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गुस्ताखी माफ

17/09/2019

नई मोदी सरकार के पहले सौ दिन कैसे रहे, इस विषय पर पक्ष और विपक्ष में जबर्दस्त दंगल छिड़ा हुआ है, पक्ष इसे ज़बर्दस्त व अभूतपूर्व कह रहा है तो विपक्ष इसे तानाशाही ढंग से तुगलकी निर्णय लेने वाला समय बता रहा है, आप लोगों का इस बारे में क्या कहना है ? हमारे एक साथी ने यह सवाल उछाल दिया तो दूसरा साथी बोला, पिछले 100 दिन में देश ने तानाशाही, ढोंग, अराजकता और झूठे दावों का नंगा नाच देखा है . मैं तो कहूंगा कि भारत के इतिहास में आंकड़ों से छेड़छड़ करने वाली ऐसी सरकार कभी नहीं हुई. वह आगे कुछ और बोल पाता इसके पहले उसकी बात काटते हुए तीसरा साथी बोला,  तीन तलाक, कश्मीर का पूर्ण विलय, सर्वोच्च सेनापति की नियुक्ति का संकल्प इत्यादि कुछ कार्रवाइयां पिछले 100 दिन में ऐसी हुई हैं, जो पिछली कोई भी कांग्रेसी और गैर-कांग्रेसी सरकारें भी नहीं कर सकी हैं, इसके अलावा हवाई अड्डों, सड़कों और रेल-पथ निर्माण, किसानों को सीधी सहायता, स्वच्छ भारत अभियान, बैंकों का विलय, जल-सुरक्षा, ग्राम-विकास आदि ऐसे कामों में उल्लेखनीय प्रगति इस सरकार ने वैसे ही की है, जैसी कि अन्य सरकारें करती रही हैं. विदेश नीति के क्षेत्र में भारत ने अमेरिका, फ्रांस, रुस और कुछ प्रमुख मुस्लिम राष्ट्रों के साथ पिछले दिनों में इतने अच्छे संबंध बना लिये हैं कि कश्मीर के सवाल पर पाकिस्तान को उसने किनारे लगा दिया है. इन सभी सफल कामों का श्रेय इस सरकार को जरुर दिया जाना चाहिए . यह सुनकर मैं बोला, सही में , इन सफल कामों का श्रेय इस सरकार को जरुर दिया जाना चाहिए . सचमुच, अनेक कड़े निर्णय लेने की क्षमता इसके पहले किसी सरकार में नहीं दिखती थी . लेकिन इस समय आर्थिक मोर्चे पर इसकी गिरावट इतनी तेज है कि यदि अगले कुछ माह में वह नहीं संभली तो ऊपर गिनाई गई उपलब्धियों पर पानी फिरते देर नहीं लगेगी. हांलाकि सरकार भी परेशान है और वह रोज ही कुछ न कुछ नये प्रयास कर रही है ताकि देश की अर्थ-व्यवस्था पटरी पर आ जाए. अभी कश्मीर का भी ठीक से कुछ पता नहीं कि अगले दो-चार माह में वहां क्या होने वाला है ? मेरी बात सुनकर पत्रकार माधो बोले, यह सरकार काफी स्थिर है . पिछले 100 दिनों में इसका कुल रवैया काफी बहिर्मुखी रहा है और उसे इसका श्रेय भी मिला है लेकिन उससे भी ज्यादा जरुरी है- अब उसका अंतर्मुखी होना. यह ठीक है कि आज भारत में विपक्ष  अधमरा हो चुका है लेकिन यदि आर्थिक असंतोष फैल गया तो जनता ही विपक्ष की भूमिका अदा करने लग सकती है.