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गुस्ताखी माफ: सावधान ! यदि किसी ने किया खेल तो भूपेश करेंगे फेल

19/12/2019

कहने को भले ही भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन गई हो मगर करोड़ो की सदस्यता वाली यह पार्टी अपने ही नेताओं को साथ लेकर नहीं चल पा रही है. इसका नवीनतम उदाहरण उसकी महाराष्ट्र की नेता पंकजा मुंडे है जिन्होंने खुलकर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ अपना अभियान छेड़ते हुए अपने ट्विटर से भाजपा का कमल हटा दिया है. हमारे एक साथी ने कहा तो तुरंत दूसरा साथी बोला , और कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया के बारे में क्या राय है? उन्होंने भी तो अपने परिचय से कांग्रेस संबंधित सभी बातें हटा ली हैं. अब तीसरा साथी बोला , अब राजनीति में नैतिकता और पार्टी के प्रति निष्ठा का मतलब खत्म हो चुका है . कोई भी राजनेता सत्ता के लिये किसी भी पार्टी का दामन थाम लेता है . उसी तरह हर राजनैतिक पार्टी थोड़े से भी जनाधार वाले विपक्षी को अपनी पार्टी में लाने के लिये डोरे डालती है . अब मैं भी बोल पड़ा , लगभग इसी तरह की बात दुर्ग नगर निगम के वार्डा 60 कातुलबोड में दिखाई दे रही है . एक समय भाजपा की महाबली नेत्री सरोज पाण्डेय की राइट हैंड माने जानी वाली जयश्री जोशी को पिछले चुनाव में जब भाजपा ने महापौर का टिकिट नहीं दिया तो वे निर्दलीय लड़कर अपनी फजीती करवा चुकी थीं . लेकिन उसके बाद इस बार ना जाने क्यों , दुर्ग निगम में कांग्रेस की कमान संभाले विधायक अरुण वोरा को क्या सूझी कि उस जुझारू महिला को अपनी पार्टी में शामिल कर टिकिट दे दी . वे अपने जन समर्थन के कारण शायद चुनाव जीत भी जायें. अब पत्रकार माधो बोले , वे जीतें या हारें इससे विधायक वोरा को की फकऱ् नहीं पड़ता है बल्कि इस वक़्त वे हर उस तरह की चाल चल रहे हैं जिससे उनके व सरोज पाण्डेय के बीच किसी भी प्रकार की अंडर हैंड डीलिंग ना दिखे. जैसे कि पिछले चारों महापौर के चुनावों में दिखी थीं यानि आप विधायक पद के लिये हमें सपोर्ट करें , हम महापौर आपका जितवायेंगे. लेकिन इस बार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ,खुद  दुर्ग नगर निगम के चुनाव में नजऱें गड़ाये बैठे हैं. उन्हें यदि किसी भी प्रकार के अंदरूनी खेल का जऱा सा भी अहसास हुआ तो वोरा को मिल सकने वाली किसी निगम की लाल बत्ती वाली गाड़ी , वोरा के लिये मंत्री पद की तरह एक सपना बनकर रह जायेगी.

मधुर चितलांग्या, संपादक, पूरब टाइम्स, भिलाई