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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



पूरब टाइम्स दुर्ग। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुश्री सरोज पांडेय  ने अपने उद्बोधन में कहा कि दुर्ग ने मुझे बहुत प्यार दिया आशीर्वाद दिया लेकिन अब यहाँ की जर्जर हालत देख के आत्मा दुखी होती है , उन्होंने वृक्षारोपण के महत्व बताते हुए मोदी जी के जन्मदिवस की शुभकामनाएँ दीं व वृद्ध ग्रामीण से केक कटवाया । इस उपलक्ष में प्रदेश मंत्रीप्रदेश मंत्री श्रीमती उषा टावरी, श्रीमती चंद्रिका चंद्राकर, माया बेलचंदन , कांतिलाल जैन , जिला मंत्री दिनेश देवांगन, मनोज मिश्रा, नेता प्रतिपक्ष अजय वर्मा, चैनसुख भतड , भज्यूमो अध्यक्ष नितेश साहू , मंडल अध्यक्ष सतीश समर्थ , दीपक चोपड़ा ,पोषण साहू ,  राकेश यादव , संदीप जैन , राकेश सेन , टेखन सिन्हा, गौरव शर्मा , संदीप भाटिया, और भारी संख्या में कार्यकर्ता व जनसमूह उपस्थित थे। यह जानकारी जि़ला मीडिया प्रभारी के एस चौहान ने दी ।

पूरब टाइम्स दुर्ग । श्रुति फाउंडेशन छत्तीसगढ़ नामक संस्था ने  भिलाई के इस्लाम नगर में एक जरूरतमंद परिवार की शबनम को सिलाई मशीन प्रदान किया ।श्रुति फाउंडेशन की फाउंडर/अध्यक्ष नीतू श्रीवास्तव ने बताया कि खुशी और सबा दोनो बहने सिलाई तो सीख ली पर आर्थिक हालात ठीक न होने के कारण वो परिवार सिलाई मशीन लेने में सक्षम नही था।इस परिवार ने जब मुझसे संपर्क किये और जब मशीन की बात मुझसे की तो मैंने इस परिवार को आश्वासन दी कि मैं बच्चियों के लिए मशीन जरूर दूँगी ताकि ये बच्चियां अपने बल बूते पर कुछ अच्छा कर सके। आज सबा और  खुशी के चेहरे की खुशी देख कर मुझे बहुत सुकून मिला। संस्था की सदस्य नीलू श्रीवास्तव भी साथ थी इस दौरान उन्होंने कहा कि, यकीनन हम सब के लिए सब कुछ तो नही कर सकते।पर कुछ के लिए कुछ तो कर ही सकते है और ये छोटा सा साथ छोटा सा सहयोग जब किसी की खुशी बनता है तब उस सुकून को बयां नही किया जा सकता।

पूरब टाइम्स। कुछ महीनों पहले मुंबई में एक भिखारी की रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी. इसके बाद पुलिस उसके घर पहुंची थी तो भिखारी के घर में इतने पैसे थे, जिसे देखकर पुलिस के होश ही उड़ गए थे. भिखारी के घर में इतने पैसे थे कि दो दिन तक पुलिस उन पैसे का हिसाब-किताब लगाती रही थी.मुंबई के वासी राजकीय रेलवे पुलिस को कुछ महीनों पहले एक भिखारी का शव मिला था. इस भिखारी की एक रोड एक्सीडेंट में मौत हो गई थी. भिखारी बिरादीचंद पन्नारामजी आजाद का शव मानखुर्द और गोवंडी स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक के पास मिला था.

इसके बाद जीआरपी ने उसका शव बरामद कर उसके बेटे से संपर्क करने की कोशिश की थी.पुलिस को जब उनके बेटे से संपर्क नहीं हुआ तो खुद भिखारी के झोपड़ी पहुंच गई थी. वह एक झोपड़ी में रहते थे. जीआरपी की पुलिस के सिपाही जब भिखारी के झोपड़ी में पहुंचे तो उनके होश ही उड़ गए थे. भिखारी के घर से बहुत सारे पैसे मिले थे. भिखारी के पास 8.77 लाख रुपये का फिक्स डिपॉजिट था और उसके बैंक में 96,000 रुपये जमा थे.

सबसे आश्चर्य की बात थी कि उसके घर पर 1.75 लाख रुपये के सिक्के मिले थे. 82 साल के इस भिखारी का परिवार राजस्थान में रहता है. जीआरपी ने भिखारी का शव मिलने के बाद आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया था. वहां के स्थानीय लोगों ने उस भिखारी की पहचान की था. लोगों ने बताया था कि वह हार्बर लाइन पर भीख मांगा करता था. भिखारी की झोपड़ी में छानबीन करने वाले जीआरपी के एक सब इंस्पेक्टर ने बताया था कि उसकी झोपड़ी से उन्हें चार बड़े डिब्बे और एक गैलन मिला था. इन सबके अंदर एक, दो, पांच और 10 रुपये के सिक्कों को प्लास्टिक की थैलियों के भीतर रखा गया था. सब इंस्पेक्टर ने बताया था कि दो दिनों तक इन सिक्कों को गिनने के बाद हिसाब लग पाया था और भिखारी की झोपड़ी से कुल 1.75 लाख रुपये निकले थे.

पूरब टाइम्स भिलाई। भिलाई नगर विधायक देेवेंद्र यादव की पहल से खुर्सीपार क्षेत्र का पहला ऑडिटोरियम का संधारण किया जा रहा है। करीब 35 लाख की लागत से संधारण कर नए तरीके से ऑडिटोरियम को एक नया मूर्त रूप दिया जा रहा है। इस ऑडिटोरियम का संधारण कार्य पूरा होने से क्षेत्र वासियों को काफी लाभ मिलेगा। यहां 500 लोगों के बैठने की सुविधा होगी।

गौरतलब है कि खुर्सीपार क्षेत्र की जनता की मांग थी कि क्षेत्र में एक सर्व सुविधा युक्त ऑडिटोरियम बनाया जाए। क्षेत्र में एक भी ऑडिटोरियम नहीं है। इस वजह से यहां कार्यक्रम आदि आयोजित करने के लिए जगह नहीं होती। जनता की मांग को देखते हुए विधायक देवेंद्र यादव ने पहल की और लंबे समय से खाली जर्जर पड़े भवन को रिनोवेट कर पूरी तरह से नया ऑडिटोरियम भवन का निर्माण कराया जा रहा है। जिसका काम भी तेजी से चल रहा है। खुर्सीपार जोन 4 के निगम आयुक्त अमिताभ शर्मा ने बताया कि पुराना भवन जर्जर हो गया था। लंबे समय से खाली पड़ा था। जहां असामाजिक तत्वों का डेरा था। नशिड़ियों का कब्जा रहता था। इससे भी क्षेत्र की जनता परेशान थी। ऐसे में भवन का संधारण कर नए सिरे से एक बेहतर सर्व सुविधा युक्त आडिटोरियम बनाने का फैसला लिया गया और विधायक की पहल और उनके मार्गदर्शन में भवन को बेहतर तरीके से एक नया ऑडिटोरियम बनाने निर्माण कार्य शुरू किया गया है। काम तेजी से चल रहा है। इस ऑडिटोरियम के निर्माण से क्षेत्र की जनता का काफी लाभ होगा।  यहां बड़े सांस्कृति कार्यक्रम आदि आयोजित किए जा सकेंगे। कॉलेज के छात्र-छात्राओं के लिए बड़ा सेमीनार भी आयोजित करने में सुविधा मिलेगी। ऑडिटोरियम में सभी प्रकार की जरूरी सुविधाएं होगी। सबसे खास बात यह है कि यहां कम से कम500 लोगों के बैठने की सुवीधा होगी।

क्षेत्र वासियों के मांग को देखते हुए नई पहल की जा रही है। खुर्सीपार क्षेत्र में एक भी आडिटोरियम नहीं है। जनता की मांग थी। जिसे पूरा करने हमने पहल की और पुराने भवन का नए सिरे से रेनोवेट करा कर नया आडिटोरियम बनाया जा रहा है। जो जल्द ही तैयार हो जाएगा। इससे क्षेत्र की जनता को काफी लाभ होगा। हम लगातार जनहित के लिए काम कर रहे है।

पूरब टाइम्स दुर्ग।  राजेश श्रीवास्तव जिला व सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन, व निर्देशन में कोविड-19 के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए,  प्रज्ञा पचैरी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं  आनंद वारियल अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा ऑनलाइन वीसी के माध्यम से बताया की जब भी कोई अपराध होता है या किसी तरह की कोई दुर्घटना होती है, तो सबसे पहले उस घटना की जानकारी को पास के पुलिस स्टेशन में देनी होती है। इसे हम एफआईआर कहते हैं । एफआईआर यानी वो लिखित दस्तावेज जिसे पुलिस जानकारी मिलने पर दर्ज करती है और फिर कार्यावाही  करती है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस रिपोर्ट को तैयार करती है। जब तक घटना या किसी अपराध की एफआईआर नहीं दर्ज होगी पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकती है ।

आम आदमी पुलिस थाने जाने में संकोच करता है। बात अगर किसी अपराध की रिपोर्ट लिखाने की हो तो आम आदमी के जहन में कई सवाल आते हैं और वह सोचता है कि अगर पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी तो । अगर पुलिस किसी अपराध की रिपोर्ट लिखने से मना करे तो आपके पास इसका भी कानूनी उपचार है। जब भी कोई संज्ञेय अपराध होता है यानी गंभीर प्रवृत्ति का अपराध हो तो इसकी प्रथम सूचना रिपोर्ट पुलिस को तुरंत दी जानी चाहिए और पुलिस का काम है कि वह इस तरह के अपराध की रिपोर्ट अपने प्रथम सूचना रिपोर्ट रजिस्टर में दर्ज  करें । इसका प्रावधान दंड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 154 में दिया गया है। इस सूचना को प्रथम सूचना प्रतिवेदन कहते हैं।

सामान्यतः समझा जाता है कि किसी मामले की रिपोर्ट उस थाने में की जाए जिस थानाक्षेत्र में अपराध या घटना घटित हुई है, लेकिन आप अपने नजदीकी थाने में भी रिपोर्ट दर्ज करवा सकते हैं, जिसे बाद में संबंधित थाने में भिजवा दिया जाएगा। पीड़ित पक्ष या ऐसा पक्ष जिसे घटना या अपराध के बारे में जानकारी है उसे वह किसी नजदीकी थाने में जाकर पूरी जानकारी के साथ पुलिस को बता सकता है। पुलिस का काम है कि संज्ञेय अपराध की एफआईआर लिखे।

अगर अपराध उस थानाक्षेत्र में नहीं घटित हुआ है तो भी पुलिस उसकी रिपोर्ट अपने एफआईआर रजिस्टर में नोट करेगी। ऐसी एफआईआर को जीरो एफआईआर कहा जाता है। इस रिपोर्ट को दर्ज करने के बाद पुलिस उसे आगे की कार्रवाई के लिए संबंधित थाने में भेज देगी। अगर अपराध असंज्ञेय है तो पुलिस उसे अपने एफआईआर रजिस्टर के बजाए अपने एनसीआर) रजिस्टर में दर्ज करेगी। इस एनसीआर रजिस्टर में असंज्ञेय अपराधों को नोट किया जाता है।
कोई भी व्यक्ति पुलिस के पास अपनी शिकायत लिखित या मौखिक तौर पर दर्ज करवा सकता है । हर व्यक्ति को इस बात का अधिकार है लेकिन अक्सर पुलिस ऐसा करने से इनकार कर देती है । अगर पुलिस आपकी शिकायत को दर्ज करने से इनकार कर देती है तो आपके पास अधिकार है कि आप किसी सीनियर ऑफिसर के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अगर इसके बाद भी एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो आप सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत मजिस्ट्रेट के पास इसकी शिकायत करने के अधिकारी हैं। आपकी शिकायत पर मजिस्ट्रेट पुलिस को एफआईआर करने के निर्देश देने का अधिकार रखते हैं।