टिकर चस्पा करना सुनिश्चित करें। साथ ही उन्होंने होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की काउंसलिंग के संबंध में भी निर्देश दिए। कलेक्टर ने दवा वितरण तथा प्रोफिलैक्टिक किट के वितरण कार्य की भी समीक्षा की।




पूरब टाइम्स , भिलाई . पिछले साल जब कोरोना का संक्रमण कम हुआ था तो दुर्ग जिले के प्रशासनिक कार्यों में अचानक मुख्यमंत्री की निज सचिव टीम के सदस्य , मनीष बंछोर का हस्तक्षेप बढ़ने लगा . यह हस्तक्षेप इतना बढ़ा कि वर्षों से संघर्षरत कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के गले की हड्डी बनने लगा , विपक्ष के नेता भी उसके कार्यव्यवहार से हैरान थे . प्रशासनिक अमले के साथ , उनके कार्यों का इंस्पेक्शन करना , उन्हें निर्देशित करना व चरोदा निगम के कार्यों में अव्यवहारिक हस्तक्षेप , जन मानस की ज़ुबान पर आ गया और लोगों के द्वारा मनीष बंछोर को दिया गया नाम ‘ छोटा मुख्यमंत्री ‘ एक प्रतीकात्मक विरोध का सुर बन गया . सूत्रों के अनुसार , मनीष बंछोर द्वारा,  पिछली बार , जनवरी के अंत में हाउसिंग बोर्ड के एक कार्यक्रम में स्थानीय नेताओं को दर किनार कर , केवल अधिकारियों को मंच पर बिठाया गया और कुछ अधिकारियों के अविधिक खर्चों के कारनामों पर परदा डालने के लिये मुख्यमंत्री के पुत्र को मुख्य अतिथि बनाने का पैंतरा भी चला गया . इसके बाद निमंत्रण पत्र व कार्यक्रम में हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन की अनुपस्थिति से सब तरफ से सवाल उठने लगेथे  . कुछ समय बाद कोरोना की लहर आने के बाद अचानक अप्रेल अंत में बंद ऑक्सीजन पलांट का दौरा कर , उसके बारे में सोशल मीडिया व अखबारों में खबर देकर वापस ‘ छोटा मुख्यमंत्री ‘ वाहवाही लेते हुए दिखा . अब लोग सवाल करने लगे हैं कि क्यों पिछले 14 महीने से वह बंद ऑक्सीजन प्लांट की सुध नहीं लिये , ना ही बीएसपी की त्रुटियों की ? इस तरह की कार्यशैली प्रदेश के मुखिया की छवि खराब करती है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...

बीएसपी का कर्मचारी मनीष बंछोर जिसे जन सामान्य ने छोटा मुख्यमंत्री का सांकेतिक नाम दे दिया है क्योंकि कांग्रेस की सभी गतिविधयों पर मुख्यमंत्री कार्यालय का यह छोटा कर्मचारी हावी होने का प्रयास करता है और यह माहौल बनाने का भरसक प्रयत्न करता है कि उसकी सहमति लेने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में होने वाले वाले निर्णय मोहताज रहते है . वैसे इस मामले की असलियत आगामी भिलाई और रिसाली निगम चुनाव के बाद स्पष्ट ही जायेगी क्योंकि पार्षद उम्मीदवारों को मिलने वाली टिकट घोषणा के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि छोटा मुख्यमंत्री नामक कल्पना की असलियत क्या है ? लेकिन वर्तमान स्थति मे मुख्यमंत्री कार्यालय के इस छोटे से कर्मचारी से बीएसपी कर्मियों की अपेक्षाओं को जोर का झटका लगा है क्योंकि स्वास्थ्य मामलों में बीएसपी कर्मियों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा और मनीष बंछोर का दिखावी ओहदा हर मोर्चे पर नाकाम ही नजर आया इसलिए मनीष बंछोर को प्रेस के सामने आकर बताना चाहिए कि उसे बीएसपी कर्मियो की व्यथा क्यों नहीं दिख रही है ?

विगत वर्ष करोना वायरस संक्रमण के भयानक स्वरूप से जब पूरा हिन्दुस्तान अनभिज्ञ था और जन साधारण को इस बात को अंदाजा भी नहीं था कि कोरोना वायरस संक्रमण लोक स्वास्थ्य के साथ - साथ सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगा सकता है . ऐसे विपरित और अनिश्चित स्थिति में भी छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में करोना वायरस संक्रमण को काबू में रखा लेकिन इस बार मामला बेकाबू हो गया . वैसे इस विपरित परिस्थितियों के असल कारण मुख्यमंत्री कार्यालय ने अधिकृत तौर पर स्पष्ट नहीं किए है लेकिन सूत्र यह संकेत दे रहे है कि निर्णायक प्राधिकारियों के निर्णयों पर चापलूस व्यवहार शैली के लोगो के अवांछित हस्तक्षेप के बाद मामला बिगड़ा और दुर्ग जिले का लोक स्वास्थ्य प्रशासनिक व्यवस्था के बाहर हो गया . लेकिन जैसे ही इस अवरोध को निकाल बाहर किया गया दुर्ग जिले के लोक स्वास्थ्य को संरक्षित करवाने के प्रभावी कदम यशस्वी होने लगे . उल्लेखनीय है कि दुर्ग जिले के लोक स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ने का मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के कर्मचारी मनीष बंछोर की क्या भूमिका थी इसके लिए अधिकृत प्रतिक्रिया आने पर ही वस्तुस्थिति स्पष्ट हो पाएगी ? 

छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस संक्रमण का प्रकोप ने दस्तक देकर लगभग विगत चौदह महीनों से प्रदेश में अपने प्रकोप को बनाए रखा है . बावजूद इसके इन चौदह महीनों में मरीजों को लगाने वाली ऑक्सीजन व्यवस्था को बनाए रखने के मामले में राज्य सरकार कभी प्रश्नांकित नहीं हुई क्योंकि चिकित्सीय क्षेत्र के लिए लगाने वाली ऑक्सीजन व्यवस्था के लिए जिला कलेक्टर और सीएमएचओ कार्यालय अवांछित राजनैतिक हस्तक्षेप के बिना प्रशासनिक कार्यवाही सीधे करके आवश्यक व्यवस्था को बनाए रखे हुए है . लेकिन विगत दिनों मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी मनीष बंछोर ने वीआईपी अंदाज में चरोदा कुम्हारी क्षेत्र के ऑक्सीजन प्लांट का दौरा किया जिसमे वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दिया गया और किसी भी प्रकार की शासकीय घोषणा या जानकारी का आधार लेकर ,  अनाधिकृत प्रतीत होने वाली मुआयना कार्यवाही की गई .  इस वीडियो को सोशियल मीडिया पर वायरल करवाकर कई प्रश्न खड़े कर दिए. उल्लेखनीय है कि कलेक्टर व सीएमएचओं की कार्य क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए विपक्षियों को प्रदेश कांग्रेस के हाई कमान से यह प्रश्न पूछने का अवसर दे दिया कि क्या विगत चौदह महीनों से प्रदेश सरकार ऑक्सीजन व्यवस्था दुर्ग जिले मे बनाए रखने के मामले में जवाबदारी वाली भूमिका नहीं निभा रही थी क्या ? 




पूरब टाइम्स , भिलाई . छत्तीसगढ़ में कई दशकों तक ऐसा माना जाता था कि भिलाई इस्पात संयंत्र में नौकरी करने वाला व्याक्ति सबसे खुशहाल होता है क्योंकि बीएसपी अच्छी तनख्वाह के अलावा उस व्यक्ति व उसके परिवार के लिये मकान, बिजली, पानी सहित शिक्षा , स्वास्थ्य व मनोरंजन की पूरी सुख सुविधा का ध्यान रखता है . लेकिन अब परिस्थिति बदल गई है . संयंत्र में आये दिन एक्सीडेंट होने लगे हैं . कर्मचारियों में जान की असुरक्षा की भावना आने लगी है . केवल इतना ही नहीं अब संयंत्र कर्मी के लिये दी जाने वाली सुविधाएं धीरे-धीरे छीन ली गईं हैं . मैनेजमेंट अब केवल प्रोडक्शन टारगेट व लाभ के बारे में सोचने लगा है . पहले यह भी माना जाता था कि बीएसपी के आने से लोकल उद्योगों व बीएसपी के लोकल सहायक उद्योगों को भी प्राथमिकता मिलेगी जिससे पैसों का फ्लो भिलाई व छत्तीसगढ़  में बढ़ने से यहां की समृद्धि बढ़ेगी परंतु अब सब दिवा-स्वप्न हो गया है . भिलाई इस्पात संयंत्र का सेक्टर - 9 अस्पताल , अपनी बिल्डिंग , मशीन, एक़्वीपमेंट व डॉक्टरों के कारण पूरे छत्तीसगढ़ के लिये वरदान माना जाता था पर अब रोज़ाना उसकी अनियमितता व कमज़ोरी के कारण मरीज़ों को हुए नुकसान व जान-हानि के समाचार सुनने मिलते हैं. यह सेल की नई पोलिसी के कारण है या बीएसपी प्रबंधन की टोटल असफलता के कारण लेकिन अब कर्मचारी भी आये दिन आंदोलन पर कूदने मजबूर हो गये हैं. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...

बीएसपी कर्मियो के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन स्कूल शिक्षा जैसे आधारभूत सुविधाओं का प्रबंध नहीं कर रहा है , जिसका बोझ प्रदेश सरकार पर पड़ रहा है . चूंकि प्रदेश सरकार के बीएसपी कर्मचारियों के बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा व्यवस्था करवाने मे सक्षम नहीं है इसलिए इस मामले में विगत कई वर्षो से कोई ठोस कदम उठाने के लिए प्रदेश सरकार और बीएसपी प्रबंधन ने पहल नहीं की.  परिणामस्वरूप निजी शिक्षा संस्थाओं को स्कूल शिक्षा के क्षेत्र पर अपना वर्चस्व स्थापित कर बे रोक टोक शिक्षा व्यवसाय संचालन का अवसर मिला गया है.  भिलाई टाउनशिप से लगे निजी शिक्षण संस्थाओं के भीमकाय भवनों में , नियमों के विरूद्ध संचालित शिक्षा व्यवसाय इस बात को प्रमाण है कि बीएसपी कर्मियों के बच्चो के लिए स्कूल शिक्षा सुविधा उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने नहीं की है और बीएसपी कर्मचारियों के बच्चों को निजी संस्थाओं से मोटी फीस अदा करने के एवज में स्कूली शिक्षा लेने को मजबूर कर दिया है 
वैसे तो जिस जिले में केंद्र शासन के उपक्रम के प्रबंध व्यवस्था से संचालित होने वाला एशिया का सबसे बड़ा इस्पात संयंत्र स्थापित हो उस जिले के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए किसी भी शासकीय अस्पताल या अन्य सुविधाओं का मोहताज होने की जरूरत नहीं पड़नी चाहिए लेकिन वर्तमान स्थिति में बीएसपी प्रबंधन इस जन अपेक्षा को पूरा करने में पूरी तरह विफल नजर आ रहा है . बीएसपी के कर्मचारियों के संगठन स्वयं आंदोलित होकर बीएसपी कर्मियों के लिए आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का आरोप लगा रहे है और वैश्विक महामारी से संक्रमित बीएसपी कर्मियों के इलाज करवाने की स्वास्थ्य सुविधाओं में होने वाली कमियों को सामने भी ला रहे है . ऐसी विपरीत स्थिति में दुर्ग जिले के नागरिकों को बीएसपी के अस्पताल से कैसे स्वास्थ्य सुविधा मिलेगी ? इसका अंदाजा कोई भी लगा सकता है लेकिन विडंबना है कि इस गंभीर मामले की जानकारी स्थानीय सांसद , केंद्रीय इस्पात मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचने की पदेन जिम्मेदारी पूरी नहीं कर रहे हैं . जिसके कारण स्थानीय लोगों का भाजपा के सांसदों के प्रति रोष बढ़ रहा है 
विगत महीने से जिस प्रश्न का उत्तर बीएसपी प्रबंधन नहीं दे रहा है , वह गंभीर प्रश्न यह है कि भिलाई इस्पात संयंत्र के अंदर कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के उपाय करने में भी विफल क्यों है संयंत्र प्रबंधन ? गौर तलब रहे कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले बीएसपी कर्मियों की बड़ी संख्या अपने आप में यह प्रमाण है कि बीएसपी प्रबंधन ने भिलाई इस्पात संयंत्र के कार्यक्षेत्र में ऐसे आवश्यक प्रबंध नहीं किए थे , जिससे कि बीएसपी के अंदर कार्यरत लोगों को संक्रमित होने से बचाया जा सके.  उल्लेखनीय है कि जब प्रदेश शासन द्वारा लोक स्वास्थ्य के संरक्षण के लिए घोषित आपातकाल आदेश सर्व साधारण को मानने की वैधानिक बाध्यता थी , ऐसे घोषित आपात कालीन समय में जिला प्रशासन के पूर्ण तालाबंदी आदेश के बावजूद बीएसपी संयंत्र कार्यक्षेत्र मे बड़ी संख्या में इकट्ठा होने वाले बीएसपी कर्मी और श्रमिकों को वैश्विक संक्रमण से बचाने के लिए आवश्यक उपाय नहीं किए गये . परिणाम स्वरूप दुर्ग जिले में एकाएक संक्रमण आंकड़ा बढ़ा और बीएसपी प्रबंधन के विरोध में लगने वाले आरोपों को तर्कसंगत आधार मिल गया है.  इस विषय पर स्थानीय सांसद और विधायक ने अभी तक प्रतिक्रिया नहीं दी है व ना जाने क्यों इन जन प्रतिनिधियों के द्वारा बीएसपी प्रबंधन से प्रतिक्रिया लेने के लिए पहल भी नहीं की जा रही है ? 



पूरब टाइम्स भिलाई/रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य ने हाल ही में एक आदॆश दिनांक 30.04.2021 के साथ बताया कि राज्य कॆ पास टीकों के सभी मौजूदा स्टॉक अंत्योदय कार्ड धारकों के लिए आरक्षित हैं। उक्त आदेश को भिलाई  नेहरू नगर निवासी एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया हिमांशु चौबे जो की  इस्पात संयंत्र  कर्मी  बसंत चौबे के सुपुत्र हैं , के द्वारा   छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समक्ष, व्यक्ति के रूप में याचिकाकर्ता के रूप में चुनौती दी गई थी। उन्होंने मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया कि राज्य तिथि 30.04.2021 का आदेश  भेदभावपूर्ण और प्रकट रूप से मनमाना है, क्योंकि बनाया गया वर्ग अनुचित है। इसके अलावा यह दावा किया गया था कि राज्य को आपदा प्रबंधन अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देश का पालन करना अनिवार्य है और इसके साथ कोई अपमान नहीं किया जा सकता है। यह भी तर्क दिया गया था कि नीति का कार्यान्वयन गैरबराबरी की ओर ले जा रहा है क्योंकि अभिप्रेत लाभार्थी इसका लाभ नहीं उठा रहे हैं।
इस मामले की लंबाई पर सुनवाई की गई, जिसमें कोर्ट ने आवेदक के साथ-साथ अन्य काउंसल और एडवोकेट जनरल को सुना। न्यायालय ने महाधिवक्ता से प्रश्न पूछा कि किस राज्य के पास केंद्र द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के साथ छेड़छाड़ करने की कोई शक्ति है, जिसके लिए महाधिवक्ता ने स्वीकार किया है कि उक्त शक्ति राज्य के पास उपलब्ध नहीं है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया निष्कर्ष निकाला है कि याचिका दिनांक 30.04.2021 अमान्य है। कोर्ट ने राज्य को एक बेहतर नीति बनाने का सुझाव दिया है, जिसमें अंत्योदय कार्ड धारकों, बीपीएल कार्ड धारकों और उपरोक्त गरीबी रेखा के लोगों को दिए जाने वाले टीकों का अनुपात तय किया जा सकता है। मामला को अब आगे के आदेशों के लिए 07.05.2021 पर सूचीबद्ध किया गया है।

दुर्ग जिले में कोरोना संक्रमण को रोकने में कारगर साबित होता दिख रहा लाकडाउन का निर्णय

पूरब टाइम्स दुर्ग. बीते एक हफ्ते में दुर्ग जिले में कोरोना संक्रमण 22 फीसदी घट गया है। 10 अप्रैल को लगभग 2596 लोगों के एंटीजन टेस्ट किये गए, इनमें 1259 पाजिटिव आये। यह कुल आँकड़ों का 48 प्रतिशत थे। 17 अप्रैल यानी शनिवार को 3215 लोगों की टेस्टिंग एंटीजन के माध्यम से हुई। इनमें 815 पाजिटिव आये। यह कुल आँकड़ों का 26 प्रतिशत है। बीते चार दिनों के आँकड़े देखें तो संक्रमण का दर क्रमशः 30, 32, 33 एवं 26 प्रतिशत रहा है। इस तरह एंटीजन टेस्ट में हुई क्रमशः गिरावट यह साबित करती है कि लाकडाउन जिले में प्रभावी होता दिख रहा है और कोरोना संक्रमण पर इससे रोकथाम लगी है। चूँकि एंटीजन टेस्ट के रिजल्ट मौके पर ही मिल जाते हैं इसलिए इनके नतीजे हर दिन के संक्रमण की स्थिति स्पष्ट रूप से बयान करती है। दुर्ग जिले में 6 अप्रैल को लाकडाउन लगाया गया। इस दिन 2659 टेस्ट हुए और 529 पाजिटिव हुए। यह कुल मरीजों का 20 प्रतिशत था। अगले दिन यह आँकड़ा 34 प्रतिशत रहा, फिर इसके बाद दो दिनों तक 40 और 41 प्रतिशत रहा फिर अगले दो दिन 48 प्रतिशत तक रहा। इससे यह पता चलता है कि संक्रमण किस तेजी से बढ़ रहा था। लाकडाउन ने इसकी गति पर रोक लगाई। यदि लाकडाउन नहीं लगाया जाता तो यह प्रतिशत कई गुना बढ़ जाता। इन आँकड़ों से साफ जाहिर है कि लाकडाउन की टाइमिंग बिल्कुल सही थी और इसके नतीजे प्रभावी रहे हैं।

संक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए लाकडाउन है सबसे प्रभावी तरीका-

लाकडाउन से वायरस के प्रसार की क्षमता कम हो जाती है क्योंकि जब उसे संक्रमण के लिए नये शरीर नहीं मिलते तो इसके फैलने की दर घटने लगती है। यही वजह है कि दुनिया के सभी देशों में लाकडाउन का उपयोग बड़े समुदाय तक संक्रमण को रोकने के लिए हुआ है।

प्रशासनिक तंत्र की कोशिशों, जनता की भागीदारी और कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर की वजह से कोरोना केसेज में दो दिनों से आ रहा स्लोडाउन

दुर्ग. कोरोना की दूसरी लहर पहली की तुलना में कई गुना तेज है और तेजी से लोगों को संक्रामित कर रही है। पिछली बार जहाँ पीक में कोरोना से अधिकतम 400 पाजिटिव मरीज आए थे, इस बार अधिकतम 2200 तक मरीज एक ही दिन में आए हैं। इस तरह से देखा जाए तो दुर्ग जिला अपने इतिहास की सबसे असाधारण आपदा का सामना कर रहा है। संकट के बीच उज्ज्वल पक्ष यह भी है कि प्रशासन ने अपने पूरे संसाधन और संकल्पशक्ति इस आपदा को रोकने में झोंक दी है। बीते दो दिनों में कोरोना वायरस के केसेज में कुछ स्लोडाउन हुआ है वो इसे इंगित करता है। इन बिन्दुओं में देखें तो हमें पता चलता है कि कितने बड़े स्तर पर कार्य दुर्ग में कोरोना वारियर्स कर रहे हैं।

टेस्टिंग और ट्रेसिंग- शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर डाॅ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने टेस्टिंग, ट्रेसिंग और ट्रीटमेंट पर फोकस करने के निर्देश अधिकारियों को दिये हैं। पिछली लहर में अधिकतम हजार टेस्ट हो रहे थे। इस बार चार हजार टेस्ट हर दिन हो रहे हैं। पीपीई किट के भीतर पसीना बहाते कोरोना वारियर्स जाने अपने सेंटर में कितने लोगों का टेस्ट कर रहे हैं। उनकी मेहनत को जज्बे को सलाम हैं। टेस्टिंग के बाद ट्रेसिंग भी अहम टास्क है। इसमें टाइम मैनेजमेंट काफी मजबूत हुआ है। ट्रेसिंग का डाटा अभी 90 प्रतिशत है। कभी-कभी मरीज गलत मोबाइल नंबर या एड्रेस दे देते हैं जिससे लोकेट करने में उन्हें तकलीफ होती है।

आक्सीजन बेड्स और हास्पिटल इंफ्रास्ट्रक्चर- कोविड में बड़ी दिक्कत आक्सीजन लेवल लो हो जाने की होती है। ऐसे में सभी हास्पिटल में हास्पिटल बेड्स और आक्सीजन बेड्स युद्धस्तर पर बढ़ाये जा रहे हैं। जिला चिकित्सालय में कोविड के 100 बेड और रेस्पिरेटरी के 60 बेड की सुविधा दी गई है। चंदूलाल चंद्राकर कोविड केयर हास्पिटल में 400 बेड हैं। सुपेला अस्पताल में 80 बेड तथा कुम्हारी में 20 बेड हैं। पाटन में 100 बेड, झीठ में 20 बेड तथा धमधा में 40 बेड का सेंटर खोला गया है। इसके अलावा सामाजिक संगठन भी काफी आगे आकर कोविड मरीजों को सामान्य बेड एवं आक्सीजन बेड उपलब्ध करा रही हैं। महावीर कोविड केयर सेंटर में 100 लोगों के इलाज की सुविधा है इसमें 15 आक्सीजन बेड उपलब्ध हैं। अग्रवाल समाज के भवन में 21 बेड हैं जिनमें 18 आक्सीजन बेड हैं। शासकीय अस्पतालों और कोविड सेंटर में इस तरह से छह सौ मरीजों के लिए आक्सीजन बेड की सुविधा है। इसमें लगातार इजाफा किया जा रहा है। सेक्टर-9 हास्पिटल में पहले 30 बेड थे अब 400 बेड में मरीजों को सुविधाएं दी जा रही हैं। हर दिन अतिरिक्त आक्सीजन बेड की उपलब्धता बढ़ाई जा रही है और इस पर युद्धस्तर पर कार्य हो रहा है।

होम आइसोलेशन कंट्रोल सेंटर- होम आइसोलेशन कंट्रोल सेंटर के माध्यम से लगभग तेरह हजार मरीजों की हर दिन स्वास्थ्य देखभाल की जा रही है। इन्हें मेडिकल किट उपलब्ध कराया जा रहा है। मरीज की स्थिति के अनुरूप जरूरत पड़ने पर हायर सेंटर रिफर करने का निर्णय लिया जाता है। इसके लिए विज्ञान विकास केंद्र में कंट्रोल रूम बनाया गया है।

काल सेंटर और एंबुलेंस के लिए हेल्पलाइन- काल सेंटर तथा हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से लोगों की हर संभव सहायता की जा रही है।

इसके साथ ही डेडिकेटेड कोविड सेंटर के लिए नियुक्त किये गए चिकित्सक, स्टाफ नर्स एवं वार्ड ब्वाय- कोविड हास्पिटल के लिए पांच डाक्टरों की नई नियुक्ति के साथ ही डीएमएफ और एनएचएम के माध्यम से 70 स्टाफ नर्स, डीएमएफ के माध्यम से 46 स्टाफ नर्स तथा डीएमएफ के माध्यम से 60 वार्ड ब्वाय नियुक्त किये गए हैं। अभी विशेषज्ञ चिकित्सकों सहित सात पदों के लिए साक्षात्कार भी लिये जा रहे हैं। साक्षात्कार में चयनित होते ही इन्हें डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर में नियुक्त कर दिया जाएगा।

कोविड एप्रोप्रिएट बिहैवियर के लिए किया जा रहा जागरूक- लोगों को मास्क पहनने एवं कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर करने जागरूक किया जा रहा है। इसके लिए सतत रूप से अभियान चलाया जा रहा है। जुर्माना वसूलने के साथ ही मास्क भी प्रदान किया जा रहा है।

पूरब टाइम्स, दुर्ग। स्वामी विवेकानंद भवन में प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन द्वारा कोरोना महामारी के दिशा निर्देश गाइडलाइन का पालन करते हुए विषम परिस्थितियों में भी सफलतापूर्वक आयोजित की गई. राष्ट्रीय प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ ,मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार जैसे राज्यों से लगभग 145 चयनित खिलाड़ियों ने भाग लिया.


छत्तीसगढ़ पावर लिफ्टिंग एसोसिएशन के महासचिव उदल वाल्मीकि ने बताया कि इस प्रतियोगिता में चैंपियन ऑफ चैंपियन का खिताब छत्तीसगढ़ को घोषित किया गया. इस खिताब को पाने के लिए छत्तीसगढ टीम के कोच एवं अंतरराष्ट्रीय खिलाडी उत्तम कुमार साहू, मैनेजर प्रदीप छत्रिय एवं टेक्निकल एडवाइजर अंतरराष्ट्रीय खिलाडी धर्मवीर सिंह की भूमिका महत्वपूर्ण रही. 


बिलासपुर से उत्तम कुमार साहू मास्टर 1 केटेगरी डैड लिफ्ट में रजत पदक, रोहन शाह सीनियर केटेगरी बेंच प्रेस में कांस्य पदक, राकेश बेहरा मास्टर 2 डैड लिफ्ट में रजत पदक एवं बेंच प्रेस में स्वर्ण पदक, योगेश कुमार जूनियर कैटेगरी डैड लिफ्ट में कांस्य पदक बेंच प्रेस में रजत पदक, गौरव स्वर्णकार जूनियर केटेगरी बेंच प्रेस में रजत पदक, आर्यन साहू जूनियर केटेगरी डेड लिफ्ट में रजत पदक, अक्षय साहू मास्टर 1 कैटेगरी डेड लिफ्ट में रजत पदक एवं बेंच प्रेस में रजत पदक, अरविंद यादव मास्टर 1 केटेगरी स्वर्ण पदक, राज सोनी जूनियर कैटेगरी डेड लिफ्ट में रजत पदक,


रायपुर से मोहनी कौर सीनियर कैटेगरी बेंच प्रेस एवं डेड लिफ्ट में स्वर्ण पदक, संकल्प राजकमल जूनियर केटेगरी बेंच प्रेस में स्वर्ण पदक, दिशा बेहरा जूनियर कैटेगरी बेंच प्रेस में रजत पदक, रवि प्रकाश यादव जूनियर केटेगरी डेड लिफ्ट में स्वर्ण पदक,भिलाई से धर्मवीर सिंह सीनियर केटेगरी में बेंच प्रेस में स्वर्ण पदक के अलावा स्ट्रांग मैन का किताब दिया गया. प्रसन्न दत्त सीनियर कैटेगरी बेंच प्रेस में स्वर्ण पदक, रायगढ़ से नविंदर पाल सिंह जूनियर केटेगरी बेंच प्रेस में स्वर्ण पदक इस प्रकार से 35  पदक छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों को प्राप्त हुए. 


कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यक्रम के महासचिव उदल वाल्मीकि,मोहित वालदे,लखपति सिंदूरी, रंजीत रावत, रायपुर बॉडी बिल्डिंग एसोसिएशन सचिव मानिक ताम्रकार, कोरबा जिम एसोसिएशन सचिव मधुर कुमार साहू, अर्जुन सिंह सागरवंशी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी धरमवीर सिंह,पिंटू वर्मा आदि उपस्थित थे।

पूरब टाइम्स, भिलाई। भिलाई क्षेत्र में शहर के पॉश कॉलोनी नेहरू नगर क्षेत्र में रेस्टोरेंट की आड़ में हुक्का बार संचालित किया जा रहा था. जिसे देर रात निगम ने सील करने की कार्रवाई की. निगम में तीन हुक्का बार पर कार्रवाई करते हुए तीनों को सील कर दिया। नागरिकों एवं आसपास क्षेत्र के रहवासियों ने शिकायत की थी कि नेहरू नगर के कुछ क्षेत्रों में रेस्टोरेंट की आड़ में हुक्का बार चलाया जा रहा है. जिसमें कम उम्र के नाबालिग को भी प्रवेश दिए जाने की बात सामने आई थी, साथ ही रेस्टोरेंट व्यवसाय के माध्यम से संचालित हुक्का बार में नशीले पदार्थ के विक्रय की भी शिकायतें प्राप्त हुई थी.


इन सब गतिविधियों को लेकर क्षेत्रवासी भी परेशान थे, इन्हीं सब कारणों को गंभीरता से लेते हुए हुक्का बार संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी ने अधिकारियों को दिए थे. जिस पर गुरुवार की रात तकरीबन 8:30 बजे निगम के जोन क्रमांक 1 की टीम ने जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि, स्वास्थ्य अधिकारी धर्मेंद्र मिश्रा एवं सहायक स्वास्थ्य अधिकारी जावेद अली के नेतृत्व में हुक्का बार में छापामार कार्रवाई की. निगम की टीम सर्वप्रथम केपीएस चौक के पास द हवेली पहुंची, यहां पर निरीक्षण किया गया.@GI@


बड़ी मात्रा में हुक्का से संबंधित सामग्री प्राप्त हुई, 12 नग लैंप, 13 तंबाकू युक्त फ्लेवर, 5 नग हुक्का पाइप, एक जली हुई सिगड़ी का पंचनामा तैयार किया गया. वही यहां पर बिना मास्क लगाए कर्मचारी कार्य कर रहे थे  साथ ही कुछ ग्रुप में बर्थडे पार्टी कर रहे थे सभी बिना मास्क के मिले 18 लोगों से 3600 रुपये जुर्माना वसूल किया गया. नेहरू नगर पूर्व 74/9 का यह भवन संजय अग्रवाल के नाम से संचालित है.दुकान को सील कर दिया गया. इसी तरह टीम सूर्या मॉल पहुंची मास्क नहीं लगाने वालों का निरीक्षण किया गया. मॉल के द्वितीय तल पर ब्लैक्जैक एवं मोक्ष के नाम से संचालित हुक्का बार में हुक्का से संबंधित सामग्रीया प्राप्त हुई. 


तीन नाबालिक लड़कियां और दो नाबालिग लड़के हुक्का का कश लगा रहे थे. मौके से 11 हुक्का पाइप, 11 तंबाकू युक्त फ्लेवर, 5 हुक्का लैंप, जलती हुई सिगड़ी एक नग, दो नग हीटर का पंचनामा तैयार किया गया! इससे 20 मीटर की दूरी में लगे हुए ब्लैक्जैक पर भी टीम पहुंची! यहां से दो पाइप, दो जलते हुए लैंप, सिगड़ी का पंचनामा बनाया गया. सूर्या मॉल में संचालित ब्लैक्जैक एवं मोक्ष हुक्का बार को सील कर दिया गया.यहां पर कुछ महीने पूर्व कार्यवाही करने टीम गई थी, परंतु कुछ भी बरामद नहीं हुआ था, हुक्का बार बंद मिला था. निगम की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्य करते हुए हुक्का बार में छापामार कार्रवाई की.@GI@

पूरब टाइम्स, दुर्ग। जिला अधिवक्ता संघ दुर्ग के यह तथ्य से अवगत कराया है कि वर्तमान में कोट परिसर में अपार भीड बनी रहती है। दो गज की दूरी का पालन भी नहीं हो पा रहा है पक्षकार कंधा से कंधा मिलाकर चलते हैं। कितने ही पक्षकार मास्क नहीं लगाते हैं न ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन होता है। जिससे संघ अपने सदस्यों के स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। जिला अधिवक्ता संघ के द्वारा उपलब्ध कराये गये तथ्यों एवं 16 मार्च को दुर्ग जिले में 233 मरीज कोरोना वायरस से संक्रमित पाये जाने पर न्यायालय में उपस्थित होने वाले पक्षकारों एवं अधिवक्ताओं की सुरक्षा के संबंध में विचार किया गया। 


अधिवक्ता संघ दुर्ग के सदस्यों के साथ हुई चर्चा, सहमति तथा कोरोना वायरस के संक्रमण का खतरा प्रतिदिन बढ़ने की स्थिति कों ध्यान में रखते हुए न्यायालय में उपस्थित होने वाले पक्षकारों के लिए एवं अन्य उपस्थित होने वाले लोगों के लिए दिशानिर्देश दिये गये हैं जो इस प्रकार है। उन्हीं प्रकरणों में पक्षकारों की उपस्थिति आवश्यक होगी जिसमें विधि अनुसार पक्षकारों की उपस्थिति आवश्यक है। किसी भी पक्षकार या अधिवक्ता को मास्क के बगैर न्यायालय परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। 


न्यायालय परिसर में मास्क के बिना दिखे तो तत्काल दण्डित किया जाएगा
कोई भी पक्षकार जिनका प्रकरण न्यायालय में है, वे अपने रिश्तेदारों सहित न्यायालय परिसर में नहीं आयेंगें। न्यायालय परिसर में बिना किसी कार्य के भ्रमण करने वाले व्यक्तियों का प्रवेश वर्जित रहेगा।कोरोना संक्रमण के प्रभाव को देखते हुए न्यायालय परिसर में उपस्थित होने वाले लोगों को सुरक्षा एवं बचाव को देखते हुए आदेश प्रसारित किये गये हैं। जनमानस न्यायालय परिसर में प्रवेश किये जाने के पूर्व यह सुनिश्चित कर लेवें कि उनकी उपस्थिति न्यायालय परिसर में आवश्यक है तथा परिसर में प्रवेश करने से पूर्व यह बात ध्यान में रखें कि माॅस्क आवश्यक रूप से लगाये तथा सेनेटाईजर का उपयोग करें।@GI@

पूरब टाइम्स,भिलाई। भिलाई निगम ने कोरोना को जड़ से समाप्त करने के लिए मुहिम छेड़ दी है.कलेक्टर डॉ. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे एवं निगम आयुक्त ऋतुराज रघुवंशी के निर्देश पर आज सैनिटाइजेशन को लेकर भिलाई निगम ने कुबेर अपार्टमेंट, सूर्या रेसीडेंसी, सूर्या विहार, चौहान टाउन, रॉयल ग्रीन एवं ग्रीन वैली में व्यापक अभियान चलाया। सोडियम हाइपोक्लोराइड के घोल से पूरे क्षेत्र को सैनिटाइज किया गया.जोन आयुक्त सुनील अग्रहरि ने स्वयं खड़े होकर सभी क्षेत्रों को संक्रमण मुक्त करने टीम को निर्देश देते रहे.इस दौरान जोन आयुक्त पूजा पिल्ले उपस्थित रही.@GI@


कुबेर अपार्टमेंट से कुछ दिन पहले कोरोना के मरीज मिले थे उसी दिन से सैनिटाइज करना अपार्टमेंट में निगम ने प्रारंभ कर दिया था! नेहरू नगर क्षेत्र में कोरोना के बढ़ते संक्रमण की रोकथाम के लिए कुबेर अपार्टमेंट सहित आसपास के रहवासी इलाकों में घरों के भीतर तक जाकर निगम कर्मचारियों ने सेनीटाइज किया! प्रातः से टैंकरों के माध्यम से घरों के बाहरी एरिया को सैनिटाइज किया गया. लोगों को कोरोना से बचाव के लिए मुनादी के माध्यम से जागरूक करने प्रचार-प्रसार किया गया.@GI@


बार-बार उपयोग किए जाने वाले खिड़की, दरवाजे, हैंडल इत्यादि को सैनिटाइज किया गया. निगम भिलाई क्षेत्र में कोरोना को पूर्ण रूप से समाप्त करने लगातार सैनिटाइजेशन अभियान जारी रहेगा। निगमायुक्त रघुवंशी ने बताया कि कोरोना के संक्रमण में बढ़ोतरी हुई है. जिसको देखते हुए लोगों को और अधिक सावधानी और जागरूक होने की आवश्यकता है. कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए छोटे-छोटे सामूहिक प्रयासों से कोरोना को हराने में बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है. सभी के प्रयास से ही भिलाई निगम से कोरोना संक्रमण को पूर्ण रूप से मुक्त किया जा सकता है.@GI@



इसके साथ ही पार्क आदि में लोगों के जाने पर रोक जैसे कदम उठाये गए हैं। समारोहों में पचास से अधिक लोगों के आने पर प्रशासनिक अनुमति अनिवार्य है। 200 से अधिक लोगों को अनुमति नहीं दी जाएगी। मास्क नहीं पहनने पर दो सौ रुपए का जुर्माना है और इसके लिए चौक-चौराहों पर सघन अभियान चलाये जा रहे हैं।


नियमों की अनदेखी करने वाले 33 लोगों से 5100 जुर्माना वसूल किया गया। आयुक्त ने पेट्रोल पंप में स्टाॅक डिस्प्ले नहीं होने और बिना मास्क वाले बाइक सवार को पेट्रोल देने पर फटकार भी लगाया। मंगलवार रात नगर पालिक निगम के अधिकारी व नेवई पुलिस ने आजाद मार्केट, कृष्णा टाकिज रोड, बीएसपी मार्केट और दशहरा मैदान रिसाली में मार्च पास्ट की। इस दौरान समूह बनाकर खड़े लोगों को खदेड़ा गया।


वही पढ़ाई करने वालें बच्चों को मास्क लगाकर घर से बाहर निकलने की सख्त चेतावनी दी गई। इस दौरान कुछ शरारती बच्चों को उठक-बैठक कराया गया। कई लोग ऐसे थे जिन पर चेतावनी का असर नही हुआ उनसे नेवई पुलिस 900 और निगम के अधिकारी 4200 रूपए अर्थदण्ड वसूला। कार्रवाई में नेवई टीआई भावेश साव, राजस्व निरीक्षक अनिल मेश्राम व स्वास्थ्य विभाग के जोनल सतीश देवांगन समेत अन्य कर्मचारी मौजूद थे।@GI@



वही सबसे ज्यादा संक्रमित मरीज शहरी क्षेत्र में मिल रहे है. दुर्ग कलेक्टर ने होली त्यौहार के दौरान संक्रमण बढ़ने की आशंका के तहत दुर्ग जिले के लिए 14 बिन्दुओ में दिशा निर्देश जारी किये है आदेशानुसार अब सार्वजनिक कार्यक्रम प्रतिबंधित रहेंगे। देखें आदेश की सूची...@GI@@GI@



उनके लिए पानी एवं अल्पाहार की व्यवस्था कार्यकर्ताओं ने की एवं हेल्पडेस्क लगाकर वरिष्ठ नागरिकों की मदद की, इस कार्यक्रम में प्रमुख रूप से जिला युवा मोर्चा के नितेश साहू, प्रभारी गौरव शर्मा,पीयूष मालवीय,राहुल पाटिल,वीरेंद्र ठाकुर,मोहित ताम्रकार,आदि उपस्थित थे।