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किसानों को वर्मी खाद खरीदने के लिए बाध्य करना अनुचित, यह ऐच्छिक अधिकार : पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह

03/07/2021
पूरब टाइम्स रायपुर।  भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रदेश में सहकारी समितियों में दो बोरी वर्मी खाद खरीदने की शर्त पर किसानों को यूरिया व डीएपी खाद देने की बात सामने आ रही है। इसे देखते हुए उन्होंने प्रदेश सरकार के पूरी तरह किसान-विरोधी चरित्र पर कड़ा ऐतराज जताया है। डॉ. सिंह ने कहा कि जिस प्रदेश सरकार ने गोबर खरीदी योजना को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और उसमें अपनी वाहवाही लूटने का प्रयास किया। सरकार का दो रुपए में गोबर खरीदकर अब उसे 10 रुपए प्रति किलो की दर पर किसानों को खरीदने के लिए बाध्य करना प्रदेश के किसानों के साथ खुला अन्याय है।

भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि दो बोरी वर्मी खाद खरीदने की अनिवार्यता कर राजीव गांधी न्याय योजना की ढिंढोरची प्रदेश सरकार किसानों के साथ कौन-सा न्याय कर रही है? डॉ. सिंह ने कहा कि कोई भी सरकार किसी भी चीज को खरीदने के लिए किसी को भी बाध्य नहीं कर सकती। यह खरीददार का ऐच्छिक अधिकार है।


प्रदेश सरकार वर्मी खाद खरीदने के लिए किसानों को प्रेरित भले ही करे, परंतु कर्ज में खाद लेने वाले किसानों को वर्मी खाद लेने के लिए बाध्य करना अनुचित है। खेतों में गोबर या गोबर की खाद किसान डालें, हम उसके विरोधी नहीं हैं। मगर, प्रदेश सरकार किसानों को यह खरीदने के लिए बाध्य कैसे कर सकती है? डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की भी एक योजना चल रही है, जिसमें किसान अपने घर में ही गोबर की खाद बनाकर अपने खेतों में डाल सकता है।

उसमें किसानों को दो रुपए का गोबर 10 रुपए में नहीं पड़ेगा और सहज प्रक्रिया से किसान खुद उसे तैयार कर लेगा। डॉ. सिंह ने सवाल किया कि केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजना के बीच प्रदेश सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों को दोहरी आर्थिक चोट पहुंचाने और उनके साथ धोखाधड़ी करने पर क्यों आमादा है? भाजपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. सिंह ने कहा कि भाजपा ने शुरू में ही यह दावे के साथ कहा था कि प्रदेश सरकार किसानों की एक जेब में नाममात्र के रुपए डालकर दूसरी जेब पर डाका डालने का काम करेगी।