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अब भ्रष्ट सरकारी अधिकारी नहीं भाग पाएंगे विदेश, निलंबित होने के बाद नहीं बनेगा पासपोर्ट, कार्मिक मंत्रालय का कदम

07/03/2020
नई दिल्ली। भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों के लिए अब विदेश भागना मुश्किल हो जाएगा। सरकार ने फैसला लिया है कि निलंबित हो चुके और जिनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में अभियोजन की अनुमति दी जा चुकी है, ऐसे सरकारी अधिकारियों का पासपोर्ट अब नहीं बनेगा। कार्मिक मंत्रालय ने केंद्रीय सतर्कता आयोग और विदेश मंत्रालय के परामर्श से मौजूदा दिशा-निर्देशों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है। कार्मिक मंत्रालय द्वारा सभी सरकारी विभागों को जारी आदेश में कहा गया है कि ऐसे अधिकारियों को पासपोर्ट लेने के लिए सतर्कता मंजूरी की जरूरत होगी। इसके अनुसार, फैसला किया गया है कि यदि कोई अधिकारी निलंबित है या उसके खिलाफ आपराधिक मामलों में जांच एजेंसी द्वारा अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है, तो उसकी सतर्कता मंजूरी रोकी जा सकती है। भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम या किसी अन्य आपराधिक मामले के तहत सक्षम प्राधिकारी द्वारा मंजूरी देने के बाद भी 

कर्मचारियों को पासपोर्ट प्राप्त करने के लिए सतर्कता मंजूरी से इन्कार किया जा सकता है। अदालत द्वारा इसका संज्ञान लिया जाएगा। सभी विभागों से यह जांचने के लिए कहा गया है कि क्या पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 (2) का कोई प्रावधान उन कर्मचारियों के मामले में लागू होता है, जो भारतीय पासपोर्ट प्राप्त करते समय उनके अधीन काम कर रहे हैं। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 6 (2) के तहत अधिकारी ऐसे किसी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी करने से इन्कार कर सकते हैं, जिसके बारे में लगे कि भारत के बाहर उसकी उपस्थिति किसी देश के साथ भारत के संबंधों को नुकसान पहुंचा सकती है। अधिनियम के अनुसार, न्यायालय द्वारा यदि आवेदक की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया गया हो या उसके भारत से जाने पर रोक लगाने वाला आदेश जारी किया गया हो, तब भी पासपोर्ट से इन्कार किया जा सकता है।