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जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है





पूरब टाइम्स रायपुर।  मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप बस्तर जिला प्रशासन द्वारा बस्तर की लोककला, शिल्पकला, संस्कृति, पर्यटन एवं अन्य स्थानीय कलाओं को देश-दुनिया मे पहचान दिलाने नित नये प्रयोग किये जा रहे हैं। वैसे तो बस्तर आर्ट देश-दुनिया मे पहले ही विख्यात है, पर उसका लाभ स्थानीय कलाकारों को कम ही मिल पाता है। बस्तर आर्ट की अन्य राज्यों के साथ-साथ विदेशों में भी जबरदस्त मांग है, पर मार्केटिंग की बारीकियों की जानकारी न होने की वजह से शिल्पकारों को उनकी मेहनत का उचित दाम नहीं मिल पाता है।
  उल्लेखनीय है कि ग्रामोद्योग मंत्री गुरू रूद्रकुमार के निर्देशन में आमचो बस्तर की भावना को केंद्र में रखते हुये जिला प्रशासन नित नये प्रयोग कर रहा है। जिसमें महिला समूह को निर्माण, यूनिक डिजाइन, मार्केटिंग, एकाउंटिंग में प्रशिक्षण देकर उसे आकर्षक एवं बाजार के मांग अनुरूप सामग्रियां और वैल्यू एडेड उत्पादों का निर्माण करवाया जा रहा है। वर्तमान में महिला समूह के उत्पादों की मार्केटिंग हेतु ट्राईफेड, बस्तर कला गुड़ी, ट्राइबल टोकनी, लोका बाजार, सॉफ्टवेयर, पंखुड़ी सेवा समिति, अमचो बस्तर बाजार, सहित अन्य संबंधित संस्थानों से अनुबंध करवाया गया है, जिसका अच्छा प्रतिफल मिल भी रहा है।

    बस्तर में समूह से जुड़ी महिलाएं इन दिनों कलाकृतियों में वैल्यू अडिशन करने में जुटी हुई है। पूर्व से प्रचलित बाँस कला, मृदा कला, टेराकोटा, तुम्बा आर्ट, सीसल कला, हस्त निर्मित अगरबत्तियां एवं धूपबत्ती और ढोकरा क्राफ्ट के नये आकर्षक डिजाइनों से संभावनाओं को और भी ज्यादा बढ़ा दिया है। बस्तर कलेक्टर  रजत बंसल ने बताया कि परंपरागत एवं नए डिजाइन के प्रोडक्ट्स की अच्छी मांग आ रही है। सोशल और डिजिटल प्लेटफार्म में प्रोडक्ट्स के प्रचार से विक्रय में भी बढ़ोत्तरी हुई है। हम निरंतर मार्केटिंग सिस्टम को मजबूत बनाने में जुटे हुए हैं। बस्तर हस्तशिल्प को पर्यटन से जोड़ने की भी जिला प्रशासन की योजना है इसके तहत मुख्य पर्यटन स्थलों मे सुविनियर शॉप खोले जाएंगे, जिसमें बस्तर की सभी कलाकृतियों को प्रदर्शन व विक्रय हेतु रखा जाएगा। बस्तर जिला प्रशासन की इस पहल से एक ओर जहाँ दिशा खो रही बस्तर हस्तशिल्प को एक नई दशा और दिशा मिलेगी। साथ ही हस्तशिल्पियों को निरंतर काम और आजीविका में भी वृद्धि होगी। जिससे भावी पीढ़ी बस्तर हस्तशिल्प को आजीविका के रूप में अपनाने के लिए भी प्रेरित होगी।

पूरब टाइम्स रायपुर। योगगुरु रामदेव के एलोपैथी चिकित्सा पद्धति और डॉक्टरों को लेकर दिए बयानों की वजह से रायपुर के जूनियर डॉक्टर्स भड़क गए हैं। वे आज काली पट्टी लगाकर OPD और ऑपरेशन थियेटर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे आज शाम को ही कैंडल मार्च भी निकालेंगे। जूनियर डॉक्टर्स ने कहा कि चिकित्सा संगठनों की ओर से हो रहे विरोध के बावजूद केंद्र सरकार की चुप्पी निराशाजनक है।

छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. इंद्रेश यादव, उपाध्यक्ष डॉ. शीतल दास ने बताया, एसोसिएशन के सभी लोग बाबा रामदेव के बयानों के खिलाफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) और फेडरेशन ऑफ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) के साथ एकजुटता से खड़े हैं। इस मामले में केंद्र सरकार की निष्क्रियता निराश करने वाली है। केंद्र सरकार ने उस बात को महत्व नहीं दिया जिसने महामारी के खिलाफ युद्ध में उनके ही सैनिकों के बारे में बुरा बोला। छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा, आज हम काला दिवस मना रहे हैं, ताकि एलोपैथिक डॉक्टरों और कोरोना शहीदों के प्रति इस अत्याचार पर निष्क्रियता पर अपनी तकलीफ व्यक्त कर सकें। डॉक्टरों ने कहा, शाम को वे लोग कैंडल मार्च निकालेंगे।

छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने पिछले महीने एक प्रस्ताव पारित कर रामदेव बाबा के बयानों की निंदा की थी। इसमें कहा गया, "बाबा रामदेव का बयान नफरत फैलाने वाला है। अधिकारियों से मांग है कि उनपर महामारी कानून के तहत मामला दर्ज करें। हम बाबा रामदेव से बिना शर्त सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करते है।"

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की रायपुर शाखा और छत्तीसगढ़ हास्पीटल बोर्ड के सदस्यों ने रायपुर के सिविल लाइंस थाने में बाबा रामदेव के खिलाफ एक शिकायत दी है। इसमें रामकृष्ण यादव उर्फ रामदेव बाबा के खिलाफ महामारी एक्ट और राजद्रोह सहित विभिन्न अपराधों के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है। पुलिस ने अभी तक मामला दर्ज नहीं किया है।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में रामदेव को कहते हुए सुना जा रहा है, "एलोपैथी मूर्खतापूर्ण विज्ञान है। भारत के औषधि महानियंत्रक द्वारा कोविड-19 के इलाज के लिए मंजूर की गई रेमडेसिविर, फेवीफ्लू तथा ऐसी अन्य दवाएं बीमारी का इलाज करने में असफल रही हैं। एलोपैथी दवाएं लेने के बाद लाखों की संख्या में मरीजों की मौत हुई है।" IMA के विरोध पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने रामदेव को पत्र लिखकर सार्वजनिक रूप से माफी मांगने का आग्रह किया था। जवाब में बाबा ने खेद जता दिया लेकिन विवाद को खत्म नहीं किया। एक और पत्र जारी कर एलोपैथी को चुनौती दी। उसके बाद से लगातार उनके इसी तरह के विवादित वीडियो और बयान आ रहे हैं।

पूरब टाइम्स रायपुर। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में परिवहन विभाग की नई सुविधा ‘तुंहर सरकार, तुंहर द्वार’ का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस नयी सुविधा के माध्यम से परिवहन विभाग द्वारा प्रदेशवासियों को 22 परिवहन सेवाएं उनके घर के द्वार पर पहुंचाकर दी जाएंगी। इन सेवाओं में स्मार्ट कार्ड आधारित ड्रायविंग लायसेंस और रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र से संबंधित परिवहन सेवाएं शामिल हैं। स्पीड पोस्ट के माध्यम से आवेदकों एवं वाहन स्वामियों के घर के पते पर इन सेवाओं को पहुंचाया जाएगा। आवेदकों को सेवाएं प्राप्त करने के लिए 
 मुख्यमंत्री श्री बघेल ने इस अवसर पर कहा कि वर्तमान सरकार द्वारा राज्य में लोगों के जीवन को हर हाल में आसान बनाने का काम सतत रूप से किया जा रहा है। इस कड़ी में राज्य शासन द्वारा परिवहन विभाग की सेवाओं को जन सामान्य के लिए पहले से ज्यादा सुगम बनाया जा रहा है। राज्य सरकार की यह सोच है कि जनसुविधाएं जितनी सुगमता से लोगों तक पहंचेंगी उनका जीवन उतना ही आसान होगा और विकास की गति तेज होगी। समय के अनुरूप लोगों तक शासन की सेवाएं पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। परिवहन विभाग द्वारा कोरोना संकट के समय में ऑनलाईन सेवाएं पहुंचाने की सराहनीय पहल की गई है। इससे भीड़-भाड़ से होने वाले संक्रमण से जहां बचा जा सकेगा, वहीं लोगों को परिवहन कार्यालय का चक्कर लगाने से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने इस अवसर पर प्रदेशवासियों और परिवहन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों को बधाई दी। मुख्यमंत्री श्री बघेल इस दौरान वीडियो कॉन्फ्रंसिंग के माध्यम से रायपुर तथा दुर्ग में उपस्थित छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के  अमर परवानी तथा आटो मोबाईस डीलर्स एसोसिएशन से  मनीष राज सिंघानिया आदि से परिवहन विभाग द्वारा आज शुरू की गई नई सुविधा के बारे में फीड बैक लिया। उनके द्वारा भी परिवहन विभाग द्वारा ऑनलाईन सेवाएं प्रदान करने की पहल की सराहना की गई।

    परिवहन मंत्री  मोहम्मद अकबर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि परिवहन विभाग द्वारा लोगों तक 22 महत्वपूर्ण सेवाओं को ऑनलाईन पहंचाने की पहल की गई है। इससे विभाग के काम-काज में और अधिक पारदर्शिता आएगी तथा जवाबदेही भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस सुविधा से लोगों को परिवहन संबंधी सेवाओं के लिए अब चक्कर काटना नही पड़ेगा और उनके समय और धन दोनों की बचत होगी। परिवहन मंत्री  अकबर  ने बताया कि परिवहन विभाग में लागू इस नवीन व्यवस्था से लोगों को ड्राईविंग लाईसेंस तथा रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट सहित 22 तरह की परिवहन संबंधी सेवाएं आवेदनकर्ता को घर बैठे ही उनके पंजीकृत पते पर सुगमता से उपलब्ध हो जाएगी। ट्रेकिंग सिस्टम के माध्यम से स्पीड पोस्ट से भेजी गई डाक की लोकेशन भी ट्रेक की जा सकेगी। मुख्यमंत्री  बघेल और परिवहन मंत्री  अकबर ने ‘तुंहर सरकार, तुंहर द्वार’ सुविधा के तहत आवेदकों को स्पीड पोस्ट से भेजे जाने वाले ड्राईविंग लाइसेंस और पंजीयन प्रमाण पत्र प्रवर अधीक्षक डाकघर रायपुर संभाग बी.एल. जांगड़े और सहायक अधीक्षक डाकघर रायपुर  जे.एस.पारधी को सौंपे।

रायपुर। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ एस भारतीदासन द्वारा पूर्व में जारी आदेश अनुसार रायपुर जिला अंतर्गत संपूर्ण क्षेत्र को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया है।वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने सार्वजनिक आवागमन एवं अन्य गतिविधियों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध निरंतर जारी रखने का आदेश जारी किया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश अनुसार सभी स्विमिंग पूल. सिनेमा हॉल,थियेटर, वाटर पार्क, थीम पार्क तथा सामूहिक भीड़-भाड़ वाले स्थल जैसे जंगल सफारी, तेलीबांधा, बूढ़ातालाब, पुरखौती मुक्तांगन इत्यादि आम जनता हेतु पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगें। स्कूल एवं कॉलेज विद्यार्थियों हेतु बंद रहेगें। छात्रावास में केवल परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को आवास की अनुमति होगी। 

शासन से अनुमति प्राप्त समस्त परीक्षाओं को छोड़कर कोचिंग क्लासेंस एवं अन्य समस्त शैक्षणिक गतिविधियों बंद रहेगी। सभी प्रकार की समा, रैली, जुलूस, धरना, प्रदर्शन तथा सामाजिक, राजनैतिक, खेल, सांस्कृतिक एवं धार्मिक आयोजन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगें। इसी तरह चौपाटी जैसे स्थल नही खुलेगें। उक्त प्रतिबंधित गतिविधियों को छोड़कर अन्य समी प्रकार की स्थायी एवं अस्थायी दुकानें, शॉपिंग मॉल, व्यवसायिक प्रतिष्ठाBन, सुपर मार्केट/सुपर बाजार, फल एवं सब्जी मंडी/बाजार, अनाज मंडी, शो-रुम, क्लब, मदिरा दुकानें, ठेला, सैलून, ब्यूटी पार्लर, स्पा, पार्क व जिम इत्यादि रविवार को छोड़कर अन्य दिवस में उनके प्रचलित समय से शाम 6.00 बजे तक खोले जा सकेगें।

होटल, रेस्टोरेंट्स, क्लब एवं बार रात्रि 10.00 बजे तक खुल सकेगें। आउटसाइड डाइनिंग की भी अनुमति होगी किन्तु डायनिंग हॉल/रुम में उनकी बैठक क्षमता के 50 प्रतिशत से अधिक व्यक्तियों को अनुमति नहीं होगी। होटल, रेस्टोरेंट्स ऑनलाइन/टेलीफोनिक ऑडर पर होम डिलीवरी तथा टेक-अवे को प्राथमिकता देंगे। क्लब-रेस्टोरेंट्स, होटल एवं रेस्टोरेंट्स से डिलीवरी का समय पूर्ववत रात्रि 09.00 बजे तक तथा आम जनता/ ग्राहक के निवास तक होम डिलीवरी का अधिकतम समय रात्रि 10.00 बजे तक ही रहेगा। होटलों में इन-हाउरा अतिथियों के लिए होटल किचन/स्वयं के रेस्टोरेंट्स के उपयोग की अनुमति रहेगी। वैवाहिक कार्यकम निवास-गृह. होटल अथवा मैरिज हॉल में कोविड-18 प्रोटोकॉल का कडाई से पालन की शर्त पर आयोजित करने की अनुमति होगी। 

भारत सरकार, गृह मंत्रालय के आदेश अनुसार आयोजन में शामिल होने वाले व्यक्तियों की कुल अधिकतम संख्या 50 रहेगी। इसी प्रकार अंत्येष्टि, दशगात्र, इत्यादि मृत्यु संबंधी कार्यक्रम में शामिल होने वाले व्यक्तियों की कुल अधिकतम संख्या 20 रहेगी। होटल/ मैरिज हॉल में किसी एक आयोजन के दौरान सभी पक्षों को मिलाकर मैरिज हॉल की क्षमता के 50 प्रतिशत की सीमा के अधीन अधिकतम 50 व्यक्ति ही शामिल हो सकेगें, जिनकी सूची मैरिज हॉल संचालक द्वारा संधारित की जावेगी। आयोजन के दौरान मास्क धारण करना तथा फिजिकल डिस्टेसिंग का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा। रायपुर जिला अन्तर्गत सभी कार्यालय पूर्ववत खुलेगें। 

शासकीय कार्यालयों में प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के सभी अधिकारी नियमित रूप से उपस्थित होगें किन्तु अधीनस्थ कर्मचारी कार्यालय प्रमुख द्वारा निर्धारित 50 प्रतिशत रोटेशन के साथ उपस्थित होंगें। उप पंजीयक कार्यालय आवश्यक स्टाफ सहित पूर्ववत टोकन/ऑनलाईन सिस्टम के साथ संचालित होगें। सभी अस्पताल, मेडिकल दुकानें, क्लिनिक एवं पशु-चिकित्सालय को उनके निर्धारित समय में संचालन की अनुमति होगी। मेडिकल दुकान संचालक मरीजों के लिए दवाओं की होम डिलीवरी को प्राथमिकता देगें।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कोरोना के बीच परीक्षाओं को स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब परीक्षाएं ली जा रही है. कल से 12 वीं कक्षा की परीक्षा जारी हो जाएंगी। परीक्षा केंद्रों से विद्यार्थियों को प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका बांटे जाएंगे। 1 जून से 5 जून तक प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिका बांटे जाएंगे। जानकारी के मुताबिक एक साथ सभी विषयों के प्रश्न पत्र और उत्तर पुस्तिकाएं दी जाएगी। 


माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव वीके गोयल ने कहा कि जो विद्यार्थी समय पर उत्तर पुस्तिका जमा नहीं करेंगे, उन्हें फ़ेल माना जाएगा। प्रदेशभर से 2,86,809 विद्यार्थी परीक्षा देंगे। माध्यमिक शिक्षा मंडल के सचिव वीके गोयल ने बताया कि प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र परीक्षा ऑफ़लाइन ही ली जाएगी, लेकिन विद्यार्थी परीक्षा केंद्र से नहीं बल्कि अपने घरों से परीक्षा देंगे। 


रायपुर। प्रदेशभर में कोरोना महामारी से बचने के लिए टीकाकरण कराने के प्रति साहू समाज की महिलाएं जो जागरूकता अभियान चला रही हैं, वह काबिले तारीफ है। ऐसा अभियान हर समाज में चलाया जाना चाहिए। इसके अलावा जरूरतमंदों को सूखा राशन बांटने, मरीजों को ऑक्सीजन सिलिंडर, एंबुलेंस की सुविधा देने में भी साहू समाज ने बेहतर कार्य किया है, यदि भविष्य में ऐसी भयंकर नौबत आए तो समाज को पुन: बढ़चढ़कर योगदान देने के लिए आगे आना चाहिए। उक्त बातें गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने ऑनलाइन बैठक में कहीं। इसमें रायपुर, बिलासपुर, सरगुजा संभाग के पदाधिकारियों ने भाग लिया।

प्रदेश साहू संघ के मीडिया प्रकोष्ठ के संयोजक कौशल स्वर्णबेर ने बताया कि वर्चअुल बैठक में मंत्री ने साहू समाज के पदाधिकारियों से कहा कि कोरोना संक्रमण काल में जिन लोगों ने बहादुरी से सेवाभावी कार्यों में योगदान दिया। ऐसे सेवाभावी लोगों की सूची तैयार करके समाज के द्वारा सम्मानित किया जाना चाहिए। विधायक धनेन्द्र साहू ने कहा कि कोरोना काल में साहू समाज ने अपने नाम और संख्या के अनुरूप पूरे प्रदेश में अपनी अलग पहचान स्थापित की है। इसके लिए प्रदेश के सभी पदाधिकारी बधाई के पात्र हैं।

प्रदेश अध्यक्ष अर्जुन हिरवानी ने कहा कि प्रदेश साहू संघ के आह्वान पर कोरोना से निपटने के लिए जिला से लेकर ग्रामीण स्तर पर बेहतर काम किया जा रहा है। सांसद अरुण साव ने कहा कि समाज द्वारा वर्चुअल बैठक के माध्यम से लोगों को जोड़ने और अपनी योजनाओं को मूर्त रुप देने का जो काम किया जा रहा है, वह बहुत ही प्रशंसनीय है। इस तरह के काम लगातार होते रहने चाहिए।

सांसद चुन्नीलाल साहू ने कहा कि साहू समाज की समाज सेवा की भावना और एकजुटता का इस कोरोना काल में बेहतर उदाहरण देखने को मिल रहा है। इस दौरान जिलाध्यक्षों ने प्रदेश साहू संघ के निर्देश पर 26 से 31 मई तक वैक्सीन के प्रति चलाए जाने जा रहे जागरुकता अभियान एवं जिलों में किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी भी दी। इस कार्यक्रम में बिलासपुर और सरगुजा संभाग के सभी जिलाध्यक्ष भी मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन प्रदेश साहू संघ के कार्यकारी अध्यक्ष शांतनू साहू ने किया।

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से ASP के पद खाली पड़े हैं। ADC सुब्रत साहू के अध्यक्षता में DPC की 27 मई को मीटिंग हुई. इसमें नाम फाइनल कर लिए गए हैं। इन नामों को लेकर सूची तैयार की गई है। गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू के पास हस्ताक्षर के लिए फाइल को भेजी जाएगी। इसके बाद ASP के रिक्त पदों की सूची जारी होगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, जल्द 28 नए ASP के नाम जारी होंगे। 




पूरब टाइम्स रायपुर। छत्तीसगढ़ में 18 से 44 वर्ष आयु वर्ग का टीकाकरण ठप्प हो चुका है। प्रदेश के 18 जिले ऐसे हैं, जहां 2 से 10 दिन पहले ही टीकाकरण बंद हो चुका है। जिन 10 जिलों में कुछ सीमित केंद्रों पर आज टीकाकरण हो रहा है, उनके पास भी महज कुछ हजार डोज बचे हैं। प्रदेश के 18 + के लिए टीकाकरण अभियान एक मई से शुरू हुआ था। उस दिन सरकार को कोवैक्सिन की 1.5 लाख डोज मिली थी। बाद में कोविशील्ड वैक्सीन की कई खेप आई। इस वर्ग में टीकाकरण के लिए करीब 7 लाख 96 हजार डोज आए थे।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 30 मई तक प्रदेश में 7 लाख 85 हजार 403 डोज लगाए जा चुके थे। यानी आज का वैक्सीनेशन शुरू होने से पहले करीब 10 हजार 597 डोज टीके ही बचे हुए थे। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, कोरिया, बलरामपुर, सूरजपुर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जैसे जिलों में ही यह खुराक बची है। वहां भी बेहद सीमित केंद्रों पर टीकाकरण चला। आज इनमें से कई केंद्रों पर टीका खत्म हो चुका है। यानी कल से इनमें से कई केंद्रों पर टीकाकरण बंद हो जाएगा।


निजी निर्माण कार्य की सशर्त अनुमति दोगी। श्रमिकों को मास्क पहनना होगा। फिजिकल डिस्टेंसिंग, नियमित रूप से सेनिटाइजर का उपयोग एवं कोविड 19 के गाइडलाइन नियमों का कड़ाई से पालन करना अनिर्वाय होगा। निर्माण सामग्रियों को तिरपाल (प्लास्टिक शीट) से संबंधित दुकानों का संचालन की अनुमति सुबह 8 से शाम 5 बजे तक किया जाएगा।@GI@

रायपुर। छत्तीसगढ़ में महिलाओं और बच्चियों के साथ दुष्कर्म किए जाने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।आए दिन नाबालिग बच्चियों के साथ शारीरिक शोषण की वारदात सामने आती रहती है। राजधानी रायपुर में बाप-बेटी का रिश्ता शर्मसार हुआ है। पिता ने अपनी 18 वर्षीय बेटी से दुष्कर्म किया है इधर 13 साल की मासूम बच्ची के साथ भी जबरन दुष्कर्म किया गया है. पुलिस ने दोनों ही मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
रायपुर के उरला थाना क्षेत्र में पिता ने ही अपनी 18 वर्षीय बेटी के साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया है। पिछले 2 साल से धमकी देकर बेटी के साथ ही शारीरिक संबंध बना रहा था।मां को इस घटना की जानकारी लगी, तब उसने पति को समझाइस दी, लेकिन वो नहीं माना. जिसके बाद मां-बेटी ने उरला थाने में शिकायत लिखाई. फिर पुलिस ने आरोपी बाप को गिरफ्तार कर लिया है।
मिली जानकारी के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी का नाम सुखदेव बंजारे उर्फ छोटू है, जो कि खमतराई थाना क्षेत्र के रावाभाटा आजाद नगर का निवासी है।आरोपी युवक नाबालिग का पड़ोसी है। बच्ची को जान से मारने की धमकी देकर रेप की घटना का अंजाम देता था। पिछले 6 महीनों से धमकी देकर नाबालिग के साथ जबरदस्ती शारीरिक संबंध बना रहा था। जब नाबालिग बच्ची घर पर अकेली रहती थी, तब आरोपी घर जाकर दुष्कर्म करता था।@GI@

पूरब टाइम्स,रायपुर। छत्तीसगढ़ जनसम्पर्क आयुक्त की जिम्मेदारी संभाल रहे आईएस अधिकारी तारण प्रकाश सिन्हा ने एक वीडियो अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर किया है। इसमें एक गिलहरी उनके आंगन की दीवार पर चहलकदमी करती दिख रही है। आईएस तारण प्रकाश सिन्हा ने गिलहरी के लिए दाने और पानी का भी इंतजाम कर रखा है जहां ये हर रोज आकर कुछ वक्त बिताती है फिर पेड़ पर चढ़ जाती है।

 तारण प्रकाश सिन्हा का हाल ही मेें कोरोना पर लिखा एक लेख काफी चर्चा में रहा। बाढ़ जैसे-जैसे उतरती है, तबाही का असली मंजर वैसे-वैसे प्रकट होने लगता है। कोरोना की नदी भी उतर रही है। चरम को छूकर संक्रमण दर लगातार कम हो रही है। छत्तीसगढ़ में यह 6 प्रतिशत से नीचे आ चुकी है। नये संक्रमितों का आंकड़ा भी 3 हजार प्रतिदिन के आस-पास आ चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। हम अपनी सामान्य दिनचर्या की ओर लौट आएंगे।

बाढ़ के उतरने के बाद के बाद भी जो वृक्ष बचे रह जाते हैं, उनकी शाखाओं में बरबादी का कहानियां अटकी रह जाती हैं। हम सबको अकल्पनीय पीड़ाएं देकर कोरोना लौट रहा है। संक्रमण में सिर से पांव तक डूबे रहने के बाद हमारे जीवन की शाखाएं फिर प्रकट होने लगी हैं। इन शाखाओं में उन जिंदगियों की निशानियां रह गई हैं, जो अब कभी प्रकट नहीं होंगी। छत्तीसगढ़ में ही कोरोना ने हम सबसे 12 हजार से ज्यादा लोगों को छीन लिया। ये हजारों लोग जिस दिन इस धरती पर आए रहे होंगे, धरती ने उनके आने की खुशियां मनाई होगी। इनकी विदाई में उसी धरती के आंसू कम पड़ गए।

पूरब टाइम्स रायपुर। मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने अंतर्राष्ट्रीय धूम्रपान निषेध दिवस के अवसर पर  आज यहां अपने निवास कार्यालय से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअल योगाभ्यास एवं योग परामर्श कार्यक्रम का शुभारंभ किया। यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ योग आयोग द्वारा कोविड-19 की चिकित्सा से स्वस्थ हुए व्यक्तियों, होम आइसोलेशन एवं क्वारेंटाइन में रह रहे व्यक्तियों, उनके परिवार के सदस्यों, वैक्सीन का प्रथम डोज ले चुके व्यक्तियों एवं वरिष्ठ नागरिकों सहित जन सामान्य में कोविड-19 के प्रभावों को कम करने एवं रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया।। योग की निःशुल्क कक्षाएं 31 मई से एक वर्ष तक चलेंगी । सोशल मीडिया में लोग योगाभ्यास कार्यक्रम को देख सकेंगे।

 इस अवसर पर गृह मंत्री  ताम्रध्वज साहू, समाज कल्याण मंत्री एवं अध्यक्ष छत्तीसगढ़ योग आयोग  अनिला भेंड़िया, अपर मुख्य सचिव श्री सुब्रत साहू, सचिव समाज कल्याण विभाग  रीना बाबा साहेब कंगाले मुख्यमंत्री निवास में उपस्थित थीं। संचालक समाज कल्याण  पी. दयानंद सहित छत्तीसगढ़ योग आयोग और समाज कल्याण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न जिलों से नागरिक, समाज कल्याण विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, योग प्रशिक्षक भी इस कार्यक्रम से वर्चुअल रूप से जुड़े।

पूरब टाइम्स रायपुर। राज्य शासन द्वारा छत्तीसगढ़ में वृक्षारोपण कार्य को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से एक जून 2021 से ‘‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना‘‘ लागू की जा रही है। इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के सभी नागरिक, निजी भूमि की उपलब्धता अनुसार तथा सभी ग्राम पंचायतों एवं संयुक्त वन प्रबंधन समितियां योजना का लाभ लेने हेतु पात्र होंगे। मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के क्रियान्वयन के सबंध में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा सभी जिला कलेक्टरों और वनमण्डलाधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
   मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत जिन किसानों ने खरीफ वर्ष 2020 में धान की फसल ली हैे, यदि वे धान फसल के बदले अपने खेतों में वृक्षारोपण करते हैं, तो उन्हें आगामी 3 वर्षों तक प्रतिवर्ष 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि  दी जाएगी। इसी तरह ग्राम पंचायतों के पास उपलब्ध राशि से यदि वाणिज्यिक वृक्षारोपण किया जाएगा, तो एक वर्ष बाद सफल वृक्षारोपण की दशा में संबंधित ग्राम पंचायतों को शासन की ओर से 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इससे भविष्य में पंचायतों की आय में वृद्धि हो सकेगी। इसके अलावा संयुक्त वन प्रबंधन समितियों के पास उपलब्ध राशि से यदि वाणिज्यिक आधार पर राजस्व भूमि पर वृक्षारोपण किया जाता है, तो पंचायत की तरह ही संबंधित समिति को एक वर्ष बाद 10 हजार रूपए प्रति एकड़ की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। वृक्षों को काटने व विक्रय का अधिकार संबंधित समिति का होगा।
   गौरतलब है कि मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल की अध्यक्षता में विगत 18 मई को आयोजित मंत्रिमण्डल की बैठक में ‘‘मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना‘‘ को छत्तीसगढ़ में लागू करने का अहम निर्णय लिया गया। योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में वृक्षारोपण को अधिक से अधिक प्रोत्साहित करना है। साथ ही पर्यावरण में सुधार लाकर जलवायु परिवर्तन के विपरित प्रभावों को कम करना है। इसमें निजी क्षेत्र, कृषकांे, शासकीय विभागों एवं ग्राम पंचायतों को भूमि पर ईमारती, गैर ईमारती प्रजातियों के वाणिज्यिक-औद्योगिक वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसी तरह कृषकों की आय में वृक्षारोपण के माध्यम से वृद्धि करते हुए उनके आर्थिक, सामाजिक स्तर में सुधार लाना है। निजी भूमि पर रोपित तथा पूर्व से खड़ा वृक्षों के पातन तथा काष्ठ के परिवहन नियमों को सुगम बनाया जाकर, नागरिकों को निजी भूमि पर रोपण हेतु आकर्षित करना है।

    इसी तरह निजी तथा सामुदायिक भूमि पर वृक्षारोपण को बढ़ावा देने, काष्ठ का उत्पादन बढ़ाकर काष्ठ के आयात में उत्तरोत्तर कमी लाना तथा वनों में उपलब्ध काष्ठ पर जैविक दबाव को कम करते हुए वनों को सुरक्षित रखना है। मुख्यमंत्री वृक्षारोपण प्रोत्साहन योजना के तहत वृक्षारोपण को बढ़ावा देकर बाढ़, अनावृष्टि आदि को नियंत्रित करना तथा भूमि के जल स्तर को ऊपर उठाना है। साथ ही उद्योगों की लकडि़यों की आवश्यकताओं की पूर्ति और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन कर सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि करना भी है।

पूरब टाइम्स भिलाई। निगम भिलाई का चुनाव अटक सकता है। दरअसल निगम के वार्ड आरक्षण को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। सोमवार को इस पर सुनवाई होनी है। याचिका कर्ता ने नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा -11 एवं छत्तीसगढ़ नगर पालिका (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं के लिए वार्डों का आरक्षण) नियम 1994 में यह स्पष्टीकरण दिया गया है कि यदि किसी वार्ड का क्रमांक अथवा नाम परिवर्तन कर दिया जाता है।

किंतु वार्डों की सीमाएं यथावत है अर्थात वार्ड के मूल स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है तो नवीन आरक्षण हेतु पूर्व वर्षों में आरक्षण स्थिति अनुसार चक्रानुक्रम लागू रहेगा। यदि कोई वार्ड को दो भागों में विभक्त कर दिए जाने से, वार्ड में नया क्षेत्र सम्मिलित हो जाने से अथवा वार्ड का पूर्व क्षेत्र कट कर दूसरे वार्ड में चले जाने से नए वार्ड बन जाते हैं तो पूर्व के वार्ड की चतुर्सीमा बदल जाने से नवगठित वार्ड बन जाने से आरक्षण के लिए चक्रानुक्रम लागू नहीं रहेगा।

भिलाई निगम के सात ऐसे वार्ड हैं जो कि पहले की स्थिति में हैं जिनका जनगणना ब्लाक भी समान है और जनसंख्या भी समान है एवं सम्मिलित क्षेत्र भी समान है। जब जनसंख्या और जनगणना ब्लाक नहीं बदले हैं तो फिर इनकी चौहदी भी नहीं बदली होगी तो फिर इन वार्डो को नया वार्ड नहीं माना जा सकता है और इन सातों वार्डों का आरक्षण चक्रानुक्रम में कराया जाना था, लेकिन इन सात वार्डों को भी नया वार्ड मानते हुए लाटरी के माध्यम से आरक्षण कराया गया है जिस कारण से इन सात वार्डों के साथ-साथ और भी कई सारे वार्ड गलत आरक्षण से प्रभावित हुए हैं।

पूरब टाइम्स रायपुर। वन अधिकार कानून के तहत वन भूमि पर मिले व्यक्तिगत, सामुदायिक तथा वन संसाधन के अधिकारों से बीजापुर जिले के वनवासियों का जीवन संवर रहा है। व्यक्तिगत अधिकार पत्रों के माध्यम से न केवल वे वनभूमि पर बेखौफ खेती कर पा रहे हैं, बल्कि आवास, पशुपालन और कृषि संबंधी योजनाओं का भी लाभ उठा रहे हैं। ग्राम सभाओं के माध्यम से मिले सामुदायिक अधिकारों से वे अब वनों के गौण उत्पादों, चारागाहों, जलाशयों, जैव विविधता एवं अपने पारंपरिक ज्ञान का उपयोग अपने सामुदायिक जीवनस्तर को ऊंचा उठाने के लिए कर पा रहे हैं। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ शासन ने वन अधिकार कानून में अब तक उपेक्षित किंतु अत्यंत महत्वपूर्ण वन संसाधन के अधिकार के प्रावधान को भी जिले में प्राथमिकता के साथ लागू किया है। इससे उन्हें जल-जंगल-जमीन के संपूर्ण संरक्षण, प्रबंधन और पुनर्जीवन का अधिकार मिल गया है।  

 मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल के निर्देश पर वन अधिकार कानून के तहत छत्तीसगढ़ में वनभूमि पर 13 दिसंबर 2005 के पूर्व से काबिज वनवासियों को वन-अधिकार-पत्रों का वितरण किया जा रहा है। वन अधिकार पत्र धारक वनवासी अपने अधिकार-वाली भूमि का उपयोग कृषि, बाड़ी, आवास अथवा जीवन यापन संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कर पा रहे हैं। जिले में कुल 9 हजार 617 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों का वितरण किया गया है। इनमें से 2179 व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र दिसंबर 2018 के बाद से अब तक प्रदान किए गए हैं। व्यक्तिगत वनअधिकार पत्रों के माध्यम से यहां के वनवासियों को 13062.20 हेक्टेयर वनभूमि पर अधिकार प्राप्त हुआ है। इस तरह प्रति परिवार औसतन 1.35 हेक्टेयर भूमि का अधिकार प्राप्त हुआ है। इसी तरह 2243 सामुदायिक वन अधिकार पत्रों का वितरण ग्राम सभाओं को किया गया है। सामुदायिक वन अधिकार पत्रों के तहत गौण वन उत्पाद, जलाशय, चारागाह, जैव विविधता, वनवासियों के पारंपरिक ज्ञान इत्यादि से संबंधित अधिकार समुदायों को प्राप्त हुए हैं। इससे 62518 हेक्टेयर भूमि का अधिकार ग्राम सभाओं के माध्यम से समुदाय को मिला है।

 वन अधिकार कानून में अब तक उपेक्षित महत्वपूर्ण प्रावधान वन संसाधन के अधिकार को प्राथमिकता के साथ लागू करते हुए जिले में 283 वन संसाधन के अधिकार प्रदान किए गए हैं। पूर्ववर्ती वर्षों में सामुदायिक वन संसाधन का कोई भी अधिकार वनवासी समुदाय या ग्राम सभाओं को प्रदाय नहीं किया गया था। राज्य सरकार द्वारा मूल निवासियों को उनके जल, जंगल, जमीन के संपूर्ण प्रबंधन, संरक्षण, पुनर्जीवन हेतु संपूर्ण अधिकार पहली बार प्रदान किए गए। जिले में समुदाय को ग्राम सभाओं के माध्यम से मिले 283 सामुदायिक वन संसाधन के अधिकार के तहत 1,91,550.152 हेक्टेयर वन भूमि सौंपी गई है। इस अधिकार के तहत वनों के संपूर्ण प्रबंधन, उपयोग एवं संरक्षण का अधिकार वनवासी समुदाय को प्राप्त हो गया है। 

पूरब टाइम्स रायपुर। नक्सल प्रभावित बस्तर के सुकमा जिले में आदिवासी किसानों का एक आंदोलन कांग्रेस सरकार की गले की फांस बनता दिख रहा है। प्रदर्शन के बीच गोली चलने के बाद CRPF के कैंप का विरोध करने सिलगेर में जुटे आदिवासियों का समर्थन बढ़ता जा रहा है। दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन से भी अब इनको समर्थन मिलता दिख रहा है।

किसान आंदोलन के प्रमुख नेता योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन का समर्थन किया है। योगेंद्र ने लिखा, देश के सभी किसान बस्तर गाेलीकांड के शिकार आदिवासी किसानों के साथ हैं। स्वतंत्र मीडिया और मानवाधिकार संगठनों को बिना रोक-टोक सिलगेर जाने दिया जाए। निष्पक्ष जांच हो और दोषियों को सजा मिले। इससे पहले विभिन्न आदिवासी संगठनों ने भी सिलगेर के आदिवासियों के समर्थन में वर्चुअल प्रदर्शन किया। राज्यपाल को ज्ञापन सौंप कर हस्तक्षेप की मांग की थी। प्रमुख विपक्षी दल भाजपा और जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ भी इस मामले में खुल कर सरकार की लाइन के खिलाफ खड़े हो गए हैं।

11-12 मई की रात में CRPF ने कैंप के लिए सिलगेर में बाड़बंदी की। 12 मई की सुबह ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। उस दिन CRPF और DRG के जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। 13 मई को ग्रामीणों ने कैंप के पास ही आंदोलन शुरू किया। 14 मई को ग्रामीणों पर लाठीचार्ज हुआ। कई लोग घायल हुए। 17 मई को भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तभी पुलिस ने गोली चला दी। तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई। भगदड़ में गिरने से एक गर्भवती महिला भी घायल हो गई। 25 मई को उसकी भी मौत हाे गई। ग्रामीणों ने अब वहां मृतकों का एक स्मारक बना दिया। सड़क पर सूखी लकड़ियां रखकर उसे बंद कर दिया है। आंदोलन अब भी जारी है।

इस सारे विरोध के बीच राज्य सरकार अभी वहां पर कैंप लगाने पर अड़ी हुई है। 17 मई को गोलीबारी की पहली रिपोर्ट आने पर पुलिस ने कहा था कि ग्रामीणों की आड़ में नक्सलियों ने कैंप पर हमला किया था। उसके बाद गोली चली। बाद में प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को 10-10 हजार रुपए की सहायता राशि दी। पुलिस का कहना है कि सिलगेर और आसपास के ग्रामीण नक्सलियों के दबाव में कैंप का विरोध कर रहे हैं। अभी एक दिन पहले सरकार के प्रवक्ता और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि कैंप का विरोध कौन कर रहा है, यह सभी जानते हैं। सरकार उस सड़क पर अभी 6 कैंप और बनाने जा रही है

पूरब टाइम्स रायपुर।  800 बॉन्डेड डॉक्टर्स (अनुबंधित संविदा चिकित्सक) अब इस्तीफा देने के मूड में हैं। वजह है सरकार की तरफ से लिया गया फैसला। इसके तहत इन डॉक्टर्स को दिया जा रहा 75 हजार का वेतनमान (पे स्केल) घटाकर 55 हजार कर दिया गया है। इस फैसले से डॉक्टर्स नाराज हैं। उनका कहना है कि कोरोना के इस मुश्किल दौर में जहां दूसरे राज्य डॉक्टर्स को प्रोत्साहित कर रहे हैं यहां हमारा हौसला तोड़ने का काम हो रहा है। बॉन्डेड डॉक्टर इस मामले में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों तक अपनी शिकायत पहुंचा रहे हैं। सरकार भी अब इस ओर ध्यान देकर बीच का रास्ता निकालने पर विचार कर रही है।

अंबेडकर अस्पताल में काम कर रहे 45 बॉन्डेड डॉक्टर्स को लेकर कहा गया है कि उन्हें संविदा चिकित्सक की तरह दिए जा रहे 75 हजार रुपए के वेतनमान की जगह 55 हजार रुपए ही दिए जाएंगे। यहां काम करने वाले बॉन्डेड डॉक्टर पुष्पेंद्र ने बताया कि कुछ महीने पहले हमारे आंदोलन की वजह से हमें 75 हजार का वेतनमान दिया जा रहा था। मगर अब इस पर रोक लगाने का आदेश आया है। हमें संविदा चिकित्सक नहीं माना जा रहा। अब इस मामले में प्रदेशभर के कुल 800 बॉन्डेड डॉक्टर्स हमारे साथ हैं। अगर यह आदेश वापस नहीं लिया जाता तो हम सभी इस्तीफा दे देंगे।

डॉ. पुष्पेंद्र ने बताया कि सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि वो संविदा डॉक्टर्स को 75 हजार वेतनमान देंगे। जबकि, यूनिवर्सिटी में जब NMC/MCI की ओर से निरीक्षण होता है तब बॉन्डेड ​​​डॉक्टर्स को भी संविदा डॉक्टर के पद में दिखाते हुए यूनिवर्सिटी की मान्यता प्राप्त की जाती है। पिछले डेढ़ साल से हम इस महामारी के दौर में बिना रुके अपनी सेवाएं दे रहे हैं, न कोई प्रोत्साहन राशि मिलती है न ही कोई छुट्‌टी।

पूरब  टाइम्स  रायपुर। प्रदेश के वन, पर्यावरण और परिवहन मंत्री  मोहम्मद अकबर ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कबीरधाम जिले के नगर पंचायत बोड़ला में निवासरत लोगों को आवासीय भूमि का पट्टा देने के कार्यों के संबंध में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने सर्वे के अनुसार पंचायत के वार्डों में रहने वाले सभी पात्र हितग्राहियों को तत्परता से पट्टा वितरण की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 
    वन मंत्री  मोहम्मद अकबर ने आज राजधानी के शंकर नगर स्थित अपने निवास कार्यालय में वी.सी. के द्वारा छत्तीसगढ़ शासन की मंशा के अनुरूप नगर पंचायत बोड़ला के 15 वार्डों में निवास करने वाले पात्र हितग्राहियों को आवासीय भूमि का पट्टा दिए जाने के प्रगति की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने नगर पंचायत के वार्डों में धास भूमि, सुरक्षित आबादी, घोषित आबादी, प्रचलित आबादी, निजी भूमि, रास्ता और तालाब तथा वन भूमि को छोड़कर शेष भूमि में पात्र हितग्राहियों को आवासी भूमि का पट्टा देने की कार्यवाही शीघ्रता से पूर्ण करने के निर्देश क्षेत्र के एस.डी.एम., सी.एम.ओ. नगर पालिका को दिए। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष, वार्ड के पार्षद एवं एल्डरमेन से उनके वार्डों के लोगों को आवासीय भूमि का पट्टा दिए जाने के संबंध में चर्चा भी किए। उन्होंने इस दौरान नगर पंचायत के सभी वार्डों की स्वच्छता और नियमित साफ-सफाई आदि व्यवस्था के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर  रमेश शर्मा, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

पूरब  टाइम्स रायपुर। बस्तर के नक्सल प्रभावित सुकमा और बीजापुर जिलों में सुरक्षा बलों और स्थानीय आदिवासी समुदाय के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। आदिवासी, सिलगेर में CRPF कैम्प खोले जाने का विरोध कर रहे हैं। वहां हुई गोलीबारी मेें 3 ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। इसके बाद भी सरकार वहां कैम्प बनाए रखने को लेकर अड़ी हुई है। मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा है कि सरकार उसी इलाके में छह और कैम्प बनाएगी।

राज्य मंत्रिपरिषद के प्रवक्ता और कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा, "सिलगेर मामले में कैम्प बनाया जा रहा था। वहां किन लोगों के द्वारा विरोध किया गया यह बहुत स्पष्ट है। केवल सिलगेर का मामला नहीं है। आने वाले दिनों में हम उसके आगे के रास्ते में 6 और कैम्प बना रहे हैं।" कृषि मंत्री के बयान से स्पष्ट है कि तनाव अभी खत्म नहीं होगा। सरकार एंटी नक्सल मोर्चे पर मजबूत घेराबंदी और सड़कों की सुरक्षा के लिए ऐसे कैम्प जरूरी बता रही है। पुलिस का कहना है कि सिलगेर और आसपास के गांवों में आदिवासी नक्सलियों के प्रभाव में हैं। उन्हीं के कहने पर उस इलाके में कैम्प का विरोध किया जा रहा है। पिछले 18 दिन से वहां ग्रामीण विरोध करने जुट रहे हैं।

बताया जा रहा है कि सुकमा जिले का सिलगेर गांव पहुंच विहीन है। यहां से बीजापुर के तर्रेम तक एक सड़क बन रही है। इस सड़क का आगे भी विस्तार होना है। नक्सली प्रभाव वाले इलाके में इस सड़क की सुरक्षा के लिए CRPF के इन कैम्प की महत्वपूर्ण भूमिका हाे सकती है। सरकार को लगता है कि अगर कैम्प नहीं बन पाए तो सड़क बनाना भी असंभव हो जाएगा।

11-12 मई की रात में CRPF ने कैम्प के लिए सिलगेर में बाड़बंदी की। 12 मई की सुबह ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराया। उस दिन CRPF और DRG के जवानों ने उन्हें खदेड़ दिया। 13 मई को ग्रामीणों ने कैम्प के पास ही आंदोलन शुरू किया। 14 मई को ग्रामीणों पर लाठीचार्ज हुआ। कई लोग घायल हुए। 17 मई को भी ऐसा ही विरोध प्रदर्शन चल रहा था, तभी पुलिस ने गोली चला दी। तीन लोगों की गोली लगने से मौत हो गई। भगदड़ में गिरने से एक गर्भवती महिला साेमली भी घायल हो गई। 25 मई को उसकी भी मौत हाे गई। प्रदर्शन अब भी जारी है। सर्व आदिवासी समाज समेत दर्जन भर से अधिक संगठनों ने स्थानीय लोगों के समर्थन में कल प्रदर्शन किया। राज्यपाल से हस्तक्षेप करने की मांग की जा रही है।