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दुर्ग नगर निगम: क्या कांग्रेसी युवराज अरुण वोरा मूकदर्शक बनकर राजनैतिक रोटियां सेकते रहेंगे ?

18/10/2019
पूरब टाइम्स , दुर्ग . इस बार नगर निगम के महापौर का चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से होने से कई बड़े राजनेताओं की योग्यता की परीक्षा होने वाली है जिनमें से एक होंगे , दुर्ग शहर के विधायक अरुण वोरा . पिछले कई चुनाव हारने के बाद भी उन्हें बराबर विधायक पद के लिये कांग्रेस ने प्रत्याशी घोषित किया उसका कारण शायद दिल्ली के हाई कमान में , मोतीलाल वोरा की घुसपैठ मानी जाती रही . केवल इतना ही नहीं वे लोग दुर्ग में 20 सालों से अपना महापौर नहीं जितवा पाये. दबी ज़ुबान से अनेक राजनेताओं का कहना है कि यह सब , भाजपा की एक नेत्री के साथ ,  एक अंदरूनी पैक्ट के कारण होता था . लेकिन इस बार यह कर पाना संभव नहीं है क्योंकि इस बार की हार से , प्रदेश कांग्रेस सरकार के मुखिया कुपित होकर , अरुण वोरा को मिल सकने वाली लाल बत्ती पर हमेशा के लिये रोक लगा दें.  पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...

इस बार प्रदेश में कांग्रेस सरकार होने से पिछली भाजपा की शहर सरकार के विरुद्ध ये मामले गरमायेंगे 
- निगम क्षेत्र के अतिक्रमण, अवैध निर्माण और सार्वजनिक प्रयोजन की भूमि के दुरुपयोग के मामलो में स्पष्टीकरण देने पड़ेंगे 
-यह स्पष्ट करना पड़ेगा की निगम क्षेत्र में झोला छाप डाक्टर और अवैध अस्पताल को संरक्षण क्यों दिया जा रहा है ?
- निगम क्षेत्र की साफ-सफाई, सड़क-नाली निर्माण और सौदारिकरण एवं प्रकाश व्यवस्था पर किये गए व्यय का
लेखाजोखा का भी होगा पुनरीक्षण
-आम जनता , जलग़ृह कॉम्प्लेक्स व गंज मंडी कॉम्प्लेक्स में हुए करोड़ों के भ्रष्टाचार की जांच ना करवाने के लिये पूर्व महापौर व उनकी पार्टी को घेरेगी , व्हं इन मामलों में विधायक अरुण वोरा की चुप्पी के कारण उनपर भी संदेह किया जायेगा 
दुर्ग नगर निगम की अनियमितता का खुलासा करेगी ऑडिट रिपोर्ट
दुर्ग नगर निगम की ऑडिट रिपोर्ट आने वाले समय में कई राजनैतिक मामलों का मसाला राजनैतिक मुद्दों के रूप में देने वाली है .  सूत्रों के अनुसार दुर्ग सिट के एक राजनैतिक दावेदार ने प्रोफेशनल सलाहकार चुनावी  रणनीति बनाने के लिए हायर किया है ,जिसने निगम ऑडिट रिपोर्ट में प्रकाशित कई ज्वलंत मामले ऑडिट रिपोर्ट से निकाले है . ये मामले सीधे मतदाताओं को प्रभावित करेंगे इन मामलों को ऑडिट रिपोर्ट की प्रमाणिकता के आधार पर जनता के समक्ष प्रस्तुत किया जायेगा.  इस सुनियोजित राजनैतिक हलचल का असर सीधे युवराज अरुण वोरा को प्रश्नाकित करेगी क्योकि अरुण वोरा ने दुर्ग निगम के भ्रष्टाचार पर कभी भी प्रतिक्रिया नहीं की और कभी भी जनता के समक्ष यह सुनिश्चित नहीं कराया कि निगम अनियमितता के  मामलों में दुर्ग विधायक अपने पदेन जिम्मेदारी निभाता है . इस राजनैतिक हलचल से कांग्रेस के गुट भी आमने-समाने नजर आयेंगे और भाजपा के दावेदार भी प्रभावित होंगे भाजपा और कांग्रेस के बड़े दिग्गज मोतीलाल वोरा और सरोज पाण्डेय भी अपने ही दुर्ग में उलझ जायेंगे .

क्या वाटर फिटर प्लांट का पेय जल स्वास्थ्य वर्धक है ?
दुर्ग निगम का वाटर फि़ल्टर प्लांट जन स्वास्थ्य को सुरक्षित करने के लिए कितना काम कर रहा है इसका आकलन करने के लिए जनता उन आकड़ो और दस्तावेजो को पब्लिक डोमेन पर लाने की मांग कर रही है , जिससे यह स्पष्ट हो सके है कि दुर्ग निगम क्षेत्र में पीलिया और अन्य संक्रामक बीमारियाँ क्यों फैलती है ? इस मामले में कई बार आरोप प्रत्यारोप हुए लेकिन सभी कार्यवाही अब तक निगम अभिलेखों में दफन है  . जन स्वास्थ्य से सीधे जुडा यह मामला आने वाले समय में मतदाताओ को आकर्षित करेगा और इस मामले को जो भी उठायेगा वह जनता के लिए आकर्षण का केंद्र होगा .

क्या दादा-दादी और नाना-नानी पार्क व्यय का हिसाब-किताब होगा
वरिष्ट नागरिक को प्रभावित करने के लिए तत्कालीन महापौर सरोज पाण्डेय ने दादा-दादी और नाना-नानी पार्क निर्माण कार्य कराया था लेकिन इसके बाद के महापौर कार्यकाल में ये पार्क निगम अवहेलना का शिकार हो गए अब इन पार्क में उपलब्ध सुविधाए वैसी नहीं रही जैसे तब थी इसलिए इस पार्क के जीर्णोधार का मुद्दा वरिष्ट नागरिको को प्रभावित करने वाला है