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सुप्रीम कोर्ट ने फिर कहा- प्रदर्शन करने का अधिकार कहीं भी कभी भी नहीं हो सकता

13/02/2021
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन करने के अधिकार पर गंभीर टिप्पणी की है और साफ कहा है कि कोई जब चाहे तब और जहां चाहे वहां, प्रदर्शन नहीं कर सकता है। देश की शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कहा कि प्रदर्शन करने का अधिकार कहीं भी और कभी भी नहीं हो सकता। उच्चतम न्यायायल ने इसके साथ ही, पिछले साल पारित अपने आदेश की समीक्षा की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी।

पब्लिक प्लेस पर लगातार कब्जे की अनुमति नहीं

सर्वोच्च अदालत ने पिछले वर्ष अपने फैसले में कहा था कि शाहीन बाग में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों  के दौरान सार्वजनिक रास्ते पर कब्जा जमाना स्वीकार्य नहीं है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि कुछ अचानक प्रदर्शन हो सकते हैं लेकिन लंबे समय तक असहमति या प्रदर्शन के लिए सार्वजनिक स्थानों पर लगातार कब्जा नहीं किया जा सकता है जिससे दूसरे लोगों के अधिकार प्रभावित हों।

पुनर्विचार याचिका खारिज
जस्टिस संजय किशन कौल, जस्टिसअनिरूद्ध बोस और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने कहा, हमने समीक्षा याचिका और सिविल अपील पर गौर किया है और आश्वस्त हैं कि जिस आदेश की समीक्षा करने की मांग की गई है उसमें पुनर्विचार किए जाने की जरूरत नहीं है। पीठ ने हाल में फैसला पारित करते हुए कहा कि इसने पहले के न्यायिक फैसलों पर विचार किया और गौर किया कि प्रदर्शन करने और असहमति व्यक्त करने का संवैधानिक अधिकार है लेकिन उसमें कुछ कर्तव्य भी हैं।