Poorabtimes

जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



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शेर ओ सुखन- 14

20/09/2019

पिछले कई हफ्तों में मैंने मज़ेदार शायरिया , जोश भर देने वाली , दोस्ती पर , मुहब्बत पर , शराबी दिल के जज़्बों को इज़हार करती ,  मंच संचालन के वक़्त बोली जा सकने वाली ,  इंतज़ार करते हुए आशिक़  की भावनाएं प्रकट करने वाली इत्यादि  शायरियां आपके समक्ष प्रस्तुत की थीं . इस रविवार की शायरियां  में  
ये और बात कि वो निभा न सका, 
मगर जो किये थे उसने वादे, वो गज़ब के थे 

महसूस तो कर सकता हूं पर छू नहीं सकता 
वो फूलनहीं , फूलों में खुशबू की तरह है 

कभी चुभा जाऊं तो माफ  करना 
लफ्ज़ मेरे गुलाब के पौधों जैसे हैं. 

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ 
कीजे मुझे कबूल, मेरी हर कमी के साथ

तेरे ही गले लगकर , तेरी ही शिकायत करने का मन करता है 

अंधे निकालते हैं नुख्स , किरदार पर मेरे 
बहरों की शिकायत है , गलत बोलता हूं मैं 

मोहब्बत और बारिश का एक ही रिश्ता है, 
दोनों उमड़े तो बेशुमार बरसते हैं 

अपना गम कल मैंने आसमां को क्या बता दिया 
पूरे शहर ने बारिश मज़ा उठा लिया 

बरसों बाद उसके करीब से गुजऱे, 
जो न संभलते तो गुजऱ ही जाते

कैसी मोहब्बत है तेरी! 
महफिल में मिले तो अनजान कह दिया 
तन्हा जो मिले तो जान कह दिया 

ये दर्द ना ही अश्कों का है , ना ही किसी घाव का है 
सारा किस्सा बस एक दिल के लगाव का है  

तन्हा तन्हा सा पल और आप का अहसास 
इससे बेहतर शायद कुछ नहीं है मेरे पास 

गुरूर हुस्न पर इतना कर की बुरा न लगे 
तू सिर्फ  खूबसूरत लगे , खुदा न लगे 

 ( अगले रविवार फिर से शायरियों का गुलदस्ता )