Poorabtimes

जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



पूरब टाइम्स भिलाई। निगम भिलाई का चुनाव अटक सकता है। दरअसल निगम के वार्ड आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। सोमवार को इस पर सुनवाई होनी है। याचिका कर्ता ने नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा -11 एवं छत्तीसगढ़ नगर पालिका (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के लिए वार्डों का आरक्षण) नियम 1994 में यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि यदि किसी वार्ड का क्रमांक अथवा नाम परिवर्तन कर दिया जाता है।

किंतु वार्डों की सीमाएं यथावत है अर्थात वार्ड के मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है तो नवीन आरक्षण हेतु पूर्व वर्षों में आरक्षण स्थिति अनुसार चक्रानुक्रम लागू रहेगा। यदि कोई वार्ड को दो भागों में विभक्त कर दिए जाने से, वार्ड में नया क्षेत्र सम्मिलित हो जाने से अथवा वार्ड का पूर्व क्षेत्र कट कर दूसरे वार्ड में चले जाने से नए वार्ड बन जाते हैं तो पूर्व के वार्ड की चतुर्सीमा बदल जाने से नवगठित वार्ड बन जाने से आरक्षण के लिए चक्रानुक्रम लागू नहीं रहेगा।

भिलाई निगम के सात ऐसे वार्ड हैं जो कि पहले की स्थिति में हैं जिनका जनगणना ब्लाक भी समान है और जनसंख्या भी समान है एवं सम्मिलित क्षेत्र भी समान है। जब जनसंख्या और जनगणना ब्लाक नहीं बदले हैं तो फिर इनकी चौहदी भी नहीं बदली होगी तो फिर इन वार्डो को नया वार्ड नहीं माना जा सकता है और इन सातों वार्डों का आरक्षण चक्रानुक्रम में कराया जाना था, लेकिन इन सात वार्डों को भी नया वार्ड मानते हुए लाटरी के माध्यम से आरक्षण कराया गया है जिस कारण से इन सात वार्डों के साथ-साथ और भी कई सारे वार्ड गलत आरक्षण से प्रभावित हुए हैं।

पूरब टाइम्स रायपुर। वन अधिकार कानून के तहत वन भूमि पर मिले व्यक्तिगत, सामुदायिक तथा वन संसाधन के अधिकारों से बीजापुर जिले के वनवासियों का जीवन संवर रहा है। व्यक्तिगत अधिकार पत्रों के माध्यम से न केवल वे वनभूमि पर बेखौफ खेती कर पा रहे हैं, बल्कि आवास, पशुपालन और कृषि संबंधी योजनाओं का भी लाभ उठा रहे हैं। ग्राम सभाओं के माध्यम से मिले सामुदायिक अधिकारों से वे अब वनों के गौण उत्पादों, चारागाहों, जलाशयों, जैव विविधता एवं अपने पारंपरिक ज्ञान का उपयोग अपने सामुदायिक जीवनस्तर को ऊंचा उठाने के लिए कर पा रहे हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन ने वन अधिकार कानून में अब तक उपेक्षित किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण वन संसाधन के अधिकार के प्रावधान को भी जिले में प्राथमिकता के साथ लागू किया है। इससे उन्हें जल-जंगल-जमीन के संपूर्ण संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्जीवन का अधिकार मिल गया है।  

 मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के निर्देश पर वन अधिकार कानून के तहत छत्तीसगढ़ में वनभूमि पर 13 दिसंबर 2005 के पूर्व से काबिज वनवासियों को वन-अधिकार-पत्रों का वितरण किया जा रहा है। वन अधिकार पत्र धारक वनवासी अपने अधिकार-वाली भूमि का उपयोग कृषि, बाड़ी, आवास अथवा जीवन यापन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कर पा रहे हैं। जिले में कुल 9 हजार 617 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों का वितरण किया गया है। इनमें से 2179 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र दिसंबर 2018 के बाद से अब तक प्रदान किए गए हैं। व्यक्तिगत वनअधिकार पत्रों के माध्यम से यहां के वनवासियों को 13062.20 हेक्टेयर वनभूमि पर अधिकार प्राप्त हुआ है। इस तरह प्रति परिवार औसतन 1.35 हेक्टेयर भूमि का अधिकार प्राप्त हुआ है। इसी तरह 2243 सामुदायिक वन अधिकार पत्रों का वितरण ग्राम सभाओं को किया गया है। सामुदायिक वन अधिकार पत्रों के तहत गौण वन उत्पाद, जलाशय, चारागाह, जैव विविधता, वनवासियों के पारंपरिक ज्ञान इत्यादि से संबंधित अधिकार समुदायों को प्राप्त हुए हैं। इससे 62518 हेक्टेयर भूमि का अधिकार ग्राम सभाओं के माध्यम से समुदाय को मिला है।

 वन अधिकार कानून में अब तक उपेक्षित महत्वपूर्ण प्रावधान वन संसाधन के अधिकार को प्राथमिकता के साथ लागू करते हुए जिले में 283 वन संसाधन के अधिकार प्रदान किए गए हैं। पूर्ववर्ती वर्षों में सामुदायिक वन संसाधन का कोई भी अधिकार वनवासी समुदाय या ग्राम सभाओं को प्रदाय नहीं किया गया था। राज्य सरकार द्वारा मूल निवासियों को उनके जल, जंगल, जमीन के संपूर्ण प्रबंधन, संरक्षण, पुनर्जीवन हेतु संपूर्ण अधिकार पहली बार प्रदान किए गए। जिले में समुदाय को ग्राम सभाओं के माध्यम से मिले 283 सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार के तहत 1,91,550.152 हेक्टेयर वन भूमि सौंपी गई है। इस अधिकार के तहत वनों के संपूर्ण प्रबंधन, उपयोग एवं संरक्षण का अधिकार वनवासी समुदाय को प्राप्त हो गया है। 

पूरब टाइम्स रायपुर। नक्सल प्रभावित बस्तर के सुकमा जिले में आदिवासी किसानों का एक आंदोलन कांग्रेस सरकार की गले की फांस बनता दिख रहा है। प्रदर्शन के बीच गोली चलने के बाद CRPF के कैंप का विरोध करने सिलगेर में जुटे आदिवासियों का समर्थन बढ़ता जा रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन से भी अब इनको समर्थन मिलता दिख रहा है।

किसान आंदोलन के प्रमुख नेता योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन का समर्थन किया है। योगेंद्र ने लिखा, देश के सभी किसान बस्तर गाेलीकांड के शिकार आदिवासी किसानों के साथ हैं। स्वतंत्र मीडिया और मानवाधिकार संगठनों को बिना रोक-टोक सिलगेर जाने दिया जाए। निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले। इससे पहले विभिन्न आदिवासी संगठनों ने भी सिलगेर के आदिवासियों के समर्थन में वर्चुअल प्रदर्शन किया। राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर हस्तक्षेप की मांग की थी। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी इस मामले में खुल कर सरकार की लाइन के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

11-12 मई की रात में CRPF ने कैंप के लिए सिलगेर में बाड़बंदी की। 12 मई की सुबह ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। उस दिन CRPF और DRG के जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। 13 मई को ग्रामीणों ने कैंप के पास ही आंदोलन शुरू किया। 14 मई को ग्रामीणों पर लाठीचार्ज हुआ। कई लोग घायल हुए। 17 मई को भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तभी पुलिस ने गोली चला दी। तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई। भगदड़ में गिरने से एक गर्भवती महिला भी घायल हो गई। 25 मई को उसकी भी मौत हाे गई। ग्रामीणों ने अब वहां मृतकों का एक स्मारक बना दिया। सड़क पर सूखी लकड़ियां रखकर उसे बंद कर दिया है। आंदोलन अब भी जारी है।

इस सारे विरोध के बीच राज्य सरकार अभी वहां पर कैंप लगाने पर अड़ी हुई है। 17 मई को गोलीबारी की पहली रिपोर्ट आने पर पुलिस ने कहा था कि ग्रामीणों की आड़ में नक्सलियों ने कैंप पर हमला किया था। उसके बाद गोली चली। बाद में प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 10-10 हजार रुपए की सहायता राशि दी। पुलिस का कहना है कि सिलगेर और आसपास के ग्रामीण नक्सलियों के दबाव में कैंप का विरोध कर रहे हैं। अभी एक दिन पहले सरकार के प्रवक्ता और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि कैंप का विरोध कौन कर रहा है, यह सभी जानते हैं। सरकार उस सड़क पर अभी 6 कैंप और बनाने जा रही है

पूरब टाइम्स रायपुर।  800 बॉन्डेड डॉक्टर्स (अनुबंधित संविदा चिकित्सक) अब इस्तीफा देने के मूड में हैं। वजह है सरकार की तरफ से लिया गया फैसला। इसके तहत इन डॉक्टर्स को दिया जा रहा 75 हजार का वेतनमान (पे स्केल) घटाकर 55 हजार कर दिया गया है। इस फैसले से डॉक्टर्स नाराज हैं। उनका कहना है कि कोरोना के इस मुश्किल दौर में जहां दूसरे राज्य डॉक्टर्स को प्रोत्साहित कर रहे हैं यहां हमारा हौसला तोड़ने का काम हो रहा है। बॉन्डेड डॉक्टर इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों तक अपनी शिकायत पहुंचा रहे हैं। सरकार भी अब इस ओर ध्यान देकर बीच का रास्ता निकालने पर विचार कर रही है।

अंबेडकर अस्पताल में काम कर रहे 45 बॉन्डेड डॉक्टर्स को लेकर कहा गया है कि उन्हें संविदा चिकित्सक की तरह दिए जा रहे 75 हजार रुपए के वेतनमान की जगह 55 हजार रुपए ही दिए जाएंगे। यहां काम करने वाले बॉन्डेड डॉक्टर पुष्पेंद्र ने बताया कि कुछ महीने पहले हमारे आंदोलन की वजह से हमें 75 हजार का वेतनमान दिया जा रहा था। मगर अब इस पर रोक लगाने का आदेश आया है। हमें संविदा चिकित्सक नहीं माना जा रहा। अब इस मामले में प्रदेशभर के कुल 800 बॉन्डेड डॉक्टर्स हमारे साथ हैं। अगर यह आदेश वापस नहीं लिया जाता तो हम सभी इस्तीफा दे देंगे।

डॉ. पुष्पेंद्र ने बताया कि सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि वो संविदा डॉक्टर्स को 75 हजार वेतनमान देंगे। जबकि, यूनिवर्सिटी में जब NMC/MCI की ओर से निरीक्षण होता है तब बॉन्डेड ​​​डॉक्टर्स को भी संविदा डॉक्टर के पद में दिखाते हुए यूनिवर्सिटी की मान्यता प्राप्त की जाती है। पिछले डेढ़ साल से हम इस महामारी के दौर में बिना रुके अपनी सेवाएं दे रहे हैं, न कोई प्रोत्साहन राशि मिलती है न ही कोई छुट्‌टी।

पूरब  टाइम्स  रायपुर। प्रदेश के वन, पर्यावरण और परिवहन मंत्री  मोहम्मद अकबर ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कबीरधाम जिले के नगर पंचायत बोड़ला में निवासरत लोगों को आवासीय भूमि का पट्टा देने के कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने सर्वे के अनुसार पंचायत के वार्डों में रहने वाले सभी पात्र हितग्राहियों को तत्परता से पट्टा वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 
    वन मंत्री  मोहम्मद अकबर ने आज राजधानी के शंकर नगर स्थित अपने निवास कार्यालय में वी.सी. के द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप नगर पंचायत बोड़ला के 15 वार्डों में निवास करने वाले पात्र हितग्राहियों को आवासीय भूमि का पट्टा दिए जाने के प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने नगर पंचायत के वार्डों में धास भूमि, सुरक्षित आबादी, घोषित आबादी, प्रचलित आबादी, निजी भूमि, रास्ता और तालाब तथा वन भूमि को छोड़कर शेष भूमि में पात्र हितग्राहियों को आवासी भूमि का पट्टा देने की कार्यवाही शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश क्षेत्र के एस.डी.एम., सी.एम.ओ. नगर पालिका को दिए। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष, वार्ड के पार्षद एवं एल्डरमेन से उनके वार्डों के लोगों को आवासीय भूमि का पट्टा दिए जाने के संबंध में चर्चा भी किए। उन्होंने इस दौरान नगर पंचायत के सभी वार्डों की स्वच्छता और नियमित साफ-सफाई आदि व्यवस्था के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर  रमेश शर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

पूरब  टाइम्स रायपुर। बस्तर के नक्सल प्रभावित सुकमा और बीजापुर जिलों में सुरक्षा बलों और स्थानीय आदिवासी समुदाय के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। आदिवासी, सिलगेर में CRPF कैम्प खोले जाने का विरोध कर रहे हैं। वहां हुई गोलीबारी मेें 3 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी सरकार वहां कैम्प बनाए रखने को लेकर अड़ी हुई है। मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा है कि सरकार उसी इलाके में छह और कैम्प बनाएगी।

राज्य मंत्रिपरिषद के प्रवक्ता और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा, "सिलगेर मामले में कैम्प बनाया जा रहा था। वहां किन लोगों के द्वारा विरोध किया गया यह बहुत स्पष्ट है। केवल सिलगेर का मामला नहीं है। आने वाले दिनों में हम उसके आगे के रास्ते में 6 और कैम्प बना रहे हैं।" कृषि मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि तनाव अभी खत्म नहीं होगा। सरकार एंटी नक्सल मोर्चे पर मजबूत घेराबंदी और सड़कों की सुरक्षा के लिए ऐसे कैम्प जरूरी बता रही है। पुलिस का कहना है कि सिलगेर और आसपास के गांवों में आदिवासी नक्सलियों के प्रभाव में हैं। उन्हीं के कहने पर उस इलाके में कैम्प का विरोध किया जा रहा है। पिछले 18 दिन से वहां ग्रामीण विरोध करने जुट रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सुकमा जिले का सिलगेर गांव पहुंच विहीन है। यहां से बीजापुर के तर्रेम तक एक सड़क बन रही है। इस सड़क का आगे भी विस्तार होना है। नक्सली प्रभाव वाले इलाके में इस सड़क की सुरक्षा के लिए CRPF के इन कैम्प की महत्वपूर्ण भूमिका हाे सकती है। सरकार को लगता है कि अगर कैम्प नहीं बन पाए तो सड़क बनाना भी असंभव हो जाएगा।

11-12 मई की रात में CRPF ने कैम्प के लिए सिलगेर में बाड़बंदी की। 12 मई की सुबह ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। उस दिन CRPF और DRG के जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। 13 मई को ग्रामीणों ने कैम्प के पास ही आंदोलन शुरू किया। 14 मई को ग्रामीणों पर लाठीचार्ज हुआ। कई लोग घायल हुए। 17 मई को भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तभी पुलिस ने गोली चला दी। तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई। भगदड़ में गिरने से एक गर्भवती महिला साेमली भी घायल हो गई। 25 मई को उसकी भी मौत हाे गई। प्रदर्शन अब भी जारी है। सर्व आदिवासी समाज समेत दर्जन भर से अधिक संगठनों ने स्थानीय लोगों के समर्थन में कल प्रदर्शन किया। राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की जा रही है।

पूरब टाइम्स रायपुर। भारतीय जनता पार्टी माना मंडल की वर्चुअल बैठक हुई। जिला प्रभारी खूबचंद पारख ने कहा कि अपने मंडल क्षेत्र में निवासरत कोरोना से संक्रमित हुए नागरिकों की सूची तैयार की जाए। साथ ही उन्हें किस प्रकार से मदद की जा सकती है, इस पर कार्ययोजना बनाई जाए। बूथ कमेटी एवं शक्ति केंद्र के शीघ्र गठन पर चर्चा की। मोदी सरकार की सात वर्षों की उपलब्धि को लेकर मंडल क्षेत्र के घर-घर पहुंचने के अभियान की शुरुआत होगी।

जिला अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी की अध्यक्षता में बैठक हुई। कार्यक्रम के प्रारंभ में मंडल अध्यक्ष रविंद्र सिंह ठाकुर द्वारा कोरोना काल में मंडल कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए कार्यों की जानकारी दी। पूर्व विधायक नंद कुमार साहू ने कहा कि कोरोना के संक्रमण काल में हम सभी को मास्क एवं सैनिटाइजर का उपयोग करके सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाना है।

जिला अध्यक्ष श्रीचंद सुंदरानी ने भाजपा माना मंडल द्वारा जिले से निर्देशित सभी कार्यक्रम को अच्छी तरह से संपादित करने पर पूरे मंडल को बधाई देते हुए कहा कि सभी कार्यकर्ताओं को 2023 के विधानसभा चुनाव की अभी से तैयारी प्रारंभ करनी है। जिला महामंत्री ओंकार बैस ने कहा कि पूरे जिले में सभी मोर्चा एवं प्रकोष्ठ का गठन पूरा हो चुका है। 31 मई को आयोजित सेवा कार्य के लिए प्रभारियों की सूची तैयार कर ली गई है।

पूरब टाइम्स रायपुर। सोशल मीडिया पर टूलकिट विवाद अभी थमा भी नही है कि कांग्रेस ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और भाजपा पर जमीनी हमला बोल दिया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव, विधायक और संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने केंद्र सरकार से 15 सवालों का एक पाेस्टर जारी किया है। उन्होंने कहा है, वोटर का असली टूलकिट यही है। अपने निवास कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में विकास उपाध्याय ने कहा, देश के जिन मतदाताओं ने अपना वोट देकर भाजपा को सत्ता तक पहुंचाया। नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनाया। वही वोटर आज सवाल पूछने को मजबूर हैं। विकास ने कहा, मोदी जी के लिए कभी चौकीदार का जुमला बड़ा मजेदार हुआ करता था। अब उसे बोलना छोड़ दिए हैं पर चौकीदार बनकर देश के लुटेरों को विदेश भगाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। 2000 करोड़ रुपए खर्च कर पूरी दुनिया घूम ली, यह कहकर कि विदेशों से पूंजी लाएंगे पर आया कुछ नहीं। भाजपा सरकार ने काॅर्पोरेट जगत का 5 लाख 55 हजार करोड़ रुपया माफ कर दिया और देश के किसानों को आंदोलन करने छोड़ दिया। 

विकास उपाध्याय ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी टीम ने सुनियोजित तरीके से सोशल मीडिया के जरिये अपनी खुद की एक छवि गढ़ी है। धरातल पर कोई काम हो न हो, वे अपनी बनावटी छवि चमकाने सफल रहे। यहदेश के साथ एक बड़ा षड़यंत्र था। परन्तु मोदी सरकार की नाकामियों के चलते कभी भाजपा की बड़ी ताकत रही सोशल मीडिया अब कमजोर कड़ी बन गई है। आज उसी सोशल मीडिया पर उस बनावटी छवि को ध्वस्त होता देश देख रहा है।

विकास उपाध्याय ने कहा, जिस गंगा नदी के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोगों की भावना से खेले। उसी गंगा को उन्होंने अपनी नाकामियों की लाशें बिछाकर अपवित्र कर दिया। देश में महामारी से लोग मर रहे थे और ये सत्ता हथियाने के लिए लाखों की भीड़ जुटाकर सभा लेते रहे। जब भारत सहित पूरे विश्व में हो रहे अपनी बदनामी को देखा तो इससे बचने महामारी का प्रबंधन राज्यों पर छोड़ दिया।


संसदीय सचिव विकास उपाध्याय ने बताया, केंद्र सरकार की नाकामियों को वोटरों के बीच ले जाने के लिए वे पूरे प्रदेश का दौरा करने वाले हैं। इसका खाका तैयार है। वे पूरे प्रदेश का दौरा कर कांग्रेस के युवा साथियों को सक्रिय करेंगे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को एक-एक मतदाता से संपर्क कर उनके भाजपा को दिए वोट का किस तरह से दुरुपयोग किया जा रहा है बताया जाएगा। साथ ही राज्य सरकार की उपलब्धियों को लोगों के बीच प्रचारित कररने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।

पूरब टाइम्स  रायपुर। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के निर्देशानुसार 28 मई की सुबह से ही खनिज अधिकारियों की टीम राज्य के अलग-अलग हिस्सों में लौह अयस्क के परिवहन में रॉयल्टी पर्ची के दुरुपयोग, ओवरलोडिंग, लम्पस फाइन और अन्य मामलों की जांच और ताबड़तोड़ कार्रवाई में जुटी है। खनिज अधिकारियों की टीम ने लौह अयस्क परिवहन में लगे 105 वाहनों की जांच की है, जिसमें से 11 वाहनों को जब्त कर संबंधित इलाकों के थाने को सुपुर्द कर दिया गया है । जांच के दौरान बालोद जिले में भिलाई स्टील प्लांट को आवंटित खदान की लम्पस फाइन की जानकारी न मिलने के मामले में बीएसपी को नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों की टीम कांकेर, राजनांदगांव, बालोद, जगदलपुर, दंतेवाड़ा और रायपुर जिले में जगह-जगह जांच पड़ताल में जुटी हुई है।

 खनिज विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य के कांकेर, राजनांदगांव, बालोद, जगदलपुर, दंतेवाड़ा तथा रायपुर के द्वारा विभिन्न स्थानों पर प्रदेश स्तर के खनिज अधिकारियों का दल ने लौह अयस्क परिवहन में रायल्टी पर्ची के दुरूपयोग, ओवरलोड, लम्पस एवं फाईन की जांच तथा खनिज के ग्रेड (रासायनिक विश्लेषण) की जांच की। संयुक्त संचालक केन्द्रीय उड़नदस्ता के नेतृत्व में विभिन्न जिलों के खनिज अधिकारियों के दल ने सघन जांच की। इस दल में लौह अयस्क के ग्रेड की जांच हेतु क्षेत्रीय कार्यालय बिलासपुर, जदगलपुर तथा रायपुर के जियोलॉजिस्ट को भी शामिल किया गया है । टीम ने भानुप्रतापपुर क्षेत्र में 31 वाहन, चारामा क्षेत्र से 9, जगदलपुर से 10, रायपुर धमतरी रोड़ पर 14, सिलतरा रायपुर क्षेत्र से 5 तथा राजनांदगांव जिले में 7 इस प्रकार कुल 74 वाहनों से सेम्पल लिए है जिसे जांच के लिए केन्द्रीय प्रयोगशाला रायपुर भेजा गया है। खनिज अधिकारियों की टीम ने दंतेवाड़ा के एनएमडीसी से परिवहन कर रहे 30 वाहनों तथा जगदलपुर रेल्वे साईडिंग क्षेत्र में 6 वाहनों की जांच भी की। एनएमडीसी बचेली क्षेत्र में एनएमडीसी द्वारा तौल कराये गये मात्रा तथा रेल्वे बैगन से परिवहन कर मात्रा की क्रास चेकिंग की कार्यवाही अभी जारी है ।

 कांकेर जिले में स्वीकृत विभिन्न निजी कंपनियों के लौह अयस्क परिवहन के 70 वाहनों की जांच की गई । जिनमें से 07 वाहनों को ओवरलोड, लम्पस फाईन में भिन्नता तथा खनिज के ग्रेड में अन्तर होने के शंका के चलते जब्त कर पुलिस की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। बालोद जिले में भिलाई स्टील प्लांट को स्वीकृत खदान में लम्पस फाईन से संबंधित जानकारी प्रस्तुत करने हेतु नोटिस जारी किया गया। रायपुर जिले के सिलतरा एवं उरला क्षेत्र में विभिन्न संयंत्रों को प्रदाय किये जा रहे लौह अयस्क की जांच में 04 वाहनों को जब्त कर जांच हेतु उरला थाने को सुपुर्द कर दिया गया है। इस प्रकार उक्त जिलों में अब तक कुल 105 वाहनों की जांच की गई है, जिसमें से कुल 11 वाहनों की जब्ती की कार्रवाई की गई है । खनिज अधिकारियों टीम अभी भी जांच-पड़ताल में जुटी है। 

पूरब टाइम्स रायपुर।  छत्तीसगढ़ के भारतीय जनता पार्टी की प्रभारी डी पुरंदेश्वरी का एक ट्वीट कांग्रेस को रास नहीं आ रहा। इसमें राहुल गांधी की हंसती तस्वीर है, कांग्रेस का लोगो है और लिखा है कि छत्तीसगढ़ में 30% वैक्सीन बर्बाद हो गई। पुरंदेश्वरी ने आगे लिखा कि पहले तो रो रहे थे, फिर वैक्सीन मिली तो बर्बाद करने लगे। ये कांग्रेस की सरकार वाले राज्यों की आदत बन चुकी है।

डी. पुंदेश्वरी के इस ट्वीट पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि झूठ फैलाना, भ्रम पैदा करना, आकड़ों को छिपाना भाजपा का चरित्र है। मोहन मरकाम ने कहा है कि प्रदेश में कुल खराब हुई वैक्सीन का औसत 1% से भी कम 0.95% है जो कि राष्ट्रीय औसत से आधे से भी कम है। मरकाम ने राज्य के आंकड़ों पर कहा कि 72 लाख 90 हजार 210 कुल वैक्सीन मिली। इसमें से 61 लाख 99 हजार 637 इस्तेमाल में है, 10 लाख 31 हजार 230 का स्टॉक है। 59 हजार 343 ही वेस्ट हुई है जो कि 0.95% है। गलत बयान देने के लिए डी पुरंदेश्वरी को माफी मांगनी चाहिए।

पूरब टाइम्स रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना टीकाकरण के टीकों के खराब होने संबंधी आंकड़ों पर विवाद जारी है। आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टीकों के खराब होने से संबंधी केंद्र सरकार के आंकड़ों को भ्रामक बताया। उन्होंने कहा, इस मामले में केंद्र सरकार राजनीति कर रही है। रायपुर के पं. जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज परिसर में संवाददाताओं से बातचीत में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, केंद्र सरकार को ऐसे भ्रामक आंकड़े नहीं देने चाहिए। हमार सारी रिपोर्ट उनके पास जा रही है। रजिस्ट्रेशन के बाद जो वैक्सीनेशन नहीं करा रहे हैं उनको कहा जा रहा है कि डोज खराब हो गई। जबकि यहां केंद्र सरकार की गाइडलाइन से बहुत कम वेस्टेज हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा, हमने अपने यहां पंजीयन के लिए जो CG Teeka एप बनाया है उसे वे नहीं मान रहे हैं, इस वजह से भी वे आंकड़े ज्यादा बता रहे हैं। इस प्रकार से वे भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। केंद्र सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए। छत्तीसगढ़ में टीकाकरण का काम बहुत अच्छा चल रहा है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, केंद्र सरकार में अभी ऐसा काम हो रहा है कि दाहिना हाथ क्या कर रहा है यह बाएं को पता नहीं है। हमें लिखित सूचना मिलती है कि इस महीने कोई वैक्सीन नहीं मिलेगी। सूचना के दूसरे दिन हमारे पास दो लाख डोज की आपूर्ति पहुंच जाती है। कहा जाता है कि यह 18 से 44 साल वालों के लिए है। फिर कहा जाता है कि यह 45 वर्ष से ऊपर वालों के लिए है।

वैक्सीन पर ताजा विवाद क्या है

पिछले दिनों केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में प्रजेंटेशन के दौरान केंद्रीय मंत्रालय छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ में 50 प्रतिशत टीकों का वेस्टेज दिखाया। इसको लेकर भाजपा हमलावर है। इधर राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर कहा है, उनके यहां वैक्सीन की बर्बादी एक प्रतिशत से भी कम है। मंत्रालय अपना डेटा ठीक कर ले। स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव और मुख्यमंत्री सचिवालय ने वैक्सीन का हिसाब सार्वजनिक कर बताया, उनका नुकसान मानक से बेहद कम है। केंद्र सरकार गलत डाटा प्रदर्शित कर रही है।

पूरब टाइम्स रायपुर.मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज सवेरे रायपुर के पंडित जवाहर लाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय पहुंचकर कोविड-19 से बचाव के टीके की दूसरी खुराक ली। उन्होने टीका लगवाने के बाद डॉक्टरों से टीकाकरण के बाद रखी जाने वाली सावधानियों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर प्रदेशवासियों से अपील की है कि वे कोरोना से बचाव के लिए अपनी बारी आने पर टीका अवश्य लगवाएं। जिन लोगों ने टीके की पहली डोज लगवा ली है, वे निर्धारित समय में दूसरी डोज लगवाएं, क्योंकि टीका ही कोरोना से बचाव का एक कारगर उपाय है। टीका लगवाने के बाद भी सभी लोग कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर का पालन करें । मास्क लगाएं, समय-समय पर हाथ की सफाई करें और फिजिकल डिस्टेंस बनाए रखें। भीड़-भाड़ में जाने से बचें । मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी के सहयोग व परिश्रम से छत्तीसगढ़ में कोरोना की दूसरी लहर को नियंत्रित करने में काफी हद तक सफलता मिली है। संक्रमण की दर वर्तमान में 5 प्रतिशत के नीचे आ गई है। जनता की सहूलियत के लिए लॉक डाउन में कुछ छूट दी गई है। सभी लोग सावधानी को अपनाएं जिससे कोरोना के खिलाफ लड़ाई जीती जा सके।

मुख्यमंत्री श्री बघेल को  दिपेश्वरी चंद्राकर ने टीका लगाया । इस अवसर पर गृह निर्माण मण्डल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा और संसदीय सचिव श्री विकास उपाध्याय, चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक डॉ. आर. के. सिंह, कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  अजय यादव, रायपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विष्णु दत्त, डॉ. भीमराव अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विनीत जैन और मुख्य चिकित्सा एवँ स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मीरा बघेल, स्टॉफ नर्स सुश्री कविता निराला उपस्थित थी।

पूरबटाइम्स रायपुर।  18 से 44 वर्ष आयु वर्ग के टीकाकरण पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। वैक्सीन का दूसरा डोज लगने की तारीख नजदीक आ गई है। वहीं सरकार के स्टॉक में वैक्सीन है ही नहीं। अगर समय से वैक्सीन नहीं मिली तो लोगों का पहला डोज लेना भी बेकार हो जाएगा। दरअसल राज्य सरकार ने अपने खर्च पर एक मई से 18 + का टीकाकरण शुरू किया था। पहले दिन कोवैक्सीन की 1.50 लाख डोज आई थी। पहले दिन 1945 लोगों को टीका लगाया गया। दूसरे दिन 8 हजार 579 लोगों को कोवैक्सीन दिया गया। शुरुआती दिनों में ही उस खेप से एक लाख 46 हजार 591 लोगों को टीका लगा दिया गया। दूसरी डोज के साथ जुड़े संकट के लिए ही 3 हजार 409 डोज बचा लिया गया।

कोवैक्सीन के उत्पादक भारत बायोटेक ने मई महीने में 3 लाख डोज की आपूर्ति की जानकारी दी थी, लेकिन एक मई के बाद उनकी कोई खेप नहीं पहुंची। डॉक्टरों के मुताबिक कोवैक्सीन की पहली खुराक लेने के 28 दिन बाद दूसरी खुराक लगाई जानी है। इस मान से जिन लोगों ने एक मई को कोवैक्सीन का टीका लगवाया था, उन्हें 29 मई को दूसरा टीका लगना है। राज्य टीकाकरण अधिकारी डॉ. अमर सिंह ठाकुर ने बताया, राज्य वैक्सीन भंडार में बुधवार सुबह तक कोविशील्ड के 40 हजार डोज और कोवैक्सीन के करीब 4 हजार डोज बचे थे। उसमें से कोविशील्ड को अधिकतर को जिलों में भेज दिया गया। दोनों टीका उत्पादकों ने अभी अगली खेप की कोई सूचना नहीं दी है। वहीं 45 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लिए केंद्र सरकार कोटे की 2 लाख डोज वैक्सीन आज रायपुर पहुंच रही है। यह भी कोविशील्ड वैक्सीन होगी।


पूरब टाइम्स रायपुर। एलोपैथी चिकित्सा पद्धति और कोरोना ड्यूटी के दौरान दिवंगत डॉक्टरों का मजाक उड़ाने वाले बयानों पर बाबा रामदेव अब घिरने लगे हैं। छत्तीसगढ़ के रायपुर में उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा सकती है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की रायपुर इकाई उनके खिलाफ लिखित शिकायत लेकर शाम को थाने पहुंचेगी। IMA के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेश सिन्हा ने बताया, "बाबा रामदेव के खिलाफ FIR दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

 फिलहाल रायपुर जिला इकाई की ओर से आज शाम को सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई जाएगी। डॉ. सिन्हा ने बताया, ऐसी शिकायतें दूसरे जिलों में भी कराई जा सकती हैं।" वहीं IMA के रायपुर इकाई के अध्यक्ष डॉ. विकास अग्रवाल ने बताया है, आज शाम 5.30 बजे एसोसिएशन के चिकित्सक अपने पदाधिकारियों सहित सिविल लाइंस थाने में बाबा रामदेव के खिलाफ FIR करवाने के लिए एकत्रित होंगे।

पिछले कुछ दिनों से एलोपैथी चिकित्सा पद्धति, मॉडर्न मेडिसिन और कोरोना वैक्सीन के खिलाफ बाबा रामदेव के बयानों ने डॉक्टरों को भड़का दिया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और दूसरे संगठन लगातार बाबा की हरकतों का विरोध कर रहे हैं। अब बाबा के खिलाफ महामारी के दौरान अफवाह फैलाने, डॉक्टरों को अपमानित करने, घृणा फैलाने और वैक्सीनेशन अभियान को विफल करने जैसे मामलों में FIR दर्ज कराने की तैयारी हो रही है।

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन उत्तराखंड ने बाबा रामदेव पर 1000 करोड़ रुपए की मानहानि का नोटिस भेजा है। यह नोटिस सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे बाबा रामदेव के उस वीडियो के आधार पर दिया गया है, जिसमें बाबा एलोपैथी को बकवास और दिवालिया साइंस कहते दिख रहे हैं। एसोसिएशन का कहना है कि रामदेव ने अगले 15 दिनों में वीडियो और लिखित फार्मेट में माफी नहीं मांगते तो उनपर 1000 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का केस करेंगे।

पूरब टाइम्स रायपुर . दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन के छह महीने पूरे होने और केंद्र में भाजपा की सरकार के 7 वर्ष पूरा होने पर किसानों ने काला दिवस मनाया। छत्तीसगढ़ के किसानों ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ गुस्से का इजहार किया। छत्तीसगढ़ किसान मजदूर महासंघ और घटक संगठनों ने जगह-जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कृषि मत्री नरेंद्र सिंह तोमर का पुतला जलाया। वहीं खेतों में मजदूरों ने सिर पर काला कपड़ा बांधा, घरों और पंचायत भवनों पर विरोध का काला झंडा लगाया गया। नवा रायपुर क्षेत्र के गांवों में भी विरोध प्रदर्शन देखा गया। रायपुर में भी किसान आंदोलन से सहानुभूति रखने वाले लोगों और संगठनों ने अपने घरों-कार्यालयों और गाड़ियों पर काला झंडा दिखाकर आंदोलन से एकजुटता दिखाने की कोशिश की।

छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन से संबद्ध 20 अन्य संगठनों ने प्रदेश के कोरबा, राजनांदगांव, सूरजपुर, सरगुजा, दुर्ग, कोरिया, बालोद, रायगढ़, कांकेर, जांजगीर-चांपा, मरवाही, बिलासपुर, धमतरी, जशपुर, बलौदा बाजार व बस्तर में प्रदर्शन किया। पांच-पांच के समूह में प्रदर्शनकारियों ने मोदी सरकार का पुतला फूंका। अपने घरों और गाड़ियों पर विरोध का काला झंडा लगाया। छत्तीसगढ़ किसान आंदोलन के संयोजक सुदेश टीकम और छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष संजय पराते ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जनता ने इन कानूनों के खिलाफ जो तीखा प्रतिवाद दर्ज किया है, उससे स्पष्ट है कि मोदी सरकार के पास इन जनविरोधी कानूनों को निरस्त करने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है।


किसान संगठनों ने कहा, केंद्र सरकार 5 जून 2020 को अध्यादेश के जरिए एक किसान और कृषि विरोधी कानून थोपा है। उसके खिलाफ किसानों के आंदोलन को छह महीने हो गए। अब मोदी सरकार रेलवे, बैंक, बीमा, भेल, विमान कंपनियों जैसे सार्वजनिक उद्यमों को निजी हाथों में बेच रही है। कॉरपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए ही श्रम कानूनों में संशोधन कर मजदूर विरोधी चार कानून बनाए गए।

किसान संगठनों ने कहा, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार कोरोना जैसी महामारी के पहले चरण में नमस्ते ट्रंप किया और दूसरे चरण में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बहाने कोरोना का संक्रमण बढ़ाया। देश के लाखों लोग कोरोना से अपनी जान गवां चुके हैं, आज भी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई है। उसके बावजूद सरकार करोड़ो रुपए का अनावश्यक खर्च कर सेंट्रल विस्टा बनाने में लगी हुई है।


कांग्रेस समेत 12 राजनैतिक दलों ने संयुक्त किसान मोर्चा के इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा को सौंपे समर्थन पत्र में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, जनता दल-एस प्रमुख एचडी देवगौड़ा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी, शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे, डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन, झारखंड मुक्ति मोर्चा प्रमुख हेमंत सोरेन, नेशनल कांफ्रेंस प्रमुख फारूख अब्दुला, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव, सीपीआई प्रमुख डी. राजा, मार्क्सवादी कम्यूनिष्ट पार्टी प्रमुख सीताराम येचुरी के हस्ताक्षर हैं।

पूरब टाइम्स रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके आज अखिल विश्व गायत्री परिवार शांति कुंज हरिद्वार के तत्वावधान में राजभवन में देश एवं प्रदेश से कोरोना संक्रमण से  मुक्ति के लिए आयोजित गायत्री यज्ञ में शामिल हुई। राज्यपाल ने इस अवसर पर मां गायत्री की पूजा-अर्चना करते हुए देश एवं प्रदेश को कोरोना संक्रमण से मुक्त करने, पर्यावरण संवर्धन एवं प्रदेशवासियों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना की।

संस्था के छत्तीसगढ़ जोन समन्वयक  दिलीप पाणिग्रही ने बताया कि पूरे विश्व, देश एवं प्रदेश में आई कोरोना संक्रमण से मुक्ति के लिए तथा लोक मंगल की कामना से पूरे विश्व के घरों में गायत्री यज्ञ और उपासना की गई। पूरे विश्व में करीब 2 करोड़ से अधिक, छत्तीसगढ में करीब 2 लाख और रायपुर में करीब 40 हजार घरों में आमजनों द्वारा गायत्री यज्ञ किया गया। इसका उद्देश्य कोरोना के वैश्विक संकट से मुक्ति, कोरोना से दिवंगत आत्माओं की शांति व सद्गति, कोरोना से अस्वस्थ परिजनों के स्वस्थ हेतु एवं घर परिवार का वातावरण परिशोधन है।

पूरब टाइम्स रायपुर। कलेक्टर ने जिले में कंटेनमेंट जोन को राहत देते हुए सभी दुकानों-शॉपिंग मॉल सहित ठेले-खोमचे वालों को भी कारोबार की इजाजत दे दी है। लेकिन आज सुबह रायपुर नगर निगम का के उड़न दस्ते ने शास्त्री बाजार के पास ठेले पर फल-सब्जी बेचने वालों को खदेड़ दिया। उनका तराजू छीन लिया। शास्त्री बाजार के स्थायी कारोबारियों ने उड़न दस्ते को घेरा तो टीम बैकफुट पर आई। कहा- हम तो यहां मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करा रहे हैं।

बाजार खुलने के आदेश के बाद आज सुबह शास्त्री बाजार की दुकानें नहीं खुलीं। मुख्य बाजार के बाहर सड़क पर पहले की तरह फल और सब्जी वालों ने ठेले लगाकर कारोबार शुरू किया। इसी बीच नगर निगम का उड़न दस्ता वहां पहुंचा। उनके साथ पुलिस भी थी। इन लोगों ने पहले लाउड स्पीकर के जरिए मास्क नहीं लगाने वालों को चेतावनी दी। उसके बाद ठेले वालों को वहां से भगाना शुरू कर दिया। ठेले वाले उनसे विनती करते रहे कि बहुत दिनों बाद बाजार खुल रहा है, कुछ कारोबार हो जाएगा, लेकिन उड़न दस्ते के कर्मचारी नहीं माने। थोड़ी देर में चेतावनी धमकी में बदल गई। ठेले वालों को बहस करने पर पिटाई की धमकी दी गई। उसके बाद निगम अमले ने वहां से जा रहे ठेले वालों का तराजू छीनना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में वहां से ठेले वालों को भगा दिया गया। यह देखकर शास्त्री बाजार के स्थायी दुकानदारों ने उड़न दस्ते को घेर लिया। टीम के सुर मद्धम पड़े। कहा- हम यहां दुकान बंद नहीं करा रहे हैं। बस मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करा रहे हैं।


लॉकडाउन छूट के आदेशों में कन्फ्यूजन की वजह से शास्त्री बाजार की दुकानें सुबह नहीं खुलीं। नगर निगम के उड़ने दस्ते की कार्रवाई ने भी यह भ्रम बढ़ाया। बाद में नगर निगम के अधिकारियों ने सब्जी विक्रेताओं के संगठन पदाधिकारियों से बात कर उनका भ्रम दूर किया। नगर निगम के अपर आयुक्त पुलक भट्‌टाचार्य ने बताया, फल-सब्जी कारोबार के लिए भी सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक कारोबार की छूट है। उन्हें मास्क लगाए रखना है। खरीदार को भी मास्क लगाए रखना है। भीड़ नहीं होने देना है।

पूरब टाइम्स रायपुर। कोविड-19 से जुड़े अनुसंधान में छत्तीसगढ़ के चिकित्सा वैज्ञानिकों को बड़ी कामयाबी मिलती दिख रही है। रायपुर के जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज और डॉ. भीमराव आम्बेडकर अस्पताल स्थित मल्टीडिसीप्लिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (MRU) ने सार्स सीओवी-2 (SARS CoV 2) वायरस के सीरो-जांच व निगरानी के लिए एक जांच किट बना ली है। यह सार्स सीओवी-2 वायरस यानी कोरोना के विरुद्ध शरीर में बनने वाले न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी (neutralizing antibody) का पता आसानी से लगा लेगा। मतलब यह जांच किट यह बताएगा कि कोरोना वायरस से लड़ने के लिए हमारा शरीर कितना तैयार है।

मल्टीडिसीप्लिनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट (MRU) के प्रमुख रिसर्च साइंटिस्ट डॉ. जगन्नाथ पाल के नेतृत्व में इस किट को तैयार करने वाली टीम में जूनियर साइंटिस्ट डॉ. योगिता राजपूत भी शामिल हैं। बताया गया, यह रिसर्च अपने अंतिम चरण में है और जब यह रिसर्च इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) द्वारा स्वीकृत हो जाएगा तो क्लीनिकों में एंटीबॉडी आधारित इस जांच किट का उपयोग किया जा सकेगा। संभवतः यह कोविड-19 के खिलाफ न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी का पता लगाने के लिए भारत में दूसरा स्वदेशी डायग्नोस्टिक व सबसे कम लागत वाला टेस्टिंग किट हाेगा। अब तक MRU में तकनीक विकसित की जा चुकी है। कुछ सीरम नमूनों पर प्रारंभिक परीक्षण किए गए हैं। इनमें ऐसे लोगों के नमूने थे जिन्हें कोरोना का टीका लगाया गया था अथवा पहले कोविड 19 से पीड़ित थे। अभी किट का विभिन्न मानकों पर मूल्यांकन किया जा रहा है। इसके बाद इस टेस्टिंग किट को ICMR के पास सत्यापन और अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा।

यह एक ऐसी एंटीबॉडी है जो कोरोना वायरस को निष्प्रभावी करने के लिये शरीर द्वारा विकसित किया जाता है। यह एंटीबॉडी वायरस को मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने से पहले बेअसर कर देता है। इस तरह शरीर संक्रमण से बच जाता है। इस एंटीबॉडी के कारण कोशिका का जैविक प्रभाव बाधित नहीं होता और मरीजों में सार्स सीओवी -2 वायरस के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रतिरक्षा तंत्र का निर्माण होता है।

कोरोना का टीकाकरण शुरू हो चुका है। लेकिन कोविड-19 संक्रमण या टीकाकरण के प्रति प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया अलग-अलग व्यक्तियों में समान नहीं हो सकती। देखने में आया है कि टीकाकरण करा चुके कई लोग दोबारा संक्रमित हुए हैं। इसलिए कोविड -19 संक्रमण या टीकाकरण के बाद प्लाज्मा में न्यूट्रलाइजिंग एंटीबॉडी का पता लगाना बहुत जरूरी है। इससे यह पता चलेगा कि किसके पुनः संक्रमित होने की संभावना हो सकती है।

पूरब टाइम्स रायपुर। भाजपा नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुआ टूलकिट विवाद गरमा गया है। अपने दिल्ली ऑफिस पर छापे के बाद ट्विटर ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉक्टर रमन सिंह के टूलकिट ट्वीट को मैनिपुलेटेड मीडिया बता दिया है। यानी ऐसी सामग्री जिसे तोड़-मरोड़कर पोस्ट किया गया है। ट्विटर के इस कदम के बाद कांग्रेस भाजपा नेताओं पर हमलावर है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंगलवार सुबह अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लिखा कि ट्विटर ने डॉक्टर रमन सिंह के कथित टूलकिट को भी मैनिपुलेटेड मीडिया बता दिया है। सांच को आंच नहीं! हजार बार झूठ बोलने से झूठ सच हो जाता है। ऐसी संघ दीक्षा अब काम न आएगी। 

कांग्रेस पहले दिन से भाजपा नेताओं की ओर से साझा किए जा रहे कथित टूलकिट को फर्जी बताती रही है। NSUI के प्रदेश अध्यक्ष आकाश शर्मा की शिकायत पर रायपुर की सिविल लाइन पुलिस ने डॉक्टर रमन सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। FIR में आरोप लगाया गया है कि समाज में घृणा फैलाने के इरादे से अफवाह फैलाने, फर्जी दस्तावेजों से किसी को नीचा दिखाने की कोशिश की गई है। वहीं, भाजपा इस FIR के खिलाफ आंदोलन कर रही है। सोमवार को डॉक्टर रमन सिंह सहित पूरी भाजपा ने रायपुर सिविल लाइन थाना के बाहर धरना भी दिया।

पूरब टाइम्स रायपुर। शहर लॉकडाउन के बीच अनलॉक हो गया है। मंगलवार को सभी बड़े बाजारों की सभी दुकानें खोल दी गईं, शनिवार तक लेफ्ट-राइट का सिस्टम चल रहा था। सोमवार की रात सरकार ने फैसला लिया कि 8% से कम संक्रमण की दर वाले शहरों को छूट दे दी जाए। पिछले 1 सप्ताह से रायपुर में 300 से 150 के बीच ही नए संक्रमित मिल रहे हैं। कोरोना पर स्थिति को काबू में होता देख स्थानीय प्रशासन ने 31 मई को पूरे हो रहे लॉकडाउन के 6 दिन पहले ही बाजार पूरी तरह से खोलने का फैसला कर लिया। प्रशासन के इस फैसले से व्यापारियों को राहत मिली है। मंगलवार को मालवीय रोड, सदर बाजार, पंडरी, गोल बाजार पूरी तरह से खुल गया। इन इलाकों में लोगों की भीड़ भी देखी गई।

9 अप्रैल से रायपुर पूरी तरह से लॉक रहा है। पिछले 15 दिनों में संक्रमण की रफ्तार भी पूरे प्रदेश में धीमी पड़ी है। जरूरत का सामान लेने सड़कों की दोनों तरफ लोगों की अच्छी खासी भीड़ नजर आई। कुछ लोग बिना मास्क के भी नजर आए। मालवीय रोड व्यापारी संघ के राजेश वासवानी ने बताया कि हमने सभी व्यापारियों से कह दिया है कि बिना मास्क के ग्राहकों को दुकान में प्रवेश न दें। प्रशासन भी सड़क पर लापरवाही से घूमने वालों पर सख्ती बरते।

मंगलवार शाम या बुधवार सुबह तक जिला प्रशासन मॉल खोले जाने को लेकर आदेश जारी कर सकता है। प्रदेश सरकार ने सोमवार की रात कहा है कि अब ऐसे जिले जहां कोरोना संक्रमण की दर 8% या इससे कम है वहां बिना किसी बंदिश के बाजार खुलेंगे। राज्य सरकार ने यहां तक कह दिया है कि सभी दुकानों, मॉल, शो रूम को खोला जा सकेगा। किसी तरह का रोस्टर सिस्टम या बंदिश नहीं होगी, मगर शाम 6 के बाद से नाइट कर्फ्यू का पालन करना होगा।