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महामारी के कारण आदिवासी महिला कलाकार ने ऑनलाइन पेंटिंग बेचकर अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा किया

22/07/2021
इंटरनेट मीडिया पर तीन घंटे में 45 हजार में बिक गईं गोंड चित्रकार बालमती टेकाम की सात पेंटिंग्‍स। खरीदारों में देश-विदेश के कलाप्रेमी।

भोपाल। कोरोना संक्रमण के कारण हुए लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशानी कलाकारों को हुई है। राजधानी भोपाल में डिंडोरी के कई गोंड चित्रकार रहते हैं, जो अपनी कला के माध्यम से अपनी आजीविका चलाते हैं। इन्हीं में से एक हैं बालमती टेकाम। हालात ऐसे हो गए थे कि बालमती को अपनी चार साल की बेटी की मिठाई की मांग को पूरा करने के लिए साइकिल बेचनी पड़ी थी। थोड़े दिन बाद एक संस्था की मदद से उन्होंने अपनी बादल वाले आसमान समेत सात पेंटिंग्‍स इंटरनेट मीडिया पर डालीं और तीन घंटे में ही इनके ग्राहक मिल गए। बालमती की ये पेंटिंग्स 45 हजार रुपये में बिकी हैं। इन पैसों से उन्‍होंने अपने घर का किराया और परिचितों से लिया उधार चुकाया है। बालमती ने अब ऑनलाइन माध्यम को ही पेंटिंग बेचने का जरिया बना लिया है।

बालमती डिंडोरी का रहने वाली हैं, लेकिन वह पिछले दस साल से बाणगंगा इलाके में किराए के मकान में रह रही हैं। उनके परिवार में पति और दो बच्‍चे हैं। छह साल का बेटा और चार साल की बेटी। कोरोना काल से पहले बालमती ट्राइबल को-ऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया (ट्राइफेड) के लिए काम कर रही थीं। उन्हें ट्राइफेड को पेंटिंग देने के बदले सालाना करीब 25,000 रुपये मिलते थे। उनके पति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय, भोपाल में सफाई कर्मचारी के रूप में काम करते थे, उन्हें 8,000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। बालमती का जीवन सुचारू रूप से चला, लेकिन महामारी ने उनके पति की नौकरी छीन ली और ट्राइफेड ने पेंटिंग लेना भी बंद कर दिया। पिछले दिनों चार महीने तक किराया नहीं देने पर मकान मालिक ने मकान खाली करने को कहा। वे तीन हजार रुपये महीना मकान किराया नहीं दे पा रहे थीं।

बादल वाले आकाश से फूटी आशा की किरण : फिर, बादल वाले आकाश में आशा की एक किरण फूट पड़ी। वह बताती हैं कि मैंने सामाजिक कार्यकर्ता पूजा अयंगर से संपर्क किया और उन्हें अपनी समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने पहले हमें राशन दिया। फिर इंटरनेट मीडिया के माध्यम से पेंटिंग बेंचने के लिए कहा। बालमती कहती हैं कि पूजा मैडम उनके लिए एक फरिश्ता बनकर आईं, क्योंकि जब उन्हें सबसे ज्यादा मदद की जरूरत थी तब उन्होंने मदद की।

आदिवासी महिला कलाकार का कहना है कि उन्‍होंने इन पैसों से घर का किराया और कर्ज चुकाया, जो अपने परिचितों से लिया था। उसने कैनवास और रंग भी खरीदे हैं। बालमती कहती हैं कि मेरे पति और मैंने गरीबी से बाहर निकलने के लिए कुछ और पैसे पाने की उम्मीद में कैनवास और कागजों पर 40 पेंटिंग्‍स बनाई हैं, जिनमें से ज्यादातर छोटी हैं। बालमती का कहना है कि उन्हें सरकार और ट्राइफेड से कोई सहयोग नहीं मिला, जबकि बरसात के दिन अभी बाकी हैं। बालमती कहती हैं कि वह आगे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। यही उन्‍होंने अपने पूरे जीवन में किया है।

बालमती टेकाम ने हमसे संपर्क किया, तो हमने उनकी सात पेंटिंग्‍स और एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उसके सभी काम तीन घंटे के भीतर बिक गए। खरीदार भोपाल, अमेरिका में न्यू जर्सी, गोवा, चेन्नई, बेंगलुरु और दिल्ली से थे। पेंटिंग 45 हजार में बिकीं। हमने कलाकार को 29 हजार रुपये दिए हैं। जब हमें खरीददार से बाकी रकम मिल जाएगी, तो हम उसे भेज देंगे।