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इस मंदिर में क्यों है 25 हजार से ज्यादा चूहे मौजूद, यह है एक पहेली

31/08/2021
पूरब टाइम्स। भारत में आपको ऐसे कई रहस्यमय मंदिर मिल जाएंगे, जो अपने विशेष कारणों से भक्तों के बीच काफी प्रसिद्ध हैं। इन मंदिरों के रहस्यों से अब तक विज्ञान भी पर्दा नहीं उठा पाया है। हर साल बड़ी मात्रा में श्रद्धालु इन मंदिरों में अपने भगवान की पूजा करने के लिए जाते हैं।  मान्यता है कि इस मंदिर में कई सारे रहस्य छिपे हुए हैं, जिन्हें आज तक कोई नहीं जान पाया है। ये मंदिर राजस्थान के बीकानेर शहर से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इस मंदिर में करीब 25 हजार से भी ज्यादा चूहे मौजूद हैं। आखिर इस मंदिर में इतने सारे चूहे क्यों है? ये आज तक एक पहेली का विषय बना हुआ है। मंदिर में चूहों की इतनी बड़ी तादाद क्यों है? इस रहस्य से विज्ञान भी अब तक पर्दा नहीं उठा पाया है। 
आइए जानते हैं इस मंदिर के बारे में -

माता करणी के इस मंदिर में कई सारे चूहों को विभिन्न तरह के पकवानों का भोग लगावाया जाता है। बाद में चूहों द्वारा लगाए गए भोग के झूठे प्रसाद को भक्तजनों के बीच वितरित किया जाता है। मान्यता है कि माता के मंदिर में जो भी आता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस मंदिर का निर्माण बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था। कहा जाता है कि माता करणी मां दुर्गा की साक्षात अवतार हैं। अगर इतिहास पर गौर करें तो  1387 ईसवी में माता करणी का जन्म रिघुबाई के नाम से एक शाही परिवार में हुआ था। विवाह के बाद उनका सांसारिक मोह माया से लगाव टूट गया और वे एक तपस्वी का जीवन जीने लगीं।

उस दौरान आस पास के गांवों में उनकी धार्मिक और चमत्कारी शक्तियों की ख्याती काफी फैल रही थी। इस कारण दूर-दूर से कई लोग माता के दर्शन के लिए आने लगे। कई इतिहासकारों का ये तक कहना है कि माता करणी करीब 151 साल तक जिंदा रहीं। तब से लेकर आज तक माता के कई भक्त उनकी श्रद्धापूर्वक पूजा करते हैं। करणी माता के मंदिर में करीब 25 हजार से भी अधिक चूहे मौजूद हैं। कहा जाता है कि ये चूहे माता करणी के वंशज हैं। शाम को मंदिर में जब माता की संध्या आरती होती है, उस दौरान सभी चूहे अपने बिलों से बाहर आ जाते हैं। भारी मात्रा में यहां पर चूहों के होने की वजह से इस मंदिर को मूषक मंदिर भी कहा जाता है। गौरतलब बात है कि 25 हजार से भी ज्यादा चूहे होने के बाद भी इस मंदिर में किसी भी प्रकार की दुर्गंध नहीं आती है। वहीं आज तक इस मंदिर में चूहों से कोई बीमारी भी नहीं फैली है।