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तथाकथित ‘छोटे मुख्यमंत्री’ का अवांछित राजनैतिक हस्तक्षेप कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करने का कारण बन गया है क्या?

05/05/2021
तथाकथित छोटा मुख्यमंत्री , कांग्रेस को जनता की अदालत के कटघरे में खड़ा करवाने वाली गतिविधियां क्यों कर रहा है ?

भिलाई निगम के पूर्व महापौर के चुनाव प्रचार के दौरान तथाकथित छोटे मुख्यमंत्री की भूमिका क्या थी और इस बार क्या रहेगी ?

भिलाई और चरोदा निगम क्षेत्र में सरकारी कर्मचारियों का कांग्रेस की गतिविधियों पर हावी होना पार्टी हित में है क्या ?

पूरब टाइम्स , भिलाई . पिछले साल जब कोरोना का संक्रमण कम हुआ था तो दुर्ग जिले के प्रशासनिक कार्यों में अचानक मुख्यमंत्री की निज सचिव टीम के सदस्य , मनीष बंछोर का हस्तक्षेप बढ़ने लगा . यह हस्तक्षेप इतना बढ़ा कि वर्षों से संघर्षरत कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के गले की हड्डी बनने लगा , विपक्ष के नेता भी उसके कार्यव्यवहार से हैरान थे . प्रशासनिक अमले के साथ , उनके कार्यों का इंस्पेक्शन करना , उन्हें निर्देशित करना व चरोदा निगम के कार्यों में अव्यवहारिक हस्तक्षेप , जन मानस की ज़ुबान पर आ गया और लोगों के द्वारा मनीष बंछोर को दिया गया नाम ‘ छोटा मुख्यमंत्री ‘ एक प्रतीकात्मक विरोध का सुर बन गया . सूत्रों के अनुसार , मनीष बंछोर द्वारा,  पिछली बार , जनवरी के अंत में हाउसिंग बोर्ड के एक कार्यक्रम में स्थानीय नेताओं को दर किनार कर , केवल अधिकारियों को मंच पर बिठाया गया और कुछ अधिकारियों के अविधिक खर्चों के कारनामों पर परदा डालने के लिये मुख्यमंत्री के पुत्र को मुख्य अतिथि बनाने का पैंतरा भी चला गया . इसके बाद निमंत्रण पत्र व कार्यक्रम में हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन की अनुपस्थिति से सब तरफ से सवाल उठने लगेथे  . कुछ समय बाद कोरोना की लहर आने के बाद अचानक अप्रेल अंत में बंद ऑक्सीजन पलांट का दौरा कर , उसके बारे में सोशल मीडिया व अखबारों में खबर देकर वापस ‘ छोटा मुख्यमंत्री ‘ वाहवाही लेते हुए दिखा . अब लोग सवाल करने लगे हैं कि क्यों पिछले 14 महीने से वह बंद ऑक्सीजन प्लांट की सुध नहीं लिये , ना ही बीएसपी की त्रुटियों की ? इस तरह की कार्यशैली प्रदेश के मुखिया की छवि खराब करती है . पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ...

मुख्यमंत्री कार्यालय का छोटा सा कर्मचारी मनीष बंछोर भिलाई और चरोदा क्षेत्र में कांग्रेस की गतिविधियों पर हावी होकर कई प्रश्न क्यों खड़े कर रहा है ?
बीएसपी का कर्मचारी मनीष बंछोर जिसे जन सामान्य ने छोटा मुख्यमंत्री का सांकेतिक नाम दे दिया है क्योंकि कांग्रेस की सभी गतिविधयों पर मुख्यमंत्री कार्यालय का यह छोटा कर्मचारी हावी होने का प्रयास करता है और यह माहौल बनाने का भरसक प्रयत्न करता है कि उसकी सहमति लेने के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय में होने वाले वाले निर्णय मोहताज रहते है . वैसे इस मामले की असलियत आगामी भिलाई और रिसाली निगम चुनाव के बाद स्पष्ट ही जायेगी क्योंकि पार्षद उम्मीदवारों को मिलने वाली टिकट घोषणा के बाद यह स्पष्ट हो जाएगा कि छोटा मुख्यमंत्री नामक कल्पना की असलियत क्या है ? लेकिन वर्तमान स्थति मे मुख्यमंत्री कार्यालय के इस छोटे से कर्मचारी से बीएसपी कर्मियों की अपेक्षाओं को जोर का झटका लगा है क्योंकि स्वास्थ्य मामलों में बीएसपी कर्मियों को बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ा और मनीष बंछोर का दिखावी ओहदा हर मोर्चे पर नाकाम ही नजर आया इसलिए मनीष बंछोर को प्रेस के सामने आकर बताना चाहिए कि उसे बीएसपी कर्मियो की व्यथा क्यों नहीं दिख रही है ?

असम चुनाव के प्रचार प्रसार में व्यस्त कांग्रेस हाई कमान तक दुर्ग जिले की लॉक डाउन वाली स्थिति को समय रहते अवगत करवाने मे देरी क्यों हुई ?
विगत वर्ष करोना वायरस संक्रमण के भयानक स्वरूप से जब पूरा हिन्दुस्तान अनभिज्ञ था और जन साधारण को इस बात को अंदाजा भी नहीं था कि कोरोना वायरस संक्रमण लोक स्वास्थ्य के साथ - साथ सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों पर पूर्ण विराम लगा सकता है . ऐसे विपरित और अनिश्चित स्थिति में भी छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में करोना वायरस संक्रमण को काबू में रखा लेकिन इस बार मामला बेकाबू हो गया . वैसे इस विपरित परिस्थितियों के असल कारण मुख्यमंत्री कार्यालय ने अधिकृत तौर पर स्पष्ट नहीं किए है लेकिन सूत्र यह संकेत दे रहे है कि निर्णायक प्राधिकारियों के निर्णयों पर चापलूस व्यवहार शैली के लोगो के अवांछित हस्तक्षेप के बाद मामला बिगड़ा और दुर्ग जिले का लोक स्वास्थ्य प्रशासनिक व्यवस्था के बाहर हो गया . लेकिन जैसे ही इस अवरोध को निकाल बाहर किया गया दुर्ग जिले के लोक स्वास्थ्य को संरक्षित करवाने के प्रभावी कदम यशस्वी होने लगे . उल्लेखनीय है कि दुर्ग जिले के लोक स्वास्थ्य की स्थिति बिगड़ने का मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय के कर्मचारी मनीष बंछोर की क्या भूमिका थी इसके लिए अधिकृत प्रतिक्रिया आने पर ही वस्तुस्थिति स्पष्ट हो पाएगी ? 

करोना वायरस संक्रमण के कारण लॉक डाउन के बाद चरोदा कुम्हारी क्षेत्र के ऑक्सीजन प्लांट का मुआयना करने वाल वीडियो कूटनीतिक था क्या ?
छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस संक्रमण का प्रकोप ने दस्तक देकर लगभग विगत चौदह महीनों से प्रदेश में अपने प्रकोप को बनाए रखा है . बावजूद इसके इन चौदह महीनों में मरीजों को लगाने वाली ऑक्सीजन व्यवस्था को बनाए रखने के मामले में राज्य सरकार कभी प्रश्नांकित नहीं हुई क्योंकि चिकित्सीय क्षेत्र के लिए लगाने वाली ऑक्सीजन व्यवस्था के लिए जिला कलेक्टर और सीएमएचओ कार्यालय अवांछित राजनैतिक हस्तक्षेप के बिना प्रशासनिक कार्यवाही सीधे करके आवश्यक व्यवस्था को बनाए रखे हुए है . लेकिन विगत दिनों मुख्यमंत्री कार्यालय के एक कर्मचारी मनीष बंछोर ने वीआईपी अंदाज में चरोदा कुम्हारी क्षेत्र के ऑक्सीजन प्लांट का दौरा किया जिसमे वरिष्ठ कांग्रेस कार्यकर्ताओं को महत्व नहीं दिया गया और किसी भी प्रकार की शासकीय घोषणा या जानकारी का आधार लेकर ,  अनाधिकृत प्रतीत होने वाली मुआयना कार्यवाही की गई .  इस वीडियो को सोशियल मीडिया पर वायरल करवाकर कई प्रश्न खड़े कर दिए. उल्लेखनीय है कि कलेक्टर व सीएमएचओं की कार्य क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लगाते हुए विपक्षियों को प्रदेश कांग्रेस के हाई कमान से यह प्रश्न पूछने का अवसर दे दिया कि क्या विगत चौदह महीनों से प्रदेश सरकार ऑक्सीजन व्यवस्था दुर्ग जिले मे बनाए रखने के मामले में जवाबदारी वाली भूमिका नहीं निभा रही थी क्या ?