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गुस्ताखी माफ: मेरा वोट उसको जिसका घोषणा पत्र ऐसा हो-पत्रकार माधो

02/11/2019
आज एक साथी ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि कोई कहता है कि मोदीजी ने उतना कर दिया है जितना पिछली 70 साल की सरकारों ने नहीं किया था . लेकिन अब दिल्ली के लोग कहने लगे हैं कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने इतने बदलाव को मूर्त किये हैं जितना पिछली कोई सरकार नहीं कर पाईं . कोई कहने लगा है कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति के बचाव में भूपेश बघेल सरकार इतना कर रही है जितना कोई आम आदमी सोच भी नहीं सकता था . लेकिन केवल तारीफ से कुछ नहीं होगा , आप लोग बतलाइये कि अब बदलाव की क्या क्या हसरतें बाक़ी हैं ? इससे पहले हममें से कोई मुंह खोल पाता पत्रकार माधो धारा प्रवाह में बोल पड़े . सचमुच कुछ हसरते बाकी है - राम मंदिर , पीओके पर कब्जा , जनसँख्या नियंत्रण पर हम दो हमारा एक कानून , समान नागरिक संहिता , भ्रष्टाचार पर कड़ा कानून , अवैध बंगलादेशियो की वापसी , किसी भी घटना ,चुनावो , मीडिया में जाति ,धर्म के नाम से कुछ भी लिखना बोलना बैन , जाति मुक्त आरक्षण या आरक्षण मुक्त भारत या केवल ज़रूरत के आधार पर आरक्षण, शासकीय कार्यो में जिम्मेदारी का निर्धारण और समय सीमा का निर्धारण, सार्वजनिक जगहों पर गंदगी फैलाने पर और सार्वजनिक सम्पत्ति के नुकसान करने पर कड़ा जुर्माना , अपराध दर्ज , आर्थिक घोटाले , सरकारी जमीनों पर कब्जे पर आपराधिक प्रकरण दर्ज , सरकारी जमीनों , रेलवे स्टेशन ,बस स्टैंडों पर ,फुटपाथ पर बगैर अनुमति के बनते मन्दिर , दरगाह , मस्जिदों , चर्चो , धर्मस्थलो पर बुलडोजर ,धर्मस्थलो की सम्पत्तियो को एक सीमा के बाद देश हित में उपयोग करने का कानून , धर्म स्थलों से राजनीति , भड़काऊ भाषणो फतवो पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो ! शिक्षा ,स्वास्थ्य और निराश्रित , दिव्यांगों ,बुजुर्गों ,बच्चो पर योजनाओं को छोड़कर बाकी सभी मुफ्तखोरी योजनाओ खासकर निर्धन विवाह , प्रसूति भत्ता , तीर्थ यात्रा ,हज सब्सिडी , मुफ्त यात्रा , मुफ्त राशन , मोबाईल बंद ! और पान , गुटखा , कत्था पर बैन ! यह सब सुनकर हम सब बोलने की जगह तालियां बजाने लगे.
- परिकल्पना, साभार
कल्पेश पटेल, रायगढ़ की पोस्ट से