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सीएसवीटीयू की दास्तान: क्या कचरे के ढेर पर पनपेंगे छत्तीसगढ़ के भावी तकनीकि विशेषज्ञ ?

17/10/2019

पूरब टाइम्स . भिलाई की शान बना छत्तीसगढ़ स्वामी विवेकानंद तकनीकि युनिवर्सिटी (सीएसवीटीयू ) आजकल कचरे के ढेर से ढंका हुआ दिखता है .  इस कैम्पस के लिये पहुंच मार्ग पूरी तरह से कचरे , गन्दगी के ट्रेंचिग मैदान पर से गुजऱता है जहां  हर वक़्त भिलाई स्टील प्लांट व निगम का कचरा फेंकते हुए देखा जा सकता है .  आलम यह है कि जब भी ज़ोर से हवा चलती है पूरा विश्व विद्यालय कैम्पस बदबू से भर जाता है . पूर्व में भी इस गन्दगी को लेकर कतिपय पारषदों व स्थानीय निवासियों ने प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया था परंतु तब की सरकार के स्थानीय मंत्री के कानों में जूं नहीं रेंगी . अब भी विद्यार्थी, संस्थान का पूरा स्टाफ व स्थानीय निवासी परेशान हैं पर इस समस्या के निदान के लिये कोई सकारात्मक पहल नहीं हो रही है . स्थिति विस्फोटक होने लगी है और किसी भी दिन आंदोलन हो सकता है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट

कचरे के ढेर से घिरा विश्विद्यालय,बना गन्दगी की पहचान

प्रदेश का तकनीकि विश्वविद्यालय इन दिनों कचरे के ढेर से अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है . स्थानीय नेता जिन्होंने इसके उद्घाटन भाषण में बड़ी-बड़ी बाते करके इस विश्वविद्यालय को महिमामंडित मंडित किया था वे उस समय अति उत्साह के चलते इस कचरे के ढेर को शायद देख नहीं पाए थे क्योंकि तब इस कचरे के ढेर ने अपना विकराल रूप नहीं लिया था लेकिन अब स्थिति आ गयी है कि मुख्य सड़क से देखने पर यह विश्व विद्यालय अपने अस्तित्व को बचाने के लिए अपनी बिल्डिंग की ऊंचाई के सहारे संघर्ष करता दिखाई पड़ता है . मुख्य सड़क से विश्वविद्यालय की सड़क जहाँ मिलती है भ्रष्टाचार और माफिया संरक्षण का एक जीता जागता सबूत स्थानीय प्रशासन को ललकारता हुआ दिखाई पड़ता है . पर विडंबना यह है कि बीएसपी के बड़? अधिकारियों , छात्र राजनीति से मुख्य राजनीतिक धारा अपना स्थान बनाने वाले महापौर देवेन्द्र व वर्तमान में सरकार के बड़े नुमाइंदों   की वीआईपी गाडियों से इन्हें कचरे दिखाई नहीं पड़ता है . अवैध टेंचर ग्राउंड में तब्दील विश्विद्यालय का कैम्पस इनकी उदासीनता को भी प्रमाणित करता है।

पर्यावरण मंडल और प्रशासन कचरे के अवैध संधारण पर खामोश क्यों है ?

विश्वविद्यालय प्रशासन कचरे के अवैध ढेर पर खामोश क्यों है ?इसका पता लगाने का प्रयास किया गया तो तथाकथित चौकाने वाला तथ्य सामने आया कि इस विश्वविद्यालय कैपस को मुरम माफिया ने खोद कर विकृत रूप दे दिया है, अवैध तरीके से मुरुम निकलकर बेच दी गई है . ऐसा लगता है कि जब यह अवैध धंधा चल रहा था तब विश्वविद्यालय प्रशासन मौनानुकुलता से मुरुम माफियाओ को संरक्षण दे रहा था और नेताओ और प्रशासन ने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया . टनों में एकत्रित यह कचरा अपनी बदबू और गंदगी से अब आम जनता के साथ-साथ प्रेस और मिडिया का ध्यान आकर्षित करने लगा है इसलिए क्या अब प्रशासन इस अनियमितता को छिपाने के लिए इन अवैध जानलेवा गढ़ों को कचरे से पाट रहा है ? इस बात् को मौके पर जाकर अनुभव किया जा सकता है .

एन.एस.यू.आई और भारतीय जनता युवा मोर्चा ... मूक दर्शक क्यों ?

विश्वविद्यालय के गंदे कैम्पस और अन्य अनियमित्ताओ पर कांग्रेस और भाजपा के युवा विंग दुबके बैठे है ,जिसका कारण यह दिखाई पड़ता है कि दोनों बड़ी पार्टी के आदमकद राजनितिक ओहदेदार अपने आगे किसी युवा को बर्दाश्त करना नहीं चाहते . क्योकि स्थानीय दोनों जनप्रतिनिधियों को यह मालूम है कि उनकी भी उत्पत्ति ऐसे ही छोटे-छोटे मामलो को उठाने के कारण हुयी है इसलिए अगर इस समय किसी भी छात्र नेता ने अपनी उपस्थिति भिलाई विधानसभा क्षेत्र में दर्ज करा दी तो निश्चित की उनके लिये सिर दर्द पैदा कर सकता है . सुबह-सवेरे झाड़ू लेकर निकलने वाले नेताओ को तकनीकि विश्विद्यालय से निकलने वाला , अंकुरित होने वाला छात्र नेता चुनौती दे सकता है इसलिए यह मामला ठंडे बस्ते में है .