Poorabtimes

जिसे सब छुपाते है उसे हम छापते है



Detail

छत्तीसगढ़ में अब पंजीकृत निजी अस्पताल नहीं लूट पाएंगे मरीजों को स्वास्थ्य मंत्री ने जारी किया बयान

15/04/2021
पूरब टाइम्स रायपुर. स्वास्थ्य विभाग ने आदेश जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि, जो निजी अस्पताल डॉ खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना और आयुष्मान योजना के तहत पंजीकृत है ऐसे निजी अस्पतालों के लिए कोरोना उपचार की दरें राज्य शासन द्वारा सुनिश्चित की गयी हैं 

किन-किन अस्पतालों पर यह आदेश लागु होगा ?

 राज्य शासन द्वारा कोविड उपचार की अनुमति प्राप्त प्राइवेट अस्पताल जो कि डॉ खूबचंद बघेल स्वास्थ्य सहायता योजना एवं आयुष्मान भारत योजना में पंजीकृत भी है, ऐसे समस्त अस्पतालों में कोविड उपचार की दर संबंधी आदेश जारी किया गया है इस आदेश के अनुसार कोविड उपचार के लिए लगाने वाले सभी प्रकार के चिकित्सा शुल्क की दर शासन द्वारा निर्धारित किये गए है.

कोविड उपचार के चिकित्सा शुल्क एक नजर में ...
स्वास्थ्य विभाग द्वारा कल जारी आदेश के अनुसार इस योजना के तहत प्रतिदिन के मान से जनरल वॉर्ड हेतु- रू 2000, एच डी यू (ऑक्सीजन के साथ) 5500 रू., आईसीयू (बिना वेंटिलेटर के) रू 7000 और आईसीयू (वेंटिलेटर के साथ)- रू 9000 रूपये निर्धारित किए गए हैं आरटी पी सी आर की दर 550 रखी गई है उल्लेखनीय है की पैकेज दर की परिभाषा एबी - पीएमजेवाई 2.0 गाइडलाइन के अनुसार होगी सीटी स्कैन की जांच पर विशेष परिस्थिति में प्रतिबंध हटाया जाता है जिससे की कोविड 19 महामारी के दौरान भर्ती मरीज को इसकी सुविधा मिल सके शासकीय आदेश में कहा गया है की ज्ञात हो कि इसके पूर्व विभाग ने 12 अप्रैल को निजी अस्पतालों में उक्त योजनाओं के तहत पंजीकृत लोगों के लिए 20 प्रतिशत बिस्तर आरक्षित करने के आदेश जारी किए थे
 स्वास्थ्य मंत्री श्री सिंहदेव ने बयान कर स्पष्ट कर दिया है की  
स्वास्थ्य मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को समय-समय पर शिकायतें मिल रही थी कि निजी चिकित्सालयों में कोविड पाजिटिव मरीज की मृत्यु हो जाने पर अस्पतालों द्वारा परिजनों से इस दुखद घड़ी में अत्यधिक राषि की मांग की जाती है इसे रोकने के लिए विभाग ने हाल ही में आदेश जारी किया था कि निजी अस्पताल ऐसे समय में हैंडलिंग, स्टोरेज और मैनेजमेंट के लिए अधिकतम केवल 2500 रूपये ले सकते है, उससे ज्यादा नही ले सकेंगे यह आदेश पूर्व में भी जारी हुआ था यह आदेश परिजनों को दुख के समय में राहत पहुंचाने के लिए जारी किया गया है और यह केवल निजी अस्पतालों पर लागू किया गया है शासकीय अस्पतालों में  इस हेतु पूर्णत: निशुल्क व्यवस्था रहती है।