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छत्तीसगढ़ सरकार ने ब्लैक फंगस को सूचनीय रोग घोषित किया है , केंद्र शासित प्रदेशों में इसे महामारी घोषित किया गया है

23/05/2021
पूरब टाइम्स रायपुर।  छत्तीसगढ़ में सरकार ब्लैक फंगस को महामारी कहने से बच रही है। विधि विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन के बाद इसे सूचनीय रोग घोषित कर दिया गया है। इसकी अधिसूचना शनिवार देर रात जारी हुई। अब सरकारी और निजी अस्पतालाें को ब्लैक फंगस के प्रत्येक पुष्ट अथवा संदिग्ध केस की जानकारी जिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को देना अनिवार्य होगा।

स्वास्थ्य विभाग की अधिसूचना के मुताबिक अब ब्लैक फंगस अथवा Mucormycosis को नोटिफिएबल डीजीज अथवा सूचनीय रोग घोषित किया गया है। अब प्रदेश के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों को ब्लैक फंगस (Mucormycosis) की स्क्रिनिंग, पहचान, प्रबंधन के संबंध में छत्तीसगढ़ सरकार, ICMR और केंद्र सरकार की ओर से समय-समय पर जारी दिशा निर्देशों का पालन करना होगा। प्रदेश के सभी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को ब्लैक फंगस (Mucormycosis) के संदेहास्पद या पुष्ट सभी मामलों की जानकारी संबंधित जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी देना अनिवार्य होगा। शनिवार रात जारी अधिसूचना एक वर्ष के लिए वैध बनाई गई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना ने भी एपिडेमिक डिजीजेज ऐक्ट के तहत इसे सूचनीय रोग ही घोषित किया है। हालांकि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, चंडीगढ़, ओडिशा, उत्तराखंड और गोवा जैसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ब्लैक फंगस को अधिसूचित संक्रामक रोग यानी महामारी घोषित किया जा चुका है।

सरकार का तर्क महामारी कहने से डर फैलेगा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि ब्लैक फंगस कोई नई बीमारी नहीं है। यह मैन टू मैन ट्रांसफर भी नहीं होता। इसलिए इसे पूरी तरह संक्रामक रोग कहना ठीक नहीं है। कोरोना संकट के बीच इसे महामारी कहने से लोगों में डर फैल जाएगा। इसकी निगरानी और इलाज की बेहतर व्यवस्था के लिए नोटिफिएबल डिजीज घोषित कर दिया गया है। अब किसी संदिग्ध मामले की जानकारी भी सरकार तक पहुंचेगी। इससे नियंत्रण में आसानी होगी।

सरकारी आंकड़ाें में 100 से अधिक मरीज
प्रदेश सरकार के सरकारी आंकड़ों में ब्लैक फंगस के 100 से अधिक मरीजों का इलाज जारी है। इनमें से 78 मरीज तो रायपुर एम्स में ही भर्ती हैं। रायपुर और दुर्ग जिले को सबसे अधिक प्रभावित बताया जा रहा है। दुर्ग जिले में 23 मरीजों की पहचान हुई है। प्रदेश में ब्लैक फंगस से मौत का पहला मामला भी दुर्ग के भिलाई में ही आया था। शुक्रवार को भी ब्लैक फंगस से मौत हुई।