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क्यों कभी जुएं में नहीं हारे शकुनी मामा, उनके जादुई पासों का ये था रहस्य

18/10/2021
पूरब टाइम्स। जब भी महाभारत का जिक्र होता है, उसमें दुर्योधन के मामा शकुनी का नाम जरूर आता है. कहा जाता है कि दुर्योधन के मन में पांडवों के प्रति नफरत का बीज शकुनी मामा ने ही बोया था. शकुनी मामा ने जुए का ऐसा खेल खेला था कि कौरव और पांडव महाभारत के महायुद्ध के लिए तैयार हो गए. इसके बाद कुरु वंश का नाश हो गया. एक धार्मिक कथा के मुताबिक, शकुनी नहीं चाहता था कि उसकी बहन गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र से हो. हालांकि भीष्म पितामह के दबाव में गांधारी का विवाह धृतराष्ट्र से करना पड़ा था. इसके बाद से शकुनी बदले की भावना से हस्तिनापुर आकर रहने लगा था और षड्यंत्र रचने लगा था.

भीष्म पितामह ने एक बार शकुनी के पूरे परिवार को बंदीगृह में डाल दिया था. बंदी गृह में सभी को इतना ही खाना दिया जाता था कि धीरे-धीरे वो सभी तड़प-तड़पकर मर जाएं. बंदी गृह में भूख के कारण शकुनी के सभी भाई आपस में खाने के लिए लड़ने लगे थे. तब इनके पिता ने यह तय किया कि अब से सारा खाना एक ही आदमी खाएगा.

शकुनी के पिता ने कहा था कि हम सभी अपनी जान देकर एक आदमी को बचाएंगे जो हमारे साथ हुए अन्याय का बदला ले सके. इसलिए तय किया गया कि जो सबसे ज्यादा चतुर और बुद्धिमान होगा वही खाना खाएगा. शकुनी सबसे छोटे लेकिन चतुर थे, इसलिए सारा खाना शकुनी को ही मिलने लगा 

अपने परिवार के साथ हुए अत्याचार को शकुनी भूल ना जाएं, इसलिए उनके परिवार ने उनके पैर तोड़ दिए जिससे शकुनी लंगडा के चलते थे. शकुनी के पिता जब बंदी गृह में मरने लगे तब उन्होंने शकुनी की चौसर में रुचि को देखते हुए शकुनी से कहा कि मेरे मरने के बाद मेरी उंगलियों से पासे बना लेना. इनमें मेरा आक्रोश भरा होगा जिससे चौसर के खेल में तुम्हें कोई हरा नहीं पाएगा. इसी के चलते शकुनी हर बार चौसर के खेल में जीत जाते थे. वो पांडवों को इस खेल में हराने में सफल हुए.