Poorabtimes

जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



Detail

जब आसमान में पहली बार देखी गई थी उड़न तश्तरी, 70 हजार लोगों ने देखा था रहस्यमयी नजारा

18/10/2021
पूरब टाइम्स। पृथ्वी के अलावा दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं और उसके जानने को लेकर इंसान हमेशा उत्साहित रहा है. दुनियाभर के वैज्ञानिक भी इस बात की खोज करने में लगे हैं कि क्या पृथ्वी के अलावा भी किसी दूसरे ग्रह पर कोई रहता है? आसमान में उड़ती उड़नती की कहानियों ने इसे और बढ़ा दिया. दूसरी दुनिया से आने वाले परग्रही एवं उनकी उड़नतश्तरियों के दिखने की घटनाओं ने पूरी दुनिया में ऐसा रोमांच पैदा किया मानो उनके जैसा कोई ना हो. ऐसा माना जाता है कि कई दशकों से वैज्ञानिक इन घटनाओं के पीछे की सच्चाई को आम जनता से छुपाते चले आए लेकिन कुछ घटनाएं बेमिसाल हैं जो बड़ी संख्या में उपस्थित आम लोगों के सामने घटित हुई हैं और वह उनके गवाह बने.

आज हम आपको एक ऐसी ही घटना के बारे में बताने जा रहे हैं जो 13 अक्टूबर 1917 की है. दरअसल, यूरोपीय देश पुर्तगाल के कोवा डा इरिया नामक स्थान पर तीन बच्चों ने पेड़ पर झूलते हुए एक प्रकाश-पुंज को देखा. बताया जाता है कि उस प्रकाश-पुंज के भीतर एक सुन्दर देवी, दिव्य वस्त्रों में खड़ी मुस्कुरा रही थीं. जिसे देखकर बच्चे डर गए और वह वहां से भाग खड़े हुए. तभी उस देवी ने कहा ठहरो! डरो मत, मै ऊपर स्वर्गलोक से आई हूं. अगर तुम लोग इसी समय आया करोगे तो इस दिव्य प्रकाश के साथ मेरे भी दर्शन कर सकोगे बच्चे कौतूहल से एकटक उसी की तरफ़ देख रहे थे. उन्हें वो कोई फ़रिश्ता लग रही थी. शाम होते-होते, लड़कों ने ये बात सब जगह फैला दी.

दूसरे दिन उस गांव और आस-पास के दूसरे गांव से भी कुल लोग मिलकर वहां पहुंचे. इस तरह से वहां सत्तर हज़ार लोग उस जगह इकठ्ठा हो गए जहां उन लड़कों ने देवी के दर्शन की बात बताई थी. इतने अधिक लोगों के इकठ्ठा हो जाने से किसी के कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि सही जगह कौन सी है और कईयों को तो ये बात अफ़वाह भी लग रही थी. समय बीतता गया, लेकिन उन देवी के दर्शन किसी को नहीं हुए. अचानक उन्हें आकाश में, बादलों के बीच, एक चांदी की तरह चमकता हुआ एक दिव्य प्रकाश का गोला दिखाई दिया. वहां उपस्थित दर्शकों में कई पढ़े-लिखे नौजवान और कुछ अनपढ़, आस्तिक, नास्तिक, विद्वान भी शामिल थे.

संबंधित कहानियां
वे सभी लोग उस समय, आकाश में प्रकट होने वाले उस दिव्य प्रकाश के गोले को देखकर आश्चर्यचकित थे और सोच रहे थे कि ‘यह क्या बला है’ बादलों से प्रकट होने के बाद वह चमकदार उड़नतश्तरी स्थिर न रह सकी और आकाश में ही घेरे बनाकर विभिन्न प्रकार की गतियां करने लगी. यह प्रकाश कभी धीरे-धीरे हवा में तैरता हुआ आगे बढ़ता और कभी पलक झपकते ही तेज़ी से एक ओर निकल जाता. हवा में इस प्रकार से कलाबाजियां खाने से, उस उड़नतश्तरी से, इन्द्रधनुषी आकृतियाँ बनने लगीं.

बताया जाता है कि बहुत समय तक उस उड़नतश्तरी के ऊपर इन्द्रधनुष उभरा रहा. उस इन्द्रधनुष का घेरा काफी बड़ा था. उस समय हल्की-हल्की बारिश हो रही थी. दर्शकों का एक विशाल हूजूम एक अभूतपूर्व घटना का साक्षी बना हुआ था. उनका मनोरंजन करती हुई उस उड़नतश्तरी ने अचानक पूरे दर्शकों के समूह का एक चक्कर लगया और गर्म-तरंगो की एक लहर छोड़ी. जिसके परिणामस्वरूप वहां उपस्थित दर्शकों के कपड़ों से भाप उठने लगी और उनके कपड़े मिनटों में सूख गए. इस घटना की जानकारी फैलने पर पूरे पुर्तगाल में तहलका मच गया.

वहां के एक प्रसिद्ध, दैनिक समाचार पत्र मार्से क्यूलों ने इस घटना का आंखों देखा विवरण छापा और इसे चमकदार सूर्य का नृत्य नाम दिया. पढ़े-लिखे, मॉडर्न और वैज्ञानिक जैसी सोच वाले लोगों को इस घटना के घटित होने में संदेह था. उनके हिसाब से ये एक प्रकार का Mass Hypnotism था. एक बड़ी संख्या में लोगों ने वही देखा और महसूस किया जो उन्हें दिखाया गया.

कहानी एक ऐसे ग्रह की जहां एक साथ फटे थे 37 ज्वालामुखी, हैरान करने वाला है रहस्य
पूरी पृथ्वी पर जहां कहीं भी उड़नतश्तरियों के देखने की घटना हुई है वहां उसके गवाह, दो, चार लोग ही बने. एक साथ इतनी बड़ी संख्या में लोगों द्वारा, दूसरी दुनिया के परग्रहियों की उड़नतश्तरी देखने की यह घटना अपने आप में अनोखी है. जो इसका प्रमाण देने के लिए काफ़ी हैं कि हमसे भी उन्नत सभ्यतायें और संस्कृतियां, इस ब्रह्माण्ड के अन्य ग्रहों पर हैं और हमारी धरती पर वह बेरोकटोक आ जा सकती हैं.