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अपने नए माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बनेगा बाला

20/10/2019
दुर्ग के मातृछाया में बदली दिव्यांग बाला की जिंदगी

दुर्ग।  इटली से आई दंपति ने एक बच्चे को गोद लिया। लंबे अरसे इस दंपत्ति की सूनी गोद में अब खुशियां पहुंची हैं। जिस मासूम को 11 महीने की उम्र में असल मां-बाप ने अपाहिज मानकर छोड़ दिया था। वह बच्चा अब इटली में रहेगा पढ़ेगा और अपने नए माता-पिता के बुढ़ापे का सहारा बनेगा। मातृछाया नाम की संस्था ने इस बच्चे की 4 सालों तक देख-रेख की। संस्था के डॉ सुधीर हिशीकर ने बताया कि गोद दिए गए बच्चे का नाम बाला है। सही देख रेख की वजह से अब वह बेहद स्वस्थ है। इंटरनेट से मिली जानकारी उन्होंने बताया कि 11 महीने की उम्र में यह हमारे पास आया था। इसके असल माता-पिता ने अस्पताल में इसे छोड़ दिया था महिला एवं बाल विकास विभाग ने हमें इसकी देखभाल की जवाबदारी दी। इंटरनेट में हम बच्चों की जानकारी अपलोड करते हैं। कोई भी इन बच्चों को गोद ले सकता है। यही देखकर इटली से मोरोएलियन अपनी पत्नी निगरीस वेलेनिटना के साथ आए। लीगल औपचारिकताओं के बाद बच्चा उन्हें सौंपा गया। मोरो पेशे से आर्किटेक्ट हैं उनकी पत्नी एक फिजियोथेरेपिस्ट हैं।



दुर्ग की मातृछाया संस्था पिछले 6 सालों से इस क्षेत्र में काम कर रही है। अब तक 51 बच्चों का एडॉप्शन हुआ। इससे पहले 3 बच्चों को अमेरिका की दंपति गोद ले चुकी हैं। डॉ. सुधीर ने बताया कि दिव्यांग या मामूली स्वास्थ सम्बंधी परेशानियों के चलते भारतीय दंपति बच्चों को गोद नहीं लेना चाहती इन मामलों में विदेशी जोड़ों की सोच बिल्कुल अगल है। हमारी संस्था के बार झूला लगा हुआ है। लोग यहां अपने बच्चों को छोड़ जाते हैं। वर्तमान में हमारे यहां 6 बच्चे रह रहे हैं इनमें दो महज दो महीने के हैं।