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नेताजी बताओ, कांग्रेस की सरकार,कब आईएचएसडीपी आवास की प्रशासनिक अपेक्षाओं की सुध लेगी ?

13/02/2021

बरसों बाद कांग्रेस के हाथ लगी सत्ता क्या जन अपेक्षाओं को पूरा कर रही है ? क्या नगर निगम की अनियमितताओं पर हल्ला बोलने वाले विधायक भी मंडल अध्यक्ष पद पाकर आवाज़ खो बैठे हैं ? 

क्या कांग्रेस के राज में गरीबों तक महत्वाकांक्षी शासकीय योजनाओं का लाभ पहुंच रहा है ? क्या भाजपा कार्यकाल की अनियमितताएं ,सत्ता पाते ही नज़र से ओझल हो गयी हैं 

क्या कांग्रेस शासित नगरीय निकायों में गरीबों के लिए चलाई जाने योजनाओं की सुध लेने वाला कोई है ?  क्यों पिछले अविधिक काम करने वालों  में कोई कार्यवाही ना होने से खुशी की लहर है ? 

पूरब टाइम्स,दुर्ग। एक साल से ऊपर हो गया है  दुर्ग नगर निगम में कांग्रेस ने शहर सरकार बना ली है. एक ओर विधायक अरुण वोरा इसे अपने संघर्ष की जीत बता रहे हैं वहीं दूसरी ओर सच्चाई यह भी है कि निगम के कार्यों में . लगातार 20 साल भाजपा का वर्चस्व होने के बाद अंतिम समय में भ्रष्टाचार व मनमानी कार्यप्रणाली से त्रस्त जनता ने कांग्रेस को शहर सरकार बनाने का मौका दिया. लोगों की आशा थी कि कांग्रेस के नये महापौर आने के बाद , पुरानी शहर सरकार के काले कारनामों का चिट्ठा खोला जायेगा. परंतु महापौर धीरज बाकलीवाल ने अब पुरानी शिकायतों के लिये अपने कान में तेल डाल लिया है. एक से बड़े एक घपले, जैसे जलगृह कॉम्प्लेक्स से एक पूरी मंजिल का गायब होना व करोड़ों रुपये का अतिरिक्त, गंज मंडी कॉम्प्लेस के स्पेसिफिकेशन में बदलाव कर घोटाला करना हो या आईएचएसडीपी आवास योजना के पूरे प्रोजेक्ट स्कीम में गड़बड़ी कर उसे अपेक्षित रूप से समाप्त नहीं करना इत्यादि मामले भाजपा के कार्यकाल में उठे और कांग्रेस सरकार बनते ही उनकी जांच व दोषियों को सज़ा मिलने की आस लोगों में जाग उठी थी पर कई परिणाम आता नहीं दिख रहा है. आम लोगों में यह धारणा बनने लगी है कि विधायक अरुण वोरा की आक्रामकता व दुर्ग निगम के लिये प्रेम, उन्हें राज्य सरकार द्वारा वेयर हाउसिंग मंडल का अध्यक्ष बनाते ही उड़न छू हो गयी है. पूरब टाइम्स की एक रिपोर्ट ....

आइएचएसडीपी आवासों से नदारद है साफ-सफाई व्यवस्था और क्यों लगता है कि अवैध कब्जाधारियो को समर्पित हो गई है जनहित की यह महत्वाकांक्षी योजना 
उरला स्थित आईएचएसडीपी आवास की साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा कौन लेगा, इस प्रश्न का उत्तर जनता महापौर और स्थानीय पार्षद से लेना चाहती है. उल्लेखनीय है कि इस कॉलोनी में अमृत मिशन योजना के तहत सभी क्वाटरों में पानी पहुंचाया गया है लेकिन विडंबना यह है कि छत के ऊपर लगी कई पानी की टंकियों में अभी तक पानी की एक बूंद भी नही पहुंच पाई है. कालोनी के समस्त आवासों की अनियमित भौतिक स्थिति चीख-चीख कर स्थानीय प्रशासन से यह प्रश्न पूछ रही है कि इस आवासीय योजना के दुर्दशा कि जांच कौन सा शासकीय तंत्र कब करेगा और इस महत्वकांक्षी योजना का आवश्यक संधारण कार्य कब होगा ?
आईएचएसडीपी आवासों के आवंटन में गड़बड़ी, आबंटनधारी बेचने लगे अपना आबटन मकान मनमाने कीमतों पर , निगम ने शत प्रतिशत आवासों का कर दिया अलाटमेंट
शहर को झुग्गी मुक्त बनाने के लिए आईएचएसडीपी योजना के तहत आवास बनाए गए थे। लेकिन आबंटनधारी अपना मकान  बेचने लगे  और  किरायेदार मालिक बनने लगे हैं  नगर निगम एवं दुर्ग पुलिस क्या अपराधियों को संरक्षण के लिए यह आवास बने है? क्यों आबंटित मकान बेचना जारी है ? हर एक ब्लॉक की सुंध लेने वाला कोई नहीं।
वार्ड 58 की लचर सफाई व्यवस्था वार्ड पार्षद की नाकामी को क्या प्रमाणित नहीं करती है ?
सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए जिम्मेदार वार्ड 58 के पार्षद बृजलाल पटेल कब जनता के सामने यह स्पष्ट करेंगे कि वार्ड 58 की इस वार्ड की सफाई व्यवस्था कब जन अपेक्षाओं के अनुरूप होंगी और आधारभूत व्यवस्थाओ से वंचित वार्ड 58 को कब जन अपेक्षित व्यवस्थाओं का उपभोग करने का अवसर मिलेगा ? उल्लेखनीय है कि वर्तमान में यह वार्ड क्षेत्र के साथ-साथ  आईएचएसडीपी आवास व अन्य कॉलोनी में नाली सफाई, सड़क सफाई के लिए  जहां निगम विभाग जागरूकता अभियान चला कर एक दिखावा करता नजर तो आता है. लेकिन वास्तविकता के धरातल पर स्थिति वैसी नहीं है जैसी नियमानुसार होनी चाहिए. स्थानीय पार्षद अपने पदेन कर्तव्यों को पूरा करने में जिम्मेदारी पूर्ण कार्य नहीं कर रहा है इसलिए अनियमितताओं को अवसर मिल रहा है और स्थानीय जनता को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है. आईएचएसडीपी आवास कॉलोनी के बहुत से आवास में संधारण कार्य करना आवश्यक है लेकिन स्थानीय पार्षद अपनी इस जिम्मेदारी को पूरा करता नजर नहीं आ रहा है
निगम प्रशासन भी मूकदर्शक बनकर देख रहा है अनियमितताओं का तमाशा !
जिला मुख्यालय का नगर निगम प्रशासन, महापौर व उनके संरक्षक दुर्ग विधायक, इन दिनों अनेक अनियमितताओं का तमाशा मूकदर्शक बनकर  देखते नजर आ रहे हैं. आईएचएसडीपी आवास योजना भी इन दिनों अनियमितताओं के हवाले नजर आ रही है. निगम क्षेत्र में स्थित ग्रामीण परिवेश को तो आधारभूत सुविधाओं से भी वंचित होना पड़ रहा है जबकि शासन की योजनाओं का विस्तार इन क्षेत्रों तक करके इन अपेक्षित क्षेत्रों को भी मुख्य धारा के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है लेकिन गुटबाजी में बंटी स्थानीय कांग्रेस अभी तक सचेत नहीं दिखती है. बरसो बाद कांग्रेस के हाथ में जनता द्वारा सौंपी गई सत्ता के एवज में कांग्रेस अपनी जिम्मेदारी पूरी करने से पिछड़ती नजर आ रही है इसलिए अब देखने वाली बात यह है कि कब कांग्रेस की हाई कमान भी ऐसे मामले का संज्ञान लेगी और अनियमितताओं पर विराम लगाएगी ?