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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



रायपुर । देशभर में एक और जहां आदिवासियों को हिंदू समाज से अलग करने के लिए अलग अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। आदिवासियों को बताया जा रहा है कि वह हिंदू नहीं आदिवासी हैं, उनका धर्म अलग है। इन सब के बीच छत्तीसगढ़ के एक सांसद आदिवासियों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रामधुन का इस्तेमाल कर रहे हैं। आदिवासियों के बीच रामायण की चौपाई पढ़ रहे हैं और बता रहे हैं कि आदिकाल से आदिवासी हिंदू समाज के अंग रहे हैं।

राजनांदगांव के भाजपा सांसद संतोष पांडे लगातार सुदूर वनांचल में छोटे-छोटे कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में वह रामायण की चौपाई पढ़ रहे हैं और आदिवासी समाज के लोगों को यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका भी भगवान श्रीराम से नाता रहा है। अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के लिए आदिवासी समाज को जोड़ने का भी काम कर रहे हैं। दरअसल, भाजपा राम मंदिर के लिए राशि एकत्र करने जा रही है। इसी कड़ी में आदिवासी घरों तक पहुंचने का बीड़ा सांसद संतोष पांडे ने उठाया है।

सांसद पांडे ने कहा कि आदिवासी समाज को भ्रमित किया जा रहा है। उन्हें यह बताने की कोशिश की जा रही है कि वह आदिवासी हैं, न कि हिंदू। जबकि रामायण काल से आदिवासी हिंदू समाज से जुड़े हैं और हिंदू समाज के अभिन्न अंग रहे हैं। राम मंदिर के लिए आदिवासी समाज के लोग भी सहयोग राशि दे रहे हैं। इससे उनका भगवान श्रीराम से सीधे जुड़ाव  होगा।

रायपुर  नरवा,गरवा,घुरवा और बाड़ी, छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी, येला बचाना है संगवारी...यह कथन अब हर छत्तीसगढ़ियों की जुबान में रच-बस गया है । मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा नरवा,गरवा,घुरवा और बाड़ी के माध्यम से ग्रामीणों की प्राचीन संस्कृति को सहेजने और आर्थिक समृद्धि को पुनर्जीवित करने जो कदम उठाया गया है, उसी राह पर चलते हुए नगरीय प्रशासन मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया ने भी नई पहल शुरू की है। उन्होंने गोठानों में गोबर से तैयार गौ काष्ठ का उपयोग ठण्ड भगाने के लिए अलाव के रूप में करने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश भर के नगरीय निकाय क्षेत्रों में ठण्ड के दिनों में आम नागरिकों को ठण्ड से बचाने के लिए चौक-चौराहों पर अलाव जलाए जाते हैं। 

लकड़ी के आकार का होता है गौ-काष्ठ

 प्रदेश में गाय के गोबर के कण्डे बनाए जाते हैं। गोठानों के माध्यम से गोबर के कण्डे के आकार में परिवर्तन कर लकड़ी के आकार का बना दिया जाता है। पेड़ों की तरह गोलाईनुमा आकार में एक से तीन फीट तक लंबाई वाले सूखे गोबर को ही गौ-काष्ठ कहा जाता है। अमूनन ढ़ाई किलो के गोबर से एक किलो और एक फीट लंबा गौ काष्ठ का निर्माण होता है। जिसकी कीमत लगभग 8 रुपए हैं।

400 सौ अधिक स्थानों पर जलता है अलाव

आमतौर पर नगरीय निकाय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इलाकों में ठण्ड और शीतलहर को देखते हुए आम नागरिकों के लिए चौक-चौराहों पर अलाव जलाए जाते हैं। अनुमानित 400 सौ से भी अधिक स्थानों पर लकड़ी के अलाव जलाए जाते हैं। यह संख्या ठण्ड और शीतलहर के हिसाब से घटती बढ़ती रहती है। रायपुर नगर निगम क्षेत्र में अनुमानित 51 स्थानों पर अलाव जलाए जाते हैं। 

स्वच्छ वातावरण के निर्माण में होगा उपयोगी

प्रदेश भर में ठिठुरन बढ़ने के साथ चौक-चौराहों पर अलाव जलाने की व्यवस्था तो कर दी जाती है, लेकिन अधिकांश चौक या चौराहा शहर के मध्य ही स्थित है। इन चौक-चौराहों में लकड़ी को जलाने पर भारी मात्रा में कार्बन उत्सर्जित होता है। ठण्ड के दिनों में यह लकड़ी धुआं कुहरे के रूप में कुछ दूर ऊपर ही ठहर जाता है। इससे प्रदूषण फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। यहीं नहीं लकड़ी का अलाव बहुत जल्दी राख में तब्दील हो जाता है। इन सबकी अपेक्षा  गौ काष्ठ के अनेक फायदे हैं। इको-फ्रेण्डली होने के साथ इसका धुआं पर्यावरण के लिए अधिक नुकसानदायक नहीं होता है। पेड़ो की कटाई और सूखी लकड़ी की कीमत की अपेक्षा यह कम कीमत में उपलब्ध हो सकता है। इसका अलाव भी देर तक राख में तब्दील नहीं होता है।


बताया जाता है कि इस स्कूल के संचालक ने अभिभावकों को एकतरफा निर्णय सुना दिया है कि संजय नगर का स्कूल बंद हो जाएगा, जबकि इस साल भी आरटीई के तहत इस स्कूल में बच्चों का दाखिला हुआ है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूल प्रबंधक कह रहा है कि अजीज पब्लिक स्कूल के दूसरी शाखा मोवा में अपने बच्चों को भेजें। अभिभावकां का कहना है कि इतनी दूर बच्चों को नहीं भेज सकते हैं और स्कूल से बच्चों को निकाल देंगे तो मुफ्त की पढ़ाई से बच्चे वंचित हो जाएंगे। अभिभावक असमंजस में हैं कि करें तो क्या करें ? मामले में जिला शिक्षा अधिकारी जीआर चंद्राकर का कहना है कि स्कूल प्रबंधक के खिलाफ शिकायत मिली है। मामले में कार्रवाई की जाएगी। इधर, स्कूल प्रबंधक से संपर्क साधने की कोशिश की लेकिन बातचीत नहीं हो पाई।

रायपुर में ही पिछले सालों में कई स्कूल बंद हो चुके हैं। इन स्कूलों में जिन बच्चों का आरटीई के तहत दाखिला हुआ है उन बच्चों को अभी तक दूसरे स्कूलों में शिफ्ट भी नहीं कराया गया है।पूरब टाइम्स  ने पड़ताल की तो पाया कि प्रदेशभर में पिछले सालों के भीतर 40 निजी स्कूल बंद हो गए हैं। इन स्कूलों में पढ़ने वाले आरटीई के हजारों बच्चों की मुफ्त की पढ़ाई भी छिन गई है। ये बच्चे अब कहां पढ़ रहे हैं, इसका जवाब अफसरों के पास नहीं है।

रायपुर । आदिवासी कला भित्ति चित्र को कपड़े में उकेरकर फैशन डिजाइनर के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाने वाली छत्तीसगढ़ की फैशन डिजाइनर सारा मिराज खान ने दिल्ली में वर्ष 2020 का बेस्ट क्रिएटिव पुरस्कार हासिल किया है। इससे पहले भी मुंबई में फैशन के क्षेत्र में कई आयोजन में उनके द्वारा डिजाइन किए गए कपड़ों को काफी पसंद किया गया है।

निश्शुल्क दे रहीं प्रशिक्षण

छत्तीसगढ़ रायपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में कलाकार सारा मिराज खान छात्र- छात्राओं को निश्शुल्क आदिवासी कला को कपड़ों में उकेरने के गुण सिखा रही हैं। साथ ही आनलाइन फैशन क्लास भी ले रहीं हैं।

9 सालों बाद मिली कामयाबी

पिछले 9 साल से वे दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों में छत्तीसगढ़ की कला को फैशन डिजाइनर के रूप में अपनाकर पहचान बनाने में जुटीं हैं। कई आयोजन में शिरकत करने के बाद अब कहीं जाकर छत्तीसगढ़ की भित्ति चित्र कला के क्षेत्र में बेस्ट क्रिएटिव का पुरस्कार मिला है।

विश्व स्तर पर पहचान दिलाने उद्देश्य

पुरस्कार मिलने पर नईदुनिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि आदिवासी कला को दीवारों, मूर्तियों, बर्तनों में अंकित किया जाता है। इस कला को विश्वव्यापी पहचान दिलाना ही मेरा उद्देश्य है। इस कला को कपड़ों में उकेरकर जब फैशन प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने पहना तो निर्णायकों ने सराहा। अब बेस्ट क्रिएटिव अवार्ड मिलने से आगे बढ़ने की नई प्रेरणा मिली है। इस कला को विश्व स्तरीय प्रतियोगिता में लेकर जाना है ताकि छत्तीसगढ़ की इस कला के प्रति देशभर के कलाकार आकर्षित हों।

सदियों पुरानी कला

सारा मिराज बतातीं हैं कि उन्होंने पेंटिंग से अपने कैरियर की शुरुआत की थी। बाद में भित्ति चित्र की ओर झुकाव हुआ। यह कला सदियों पुरानी है, बस इसे वर्तमान फैशन के अनुसार ढालने की जरूरत है। उम्मीद है भविष्य में इस कला को नया मुकाम हासिल होगा।


उनके निधन से पार्टी में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने निधन पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने कहा, प्रदेश के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक घनाराम साहू के निधन का समाचार दुःखद है। इस दुःख की घड़ी में साहू जी के परिवारजनों को शक्ति प्रदान करने एवं दिवंगत आत्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना करता हूं।

रायपुर।  स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से कोरोना काल में बच्चों के अध्ययन-अध्यापन के लिए शुरू किया गया पढ़ई तुंहर दुआर कार्यक्रम के अंतर्गत आनलाइन एवं आफलाइन कक्षाओं का आयोजन किया जा रहा है। शिक्षकों, अभिभावकों और बच्चों को इस कार्यक्रम से जोड़े रखने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा बहुत से नवाचारी प्रयास किए गए हैं। इनमें से शिक्षकों का एक पसंदीदा कार्यक्रम है- हमारे नायक।

यह कार्यक्रम शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है। इसमें प्रतिदिन शिक्षकों और विद्यार्थियों के बारे में दो-दो ब्लाग लिखकर अपलोड किए जाते हैं। अब तक कुल 500 ब्लाग लिखे जा चुके हैं। उदाहरण के लिए पहला ब्लाग दुर्ग जिले की शिक्षिका नंदनी देशमुख और उनकी बेटी डा. निधि देशमुख पर लिखा गया है। उन्हें सरकार ने हमारे नायक घोषित किया। हिंदी और अंग्रेजी के बाद अब संस्कृत और छत्तीसगढ़ी में भी ब्लाग लिखे जाने की योजना है।

यह कार्यक्रम शिक्षकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रारंभ किया गया है। इसमें प्रतिदिन शिक्षकों और विद्यार्थियों के बारे में दो-दो ब्लाग लिखकर अपलोड किए जाते है। यह कार्य 25 मई से प्रारंभ हुआ और अब तक कुल 300 ब्लाग लिखे जा चुके हैं। पांच माह बाद अब अंग्रेजी में भी ब्लाग लिखना शुरू हुआ है। पहला ब्लाग दुर्ग जिले की शिक्षिका नंदनी देशमुख और उनकी बेटी डा. निधि देशमुख पर लिखा गया है। हमारे नायक के पहले अंग्रेजी ब्लाग में एक साथ मां-बेटी को स्थान मिलना सौभाग्य की बात है। आगामी दिनों में माह में कम से कम पांच ब्लाग अंग्रेजी में लिखे जाने की योजना है।


रायपुर। राजधानी में कोरोना वैक्सीन हवाई मार्ग से लाई जाएगी। पहली खेप मुंबई से आने की संभावना है। इस हिसाब से राजधानी में हेल्थ अफसरों ने वैक्सीन को पूरे प्रदेश में सुरक्षित रखने तथा दूसरी जरूरी तैयारियां कर ली हैं। इस बीच, वैक्सीन रखने के लिए 225 लीटर क्षमता वाले 154 आइसलाइन्ड रेफ्रिजरेटर यानी आईएलआर भी मिलना शुरू हो गए हैं। राजधानी से इन्हें अलग-अलग जिलों में भेजा जा रहा है। इस बीच, महत्वपूर्ण बात यह भी है कि वैक्सीन को सुरक्षित रखनेवाले डीप फ्रीजर की खेप जनवरी के शुरुआती हफ्ते में राजधानी में आ जाएगी। इस खेप में 68 डीप फ्रीजर होंगे और यह छोटे तथा मंझौले आकार के रहेंगे।
प्रदेश में बुधवार को कोरोना के 1661 नए संक्रमित मिले हैं, जिसमें रायपुर के 266 केस शामिल है। राजधानी की दो समेत 10 मौत भी हुई है। इस बीच, राहत की खबर यह है कि प्रदेश में होम आइसोलेशन यानी घर में ही इलाज के जरिए ठीक होने वाले कोरोना संक्रमितों की संख्या डेढ़ लाख के पार (150570) हो गई है। पिछले पंद्रह दिन में तेरह सौ के औसत से मरीज घर से इलाज के बाद कोरोनामुक्त हुए हैं। प्रदेश में होम आइसोलेशन यानी घर में रहकर कोरोना इलाज लगातार बेहतर साबित हुआ है। 

रायपुर में 23 हजार से ज्यादा मरीज रायपुर जिले में स्वस्थ हुए हैं। वहीं, रायपुर समेत शहरी या औद्योगिक व्यवसायिक क्षेत्रों वाले जिलों बिलासपुर, नांदगांव, दुर्ग, कोरबा, रायगढ़ में डेढ़ लाख मरीजों का पचास से अधिक प्रतिशत मरीज घर से इलाज के जरिए ही स्वस्थ हुए हैं। दिसंबर के पहले पंद्रह दिन में बीस हजार से ज्यादा मरीज घर से इलाज के बाद कोरोना मुक्त हो चुके हैं। यानी औसतन तेरह सौ से अधिक मरीज घर से इस दौरान इलाज के बाद ठीक हो चुके हैं। इसके पहले नवंबर के महीने में 41 हजार से ज्यादा लोग होम आइसोलेशन में ठीक हुए। जबकि अक्टूबर के महीने में 56,666 मरीज होम आइसोलेशन से ठीक हुए। 

प्रति माह 10 हजार रूपए वेतन एक्टिव केस में भी कमी : एक्टिव यानी सक्रिय मरीजों का प्रतिशत गिरता हुआ अब 6.8 फीसदी पर आ गया है। वहीं रिकवरी रेट यानी मरीजों के ठीक होने का प्रतिशत लगातार बढ़कर 92 प्रतिशत पर पहुंच गया है। अक्टूबर नवंबर की तुलना में प्रदेश कोरोना नियंत्रण के लिहाज से अब अच्छी स्थिति में पहुंच रहा है। छत्तीसगढ़ में कोरोना नियंत्रण और इलाज में होम आइसोलेशन यानी घर से मरीजों के इलाज का सिस्टम एक बड़ी वजह बनकर उभर रहा है। घर में ठीक होने वाले कोरोना मरीजों की संख्या अब डेढ़ लाख के पार हो रही है। वहीं डिस्चार्ज होने वाले मरीजों का औसत भी अब बढ़कर रहा है। 

कोण्डागाँव। आज जिला कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता कार्यक्रम में विधायक कोण्डागांव मोहन मरकाम जिले के समस्त पत्रकारों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न महात्वाकांक्षी योजनाओं जैसे सुराजी गांव योजना, गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, सुपोषण अभियान, खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना, हाट-बाजार क्लीनिक योजना, मलेरिया मुक्त बस्तर, पंढ़ई तुंहर दुआर, इंग्लिश मीडियम स्कूल, सार्वभौम पीडीएस, गढ़ कलेवा योजना, वनोपज खरीदी, वनाधिकार पट्टों के वितरण, मनरेगा की उपलब्धियों के संबंध में विस्तारपूर्वक बताया। 

इसके अलावा उन्होंने जिले में राज्य शासन द्वारा दो वर्षों में किये गये विकास कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि जिला मुख्यालय एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन एवं किसान हित संबंधी शासन की विभिन्न योजनाओं एवं निर्माण कार्यों के क्रियान्वयन से विगत दो वर्षों में जिले में सुनियोजित विकास का पथ प्रशस्त हुआ है। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष देवचंद मातलाम, कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा, सीईओ जिला पंचायत डीएन कश्यप, कोण्डागांव वनमण्डलाधिकारी उत्तम गुप्ता, एएसपी अनंत साहू सहित सभी जिला स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

राजनांदगांव ।  बीती रात राजनांदगांव जिले की सीमा से लगे मध्यप्रदेश के बालाघाट में मुठभेड़ में पुलिस ने दो इनामी महिला नक्सलियों को मार गिराया। पुलिस ने हथियार समेत दोनों महिला नक्सलियों का शव बरादम कर लिया है। दोनों पर आठ-आठ लाख रुपए का इनाम था। मारी गई नक्सलियों में एक छत्तीसगढ़ के बीजापुर और दूसरी महाराष्ट्र के गढ़चिरौली की रहने वाली थी।

आंतरिक सुरक्षा सलाहकार के. विजय कुमार ने तीन दिन पहले ही यहां छत्तीसगढ़ से लगे मध्यप्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्र के आला पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर नक्सलियों के खिलाफ आक्रमक रणनीति तय की थी। पुलिस इसे बड़ी सफलता के रूप में देख रही है। बालाघाट को मध्यप्रदेश का सर्वाधिक नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता है। सुरक्षा बलों ने नक्सल मोर्चे में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए दो महिला नक्सलियों को मार गिराया है।

बीती रात करीब 11.30 बजे के करीब लांजी पुलिस डिवीजन के किरनापुर के जंगल में पुलिस ने आठ-आठ लाख रुपए के दो इनामी महिला नक्सलियों को ढेर कर दिया। बताया गया कि रात में गश्त में निकले बालाघाट पुलिस के जवानों का मलाजखंड दलम के नक्सलियों के साथ आमना-सामना हो गया। पुलिस को देखकर नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में जवानों ने भी नक्सलियों पर गोलीबारी की। करीब घंटेभर चली मुठभेड़ के बाद नक्सली घने जंगल का फायदा उठाकर भाग गए।

बीजापुर व गढ़चिरौली की रहने वाली

घटनास्थल का मुआयना करने पर दो महिला नक्सलियों का शव मिला। मारी गई महिला नक्सलियों की शिनाख्त सावित्री उर्फ आयते (24) और शोभा पति उमेश गावड़े (30) के रूप में पुलिस ने की है। सावित्री के शव के पास से पुलिस ने एक इंसास रायफल भी बरामद की है। सावित्री मूल रूप से छत्तीसगढ़ के बीजापुर के गंगालूर क्षेत्र की रहने वाली थी। वह मलाजखंड दलम में एरिया कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय थी।

इसी तरह शोभा गढ़चिरौली की रहने वाली है। वर्तमान में वह मलाजखंड दलम की एरिया कमेटी मेंबर के रूप में सक्रिय थी। इससे पहले वह दर्रेकसा दलम की भी सदस्य रही है। पुलिस ने उसके शव के पास से 12 बोर की एक बंदूक बरामद की है। दोनों महिला नक्सलियों के पास से कुछ और सामान पुलिस ने बरामद किया है।

दो साल में पांच ढेर

बीते दो वर्ष में बालाघाट पुलिस को नक्सलियों के खिलाफ अभियान में पांच बड़ी सफलताएं मिल चुकीं हैं। नक्सलियों को सिलसिलेवार मारने में कामयाब मिल रही है। बालाघाट रेंज के आईजी व्येंकटेश्वर राव के नेतृत्व में बीते दो साल में पुलिस ने पांच नक्सलियों के शव बरामद किए हैं। हाल ही में एक हार्डकोर नक्सली को पुलिस ने जिंदा गिरफ्तार किया है।

इससे नया काडर बनाने की फिराक में लगे नक्सलियों की कमर टूटती नजर आ रही है। नक्सलियों के खिलाफ बालाघाट पुलिस लगातार आक्रमक कार्रवाई कर रही है। आईजी ने बताया कि नक्सलियों से बार-बार आत्मसमर्पण करने के लिए अपील की जा रही है, लेकिन पुलिस मुठभेड़ में नक्सली मारे जा रहे हैं।

रायपुर । छत्तीसगढ़ शासन ने गोठानों में उत्पादित वर्मी कंपोस्ट की न्यूनतम विक्रय दर आठ रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर न्यूनतम 10 रुपये प्रति किलोग्राम कर दी है। इससे गोठान प्रबंधन में लगी महिला स्व-सहायता समूहों को फायदा होगा। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर कृषि उत्पादन आयुक्त ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

छत्तीसगढ़ सरकार की सुराजी गांव योजना के तहत राज्य में स्वीकृत 6,430 गोठानों में से 4,487 गोठानों में गोबर खरीदी की जा रही है।

खरीदे गए गोबर से वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए गोठानो में अब तक 44 हजार टांकों का निर्माण किया गया है। अभी 16 हजार टांके और बनाए जा रहे हैं। अब तक प्रदेश में 8000 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट का उत्पादन गोठनों में हो चुका है। इसमें 1000 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट की बिक्री की जा चुकी है।

प्रदेश के हजारों महिला स्व सहायता समूह गोठनों में गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करने का काम कर रहे हैं। वर्मी कंपोस्ट की न्यूनतम विक्रय दर में वृद्धि से उनकी आय में इजाफा होगा। इस योजना के तहत सरकार प्रदेश के हर जिले में वर्मी कंपोस्ट की गुणवत्ता की जांच के लिए प्रयोगशाला स्थापित करने की भी योजना बना रही है। बता दें कि प्रदेश में इस साल हरेली पर्व से देश की अपनी तरह की पहली गोबर खरीदी की अभिनव योजना गोधन न्याय योजना प्रारंभ की गई है।

इसके तहत दो रुपये प्रति किलोग्राम पर ग्रमीणों, किसानों और पशुपालकों से गोबर खरीदी की जा रही है। गोधन न्याय योजना में अब तक 1.36 लाख गोबर विक्रेताओं को उनसे खरीदे गए गोबर के मूल्य के रूप में 59.08 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।

महात्मा गांधीजी की 150 वीं जयंती के अवसर पर 02 अक्टूबर 2019 से छत्तीसगढ़ में सार्वभौम पीडीएस का क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य सरकार के इस कदम के बाद अब कोई भी व्यक्ति राशनकार्ड या राशन से वंचित नहीं रहेगा। प्रदेश के सभी परिवार अब राशनकार्ड हेतु पात्र हो गए हैं। सार्वभौम पीडीएस के अंतर्गत प्राथमिकता राशनकार्डो के खाद्यान्न पात्रता में वृद्धि की गई है, उन्हें अगस्त 2019 से बढ़ी हुई पात्रता के साथ राशन मिल रहा है। सार्वभौम पीडीएस लागू होने के बाद अब प्राथमिकता राशनकार्डो में एक सदस्यीय परिवार के लिए 10 किलो, 2 सदस्यीय परिवार के लिए 20 किलो, 3 से 5 सदस्यीय परिवार के लिए 35 किलो तथा 5 से अधिक सदस्य वाले परिवार के लिए 7 किलो प्रति सदस्य प्रति माह चावल एक रुपए प्रति किलो की दर से दिया जा रहा है।

नये पीडीएस के अंतर्गत सामान्य परिवारों (आयकरदाता एवं गैर आयकरदाता) को भी खाद्यान्न प्रदाय किया जा रहा है। सामान्य राशनकार्डों में 01 सदस्यीय परिवार के लिए 10 किलो, 2 सदस्यीय परिवार के लिए 20 किलो, 3 या 03 से अधिक सदस्यीय परिवार के लिए 35 किलो खाद्यान्न 10 रूपये प्रतिकिलो प्रतिमाह निर्धारित किया गया है। वर्तमान में 9.39 लाख सामान्य राशनकार्डधारी परिवारों को खाद्यान्न प्रदाय किया जा रहा है।

 राज्य में सार्वभौम पीडीएस के लागू होने के उपरांत राज्य की 97 प्रतिशत जनसंख्या को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में कुल 67 लाख 10 हजार राशनकार्डों में पंजीकृत 2 करोड़ 48 लाख लोगों को  खाद्यान्न वितरण किया जा रहा है। विगत 2 वर्ष के दौरान राज्य में लगभग 11 लाख 15 हजार नवीन राशनकार्ड जारी किए गए तथा 5 लाख 52 हजार नवीन सदस्यों के नाम राशनकार्डों में जोड़े गए हैं।

 राज्य सरकार ने खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण सामाजिक क्षेत्र के विषय पर अधिक राशि के व्यय का निर्णय लिया है, ताकि प्रदेश के सभी परिवारों को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करायी जा सके। पिछले वित्तीय वर्ष 2019-20 में इसके लिए 4,000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया । चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में 3409 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

 बस्तर संभाग के निवासियों में आयरन की कमी दूर करने के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत 6 लाख 71 हजार अंत्योदय, प्राथमिकता, अन्नपूर्णा, एकल निराश्रित एवं निःशक्तजन राशनकार्डधारियों को जनवरी 2020 से प्रतिमाह रियायती दर 17 रूपये प्रति किलो पर 02 किलो गुड़ प्रदाय किया जा रहा है।

 प्रदेश में पंजीकृत 471 संस्थाओं में 43 हजार 640 हितग्राहियों को राज्य शासन द्वारा स्वयं के व्यय से चावल दिया जा रहा है। अनुदान प्राप्त एवं निजी आश्रम-छात्रावास एवं कल्याणकारी संस्थाओं को अक्टूबर 2019 से खाद्यान्न प्रदाय किया जा रहा है। गौरतलब है कि भारत सरकार द्वारा अप्रैल 2019 से अनुदान प्राप्त एवं निजी आश्रम-छात्रावास एवं कल्याणकारी संस्थाओं हेतु खाद्यान्न का आबंटन बंद कर दिया गया है।

राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों एवं माडा क्षेत्र के अंत्योदय एवं प्राथमिकता परिवारों के भोजन में प्रोटीन की कमी पूरा करने हेतु रियायती दर 5 रूपये प्रतिकिलो की दर पर प्रतिमाह 2 किलो चना प्रदाय किया जा रहा है। वर्तमान में लगभग 25 लाख अन्त्योदय एवं प्राथमिकता राशनकार्डधारी परिवार को लाभान्वित किया जा रहा है। 

मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी अमर शहीद वीरनारायण सिंह के 10 दिसम्बर को शहादत दिवस पर उन्हें नमन किया है। श्री बघेल ने कहा है कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के गौरवशाली इतिहास में छत्तीसगढ़ के वीर सपूत शहीद वीर नारायण सिंह के बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा।
    श्री बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी के सच्चे सपूत वीर नारायण सिंह ने सन् 1857 में देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में छत्तीसगढ़ की जनता में देश भक्ति का की भावना का संचार किया। सन् 1856 के भयानक अकाल के दौरान गरीबों को भूख से बचाने के लिए उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ कठिन संघर्ष किया और अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। शहीद वीर नारायण सिंह के देश की आजादी तथा मातृभूमि के प्रति समर्पण, बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा।

रायपुर।  : पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह रमन सिंह ने प्रदेश सरकार की नरवा बरवा, घुरवा बाड़ी योजना में गोबर घोटाले की बात कही थी। इस कारण मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने गुरुवार को पत्रकारों से चर्चा के दौरान पलटवार करत हुए कहा कि रमन सिंह घोटाले से बाहर नहीं आ पाए हैं, इसलिए तो उन्हें हर काम में घोटाला नजर आता है।

बघेल ने कहा गोबर खरीद-बिक्री पर सवाल उठाने वालों को पहले यह तो जान लेना चाहिए था कि जब पेमेंट आनलाइन होता है, तो घोटाला कैसे होगा? राजनंदगांव के धान खरीद केंद्र में किसान की मौत पर पत्रकारों से चर्चा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि किसी की स्वाभाविक मौत को रोकना किसी के बस में नहीं होता। बघेल ने यह भी कहा कि किसान की मौत पर भाजपा को राजनीति नहीं करनी चाहिए।

उधर, निगम-मंडल में नियुक्ति के लिए पीसीसी अध्यक्ष के द्वारा प्रस्तावित नामों पर वरिष्ठ नेताओं की आपत्ति से मरकाम की नाराजगी के बीच मुख्य मंत्री भूपेश बघेल का बयान आया है कि निगम-मंडल में नियुक्ति का विशेषाधिकार मुख्यमंत्री का होता है। मगर, सामूहिक नेतृत्व की यही तो खासियत है सभी वरिष्ठ नेताओं से रायशुमारी कर नाम तय कर रहे हैं, इस कारण थोड़ा समय तो लगेगा।

उन्होंने गुरुवार को कोरिया जाने से पहले पत्रकारों से बातचीत में यह बात कहते हुए बताया कि इसके बावजूद सूची जल्द आ जाएगी। निगम-मंडल में नियुक्ति को लेकर बुधवार शाम को मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ नेताओं की बैठक बुलाई थी। पीसीसी अध्यक्ष बैठक शुरू होने से पहले कोंडागांव चले गए थे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मरकाम अपनी तरफ से तीन नाम लेकर गए थे, लेकिन उन तीनों नामों पर बाकी नेता सहमत नहीं थे।

रायपुर। वन तथा आवास एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने कल राजधानी स्थित अपने निवास कार्यालय में मृतक स्वर्गीय मुकेश पाण्डे के परिजन को एक्सिस बैंक से प्रदत्त राहत राशि 30 लाख रूपए का चेक सौंपा। अकबर ने एक्सिस बैंक के इस कार्य की भरपूर सराहना की। गौरतलब है कि वन मण्डल धरमजयगढ़ में कार्यरत वन कर्मी स्वर्गीय पाण्डे की एक वर्ष पूर्व हाथी के हमले से ड्यूटी के दौरान मृत्यु हो गई थी। यह राशि एक्सिस बैंक की ओर से मृतक वन कर्मी के परिजन को आर्थिक सहायता के रूप में दिया गया है।

 स्वर्गीय पाण्डे द्वारा एक्सिस बैंक में सैलरी खाता खोला गया था जिसमें उनकी सैलरी आती थी। एक्सिस बैंक द्वारा 2016 में शुरू की गई एक योजना के तहत यह राशि प्रदान की गई है। इस अवसर पर प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुआ, प्रधान मुख्य वन संरक्षक राकेश चतुर्वेदी, अपर प्रधान मुख्य संरक्षक अरूण पाण्डेय तथा एक्सिस बैंक के देवेन्द्र कुमार साहू, अंशुमान सामंत्रय, प्रतीक ढोडी तथा दीपक, छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ के सतीश कुमार मिश्रा आदि उपस्थित थे।

जगदलपुर। कोरोना संकटकाल में बेंगलुरु कर्नाटक से भटककर बस्तर पहुंची 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की जल्द ही घर वापसी होगी। कलेक्टर एवं जिला रेडक्रास सोसायटी के अध्यक्ष रजत बंसल की पहल पर वृद्धा को उसके घर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। अभी वृद्धा धरमपुरा स्थित वृद्धाश्रम आस्था निकुंज में रह रही हैं। उनके स्वजनों का पता लगाया जा चुका है। जानकारी के अनुसार एक साल पहले वृद्धा अपने घर से निकल गई थीं। लाकडाउन शुरू होने के कुछ दिन पहले जगदलपुर से 20 किमी दूर तोकापाल में वृद्धा भटकते मिली थीं।
वीडियो कॉल कर कराई गई पोते से बात आठ माह से आस्था निकुंज में रह रही वृद्धा केवल कन्नड़ भाषा में बात करती हैं। जब वह यहां लाई गई तब घर का पता-ठिकाना भी ठीक से नहीं बता पा रही थीं। जिला रेडक्रास सोसायटी की पिछले दिनों कलेक्टर की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी वृद्धा को सकुशल घर पहुंचाने का निर्णय लिया गया था। सोसायटी के उपाध्यक्ष अलेक्जेंडर चेरियन ने कन्नड़ में वृद्धा से बात कर पता लगाया कि वह बेंगलुरु की रहने वाली हैं और भटककर यहां पहुंची हैं। उनके सामान की तलाशी लेने पर एक कागज का टुकड़ा मिला जिसमें आधा मिटा हुआ नंबर लिखा था। 

फोन कंपनी से संपर्क कर नंबर की सही जानकारी प्राप्त करने के बाद वृद्धा के परिजनों से चर्चा की गई। वीडियो काल करके वृद्धा को उसके पोते के सेंदिल को दिखाया गया और बात भी कराई गई। परिवार गरीब, कुली का काम करता है पोता अलेक्जेंडर चेरियन से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि वृद्धा का परिवार काफी गरीब है। उसका पोता के सेंदिल बेंगलुरु में कुली का काम करता है। सेंदिल ने बताया कि वृद्धा उसकी नानी हैं। वह उन्हें घर वापस लाना चाहता है लेकिन गरीबी के कारण परेशान है। उसने अपनी नानी को बेंगलुरु पहुंचाने का आग्रह किया है। चेरियन ने बताया कि सारी बातों की जानकारी जिला रेडक्रास सोसायटी के अध्यक्ष को देने पर उन्होंने वृद्धा की घर वापसी का प्रबंध करने का निर्देश दिया है।



रायपुर। मुख्यमंत्री ने जशुपर जिले के ग्राम गम्हरिया के धान खरीदी केन्द्र में किसानों के साथ चर्चा में कहा कि राजीव गांधी किसान न्याय योजना की चौथी और अंतिम किस्त का भुगतान चालू वित्तीय वर्ष में ही माह मार्च में किया जाएगा। उन्होंनेे किसानों को बताया कि वर्तमान खरीफ मौसम में खरीदे जा रहे धान के लिए राजीव किसान न्याय योजना के अंतर्गत अतिरिक्त राशि की पहली किश्त आगामी मई में दी जाएगी।  

बघेल आज अपने जशपुर प्रवास के दूसरे दिन जिले के ग्राम गम्हरिया स्थित धान खरीदी केंद्र पहुंचे। उन्होंने वहां 10 गांवों के 15 किसानों से चर्चा कर धान खरीदी की व्यवस्था और भुगतान की जानकारी ली। किसानों ने धान खरीदी की व्यवस्था को दुरूस्त बताते हुए मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि उनके द्वारा गम्हरिया धान खरीदी केंद्र में दो दिन पहले बेचे गए धान का भुगतान हो गया है।

वहां मौजूद ग्राम साईटांगरटोली के किसान खैरूद्दीन ने बताया कि उन्हें दो-तीन दिन पहले चालू खरीफ मौसम के बेचे गए धान के लिए एक लाख 20 हजार रूपए का भुगतान प्राप्त हुआ है। गम्हरिया धान खरीदी केन्द्र के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष धान खरीदी के शुरुआती चार दिनों में ही वहां 21 किसानों से 974 क्विंटल धान की खरीदी कर ली गई है। 

मुख्यमंत्री  बघेल को धान खरीदी केन्द्र गम्हरिया में उपस्थित जशपुर जिले के किनकेला, पुत्रीचौरा, लुईकोना, सारुडीह, पथराटोली, साईटांगरटोली, पोड़ी, गलोंडा, पैकू और टिकैतगंज गांव के किसानों ने बताया कि उन्हें राजीव किसान न्याय योजना के तहत सरकार द्वारा दी गई राशि की तीन किस्तें मिल चुकी हैं। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी चौथी और अंतिम किश्त का भुगतान चालू वित्तीय वर्ष में ही मार्च में किया जाएगा। 

जगदलपुर। लॉकडाउन के दौरान हमने कई अजीबोगरीब कहानियां पढ़ीं, लेकिन बस्तर की ये स्टोरी कुछ अलग ही है। बस्तर पुलिस की महिला सेल में 138 ऐसे मामले पहुंचे हैं, जिनमें पति या पत्नी घर पर अपनी प्रेमिका से चैटिंग करते पकड़े गए। ये सारे मामले लॉकडाउन के दौरान के हैं। इनमें से 50 मामले तो ऐसे हैं, जिनमें परिवार टूट की कगार पर पहुंच गया है। पुलिस इनमें समझौता कराने की कोशिश कर रही है। दरअसल लॉकडाउन के दौरान ज्यादातर लोग घरों पर ही थे। इस दौरान उनके मोबाइल फोन ने परिवार में टूट की शुरूआत कर दी। महिला सेल में ऐसे कई मामले आये हैं जिनमें पत्नियों ने अपने पति को दूसरी लड़की से चैट और फोन पर बातें करते पकड़ा तो कुछ मामले ऐसे भी हैं जिनमें पति ने अपनी पत्नी को दूसरे मर्द से बातें करते हुए पकड़ा है। 

कोरोना काल के इस एक साल में सेल में करीब 138 मामले पहुंचे। इनमें से करीब 50 ऐसे मामले थे जिनमें पति-पत्नी के एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स की शिकायत लेकर सेल तक पहुंचे, जिनमें परिवार टूटने की नौबत तक आ पहुंची है। कुछ मामले धर्म परिवर्तन के भी हैं, जिनमें पत्नी ने अपना धर्म बदल लिया और अब पति जिस धर्म को मानता है उस धर्म के रीति-रिवाजों का पत्नी पालन नहीं कर रही है। फोन ने खोले राज तो फिर मामला पहुंचा थाने तक लॉकडाउन पीरियड में ज्यादातर लोग घरों पर थे। ऐसे में जिनके एक्स्ट्रा मेरिटल अफेयर्स थे, वे लोग घरों पर ही छिप-छिपकर सोशल मीडिया पर अपनी प्रेमिका से बातें कर रहे थे। 

कई घंटों की चैटिंग और फोन पर लंबी बातचीत ने पहले पति और पत्नियों के मन में शक का बीज बोया और इसके बाद जब लड़ाई झगड़े की शुरूआत हुई तो मोबाइल के रिकार्ड्स ने सबूत दे दिए। हम घरों को जोड़ने की कोशिश कर रहे महिला सेल की प्रभारी पद्मनी ठाकुर ने बताया कि अभी महिला सेल में महिलाएं तो शिकायतें लेकर आ ही रही हैं लेकिन ऐसे कई मामले हैं जिनमें पुरूष भी शिकायत लेकर आने लगे हैं। महिला सेल में पहुंचने वाले मामलों में हमारी कोशिश होती है कि हम पति-पत्नी के बीच में समझौता करवा दें। इसके लिए कई चरणों की काउंसिलिंग भी होती है यदि काउंसिलिंग के बाद भी मामला नहीं सुलझता है तो फिर हम एफआईआर दर्ज करते हैं। 

आपको बता दे देश में भी लॉकडाउन में ऐसे मामले देखने को मिले जहा पति के अवैध संबंध तो पत्नी के भी अवैध संबंध थे जैसे की : लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैँ। कई कंपनियों में छुट्टी चल रही है तो कहीं वर्क फ्राम होम। ऐसे में झारखंड की राजधानी में लॉकडाउन के बाद अपराध का ग्राफ तो गिर गया है, लेकिन पति-पत्नी के बीच विवादों के मामले बढ़ गए हैं। पति और पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर विवाद होने लगा है। शहर के थानों में ऐसे कई मामले पहुंच रहे हैं। हालांकि पुलिस प्राथमिकी दर्ज करने से पहले पति और पत्नी की काउंसिलिंग कर मामले को खत्म करने का प्रयास कर रही है।कोतवाली थाने में बीते एक सप्ताह में नौ मामले पुलिस के सामने आए। पुलिस ने तीन मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर ली, जबकि छह मामलों में काउंसिलिंग कर मामला सलटा दिया गया।

रायपुर। रायपुर के एक बड़े निजी हॉस्पिटल पर विदेशी नागरिक के कोरोना के इलाज में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए याचिका लगाई गई है. हाईकोर्ट ने हॉस्पिटल को नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न आपसे 5 करोड़ रुपये के मुआवजे की वसूली की जाए. लगातार परेशान होने के बाद विदेशी नागरिक ने हाईकोर्ट की शरण ली. बहस के दौरान जस्टिस गौतम भपुड़ी ने पूछ कि आप मुआवजे की मांग कर रहे है, तो सविंधान के आर्टिकल 21 के तहत फाइल कर सकते है. हाईकोर्ट ने बहस के बाद यह माना कि बड़े अस्पताल कोरोना के नाम पर लोगों को धमकाकर लूटने का काम कर रहे है। 

अमेरिका निवासी जॉन जोसेफ अग्लियार नवम्बर 2019 में अमेरिका से भारत आये. मार्च में कोरोना लॉकडाउन में यहीं फंस गए. अगस्त 2020 में वे अपनी पत्नी मंजरी अग्लियार का वीजा बढ़वाने मुंबई गए थे. वहां से वापस जब पत्नी के मायके महासमुंद जिले के सरायपाली पहुंचे. इसके बाद उन्हें महासमुंद जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से सूचना भेजी कि आप कोरोना पॉजिटिव हो.लेकिन टेस्ट रिपोर्ट नहीं दिखाई। एक फॉर्म ही दिया था. हॉस्पिटल प्रबंधन ने उन्हें अपने कोविड बेबीलॉन होटल में भर्ती कर दिया. 2 दिन बाद टेस्ट कर बताया गया कि वे पॉजिटिव है। 

पत्नी और बच्चा निगेटिव है. दोनों को मरीज की देखभाल के लिए साथ रहने दिया गे. वहां रहते हुए अस्पताल प्रबंधन ने WHO के नॉर्म्स व गाइड का पालन नहीं किया. टेस्ट रिपोर्ट बताए बिना ही यहां से डिस्चार्ज कर दिया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रतिवादी बड़े हॉस्पिटल व बेबीलॉन होटल को नोटिस जारी करते पूछा कि क्यों न आपसे 5 करोड़ का मुआवजा वसूलने की कार्रवाई की जाए. हाईकोर्ट ने 3 सप्ताह में जवाब मांगते हुए इसके तुरंत बाद फिर अगली सुनवाई रखी है। 

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि किसी किसान के पंजीकृत रकबे और गिरदावरी में यदि कोई त्रुटि मिलती है, तो तत्काल सुधार कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य शासन के खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा किसानों की सुविधा के लिए पंजीयन के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश सभी संभागायुक्त और जिला कलेक्टरों को जारी किया गया है।

गौरतलब है कि राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर धान उपार्जन के लिए 17 अगस्त से 17 नवम्बर तक किसान पंजीयन का कार्य किया गया है। खरीफ वर्ष 2020-21 में 21.30 लाख किसानों द्वारा धान बेचने हेतु पंजीयन कराया गया है। किसान पंजीयन की अवधि समाप्त होने के पश्चात भी जिलों से पंजीयन में सुधार हेतु प्रस्ताव प्राप्त हो रहे हैं, जिस पर शासन स्तर पर सुधार की कार्यवाही की जा रही है।

इसके तहत निर्देश दिए गए है कि किसानों से पंजीयन हेतु प्राप्त आवेदन के संबंध में गिरदावरी की स्थिति ज्ञात कर ली जाए, यदि गिरदावरी अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण है तो इसमें सुधार कार्य तत्काल कराया जाए। यदि पंजीयन के दौरान धान के वास्तविक रकबे की एंट्री न होकर कम रकबे की एंट्री हो गई हो तो रकबे में तत्काल सुधार की कार्यवाही की जाए।