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खुद की ज़मीन के सत्यापन के लिये पटवारी कार्यालय के चक्कर लगाते हुए लोग हैरान , बिना घूस के नहीं होता काम

03/02/2021
अलग अलग समय के सीमांकन में एक ही ज़मीन की स्थिति बदल जाती है , ज़मीन मालिक को सामना करना पड़ता है कानून का , राजस्व कर्मचारी पर ज़ुर्म दर्ज़ नहीं 

पटवारी के कार्यालय में नहीं है कम्प्यूटर , रिकॉर्ड देखने व प्रिंट आउट के लिये,पटवारी कार्यालय के पास के चॉइस सेंटर जाना पड़ता है  

राजस्व विभाग की मनमानी से परेशान ज़मीन मालिक को पुलिस प्रताड़ना का सामना भी करना पड़ता है ,राजस्व विभाग की अस्पष्टता के अनेक प्रकरण में थानेदार एफआईआर दर्ज़ कर देते हैं 

पूरब टाइम्स , रायपुर . बचपन में सुना था कि किसी ठग ने दिल्ली का कुतुब मींनार तक बेच दिया था . अब समझ आया कि यदि राजस्व विभाग से किसी प्रॉपर्टी के स्वामित्व के कागज़ मिल जाये तो उसकी रजिस्ट्री हो सकती है . हो सकता है कुतुब मीनार के केस में राजस्व से मिला कागज़ पूरी तरह से फर्ज़ी व नक़ली हो परंतु अभी भी राजस्व विभाग के कर्मचारी की मिलीभगत के तैयार फर्ज़ी कागज़ के आधार पर रजिस्ट्री होने की अनेक खबरें मिलती रहती हैं . इसके अलावा रजिस्ट्री कराने के लिये पुराने ज़मीन मालिक को या रजिस्ट्री कराने के बाद नये ज़मीन मालिक को ज़मीन के सीमांकन , बटंकन व नामांतरण के लिये भारी परेशानी होने लगी है. सूत्रों के अनुसार इस कार्य के लिये राजस्व विभाग के पटवारी , आरआई व अधिकारी लाखों रुपये की मांग करने लगे हैं . राअजय शासन व उच्चाधिकारी इस अविधिक कार्यशाइली पर अंकुध लगाने में असफल दिखाई देने लगे हैं . पूरब टाइम्स की खबर( भाग- 2 ) 

क्या है ऑन लाइन ‘ भुइयां ‘ जिसे छत्तीसगढ़ शासन अपनी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मानता है 
छत्तीसगढ़ की राज्य सरकार ने ऐसे फर्ज़ीवाड़े रोकने के लिये ‘ भुइयां ‘ नाम से वेब पोर्टल बनाया है जिसमें ऑन लाइन राजस्व रिकॉर्डस्‌ हैं . इसमें छत्तीसगढ़ के राजस्व मंडल के किसी भी शहर के , किसी भी ग्राम के , किसी भी पटवारी हलके के,  किसी भी खसरे नंबर के  वास्तविक मालिक का नाम , ज़मीन का रकबा व उस ज़मीन का नक़्शा देखा जा सकता है . देखा जाये तो समस्त रिकॉर्ड्स को दुरुस्त करने की ज़िम्मेदारी सरकार ने अपने राजस्व व कम्प्यूटर विभाग को दी थी परंतु अनेक ग्राम के अनेक रिकॉर्ड्स दुरुस्त नहीं हो पाये . कई जगह रिकॉर्ड्स की अस्पष्टता के कारण तो कई जगह पर भूमि स्वामी के द्वारा कराई गई रजिस्ट्री की अस्पष्टता के कारण . ऐसी स्थिति में कई बार किसी किसी खसरे के रिकॉर्ड भुइयां साइट पर चढ़े हुए नहीं हैं तो कई बार पुराने भू स्वामी के नाम से ही खसरे को दिखाया गया है . इसके अलावा अनेक प्रकरण में कम्प्यूटर ऑपरेटर के द्वारा एंट्री गलत होने से भी गलतियां हो गईं हैं . इन सब गलतियों के बावजूद , वृहद पैमाने में , सचमुच , यह वेब साइट छत्तीसगढ़ में गूमि स्वामियों के लिये एक वरदान साबित हो रहा है .

राजस्व विभाग में क्यों चल रहा है लाखों रुपये घूसखोरी का खेल , क्यों हैं दलाल सक्रिय 

जब किसी को भी अपनी ज़मीन के बारे में दुरुस्त रिकॉर्ड की जानकारी चाहिये होती है तो ‘ भुइयां’ में दर्ज रिकॉर्डस्‌ को प्रमाणिक माना जा रहा है .अब जिस वास्तविक भू स्वामी की ज़मीन का रिकॉर्ड भुइयां में सही नहीं है , उसे दुरुस्त करवाने के लिये नियमानुसार आवेदन कागज़ लगाकर , राजस्व के अधिकारी से पुष्टि करवाना पड़ता है तब रिकॉर्ड दुरुस्त किया जाता है . इस कार्य करने के लिये राजस्व विभाग के कर्मचारी व अधिकारी ज़मीन के मालिक को ठीक से समय नहीं देते हैं और इतने चक्कर लगवाते हैं कि वह घोर निराशा में आ जाता है. तभी उससे दलाल संपर्क कर उसके कार्य को करवाने के लिये बातचीत करते हैं और घूस सहित खर्च बताते हैं . महीनों , सालों अपने रिकॉर्ड को दुरुस्त नहीं करवा पाया भूमि स्वामी , थक हार कर लाखों रुपये देने के लिये मजबूर हो जाता है . आजकल यह भी प्रचलन में है कि राजस्व अधिकारी , भूमि स्वामि को आश्वासन व तारीख पर तारीख देता है , भूमि स्वामी द्वारा किसी डिमांड के बारे में पूछने पर साफ इनकार कर देता है , कई बार गुस्सा भी दिखाता है . वही राजस्व अधिकारी दलाल के द्वारा पैसों का लेन देन करता है ताकि किसीभी प्रकार की शिकायत में सीधे ना पकड़ा जाये. इन्हीं कारणों से आजकल हर पटवारी , आरआई , नायब तहसीलदार व तहसीलदार के सबसे निकटस्थ , कुछ दलाल बताये जाते हैं .

भ्रष्ट पटवारियों , आरआई व राजस्व अधिकारियों के हौसले बुलंद क्यों हैं ?

अनेक वर्षों से घूसखोरी कर करोड़ों रुपये की संपदा बाना लेने वाले राजस्व विभाग के कर्मचारियों की , उच्चाधिकारियों द्वारा अचानक से स्वतः संज्ञान लेकर जांच नहीं की जाती हैं . यदि किसी की कार्यशैली को लेकर मंत्री से लेकर सचिव तक स्तर के उच्चतम स्तर के व्यक्तियों द्वारा उन पर कार्यवाही की अनुशंसा की जाती है तो उनके यूनियन द्वारा ज्ञापन , हड़ताल व दबाव निर्मित किया जाता है जिससे दंडात्मक कार्यवाही ठंडे बस्ते में चली जाती है . केवल उन्हीं लोगों पर कार्यवाही होती है जो सीधे –सीधे घूस मांगते या लेते हुए पकड़ा जाते हैं . इस कारण से आजकल वे सीधे घूस लेने की जगह दलालों के मारफत भ्रष्टाचार करते हैं . यदि प्रदेश सरकार व राजस्व विभाग के उच्चतम पद पर आसीन अधिकारी , इच्छाशक्ति से कड़ी नज़र रखे तो राजस्व विभाग की आर्थिक गड़बड़ियों को न्यूनतम स्तर पर ला सकती है . ( खबर तीसरे अंक में ज़ारी रहेगी )