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जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग : क्या अपनी गैर जिम्मेदाराना कार्यवाही को प्रमाणित नहीं कर रहे है? मामला बच्चों के स्कूल बैग के वजन का हैं

11/11/2019
पूरब टाइम्स, रायपुर, दुर्ग . भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने सन् 2018 में सर्कुलर निकाल कर स्कूली बच्चों के बस्ते का वजऩ तय कर दिया था. इस सर्कुलर नं 65/18/2017 ईडीएन(एडब्ल्यू) /1230 दिनांक 20.11.2018 के अनुसार क्लास 1-2 में 1.5 किलो तक व क्लास 10 में अधिकतम 5 किलो तक बस्ते का वजऩ हो सकता है. व्यथा का विषय यह है कि बच्चों के स्कूली बैग का वजन, किस कक्षा में कितने तक होना चाहिए और इसके लिए बनाये गए नियम कानून क्या है ? इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी सार्वजनिक नहीं कर रहे थे . पूरब टाइम्स की खबरों के बाद , अब समाजसेवी संस्थाओं व पालकों के द्वारा प्रशनांकित करने के बाद , हर स्कूल की हर क्लास में प्रचलित किताबों की सच्ची जानकारी लेकर , हर क्लास के बस्ते , को भौतिक रूप से सत्यापित करने की जगह , सीधे पालकों को वेब साइट के अनुसार बस्ते का वजन जांचने के लिये , जिला शिक्षा अधिकारी का पत्र समझ के बाहर है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ..

स्कूल बैग के वजन मामले में दुर्ग डी. ई.ओ की कार्य पद्धति और पत्र व्यवहार तानाशाही क्यो लगता है ?
दुर्ग जिले के स्कूलों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को भारी भरकम वजन ढोने के लिए बाध्य होना पड़ रहा है . इस मामले में पालक अपना पक्ष सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं . जिसका कारण यह है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अधिकारियों ने स्कूल बैग के वजन को नियमानुसार करने के लिए कोई व्यवहारिक कार्यवाही नहीं की है.  इस मामले को लेकर पालक और समाज सेवी जिला मुख्यालय क्षेत्र के विधायक के समक्ष भी अपनी व्यथा प्रस्तुत कर चुके है . उल्लेखनीय है कि विधायक अरुण वोरा ने बकायदा पत्र लिखकर दुर्ग डी. ई.ओ को पालकों की व्यथा से अवगत कराया है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई . सूत्रों के अनुसार जब दुर्ग डी. ई.ओ ने विधायक के पत्र को महत्व नहीं दिया तो विधायक अरुण वोरा ने पालकों की शिकायत को अपने निजी पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को अवगत कराया है.  अब आने वाला समय बताएगा कि मुख्य मंत्री कार्यालय इस गंभीर मामले में क्या प्रतिक्रिया करेगा ? 

स्कूल बैग मामले में समाज सेवकों और गैर शासकीय संगठनों का क्या दृष्टिकोण है ? 
स्कूल बैग मामले में समाज सेवकों और गैर शासकीय संगठनों का क्या दृष्टिकोण है ?
स्कूल बैग मामले में फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं ने जिला शिक्षा अधिकरी के पत्र पर प्रतिक्रिया करके उनको प्रश्ना अंकित कर दिया है और अभिलीखीत किया है कि पालको और बच्चों को उनके अधिकारों से वंचित करने वाली विषम परिस्थिति उत्पन्न करके जिला शिक्षा अधिकारी दुर्ग ने स्कूली बच्चों के अधिकार पर अतिक्रमण कर दिया है और विधि निर्देश का सुनियोजित अवमान करके अपने पदेन प्राधिकार का दुरुपयोग करने वाले कर्याचरण का उदाहरण स्थापित किया है  . जिससे पालक व्यथित हैं . 

पालको ने विधिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी से मांगी है
पालको ने पुस्तकों कि सूची के साथ वांछित जानकारी को स्पष्ट कर कहा है कि कृपया पहली से बारहवीं तक की कक्षाओं की पुस्तकों के नाम, प्रकाशकों के नाम व पुस्तकों का वजन की जानकारी कक्षावार प्रदान करने की कृपा करें जिससे कि स्कूल बैग के अंदर के पुस्तकों का वजन स्पष्ट हो सके और पालक अपने स्तर पर अपने बच्चे का स्कूल बैग का वजन करके यह निष्कर्ष निकाल सकेंगे कि पुस्तकों का, कॉपी का और स्कूल बैग का वजन कितना है ? आप कक्षावार विधि मान्य पाठ्यक्रमानुसार पुस्तकों का नाम, प्रकाशकों का नाम और पुस्तकों का वजन की सूची, कक्षावार प्रदान करेंगे और आपके संदर्भित पत्र से उत्पन्न विषम परिस्थिति से छात्रों और पालकों को निजात दिलाएंगे तथा इस विषय पर अपने पदेन कर्तव्य का निर्वहन करके उक्त विषम परिस्थिति का सार्थक निदान करेंगे इस प्रकार की लिखित प्रतिक्रिया अंजुमन फाउंडेशन ने की है .