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सांसद विजय बघेल और सुनील सोनी क्या अपने-अपने जिले के पर्यावरण और लोक स्वास्थ्य के प्रति वाकई सजग है ?

02/11/2019
जानिए क्यों खतरनाक स्थिती में है दुर्ग और रायपुर जिले का लोक स्वास्थ्य ?

नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (MSW), जिसे शहरी ठोस अपशिष्ट भी कहा जाता है, एक अपशिष्ट प्रकार है जिसमें मुख्य रूप से घर का कचरा (घरेलू अपशिष्ट) और कभी-कभी वाणिज्यिक अपशिष्ट भी शामिल होता है जिसे एक दिए गए क्षेत्र से नगरपालिका एकत्रित करती है यह कचरा या तो ठोस रूप में होते हैं या अर्ध-ठोस रूप में होता है आम तौर पर इसमें औद्योगिक घातक अपशिष्ट शामिल नहीं होता अवशिष्ट कचरा शब्द, घरेलू स्रोतों से बचा हुआ कचरा है जिसमें ऐसी सामग्री शामिल है जिसे अलग नहीं किया गया है या पुनप्र्रसंस्करण के लिए नहीं भेजा गया है इस कचरे में प्राकृतिक तरीके से सडऩशील कचरा, भोजन और रसोई का कचरा, हरित कचरा, होता है इसमें बडी मात्रा में पुनर्नवीनीकरण योग्य सामग्री: कागज, कांच, बोतल, डब्बे, धातु, कुछ ख़ास प्लास्टिक आदि भी सम्मलित होता है इसमें अक्रिय कचरा जैसे निर्माण और विध्वंस कचरे, गंदगी, पत्थर, मलबा. मिश्रित अपशिष्ट: बेकार कपड़े, टेट्रा पैक, बेकार प्लास्टिक जैसे खिलौने भी सम्मिलित होता है उललेखनीय है कि इसमें घरेलू खतरनाक अपशिष्ट और विषाक्त अपशिष्ट: जैसे दवाएं, ई-कचरा, पेंट, रसायन, प्रकाश बल्ब, फ्लोरोसेंट ट्यूब, स्प्रे कैन, उर्वरक और कीटनाशक कंटेनर, बैटरी, जूता पॉलिश. का मिश्रण होता है जब यह आलग- अलग प्रकार का कचरा मिल जाता है और इसमें रासायनिक क्रियाएं होती है तो पर्यावरण और लोक स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक हो जाता है।

पर्यावरण मामलों कि अनदेखी करने वाले क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय भिलाई तथा रायपुर की अनियमितताओं का क्या सांसद विजय बघेल और सुनील सोनी संज्ञान लेंगे ?
केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय छत्तीसगढ़ राज्य के लोक स्वास्थ्य को संरक्षित करने में विफल नजर आता है इस विषय पर कार्य कर रहे विषय विषेशज्ञों से चर्चा करने पर यह स्पष्ट हुआ है कि छत्तीसगढ़ राज्य से निर्वाचित भजपा सांसद अपने क्षेत्र के नगरीय निकायों के द्वारा नियमानुसार प्रतिवर्ष भेजे जाने वाले विवरण और वार्षिक प्रतिवेदन का संज्ञान नहीं लेते हैं जिसका फायदा लेकर स्थानीय नगरी निकाय के अधिकारी अपनी कार्यवाही प्रक्रिया की गलतियों को छिपाने के लिए मनगढ़ंत व्यौरा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रीय अधिकारी कार्यालय को भेजते हैं इसी गैर व्यवहारिक आंकड़ों के आधार पर केंद्रीय पर्यावरण संरक्षण मंडल अपना निर्णय लेकर कार्यवाही करता है क्योंकि नगरी निकाय द्वारा भेजा गया विवरण मनगढ़ंत होता है और उसके आधार पर राज्य और केंद्र का वार्षिक प्रतिवेदन तैयार किया जाता है इस कारण अनियमितताओ को कागजी खानपूर्ति में छिपा लेने का तथाकथित अपराध करने में निगम आयुक्त सफल हो जाते है उल्लेखनीय है कि जब काल्पनिक आंकड़ों के आधार पर आधारित वार्षिक प्रतिवेदन पर ग्रीन ट्रिब्यूनल जैसे निर्णायक भूमिका निभाने वाले न्यायालयीन घटक भी अपनी जिम्मेदारी निभाने तो निश्चित तौर पर इस तरह कारवाही शंकसपद ही रहेगी और लोक स्वास्थ्य संरक्षण उद्देश्य हासिल करने में प्रशासनिक तंत्र विफल ही रहेंगे गौरतलब रहे की यदि सांसद अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभाएंगे और पदेन कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे तो छत्तीसगढ़ राज्य के लोकस्वास्थ्य को बचाने की दिशा में कार्यवाही होगी और भाजपा के प्रति जनता में पहले वाला विश्वास जागेगा।