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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



पूरब टाइम्स  रायपुर। छत्तीसगढ़ के सीनियर आईपीएस  अफसर जीपी सिंह के रायपुर स्थित सरकारी बंगले में 54 घंटे से  एसीबी की छापेमार कार्रवाई जारी है। गुरुवार सुबह 6 बजे जांच टीम जीपी सिंह के सरकारी बंगले में दाखिल हुई थी। शनिवार की दोपहर तक टीम वहीं जमी हुई है। सूत्रों के मुताबिक विदेशों में खाते और निवेश संबंधी कई ऐसे अहम दस्तावेज मिले हैं जिनकी पड़ताल जीपी सिंह के घर पर ही की जा रही है। पिछले 54 घंटों से ADG जीपी सिंह अपने घर में बंद हैं। उनके साथ उनका बेटा और परिवार के अन्य सदस्य भी हैं। सिंह ने फोन पर कुछ लोगों से बात भी की है, मगर  एसीबी की नजर उन पर बनी हुई है। कुछ कागजों में अफसर और नेताओं के नाम भी मिले हैं। जानकारी के मुताबिक सिंह की फिलहाल गिरफ्तारी नहीं होगी। आज छापे की कार्रवाई पूरी हो सकती है और एसीबी टीम बंगले से निकल सकती है।

जांच टीम के अफसरों को यहां से कुछ डायरियां और डायरियों के फटे पन्ने मिले हैं। इस डायरी में जादू-टोने से जुड़ी बातें लिखी हुई हैं। कुछ ऐसा अजीबो-गरीब सामान भी सिंह के यहां से मिला है जो अमूमन तंत्र-मंत्र के काम आता है। एक डायरी में कोड वर्ड में कुछ अफसरों के बारे में अजीब बातें लिखी हैं। जादू-टोने की बातें ये पुलिस महकमे के ही बड़े अधिकारियों के बारे में हैं। डायरी में लिखा है- वह थाईलैंड से 20 पैर वाला कछुआ मंगवा चुका है। उसकी बलि देने के बाद कुछ भी कर सकेगा। इनमें से एक अफसर का नाम "छोटा टकला" लिखा गया है। लिखा है कि छोटा टकला ने एक अफसर का बाल काट लिया है, इसलिए सब कुछ बिगाड़ सकता है। ऐसा अनुमान है कि छोटा टकला प्रदेश के ही एक सीनियर अफसर का कोड वर्ड है। ये फिलहाल कई मामलों में फंसे हुए हैं और इनके खिलाफ जांच जारी है। दो और अफसरों के लिए अनोपचंद- तिलोकचंद लिखा हुआ है। कुछ आईएएस अधिकारियों, सचिव स्तर के अफसरों, कांग्रेस-भाजपा के नेताओं का नाम भी कोड वर्ड में लिखा है। इन सभी दस्तावेज को बारीकी से देखा जा रहा है।

 एसीबी की जांच टीम को जीपी सिंह के विदेशी बैंकों में कई खातों की जानकारी मिली है। उन खातों की लिस्टिंग, पैसा कहां से आया किसने दिया, इन पहलुओं की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम कर रही है। कनाडा, ब्रिटेन और कुछ देशों में बसे रिश्तेदारों के जरिेए निवेश की जानकारी की भी जांच हो रही है। शुक्रवार शाम तक की स्थिति में ओडिशा में संपत्ति, कंस्ट्रक्शन के काम में इस्तेमाल होने वाले आधा दर्जन वाहन, कई बैंक अकाउंट्स, 75 से अधिक बीमा पॉलिसी के सबूत मिले थे। ये सब जीपी सिंह उनकी धर्म पत्नी और उनके पुत्र के नाम पर हैं।

पूरब टाइम्स  रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को प्रदेश में 403 नए लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। इससे एक दिन पहले मंगलवार को प्रदेश भर में 383 मरीज ही मिले थे। सोमवार को नए मरीजों की संख्या 405 थी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से देर रात जारी आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को प्रदेश भर में 36 हजार 776 नमूनों की जांच की गई। इसमें 403 लोग पॉजिटिव मिले। प्रदेश में संक्रमण दर 1.1 प्रतिशत रही। मंगलवार को भी संक्रमण दर 1.1 प्रतिशत ही थी। लेकिन उस दिन 33 हजार 547 नमूनों की जांच के बाद 383 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि की गई थी।

 जून महीने में सबसे कम मरीज 27 जून को मिले थे। उस दिन नए मरीजों की संख्या केवल 244 थी। हालांकि उस दिन होने वाले टेस्ट की संख्या भी सामान्य दिनों में हो रहे टेस्ट से कम थी। जून में एक दिन में सबसे अधिक 1 हजार 886 मरीज एक जून को सामने आए थे। उसके बाद से इनकी संख्या में लगातार गिरावट देखी गई है। महीने के आखिरी सप्ताह में यह संख्या लगभग स्थिर हो गई है।


छत्तीसगढ़ में बुधवार को केवल एक मरीज की कोरोना के इलाज के दौरान मौत हुई। उसे भी कोमार्बिडिटी यानी स्वास्थ्य संबंधी दूसरी जटिलताओं की वजह से हुई मौत बताया जा रहा है। यह मौत राजनांदगांव जिले में दर्ज हुई है। गंभीर बात यह है कि राजनांदगांव इस समय सबसे कम कोरोना मरीजों वाला जिला है। वहां बुधवार को एक दो लोग संक्रमित मिले थे। कुल 60 लोग ही संक्रमित हैं। प्रदेश के लिए संतोष की बात यह है कि यह कोरोना की दूसरी लहर में दूसरी सबसे कम मौत का आंकड़ा है।

मार्च 2020 से अब तक प्रदेश के 9 लाख 94 हजार 480 लोग संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 9 लाख 75 हजार से अधिक लोग ठीक हो चुके हैं। लेकिन 13 हजार 439 मरीजों को इस महामारी की वजह से अपनी जान गंवानी पड़ी है। प्रदेश में अब भी 5 हजार 964 लोगों को विभिन्न अस्पतालों और होम आइसोलेशन में इलाज जारी है। कोरोना की दूसरी लहर मार्च के दूसरे सप्ताह से शुरू हुई थी। उससे पहले प्रदेश में सक्रिय मरीजों की संख्या 100 से भी कम हो गई थी।

छत्तीसगढ़ में कोरोना की संक्रमण दर एक प्रतिशत तक पहुंच जाने के बीच प्रशासन तीसरी लहर की तैयारियों में जुटा हुआ है। रायपुर के आयुर्वेदिक कॉलेज अस्पताल में बच्चों के लिए 40 बिस्तर का विशेष केंद्र बना दिया है। आशंका जताई जा रही है कि तीसरी लहर में बच्चे अधिक प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि उनके पास वैक्सीन की सुरक्षा भी नहीं है। क्षेत्रीय विधायक और संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने इस केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान कलेक्टर सौरभ कुमार और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल ने उन्हें तैयारियों और सुविधाओं की जानकारी दी। विकास उपाध्याय ने बताया, पीएम केयर फंड से बच्चों के लिए अभी तक मात्र 30 वेन्टिलेटर प्राप्त हुए हैं, जो पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने केन्द्र सरकार से ऐसे कम से 150 वेंटिलेटर की मांग की।

पूरब टाइम्स रायपुर। डीडीनगर इलाके के सरस विहार में रहने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेता और सिविल कांट्रेक्टर दिव्येंद्र सिंह ठाकुर के घर के बाहर रविवार की रात विस्फोट करने का मामला सामने आया है। यह विस्फोट किन लोगों ने किया है, फिलहाल पता नहीं चल पाया है। विस्फोट के बाद भाजपा नेता के घर के प्रांगण में पौन फीट का गड्ढा हो गया है। कल रात इस घटना की सूचना मिलने पर डीडीनगर थाना पुलिस अपराध दर्जकर जांच कर रही है। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह विस्फोट सुतली बम से किया गया है।

सरस विहार कालोनी जगन्नाथ हास्पिटल के पीछे रहने वाले भाजपा नेता व सिविल कांट्रेक्टर दिव्येंद्र सिंह ठाकुर (30) ने पुलिस को बताया कि 27 जून की रात पौने बारह बजे घर के बाहर से पटाखा फूटने जैसी आवाज सुनकर वे अपने छोटे भाई, पत्नी के साथ मकान के छत के ऊपर जाकर देखा तो कोई नहीं दिखा। दूसरे दिन सोमवार सुबह उठकर देखे तो बाउंड्रीवाल के अंदर दाहिनी तरफ एक गढ्ढा जैसा बना था।

गड्ढे के पास रखा गमला और प्लास्टिक का कूड़ादान टूटा हुआ था। गढ्ढे में जलने जैसा काला निशान,आस पास छोटी छोटी सूतली बिखरा हुआ पड़ा देखा। दिव्येंद्र ने अज्ञात शख्स द्वारा नुकसान पहुंचाने की नीयत से विस्फोटक करने की आशंका जाहिर की है। डीडीनगर पुलिस थाना प्रभारी योगिता खापर्डे ने बताया कि किसी ने सामान्य बम फोड़ा है। कोई जनहानि नहीं हुई है। घटना की जांच की जा रही है। यह हरकत किसी शरारती तत्व का लग रहा है।

पूरब टाइम्स रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के ढाई साल का कार्यकाल पूरा होते ही विधानसभा चुनाव में किए गए वादों की फेहरिस्त फिर बाहर आ गई है। इसमें प्रदेश में पूर्ण शराबबंदी का मुद्दा महत्वपूर्ण है। विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरे हुए है। मंत्री इन सवालों पर जवाब देने से बच रहे हैं। इस बीच कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम ने आज ने साफ कर दिया वे राज्य में पूर्ण शराबबंदी के पक्ष में नहीं हैं।

रायपुर प्रेस से बात करते हुए मरकाम ने कहा, ‘प्रदेश का 60 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी बहुल है। वे खुद इसी समाज से आते हैं। आदिवासियों के रीति-रिवाज और नेम में शराब महत्वपूर्ण है। पिछले कुछ वर्षों से तर्पण में शराब की जगह महुआ के फूलों का उपयोग होने लगा है, लेकिन अन्य रीति-नेम में शराब का महत्व बना हुआ है। ऐसे में उनकी निजी राय है कि अधिसूचित क्षेत्रों में पूर्ण शराबबंदी संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो सामान्य क्षेत्रों में शराबबंदी लागू कर सकती है।’


मोहन मरकाम ने कहा कि शराबबंदी कांग्रेस के मेनिफेस्टो का हिस्सा है। इसे जरूर लागू किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए समिति बनाई है। वह शराबबंदी के प्रयोग वाले प्रदेशों का अध्ययन कर जल्द ही रिपोर्ट देगी। उसके बाद सरकार इस पर फैसला लेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव के समय 36 वादे किए थे। उनमें से 24 को पूरा किया जा चुका है। शेष को भी अगले दो वर्षों में पूरा कर लिया जाएगा।


बघेल ने कहा है कि ईश्वर की कृपा से इस बार हमारे राज्य में मानसून सही समय पर आ गया हैं। राज्य में अब तक पर्याप्त बारिश हो चुकी है। किसान भाई अपने खेतों में फसल की तैयारी में लग गए हैं। राज्य के जलाशयों एवं तालाबों में भी भरपूर पानी उपलब्ध है। किसान भाईयों को खाद-बीज उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहकारी समितियों से मिल सके इस पर हम विशेष ध्यान दे रहे हैं। सभी सोसायटियों में रासायनिक उर्वरकों एवं प्रमाणित बीजों का भण्डारण लगातार किया जा रहा है।

हम राज्य में इस बार दलहनी और तिलहनी फसलों पर अधिक जोर दे रहे हैं। इन फसलों का उत्पादन बढ़ने से किसान भाईयों को ज्यादा लाभ मिलेगा। हमने दलहन-तिलहन, अरहर, सोयाबीन, मक्का, गन्ना, कोदा-कुटकी, सुगंधित धान की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए इसे राजीव गांधी किसान न्याय योजना में शामिल कर लिया है। धान के साथ-साथ अन्य प्रमुख खरीफ फसलों की खेती करने वाले किसान भाईयों को भी प्रति एकड़ के मान से 9 हजार रूपए की आदान सहायता देंगे। 


मुख्यमंत्री बघेल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार किसानों की अपनी सरकार है। सरकार बनने के बाद से शासन द्वारा लिये गये सारे निर्णयों के मूल में किसान ही हैं। चाहे कर्ज माफी की बात हो, नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी की बात हो, सिंचाई कर को माफ करने का निर्णय हो सब किसानों को ध्यान में रखकर ही लिए गये हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि हमारे अन्न दाता किसान भाई पिछले वर्षों के मुकाबले इस बार और बेहतर फसल उत्पादन करेंगे। 

पूरब टाइम्स  रायपुर । विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ में नई कवायद शुरू हो रही है। सरकार गांव में निजी अस्पताल खोलने वालों को अनुदान और दूसरी छूट देने पर विचार कर रही है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उद्योग विभाग को इसके लिए 10 दिनों में विस्तृत कार्ययोजना पेश करने का निर्देश दिया है।

अधिकारियों ने बताया, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को अधिक मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अब निजी क्षेत्र का भी सहयोग लेने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री का कहना है ग्रामीण इलाकों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं उपलब्ध हो सकें, इसके लिए सभी शासकीय अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ ही स्वास्थ्य अधोसंरचनाओं के निर्माण में भी निजी क्षेत्र का सहयोग लिया जाएगा। विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में अस्पताल निर्माण के लिए निजी क्षेत्रों को राज्य सरकार द्वारा अनुदान भी दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने उद्योग विभाग को आगामी 10 दिनों में इसकी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का तर्क है, बीते ढाई सालों में राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार के लिए अनेक कार्य किए गए हैं। इसके बाद भी छोटे जिला मुख्यालयों एवं विकासखण्ड मुख्यालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता चुनौती बनी हुई है। कोरोना महामारी की दूसरी लहर में ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे अस्पतालों की कमी अखरी है। ऐसे में सरकार निजी क्षेत्र को भी प्रोत्साहित करने की कोशिश में है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों और छोटे जिलों में इन सेवाओं का विस्तार हो सके।



इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हॉस्पिटल बोर्ड के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने कहा, सरकार अगर ऐसा करती है तो यह बेहतर कदम होगा। ग्रामीण क्षेत्रों की एक बड़ी समस्या दूर हो जाएगी। अभी निजी अस्पतालों का 70 % हिस्सा बड़े शहरों में केंद्रित है। ग्रामीण खासकर आदिवासी बहुल क्षेत्रों में तो निजी अस्पताल हैं ही नहीं। अगर सरकार प्रोत्साहन देगी तो बहुत से डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों-छोटे कस्बों में अस्पताल खोलना चाहेंगे। 10 बिस्तर-20 बिस्तर के छोटे अस्पताल भी इन क्षेत्रों में बेहतर भूमिका निभा पाएंगे।


फेस कव्हर, मॉस्क का उपयोग करने वाले व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाए। कोविड-19 के निवारक उपायों के बारे में पोस्टर, बैनर, स्टैण्डी प्रमुखता से प्रदर्शित किये जाए। कोविड-19 के निवारक उपायों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए आडियो, वीडियो क्लिप को नियमित रूप से चलाया जाना चाहिए। आगंतुकों को परिसर में क्रमश: एक के बाद एक ही प्रवेश दिया जाए। एक समय में अधिकतम 5 व्यक्तियों के प्रवेश की अनुमति रहेगी। एक साथ परिसर के भीतर भीड़ इकठ्ठा न किया जाए। स्वयं के वाहन से आने वाले श्रद्धालुओं के जूते, चप्पल उनके वाहन में ही रखकर धार्मिक, पूजा स्थल में प्रवेश हेतु निर्देशित किया जाए।

अन्य श्रद्धालुओं हेतु अलग-अलग स्लाट अनुसार जूते, चप्पल रखने की व्यवस्था की जाए। परिसर के बाहर एवं पार्किंग स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग, फिजिकल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए उचित भीड़ प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए। परिसर के बाहर एवं भीतर स्थित सभी दुकान, स्टाल, कैफेटेरिया आदि में हमेशा सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन किया जाना होगा। कतार व्यवस्था एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराने हेतु परिसर में चूने या अन्य किसी अन्य उचित रंग से गोल घेरा, सर्कल, निशान लगाई जाए। 

प्रवेश हेतु कतार में खड़े होने वाले व्यक्तियों के मध्य न्यूनतम 6 फीट की शारीरिक दूरी सुनिश्चित की जाए। आगन्तुकों को परिसर में प्रवेश करने से पहले अपने हाथों और पैरों को साबून और पानी से धोना होगा। बैठने की व्यवस्था इस तरह से की जाए किए कि पर्याप्त सोशल, फिजिकल डिस्टेंसिंग (दूरी) बनी रहे। एयर कंडिशनिंग, वेंटीलेशन के लिए सीपीडब्ल्यूडी के दिशा-निर्देश का पालन किया जाए जिसके अंतर्गत सभी एयर कंडिशनिंग उपकरणों का तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस तथा रिलेटिव ह्यूमीडीटि 40 से 70 प्रतिशत की सीमा में होनी चाहिए। ताजा हवा एवं क्रास वेल्टीनेशन हेतु पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

मूर्ति, धार्मिक ग्रंथों आदि को स्पर्श करने की अनुमति नहीं होगी। धार्मिक स्थलों में बड़ी सभाएं, मंडली कार्यक्रमों का आयोजन प्रतिबंधित होगा। संक्रमण फैलने की संभावना को देखते हुए जहां तक संभव हो रिकार्ड किए गए भक्ति संगीत, गाने बजाये जा सकते हैं। परिसर के भीतर लोगों से मिलते जुलते समय फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन सुनिश्चित की जाए। धार्मिक पूजा स्थल के भीतर सार्वजनिक चटाई, दरी के उपयोग पर प्रतिबंध रहेगा। आगंतुक अपने साथ स्वयं की चटाई, दरी ला सकते हैं।

धार्मिक, पूजा स्थल के भीतर प्रसाद वितरण एवं पवित्र जल का छिड़काव करने की अनुमति नहीं होगी। धार्मिक, पूजा संस्थान के प्रबंधन द्वारा धार्मिक, पूजा स्थल की नियमित साफ-सफाई एवं डिसइंफेक्शन की व्यवस्था की जाए। परिसर के फर्श को विशेष रूप से दिन में कई बार साफ किया जाए। आगंतुकों अथवा कर्मचारियों द्वारा उपयोग किये गये फेस कव्हर, मॉस्क, दस्तानों को उचित निपटान हेतु व्यवस्था सुनिश्चित की जाए तथा वेक्सीनेशन (टीकाकरण) हेतु  प्रेरित किया जाए। यह आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।

पूरब टाइम्स रायपुर। छत्तीसगढ़ में नियुक्ति के बाद से सैकड़ों डॉक्टर गायब हैं। स्वास्थ्य विभाग ने उन डॉक्टरों की सेवा समाप्ति की औपचारिक प्रक्रिया शुरू की है जो 3 वर्ष से अधिक समय से गैर हाजिर हैं। विभाग ने ऐसे 88 डॉक्टरों को सूचना जारी कर सुनवाई का अंतिम मौका दिया है। उन्हें सात दिनों के भीतर कार्रवाई पर अपनी आपत्ति दर्ज करानी होगी। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया, इन डॉक्टरों को विभागीय भर्ती से चिकित्सा अधिकारी पद पर नियुक्त किया गया था। उनमें से कुछ ने ड्यूटी जॉइन किया लेकिन कुछ ही महीनों बाद गायब हो गए। बिना किसी पूर्व सूचना अथवा औपचारिक आवेदन के वे लगातार गैर हाजिर चल रहे हैं। 

कई डॉक्टर ने नियुक्ति मिलने के बाद से कभी अपनी पोस्टिंग वाली जगह पहुंचे ही नहीं। ऐसे में अनधिकृत तौर पर तीन साल से अनुपस्थित चिकित्सा अधिकारियों की सेवा समाप्ति से पहले व्यक्तिगत सुनवाई का अंतिम अवसर दिया जा रहा है। ऐसे लोगों को सात दिनों के भीतर कार्यालयीन समय में संचालनालय, स्वास्थ्य सेवाएं, नवा रायपुर में स्वयं उपस्थित होकर या डाक के माध्यम से अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। इन सात दिनों में दावा-आपत्ति प्रस्तुत नहीं करने पर इन चिकित्सा अधिकारियों को सेवा से पृथक करने की कार्रवाई की जाएगी। बताया जा रहा है कि सेवा से गैर हाजिर रहने की वजह से इन डॉक्टरों को पहले भी वेतन-भत्तों का कोई भुगतान नहीं किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के 2013 के एक परिपत्र के मुताबिक यदि कोई शासकीय कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक अनाधिकृत रूप से अनुपस्थित रहता है तो कोई शासकीय सेवक अवकाश सहित या बिना अवकाश के बाह्य सेवा से भिन्न, तीन वर्ष से अधिक निरंतर अवधि के लिये कर्तव्य से अनुपस्थित रहता है तो उसे शासकीय सेवा से त्याग-पत्र दिया हुआ समझा जाएगा। लेकिन इससे पहले उसे अनुपस्थिति के कारण स्पष्ट करने के लिए युक्तियुक्त अवसर दिया जाएगा।

पूरब टाइम्स रायपुर।  दूसरे की जमीन को फर्जी तरीके से हड़प कर उसे बेचने के मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस ने आम मुख्तियार समेत एक महिला के खिलाफ अपराध कायम किया है। सिविल लाइन पुलिस थाना प्रभारी आरके मिश्रा ने बताया कि ओड़िशा के फुलवानी जिले के बोधराज गांव निवासी हेमंत गोयल ने 29 जुलाई 1993 को कसारीडीह (दुर्ग) निवासी मीना जैन पति धरमचंद जैन वगैरह के नाम की टिकरापारा पटवारी हल्का नंबर 114 के खसरा नंबर 519/1 का भाग रकबा 2250 वर्गफुट जमीन को 33 हजार 8 सौ रुपये में खरीदा था।

इस जमीन का कब्जा न दिलाकर आरोपित संतोष जैन और मीना जैन ने राजस्व निरीक्षक मंडल रायपुर में फर्जी तरीके से बटांकन दर्शाकर जमीन को बेचा था। इसका पता चलने पर हेमंत ने राजस्व मंडल में शिकायत की। जांच में पटवारी नक्शे में बटांकन नहीं होने से खसरा नंबर 519/5 का स्थल पर निधारण करना संभव नहीं पाया गया। पुलिस ने मामले में संतोष जैन और मीना जैन के खिलाफ धारा 418,420,467,468,471 के तहत अपराध कायम कर लिया।


इस प्लाट में राजेश के दोनों बड़े भाई मोहन एवं सुरेश हिस्सा की मांग कर दबाव बनाते आ रहे है। चूंकि राजेश का यह निजी प्लाट है। इसलिए वह हिस्सा देने को तैयार नहीं है। 18 जून की रात 22.53 बजे राजेश के मोबाइल पर बड़े भाई सुरेश के समधी कुशल कुकरेजा ने काल करके गाली-गलौज कर धमतरी के जमीन विवाद का निपटारा नहीं करने पर जान से मारने की धमकी दी। राजेश ने धमकी न देने और मामला हाईकोर्ट में लंबित होने को कहा तो कुशल ने निपटा देने धमकाया।

पूरब टाइम्स रायपुर।  छत्तीसगढ़ के ज्यादातर हिस्सों में मानसूनी बारिश तेज हो गई है, लेकिन छह महीने बाद भी खरीदी केंद्रों से धान का उठाव नहीं हो पाया है। करीब 125 करोड़ रुपये के पांच लाख टन धान अब भी केंद्रों में पड़े हैं। कई खरीदी केंद्रों में धान भींग गए हैं तो बहुत से केंद्रों में नमी की वजह से धान अंकुरित होने लगा है। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 28 में से 24 जिलों में अभी धान का पूरा उठाव नहीं हो पाया है।

कई जिलों के खाद्य विभाग के अधिकारियों ने  अनौपचारिक चर्चा में धान भींगने और खराब होने की बात स्वीकार की है। वहीं, कुछ अफसरों ने कहा कि धान को भींगने से बचा भी लिया जाए तो भी मौसम के कारण धान की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। इस बीच धान भींगने को लेकर प्रदेश की सियासत गरमाने लगी है। भाजपा ने नुकसान का आंकलन करने के लिए समिति बनाई है।


बारिश की वजह से धान भींगने से बच भी जाए तो सबसे नीचे के बोरो में रखे धान की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। दुर्ग जिले के खाद्य नियंत्रक सीपी दीपांकर ने कहना है कि बारिश की वजह से कितना धान खराब हुआ है इसकी जानकारी उठाव पूरा होने के बाद ही मिल पाएगा। लेकिन खरीद केंद्रों में स्टेक लगाकर धान रखा गया है बारिश की वजह से नीचे रखे धान की गुणवत्ता पर असर जरूर पड़ सकता है।

बारिश से संग्रहण केंद्रों में रखे धान भींगने की जांच के लिए भाजपा ने समिति बनाई है। जांच संग्रहण केंद्रों में जाकर नुकसान का आंकलन कर अपनी रिपोर्ट पार्टी को सौंपेगी। कार्यक्रम के प्रदेश संयोजक गौरीशंकर श्रीवास ने बताया है कि बारिश की वजह से संग्रहण केंद्रों में हुए नुकसान की जानकारी लेने के लिए हर जिले में समिति बना दी गई है। समिति में जिले के सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक, भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष और पदाधिकारी शामिल होंगे।


रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से अपील की कि वे शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित आदिवासियों को उनके कब्जे वाली जमीन के पट्टे दिलवाने में सरकार का साथ दें, ताकि आदिवासी शासन की योजनाओं का लाभ उठा सकें और सक्षम बनें. बघेल ने कहा कि उनकी सरकार की मंशा आदिवासियों को सक्षम बनाने की है. जब उन्हें जमीन का पट्टा मिलेगा, जिस पर वे काबिज हैं, तो सभी शासकीय योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे और अधिकार सम्पन्न भी बनेंगे. उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति व विकास की दिशा में यह सबसे जरूरी कदम है.


मुख्यमंत्री बघेल शनिवार शाम अपने निवास कार्यालय में सर्व आदिवासी समाज के एक बड़े प्रतिनिधिमण्डल से चर्चा कर रहे थे. इस प्रतिनिधि मण्डल में समाज के सोहन पोटाई, प्रकाश ठाकुर सहित पप्पू नाग, शारदा कश्यप, राजकुमार ओयामी, आनंद मरकाम, संदीप सलाम एवं अन्य सदस्य मौजूद थे. बैठक में उद्योग मंत्री कवासी लखमा, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, सांसद फूलोदेवी नेताम, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी एवं विधायक लखेश्वर बघेल मौजूद थे.



मुख्यमंत्री बघेल ने सर्वआदिवासी समाज के प्रतिनिधियों से कहा कि उनकी सरकार शांति व विकास के लिए कटिबद्ध है. उन्होंने यह भी कहा कि वे हर उस व्यक्ति से चर्चा करने के लिए तैयार है जो भारत के संविधान में आस्था रखते हैं. मुख्यमंत्री बघेल ने कहा की आदिवासी समाज तो हमारा अपना परिवार है उससे तो मैं हर समय बात करने के लिए तत्पर हूं.

मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज के प्रतिनधियों से कहा कि बस्तर हो या सरगुजा अनुसूचित जनजाति बाहुल्य इलाकों में विकास के लिए धन की कोई कमी नहीं है. उन्होंने प्रतिनिधिमण्डल से कहा कि इन इलाकों में, जिस गांव में विकास के जो काम वे चाहते है वो मंजूर किए जाएंगे. उन्होंने यह भी कहा की इन इलाकों में 12वीं पास युवाओं को 50-50 लाख रुपए तक के ठेके दिए जाने का प्रावधान है इसके लिए समाज के युवाओं को आगे आना चाहिए.


प्रतिनिधिमण्डल ने बस्तर इलाके में नक्सलियों द्वारा ध्वस्त किए गए स्कूल, आश्रमों के पुनर्निर्माण की मांग की जिस पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तत्काल अधिकारियों को उचित कार्यवाही करने के निर्देश दिए. प्रतिनिधिमण्डल की मांग पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक को अविलम्ब बुलाने के निर्देश दिए है.

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भारत के महान धावक फ्लाइंग सिख मिल्खा सिंह के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा है कि मिल्खा सिंह देश के हजारों खिलाड़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा के स्रोत बने रहेंगे। उनके निधन से खेल जगत को अपूरणीय क्षति हुई है। बघेल ने उनके परिवारजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की है।

बता दें कि खेल की दुनिया में देश को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले उड़न सिख पद्मश्री मिल्खा सिंह शुक्रवार रात 11.24 बजे अलविदा कह गए। चंडीगढ़ के परास्नातक आयुर्र्विज्ञान संस्थान (पीजीआइ) में उन्होंने 91 साल की उम्र में आखिरी सांस ली। वह कोरोना से उबर चुके थे, लेकिन पोस्ट कोरोना साइड इफेक्ट के कारण गुरुवार रात से उनकी हालत बिगड़ती जा रही थी।



दुनिया के महान एथलीटों में शुमार मिल्खा सिंह ने चार एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीते थे। वह 1958 के कामनवेल्थ गेम्स के चैैंपियन भी थे। हालांकि उनका सबसे यादगार प्रदर्शन 1960 रोम ओलंपिक खेल में था जहां वह 400 मीटर स्पर्धा में चौथे स्थान पर रहे थे। उन्होंने 1956 और 1964 के ओलंपिक खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। उन्हें 1959 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। उनके जीवन पर बालीवुड फिल्म भाग मिल्खा भाग बनी थी जो सुपरहिट रही थी।


मिल्खा सिंह के इलाज में लगी सीनियर डाक्टरों की टीम में उनकी बेटी मोना भी शामिल थीं। मोना न्यूयार्क स्थित मेट्रोपोलिटन अस्पताल में सीनियर इमरजेंसी मेडिसिन डाक्टर हैं। वह अमेरिका में कोरोना मरीजों की जिंदगी बचाने में पिछले एक साल से जुटी हुई हैं। जैसे ही उन्हें पिता मिल्खा सिह के कोरोना पाजिटिव होने की खबर मिली, वह भारत आ गईं थीं और उनकी देखरेख में जुटी थीं।




बता दें, 17 मई को मिल्खा सिंह की कोरोना रिपोर्ट पाजिटिव आई थी। तबीयत बिगड़ने के बाद पहले उन्हें मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। वहां कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद 31 मई को उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिल गई थी। इसके बाद वह चंडीगढ़ के सेक्टर-8 स्थित घर में कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए आराम कर रहे थे। अचानक तीन जून को उनकी तबीयत बिगड़ गई और आक्सीजन लेवल गिरने के बाद उन्हें पीजीआइ में भर्ती करवाया गया।

रायपुर। JCCJ के बैनर तले नर्सिंग के छात्राओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. नर्सिंग के छात्राओं ने सीएम हाउस घेराव करने की कोशिश की है. छात्रों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई है. नर्सिंग के छात्रों का राजधानी में बड़ा आंदोलन है. आंदोलन में करीब 1 हजार छात्राएं राजधानी पहुंचे हैं, जो बूढ़ा तालाब धरना स्थल पर इक्कठे हुए हैं.

दरअसल, 2 साल से नर्सिंग छात्राओं का ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा विश्विद्यालय प्रशासन ने नहीं कराया है, जिस कारण से छात्र-छात्रों का भविष्य अंधकार में है. इससे नाराज छात्राओं ने मोर्चा खोल दिया है.  छात्र मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने पहुंचे हैं. प्रदेशभर से नर्सिंग के छात्र एकत्रित हो रहे हैं. छात्राएं ऑनलाइन या ऑफलाइन जल्द परीक्षा आयोजित करने की मांग कर रहे हैं.@GI@


बता दें कि ये आंदोलन  जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ जे और अजीत जोगी युवा मोर्चा के बैनर तले हो रहा है. इसके लिए JCCJ ने आंदोलन के लिए आमंत्रित किया था. जिसमें लिखा गया कि छात्राओं का भविष्य अंधकार में है. कई बार छात्राओं ने समस्या को लेकर मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक गुहार लगाई है, लेकिन सरकार के कान में जू तक नहीं रेंग रही ही, जिस कारण से कुंभकरणी नींद में सोई सरकार को जगाने के लिए कल मुख्यमंत्री निवास का घेराव करेंगे.@GI@

रायपुर। कोविड-19  की संभावित तीसरी लहर से पहले छत्तीसगढ़ ने गांवों से लेकर शहरों तक सरकारी अस्पतालों को मज़बूत बनाने और उन्हें समस्त सुविधाओं से युक्त करने के लिए कमर कस ली है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि स्वास्थ्य अधोसरंचना को सशक्त बनाने और छत्तीसगढ़ के दूरदराज के इलाक़ों तक सर्वसुविधायुक्त उपचार व्यवस्था बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.@GI@
कोरोना की दूसरी लहर के दौरान हुए अनुभवों को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन ने गांवों से लेकर जिला मुख्यालयों तक सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं को मजबूत करने का काम शुरु कर दिया है. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों एवं विकासखण्ड स्तरीय अस्पतालों को सर्वसुविधायुक्त बनाने के लिए जिला कलेक्टरों को 15 दिनों में कार्य-योजना संपन्न बनाया तैयार कर प्रस्तुत करने को कहा है. बघेल ने कहा है कि स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूती देने का काम सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ किया जाना है, ताकि तीसरी लहर की स्थिति बनती भी है, तो उससे पूरी ताकत के साथ निपटा जा सके.
मुख्यमंत्री ने कहा है कि पिछले 6 महीने में कोरोना के इलाज की व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने की दृष्टि से इन अस्पतालों में आक्सीजन संबंधी उपकरण ICU बिस्तर, वेन्टिलेटर्स की संख्या में वृद्धि हुई है. इन स्वास्थ्य उपकरणों का बेहतर रखरखाव और लगातार उपयोग कोरोना की संभावित तीसरी लहर की तैयारी के लिए भी आवश्यक है. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डाक्टरों की संख्या में भी पिछले दिनों में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन स्वास्थ्य प्रबंधन और मजबूत किया जाना आवश्यक है.@GI@

बघेल ने कहा है कि प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के विकास की एक योजना शीघ्र तैयार की जाए. इस योजना में उपरोक्त सभी अस्पतालों में सर्व सुविधा संपन्न ऑपरेशन रूम, लेबर रूम, लैबोरेटरी, ICU और वेन्टीलेटर की सुविधा, ब्लड बैंक, निःशुल्क दवा की सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी अस्पतालों में 24 घंटे इलाज की सुविधा हो. साथ ही सभी में शिशु रोग, स्त्री रोग, निश्चेतना, पैथॉलाजी, मेडिसीन एवं सर्जरी के पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सक उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएं. जहां पोस्ट ग्रेजुएट उपलब्ध न हो सकें, वहां इन विषयों में प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सकों की व्यवस्था की जाए. मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों के माध्यम से उपरोक्तानुसार प्रस्ताव, आवश्यक बजट सहित 15 दिनों में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं.@GI@

रायपुर। गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने अपने रायपुर सिविल लाईन स्थित निवास कार्यालय में नगर सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक लेकर जिलों में बाढ़ आपदा प्रबंधन में उनके द्वारा की गई तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने बाढ़ संभावित जिलों में बचाव एवं राहत के लिए सभी आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए है। मंत्री  साहू ने कहा कि पिछले अनुभवों के आधार पर व्यवस्था में आवश्यक सुधार करें। 

कलेक्टर द्वारा ली जाने वाली बैठक में आपदा प्रबंधन के लिए जरूरी बाते रखें। उन्होंने जिला सेनानियों को जलाशयों के भरने तथा ओवर फ्लो की स्थिति में पानी छोड़ने के पूर्व जानकारी के लिए कलेक्टर और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से सतत सम्पर्क में रहने के निर्देश दिए। मंत्री साहू ने आवश्यकतानुसार बोट खरीदी के लिए प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। 

उन्होंने रेस्क्यू के दौरान बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित रूप से बाहर निकालने तथा आपदा के दौरान जान-माल की सुरक्षा के लिए उत्कृष्ट कार्य करने वाले नगर सेना के जवानों को पुरस्कृत करने के भी निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त महानिदेशक नगर सेना अरूण देव गौतम ने जिलों में बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिए नगर सेना की भूमिका और रेस्क्यू अभियान की जानकारी दी। 


इसके साथ ही बिलासपुर जिले के खूंटाघाट बांध, कोरिया जिले के गौरघाट में राज्यभर के राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) ईकाइयों के जवानों द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अण्डर वाटर सर्च एण्ड रेस्क्यू ऑपरेशन का मॉकड्रील आयोजित कराया गया। इसी तरह सीटीआई रायपुर में भी एसडीआरएफ एवं नगर सेना के जवानों को रोप रेस्क्यू का डेमों दिया गया। 

संचालक नगर सेना मयंक श्रीवास्तव ने बैठक में बताया कि प्रदेश के बाढ़ संभावित जिलों बस्तर, कोंटा, बीजापुर के भेरमगढ़, भोपालपट्टनम, राजनांदगांव, दुर्ग, बेमेतरा, बलौदाबाजार, जांजगीर, रायगढ़ में बाढ़ से बचाव के लिए तैयारियां कर ली गई हैं। राज्य स्तर पर नगर सेना एवं नागरिक सुरक्षा का बाढ़ बचाव कन्ट्रोल रूम, मुख्यालय नवा रायपुर में स्थापित किया गया है।


राजनांदगांव। शहर के गौरव पथ सहित विभिन्ना सड़कों के गड्ढों की मरम्मत को लेकर भाजपा पार्षदों ने महापौर के नाम बुधवार को ज्ञापन सौंपा। करीब डेढ़ दशक पहले बनाए गए गौरव पथ की मरम्मत के बहाने कांग्रेस व भाजपा, दोनों दलों के पार्षद सक्रियता दिखा रहे हैं। पहले भी कई बार मामला उठा, लेकिन कभी फाइल गुम होना या फिर जल जाना बताकर मामले को रफा-दफा कर दिया गया। ऐसे में अब यह मामला किस हद तक जाता है, यह देखने वाली बात होगी।

लगभग 15 वर्ष पूर्व निर्मित शहर के गौरव पथ सहित अन्य सड़कों की मरम्मत को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों ने नगर निगम के सामने खड़े होकर महापौर और निगम प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वहीं सड़कों के गड्ढों की मरम्मत को लेकर ज्ञापन देने एकत्रित हुए। भाजपा पार्षदों से ज्ञापन लेने जब महापौर हेमा देशमुख नगर निगम नहीं पहुंची तब आक्रोशित पार्षदों ने महापौर कार्यालय की दीवार पर ही ज्ञापन चस्पा कर दिया। गौरव पथ की जर्जर स्थिति को लेकर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व नगर निगम अध्यक्ष एवं पार्षद शिव वर्मा ने कहा कि गौरव पथ निर्माण कार्य के बाद उसका मेंटेनेंस ठेकेदार द्वारा किया जाना है, नगर निगम में ठेकेदार की बयाने की राशि भी जमा है, इसके बाद भी गौरव पथ की मरम्मत नहीं करायी जी रहा है।

शहर के गौरव पथ की सड़क जर्जर हो चुकी है, वहीं इस मामले को लेकर मंगलवार को कांग्रेस के पार्षद ऋषि शास्त्री ने सड़क की मरम्मत कराने के मामले में नगर निगम आयुक्त को ज्ञापन सौंपा था। इसके बाद भाजपा ने बुधवार को अपने प्रदर्शन के दौरान कहा कि कांग्रेस की महापौर होने के बाद भी कांग्रेस के पार्षद गौरव पथ की मरम्मत को लेकर आयुक्त को ज्ञापन सौंपा है, जबकि इस सड़क का मरम्मत ठेकेदार से कराया जाना चाहिए।


इस मामले को लेकर महापौर हेमा देशमुख ने कहा कि गौरव पथ की गुणवत्ता को लेकर पहले भी सवाल उठे हैं और गौरव पथ का निर्माण किसके कार्यकाल में हुआ यह भी भाजपा को देखना चाहिए। महापौर ने कहा कि पीडब्ल्यूडी द्वारा गौरव पथ का निर्माण कराया गया है। पीडब्ल्यूडी को मरम्मत के लिए कहा जाएगा। वहीं महापौर ने गौरव पथ की गुणवत्ता की जांच को लेकर कमेटी गठित करने की बात भी कही है।


गौरव पथ के निर्माण के बाद इसकी गुणवत्ता को लेकर कई बार सवाल भी उठे और गौरव पथ की जांच भी हुई। इसके बाद गौरव पथ निर्माण से संबंधित पूरी फाइल ही गुम हो गई। इस फाइल को लगभग 6-8 वर्ष पूर्व नगर निगम कार्यालय में हुई आगजनी में जल जाना बताया गया। वहीं अब एक बार फिर गौरव पथ की जर्जर स्थिति के बाद इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।



रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार में संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने ट्रिपल आईटी के कुलपति की पुनर्नियुक्ति को लेकर बड़ा आरोप लगाया है। आरोप है कि ट्रिपल आईटी नया रायपुर में वर्तमान कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार सिन्हा को पुनर्नियुक्ति देने नियम विरूद्ध चयन समिति का गठन कर डॉ. सिन्हा को नियुक्ति देने की तैयारी चल रही है। विकास उपाध्याय इस पूरे प्रकरण पर राजभवन में राज्यपाल से मिल कर चर्चा करेंगे।

विकास उपाध्याय ने जारी बयान में ट्रिपल आईटी नया रायपुर में कुलपति चयन को लेकर व्यक्ति विशेष वर्तमान कुलपति डॉ. प्रदीप कुमार सिन्हा को पुनर्नियुक्ति देने ट्रिपल आईटी नया रायपुर के लिए बनाए गए एक्ट 2013 के सेक्शन-20 के प्रावधानों का खुला उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसके प्रावधानों को बताते हुए कहा कि कुलपति के लिए गठित चयन समिति में ऐसा कोई भी व्यक्ति सम्मिलित नहीं हो सकता जो ट्रिपल आईटी नया रायपुर से जुड़ा हो।


दुर्भाग्य से चयन समिति के ये दोनों सदस्य जो कि कुलपति के अधीन हैं, उन्होंने डॉ. सिन्हा को पुनर्नियुक्ति देने साक्षात्कार किया। इससे साफ जाहिर होता है कि इस पूरे प्रकरण में राजभवन की संलिप्तता है। विकास उपाध्याय ने कहा कि कुलपति डॉ. प्रदीप सिन्हा की नियुक्ति प्रारंभ से ही विवादित रही है। उक्त व्यक्ति कभी एक दिन के लिए भी किसी कालेज या विश्वविद्यालय में, यहां तक कि आईआईटी में भी कार्य नहीं किया।


रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि जनता तक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाओं की आसान पहुंच सुनिश्चित की जाए. प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों और विकासखण्ड स्तरीय अस्पतालों को सर्वसुविधा संपन्न बनाया जाए. उन्होंने इसके लिए सभी जिला कलेक्टरों के माध्यम से 15 दिनों के भीतर कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश मुख्य सचिव को दिए है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 6 महीने में कोरोना के इलाज की व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने की दृष्टि से इन अस्पतालों में ऑक्सीजन संबंधी उपकरण आईसीयू बिस्तर, वेन्टिलेटर्स इत्यादि की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है. इन स्वास्थ्य उपकरणों का बेहतर रखरखाव और लगातार उपयोग कोरोना की संभावित तीसरी लहर की तैयारी के लिए भी आवश्यक है. सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में डाक्टरों की संख्या में भी पिछले दिनों में काफी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन स्वास्थ्य प्रबंधन और मजबूत किया जाना आवश्यक है.

बघेल ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला चिकित्सालयों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों के विकास की एक योजना शीघ्र तैयार की जाए. इस योजना में उपरोक्त सभी अस्पतालों में सर्व सुविधा संपन्न ऑपरेशन रूम, लेबर रूम, लैबोरेटरी, आई.सी.यू. और वेन्टीलेटर की सुविधा, ब्लड बैंक, निःशुल्क दवा आदि सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए.

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सभी अस्पतालों में 24 घंटे इलाज की सुविधा हो. साथ ही सभी में शिशु रोग, स्त्री रोग, निश्चेतना, पैथॉलाजी, मेडिसीन और सर्जरी के पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सक उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए. जहां पोस्ट ग्रेजुएट उपलब्ध न हो सकें, वहां इन विषयों में प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सकों की व्यवस्था की जाए. मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों के माध्यम से उपरोक्तानुसार प्रस्ताव, आवश्यक बजट सहित 15 दिनों में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है.

रायपुर। सूरजपुर जिले में आयोजित भूमि पूजन और लोकार्पण समारोह के दौरान शासन की गोधन न्याय योजना से लाभान्वित गीता देवी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से कहा कि आपकी यह योजना चलती रहनी चाहिए क्योंकि इसी से वे डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही अपनी बेटी की फीस का इंतजाम कर पाती हैं। गीता देवी ने कहा की उनकी बिटिया रायपुर में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रही हैं।

गोबर बेचकर और दूध बेचकर वह उसकी फीस का इंतजाम कर लेती हैं। इसके अलावा उन्होंने गायों के लिए शेड भी बनाया है। गोधन न्याय योजना से ही लाभान्वित, सूरजपुर जिले के ही दिनेश कुमार ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने 50 हजार रुपये का गोबर बेचा है। इस पैसे में अपने पास के थोड़े और पैसे मिलाकर उन्होंने एक नई मोटरसाइकिल खरीदी है।